मंगलवार, 23 जुलाई 2024

सीजी में भी निकला जियो का कबाड़ा…


 जियो का निकला कबाड़ा...

सीजी में भी कर रहे बॉय-बॉय… 

बीएसएनएल का टैरिफ़ प्लान जानिए 

पहले ही निजी टेलीकॉम कंपनियों से परेशान लोगों ने टैरिफ बढ़‌ाने के बाद जिस तरह से भारतीय दूर संचार BSNL की तरफ कूच कर रहे हैं, उससे सबसे ज्यादा नुकसान जियो को उठाना पड़ सकता है। कहा जा रहा है कि जियो द्वारा अपने टैरिफ़ प्लान में कीमत बढ़ाने अनंत अंबानी की शादी क्या रिश्ता है यह चर्चा का अलग मुद्दा है लेकिन कहा जा रहा है कि निजी कंपनियों के द्वारा कीमत बढ़ाई जाने के बाद बीएसएसएल की बल्ले-बल्ले हो गई है।

सूत्रों की माने तो पिछले एक सप्ताह में बीएसएनएल को लगभग एक करोड़ नये ग्राहक मिले है जिसमें सर्वाधिक ग्राहक बिहार यूपी और • महाराष्ट्र के है। वहीं सूत्रों का यह भी दावा है कि इस दौरान न केवल बीएसएनएल नये सिम तो बेचे ही है प्राईवेट कंपनी से पोर्ट कराकर बीएसएलएल आने वाले ग्राहकों की संख्या भी 80 लाख से अधिक हो गई है।

कहा तो यहां तक जा रहा है कि निजी कंपनियों में जियो, एयरतेल, वीआई के सामने ग्राहक बचाने की दिक़्क़त आ गई है और  इस निजी कंपनियों से छुटकारा पाने वालों में जीयो  के ग्राहरु सबसे ज्यादा है।

इधर बीएसएनएल और टाटा समूह के बीच करार होने के आलावा बीएसएनएल का वह टैरिफ प्लान है जो ग्राहकों को सस्ते दर पर सुविधा प्रदान कर रहा है।






ज्ञात हो कि निजी टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी को लेकर पहले ही उपभोक्ताओ में नाराज़गी थी ।

छत्तीसगढ़ से मिली जानकारी के मुताबिक भले ही जियों ने यहां के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सेटिंग कर केबल बिछाने का काम पूरा कर लिया हो लेकिन कहा जा रहा है कि नेटवर्क के प्राबलम से वे सर्वाधिक प्रभावित थे। रायपुर राजधानी से ही इस तरह की शिकायते लगातार आ रही थी। ऐसे में कीमत 20 से 25 फ़ीसदी बढ़ने से लोग और ज्यादा नाराज हो गये।

सूत्रों की माने तो केबल बिछाने के खेल को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे है और इस खेल में जिस तरह से नगर निगम और पालिका के अधिकारी शामिल थे, उसकी शिकायत भी की गई है।

इधर छत्तीसगढ़ में भी जियो को छोड़ने वाले ग्राहकों की संख्या सबसे ज्यादा है और अभी भी लतातार जियो को बॉय-बॉय करने का सिलसिला जारी है।

सोमवार, 22 जुलाई 2024

कालेज छात्रों को ड्रग्स का लत लगा रहा था संस्कारी संघी…

 कालेज छात्रों को ड्रग्स का लत लगा रहा था संस्कारी संघी…


अभी उत्तर प्रदेश के प्रयाग राज को एके 47 से दहलाने वाला भाजपा के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया को समय पूर्व रिहाई का मामला ठंडा भी नहीं हो पाया था कि अब गुजरात से यह खबर आ गई कि कालेज छात्रों में ड्रग्स का लत लगाने वाले संघ के स्वयं सेवक और हिन्दू युवा वाहिनी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विकास अहिर पकड़ा गया। वह अपना यह खेल आइसक्रीम पार्लर की आड़ में चला रहा था। योगी आदित्यनाथ से लेकर भाजपा के दिग्गजों के साल उनकी तस्बीर और फेसबुक प्रोफाईल ने संघ के संस्कार की पोल खोल कर रख दी है।


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ गुजरात की सूरत शहर पुलिस ने एक सनसनीखेज मामले में हिंदूवादी नेता और बीजेपी कार्यकर्ता विकास अहीर समेत दो अन्य को एमडी ड्रग बेचने के मामले में अरेस्ट किया है। सोशल मीडिया पर मौजूद प्रोफाइल के अनुसार विकास अहीर हिंदू युवा वाहिनी गुजरात प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष हैं। इसके साथ वह बीजेपी युवा मोर्चा से जुड़े हुए हैं। सूरत पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने प्रेस कांफ्रेंस करके शहर में एमडी ड्रग्स की बिक्री के मामले में पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी। गहलोत ने कहा कि सूरत में पहले ड्रग्स की खेप मुंबई से आती थी, लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद इस धंधे में लिप्त लोगों ने मॉड्स ऑपरेंडी में बदलाव किया है। अब राजस्थान से जरिए सूरत में ड्रग्स की बिक्री कर रहे हैं। पुलिस ने विकास अहीर के विकास के साथ चेतन साहू और अनीश खान पठान को गिरफ्तार किया है। पुलिस के इनके पास से 354 ग्राम एमडी ड्रग्स मिला है।

हिंदूवादी नेता की छवि 


सूरत पुलिस द्वारा ड्रग्स बेचने के मामले में गिरफ़्तार किए गए विकास अहीर ने सोशल मीडिया पर अपनी छवि एक हिंदू वादी नेता की बनाई है। एक्स पर अहीर ने अपने बॉयो में लिखा है कि पूर्व अध्यक्ष हिन्दू युवा वाहिनी गुजरात प्रदेश बताया है। इसके बाद अहीर ने खुद को बीजेपी युवा मोर्चा गुजरात से जुड़ा हुआ बताया है। अहीर ने बॉयो में खुद को आरएसएस को स्वयंसेवक भी बताया है। सूरत शहर पुलिस के अनुसार करीब एक महीने की होमवर्क और निगरानी के बाद तीनों आरोपियों को अरेस्ट किया गया है। पुलिस ने अनुसार पकड़े गए आरोपियों पर पहले भी कुल मामले दर्ज हैं। पुलिस ने अनुसार ड्रग्स राजस्थान के जरिए सूरत में लाया जा रहा था।

आप ने साधा निशाना 

एक तरफ जहां ड्रग्स बेचने के मामले में सूरत पुलिस ने पुलिस ने विकास अहीर और उसके 2 दोस्तों को अरेस्ट किया है तो वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया ने इस मुद्दे पर बीजेपी पर हमला बोला है। इटालिया ने लिखा है हिंदुत्व के नाम पर 2022 के चुनाव में यही टोली उनके घर पर पहुंची थी।सूरत पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने कहा है कि सामने आया है कि आरोपी आइसक्रीम पॉर्लर की आड़ में एमडी ड्रग्स का धंधा कर रहे थे। ये टू व्हीलर से डिलीवरी भी करते थे। गहलोत ने कहा पिछले कुछ समय में सूरत में ड्रग्स बेचने के 37 मामले में दर्ज किए गए हैं। इनमें कुल 85 आरोपियों को अरेस्ट किया है। गहलोत ने कहा एनडीपीएस एक्ट में अरेस्ट आरोपियों की संपत्ति की जांच भी जा रही है। अवैध और काली कमाई से अर्जित की गई संपत्ति को सील किया जाएगा।

अब योगी भी हत्यारे को सिर में नचायेंगे

 योगी चले मोदी की चाल 

अब हत्यारे को सिर में नचायेंगे !



गुजरात में बलात्कारियों का स्वागत सत्कार करने वाली संघ से संस्कारित पार्टी का अब उत्तरप्रदेश  में नया कारनामा सामने आया है। एके 47 रायफल से प्रयागराज के सिविल लाईन में बसपा विधायक जवाहर यादव सहित तीन लोगों को मौत की घाट उतार चुके पूर्व विधायक उद‌यमान करवरिया को अब योगी आदित्यनाज ने रिहाई करवा दी है। उदयभान करवरिया को प्रयागराज की एक अदालत ने उम्र क़ैद की सजा सुनाई थी। हालांकि योगी आदित्यनाथ का यह पहला कारनामा नहीं है। इससे पहले अमरमणि त्रिपाठी को भी समयपूर्व रिहा कर दिया गया था। और गुजरात में दर्जनभर बलात्कारियों और हत्या के आरोपियों  को समय पूर्व रिहाई के लिए तो सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा था | तो क्या योगी  आदित्यनाथ भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राह पर चल पड़े हैं।

कहा जाता है कि योगी आदित्यनाथ  सरकार की सिफ़ारिश के बाद राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश की जेल में चार साल से आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व BJP विधायक उदय भान करवरिया की रिहाई का आदेश दे दिया  है।1996 में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक जवाहर यादव की हत्या की गई थी. उसी मामले में चार साल पहले कोर्ट ने उदय भान को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. अब राज्य सरकार ने समय से बहुत पहले ही रिहाई का आदेश दे दिया है. पूरा मामला टाइमलाइन के हिसाब से समझ लेते हैं.

कहा जाता है कि 13 अगस्त, 1996 को प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके में कुछ लोगों ने मिलकर सपा विधायक की गाड़ी पर गोलीबारी कर दी थी. हमले में विधायक जवाहर यादव और दो अन्य लोगों की मौत हो गई. पुलिस जांच में पता चला कि हत्या राजनीतिक और व्यापारिक रंजिश के चलते की गई.फिर 4 नवंबर 2019 को प्रयागराज की एक अदालत ने उदय भान, उनके भाइयों सूरज भान और कपिल मुनि और उनके चाचा राम चंद्र को सपा विधायक जवाहर यादव की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई. तीनों दोषी फिलहाल प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं.


रविवार, 21 जुलाई 2024

गुजरात लॉबी का यह कैसा करतूत

 फिर जुड़‌ने लगा पीएमओ से तार…

गुजरात लॉबी का यह कैसा करतूत


इन दस सालों में का देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित्र शाह ने जो चक्रव्यूह रचा था, क्या उस चक्रव्यूह का खेल खत्म होने लगा है। पूंजी निवेश से लेकर बैंको के कर्जे ‌लेकर भागने का मामला हो या फिर भ्रष्टाचार के बड़े मामले, नीट पेपर लीक घोटाला हो या यूपीएससी का खेल ! आखिर सारे तार पीएमओ से क्यों जुड़ जाते है?

नीट पेपर लीक मामले में जिस तरह से गुजरात का गोधरा चर्चा में है। गोधरा के इस पेपर लीक मामले को लेकर हो रहे रोज खुलासे के बाद अब ट्रेनी आईएएस पूजा खेड्‌कर का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर गुजरात लॉबी ही नहीं पीएमओ पर भी उंगली उठने लगी है। और इस विवाद के बीच जिस ताह से यूपीएससी के अध्यक्ष मनोज सोनी का इस्तीफ़ा सामने आया है वह हैरान करने वाला तो है ही बल्कि मोदी सत्ता के उस निर्णय की नीयत पर उंगली उठाता है जिसके तहत दर्जनौ लोगों को प्रोफेशनल नियुप्ति के नाम पर कहीं सचिव बना दिया गया तो कहीं अध्यक्ष या डायरेक्टर ।

यश बॉस के इस दौर में यह जान लेना ज़रूरी है कि आखिर मनोज सोनी के इस्तीफ़े को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृह मंत्री अमित शाह क्यों निशाने पर है।

क्या मनोज सोनी का इस्तीफ़ा फर्जी प्रमाणपत्र, सत्ता और विशेषाधिकार का कथित दुरुपयोग के बाद जिस तरह से कई आईपीएस और आईएएस के चयन पर उठ रही उंगली है। लेकिन पहले ये जान ले कि मोदी-शाह क्यों निशाने पर है। गुजरात के रहने वाले मनोज सोनी का अभी पांच साल का कार्यकाल बाकी था। सोनी ने अपने इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। सोनी का कार्यकाल 2029 में पूरा होना था। मनोज सोनी आयोग में 2017 में बतौर सदस्य नियुक्त हुए थे। उन्होंने 16 मई, 2023 को अध्यक्ष के रूप में शपथ ली। ऐसे में उन्होंने बतौर अध्यक्ष सिर्फ करीब 13 महीने काम किया। मनोज सोनी गुजरात के आणंद जिले से ताल्लुक रखते हैं। उनका परिवार मुंबई से गुजरात शिफ्ट हुआ था। उन्होंने बचपन के दिनों में अगरबत्तियां तक बेंची।

द हिंदू' ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने लगभग एक महीने पहले इस्तीफा दे दिया था। सूत्रों के अनुसार वह गुजरात के शक्तिशाली स्वामीनारायण संप्रदाय की एक शाखा अनुपम मिशन को अधिक समय देना चाहते हैं। वह 2020 में दीक्षा प्राप्त करने के बाद मिशन में एक साधु या निष्काम कर्मयोगी बन गए थे। सोनी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है, जिन्होंने उन्हें 2005 में वडोदरा में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) के कुलपति के रूप में चुना था। तब वह 40 वर्ष के थे। जिससे वह देश के सबसे कम उम्र के कुलपति बन गए थे। जून 2017 में यूपीएससी में नियुक्ति से पहले सोनी ने बाबासाहेब अम्बेडकर मुक्त विश्वविद्यालय (बीएओयू) के 1 अगस्त 2009 से 31 जुलाई 2015 तक कुलपति रहे थे। इसके बाद वह अप्रैल 2005 से अप्रैल 2008 तक वडोदरा में स्थित महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा के कुलपति रहे थे। 

 सोनी गुजरात विधानमंडल के एक अधिनियम द्वारा गठित एक अर्ध-न्यायिक निकाय के सदस्य भी रह चुके हैं। मनोज सोनी की गिनती उन लोगों में होती है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र माने जाते हैं। पीएम मोदी ने मनोज सोनी के संघर्ष को देखते हुए ही मुख्यमंत्री रहते हुए एमएसयू के वीसी की जिम्मेदारी सौंपी थी। एमएसयू में मनोज सोनी के वीसी रहते हुए कई आंदोलन हुए थे, लेकिन उन्होंने नो कंप्राेमाइज का फॉर्मूला अपनाया था। आर्ट्स फैकल्टी में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों से जुड़े विवाद में वह काफी सुर्खियों में रहे थे। ऐसा कहा जाता है कि इस विवाद के चलते उन्हें एमएसयू में दूसरा कार्यकाल नहीं मिल पाया था, हालांकि मनोज सोनी को बाद में बाबासाहेब अम्बेडकर मुक्त विश्वविद्यालय (बीएओयू) का वीसी बनाया गया था।

तब सवाल यही है कि क्या प्रोफ़ेशनलों की नियुक्ति की वजह क्या है…?


शनिवार, 20 जुलाई 2024

नेम प्लेट- मुसलमानों के बहाने दलित-पिछड़ा निशाने पर

 नेम प्लेटः इस नफरत से उजड़ जायेंगे दलित-पिछड़े...


उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू वोटरों के ध्रुवीकरण को लेकर कांवड़ यात्रा के मार्ग में दुकानदारों को नाम पट्टिका लगाने की अनिवार्यता थोपी है उससे मुसलमान कितने प्रभावित होंगे कहना मुश्किल है लेकिन इस आदेश से दलित और पिछ‌‌ड़े वर्ग के दुकामदार जरूर उज‌ड़ जायेंगे, क्योंकि हुए देश में सवर्ण समाज की मानसिकता अब भी नहीं बदली है और आज भी इसी भेदभाव के चलते दलितों की हत्या तक कर दी जाती है।

लोकसभा के बाद विधानसभा के उपचुनाव में हार से बौखलाए भाजपा को यदि हिंदू वोटो के ध्रुवीकारण की तलाश है तो उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दस सीटों पर होने भाले उपचुनाव में स्वयं की कुर्सी बचा लेने का ख़तरा बढ़ गया है। और इसी खतरे को भांपते हुए ही कांवड़ यात्रा मार्ग को लेकर नाम पट्टिका वाला फरमान जारी किया गया है।

लेकिन इस फ़रमान के विरोध में खड़े लोगों को हिन्दू विरोधी तमगा देने से भी हिन्दूवादी संगठन पीछे नहीं है लेकिन क्या नफ़रत से जल रहे हिन्दुवादी इस देश के सच को देखना ही नहीं चाहते।

देश का सच भयावह है, कि आज भी सवर्ण समाज का एक बड़ा तपका दलितों और वंचितों के साथ बैठना तक नहीं चाहता । सिर्फ दलित या अति पिछड़‌ा वर्ग होने के नाम पर प्रताड़ना का दौर  कम होने का नाम ही नहीं ले रहा।गुजरात हो या राजस्थान, मध्यप्रदेश हो या उत्तरप्रदेश, आप किसी भी राज्य का नाम ले लें। सुदूर दक्षिण से लेकर उत्तर तक, पूरब से लेकर पश्चिम तक अब भी वंचित या पिछड़े वर्ग के दूल्हे के घोड़ी में बैठने मात्र से हत्या की घटना सुनाई पड़ जाती है।

ऐसी परिस्थिति में यदि नाम पट्टिका की अनिवार्यता क्या इन दलित और पिछ‌ड़े वर्ग के लोगों को प्रभावित नहीं करेंगी।

भले ही हिन्दू‌वादी संगठन योगी आदित्यनाथ के इस फैसले में मुसलमानों की पराजय देख रहे हो लेकिन सच तो यह है कि इससे  सर्वाधिक प्रभावित दलित और पिछड़े वर्ग के लोग ही होंगे।

क्या इन वर्गो के द्वारा बेचे जा रहे पूजन सामग्री ख़रीदेगा,  जब बाजू में ही ब्राम्हण बनिया ठाकुर की दुकान होगी। क्या इनके खाने पीने की सामग्री भी कोई खरीदेगा यदि बगल में ही सवर्गो की दूकान होगी।

सच तो यही है कि योगी आदित्यनाथ ने जिस राजनैतिक उद्देश्य से यह फैसला लिया है उससे मुसलमान कम दलित व पिछ‌ड़े ही अधिक प्रभावित होंगे।

मॉब लिचिंग मामले में दबाव में आ गई डबल इंजन...

 मॉब लिचिंग मामले में दबाव में आ गई डबल इंजन...


आरंग क्षेत्र के महानदी पुल पर गौरक्षकों के द्वारा मॉब लिचिंग के मामले में पुलिस ने न्यायालय में दाखिल आटोप पत्र में ही तीन लोगों की मौत को पुल से कुदने की वजह बताई है। तो कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि डबल इजन की साय सरकार आरोपियों को बचा रही है इस मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ को शर्मसार कर देने वाली इस घटना को लेकर जिस तरह की राजनीति की गई वह हैरान कर देने वाला है। मॉब लिचिंग की इस घटना को लेकर पहले ही दिन से सरकार की भूमिका पर सवाल उठते रहे है और जब इस मामले को लेकर कांग्रेस के नेता विकास उपाध्याय आरंग जा पहुंचे और मुस्लिम संगठनों ने प्रदर्शन किया तब कहीं जाकर हिन्दु संगठन से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

लेकिन गिरफ्तारी होते ही विश्वहिन्दू परिषद, बजरंगदल सहित गौरक्षकों ने भी प्रदर्शन कर दिया। राजधानी के कोतवाली थाने का घेराव कर वे घंटो बैठ गये और उपमुख्यमंत्री अरुण साव को धरना स्थल पर आश्वासन देना पड़ा। यहीं नहीं रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी इसी बहाने अपनी ही सरकार पर भड़ास निकाली।

इसके बाद से ही जनचर्चा थी कि मॉब लिचिंग के आरोपियों को बचा लिया जायेगा।

 न्यायालय में  आठ जुलाई को रायपुर की अदालत में पेश किए गए आरोप पत्र में दावा किया गया है कि ट्रक में मवेशी ले जा रहे तीनों लोगों का पांच आरोपियों ने करीब 53 किलोमीटर तक पीछा किया और इसके बाद ट्रक सवारों ने नदी में छलांग लगा दी। पुलिस ने पहले बताया था कि मवेशियों को ले जा रहे गुड्डू खान (35) और चांद मियां खान (23) की सात जून की सुबह जिले के आरंग थाना क्षेत्र में भीड़ द्वारा कथित तौर पर पीछा किए जाने के

बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनका एक अन्य साथी सद्दाम कुरैशी भी इसी घटना में गंभीर रूप से घायल पाया गया था, जिसकी 18 जून को यहां एक अस्पताल में मौत हो गई थी। उत्तर प्रदेश के रहने वाले तीनों लोग आरंग क्षेत्र में महानदी पर बने पुल के नीचे पाए गए थे, जबकि भैंसों से लदा उनका ट्रक पुल पर खड़ा मिला था। आरंग पुलिस ने तब मामले के संबंध में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 304 (गैर इरादतन हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और 34 (साझा इरादा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। कुरैशी की मौत के बाद पुलिस ने कहा था कि उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मारपीट के कारण प्राणघातक चोट लगने का जिक्र नहीं है, जिसके बाद हत्या के प्रयास का आरोप हटा दिया गया।

पुलिस ने तब मामले की जांच के लिए रायपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) कीर्तन राठौर के नेतृत्व में 14 सदस्यीय विशेष दल का गठन किया था । बाद में पुलिस ने अलग-अलग जगहों से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 304 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपपत्र में कहा गया है, पांचों आरोपियों को संभवतः मवेशियों को ले जा रहे एक वाहन के बारे में जानकारी मिली थी। तीन कार में सवार आरोपियों ने. ट्रक का पीछा किया और लोहे की कीलें लगी लकड़ी और कांच के टुकड़े फेंक कर वाहन को रोकने की कोशिश की। ट्रक चालक ने भागने के लिए करीब 14 किलोमीटर तक गलत दिशा में गाड़ी चलाई, लेकिन आरोपियों ने उनका पीछा करना जारी रखा। जब आरोपियों द्वारा फेंकी गईं लोहे की कीलों और पत्थरों के कारण ट्रक का एक टायर क्षतिग्रस्त हो गया तो ट्रक महानदी नदी पर बने पुल पर रुका। आरोप पत्र में कहा गया है कि ट्रक में सवार तीनों लोग डर के कारण वाहन से उतर गए और अपनी जान बचाने के लिए पुल से नदी में कूद गए। इसमें कहा गया है कि पूरी घटना में आरोपियों ने करीब 53 किलोमीटर तक तेज गति से ट्रक का पीछा किया और उसे अवैधं रूप से रोकने की कोशिश की, जिससे पता चलता है कि आरोपियों को पता था कि उनके कृत्य से ट्रक में सवार लोगों की मौत हो सकती है या उन्हें ऐसी शारीरिक चोट लग सकती है, जिससे उनकी मौत हो सकती है। आरोप पत्र के मुताबिक, आरोपियों के कृत्य से भयभीत होकर तीनों व्यक्ति ट्रक से उतर गए और पुल से नदी में कूद गए, जिससे तीनों में से एक चांद मियां की मौके पर ही मौत हो गई और गुड्डू खान ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। इसमें कहा गया कि सद्दाम ने करीब 12 दिनों के इलाज के बाद दम तोड़ दिया। आरोप पत्र में कहा गया है कि पुल से कूदने के बाद उसे लगी गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। इसमें कहा गया है कि आरोपियों का कृत्य भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 में उल्लेखित आपराधिक कृत्य के अंतर्गत आता है। जांच के बाद आईपीसी की धारा 304 और 34 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया।

इधर आरंग पुलिस ने इस मामले गिरफ्तार किया था जिसमें हर्ष मिश्रा, राजा अग्रवाल, नवीन सिंह ठाकुर और मयंक शर्मा शामिल है जबकिकहा जा रहा है कि अन्य लोगों की गिरफतारी सत्ता के दबाव में रोक दी गई। 

इधर पुलिए के आरोप पत्र को लेकर कांग्रेस ने डबल इंजन की साय सरकार पर गंभीर आरोप लगाये है। कांग्रेस प्रवक्ता सुशीत आनंद शुक्ला ने  न्यायिक जांच कराने की मांग उठाई है। अपराधियों को बचाने आरोप पत्र में लीपापोती के दावे करते हुए पुलिस की पूरी कार्रवाई को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला के मुताबिक कांग्रेस पार्टी इस घटना की न्यायिक जांच चाहती है। भाजपा सरकार की नीयत शुरू से ही आरोपियों को बचाने की थी। सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बयान को ही आधार बनाते हुए पुलिस द्वारा आरोप पत्र तैयार करना प्रतीत हो रहा है।

छत्तीसगढ़ जैसे शांत प्रदेश में धर्म के नाम पर इस तरह की वारदात ने डबल इजन वाली विष्णुदेव साय सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्योंकि हाल के दिनों में भाजपा ने जिस तरह की  राजनीति शुरू की है उसका असर मी पड़ने लगा है, । बस्तर के नारायणपुर में धर्मान्तरण को लेकर हुए विवाद में तत्कालीन एसपी सदानंद कुमार का उपद्रकीयों ने सर फोड़ दिया था, तो बीरमपुर की घटना पर बवाल मचा  था। 

यही नहीं झंडा लगाने के मामूली विवाद के चलते कवर्धा में कर्फ्यू तक लगाना पड़ा था तो वर्तमान गृह‌मंत्री विजय शर्मा पर उपद्रव मचाने के आरोप में जुर्म दर्ज हुआ था और विजय शर्मा सहित दर्जनों भर लोगों को जेल भी जाना पड़ा था।

ऐसे में इस शांत प्रदेश में हुए मॉब लिचिंग की घटना किसी भी सत्ता के माथे पर कलंक है।

शुक्रवार, 19 जुलाई 2024

संघ- तिलमिलाहट कम, नौटंकी ज्यादा...

 प्रतिष्ठा का प्रश्न कहाँ 

आफत में अस्तित्व... 

तिलमिलाहट कम, नौटंकी ज्यादा...


कांग्रेस मुक्त भारत का नारा लगाते लगाते स्वयं को भगवान के रूप में प्रतिष्ठित करने के प्रयास में लगे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इन दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत के शब्द बाण की चर्चा खूब सुर्खियां बटोर रही है। तो इसकी वजह क्या है। क्या मोदी ने इन दस सालो में संघ की प्रतिष्ठा को इतना धूमिल कर दिया है कि मोहन भागवत नये सिरे से संघ की प्रतिष्ठा बचाने की कवायद कर रहे हैं या फिर स्वयं सेवकों  के ग़ुस्से पर पानी छिड़क रहे हैं!

पिछले दस सालों में यानी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर संघ के प्रचारक नरेद्र मोदी के बैठने के बाद संघ और उसके अनुषंकिक संगठनों की गतिविधियों पर नजर डाले तो यह साफ़ दिखाई देता है कि कांग्रेस मुक्त नारे  से खुश संघ के तमाम अनुशंकिक संगठनों ने नरेंद्र मोदी के आगे स्वयं को नतमस्तक कर लिया था।

पचाल साल तक बीजेपी की सरकार  बने रहने का सपना इतना बड़ा  हो गया कि संघ के उद्देश्य को तिलांजलि दे दी गई। निजीकरण से लेकर तीन कृषि बिल हो या नोटबंदी से लेकर जीएसटी से होने वाली तकलीफ़,श्रम कानून से लेकर प्रधानमंत्री के हर घोषणा पर संघ ने यही सोचकर चुप्पी ओढ़ ली  कि  नरेंद्र मोदी का हर कदम हिन्दू राष्ट्र की ओर उठ रहा है?

संघ तो बीजेपी  के 240 सीट आने पर भी आँखें नहीं खोलता यदि सत्ता जाने के अंदेशे में सर्वाधिक ख़तरा संघ के स्वयंसेवकों को ही है यह बात स्वयंसेवक जोर-शोर से नहीं उठाते ।

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता का ऐसा चकाचौंध खड़ा कर दिया था कि संघ प्रमुख की आँखें चौधियां गई थी, उन्हें सत्ता और कारपोरेट के गठजोड़ से मंह‌गाई और बेरोजगारी से जूझ रहे लोग दिखाई ही नहीं दे रहे थे। झूठ और अफवाह की जिस राजनीति के आसरे नफरत का बीज बोकर राजनीति साधी जा रही थी, वह सब कुछ संघ को अपने अनुकूल लग रहा था कहा जाय तो भी गलत नहीं होगा ?

लेकिन राइल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा, भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह से संघ पर सीधा प्रहार किया और आलोचना करने लगे, संघ ने तब भी इसकी परवाह इसलिए नहीं की थी, क्योकि उन्हें लगता रहा कि नरेंद्र मोदी ने जब दावा किया है तो 400 सीट न सहीं 350 सीट तो आ ही जायेगी।

लेकिन जब परिणाम आये तो स्वयं सेवकों की बेचैनी बढ़ गई । सत्ता जाने के बाद के ख़तरे दिखाई देने लगे तब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मोदी के अहंकार और भगवान बनने को लेकर अपरोक्ष बोलना शुरू  किया है यानी अब भी नाम लेकर बोलने की हिम्मत नहीं है तो इसकी दो ही वजह है या तो नरेंद्र मोदी ने समूचे संघ पर क़ब्ज़ा जमा लिया है और इस ताक़त से उनके मन में  डर घर कर गया है या सत्ता की मलाई छोड़ा नहीं जा रहा।

लेकिन जिस तरह से इस दौर में संघ की प्रतिष्ठा को आँच पहुंची है वह अब स्वयंसेवकों में बेचैनी का सबब है। सत्ता के प्रभाव में संघ ने शाखाओं का विस्तार ही नहीं किया बल्कि भव्य और सुविधा युक्त कार्यालय  भी बने लेकिन उसने कभी सपने में नहीं सोचा रहा होगा कि जिस नरेंद्र मोदी की छवि बिग‌ड़‌ने की बात वह ऑर्गेनज़र में कर रहा है उस नरेंद्र मोदी ने तो संघ की छवि ही नहीं प्रतिष्ठा पर तो प्रश्न चिन्ह लगाए है बल्कि अस्तित्व पर भी सवालिया निशान लगा दिया है?