बुधवार, 22 सितंबर 2010

एचआर प्रकरण की फाईल चोरी की एफआई आर कराने से कतरा रही है शिक्षा विभाग

एचआर प्रकरण की फाईल चोरी की एफआई आर कराने से कतरा रही है शिक्षा विभाग
 दंतेवाड़ा में शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्थ डॉ. एच.आर. शर्मा की फाईल चोरी का रहस्य गहराते जा रहा है। फाईल गुमने की जांच तो शुरु कर दी गई है लेकिन उच्च स्तरीय दबाव के चलते मामला पुलिस को सौंपने से शिक्षा विभाग कतरा रही है।
उल्लेखनीय है कि  डॉ. एच.आर. शर्मा के संविलियन को हाईकोर्ट द्वारा रद्द करने व निगम से सचिव एम.के. राउत द्वारा सेवा लौटाने की खबर छापी थी इससे उच्च स्तरीय दबाव पर कार्रवाई तो नहीं हुई उल्टे डा. एच.आर. शर्मा की फाईल शिक्षा विभाग से गायब हो गई। बताया जाता है कि फाईल गायब होने की खबर प्रसारित होने से शिक्षा विभाग में हड़कम्प मच गया है और उच्च स्तरीय दबाव के बाद भी फाईल गायब होने की जांच तो शुरु कर दी गई है लेकिन फाईल चोरी होने की एफआईआर नहीं कराई जा रही है।
ज्ञात हो कि भाजपा की पूर्व महिला सांसद के दबाव में संविलियन की कोशिश विफल होने के बाद भी डॉ. शर्मा की नियुक्ति शिक्षा विभाग में की गई है। यहीं नहीं शिक्षा विभाग में मूल रुप से नहीं होने के बाद भी डा. शर्मा को न केवल दंतेवाड़ा जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है बल्कि परियोजना समन्वयक का भी चार्ज सौंपा गया है। इस विभाग के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल हैं जबकि तत्कालीन शिक्षा मंत्री हेमचंद यादव के भी पूर्व महिला सांसद के दबाव में विशेष रूचि लेने की चर्चा है। बताया जाता है कि वर्तमान शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भी शिकायत के बाद भी कोई रूचि नहीं दिखा रहे हैं। जबकि तत्कालीन शिक्षा सचिव नंदकुमार परतो लेन-देन के आरोप लगे हैं। इधर यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है इससे शिक्षा विभाग पर भी दाग लगने लगा है।

मंगलवार, 21 सितंबर 2010

मोहन से भरोसा टूटा अन्य मंत्री भी लगे प्रचार में

भटगांव उपचुनाव
भाजपा की मुसिबत बढ़ी, चावल-दारू भारी पड़ा
 भटगांव उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की मुसीबत बढ़ते ही जा रही है। चावल योजना से त्रस्त मध्यम वर्ग और गांव-गांव में बिकते अवैध शराब से महिलाओं में जबरदस्त आक्रोश है। वहीं प्रभारी बनाए गए पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की छवि ने भी भाजपा को सकते में ला दिया है। एन वक्त पर प्रभारी हटाने से विरित असर पडने की संभावना के चलते अब भाजपा ने दूसरे मंत्रियों को भी यहां जिम्मेदारी दे दी है।
छत्तीससगढ़ के भटगांव विधानसभा के लिए हो रहे उपचुनाव को लेकर जबरदस्त होड़ है। भाजपा ने जहां सरकार की पूरी ताकत को झोंक दिया है वहीं कांग्रेस भी कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती। भाजपा के लिए यह उपचुनाव तो मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। वर्तमान में भाजपा के सिर्फ 47 विधायक है जो बहुमत से एक-दो सीट ही अधिक है ऐसे में यह चुनाव हारने पर डॉ. रमन सिंह की मुसीबत बढ सकती है। वैसे रमन सिंह ने यह चुनाव जीतने के लिए यहां से श्रीमती रजनी त्रिपाठी को उतारकर सहानुभूति वोट ही नहीं बल्कि पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को प्रभारी बनाकर तिकड़म से वोट बटोरने का संकेत दिया है।
बताया जाता है कि भाजपा ने यह नहीं सोचा था कि हाय हलो की छवि वाले बृजमोहन अग्रवाल पर लगे आरोप भी यहां मुद्दे बन जाएंगे। बताया जाता है कि घटिया सड़क निर्माण से लेकर पर्यटन विभाग में हुए घोटाले ने तो बृजमोहन अग्रवाल को परेशान किया ही है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी यहां मुद्दा बनता जा रहा है। चूंकि बृजमोहन अग्रवाल के पास शिक्षा विभाग भी है ऐसे में स्कूलों में शिक्षकों की कमी यहां प्रमुख मुद्दा बन सकता है।
बताया जाता है कि बृजमोहन अग्रवाल को लेकर चल रही चर्चा ने क्षेत्र के भाजपाईयों के होश उड़ा दिए हैं और इसकी खबर जब संगठन व सरकार को हुई तो आनन-फानन में अन्य मंत्रियों को भी जिम्मेदारी दे दी गई है ताकि इसका प्रभाव कम किया जा सके। बताया जाता है कि पूर्व अध्यक्ष शिवप्रताप की खामोशी ने तो भाजपा को बेचैन किया ही है चावल योजना से त्रस्त मध्यम वर्ग को प्रभावित करने नई रणनीति बनाई जा रही है। बताया जाता है कि दो रुपया किलो चावल योजना ने मध्यम वर्ग को सर्वाधिक हलाकान किया है। न घर के लिए और न ही खेती के लिए ही मजदूर मिल रहे हैं कई लोग तो महंगाई को ही इसकी वजह बता रहे हैं।
वहीं गांव-गांव में बिकते अवैध शराब से भी महिलाओं में जबरदस्त आक्रोश है जबकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी के दौरे में आदिवासियों की उपेक्षा भी आदिवासी क्षेत्रों में मुद्दा बनता जा रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी यू.एस. सिंहदेव को मिल रहे व्यापक समर्थन और कांग्रेसियों की एकता ने भी भाजपा को नए सिरे से रणनीति बनाने मजबूर कर दिया है। बहरहाल यह कहा जा रहा है कि यदि कांग्रेसियों ने यह सीट जीत ली तो डॉ. रमन सिंह की मुसीबत बढ सकती है।

निधि तिवारी हत्याकांड - मामला तूल पकड़ने लगा ...

सामाजिक संगठन भी आगे आये...
 जल विहार कालोनी में निधि तिवारी को उसके पति व ससुराल वालों द्वारा कथित मार डालने का मामला अब तूल पकडने लगा है। निधि के मायके वालों के साथ सामाजिक संगठनों के सामने आने से मामला गंभीर हो गया है। महिला आयोग ने भी इस मामले में रुचि दिखाने लगा है। प्रेस क्लब रायपुर में निधि के माता पिता परिजनों और जागरूक सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में इस विभत्स हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुये बताया कि निधि तिवारी की जलविहार कालोनी रायपुर में गत दिनों संदेहास्पद स्थिति में हत्या कर दी गई थी। इस प्रकरण में निधिकी हत्या अत्यंत अमानवीय, विभत्स एवं दर्दनाक तरीके से की गई। पहले उसे जहर देकर मारने का प्रयास किया गया, ना मरने पर डंडा, राड से मारनें फिर भी ना मरने पर कई लोगों द्वारा उसे पकड़कर गला घोट कर मारा गया उसके बाद निधि पर मिट्टी तेल डालकर जला दिया गया। पोस्टमार्टम में निधि के पेट में जहर अथवा नशीला पदार्थ मिला, उसके शरीर पर अनेक चोटों के निशान थे तथा गले पर लिगेचर मार्क पाया गया, गले को बेदर्दी से घोंटकर अथवा दबा कर मारा गया। फिर उसके बाद उपरोक्त तरीके से की गई हत्या के साक्ष्य को मिटाने के लिये मृत निधि के शरीर को कुछ घंटे बाद मिट्टी तेल डालकर जला दिया गया ताकि उसकी मृत्यु का कारण ऐसा प्रतीत हो मानो निधि ने मिट्टी तेल डालकर आत्महत्या कर ली हो। ये तथ्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मौकाए वारदात, घटनास्थल के लिए गए फोटोग्राफ, पोस्टमार्टम स्थल में मृत निधि के लिए गए फोटो तथा विडियो रिकार्डिंग मृतका के द्वारा अपने माता पिता को लिखे गये पत्र जिसमें निधि ने अपने पति व ससुरालियों पर जान से मारने की साजिश की जानकारी एवं आशंका, जिसका मूल कारण पति राजेश तिवारी का अपनी विधवा भाभाी रेखा तिवारी से अवैध संबंध तथा बार-बार निधि पर मायके से रूपये मंगाये जाने का दबाव व शारीरिक तथा मानसिक प्रताड़ना ही है। पूर्व में प्रताड़ना के कारण निधि अपने मायके में 2 वर्षों तक थी। परिजनों ने बताया कि प्रारंभ से ही निधि के पति राजेश तिवारी, जेठ सुधीर तिवारी, जेठानी सन्नी तिवारी, विधवा जेठानी रेखा तिवारी, पंकज शुक्ला करीबी रिश्तेदार, मीनू अवस्थी ननंद, मकान मालकिन दर्शन कौर अहलूवालिया, उसकी बेटी नीरू एवं सिम्मी अहलूवालिया बेटा सोनू अहूवालिया तथा पड़ोस का कार चालक प्रदीप नायक, तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश चौधरी एवं सहायक उपनिरीक्षक आर.एस. गिरी तेलीबांधा थाना और मेकाहारा के पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर चुरेन्द्र एवं डाक्टर मांझी की भूमिका अत्यंत संदिग्ध व आपत्तिजनक रही है। इन सबकी मिलीभगत से ही इस जघन्य हत्याकांड पर परदा डालते हुए उसे आत्महत्या निरूपित किया जा रहा है। उपरोक्त संदर्भ में मृतका निधि के पिता नेहरू नगर भिलाई निवासी सूर्यकांत शुक्ला, माता श्रीमती बेलारानी शुक्ला एवं मायके पक्ष के अन्य पीड़ित व दु:खित परिजनों ने पुलिस अधीक्षक रायपुर दीपांशु काबरा से मिलकर न्याय की गुहार की। महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, गृहमंत्री, प्रदेश एवं केन्द्र शासन, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ एवं राष्ट्रपति महोदय के पास भी तत्संबंधी शिकायतें प्रेषित कर, उक्त प्रकरण की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराने तथा उपरोक्त अपराधियों को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड में लेकर पूछताछ करने एवं कठोर सजा दिलाये जाने की मांग की है। भा.द.वि. की धारा 302 लगाकर हत्या का मुकदमा कायम करने तथा इस प्रकरण का रि-इन्वेस्टिीगेशन कराने की मांग की गई।
शिकायत की जांच में छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विभा राव ने दोनों पक्षों के लोगों को जांच हेतु 8 सितंबर को दुर्ग स्थित विश्राम भवन में उपस्थित होने को कहा था किंतु निधि तिवारी के ससुराल पक्ष से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ, अपितु निधि के मायके पक्ष के लगभग 25 सदस्यों ने महिला आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा और न्याय का गुहार लगाते हुए हत्या के समस्त साक्ष्यों को प्रस्तुत करके कहा कि वर्तमान में पति राजेश तिवारी के अलावा उपरोक्त हत्या एवं साक्ष्य मिटाने के अन्य आरोपी सहअभियुक्तों के विरूध्द पलिस द्वारा कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया और न तो कोई कठोर कार्यवाही की गई, ना ही निधि के ससुराल वालों के किसी भी सदस्यों के कोई भी बयान लिये गये। ना ही निधि की ग्यारह वर्षीय अबोध बालिका रितिका तिवारी को उसके नाना नानी अथवा मामा-मामी से ही मिलने दिया जा रहा है। हत्या के बाद निधि के शव को गठरीनुमा हालत में (छुपाकर) ले जाते हुए महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विभा राव ने स्वयं देखने की पुस्टि की हैं।
उन्होंने बताया कि तेलीबांधा पुलिस द्वारा जिला एवं सत्र न्यायालय के समक्ष जो चालान पेश किया गया उसमें मृतका निधि तिवारी की मौत से संबंधित घटनास्थल व पोस्टमार्टम स्थल में पुलिस द्वारा ली गई 43 फोटोग्राफ एवं विडियो रिकार्डिंग की सीडी प्रस्तुत नहीं की गई। यह प्रकरण सुनियोजित रूप से सोचविचार कर अनेक लोगों द्वारा इतनी जघन्य हत्या करके साक्ष्य मिटाने के लिये उसके शरीर को जलाकर नष्ट करने का है तथा कार्यवाही धारा 302 के तहत होनी चाहिये थी लेकिन पुलिस द्वारा धारा 306 लगाने के बाद धाराओं में फेरबदल कते हुए 498-ए तथा धारा 323 जैसी मामूली धाराएं लगाकर पुन: आरोपी राजेश तिवारी की जमानत हेतु आवेदन दिलाया गया जिसे माननीय जिला एवं सत्र न्यायालय रायपुर द्वारा पीड़ित पक्ष के विद्वान अधिवक्ता श्री विभाष तिवारी एवं शासकीय अभिभाषक श्री संतोष पाण्डेय के द्वारा कठोर आपत्ति जताते हुए साक्ष्य प्रस्तुत किये गए जिस पर विचार करने के पश्चात दोनों पक्षों के दलीलों को सुनकर माननीय न्यायाधीश श्री संदीप बक्शी ने आरोपी राजेश तिवारी की जमानत इस आधार पर खारिज करते हुए आदेश पारित कर कहा कि अभिलेख का अवलोकन करने से मृतका के परिजनों के बयान से य प्रतीत हो रहा है कि अभियुक्त का अपनी विवधा भाभी से गलत संबंध होने के कारण मृतका से तनावपूर्ण संबंध थे और अभियुक्त लगातार मृतका को मायके के रूपये पैसे लाने के लिए दबाव डालता रहा। इस संबंध में मृतका द्वारा अपने परिजनों को लिखा गया पत्र भी बरामद किया गया है। मृतका के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डाक्टर ने मृतका के शरीर में चोटें पाई है अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता श्री फरहान द्वारा प्रस्तुत जमानत हेतु उक्त न्याय दृष्टांत अभी इस मामले में अभियुक्त को लाभ नहीं दे सकता क्योंकि माननीय उच्च न्यायालय ने साक्ष्य के उपरांत गुण दोष के आधार पर अपनी राय व्यक्त की है अत: अभियुक्त का जमानत आवेदन पूर्व में 6 अगस्त 2010 को गुण दोष के आधार पर निरस्त किया जा चुका है। माननीय सत्र न्यायाधीश ने कहा- यह मामला गंभीर प्रकृति का है अत: अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य के प्रभाव एवं प्रकरण की परिस्थितियों को देखते हुए इस मामले में अभियुक्त को जमानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं हो रहा है फलस्वरूप जमानत के आवेदकअभियुक्त की ओर से प्रस्तुत आवेदन को आज दुबारा निरस्त किया जाता है।
पीड़ित पक्ष मृतका निधि तिवारी के पिता एस.के. शुक्ला, मां बेलारानी शुक्ला ने अत्यंत ही मार्मिक स्वर में कहा कि हमारी बेटी निधि को साजिश करके मारा गया और उसकी मृत्यु की सूचना हमें अथवा पुलिस को दिये बिना ही मृत्यु के साक्ष्य रफा दफा करते हुए उसके मृत शरीर को मेकाहारा के मरच्यूरी में ले जाकर जेठ सुधीर तिवारी, पंकजा शुक्ला, सन्नी तिवारी एवं रेखा तिवारी द्वारा रखवा दिया गया। इसी कारण मौकाये वारदात पर मृतका के शरीर का पुलिस द्वारा पंचनामा नहीं बनाया गया और अपराधियों द्वारा हत्या से संबंधित साक्ष्यों को आसानी से मिटाने का प्रयास किया गया। इस संबंध में मायके पक्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि निधि की हत्या दूसरी जगह करके शव को कमरे में रखकर हत्या संबंधी साक्ष्यों को मिटाने के लिये जला दिया गया है, लेकिन पुलिस उनके इस दृष्टिकोण की ओर नहीं देख रही है जबकि पंचनामा के समय मृतका का बेडरूम पूरी तरह से अस्त व्यस्थ था।

सोमवार, 20 सितंबर 2010

मंत्री का धौस दिखाया तो भाई की तबियत से पिटाई हुई...

प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के भाई योगेश अग्रवाल और उसके साथी सुनील तिवारी को यहां कवर्धा में स्थानीय लोगों ने जमकर पिटाई की। लात-घूसों के अलावा डंडा व बेल्ट का भी उपयोग हुआ। बाल खींचकर दोनों को पटक-पटक कर बेदर्दी से मारा गया। घटना होटल मोहिनी पैलेस की है। मारपीट में शामिल होने के आरोप में गुड्डा खान और उसके साथियों के खिलाफ जुर्म दर्ज कर लिया गया है।
घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार फिल्म व्यवसाय से जुड़े योगेश अग्रवाल और सुनील तिवारी अपनी टीम के साथ कवर्धा आए हुए थे। बताया जाता है कि 13 सितम्बर की शाम उनकी गुड्डा खान व उनके साथियों के साथ विवाद हो गया। सूत्रों का दावा है कि चूंकि योगेश अग्रवाल के भाई बृजमोहन अग्रवाल प्रदेश सरकार के दमदार मंत्री माने जाते हैं इसलिए उनकी टीम के लोगों में जबरदस्त जोश होता है और इसी जोश के चलते यह घटना हुई।
सूत्रों के मुताबिक वाहन पार्किंग को लेकर हुए विवाद में किसी ने योगेश को भी बुलवा लिया और कहा जाता है कि बातचीत के दौरान किसी ने कह दिया कि अबे उलझना नहीं यह बृजमोहन अग्रवाल का भाई है और धक्का भी दे दिया धक्का खाते ही स्थानीय युवक आग बबूला हो उठे और देखते ही देखते होटल मोहिनी पैलेस दंगल में बदल गया।
बताया जाता है कि युवकों ने योगेश अग्रवाल और सुनील तिवारी की पिटाई शुरु कर दी और होटल में तोड़फोड़ मचा दी टीम के अन्य सदस्य सकते में आ गए बताया जाता है कि इस बीच योगेश और सुनील भागने की कोशिश करने लगे तो युवकों ने उनको बाल पकड़कर खींचा और जिसके हाथ में जो आया उससे पिटाई शुरु कर दी। इस बीच कुछ लोगों ने बीच बचाव किया लेकिन तब तक योगेश और सुनील की तबियत से पिटाई हो चुकी थी। चूंकि मंत्री का भाई पिटा गया था इसलिए पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई और अपराध दर्ज कर कार्रवाई की।
सूत्रों की माने तो मंत्री भाई योगेश और उसकी टीम को तीसरी बार मार खाना पड़ा अन्यथा इस तरह का विवाद आए दिन होते रहता है। शूटिंग के दौरान बिलासपुर, भोरमदेव, खल्लारी व डोंगरगढ़ में भी योगेश के टीम के युवाओं का विवाद चर्चा में रहा है। सत्ता का धौंस वैसे तो नया नहीं है। विवादास्पद जमीन से लेकर चेम्बर में कब्जे को लेकर पूर्व अध्यक्ष के साथ भी दादागिरी की चर्चा आए चर्चा में रही है। इससे पहले स्टेशन चौक रायपुर में भी उसकी पिटाई हो चुकी है। बहरहाल योगेश अग्रवाल व सुनील तिवारी को पिटने वाले के खिलाफ कार्रवाई तो की जा रही है लेकिन आम लोगों में इसकी कई तरह की प्रतिक्रिया है और कहा जा रहा है कि मामला कभी भी गंभीर मोड़ ले सकता है।

रविवार, 19 सितंबर 2010

सस्ती है जान...

पिछले दिनों बिलासपुर में 6 पुलिस वालों ने टाकिज के सुरक्षा कर्मी को इतनी बेदर्दी से पीटा कि मौके पर ही उसकी मौत हो गई। किसी भी संवेदनशील व्यक्ति के लिए यह खबर भीतर तक झिझोंर देने वाली खबर है। क्या किसी भी सभ्य समाज में इस तरह की सरेआम गुण्डागर्दी की अनुमति है? शायद सभी का जवाब कुछ नहीं है? यह इसलिए क्योंकि यह नक्सल प्रभावित राय है। नक्सली भी यही सब कर रहे हैं? और अब सरकार भी?
पूरा वाक्या बिलासपुर के पुलिस कप्तान जयंत थोरात को कटघरे में खड़ा करने के लिए काफी है क्योंकि शुरुआत पुलिस कप्तान और सुरक्षा गार्ड महेन्द्र के बीच नोंक-झोंक से हुई। यदि सूत्रों पर भरोसा करे तो सुरक्षा गार्ड भीड़ को कंट्रोल करने के दौरान पुलिस कप्तान से उलझ गया, शायद उसने बदतमीजी भी की होगी? कप्तान ने उन्हें झिड़कते हुए मातहतों को इशारा किया और वहां से चले गए? अब क्या था। पुलिस कप्तान से बदतमीजी का दंड महेन्द्र को भुगतना ही था? लेकिन सिर्फ बदतमीजी की इतनी बड़ी सजा?
यदि इस तरह की घटना कोई और करता तो घर-परिवार सहित सभी थाने में बिठा दिए जाते लेकिन मामला पुलिस कप्तान और आधा दर्जन पुलिस कर्मियों का था इसलिए मौत पर जुर्म दर्ज करना जरूरी था इसलिए सिर्फ दो पुलिस वालों पर ही जुर्म दर्ज कर मामला ठंडा करने की साजिश रची गई। लेकिन जब आम लोग सड़क पर उतर आए तो गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने घटना की दंडाधिकारी जांच की घोषणा कर दी। सबसे दुखद पहलू तो इस मामले में मुख्यमंत्री की भूमिका की रही। आए दिन सड़क दुर्घटना या अन्य घटना में मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करने वाले डा. रमन सिंह इस मामले में खामोश है?
वैसे भी इस मामले में बिलासपुर के लोगों की तारीफ करनी होगी कि उनसे महेन्द्र की मौत पर चुप नहीं रहा गया। वरना बस्तर से सरगुजा और राजधानी में मिल रहे लाशों ने आम लोगों को इतना संवेदनशील कर दिया है कि किसी को इससे कोई फर्क ही नहीं पड़ता? छत्तीसगढ़ में सस्ती होती जान पर अब न कोई बोलता है न सरकार से सवाल ही करता है? सरकार तो बस भ्रष्ट अधिकारियों का पालनहार हो गया है। मानों सरकारी कर्मचारी अधिकारी नहीं हुए वे दामाद हो गए हैं? कुछ भी करो सेवा बरकरार रहेगी और सम्मान में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। तभी तो आईएएस नारायण सिंह सजा के बाद भी पदोन्नत किए जाते हैं? आईएएस बाबूलाल अग्रवाल को तत्काल बहाल कर दिया जाता है?
राय बनने के बाद जिस तरह से सरकार ने आम लेगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया है कभी सरकारी विकास तो कभी औद्योगिक विकास के नाम पर खेती की जमीनों का बंदरबाट किया है वह आने वाले पीढ़ियों के लिए कतई शुभ संकेत नहीं हो सकते? राजनीति ने गलत-सही के फैसले पर ताला जड़ दिया है? अजीत जोगी पर पैर तुड़वाने के आरोप लगाने वाले आदिवासी नेता नंदकुमार साय को भी महेन्द्र की मौत पर कुछ नहीं कहना है और न ही हंगामा खड़ा करने वाले भाजपाई भी कुछ कहने से रहे। क्योंकि मंडल, कल्लुरी, मुकेश गुप्ता सहित दर्जनभर आईएएस, आईपीएस को पानी पी-पी कर कोसने वाले भाजपाईयों के राज में इन्हीं की चलती है जो अधिकारी कांग्रेसी राज में दुखी थे वे अब भी दुखी है? मलाई तो छत्तीसगढ़ में उन्हें ही मिलेगा जो चोर होगा, तिकड़मी होगा?

एचआर प्रकरण की फाईल गायब होने से शिक्षा विभाग में हड़कम्प

दंतेवाड़ा शिक्षा अधिकारी डा. एच.आर. शर्मा की नियुक्ति संबंधी फाइल गायब होने से शिक्षा विभाग में हड़कम्प मच गया है। बताया जाता है कि इस मामले में एचआर शर्मा को बचाने उच्च स्तर पर तिकड़म हुआ है।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट द्वारा संविलियन रद्द करने के बाद भी डा. एच.आर. शर्मा दंतेवाड़ा में जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर बैठे हैं। बताया जाता है कि किसी भी सरकारी विभाग में नौकरी नहीं होने के बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी बनाए गए डा. शर्मा पर कई तरह के आरोप लगाए गए है। लेकिन उच्च स्तरीय लेन देन के चलते कार्रवाई नहीं हो रही है। तत्कालीन सचिव नंदकुमार और सी.के. खेतान की भूमिका को भी संदिग्ध बताया जा रहा है और एचआर शर्मा के संविलियन व पदस्थापना से संबंधित फाइल के गायब होने पर उच्च स्तरीय घालमेल का संदेह व्यक्त किया जा रहा है।
इधर बुलंद छत्तीसगढ़ के द्वारा एच.आर. प्रकरण की फाइल गायब होने संबंधी खुलासे से शिक्षा विभाग में हड़कम्प मच गया है। इस संबंध में शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पर भी एचआर शर्मा को बचाने का आरोप लगाया जा रहा है। शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से इस संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की गई लेकिन भटगांव चुनाव में व्यवस्तता के चलते उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

गडकरी की चेतावनी से रमन-मोहन सकते में...

भले ही ऊपरी तौर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी का दौरा ठीक-ठाक निपट गया हो लेकिन पार्टी के भीतर राष्ट्रीय अध्यक्ष की चेतावनी से प्रदेश के मुखिया डा. रमन सिंह व पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की हालत खराब है। बताया जाता है कि जाते-जाते राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दोनों ही नेताओं को सुधर जाने की चेतावनी दी है।
वैसे तो कार्यकर्ता सम्मेलन व सांसदों से मुलाकात के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी के संबोधन को लेकर अलग-अलग अर्थ लगाए गए हैं। भाजपा सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सरकार के तमाम प्रयास के बाद भी यह समझ गए हैं कि छत्तीसगढ भाजपा में कहीं कुछ ठीक नहीं चल रहा है। रहा सहा कसर बृजमोहन अग्रवाल और राजेश मूणत के कार्यकर्ताओं के बीच चली खूनी संघर्ष ने पूरी कर दी है।
बताया जाता है कि कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान ही नीतिन गडकरी ने डा. रमन सिंह को चेतावनी दी है कि एक ही चेहरे को बार-बार दिखाने से वोट नहीं मिलते और न ही दो रुपए किलो चावल से ही वोट मिलते हैं। उन्होंने अपरोक्ष रुप से भ्रष्टाचार में लिप्त नेताओं पर भी कटाक्ष किया। सत्ता और संगठन की खामियां भी सामने आई है और उन्होंने सरकार द्वारा संगठन चलाने को लेकर भी नाराजगी व्यक्त की है। जबकि सांसदों की नाराजगी को लेकर भी वे गंभीर दिखे। भाजपा सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जाते-जाते डॉ. रमन सिंह और बृजमोहन अग्रवाल को चेतावनी दी है कि वे पार्टी हित में सुधर जाएं। हालांकि यह सब पार्टी के एक सांसद ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा है लेकिन कहा जाता है कि मारपीट को लेकर भी गडकरी काफी नाराज थे।