रविवार, 7 नवंबर 2010

भास्कर का फरमान, प्रेस हटाओ!

वैसे तो अपने नए-नए फरमान को लेकर छत्तीसगढ़ के अखबार मालिक हमेशा ही सुर्खियों में रहे हैं। हरिभूमि ने हर शनिवार को अपने कर्मचारी पत्रकारों व फोटोग्राफरों के ही लिए फरमान जारी किया है कि वे इस दिन सफेद टी-शर्ट जिसमें हरिभूमि लिखा हो ही पहना करें। पत्रिका ने भी कोशिश की कि ग्रेजुएट ही रखेंगे लेकिन दोनों फेल हो गए अब भास्कर ने अपने कर्मचारियों, पत्रकारों और फोटोग्राफरों को नया फरमान जारी किया है कि वे अपनी वाहन में प्रेस नहीं लिखेंगे।
हालांकि भास्कर का यह फरमान अच्छी शुरुआत है। जब दूधवाले, धोबी या प्रिटिंग प्रेस वाले भी अपने वाहनों में प्रेस लिखा रहे हो तो इसके दुरुपयोग को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन इस फरमान को लेकर यहां बेहद असंतोष है। अब नौकरी करनी हो तो मालिक-संपादकों के फरमान मानने ही पड़ेंगे। इसके एवज में भले ही झंझट हो या कोई भुगते मालिक को क्या फर्क पड़ता है। देखना यह है कि यह फरमान कितने दिनों तक चलता है।
जनसंपर्क सचिव का डर...
मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले एन बैजेन्द्र कुमार को यह डर हमेशा ही सताता रहता है कि कहीं जनसंपर्क में बैठे वर्तमान चंडाल चौकड़ी कहीं कुछ ऐसा वैसा न कर दें जिससे जवाब देना मुश्किल हो जाए। पहले ही घपलेबाजी यहां कम नहीं हुई है उसकी लीपापोती में पसीने छूट गए है अब फोटोग्राफरों की नियुक्ति को लेकर स्वराज दास की भूमिका पर सवाल उठ रहे है। कुरैटी के कारनामों की चर्चा भी कम नहीं है। दिक्कत ये है कि छोटे कर्मचारी इन चंडाल चौकड़ी से अलग दुखी है और अपने से होशियार को कोई पसंद नहीं करता तो हाशिये पर रखना मजबूरी है।
नवभारत और नार्को...
नवभारत ने बैंक घोटाले में लिप्त सिंहा के नार्कों टेस्ट की सीडी होने का दावा कर स्टोरी लगा दिया और कह दिया कि जिसे देखना है वे दफ्तर आ जाए। दफ्तर आने वालों को निराशा लगी और ये लोग दावा कर रहे हैं कि अब तक सेटिंग से दूर की ईमेज बनाने वाले नवभारत के रंगा-बिल्ला ने सेटिंग कर ली है। इस खबर से रंगा-बिल्ला को दस लाख मिला हो या नहीं ये तो रंगा-बिल्ला जाने लेकिन सीडी की क्लिपिंग लाने वाले रमेश बैस के करीबी पत्रकार दुखी हैं? उनका दुख दूसरे से सेटिंग की है या सीडी नहीं मिल पाने का यह तो वही जाने लेकिन दुष्प्रचार में यही सबसे आगे है।
और अंत में...
पत्रिका और नेशनल लुक की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि भास्कर के द्वारा इनके हॉकर खरीद लिए जाते हैं। अब यह भास्कर कर रहा है या नवभारत इसे लेकर आम चर्चा है। क्योंकि इस लड़ाई में नवभारत के मजे हैं।

बुधवार, 3 नवंबर 2010

दस साल पहले भी हुआ था भाजपा शर्मसार

मोहन के वरदहस्त का कारनामा...!
मोहन के खरीद-फरोख्त पर मुहर...!
 ऐसा नहीं है कि बृजमोहन अग्रवाल के संरक्षण में चल रहे लोगों ने सलमान खान मामले में पहली बार भाजपा को शर्मसार किया हो। इससे ठीक दस साल पहले भी बृजमोहन अग्रवाल के समर्थकों ने भाजपा को तब शर्मसार किया था जब नेता प्रतिपक्ष के चुनाव में नंदकुमार साय को चुना गया था। इस हंगामें व तोडफ़ोड़ की वजह से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को पलंग के नीचे छीपकर जान बचानी पड़ी थी जबकि पार्टी ने दर्जनभर लोगों को निलंबित किया था।
इस साल राज्योत्सव में अपराधिक छवि वाले सलमान खान को मंच पर स्थान देने को लेकर भाजपा के सिद्धांत कटघरे में हैं। इस घटना ने न केवल भाजपाईयों को शर्मसार किया है बल्कि प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। हालात यह है कि इस वजह से न तो भाजपाईयों को जवाब देते बन रहा है और न ही सरकार के पास ही कोई जवाब है। ज्ञात हो कि राज्योत्सव के आयोजन की पूरी जिम्मेदारी बृजमोहन अग्रवाल के संस्कृति विभाग की है और चर्चा इस बात की भी है कि यह सब अचानक नहीं हुआ है। कब सलमान खान आना है और किस तरह से सलमान खान का स्वागत होगा यह सब बृजमोहन अग्रवाल की जानकारी में तय हुआ है।
ऐसा नहीं है कि बृजमोहन अग्रवाल ने पार्टी को पहली बार इस स्थिति में लाया है। उनकी कार्यशैली हमेशा ही विवादों में रही है इससे पहले जब राज्य निर्माण हुआ तब भी बृजमोहन अग्रवाल को उनके समर्थक नेता प्रतिपक्ष के रुप में पेश किए थे और जब नरेन्द्र मोदी के प्रभार ने नेता प्रतिपक्ष बृजमोहन की बजाय नंदकुमार साय को बना दिया। इस बौखलाए बृजमोहन समर्थकों ने भाजपा के एकात्म परिसर में हंगामा और तोडफ़ोड़ किया। कई लोगों के साथ बदसलूकी और मारपीट भी हुई। यही नहीं नरेन्द्र मोदी जैसे कद्दावर नेता की पलंग के नीचे छीपकर अपनी जान बचानी पड़ी। तब चर्चा इस बात की भी रही कि यह सब बृजमोहन अग्रवाल की सहमति से हुआ। तब भाजपा ने इसे गंभीरता से लेते हुए बृजमोहन समर्थकों की जमकर खबर ली थी और करीब दर्जनभर लोगों को पार्टी से निलंबित किया था। बृजमोहन अग्रवाल ने तब भी इस मामले में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर हीरों बने थे।
ऐसा नहीं है कि बृजमोहन अग्रवाल ने पार्टी को विवाद में नहीं फंसाया है हाल ही में निगम सभापति के चुनाव में भी उस पर पार्षदों के खरीद फरोख्त का आरोप लगा लेकिन सभापति बनाने के कारण इस खरीद फरोख्द को कसके अच्छे कारनामें के रुप में प्रस्तुत किया गया। इस बार भी सलमान को लेकर फजीहत तो हुई लेकिन उसके प्रभाव की वजह से मुख्यमंत्री व पार्टी संगठन कुछ भी कहने से बच रही है।
सलमान का सम्मान और नत्था का...
छत्तीसगढ़ सरकार की नीति है या संस्कृति विभाग की यह तो वही जाने लेकिन सलमान के लिए पलक पखड़े बिछाने वाले संस्कृति विभाग ने पिपली लाइव के हीरों मोहनदास मानिकपुरी उर्फ नत्था के मामले में अपने को अलग कर लिया। कई छत्तीसगढिय़ा कलाकार की उपेक्षा ने राज्योत्सव के आयोजकों के करतूतों पर सवाल उठाने लगे है।
जब मोहन ने योगेश को राज्योत्सव से दूर रहने कहा?
हर साल राज्योत्सव में अपना जलवा दिखाने वाले लाड़ले योगेश अग्रवाल ने इस साल राज्योत्सव से दूरी बनाई है तो इसकी वजह योगेश की वजह से मोहन पर लगने वाला आरोप और बदनामी है। हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक हर साल राज्योत्सव के नाम पर लुटोत्सव की संज्ञा देने और छिछालेदर से संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल काफी खिन्न है। कहा जाता है कि उन्होंने इस बार अपने लाड़ले भाई योगेश अग्रवाल से साफ कह दिया था कि वह इस बार राज्योत्सव बनाम लुटोत्सव से अपने को दूर ही रखे। इसलिए योगेश ने इस बार दूरी बना ली।
ज्ञात हो कि पिछले साल योगेश अग्रवाल को लेकर जबरदस्त विवाद हुआ था। दलाली से लेकर संस्कृति आयुक्त से उनकी लड़ाई तक खबरों की सुर्खियों में रही यही नहीं एक बड़े कलाकार के साथ दुव्र्यवहार की चर्चा भी जोरों पर रही और योगेश की वजह से राज्योत्सव को लुटोत्सव की संज्ञा दी जाती रही। हमारे सूत्रों के मुताबिक लगातार हो रही बदनामी व छिछालेदर की वजह से ही योगेश को दूर रखा गया।
मिसेस सीएम ने बचा लिया...
कहते हैं सलमान खान को सीएम हाउस लाने के लिए रमन सिंह के बच्चों ने जिद पकड़ ली थी लेकिन मिसेस सीएम श्रीमती वीणा सिंह ने साफ कह दिया कि ऐसे लोगों को बुलाने से बदनामी होगी और उनके इस कठोर रुख पर रमन सिंह को सहमत होना पड़ा। हालांकि चर्चा इस बात की है कि इस मामले में बाप-बेटे के बीच विवाद हुआ।

मंगलवार, 2 नवंबर 2010

छत्तीसगढ़ के लिए काला अध्याय

 छत्तीसगढ़ में पिछले पखवाड़े भर में जिस तरह से कारनामें हुए वह किसी भी राजनैतिक दल के लिए शर्मनाक तो है ही राजनैतिक दलों की बेशर्मी की हदें भी है। इन दो घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्य निर्माण के समय वीसी शुक्ल के फार्म हाउस और एकात्म परिसर में बृजमोहन अग्रवाल के समर्थकों के द्वारा मचाए हंगामें की याद तो ताजा की ही है साथ ही इससे यह साबित भी हुआ है कि किस तरह से एक नेता के करतूतों से पूरी पार्टी या सरकार को शर्मसार होना पड़ता है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के प्रभारी नारायण सामी पर कालिख पोतने की शर्मनाक घटना की सुर्खियों से छत्तीसगढ़ अभी उभर भी नहीं पाया था कि राज्योत्सव के आयोजकों ने सलमान खान जैसे अपराधिक रिकार्ड वाले को राज्योत्सव में मंच देकर छत्तीसगढ़ को शर्मसार कर दिया। मामला सिर्फ इतना ही होता तो सरकार अपनी करतूतें छुपा लेती लेकिन इससे भी बढक़र शर्मनाक स्थिति तब निर्मित हो गई जब सलमान खान के स्वागत के लिए राज्यपाल मुख्यमंत्री तक को लाईन में लगा दिया गया। इतने में ही मामला शांत नहीं हुआ। इससे बढक़र सलमान खान की वह बोल है जो उन्होंने राज्योत्सव के मंच से कहा। सिर्फ एक कंपनी के विज्ञापन के लिए पहुंचे सलमान खान ने जिस तरह से अपने दस मिनट में जो दमदारी दिखाई वह सरकार के अस्तित्व पर ही सवाल उठाते है।
सवाल यह भी उठने लगा है कि राज्योत्सव के आयोजन का भार बृजमोहन अग्रवाल जैसे दमदार मंत्री के विभाग के कंधे पर है इसके बाद भी यह शर्मनाक स्थिति निर्मित हुई है। छत्तीसगढ़ व सरकार को शर्मसार करने वाले इस वाक्ये ने कई सवाल उठाए हैं। क्या यह सब बृजमोहन अग्रवाल की सहमति से हुआ है। यह सवाल इसलिए भी उठाए जा रहे हैं क्योंकि इस मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा नहीं है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में ऐसा पहली बार हुआ है। इससे ठीक दस साल पहले भी दोनों पार्टियों में दबंगों के समर्थकों के द्वारा इस तरह का कारनामा किया जा चुका है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकार में बैठे मंत्री की दमदारी के बावजूद राज्योत्सव जैसे कार्यक्रम में किसी अपराधी को न केवल जगह मिली है बल्कि उसके स्वागत के लिए राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री तक को लाईन लगानी पड़ी हो। इस मामले में देर से ही सही कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर सीधा हमला किया है।
जब डीजीपी को गुस्सा आया...
सलमान खान जैसे अपराधिक पृष्ठभूमि को बुलाए जाने के बाद राज्योत्सव में पूरी व्यवस्था अस्त व्यस्त रही और इस अव्यवस्था से डीजीपी विश्वरंजन को इतना गुस्सा आया कि वे कार्यक्रम बीच में ही छोडक़र चले गए। जबकि इस समय सलमान खान मंच पर मौजूद थे। इतना ही नहीं उन्हें मनाने पहुंचे जी.एस. बाम्बरा को गाली तक सुननी पड़ी।
लाठी खानी पड़ी...
वैसे तो दाउद और कसाब को भी देखने भीड़ जुट जाती है ऐसे में सलमान खान को देखने वालों की कमी नहीं थी। पुलिस व सरकार की अव्यवस्था के चलते जब भीड़ बढ़ गई तो लाठियां भांजनी पड़ी। कई लोगों की पिटाई हुई। गांव-गांव से आने वाले बाद में सरकार को कोसते वापस लौटे।
मौत कैसे हुई...
राज्योत्सव के पहले ही दिन पोड़ निवासी साहू युवक की मौत हो गई। पहले तो उसकी मौत की करंट लगने को बताया गया लेकिन बाद में यह भी चर्चा हुई कि पुलिस द्वारा लाठी भांजने से हुई भगदड़ के दौरान उसकी मौत हुई। मौत कैसे हुई कोई बोलने को तैयार नहीं है।
वाह रे सरकार...
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्योत्सव में जिस तरह से पटाखे फोड़े वह सरकार की कथी व करनी को तो दर्शाता ही साथ ही प्रदूषण के प्रति सरकार की लापरवाही को भी उजागर करता है। भाजपा सरकार के कई मंत्री व विधायक दीपावली में पटाखा फोडऩे पर होने वाले प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते नहीं थकते लेकिन यही सरकार राज्योत्सव में जिस पैमाने पर पटाखा फोडक़र प्रदूषण फैलाने का काम किया है वह दुखद है।

खनिज के ‘खा’

 लगता है छत्तीसगढ़ सरकार ने खनिज मामले में तय कर लिया है कि खदानों को लीज में देने की बजाय अवैध उत्खनन से पैसा कमाया जाए। तभी तो यहां लीज देने की प्रक्रिया इतना जटिल कर दिया है कि सालों से लीज देने का आवेदन लंबित है। यही नहीं आए दिन खनिज को लेकर नई-नई नीतियां बनाई जाती है ताकि खनिज की चोरी चलता रहे अधिकारियों की जेब गरम होते रहे। चूंकि यह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पास है इसलिए भी अधिकारियों की दादागिरी चरम पर है।
छत्तीसगढ़ में जिस तरह से लूट मची है उसमें खनिज विभाग के अधिकारी भी पीछे नहीं है। खनिज चोरी की बढ़ती घटना से चिंतित नजर आने वाले अधिकारियों की एफआईआर दर्ज कराने की घोषणा भी टांय-टांय फिस्स हो चुका है। एफआईआर कराने की बात तो दूर नई राजधानी जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र से भी खनिज चोरी को वह नहीं रोक पाई है।
ज्ञात हो कि नई राजधानी क्षेत्र व उससे लगे गांवों में मुरुम व गिट्टी उत्खनन पर प्रतिबंध है लेकिन आज भी सैकड़ों ट्रके मुरुम व गिट्टी शहर में बेधडक़ परिवहन किया जा रहा है। खनिज नाका तो अवैध उत्खनन को रोकने की बजाय वसूली व कमीशनखोरी का अड्डा बन चुका है। यही नहीं दुर्ग जिले के नंदनी अहिवारा क्षेत्र से भी प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकें मुरुम व गिट्टी लेकर रायपुर आ रही है। चूंकि इन दोनों ही क्षेत्रों से आने वाले मुरुम-गिट्टी की कीमत अत्यंत कम है इसलिए भी सडक़ निर्माण से लेकर भवन निर्माण में इसका बेतहाशा उपयोग हो रहा है। आश्चर्य का विषय तो यह है कि कुम्हारी बीटीओ नाके में 100 रुपए टैक्स वसूलने के बाद भी रायपुर में सस्ते में कैसे आ रहा है यह जांच का विषय है।
इधर उड़ीसा व महासमुंद में खदान चलाने वाले एक व्यापारी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में वही काम कर सकता है जो अवैध काम करेगा हमारे जैसे नियम में काम करने वालों के लिए जगह नहीं है। उन्होंने खदान लीज पर देने की प्रक्रिया को भी घुमावदार बताते हुए यहां तक कहा कि वे यहां की खदान को सिर्फ इसलिए चालू नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनसे बेवजह पैसे मांगे जाते हैं। अवैध उत्खनन करने वालों से सांठगांठ की वजह से ही लीज देने की प्रक्रिया को जटिल किया गया है और लीज लेने का आवेदन देने वालों को आफिस का चक्कर लगवाया जा रहा है।
चर्चा तो यह है कि सैकड़ों एकड़ जमीन लीज पर लेने वालों के लिए पूरा अमला लग जाता है और निजी वन जमीनों तक को लीज पर दे दिया जाता है। इसका उदाहरण पलारी के पास स्थित गांव रिंगनी तथा चुआं, मालूकोना, देवरानी जेठानी नामक गांव तक को लीज पर दे दिया गया है और यह सब मंत्री से लेकर अधिकारियों तक से सांठगांठ कर की जाती है।

रविवार, 31 अक्टूबर 2010

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर हार्दिक बधाई

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर हार्दिक बधाई 

शनिवार, 30 अक्टूबर 2010

सीएम साहब! बधाई हो 10 साल का...

1 नवम्बर को छत्तीसगढ़ के स्थापना का दस साल पूरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बधाई हो। छत्तीसगढ़ के स्थापना का दस साल पूरा हो गया। अखबार वाले भी खुश है। उन्हें भी बधाई हो। फिर राज्योत्सव के नाम पर लाखों रुपए के विज्ञापन मिल जाएंगे। सरकारी खजानों से राज्योत्सव की धूम इस बार जोरदार रहेगी। रहनी भी चाहिए। सलमान खान जैसे सुपर स्टार को बुलाया जा रहा है। सब कुछ ठीक ठाक है। राज्य इन दस सालों में बहुत तरक्की की है। फिर क्यों नहीं राज्योत्सव मनाना चाहिए। यही बहाने हम दूसरे प्रदेश की संस्कृति को जान समझ लेंगे। आखिर आम छत्तीसगढिय़ा फिर कब देख पाएगा सलमान खान को।
डा. रमन सिंह सबसे ज्यादा बधाई के पात्र हैं सलमान खान को दिखाने के लिए। संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को छत्तीसगढिय़ा बेवजह कोसते रहते हैं। अरे सुआ नाचा गम्मत तो रोज देखते रहते हैं। बाहर के कलाकारों को देखने समझने का तो यही मौका है। फिर छत्तीसगढ़ कोई गरीब प्रदेश तो है नहीं कि बाहर के कलाकारों को मनमाने ढंग से रुपए न दे सके। बाहर के कलाकारों को भी तो लगना चाहिए कि हमारे प्रदेश के लोग कितने उदार है स्वयं फ्री फंड में काम करते हैं लेकिन मेहमानों को उनकी औकात से अधिक पैसा दे सकते हैं।
अखबार वाले बेवजह यहां के कुछ लोक कलाकारों को प्रश्रय देते हैं। छोटी सोच को तो अखबार में जगह ही नहीं मिलनी चाहिए और न ही सरकार के खिलाफ ही कुछ छापना चाहिए। पत्रिका ने आकर सब गड़बड़ कर दिया वरना सब गुड-गॉड चल रहा था। दो की लड़ाई में जबरदस्ती छापना पड़ रहा है। लेकिन सीएम डॉ. रमन साहब भी कम नहीं है वे भी जानते है कि ये सब जो घोटालों का पर्दाफाश हो रहा है वह कार्रवाई करने के लिए नहीं बल्कि अपनी कमीज को ज्यादा सफेद बताने की लड़ाई है। 10 साल बिना कार्रवाई के निपट गया। आगे का साल भी निपट जाएगा। बताते रहो मंत्रियों को दुष्ट और अधिकारियों को भ्रष्ट क्या फर्क पड़ता है? कार्रवाई ही जब नहीं होनी ही है। सीएम साहब! ठीक सोचते हैं हर विभाग के भ्रष्ट कारनामों को केवल अखबार के छपने के आधार पर कार्रवाई की जाती रही तो चल गया विभाग।
अब पीएचई का ही मामला ले पत्रिका बेवजह पीछे पड़ गया है। कमल विहार कितनी अच्छी योजना है और अच्छे काम में थोड़ी बहुत गलती होती ही है उसको तिल का ताड़ बना रहे हैं। गली-गली में बाबूलाल गली छाप पर नवभारत क्या साबित करना चाहता है। बेवजह शराब के खिलाफ अखबार लिख रहा है। अब शराब पीकर नशे में कोई हत्या कर दे तो इसमें डॉ. साहब की कहां गलती है वे तो ठेका दे दिए हैं अब बेचने वाले जाने और पीने वाले? जबरदस्ती कहा जा रहा है कि शराब की वजह से हर माह सौ-दो सौ लोग मार रहे हैं। आंकड़े बता कर आम लोगों को भ्रमित करने वालों को तो पकड़-पकड़ कर पिटना चाहिए। गृहमंत्री ननकीराम कंवर की नाराजगी डीजीपी विश्वरंजन से हैं और वे गुस्सा एसपी को निकम्मा और कलेक्टर को दलाल कहकर उतार रहे हैं इतने में भी बात नहीं बनी तो थानेदारों पर आरोप लगाने लगे कि वे शराब माफियाओं के इशारे पर चल रहे हैं।
नगर भैय्या बृजमोहन अग्रवाल के तो पीछे ही पड़ गए हैं लोग। जब कांग्रेस के समय सडक़ उखड़ती थी तब कोई नहीं बोलता था और न ही शिक्षा व्यवस्था पर ही सवाल उठाता था। कोई ये नहीं कहता कि एक आदमी आधा दर्जन से ज्यादा विभाग मुस्तैदी से संभाल रहा है। उल्टे उसके विभाग के विवादास्पद अधिकारियों को उनसे संबंध जोडऩा कितना उचित है। जब विभाग में विवादास्पद और भ्रष्ट लोगों का जमावड़ा हो तो कोई इन्हें हटाकर कैसे काम कर सकता है आखिर विभाग चलाना कोई मजाक तो नहीं है।
अब किसानों के नाम पर बेवजह लोग राजनीति कर रहे हैं। अरे भई चुनाव था इसलिए कह दिया 270 रुपए बोनस देंगे। चुनाव में तो ऐसा बोला जाता है। फिर अब किसान किसान कहां रह गए हैं। लोग धंधा-नौकरी कर रहे हैं। गांव-गांव तक सडक़ें इसलिए तो बनाई है कि किसान भी शहर का दर्शन कर सके। अब चप्पू साहू खुद किसान है इसके बाद भी लोगों को उन पर भरोसा नहीं है वे जानते हैं कि किसानों को बोनस से कुछ हासिल नहीं होने वाला। वे जानते हैं कि खेती से सिर्फ घाटा होना है इसलिए खेती की जमीन उद्योगों को दी जा रही है। वे जानते हैं कि यूरिया से खेत बर्बाद होता है इसलिए तो वे दुकानों की अनियमित सप्लाई पर ध्यान नहीं देते। बेवजह लोग किसान मोर्चा बनाकर राजनीति कर रहे हैं। लोगों को तो बहाना मिल गया है कि बृजमोहन अग्रवाल हरियाणवी हैं इसलिए छत्तीसगढ़ की उपेक्षा कर रहे हैं। कोई ये नहीं देख रहा है कि रात-रात भर जाग कर आदमी मेहनत कर रहा है। मंत्री है भई कोई मजाक नहीं है कि सुबह से लोगों से मिलने निकल जाए।
डॉ. साहब तो गांधी जी के सच्चे अनुयायी है इसलिए वे किसी की बात ही नहीं सुनते। गांधी दर्शन से लबरेज डॉ. साहब ने गांधी जी के तीन बंदरों के सिद्धांत को आत्म सात कर लिया है बुरा न देखो, बुरा न सुनों, बुरा न बोलो? कभी डाक्टर साहब के मुंह से किसी के लिए अपशब्द सुना है फिर वे क्यों किसी अधिकारी के खिलाफ सुनेंगे और मंत्री तो उनकी अपनी पार्टी के हैं? जो लोग नाराज है या भ्रष्टाचार से दुखी है वे बेवजह दुखी है घर का मामला है मना लिया जाएगा। और रहा सवाल देखने का तो डॉ. साहब ने तो सत्ता पाते ही आंखे बंद कर ली थी क्योंकि वे जानते है आंख खोलते ही सत्ता की बुराई दिखेगी और पिछली सरकार के काले कारनामों पर कार्रवाई करनी पड़ जाएगी। इसलिए उन्होंने तब से आंखे बंद कर ली है और फिर कांग्रेसी कोई पराये थोड़ी न है? पता नहीं कब सत्ता बदल जाए तो? इसलिए बदले की राजनीति तो होनी ही नहीं चाहिए? आखिर कांग्रेसी भी तो सत्ता की राजनीति ही कर रहे हैं। डॉ. साहब भी जानते हैं कि कांग्रेसी गांधी जी के सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है। वह भी न बुरा देखती है न सुनती है न बोलती है? इसलिए चिंता आम लोगों की करना चाहिए और इसकी चिंता पूरी सिद्दत से की जा रही है एक-दो रुपया किलो चावल दे दो। पेट भरा रहेगा तो सब खुश और जो खुश नहीं है उनके लिए गांव-गांव में दारू तो है ही। दस साल में सब गुड-गॉड है अमन चैन शांति है इसलिए एक बार फिर डॉ. साहब और उसकी पूरी टीम को बधाई!

गुरुवार, 28 अक्टूबर 2010

छवि में रमन आगे तो भ्रष्टाचार में मोहन


ईमानदारी में हेमचंद ने बाजी मारी
कांग्रेस में जोगी का जवाब नहीं
भाई-भतीजा वाद में बैस दूसरे नंबर पर
 छत्तीसगढ़ के दस साल को लेकर कराए गए सर्वे में छवि के मामले में मुख्यमंत्री रमन सिंह अब भी दूसरे नेताओं से काफी आगे है जबकि भ्रष्टाचार और अनियमितता के मामले में बृजमोहन अग्रवाल के विभाग सबसे ऊपर है। भाई-भतीजावाद के मामले में जहां बृजमोहन अग्रवाल टॉप पर है वहीं भाजपा सांसद रमेश बैस दूसरे नंबर पर है। कांग्रेसियों में अभी भी जोगी नंबर वन है जबकि दूसरे नंबर पर वीसी शुक्ल है।
छत्तीसगढ़ ने इन दस सालों में कांग्रेस और भाजपा दोनों की सरकार देखी है। चौतरफा भ्रष्टाचार ने जहां विकास को अवरुद्ध किया है वही नेताओं की करतूत को लेकर भी आम आदमी दुखी है। शराब लॉबी की दादागिरी और सरकारी जमीनों के बंदरबांट ने छत्तीसगढ़ के भविष्य को आशंकित कर दिया है। ऐसे में लोगों से जब छत्तीसगढ़ के दस सालों को लेकर सवाल पूछे गए तो लोगों का आक्रोश सामने आना स्वाभाविक था। सर्वे के मुताबिक अब भी रमन सिंह छवि के मामले में छत्तीसगढ़ के तमाम नेताओं से आगे चल रहे हैं। उनके ठीक पीछे विद्याचरण शुक्ल, मो. अकबर का नाम है। हालांकि रमन सिंह की छवि को लेकर लोगों ने उन्हें नंबर वन जरूर बताया है लेकिन ढीला परसन की वजह से अफसरशाही और भ्रष्टाचार से लोगों की नाराजगी भी सामने आई है।
सबसे ईमानदार मंत्री को लेकर पूछे गए सवाल में हेमचंद यादव सब पर भारी पड़े जबकि उनके ठीक पीछे लता उसेंडी का नाम सामने आया है। अमर अग्रवाल को लोगों ने तीसरे नंबर पर रखा है। इसी तरह सबसे भ्रष्ट मंत्री व विभागों के सर्वे में पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभागों के नाम सामने आए है। पीडब्ल्यूडी, पर्यटन एवं संस्कृति व शिक्षा विभाग में सर्वाधिक भ्रष्टाचार को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। यहां विवादास्पद अफसरों श्रीमती बाम्बरा, श्रीमती तवारिस, एमजी श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव तक के नाम लोगों की जुबान पर है। दूसरे नंबर पर डॉ. रमन सिंह के खनिज, विद्युत व जनसंपर्क विभाग का नाम लिया गया। जबकि कश्यप का पीएचई व विक्रम उसेंडी के वन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की खबर भी लोगों के जुबान पर है।
राजनीतिक पदों का दुरुपयोग परिवार द्वारा करने या मंत्रियों द्वारा परिवार वाद के मामले में भी पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल सब पर भारी पड़े है। मंत्री बनने के बाद परिवार के लोगों द्वारा पेट्रोल पंप व्यवसाय में आने, लोडिंग अनलोडिंग में मोनोपल्ली के अलावा व्यापारी वर्ग में प्रभाव स्थापित करने के अलावा छोटे भाई योगेश अग्रवाल को राजनैतिक संरक्षण और जमीन के धंधे में रूचि को लेकर बृजमोहन अग्रवाल का नाम सबसे आगे है। दूसरे नंबर पर भाजपा सांसद रमेश बैस का नाम लिया जा रहा है। भाई को निगम अध्यक्ष के अलावा रिश्तेदारों को प्राथमिकता के आरोप रमेश बैस पर भी लगे हैं। कांग्रेस में अभी भी पसंदीदा नेता में अजीत जोगी टॉप पर है जबकि इसके बाद वीसी शुक्ल का नंबर है। विपक्षी भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर रविन्द्र चौबे को मिठलबरा की उपाधि दी गई व उसे महेन्द्र कर्मा से भी कम अंक दिए गए। जबकि मो. अकबर व देवजी भाई पटेल का नाम सबसे आगे रहा।
इसके अलावा लोगों ने कई रोचक जानकारी भी दी और छत्तीसगढ़ के विकास के लिए लोगों ने सुझाव भी दिए। खासकर बड़े शहरों की यातायात को लेकर लोगों का कहना था कि चौड़ीकरण के साथ पार्किंग की भी व्यवस्था करनी चाहिए और लीज रद्द कर पार्किंग की जानी चाहिए। शराब नीति की भी आलोचना की गई। हालांकि शराब बंदी से ज्यादा लोगों का कहना था कि शराब दुकान शहर के बाहर होनी चाहिए। लोगों का यह भी सुझाव था कि जिन नेताओं व अधिकारियों का राजधानी में मकान हो उन्हें सरकारी बंगला नहीं दिया जाना चाहिए। जबकि कमल विहार सहित सरकारी जमीनों व कृषि जमीन के उपयोग पर भी लोगों ने सरकार की भूमिका पर नाराजगी जताई।