रविवार, 1 अगस्त 2010

शाबास,नारी शक्ति की जय हो













एक बार फिर नारी शक्ति ने साबित कर दिया कि उनका कोई मुकाबला नहीं.टिकरापारा कि महिलाओ ने शराब ठेकेदारों को भागने मजबूर कर दिया .आज इसी तरह कि कार्रवाई कि जरुरत है .

भाजपाई गुण्डागर्दी से त्रस्त हैं कई लोग...

भाजपा के ब्लाक महामंत्री प्रीतम सिंहा पर पाण्डुका सब डिवीजन जल संसाधन विभाग के जल उपभोक्ता समिति के लोगों ने डरा धमका कर पैसे वसूलने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
प्रेस क्लब रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में दिलीप साहू, हरिशचंद्र शर्मा, पोखन साहू, महेन्द्र साहू, पुष्कर तिवारी, शिवकुमार साहू और पवन साहू ने जिस तरह से भाजपा नेता के खिलाफ आरोप लगाए है वह भाजपा पदाधिकारियों के सत्ता मद में चूर होने का उदाहरण है। कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर सत्ता के दम पर भाजपा के नेता गुण्डागर्दी पर उतारू है और पार्टी भी ऐसे लोगों के खिलाफ शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं करती है। इस संबंध में जब प्रीतम सिंहा से संपर्क की कोशिश की गई तो वे उपलब्ध नहीं हुए। इधर पीड़ित दिलीप साहू व अन्य लोगों ने लिखित में बताया कि हम पाण्डुका का सबडिवीजन जल संसाधन विभाग के जल उपभोक्ता समिति में है। भाजपा के ब्लॉक महामंत्री (छुरा), प्रीतम सिन्हा के कारनामों से काफी परेशानी है। वह साइड में आकर पैसे की मांग करता है और इसके अलावा सूचना के अधिकार के तहत आवेदन लगाकर हम लोगों को ब्लैक मेलिंग करता है। तौरेंगा जल उपभोक्ता समिति के अध्यक्ष दिलीप साहू को धमका-चमका कर 19 अप्रैल को 10 हजार रुपए ले लिया उसके बाद ही 20 हजार रुपए की मांग और करने लगा है। इसी तरह हरीशचंद्र नामक टाईम कीपर से 10 हजार रुपए धमकाकर ले लिया कि तुम्हारा ट्रांसफर लिस्ट में नाम है। इसी तरह वह कई जगहों पर सूचना के अधिकार लगाकर धमकी चमकी देकर पैसा की उगाही कर रहा है। जिसकी शिकायत सांसद चन्दूलाल साहू, भाजपा नेता संतोष उपाध्याय संगठन के रामप्रताप सिंह एवं स्थानीय पत्रकारों से भी की गई है। ऐसे नेता के कारण काम करने में हम लोग असमर्थ है इस नेता की वजह से 15 करोड़ रुपए की राशि शासन की वापिस चली गई है।

पूर्व विधानसभाध्यक्ष की बिटिया ही प्रताड़ित है सरकार से


सचिव देवेन्द्र वर्मा पर कई आरोप
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल ने ये भी कभी नहीं सोचा था कि जिस व्यक्ति को वे छत्तीसगढ़ के हित लिए रोक रहे है वहीं उनकी बिटिया की उन्नति के मार्ग में बाधक बनेंगे। मामला विनिता बाजपेयी का है जो विधानसभा अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री तक के चक्कर लगा चुकी है और इस मामले में कांग्रेसियों की चुप्पी भी आश्चर्यजनक है।
प्रदेश की सर्वोच्च संस्था विधानसभा के सचिवालय में जो कुछ चल रहा है वह सरकार की मंशा को दर्शाने के लिए काफी है। वैसे भी इस प्रदेश में बैठी सरकार की करतूतें कम नहीं है जिन अधिकारियों को जेल या फिर प्रदेश से बाहर होना चाहिए उन्हें क्रीम व कमाऊ पद पर बैठा दिया गया है। जबकि ये तीनों मध्यप्रदेश कैडेर के अधिकारी है।
विधानसभा सचिवालय में भी यही सब हो रहा है। कानून को खुंटे में टांगकर जिस तरह से मनमानी की जा रही है उससे कई तरह के सवाल ही नहीं उठ रहे है बल्कि इसकी गरिमा को भी ठेस पहुंची है। देवेन्द्र वर्मा किस तरह से छत्तीसगढ़ में जमें हुए हैं इसकी एक अलग ही कहानी है लेकिन विधानसभा सचिवालय की मनमानी से प्रताड़ित विनिता बाजपेयी इन दिनों अपने साथ हुए अन्याय के लिए सरकार से लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं तक का चक्कर लगा चुकी है।
यह विनिता बाजपेयी सिर्फ विधानसभा सचिवालय की अधिकारी होती तब भी कांग्रेसियों की चुप्पी जायज नहीं थी लेकिन वह विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल की बिटिया है जिन्होंने कांग्रेस के लिए अपना जीवन होम कर दिया ऐसे स्वर्गवासी श्री शुक्ल की बिटिया के साथ किए जा रहे अन्याय पर भी कांग्रेसियों की खामोशी आश्चर्यजनक है।
दरअसल विवाद सचिवालय द्वारा जारी पदोन्नति सूची से शुरु हुआ। श्रीमती विनिता वाजपेयी 2001 में अनुसंधान अधिकारी एवं उसके समकक्ष अवर सचिव के पद पर कार्यरत थी और जब पदोन्नति आदेश निकला तो उनका नाम तो आदेश में था लेकिन न तो पद में और न ही वेतन में ही ईजाफा किया गया। इतिहास का यह पहला मामला होगा जब प्रमोशन तो दिया गया लेकिन पद और वेतनमान जस का तस रहा। जबकि छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय सेवा भर्ती एवं सेवा शतर्ें अधिनियम 1981 के नियम 4 (3) में स्पष्ट उल्लेख है कि उपसचिव के पद पर पदोन्नति अवर सचिव कैडर या अनुसंधान अधिकारी कैडर से दिए जाएंगे।
यहीं नहीं सचिवालय की मनमानी और भर्राशाही का यह नमूना है कि देवेन्द्र वर्मा जब अनुसंधान अधिकारी से पदोन्नति किए गए तो उन्हें उपसचिव बनाया गया जबकि विनिता वाजपेयी के साथ ऐसा नहीं हुआ। यही नहीं सरकार की इससे बड़ी प्रताड़ना और क्या होगी कि श्रीमती बाजपेयी को अपने से कनिष्ठ आर.के. अग्रवाल और दिनेश शर्मा से नीचे काम करना पड़ रहा है। जबकि दिनेश शर्मा को अवर सचिव पद पर बने हुए पांच साल भी नहीं हुए है। फिर भी इनका प्रमोशन कर दिया गया।
ऐसा भी नहीं है कि विधानसभा में चल रहे इस भर्राशाही और मनमानी की जानकारी प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस को नहीं है लेकिन आश्चर्यजनक रुप से कांग्रेसियों ने चुप्पी ओढ़ ली है ऐसे में मामला श्रीमती सोनिया गांधी तक पहुंची तो नेता प्रतिपक्ष सहित कांग्रेसियों की क्या स्थिति होगी अंदाजा लगाया जा सकता है। बहरहाल विधानसभा सचिवालय में चल रहे इस खेल पर सरकार की खामोशी उन्हीं पर भारी पड़ सकती है। कयोंकि आम लोगों में चर्चा का विषय बन रहे सचिवालय की करतूत से सरकार की छवि पर भी विपरीत असर पड़ेगा।

शनिवार, 31 जुलाई 2010

हकीकत के पीछे का सच

इन दिनों शहर के प्रतिष्ठित अखबारों के कर्मचारियों में कालम राईटर बनने की होड़ मची हुई है। ऐसा ही एक कर्मचारी इन दिनों कालम लिखने लगे हैं। सूर्या का वॉट लगाकर हकीकत का चोला पहनने वाले की हकीकत अब राजधानी में भी चर्चा का सबब बनने लगी है। गबन तो नाम के अनुरूप ही सब कर रहे थे लेकिन धमकाकर पैसा वसूलने और विज्ञापन छपवाने मजबूर करने की कहानी को अब तक इसके मालिकों ने क्यों नहीं सुनी। यह तो वही जाने। लेकिन यह चर्चा जोरों पर है कि दूध देने वाली गाय की लात भी अच्छी लगती है। इस बीच इसके द्वारा रायपुर संस्करण को ठेका में लिए जाने का दावा है हकीकत तो मालिक ही जाने।
फिर रिपोर्टर फायदे में फोटोग्राफरों में असंतोष
सलीम अशरफी ने वक्फ बोर्ड का चेयरमेन बनाते ही ख़ुशी मनाई और कवरेज के लिए पहुंचे मिडिया कर्मियों को पांच-पांच सौ दिए फोटोग्राफर खुश थे किचलो कोई तो है जो दोनों को सामान समझता है लेकिन प्रेस जाते ही उनकी हवा निकल गई क्योकि रिपोर्टरों को विज्ञापन भी दिया गया था जिसका कमीशन ही हजारो बनता है लेकिन बेचारे कर क्या सकते है .
पत्रिका के गिलास का

जवाब क्राकरी से
राजस्थान पत्रिका के आने की चर्चा से नवभारत की बाल्टी तो सभी जानते हैं लेकिन नेशनल लुक भी अपने अस्तित्व को बचाने छटपटाना शुरु कर दिया है। दरअसल पत्रिका के द्वारा कांच का गिलास गिफ्ट करना कई को अपने अस्तित्व पर हमला नजर आने लगा है। नेशनल लुक भी अपना प्रसार बढ़ाने बाल्टी के अलावा क्रॉकरी सेट का लालच देने लगा है।
प्रदीप की वापसी तो
कई हुई इधर-उधर
फोटोग्राफी में नाम कमा चुके प्रदीप डडसेना की लम्बे समय बाद हरिभूमि में वापसी हो गई है इतने दिनों तक प्रदीप जी क्या कर रहे थे उन्हीं से लोग पूछ ले तो बेहतर होगा। इधर पत्रिका की आमद से पत्रकारों का भाव बढ़ गया है और भाव तभी बढ़ेगा जब वे इधर से उधर जाएंगे। ऐसे ही वरुण झा हरिभूमि से भास्कर चले गए तो सोनू पाण्डे ने इसे बैलेंस कर दिया। तो शशांक खरे को भास्कर रास आने लगा है।
और अंत में....
रजबंधा मैदान में सरकारी जमीन पर बनाए भवन में समवेत शिखर शिफ्ट हो रहा है मशीन भी लग गई है अब वे उस इंजीनियर को कोस रहे हैं जिन्होंने मशीन रुम तो बना दिया लेकिन कागज का रोल मशीन तक पहुंचाने में दिक्कत हो रही है और जब तक रोल नहीं पहुंचेगा अखबार कैसे छपेगा।

अछ्छा जीवन सभी का हक़

दलितों, पिछड़ों एवं कमजोर वर्गो को आरक्षण सर्वप्रथम 26 जुलाई 1902 को कोल्हापुर नरेश छत्रपति शाहूजी महाराज ने देना शुरू किया। शाहूजी ने आरक्षण विरोधियों के सामने आरक्षण का औचित्य एक उदाहरण द्वारा सिद्ब किया। आज के लोकतांत्रिक भारत में जहां हर नागरिक को बराबर अधिकार दिये गये हैं। हजारों वर्षो से शोषित और पिछाड़े गये वर्गो के विकास और उत्थान हेतु आवश्यक कदम उठाना वक्त की जरूरत है। यदि ये आरक्षण का लाभ लेकर आगे बढ़ते हैं तो देश आगे बढ़ेगा। आखिर अच्छा जीवन स्तर जीना सभी का हक है।
धमतरी जिला के पुलिस अधीक्षक श्री शेख आरिफ हुसान ने मुख्य अतिथि के रुप में आरक्षण के जनक एवं समानता के प्णेता कोल्हापुर के मराठा नरेश राजर्षि छत्रपति साहू जी महाराज की जयंती के शुभावसर पर भारतीय दलित साहित्य अकादमी के छत्तीसगढ़ राय स्तरीय गौरवपूर्ण सम्मेलन में पधारे साहित्यकारों,पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए ये शब्द कहे । सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए युवा समाजवीर श्री दिग्विजय सिंह कृदत्त ने शाहूजी महाराज के आदर्शो,कार्यो की प्वलित योति को वाला बनाने पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि द्वय श्री पी. एसोब (आंध्प्देश) एवं श्री उधोराम चंदनिहा (पोंड़-पाण्डुका) ने भी सम्बोधित किया।
उस अवसर पर शैक्षणिक, साहित्यिक व सामीजिक क्षेत्रों में विशिष्ट अवेदन के लिए श्रीमती चन्दि्का देवी देशलहरे, कांशीराम गायकवाड़, जेशू चन्द् सिंह, मनीराम पंकज, जगमोहन सिंह पैकरा, जनाब मोहम्मद हनीफ साकरीया, विनोद कुमार सिन्हा शमभूराम साहू, आर.डी.क्षीरसागर, पियुषकांत सिंघम, पूर्णेन्द् कुमार साहू, भुनेश्वर प्साद कुर्रे, कृष्णदत्त उपाध्याय, बी. एस. रावटे, शोभाराम बघेल, बालाराम सिन्हा, अलखराम यादव, राजा राम पटेल, सतीश चन्द्ाकर, सखाराम साहू, संतराम देवांगन, श्रीमती गुलाब विश्वकर्मा, रविन्द् बंनजारे, भगवान सिह साहू एन.पी. जोशी, डोमार सिंह साहू संवलराम
साहू, भुनेश्वर प्साद साहू, रामेश्वर सिंग सूर्यवंशी, सम्पत राम सारथी, श्रीमती गुलाब विश्वकर्मा ,रविन्द् बंजारे, भगवान सिंह साहू, एन.पी. जोशी,डोमार सिंह साहू, कंवलराम साहू, भुनेश्वर प्साद साहू, रामेश्वर सिंग सूर्यवंशी, सम्पत राम सारथी, श्रीमती नजमा खॉ, आर.मुत्थुस्वामी, बुद्बप्काश गायकवाड़, बृदावन यादव, कौषल प्साद साहू, तल्लीनपुरी गोस्वामी मोहनलाल सोनवानी एवं गुहाराम लहरे को प्ाईड ऑफ नेशन नेशनल अवार्ड-2010 से सम्मनित किया गया।
इसके अलावा दलित पिछड़े समाज के प्तिभावान छात्र छात्राओं-कु. किरण यादव कु. मधु चौहान, कु.गौरी चोपड़ा, कु. वीणाा वाल्मिकी, कु. सुभाषनी बंजारे, धर्मेद् गहरवार, अमित नागेश एवं अमित कुमार रामटेके को रजत पदक (चांदी का मैडल) व पाठय सामग्ी प्दान कर सम्मानित किया गया। अनुसूचित जाति विकास परिषद जिला धमतरी के सौजन्य से कु.आकांक्षा भारती, क. द्ोपती जोशी, कु. गायत्री धीवर, कु. सीमा सोनकर, कु.गणेशी धु्व, कु. ओमप्भा, कु. भगवती को स्कूल बैग, कापी, पेन प्दान किया गया।
कार्यक् म का सफल संचालन अकादमी के प्देशाध्यक्ष जी.आर. बंजारे वाला ने किया। कार्यक्म का शुभारंभ बैण्ड बाजे के रार्ष्ट्रीय गान के साथ हुआ। केकचंद बधेल, बुटुराम पूर्णे, नम्मूराम भोजवानी,आर. मुत्थुस्वामी प्ेम नजीर के द्वारा कविता पाठ प्स्तुत किया गया। प्ो.के. मुरारीदास, प्ेमलाल कुर्रे, प्काश सिंह बादल, भागचंद नागेश, पं.देवीदत्त उपाध्याय, डामनलाल सोनवानी, रांलाल रामटेके, शेखरलाल गहरवार सोमन ध्ुव, प्मोद यादव (शाबास इंडिया फेम) ने अतिथियों का पुष्पहार से स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में अकादमी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री बद्रीप्रसाद गंगवीर के जन्म दिवस पर केक काटा गया।
इस अवसर पर तुलसीराम गहरवार, प्रेम सायमन, सी.एल. बंजारे, संतु यादव, अशोक टंडन, किशुन डांडे, अनिल बनारसी, पप्पू यादव ,दीपक सार्वा, महेश सिन्हा, उगेशराम बंसारे,श्रीमती सुमित्रा गंगवीर, श्रीमती सुशीला देवी वाल्मिकी, श्रीमती जे.उपाध्याय, प्रिती मेश्राम, सावित्री साहू, सरोज चौहान, नारायण राव शिन्दे, सूरज प्रसाद गुप्ता, दुष्यंत घोरपड़े, सोहनलाल डहरिया, मेहत्तर राम खापडर्े, श्रीराम डहरिया, फणेन्द्र कुमार साहू, एच.पी. देवांगन, शिवनारायण सोनी, कार्तिक राम पटेल, ललित साहू, टी.डी. सोनवानी, रमेश भालाधरे, एस.एल. कलिहारी, बी.आर. खोब्रागढ़े, बी.पी. वर्मा, रवि कुमार गंगवीर, श्वेता गंगवीर, जयंत कुमार, विश्वनाथ साहू, नसीमा, ममता देवांगन, विशाल सिंह ठाकुर, अमरदास बंजारे, सुशील बंजारे, विकास कुमार, सीमा गंगवीर, कु. भारती सोनवानी, श्यामलाल, दिलीप नाग, मुकेश प्रधान, त्रयम्बक हड़वदिया आदि लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
इस अवसर पर अकादमी के छत्तीसगढ़ प्रदेश शाखा की ओर से परम्परागत् टोपी (नीली पगड़ी) व शाल पहनाकर मुख्य अतिथि श्री शेख आरिफ हुसैन का आत्मीय अभिनंदन किया गया।

शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

अतिक्रमण तोड़ने का आदेश निकल गया लेकिन मंत्री ने रुकवा दी...

तालाब पर हुआ है अतिक्रमण
छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों की करतूतें थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ मुख्यमंत्री पानी बचाने आंदोलन का आगुआ बने हैं दूसरी तरफ उन्हीं के मंत्री तालाब पाटने वाले को बचा रहे हैं। मामला सरजूबांधा तालाब पाटने का है। इस पर हुए अतिक्रमण को तोड़ने का आदेश तक हो गया है लेकिन अतिक्रमणकारी नवल किशोर अग्रवाल की पहुंच दमदार मंत्री तक है इसलिए निगम भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक लोहार चौक निवासी नवल किशोर अग्रवाल के द्वारा टिकरापारा स्थित सरयूबांधा तालाब में कब्जा किया है। इनके द्वारा यहां किए लम्बे चौड़े कब्जे में प्रिटिंग प्रेस चलाने की भी खबर है। बताया जाता है कि जब इसकी खबर पार्षद सतनाम सिंह को हुई और लोगों ने पार्षद से शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की तो पार्षद ने इसकी शिकायत निगम आयुक्त से की।
इधर इस मामले में जोन 6 के तत्कालीन कमिश्नर ने 1 जून 2010 को पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर नवल किशोर अग्रवाल के कब्जे को हटाने पुलिस बल की मांग की। बताया जाता है कि जैसे ही अतिक्रमण हटाने की जानकारी नवल किशोर अग्रवाल को हुई उन्होंने दमदार मंत्री से एप्रोच किया और बताया जाता है कि दमदार मंत्री ने न केवल जोन कमिश्नर को हड़काया बल्कि पुलिस को भी फोन कर बल नहीं उपलब्ध कराने कह दिया।
इधर विभागीय मंत्री से भी नवलकिशोर अग्रवाल के संबंध की चर्चा है और लेन देन की चर्चा के बीच यह भी चर्चा है कि निगम ने अब इस अतिक्रमण को हटाने से पल्ला झाड़ लिया है। बताया जाता है कि इस मामले को लेकर टिकरापारा में जबरदस्त आक्रोश है। एक तरफ प्रदेश के मुखिया पानी बचाने की नाटकबाजी में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं शिवनाथ नदी का इंजीनियर की तरह हवाई सर्वेक्षण में लाखों रुपए फूंके जा रहे हैं और दूसरी तरफ राजधानी में तालाब पाटने में मंत्रियों की रूचि है। ज्ञात हो कि आमापारा स्थित कारी तााब को भी इसी दमदार मंत्री की वजह से पाटा जा रहा है जबकि तेलीबांधा से लेकर पुरानीबस्ती के तालाबों पर अतिक्रमण की अपनी कहानी है।
बहरहाल सरयूबांधा तालाब के कब्जे हटाने का मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय है। चर्चा यह भी है कि मुख्यमंत्री पानी बचाने के लिए भाषणबाजी बंद कर अपने मंत्रियों की करतूतों पर लगाम लगाए तो राजधानी के कई तालाब व बगीचे बच सकते हैं।

गुरुवार, 29 जुलाई 2010

गणित वालों को भी कम्पाउण्डर बना दिया

बाबूलाल अग्रवाल जब सचिव थे
जब बाबूलाल अग्रवाल स्वास्थ्य सचिव थे उन दिनों सीएमओ रही डॉ. किरण मल्होत्रा के कार्यकाल में हुई घपलेबाजी परत दर परत खुलने लगे हैं। पैसा लेकर ऐसे 10 लोगों को कम्पाउण्डर बना दिया जो गणित संकाय के थे। जबकि विज्ञापन में बायो संकाय मांगा गया था।
आम लोगों के जीवन की देखरेख के लिए बने स्वास्थ्य विभाग में रमन सरकार की क्या मंशा रही है यह साफ तौर पर यहां हुई घपलेबाजी की परतें खुलने से सामने आने लगी है। स्वास्थ्य जैसे गंभीर विभाग में यह घपलेबाजी तब हुई जब वे व्यक्ति स्वास्थ्य सचिव थे जिन्हें सरकार ने आयकर विभाग के छापे के बाद बहाली में एक मिनट की भी देर नहीं की।
इस बार जो मामला सामने आया है वह विभाग द्वारा कम्पाउण्डर (फार्मेसिस्ट) के पदों पर भर्ती का है। वैसे तो यहां संविदा नियुक्ति से लेकर अनुकम्पा नियुक्तियां तक पैसे लिए बिना नहीं की जाती। बताया जाता है कि जब डॉ. किरण मल्होत्रा सीएमओ थी तब फार्मेसिस्ट में भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था। विज्ञापन में जो शर्ते थी उसके मुताबिक बायोलॉजी के विद्यार्थी ही इसके लिए पात्र हो सकते थे लेकिन कहा जा रहा है कि जब नियुक्तियां दी गई तो 10 ऐसे लोगों को नौकरी दी गई जो गणित संकाय से थे। मामले की तब शिकायत भी हुई लेकिन उच्चस्तरीय लेन-देन कर मामला दबा लिया गया। एक बार यह मामला फिर खुलने लगा है और शीघ्र ही जांच कमेटी बनाए जाने की चर्चा है।
वैसे कर्मचारियों का कहना है कि यदि यहां की जांच करानी है तो उच्च स्तरीय कमेटी बनानी चाहिए जो सचिव बाबूलाल अग्रवाल और डॉ. किरण मल्होत्रा के कार्यकाल की जांच करें। कर्मचारियों का दावा है कि यदि इन दोनों अधिकारियों के कार्यकाल की जांच हुई तो कई लोग जेल के सलाखों के पीछे जाएंगे। शायद यही वजह है कि हर बार जांच की मांग तो होती है लेकिन पूरे मामले को दबा दिया जाता है। बहरहाल स्वास्थ्य विभाग के घपले परत दर परत खुलते जा रहे हैं और सरकार की इस ओर अनदेखी को लेकर आम लोगों में बेहद तीखी प्रतिक्रिया है।