दंतेवाड़ा जिला शिक्षा अधिकारी डा. एच.आर. शर्मा की संविलियन से लेकर दंतेवाड़ा शिक्षा अधिकारी के सफर की सरकारी फाईल गायब हो गई है। शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के वरदहस्त प्राप्त प्रो. एच.आर. शर्मा न केवल दमदार बताए जाते हैं बल्कि उनकी नियुक्ति पर ही सवाल उठाये गए हैं।
भाटापारा में असिटेंट प्रोफेसर रहे डा. एच.आर. शर्मा की दंतेवाड़ा में जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर नियुक्ति को अवैधानिक बताया जा हा है। इस संबंध में विस्तार से खबर भी प्रकाशित हुई है लेकिन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ही नहीं सीएम हाउस से भी जबरदस्त सेटिंग की वजह से इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। हमारे अत्यंत भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक हाईकोर्ट द्वारा डा. शर्मा के संविलियन को रद्द किए जाने के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री हेमचंद यादव फिर बृजमोहन अग्रवाल की निजी रुप से रुचि लेने की वजह से वे अब भी दंतेवाड़ा में न केवल जिला शिक्षा अधिकारी बल्कि परियोजना समन्वयक के दोहरे पद पर पदस्थ हैं।
बताया जाता है कि कुछ आईएएस अधिकारियों की रूचि की वजह से उनकी नियुक्ति खाद्य निगम में भी की गई थी लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी आईएएस एम.के. राउत को हुई थी उन्होंने डा. शर्मा की नियुक्ति लौटा दी थी। चूंकि डा. शर्मा कोई मूल विभाग में पदस्थ नहीं है। इसलिए उन्हें दंतेवाड़ा में शिक्षा अधिकारी बना दिया गया और इतना ही नहीं उन्हें राजीव गांधी शिक्षा मिशन में भी प्रभार दे दिया गया।
डा. शर्मा के प्रति भाजपा सरकार के मंत्रियों की क्या रूचि है यह तो वहीं जाने लेकिन जब डा. शर्मा के खिलाफ जाच की बात हुई तो फाईल ही गायब होने की चर्चा है। बताया जाता है कि डेढ़ सौ पृष्ठ के नोट शीट के अलावा पीएससी से लेकर हाईकोर्ट के प्रमाणिक दस्तावेज वाले इस फाईल को गायब करा दिया गया है। इधर हमारे सूत्रों ने बताया कि दंतेवाड़ा में नक्सलियों की आड़ में जबरदस्त घपलेबाजी की जा रही है और एक बड़ा हिस्सा उच्च पदस्थ लोगों को पहुंचाया जाता है। इधर फाईल गायब होने को लेकर शिक्षा विभाग में जबरदस्त हडक़म्प है और इस मामले को दबाया जा रहा है।
http://midiaparmidiaa.blogspot.in/
गुरुवार, 9 सितंबर 2010
बुधवार, 8 सितंबर 2010
राजधानी की खबरें
तस्वीर की नजर में आज राजधानी
स्वक्छता अभियान को लेकर प्रशासकीय काम
साक्छरता के लिए बच्चो ने रैली निकाली
NSUI में चुनाव
बिकी तो नहीं ठेके पर चला गया...
नवभारत के मालिकों में इन दिनों बंटवारे को लेकर मीडिया जगत में जबदस्त चर्चा है। कभी रायपुर संभाल रहे प्रफुल्ल माहेश्वरी का अब यहां से कोई लेना नहीं रहा तो चर्चा इस बात की है कि बंटवारे में मिले रायपुर नवभारत को समीर जी चलाना नहीं चाहते। जिंदल से जोगी तक खरीदने की चर्चा में अब यह चर्चा भी है कि रायपुर नवभारत ठेके पर चला गया है। ठेका कभी सूर्या में घपला करने वाले ने लिया है। मालिक को पैसे से मतलब है यह ठेकेदार सबको यही समझाकर विज्ञापन या नगद ले रहा है। सच्चाई तो समीर जी जाने। लेकिन जब बिल्डिंग की वैधता को लेकर ही तलवारें लटक रही हो तो बदनामी से काहे का डर वैसे भी एनबी प्लांटेशन के बाद भी क्या बिगड़ गया सरकार तो वैसे ही जेब में हैं।
भास्कर में भी बिहारी बाबूइन दिनों भास्कर के बिहारी बाबू की जबरदस्त चर्चा है। डीजी बिहारी हैं तो डर काहे का की तर्ज पर जब तक गोली मारने की धमकी से यहां कई लोग परेशान हैं और जब मालिक की नीति ही फूट डालो राज करों की हो तो विवाद कैसा? फिर कब तक सिर्फ बातों का जमा खर्च है गोली चली भी नहीं है तो शिकायतों पर ध्यान देने की जरूरत भी नहीं है।
सौम्या की छलांग
जनसंपर्क में अधिकारी रहे मिश्रा जी की बिटिया ने अपने ताऊ के अखबार से छुट्टी ले ली है जब भास्कर जैसा बैनर हो और वेतन भी 60 हजार हो तो कौन पूछता है वैसे भी घर की मुर्गी दाल बराबर मानी जाती है और कभी ऊंच-नीच हो भी गया तो ताऊ-पापा तो हैं ही।
दिवाकर की पीड़ा
गजानन माधव मुक्तिबोध ने साहित्य व समाज को बहुत कुछ दिया लेकिन दिवाकर मुक्तिबोध की पीड़ा कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। भास्कर से जनधारा तक का सफर भारी पड़ रहा है। युगधर्म में चंगु-मंगु ने संपादकीय छुड़वा दी थी तो जनधारा में चहेती बिटिया ने अपमानित किया अब जब काम करना है तो इतना तो सहना ही पड़ेगा। भले ही कल का देवेन्द्र बड़ा पद ले ले।
देवेन्द्र खुश हुआ
नौकरी के लिए अच्छा पत्रकार होना जरूरी नहीं है। न ही खबरें लिखना ही जरूरी है। अधिकारियों से सेटिंग हो तो मालिक भी खुश रहता है। इस रणनीति पर चलने वाले खुश रहते हैं। हरिभूमि छोडक़र जनधारा पहुंचे देवेन्द्र कर अब अखबार का प्रकाशक-मुद्रक हो गया है तो खुश तो होगा ही।
यशवंत भास्कर में
कभी हरिभूमि रायपुर से हरिभूमि बिलासपुर पहुंचे यशवंत गोहिल इन दिनों बिलासपुर भास्कर पहुंच गए हैं। उनका सफर भास्कर तक ही है यह कहना कठिन है लेकिन सफर को लेकर बिलासपुर में जबरदस्त चर्चा है।
प्राण चड्डा और एसएमएस
भास्कर में सलाहकार संपादक रहे प्राण चड्डा अब यहां से रिटायर्ड हो गए हैं। ढलहा बनिया हलाये कन्हिया की तर्ज पर इन दिनों उनकी सुबह एसएमएस भेजने से शुरु होती है और रात गुडनाईट के एसएमएस से खत्म होती है। उनके एसएमएस भी निराले हैं पत्रकार तो डरने लगे है कि कहीं एसएमएस डिलिट नहीं हुआ तो क्या होगा इसलिए तत्काल डिलिट करते हैं ताकि घरवालों से तो बच सकें।
राजीव पहुंचे पत्रिका
सांध्य दैनिक छत्तीसगढ़ में अपनी फोटोग्राफी का रंग दिखा चुका बिहारी बाबू राजीव अब पत्रिका में चले गए हैं। वैसे भी छत्तीसगढ़ में वे परेशान थे। वजह तो मालिक जाने।
मधु बीमार
जनधारा और अग्रदूत की पत्रकारिता में नाम कमा चुके मधुसूदन शर्मा की तबियत इन दिनों बेहद खराब है। उनके स्वास्थ्य लाभ की हम सब कामना करते है। उन्हें पैरालिसिस अटैक के चलते नागपुर अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।
और अंत में...
शहर में भास्कर को मात देने के लिए आ रहे एक अखबार को जिस तरह का पत्रकार चाहिए वह मिल नहीं रहा है। या फिर पत्रकार ढूंढने वाले का चेहरा देख लोग भाग रहे हैं। यह सवाल इन दिनों मीडिया जगत में चर्चा में हैं।
मंगलवार, 7 सितंबर 2010
स्वागत में सरकार जनता को दुत्कार
दो दिन पूरी सरकार लगी रही चापलूसी में
0 5 शहीदों को फूल चढ़ाने कोई नहीं गया
0 जगह-जगह ट्रैफिक जाम
0 कुत्ते-बिल्ली की तरह लड़े मोहन-मूणत समर्थक
0 स्टेडियम के चारों ओर की दुकानें बंद
0 जूदेव न स्वयं दिखे न फोटो में ही
0 सरकारी गुण्डागर्दी खुले आम
0 जी-हुजूरी में कांग्रेसियों से भी आगे
0 करोड़ों रुपए फूंके गए
0 ननकी, चम्पू, अमर को भी रोका दिया गया
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी रायपुर क्या आए पूरी सरकार ही उसके ही हुजूरी में लग गई। व्यवस्था के नाम पर न केवल सरकारी गुण्डागर्दी का जमकर प्रदर्शन हुआ बल्कि जोर आजमाईश में प्रदेश के दो मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल और राजेश मूणत के समर्थकों ने सरेआम दईया-मईया करते एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए। जूदेव-साय जैसे वरिष्ठों की अनदेखी ही नहीं हुई स्वागत के चक्कर में बीजापुर में शहीद हुए पांच जवानों को फूल चढ़ाने तक की फुर्सत रमन सरकार के पास नहीं थी। नीतिन गडकरी के स्वागत में फूल बरसाने वाले रमन सरकार व उसके अधिकारियों ने पदों की गरिमा को तार-तार तो किया ही चापलूसी में कांग्रेसियों को भी पीछे छोड़ दिया।
आम आदमी तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी के छत्तीसगढ़ के लिए उड़ान भरने वाले विमान में बैठने से पहले ही परेशान होने लगे थे। जगह-जगह बैरिकेट्स और सुरक्षा के नाम पर रोक-टोक का सिलसिला शुक्रवार को दिन निकलते ही शुरु हो गया था और पूरी सरकार नीतिन के स्वागत करने में इस हद तक मशगूल रही कि उन्हें आम आदमी की पीड़ा नहीं दिखलाई पड़ा। पहले दिन से ही जनता पर कहर बरपाने का जो सिलसिला शुरु हुआ वह तब ही खत्म हुआ जब शनिवार की रात नीतिन गडकरी रवाना हो गए।
नीतिन गडकरी के स्वागत में न केवल आम कार्यकर्ताओं में होड़ मची रही बल्कि मंत्रियों तक में तना-तनी का माहौल रहा। एक दूसरे के लिए बांहे खिंचने वाले प्रदेश स्तरीय नेताओं ने इतना संयम जरूर बरता कि केवल मुंह से ही काम चलाया। हाथ नहीं उठाया वरना तमाशा तो बन ही चुका था। एक तरफ सरकार स्वागत में कोई कमी नहीं उठा रखी थी तो दूसरी तरफ व्यवस्था में पूरा सरकारी तंत्र पलक बिछाये हुए था। राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ फोटो खिंचवाने की होड़ में कई बार धक्का-मुक्की व गाली गलौच भी हुई लेकिन हर बार मामला संभल गया।
शहीदों के लिए समय नहीं...
नीतिन गडकरी के स्वागत में लगी सरकार की संवेदनशीलता कहें या अपने आका को खुश करने की कवायद लेकिन शहीदों और राष्ट्रप्रेम की वकालत करने वाली भाजपा सरकार के पास इतना भी समय नहीं था कि वे बीजापुर में शहीद हुए 5 जवानों पर फूल माला ही चढ़ा दें। जवानों को श्रद्धांजलि देने न मुख्यमंत्री पहुंचे और न ही मंत्रिमंडल का कोई सदस्य ही पहुंचा।
मोहन-मूणत समर्थक भिड़े
वैसे तो प्रदेश के दमदार मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत के बीच लड़ाई जग जाहिर है। गडकरी का स्वागत करने में मची होड़ में वीआईपी रोड पर दोनों मंत्रियों के समर्थक भिड़ गए। पूरा सडक़ जाम हो गया। खुले आम दईया-मईया और लाठी डंडे से हमला शुरु हो गया आधा दर्जन अस्पताल पहुंच गए। अब पुलिस को देखिए इतना होने के बाद भी वह रिपोर्ट का इंतजार कर रही है यदि रिपोर्ट नहीं लिखवाई गई तो क्या 151 के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती। इस लड़ाई में पहली बार मूणत समर्थक भारी पड़े और दमदार मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के वे समर्थक पिटे गए जो जमीन या गुण्डागर्दी कर पैसे के बल पर राजनीति कर रहे हैं।
स्टेडियम की सुरक्षा
दूसरे दिन यानी शनिवार को सुभाष स्टेडियम में होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलन के लिए जबरदस्त इंतजाम किए गए। सरकारी गुण्डागर्दी जमकर हुई। सुरक्षा के नाम पर आसपास की दुकानें बंद करा दी गई। एक महिला की मटकी की दुकान में तोडफ़ोड़ की गई वह व्यवथित होकर बद्दुआ देते घूम रही थी लेकिन बेचारी पुलिस को तो सरकार का कहना मानना ही है। स्टापर लगाकर सडक़ बंद करने से लोग हलकान थे। जबकि पहले दिन सौदान सिंह के निज सचिव की करतूत जनता देख चुकी थी।
जूदेव कहां गये...
कहने को तो मूंछ के एवज में दिलीप सिंह जूदेव ने डा. रमन सिंह को मुख्यमंत्री बनवाया है। कोरग्रुप के सदस्य और बिलासपुर के सांसद दिलीप सिंह जूदेव की दुश्मनी राष्ट्रीय अध्यक्ष से है या रमन सिंह से यह अंदर की बात है लेकिन पूरे कार्यक्रम और प्रचार तंत्र में जूदेव का न होना चर्चा का विषय रहा है और आने वाले दिनों में इसे लेकर बवाल मचे तो अचरज भी नहीं होना चाहिए।
मंत्रियों को चून-चून कर
अपमानित किया गया...
हम ही हैं कि तर्ज पर चले गडकरी के पूरे कार्यक्रम में केवल डा. रमन सिंह और बृजमोहन अग्रवाल की ही तूती बोल रही थी। मानों छत्तीसगढ़ भाजपा में इनके अलावा किसी की अवकात नहीं है। पैर तुड़वाने वाले सांसद नंदकुमार साय भले अपनी उपेक्षा को खुलकर न कहे लेकिन आम कार्यकर्ताओं में इसे लेकर जमकर चर्चा रही। कार्यकर्ताओं में यह भी चर्चा रही कि सर्वाधिक अपमान ननकीराम कंवर, अमर अग्रवाल और चंद्रशेखर साहू का जानबूझकर किया गया। कार्यक्रम में उपेक्षित रहे इन तीनों मंत्रियों को तो गडकरी के विदाई के दौरान भी एयरपोर्ट पर रोका गया। लेकिन वे अपने अपमान पर कुछ बोलने की स्थिति में भी नहीं दिखे।
कांग्रेसियों को भी पीछे छोड़ा
राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत में करोड़ों रुपए फूंकने वाले लोगों ने सपने में नहीं सोचा था कि पार्टी अध्यक्ष के स्वागत में इस तरह से जीभ लपलपाई जाएगी। आम कार्यकर्ता के अध्यक्ष बनने की नसिहत देने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी के स्वागत में जिस तरह से फूल बरसाए गए, स्तुति गान हुआ वह चापलूसी करने वाले कांग्रेसियों को भी शर्मशार करने वाला बताया जा रहा है। पूरी सरकार जिस तरह से दो दिन नीतिन गडकरी के स्वागत सत्कार में लगी रही वैसा तो अटल-अडवानी के साथ भी नहीं हुआ।
0 5 शहीदों को फूल चढ़ाने कोई नहीं गया
0 जगह-जगह ट्रैफिक जाम
0 कुत्ते-बिल्ली की तरह लड़े मोहन-मूणत समर्थक
0 स्टेडियम के चारों ओर की दुकानें बंद
0 जूदेव न स्वयं दिखे न फोटो में ही
0 सरकारी गुण्डागर्दी खुले आम
0 जी-हुजूरी में कांग्रेसियों से भी आगे
0 करोड़ों रुपए फूंके गए
0 ननकी, चम्पू, अमर को भी रोका दिया गया
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी रायपुर क्या आए पूरी सरकार ही उसके ही हुजूरी में लग गई। व्यवस्था के नाम पर न केवल सरकारी गुण्डागर्दी का जमकर प्रदर्शन हुआ बल्कि जोर आजमाईश में प्रदेश के दो मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल और राजेश मूणत के समर्थकों ने सरेआम दईया-मईया करते एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए। जूदेव-साय जैसे वरिष्ठों की अनदेखी ही नहीं हुई स्वागत के चक्कर में बीजापुर में शहीद हुए पांच जवानों को फूल चढ़ाने तक की फुर्सत रमन सरकार के पास नहीं थी। नीतिन गडकरी के स्वागत में फूल बरसाने वाले रमन सरकार व उसके अधिकारियों ने पदों की गरिमा को तार-तार तो किया ही चापलूसी में कांग्रेसियों को भी पीछे छोड़ दिया।
आम आदमी तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी के छत्तीसगढ़ के लिए उड़ान भरने वाले विमान में बैठने से पहले ही परेशान होने लगे थे। जगह-जगह बैरिकेट्स और सुरक्षा के नाम पर रोक-टोक का सिलसिला शुक्रवार को दिन निकलते ही शुरु हो गया था और पूरी सरकार नीतिन के स्वागत करने में इस हद तक मशगूल रही कि उन्हें आम आदमी की पीड़ा नहीं दिखलाई पड़ा। पहले दिन से ही जनता पर कहर बरपाने का जो सिलसिला शुरु हुआ वह तब ही खत्म हुआ जब शनिवार की रात नीतिन गडकरी रवाना हो गए।
नीतिन गडकरी के स्वागत में न केवल आम कार्यकर्ताओं में होड़ मची रही बल्कि मंत्रियों तक में तना-तनी का माहौल रहा। एक दूसरे के लिए बांहे खिंचने वाले प्रदेश स्तरीय नेताओं ने इतना संयम जरूर बरता कि केवल मुंह से ही काम चलाया। हाथ नहीं उठाया वरना तमाशा तो बन ही चुका था। एक तरफ सरकार स्वागत में कोई कमी नहीं उठा रखी थी तो दूसरी तरफ व्यवस्था में पूरा सरकारी तंत्र पलक बिछाये हुए था। राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ फोटो खिंचवाने की होड़ में कई बार धक्का-मुक्की व गाली गलौच भी हुई लेकिन हर बार मामला संभल गया।
शहीदों के लिए समय नहीं...
नीतिन गडकरी के स्वागत में लगी सरकार की संवेदनशीलता कहें या अपने आका को खुश करने की कवायद लेकिन शहीदों और राष्ट्रप्रेम की वकालत करने वाली भाजपा सरकार के पास इतना भी समय नहीं था कि वे बीजापुर में शहीद हुए 5 जवानों पर फूल माला ही चढ़ा दें। जवानों को श्रद्धांजलि देने न मुख्यमंत्री पहुंचे और न ही मंत्रिमंडल का कोई सदस्य ही पहुंचा।
मोहन-मूणत समर्थक भिड़े
वैसे तो प्रदेश के दमदार मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत के बीच लड़ाई जग जाहिर है। गडकरी का स्वागत करने में मची होड़ में वीआईपी रोड पर दोनों मंत्रियों के समर्थक भिड़ गए। पूरा सडक़ जाम हो गया। खुले आम दईया-मईया और लाठी डंडे से हमला शुरु हो गया आधा दर्जन अस्पताल पहुंच गए। अब पुलिस को देखिए इतना होने के बाद भी वह रिपोर्ट का इंतजार कर रही है यदि रिपोर्ट नहीं लिखवाई गई तो क्या 151 के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती। इस लड़ाई में पहली बार मूणत समर्थक भारी पड़े और दमदार मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के वे समर्थक पिटे गए जो जमीन या गुण्डागर्दी कर पैसे के बल पर राजनीति कर रहे हैं।
स्टेडियम की सुरक्षा
दूसरे दिन यानी शनिवार को सुभाष स्टेडियम में होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलन के लिए जबरदस्त इंतजाम किए गए। सरकारी गुण्डागर्दी जमकर हुई। सुरक्षा के नाम पर आसपास की दुकानें बंद करा दी गई। एक महिला की मटकी की दुकान में तोडफ़ोड़ की गई वह व्यवथित होकर बद्दुआ देते घूम रही थी लेकिन बेचारी पुलिस को तो सरकार का कहना मानना ही है। स्टापर लगाकर सडक़ बंद करने से लोग हलकान थे। जबकि पहले दिन सौदान सिंह के निज सचिव की करतूत जनता देख चुकी थी।
जूदेव कहां गये...
कहने को तो मूंछ के एवज में दिलीप सिंह जूदेव ने डा. रमन सिंह को मुख्यमंत्री बनवाया है। कोरग्रुप के सदस्य और बिलासपुर के सांसद दिलीप सिंह जूदेव की दुश्मनी राष्ट्रीय अध्यक्ष से है या रमन सिंह से यह अंदर की बात है लेकिन पूरे कार्यक्रम और प्रचार तंत्र में जूदेव का न होना चर्चा का विषय रहा है और आने वाले दिनों में इसे लेकर बवाल मचे तो अचरज भी नहीं होना चाहिए।
मंत्रियों को चून-चून कर
अपमानित किया गया...
हम ही हैं कि तर्ज पर चले गडकरी के पूरे कार्यक्रम में केवल डा. रमन सिंह और बृजमोहन अग्रवाल की ही तूती बोल रही थी। मानों छत्तीसगढ़ भाजपा में इनके अलावा किसी की अवकात नहीं है। पैर तुड़वाने वाले सांसद नंदकुमार साय भले अपनी उपेक्षा को खुलकर न कहे लेकिन आम कार्यकर्ताओं में इसे लेकर जमकर चर्चा रही। कार्यकर्ताओं में यह भी चर्चा रही कि सर्वाधिक अपमान ननकीराम कंवर, अमर अग्रवाल और चंद्रशेखर साहू का जानबूझकर किया गया। कार्यक्रम में उपेक्षित रहे इन तीनों मंत्रियों को तो गडकरी के विदाई के दौरान भी एयरपोर्ट पर रोका गया। लेकिन वे अपने अपमान पर कुछ बोलने की स्थिति में भी नहीं दिखे।
कांग्रेसियों को भी पीछे छोड़ा
राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत में करोड़ों रुपए फूंकने वाले लोगों ने सपने में नहीं सोचा था कि पार्टी अध्यक्ष के स्वागत में इस तरह से जीभ लपलपाई जाएगी। आम कार्यकर्ता के अध्यक्ष बनने की नसिहत देने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी के स्वागत में जिस तरह से फूल बरसाए गए, स्तुति गान हुआ वह चापलूसी करने वाले कांग्रेसियों को भी शर्मशार करने वाला बताया जा रहा है। पूरी सरकार जिस तरह से दो दिन नीतिन गडकरी के स्वागत सत्कार में लगी रही वैसा तो अटल-अडवानी के साथ भी नहीं हुआ।
पता नहीं बेटा
पता नहीं बेटा
बेटा - कांग्रेस में इकबाल अहमद रिजवी इन दिनों बेहद नाराज है?
पिताजी - हां बेटा! उन्होंने पार्टी फोरम में चुनावी गफलत को जोर शोर से उठाया भी है।
बेटा - तो कुछ लोग पार्टी फोरम के बाहर जाकर निंदा करने लगे? क्या ऐसे लोगों पर पार्टी कार्रवाई करेगी ?
पिताजी - पता नहीं बेटा।
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बेटा - भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत की तैयारी जबरदस्त चल रही है।
पिताजी - हां बेटा! गडकरी जी पहली बार छत्तीसगढ़ आ रहे है।
बेटा - तो क्या उन्हें खुश करने की रणनीति का यह सरकारी नुस्खा है?
पिताजी - पता नहीं बेटा।
पटवारी ने जालसाजी कर महिला की जमीन हड़पी
नई राजधानी क्षेत्र के ग्राम पलौद में पटवारी हल्का नंबर 69/21 राजस्व निरीक्षक मंडल मंदिर हसौद तह. आरंग जिला रायपुर में श्रीमती सावित्री जौजे ज्ञानचंद निवासी शारदा चौक, जोरापारा रायपुर द्वारा वर्ष 2005 में खरीदी गई कृषि भूमि खसरा नं. 9 रकबा 0.30 हेक्टेयर का नामांतरण पटवारी अभिलेख में हो जाने के पश्चात तात्कालीन पटवारी घनश्याम चनद्राकर ने लेनदेन कर श्रीमती सावित्री का नाम काटकर अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया है, तथा तात्कालीन तहसीलदार आरंग सुश्री सिल्ली थामस को धोखा में रखकर अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज करवा दिया है तथा भूमि का रकबा बढ़ाकर 0.68 हेक्टेयर कर दिया है। जबकि श्रीमती सावित्री भूमि खरीदी दिनांक से आज तक भूमि पर कास्त काबिज है। यही नहीं वर्तमान पटवारी अजय उपाध्याय के पास पहुंची तो पटवारी ने उसकी ऋण पुस्तिका को फेंक दिया तथा कहा कि तुम्हारी कोई भूमि ग्राम पलौद में पटवारी अभिलेख में दर्ज नहीं है। बाद में पटवारी ने श्रीमती सावित्री से भूमि पर पुन: नाम दर्ज करने के लिए 50000 रू. की मांग की। श्रीमती सावित्री ने सूचना का अधिकार के अंतर्गत अपनी भूमि का अभिलेख प्राप्त कर उक्त प्राधिकरण में आपत्ति प्रस्तुत की तथा थाना मंदिर हसौद में दोनों पटवारियों एवं अन्य व्यक्ति के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाई। यहां तक कि पटवारी अजय उपाध्याय ने कलेक्टर के रिकार्ड रूम से ग्राम पलौद के सभी अभिलेखों को प्राप्त करके अपने पास रख लिया है तथा सूचना के अधिकार के अंतर्गत श्रीमती सावित्री को पटवारी ने गलत री नंबरिंग सूची प्रदान कर दी है। अत: कलेक्टर इस संबंध में जांच कर ऐसे पटवारियों को तत्काल निलंबित कर सेवामुक्त करें एवं ऐसे कार्यों की पुनरावृत्ति पर रोक लगावें। यह जानकारी श्रीमती सावित्री ने बुलंद छत्तीसगढ़ को दी।
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