शनिवार, 11 अप्रैल 2020

दो युवा व्यापारियों की गोली मार कर हत्या….. पड़ोसी ने लाश घर के पीछे गाड़ कर छिपाई…… मामले में दो आरोपी गिरफ्तार


अंबिकापुर। दो दिनों पहले 10 अप्रैल की रात से लापता दो भाईयों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। साक्ष्य छिपाने के लिए दोनों भाइ्रयों की लाश को हत्यारे ने अपने घर के पीछे ही गाड़ दिया था। जिस इनोवा क्रिस्टा से दोनों भाई सौरभ अग्रवाल और सुनील अग्रवाल निकले थे, उसे आकाशवाणी के पास संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद किया गया था। परिजनों की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ दर्ज अपराध के तहत मामले की तफ्तीश शुरू हुई। एसपी सरगुजा ने इस मामले में लापता दोनों भाईयों की तलाश के लिए तीन टीम गठित किया था। 
संदेह के आधार पर पड़ोसी आकाश गुप्ता को जब हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने हत्या करना स्वीकार किया। इस दोहरे हत्याकांड में दूसरे आरोपी सिद्धार्थ यादव को भी हिरासत में लिया गया है। हत्या के पीछे वजह का खुलासा फिलहाल नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इनके बीच लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी बीच 10 अपै्रल को आकाश को मौका मिला और दोनों भाईयों की उसने हत्या कर दी।

लाँकडाउन से छत्तीसगढ़ सरकार को लगभग 11 हजार करोड़ का नुकसान!




 कोरोना के कहर से छत्तीसगढ़ के व्यपार में ग्रहण लग गया है। कोयला, लोहा, सीमेंट और बिजली छत्तीसगढ़ के लिए धन कुबेर कहे जा सकते हैं। दरअसल राज्य को कुल राजस्व का करीब 50 फीसदी से अधिक हिस्सा इन्हीं चारों सेक्टरों से आता है। लेकिन इस वक्त कोरोना वायरस के चलते प्रदेश में भी लॉक डाउन है। जिस वजह से प्रदेश की अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी।

आपको बता दें कि लॉकडाउन के चलते सभी क्षेत्रों में उत्पादन बंद है। लॉकडाउन के चलते ट्रांसपोर्ट की सुविधा भी पूरी तरह से ठप्प है जिसके कारण फैक्ट्रियों में बना हुआ माल भी डिस्पैच नहीं हो पा रहा है।

छत्तीसगढ़ के प्रमुख व्यापार स्तंभ
कोयला : राज्य के राजस्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा कोयला से आता है। यहां देश का 16 फीसद कोयला भंडार है। देश के पूरे उत्पाद में 18 फीसदी योगदान छत्तीसगढ़ का है।इस मामले में राज्य देश में दूसरे स्थान पर है।

लोहा : राज्य का 26 फीसद से अधिक खजाना लोहा ही भरता है। देश का करीब 20 फीसद लौह अयस्क भंडार यहीं है। देश का 15फीसद लोहे का उत्पादन छत्तीसगढ़ में होता है। लोहा उत्पादन के मामले में भी राज्य देश में दूसरे स्थान पर है।



सीमेंट : देश का करीब पांच फीसद चूनापत्थर का भंडार छत्तीसगढ़ में हैं। राज्य में फिलहाल एक दर्जन से अधिक बड़े सीमेंट संयंत्र हैं जो देश की करीब 20 फीसदी जरूरत पूरी करते हैं। सीमेंट उद्योगों से भी राज्य को बड़ा राजस्व प्राप्त होता है।

बिजली : छत्तीसगढ़ को देश का पॉवर हब कहा जाता है। यहां सरकारी और निजी सेक्टर मिलाकर करीब 23 हजार मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता है। राज्य की सरकारी बिजली कंपनी देश की उन चुनिंदा बिजली कंपनियों में शामिल है जो मुनाफे में रहती हैं।

कम से कम 3 माह का लगेगा समय
इसके अलावा प्रदेश में ट्रेडिंग का व्यवसाय भी किया जाता है। जिसमें अनाज, किराना, कपड़ा, इलेक्ट्रानिक के सामान शामिल हैं। पड़ोसी राज्य ओड़िशा, झारखंड, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश में भी छत्तीसगढ़ से ही व्यापार किया जाता है। लॉकडाउन खुलने के बाद भी कम से कम 3 माह व्यापार को सुचारू रूप से चलाने में समय लगेगा। इस दौरान 10-11 हजार करोड़ के कर व आर्थिक सेवाओं का नुकसान सरकार को उठाना पड़ सकता है।

लॉकडाउन का असर
स्टील, सीमेंट, पॉवर, कोल उद्योग लगातार चलने वाले उद्योग हैं। जो एकबार बंद होते हैं तो बगैर मेंटेनेंस के उन्हें शुरू करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके अलावा इन उद्योगों में काम करने वाले लेबर उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब से आते हैं जो अपने-अपने क्षेत्रों में लौट चुके हैं। लॉकडाउन के खत्म होने के बाद इन कर्मचारियों को वापस लौटने में भी समय लगेगा। जिसके कारण औद्योगिक क्षेत्रों को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। लॉक डाउन की वजह से छत्तीसगढ़ में इन उद्योगों को बड़ी मार पड़ी है। प्रदेश में बंद पड़ी इन फैक्ट्रीयों को शुरू करने में समय लगेगा साथ ही खर्चे भी बढ़ेंगे। हालांकि केंद्र सरकार ने 10 फीसदी एडॉक लिमित देने हा निर्देश बैंकों को दिया है। इसके बावजूद प्रदेश के व्यापारी वर्ग व उद्योग घरानों को इस लॉकडाउन का नुकसान उठाना पड़ेगा।

नोटः यह लेखक सीए बजरंग अग्रवाल, पूर्व सचिव इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टेड अकाउंट ऑफ इंडिया(ICAI), रायपुर ब्रांच के स्वतंत्र विचार हैं।
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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

कोरोना को लेकर कुछ जानकारी

क्या यह सब बाते सच है ?

प्रश्न 1) क्या कोरोना वायरस को ख़त्म किया जा सकता है?

*उत्तर:-* नहीं! कोरोना वायरस एक निर्जीव कण है जिस पर *चर्बी की सुरक्षा-परत* चढ़ी हुई होती है। *यह कोई ज़िन्दा चीज़ नहीं है, इसलिये इसे मारा नहीं जा सकता* बल्कि यह ख़ुद ही रेज़ा-रेज़ा (कण-कण) होकर ख़त्म होता है।

प्रश्न( 02)- कोरोना वायरस के विघटन (रेज़ा-रेज़ा होकर ख़त्म होने) में कितना समय लगता है?

*उत्तर:-* कोरोना वायरस के विघटन की मुद्दत का दारोमदार, *इसके आसपास कितनी गर्मी या नमी है? या जहाँ ये मौजूद है, उस जगह की परिस्थितियां क्या हैं?* इत्यादि बातों पर निर्भर करता है।

प्रश्न(03):- इसे कण-कण में कैसे विघटित किया जा सकता है?

*उत्तर:-* कोरोना वायरस बहुत कमज़ोर होता है। *इसके ऊपर चढ़ी चर्बी की सुरक्षा-परत फाड़ देने से यह ख़त्म हो जाता है।* ऐसा करने के लिये साबुन या डिटर्जेंट के झाग सबसे ज़्यादा प्रभावी होते हैं। *20 सेकंड या उससे ज़्यादा देर तक साबुन/डिटर्जेंट लगाकर हाथों को रगड़ने से इसकी सुरक्षा-परत फट जाती है* और ये नष्ट हो जाता है। इसलिये अपने शरीर के खुले अंगों को बार-बार साबुन व पानी से धोना चाहिये, ख़ास तौर से उस वक़्त जब आप बाहर से घर में आए हों।

प्रश्न(04):- क्या गरम पानी के इस्तेमाल से इसे ख़त्म किया जा सकता है?

*उत्तर:-* हाँ! गर्मी चर्बी को जल्दी पिघला देती है। इसके लिये कम से कम 25 डिग्री गर्म (गुनगुने से थोड़ा तेज़) पानी से शरीर के अंगों और कपड़ों को धोना चाहिये। छींकते या खाँसते वक़्त इस्तेमाल किये जाने वाले रुमाल को 25 डिग्री या इससे ज़्यादा गर्म पानी से धोना चाहिये। गोश्त, चिकन या सब्ज़ियों को भी पकाने से पहले 25 डिग्री तक के पानी में डालकर धोना चाहिये।

प्रश्न(05):- क्या एल्कोहल मिले पानी (सैनीटाइजर) से कोरोना वायरस की सुरक्षा-परत को तोड़ा जा सकता है?

*उत्तर:* हाँ! लेकिन उस सैनीटाइजर में एल्कोहल की मात्रा 65 पर्सेंट से ज़्यादा होनी चाहिये तभी यह उस पर चढ़ी सुरक्षा-परत को पिघला सकता है, वर्ना नहीं।

प्रश्न(06):-क्या ब्लीचिंग केमिकल युक्त पानी से भी इसकी सुरक्षा-परत तोड़ी जा सकती है?

*उत्तर:-* हाँ! लेकिन इसके लिये *पानी में ब्लीच की मात्रा 20% होनी चाहिये।* ब्लीच में मौजूद क्लोरीन व अन्य केमिकल कोरोना वायरस की सुरक्षा-परत को तोड़ देते हैं। *इस ब्लीचिंग-युक्त पानी का उन सभी जगहों पर स्प्रे करना चाहिये जहाँ-जहाँ हमारे हाथ लगते हैं।* टीवी के रिमोट, लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन को भी ब्लीचिंग-युक्त पानी में भिगोकर निचोड़े गये कपड़े से साफ़ करना चाहिये।

प्रश्न(07):-क्या कीटाणुनाशक दवाओं के द्वारा कोरोना वायरस को ख़त्म किया जा सकता है?

*उत्तर:-* नहीं! कीटाणु सजीव होते हैं इसलिये उनको *एंटीबायोटिक* यानी कीटाणुनाशक दवाओं से ख़त्म किया जा सकता है लेकिन *वायरस निर्जीव कण होते हैं, इन पर एंटीबायोटिक दवाओं का कोई असर नहीं होता।* यानी कोरोना वायरस को एंटीबायोटिक दवाओं से ख़त्म नहीं किया जा सकता।

प्रश्न(08):-कोरोना वायरस किस जगह पर कितनी देर तक बाक़ी रहता है?

*उत्तर:-*
*कपड़ों पर :* तीन घण्टे तक
*तांबा पर :* चार घण्टे तक
*कार्डबोर्ड पर :* चौबीस घण्टे तक
*अन्य धातुओं पर :* 42 घण्टे तक
*प्लास्टिक पर :* 72 घण्टे तक

इस समयावधि के बाद कोरोना वायरस ख़ुद-ब-ख़ुद विघटित हो जाता है। लेकिन इस समयावधि के दौरान अगर किसी इंसान ने उन संक्रमित चीज़ों को हाथ लगाया और अपने हाथों को अच्छी तरह धोये बिना नाक, आँख या मुंह को छू लिया तो वायरस शरीर में दाख़िल हो जाएगा और एक्टिव हो जाएगा।

प्रश्न(09):-क्या कोरोना वायरस हवा में मौजूद हो सकता है? अगर हाँ तो ये कितनी देर तक विघटित हुए बिना रह सकता है?

*उत्तर:-* जिन चीज़ों का सवाल न. 08 में ज़िक्र किया गया है उनको हवा में हिलाने या झाड़ने से कोरोना वायरस हवा में फैल सकता है। कोरोना वायरस हवा में तीन घण्टे तक रह सकता है, उसके बाद ये ख़ुद-ब-ख़ुद विघटित हो जाता है।

प्रश्न(10):-किस तरह का माहौल कोरोना वायरस के लिये फायदेमंद है और किस तरह के माहौल में वो जल्दी विघटित होता है?

*उत्तर:-* कोरोना वायरस क़ुदरती ठण्डक या एसी की ठण्डक में मज़बूत होता है। इसी तरह अंधेरे और नमी (Moisture) वाली जगह पर भी ज़्यादा देर तक बाक़ी रहता है। यानी इन जगहों पर ज़्यादा देर तक विघटित नहीं होता। *सूखा, गर्म और रोशनी वाला माहौल कोरोना वायरस के जल्दी ख़ात्मे में मददगार है।* इसलिये जब तक इसका प्रकोप है तब तक एसी या एयर कूलर का इस्तेमाल न करें।

प्रश्न(11):-सूरज की तेज़ धूप का कोरोना पर क्या असर पड़ता है?

*उत्तर:-* सूरज की धूप में मौजूद *अल्ट्रावायलेट किरणें* कोरोना वायरस को तेज़ी से विघटित कर देती है यानी तोड़ देती है क्योंकि सूरज की तेज़ धूप में उसकी सुरक्षा-परत पिघल जाती है। इसीलिये चेहरे पर लगाए जाने वाले फेसमास्क या रुमाल को अच्छे डिटर्जेंट से धोने और तेज़ धूप में सुखाने के बाद दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्रश्न(12):-क्या हमारी चमड़ी (त्वचा) से कोरोना वायरस शरीर में जा सकता है?

*उत्तर:-* नहीं! तंदुरुस्त त्वचा से कोरोना संक्रमण नहीं हो सकता। अगर त्वचा पर कहीं कट लगा है या घाव है तो इसके संक्रमण की संभावना है।

प्रश्न(13):-क्या सिरका मिले पानी से कोरोना वायरस विघटित हो सकता है?

*उत्तर:-* नहीं! सिरका कोरोना वायरस की सुरक्षा-परत को नहीं तोड़ सकता। इसलिये सिरका वाले पानी से हाथ-मुंह धोने से कोई फ़ायदा नहीं है।

Jya Jaya Singh जी

मैं जीऊँगी...

कितनी अजीब बात है
किसी को ज़िंदगी भर प्यार नहीं मिलता
ना माँ का
ना पिता का
ना ही पति का
ना ही किसी का साथ
सिर्फ इसलिए क्योंकि
मैं किन्नर हूँ
ये जिंदगी हैं
ये कोई सोचता ही नहीं
सपने भी
अपने भी
वही ज़ज़्बात
वही रूह
वही खून
फिर क्यों नहीं है साथ
मैं मन क्यों मारू
इच्छा क्यों ना रखूं
इश्क क्यों ना करूँ
ज़िंदगी से
मैं जीऊँगी ,जीने की संघर्ष के लिए
खुश रहने के लिए
हँसने के लिए
अपने अरमानों को
पूरा करने  के लिए
तब तक
जब तक ज़िंदगी मेरी
तेरी जैसी नहीं हो जाती
मैं जीऊँगी

-विद्या राजपूत 

गुरुवार, 9 अप्रैल 2020

पूरी मानव सभ्यता के लिए कोरोना का खुला पत्र.

पूरी मानव सभ्यता के लिए कोरोना का खुला पत्र....✍️श्रिया

कहते हैं प्रकृति अपना विकास हो या विनाश स्वयं कर लेती है.. और शायद आप ये बात भूल गए थे तो उसे ही याद दिलाने ये कोरोना महामारी अपने इस भयावह रूप के साथ वापस आई है...

ये वक़्त एक दूसरे को कोसने या बेफिजूल के बहस में समय व्यर्थ करने का नही बल्कि ये सोचने का है कि, ये पृथ्वी आपको क्या सीखना चाह रही है..? किन वास्तविकताओँ से आपका परिचय करना चाह रही है..?
इन्हीं कुछ मुख्य बातों पर गौर फरमाइए..!

1} शादी:- आजकल 25 लाख से कम में किसी की शादी नही होती.. लेकिन सोचिये की क्या इसकी सच मे जरूरत होती है.. जवाब मिलेगा बिल्कुल नही..सादगी के साथ सिर्फ उतने ही लोग जितनी जरूरत हो जितने की आशीर्वाद हेतु आवश्यकता होती है... दिखावे की इस दुनिया से बाहर निकलने की सीख यह कोरोना बीमारी आपको दे रही है...

2}माल, फ़ूड, मनोरंजन:- इन सब ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए आपको बेहिसाब मेहनत करनी पड़ती है ताकि आप जरूरत से ज्यादा कमा सके और उन पैसों को मनोरंजन हेतु मॉल , फूड या फिर लग्जरियस गाड़ी से उतरकर अपनी शेखी बघारने में खर्च कर सके.. लेकिन इस कोरोना वायरस ने सबको एक ही लाइन पर लाकर खड़ा कर दिया है क्योंकि अब आपके पास लंबोर्गिनी भी होगी तो वहआपके घर के बाहर धूल खाती पड़ी होगी और बाहर निकलने के लिए आपको पैदल या साइकिल की ही जरूरत होगी...

3} पैसो की जरूत:- कोरोना आपको यह सिखाना चाह रही है कि आपको आखिर कितने पैसों की जरूरत पड़ती है.. सिर्फ उतनी ही जिससे आप दो वक्त की रोटी खा सकें और अपने परिवार के चेहरे पर खुशी ला सके,  ना कि अपनी पूरी जिंदगी को भागदौड़ में बिताते हुए पैसे कमा कर अपनी परिवार को लग्जरियस लाइफ दे सके.. और इस चक्कर में आप अपनों से दूर हो जाते हैं, परिवार टूट के बिखर जाते हैं ..लेकिन हम अपनी लालच में इस कदर डूबे रहते हैं कि इस बारे में सोचते ही नहीं कि बिना परिवार के यह पैसे किस काम के..?  तो सिर्फ उतना ही कमाए जितना आपके जिंदगी को गुजारने के लिए जरूरी है अधिक धन संग्रह आपको व्यासना की ओर धकेलता है..

4} खुशी का अर्थ:- कोरोना आपको यह सिखाना चाह रहा है कि आखिर जीवन में वास्तविक खुशी क्या है..?
 देश और दुनिया को बदलना आपके बस में नहीं क्योंकि प्रकृति अपने अनुसार स्वयं का परिवर्तन करती है आप मंगल पर पहुंचना चाहते थे,  लेकिन प्रकृति तो धरती पर ही रहना चाह रही थी..और उसने आपको ही उस एक कमरे में बंद करके रख दिया है.. जहां से आप मंगल तो जाना छोड़ घर के बाहर तक नहीं निकल सकते...फिर इतनी हाय तौबा करने से क्या फायदा..!

5}. प्रसिद्धि का पैमाना:- कोरोना ने आपको यह समझा दिया है कि आखिर प्रसिद्धि का क्या पैमाना होना चाहिए अगर वैश्विक महामारी के दौर में आप अपने आस-पड़ोस के लोगों की मदद करते हैं तो आप श्रेष्ठ हैं..
ना कि बड़ी-बड़ी बातें कर,  टीवी पर आने , ऑटोग्राफ देने या भीड़ के सामने हाथ हिलाने वाले को महान समझा जाए.. क्योंकि जब प्रकृति अपने वास्तविक रूप में आती है तब यह सभी जो तथाकथित प्रसिद्ध और महानहस्ति थे..वह भी अपने घर में दुबके बैठे हैं इसलिए श्रेष्ठ या महान बनने के लिए जरूरी नहीं कि करोड़ों लोग आपको जाने बल्कि वे लोग आपको जाने जिनसे आप रोज मुलाकात करते हैं और किसी एक व्यक्ति के भी काम आ सके तो आप श्रेष्ठ हैं..

6.}प्रकृति का न्याय:- पूरा विश्व फिलहाल जलवायु संकट को लेकर चिंतित था लेकिन कोई भी खनन कार्य हो या फिर औद्योगिक कार्य बंद करने को आतुर नहीं था.. एक तरफ तो आप जलवायु परिवर्तन को लेकर बड़ी-बड़ी डींगे हांक रहे थे लेकिन वहीं दूसरी तरफ आपका कार्य निरंतर जारी था .. इसलिए प्रकृति ने अपने आप को फिर से रिकवर करने के लिए आप सभी को अपने घरों पर बिठा दिया...ताकि ना कोई उद्योग काम कर सके ना ही कोई खुदाई हो सके.. जितने बेदर्दी से आपने धरती का सीना चीरा है और इस वायुमंडल को अपने उद्योगों से निकलने वाले धुंवे से बर्बाद किया है.. उसका बदला लेना तो प्रकृति का धर्म था ..बिना देरी के उसने अपने साथ हुए अन्याय का बदला लिया और आप सबको अपनी वास्तविक औकात दिखा दी कि आप सिर्फ अपनी चिंता करें ना कि इस पूरे विश्व की..क्योंकि इस धरती को बनाने वाला मौजूद है..

#imshriya #कोरोना_मंथन

सोमवार, 6 अप्रैल 2020

प्रतिक्रियाएँ


मेरी किताब के शीर्षक ,कवर पेज और भूमिका पर फ़ेसबुक में प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई
इन प्रतिक्रियाओं में शुभकामनाएँ भी है तो गालियाँ भी
जिनके पास जो है वही तो देंगे की तर्ज़ पर मेरा लेखन जारी है
फ़िलहाल आप प्रतिक्रियाएँ देखिए
















शनिवार, 4 अप्रैल 2020

जनआवाज की सुविधानुसार परिभाषा...


मीडिया की विश्वसनियता पर जब सवाल उठने लगे हैं तब यह सवाल मौजूदा वक्त में बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर यह सब हो क्या रहा है? मीडिया की भूमिका में कहा चूक हो रही है। क्या उसने सचमुच जन सरोकार की तरफ से आंख मूंद लिया है? या फिर वह अपनी सुविधानुसार खबरें छापने लगा है? सवाल यह भी है कि क्या सरकार की पसंद नापसंद पर मीडिया की भूमिका सिमटता चला जा रहा है? तब फिर जन सरोकार की पैरवी कौन करें।
सवाल यह नहीं है कि मीडिया की विश्वसनियता क्यों समाप्त हो रही है बल्कि सवाल यह है कि मीडिया अपनी भूमिका निभाने में कहां चूक कर रही है। अपना प्रचार बढ़ाने या टीआरपी बढ़ाने की अंधी दौड़ में वह कहां चली जायेगी। मीडिया की भूमिका विवाद बढ़ाने की है या विवाद को समाप्त करने की है।
मौजूदा दौर में जब सब कुछ बदल रहा है तो मीडिया की भूमिका के बदलाव पर चर्चा जरुरी हो गया है। राजनीति के रंग से दूर जन सरोकार में मीडिया क्योंं पीछे होते चली जा रही है। क्या राजनेताओं की बयानबाजी और भ्रष्टाचार ही मीडिया का एकमात्र हथियार हो गया है या शिक्षा स्वास्थ्य बेरोजगारी बिजली-पानी भी पत्रकारिता का ह्स्सिा है?
राज्य बनने के पहले छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता को जिन उंचाईयों पर देखा जन सरोकार के मुद्दों ने जिस तरह से सरकार की चूलें हिला दी थी। क्या वैसी खबरें राज्य बनने के बाद देखने को मिल रही है। इसका जवाब में ही मीडिया की विश्वासनियता का पैमाना जुड़ा हुआ है।
राज्य बनने के बाद पत्रकारिता ने नई करवट ली। चूंकि छत्तीसगढ़ की राजधानी में मीडिया की बाढ़ आ गई तो पत्रकारिता भी यहीं से चलने लगी। राजधानी में नेताओं अफसरों और माफियाओं के गठजोड़ ने सबसे पहले तो मीडिया को घेरना शुरु किया और विज्ञापन के दबाव तले पत्रकारिता को दबाने की कोशिश होने लगी। नेताओं की बयानबाजी और भ्रष्टाचार की खबरों ने अखबारों या चैनलों की जह को घेरना शुरु किया तब स्कूल में टीचरों या अस्पतालों में दवाओं का अभाव पर खबरें कम होती चली गई। रिपोर्टिंग जैसी चीज तो लुप्त प्राय: होने लगी और यह किसी से नहीं देखा कि कांक्रीट में तब्दिल होते शहर में प्रदूषण का स्तर कहां जा रहा है।
पत्रकारिता के रवैये में आई इस तब्दिली के इस दौर में एक खास बात और हुई कि मीडिया सत्ता केन्द्र के आगे मंडराने लगी और यह सब इतना खुला होने लगा कि आम जन भी इसे आसानी से देखने लगे और यहीं से उनकी विश्वसनियता पर सवाल उठने लगे और जब सवाल उठेंगे तो निशाना भी वहीं होंगे इसलिए जैसे ही सोशल मीडिया का दौर आया सबसे पहले निशाने पर मीडिया ही आया।
मीडिया की विश्वसनीयता पर प्रहार करने की कोशिश में वे लोग भी जुड़ गए जो माफियागिरी चला रहे थे। भ्रष्टाचार में लिप्त थे और अनैतिक कार्य कर रहे थे। यह सब साजिशन भी हुआ क्योंकि उनके खिलाफ मीडिया में खबरें आने पर जनआक्रोश बढ़ सकता था तो जनआक्रोश को दबाने के लिए ही मीडिया की विश्वसनियता पर सवाल उठाये गए।