शनिवार, 10 जुलाई 2010

पत्रिका के लिए पत्रकारों में भगदड़

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में फिर एक बड़े व नामी ग्रुप ने अखबार के प्रकाशन का निर्णय लिया है। अखबार पढ़ने वालों के लिए राजस्थान पत्रिका कोई नया नाम नहीं है। इसके आने की खबर तो महिनों से चल रही थी लेकिन अब जब नौकरी पर लोग रखे जाने लगे तब पत्रकारों को भरोसा हो गया कि पत्रिका अब आ ही जाएगी। पत्रिका से जुड़े लोगों को एक अच्छी टीम की तलाश है। इसका फायदा पत्रकारों ने उठाना भी शुरू कर दिया है। जमकर सौदेबाजी चल रही है वहीं अन्य अखबार के संपादक व मालिक भी सक्रिय हैं कि उनके लोग न जाए इसलिए पत्रकारों की अपने ही प्रेस में पूछ परख बढ़ गई है।
नवीन पहुंचे हरिभूमि
सालों से भास्कर में काम करने वाले नवीन शर्मा का भास्कर से मोह भंग हो गया वह अपने साथियों के साथ नेशनल लुक में जाने की बजाय हरिभूमि वाईन कर लिया। कहते हैं ग्रुप के अखबार बंद नहीं होंगे और लुक क्या ठीकाना है।
राजेश दुबे पत्रिका में
देशबंधु में जलवा दिखाने के बाद नई दुनिया में उपेक्षित रहे राजेश दुबे की पत्रिका वाईन करने की खबर है। खबर तो यहां के जबरदस्त तोड़फोड़ की भी है अब संपादक की गलती है कि मालिक की यह तो चर्चा का विषय है।
मोहन बने चीफ
चीफ की तरह शहर में चर्चित रहे पत्रकार मोहन राव को नवभारत में सिटी चीफ बना दिया गया है। अर्से से तबियत खराब होने की वजह से वे यादा भाग दौड़ नहीं कर पा रहे थे।
और अंत में....
मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले जनसंपर्क के अधिकारी ने मौखिक रुप से फरमान जारी कर दिया है कि खबरों पर नजर रखें और अखबार के मैनेजमेंट को हड़का के रखों। विभाग की खबरें छपने वाली नहीं तो खाओ-पियों मजे करो।

शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

डॉ रमन की मां की तस्वीर वाली हनुमान चालीसा भी वितरित...

पैसे व पद वाले ही करते हैं धर्म का अनादर
इतिहास गवाह है कि हिन्दू धर्म का अपमान जितना दूसरे धर्म के लोगों ने नहीं किया उससे यादा वे हिन्दू जो धनाडय व सत्ता मद में बैठे हैं, ने हिन्दूत्व का अपमान किया है। गीता के बाद हनुमान चालीसा में भी लोग अपने परिजनों का तस्वीर लगाकर बांट रहे हैं और यह काम प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह के द्वारा भी किए जाने की खबर है।
श्री भागवत गीता में स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर लगाकर इसे वितरित किए जाने पर धर्मग्रंथ का अपमान बताया जा रहा है और राजधानी ही नहीं बाहर के भी पुजारियों ने इस तरह के कृत्य को पाप माना है। श्री गीता की खबर छपते ही हमें लोगों ने हनुमान चालीसा लाकर दी जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की मां स्व. श्रीमती सुधा देवी सिंह की तस्वीर लगाई गई थी। इस हनुमान चालीसा को हमें देने वालों का दावा है कि श्री गीता में तस्वीर लगाने की बात तो कई लोगों को पता है लेकिन हनुमान चालीसा में इस तरह से तस्वीर लगाकर वितरित करने का यह पहला मामला है।
वैसे धर्म के मान्य परंपरा के अनुसार एक समय था जब श्री हनुमान जी के मंदिर में महिलाएं प्रवेश करने से हिचकिचाती थी और आज भी इस देश में कई ऐसे मंदिर हैं जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। हालांकि हनुमान चालीसा आयोजन समिति ने महिलाओं के हनुमान चालीसा पाठ पर प्रतिबंध को गलत बताया है। समिति का कहना है कि शास्त्रों में कहीं उल्लेख नहीं है इसलिए महिलाएं श्री हनुमान मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं।
दूसरी तरफ धर्मग्रंथों को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं और यह चर्चा का विषय है कि धर्म ग्रंथों का उपयोग आदमी अपने लिए किस तरह से कर सकता है। वर्तमान पीढ़ी में धर्मग्रंथों पर तस्वीर लगाने को लेकर पूरे देश में बहस किए जाने की जरूरत भी बताई जा रही है और इसी तरह से तस्वीर लगाकर धर्मग्रंथ वितरित किए जाने लगे तो धर्मग्रंथ के महत्व को लेकर भी बहस छिड़ सकती है। केवल हिन्दू धर्म ग्रंथों में ही इस तरह की छेड़छाड़ होने लगी है वह भी उन हिन्दूओं द्वारा जो या तो पैसे वाले हैं या उच्च पदों पर बैठे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस तरह के कार्य कितने उचित है।
हालांकि इस तरह के मामले में हिन्दू संगठनों की खामोशी आश्चर्यजनक है और अब तो उनके नियत पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या वे सिर्फ राजनैतिक फायदे के लिए हिन्दूत्व का इस्तेमाल करते हैं।

कहां हो मिस्टर मूणत...! फिर अवैध प्लांटिग हो रही है

मार्स कालोनाईजर का कारनामा!
अवैध प्लाटिंग के खिलाफ अभियान छेड़कर चर्चा में रहे नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत के नाक के नीचे बकायदा विज्ञापन निकालकर मास कालोनाईजर प्राईवेट लिमिटेड ने न केवल लोगों को धोखे में रखकर प्लाट बेच दी बल्कि उपर तक पैसा पहुंचाने का दावा करते शहर में घूम भी रहे हैं।
राजधानी के आसपास की जमीनों पर अवैध प्लाटिंग को लेकर राजेश मूणत ने न केवल अभियान चलाया था बल्कि कई परिवारों को छले जाने से भी बचाया था लेकिन कमल विहार योजना और गंज डबरी में मॉल बनाने के फेर में लगी सरकार की उदासीनता को लेकर फिर कई कालोनाईजरों ने अपने पैर पसारना शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक ताजा मामला मास कालोईनजर चला रहे आहूजा बंधुओं का है। मुजगहन में फेस टू बनाने के फेर में लगे आहूजा बंधुओं ने यहां बगैर ले आऊट पास किए साढ़े चार सौ रुपए फीट में प्लाट बेच दी वह भी बकायदा विज्ञापन निकालकर। प्लाट बेचने के मामले में ग्राहकों से धोखाधड़ी की चर्चा अब आम होने लगी है और प्लाट खरीदने वाले अब पछताने भी लगे हैं। यही नहीं टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से प्लाट स्वीकृत कराने भी घपलेबाजी की खबर है।
बताया जाता है कि इसकी शिकायत नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत से भी की गई है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि हमने इस मामले में सौदेबाजी की सच्चाई जानने मंत्री जी से फोन पर चर्चा करना चाहा लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। बहरहाल प्लेनेट सीटी के नाम पर लोगों को छले जाने और नगरीय निकाय मंत्री की भूमिका को लेकर कई तरह की चर्चा है और देखना है कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।

बुधवार, 7 जुलाई 2010

चापलूस पुलिसिये दूसरे विभाग में फिर कमी का रोना क्यों...?

एक तरफ छत्तीसगढ़ पुलिस में अफसरों की कमी का रोना रोया जा रहा है वहीं आधा दर्जन पुलिस अफसर दूसरे विभाग के मालदार विभाग में मलाई खाने में व्यस्त है। ऐसे में सरकार का कमी का रोना उसकी मानसिकता को ही प्रदर्शित करता है।
छत्तीसगढ़ में अफसर राज किस कदर हावी है यह किसी से छिपा नहीं है। गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने पहले ही एसपी को निकम्मा और कलेक्टर को दलाल कह कर पोल खोल चुके हैं ऊपर से जी हुजूरी और महिना पहुंचाने वाले पुलिस अफसर अन्य विभाग के मलाईदार पदों पर बैठकर चापलूसी की सारी सीमाएं लांघने में लगे हैं।
हाल ही में सरकार के तरफ से यह बयान आया कि पुलिस विभाग में अफसरों की कमी है आश्चर्य का विषय तो यह है कि जब पुलिस विभाग में अफसरों की कमी है तब इस विभाग के आधा दर्जन अफसरों को सरकार दूसरे विभाग में बिठाकर क्यों रखी है उन्हें मूल विभाग में वापस क्यों नहीं बुला लेती। सूत्रों का दावा है कि मलाईदार विभाग में अपने खास अफसरों को बिठाकर अपनी जेबें भरने की रणनीति के तहत ही प्रतिनियुक्ति का खेल खेला जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन पुलिस अफसरों को दूसरे विभाग में बिठाया गया हैं उनमें मुख्य रुप से राजीव श्रीवास्तव को संस्कृति विभाग में आर.पी. सिंग को खेल में अजात बहादुर शत्रु को परिवहन में बीएस मरावी मुख्य रुप से शामिल है। बहरहाल पुलिस अफसरों की कमी का रोना रोने को लेकर सरकार की यह नीति आश्चर्यजनक है और इसे लेकर आम लोगों में तीखी प्रतिक्रिया है।

मंगलवार, 6 जुलाई 2010

छापा पड़ा तो अखबार ने दुश्मनी भंजा ली...

तब विज्ञापन नहीं दिए अब भुगतो
शहर के एक प्रतिष्ठित दैनिक ने आयकर विभाग द्वारा की गई छापे की कार्रवाई की आड़ में जमकर दुश्मनी भुनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भारत को नया बनाने के चक्कर में लगे इस अखबार पर प्लांटेशन की आड़ में आम लोगों का करोड़ों रुपए हजम कर लेने का भी आरोप है।
छत्तीसगढ़ में व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा ने अखबारों का स्तर किस हद तक गिरा दिया है और मैनेजमेंट किस हद तक हावी है इसका उदाहरण हाल ही में बिल्डरों के खिलाफ आयकर विभाग द्वारा मारे गए छापों की खबरों से देखा जा सकता है। अखबार बेचने सनसनीखेज खबरें बनाने का आरोप तो मीडिया पर लगता ही रहा है लेकिन दुश्मनी भुनाने भ्रामक खबरें छापने की नई परम्परा भी शुरू हो गई है।
बताया जाता है कि आयकर विभाग ने भाजपा नेताओं के आरती बिल्डकान, कांग्रेस के अविनाश बिल्डर्स, अटलानी और रहेजा ग्रुप पर छापे की कार्रवाई की गई लेकिन इस छापे में भाजपा की सत्ता होने की वजह से राजीव अग्रवाल और छगन मूंदड़ा सर्वाधिक चर्चा में आए। बताया जाता है कि आम लोगों में अपनी विश्वसनियता की आड़ में एक अखबार ने आरती बिल्डकॉन के खिलाफ इसलिए अभियान छेड़ दिया क्योंकि इसने कभी इस अखबार पर विज्ञापन का रिस्पांस नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पैकेज में विज्ञापन देने से मना कर दिया और इसके प्रतिद्वंदी अखबार को विज्ञापन दिया।
खबरों को भ्रामक बनाते हुए आरती बिल्डकॉन के खिलाफ जमकर खबर प्रकाशित की गई और खबरें इस तरह बनाई गई कि लाकर जो मिले वो इन्ही ग्रुप के मिले। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक आरती बिल्डकॉन से केवल 1 लाकर मिला वह भी छगन मूंदड़ा के मां के नाम पर बैंक आफ बड़ौंदा का है छगन मूंदड़ा से 5 लाख केस बरामद हुआ जबकि यहां सोना नहीं मिला राजीव अग्रवाल से न कोई लाकर बरामद हुआ और न ही नगद रकम ही जब्त की गई। 700 ग्राम सोना जरूर जब्त हुआ वह भी बिस्किट की शक्ल में होने की वजह से। बताया जाता है कि बिल्डरों ने भारी रकम आयकर विभाग में सरेंडर की है और इस मामले में अभी भी कार्रवाई चल रही है।
हमारे सूत्रों के मुताबिक आरती बिल्डकॉन के खिलाफ किसी विमल के द्वारा लगातार की गई शिकायत पर कार्रवाई हुई और इस कार्रवाई में विमल के पार्टनर भी चपेट में आ गए। इधर कांग्रेस और भाजपा में भी यह मामला गर्म होता जा रहा है और दोनों ही दलों में इन बिल्डरों के विरोधी इन्हें पार्टी से निकालने में सक्रिय हो गए हैं।
बहरहाल छापे की कार्रवाई और इसके बाद छपी खबरों ने विज्ञापन की लालच में फंसे अखबार की प्रतिष्ठा पर आंच पहुंचाई है। कहा जाता है कि इस अखबार ने पार्षद चुनाव में भी पैकेज को लेकर महापौर किरणमयी नायक, सभापति संजय श्रीवास्तव और भाजपा प्रत्याशी विनोद अग्रवाल को भी परेशान कर चुके हैं।
मुसिबत के लिए रखे पैसे
ने मुसीबत बढ़ाई

बिल्डरों के यहां पड़े छापे में उन बिल्डरों की मुसीबत बढ़ा दी है जहां मोटी रकम बरामद हुई है। बताया जाता है कि पति से छिपा कर पैसा रखने की महिलाओं की प्रवृत्ति की वजह से बिल्डरों के घरों में मोटी रकम बरामद हुई। ऐसे ही एक बिल्डर की पत्नी ने कहा कि वे इसलिए थोड़ा-थोड़ा पैसा छिपाकर इकट्ठा रखती थी ताकि मुसीबत या अचानक जरूरत के समय काम आ सके लेकिन आयकर वालों की नजरों से ये पैसे नहीं बच सके।

सोमवार, 5 जुलाई 2010

मोहन की बांसुरी का सूर बेसुरा हुआ



चौतरफा भ्रष्टाचार से भाजपाई नाराज, सुषमा से शिकायत
हाय-हलो स्टाईल से आम लोगों की नजर में चढ़े प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग में बड़े पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार और विवादास्पद अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर आम लोगों में जबरदस्त चर्चा है और कहा जा रहा है कि बृजमोहन अग्रवाल के विभागों में चल रहे घपलेबाजी की शिकायत महंगाई वाले धरने में पहुंची वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज से भी की गई है।
आम लोगों में मिलनसार की छवि की वजह से रायपुर ही नहीं प्रदेश में दमदारी से नेतागिरी करने वाले बृजमोहन अग्रवाल से इन दिनों उनके दक्षिण विधानसभा के लोग ही नाराज होने लगे हैं। कहा जाता है कि पुराने समर्थक जहां घर बैठ गए हैं वही नए समर्थक भी किसी राजेन्द्र व प्रकाश नामक व्यक्ति की दलाली से परेशान हैं। संतोषी नगर में हुई तोड़फोड़ से लेकर आपराधिक लोगों के जमावड़े को लेकर उनके खिलाफ जबरदस्त आक्रोश पनपने लगा है और उनके विभाग में चल रहे घपलेबाजी ने रही सही कसर भी पूरी कर दी है।
सूत्रों की माने तो भ्रष्टाचार की वजह से पार्टी की खराब होती छवि को लेकर भाजपा के कुछ वरिष्ठ लोगों ने श्रीमती सुषमा स्वराज को बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत करते हुए गोदिंया से लेकर छत्तीसगढ़ तक की न केवल कहानी सुनाई है बल्कि कुछ दस्तावेज भी दिए हैं यही नहीं शिक्षा, पीडब्ल्यूडी, पर्यटन व संस्कृति में विवादास्पद नियुक्तियों व विवादास्पद अधिकारियों को संरक्षण दिए जाने का आरोप लगाते हुए दस्तावेज श्रीमती स्वराज को सौंपे गए हैं। बताया जाता है कि श्रीमती स्वराज ने शिकायकर्ताओं को कार्रवाई का न केवल आश्वासन दिया है बल्कि मुख्यमंत्री से चर्चा करने की भी बात कही है।
हमारे सूत्रों के मुताबिक श्रीमती स्वराज को किए गए शिकायत में जमीन कारोबार के अलावा पर्यटन के अधिकारी एमजी श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, शिक्षा विभाग के मैडम तवारिस, मैडम आर. बाम्बरा, संस्कृति विभाग और पीडब्ल्यूडी विभाग के कुछ विवादास्पद अधिकारियों को मंत्री द्वारा संरक्षण दिए जाने का आरोप लगाया गया है। यहीं नहीं पीडब्ल्यूडी के सड़क व भवन निर्माण में बढ़ती कमीशन को लेकर भी सबूत दिए जाने की चर्चा है। कहा जाता है कि बिलासपुर के किसी राजेन्द्र व कवर्धा के किसी प्रकाश के द्वारा दलाली करने की शिकायत करते हुए शिकायकर्ताओं ने यहां तक कहा है कि कांग्रेसियों को यादा महत्व दिया जा रहा है।
बहरहाल बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ की गई शिकायत पर क्या कार्रवाई होगी यह तो बाद में पता चलेगा लेकिन दक्षिण विधानसभा ही नहीं राजधानी में इस मामले की जबरदस्त चर्चा है।

रविवार, 4 जुलाई 2010

महंगाई की मार

छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में तमाम विपक्ष मंहगाई को लेकर हो हल्ला मचा रहे हैं केन्द्र सरकार ने पेट्रोल डीजल केरोसीन और घरेलू गैस से यह कहते हुए सब्सिडी हटा दी कि यह सरकार के लिए बोझ है और यूपीए को छोड़ तमाम राजनैतिक दल मंहगाई के खिलाफ ऐसे कूद पड़े हैं मानों वे मैदान ए जंग में उतर आए हैं।
मंहगाई लगातार बढ़ रही है अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब नारकीय जीवन जीने मजबूर हैं। ऐसे में राजनैतिक दल महंगाई को लेकर सजग हैं यह एक अच्छी बात है लेकिन सवाल यह है कि क्या मंहगाई बढ़ने की वजह सिर्फ पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृध्दि है। यदि सरकार के लिए सब्सिडी बोझ है तो फिर जनता के लिए टैक्स बोझ है तब सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों पर कोई टैक्स नहीं लेना चाहिए। देश में ऐसे कई राय हैं जहां यूपीए के विरोधी राजनैतिक दलों की सरकार है यदि यूपीए महंगाई के लिए दोषी है तब वे राय सरकार आम लोगों से पेट्रोलियम पदार्थ पर टैक्स क्यों ले रही है।
दरअसल इस देश में नेताओं और अधिकारियों ने पूंजीवादी व्यवस्था की गोद में बैठकर ऐसे निर्णय लेना शुरू किया है ताकि गरीब और मध्यम वर्ग अपनी पेट परिवार की चिंता में लगे रहे और एक कुलीन व धनाडय वर्ग मजा करता रहे। महंगाई बढ़ने के पीछे सिर्फ पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृध्दि दोषी नहीं है। महंगाई बढ़ने की वजह सरकार की पेंशन नीति है, सांसदों विधायकों के वेतन में किए जा रहे लगातार बढ़ोत्तरी है जिन पर सीधे जनता का हक है और अधोसंरचना के नाम पर जनता के पैसों को भ्रष्टाचार कर सीधे जेब में रखने की प्रवृत्ति हैं।
महंगाई किसके लिए है। यदि महंगाई की इतनी चिंता नेताओं को है तो जिन नेताओं के पास अथाह पैसे हैं वे सरकारी वेतन भत्ता व अन्य सुविधा लेना बंद क्यों नहीं करते। क्या इस देश में महंगाई पर चिंता व्यक्त करने वाली सोनिया गांधी हो या लालकृष्ण आडवानी हो इनका गुजारा क्या सरकारी वेतन व अन्य सुविधाओं पर निर्भर है तब इस देश की खातिर वे सरकारी वेतन भत्ते नहीं लेने की घोषणा कर आदर्श राजनीति व अपना देश सेवा को नए सिरे से परिभाषित क्यों नहीं करते। देश व उसकी जनता की सेवा के बदले वेतन लेने वालों को दरअसल महंगाई की नहीं स्वयं की राजनीति की चिंता है। देश में राहुल गांधी, नवीन जिंदल से लेकर ऐसे कई सांसद हैं जिन्हें आगे आकर अपना वेतन नहीं लेने की घोषणा करनी चाहिए तभी अंधेरगर्दी खत्म होगी।