परदे बचा न पायेंगे अब घर के आबरू
इस दौर में हवाओं की भी नियत खराब है
छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता का एक नाम था लेकिन राय बनने के बाद जिस तेजी से सरकारों ने विज्ञापन का चारा डाला है उससे मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसा नहीं है कि अखबारों में अब खबरें नहीं होती लेकिन जिस तरह से खबरों को मैनेज किया जा रहा है वह आम लोगों के समझ में भी आने लगा है। वैसे तो जनसंपर्क विभाग का काम सरकार और जनता के बीच सेतु का है लेकिन इन दिनों जनसंपर्क का पूरा ध्यान मीडिया मैनेजमेंट पर जा टिका है और वे इसमें भी कमाई का जरिया निकाल लेते हैं। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के बाहर से प्रकाशित होने वाले टुटपुंजिए पत्र-पत्रिकाओं को भी मोटी राशि वाले विज्ञापन दिए जाते हैं और इसके एवज में कमीशन लिए जाते हैं।
सरकारी विज्ञापन लेने की होड़ में अखबारों को जनसंपर्क के जाल में फंसा रखा है। अब न पहले जैसी खोजी पत्रकारिता होती है और न ही घटना के बाद किश्तों में छपने वाले फॉलोअप स्टोरी ही दिखाई पड़ता है। एक समय था जब रायपुर के अखबारों व उनके पत्रकारों के आगे बड़े-बड़े नेता-अधिकारी तक अपना सिर झुकाते थे अब तो जमाना बदल गया है। भैय्या शब्द की लाचारी ने रिश्ते जोड़ दिए हैं और रिश्ते जुड़ने के बाद खबर की बात ही बेमानी हो जाती है। बड़े अखबारों ने तो परिशिष्ट के बहाने विज्ञापन बटोरना शुरु कर दिया है। मंत्रियों को छोटे-छोटे कार्यक्रमों में बुलाए जाने लगे है ऐसे में पत्रकारिता की विश्वसनियता पर सवाल उठे भी तो क्या। धंधा अच्छा चलना चाहिए।
और अंत में....
पिछले दिनों स्कूल के पैसे से अखबार निकालने वाले ने दूसरे अखबार वाले से कहा आपका अखबार हमारे यहां तभी छपेगा जब आप अपने यहां के अमूक कर्मचारी को हटाओगें उसके लड़के को हम हटा रहे हैं।
http://midiaparmidiaa.blogspot.in/
मंगलवार, 11 मई 2010
मंदिर-आदिवासियों की जमीन हड़पने में सरकार की चुप्पी!
घोटालेबाजों का जमाना महाधिवक्ता है सुराना - 8
सुराना परिवार द्वारा श्री हनुमान मंदिर की जमीन और आदिवासियों की जमीन हड़पने के मामले में सरकार की चुप्पी आश्चर्यजनक है और कहा जा रहा है उच्च राजनैतिक पहुंच के चलते ही इस मामले पर कार्रवाई नहीं की जा रही है जबकि प्रथम दृष्टया ही अपराध बनता है।
छत्तीसगढ़ को लुटने की साजिश में वैसे तो कई नेता अधिकारी और मंत्री तक शामिल है लेकिन महाधिवक्ता जैसे पद पर बैठने वाले देवराज सुराना और उसके परिवार पर जिस तरह से आरोप लगे हैं उसके बाद तो इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जरूरत है लेकिन आश्चर्य का विषय तो यह है कि जांच की बात तो दूर उन्हें महाधिवक्ता बना दिया गया। ऐसे में सरकार के रवैये का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
इधर गोपियापारा में जब श्री हनुमान मंदिर की जमीन के बिक्री को लेकर बात की गई तो लोगों में आक्रोश साफ झलक रहा था। मंदिरों की जमीन बचाने में लगे श्री ठाकुर ने कहा कि सरकार कानून तो बना देती है लेकिन कार्रवाई नहीं करती अभी भी साजिशपूर्वक मंदिरों की जमीनें बेची जा रही है। नागरिकदास मठ की जमीन तो साजिशपूर्वक एक संस्था को ही दी जा रही है जिसका हम विरोध करते हैं। वहीं अजय अग्रवाल ने कहा कि महाधिवक्ता पद एक गरिमामय पद हैं और ऐसे जगह पर विवादास्पद व्यक्तियों को बिठाया जाना ठीक नहीं है जबकि सरकार को चाहिए कि वे ऐसे विवादास्पद व्यक्तियों से इस्तीफा ले ले।इसी तरह आदिवासी की जमीन हड़पने के मामले में भी शासन प्रशासन की भूमिका संदिग्ध है और इस मामले में भी लीपापोती का केल जमकर खेला गया। बहरहाल महाधिवक्ता देवराज सुराना के विवादास्पद मामले की शहर में कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है जमीन व्यवसाय से जुड़े सुराना परिवार के कई और मामले सामने आएंगे।
सुराना परिवार द्वारा श्री हनुमान मंदिर की जमीन और आदिवासियों की जमीन हड़पने के मामले में सरकार की चुप्पी आश्चर्यजनक है और कहा जा रहा है उच्च राजनैतिक पहुंच के चलते ही इस मामले पर कार्रवाई नहीं की जा रही है जबकि प्रथम दृष्टया ही अपराध बनता है।
छत्तीसगढ़ को लुटने की साजिश में वैसे तो कई नेता अधिकारी और मंत्री तक शामिल है लेकिन महाधिवक्ता जैसे पद पर बैठने वाले देवराज सुराना और उसके परिवार पर जिस तरह से आरोप लगे हैं उसके बाद तो इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जरूरत है लेकिन आश्चर्य का विषय तो यह है कि जांच की बात तो दूर उन्हें महाधिवक्ता बना दिया गया। ऐसे में सरकार के रवैये का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
इधर गोपियापारा में जब श्री हनुमान मंदिर की जमीन के बिक्री को लेकर बात की गई तो लोगों में आक्रोश साफ झलक रहा था। मंदिरों की जमीन बचाने में लगे श्री ठाकुर ने कहा कि सरकार कानून तो बना देती है लेकिन कार्रवाई नहीं करती अभी भी साजिशपूर्वक मंदिरों की जमीनें बेची जा रही है। नागरिकदास मठ की जमीन तो साजिशपूर्वक एक संस्था को ही दी जा रही है जिसका हम विरोध करते हैं। वहीं अजय अग्रवाल ने कहा कि महाधिवक्ता पद एक गरिमामय पद हैं और ऐसे जगह पर विवादास्पद व्यक्तियों को बिठाया जाना ठीक नहीं है जबकि सरकार को चाहिए कि वे ऐसे विवादास्पद व्यक्तियों से इस्तीफा ले ले।इसी तरह आदिवासी की जमीन हड़पने के मामले में भी शासन प्रशासन की भूमिका संदिग्ध है और इस मामले में भी लीपापोती का केल जमकर खेला गया। बहरहाल महाधिवक्ता देवराज सुराना के विवादास्पद मामले की शहर में कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है जमीन व्यवसाय से जुड़े सुराना परिवार के कई और मामले सामने आएंगे।
सोमवार, 10 मई 2010
चोर हो चाहे हत्यारा , आदमी है हमारा !
छत्तीसगढ़ में सफेदपोश अपराधियों को किस तरह से सरकार और उसके मंत्री संरक्षण दे रहे हैं यह बताने की जरूरत नहीं है। आरोप सिध्द न हो जाए तब तक अपराधी नहीं के जुमले ने सिध्दांतवादी राजनीति के पर कतर दिए हैं। राय बनने के बाद तो छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार खूब बढ़ा है। नेताओं को लेकर अधिकारियों में सरकारी खजाने को लूटने की प्रतिस्पर्धा चल पड़ी है। जोगी शासन काल में निगम मंडल का गठन शायद यही सोचकर नहीं किया गया था कि भ्रष्टाचार बढ़ेगा। भाजपा सरकार सत्ता में आते ही ऐसे लोगों को लालबत्ती थमा दी जिनकी औकात भी नहीं थी और जिसका उदाहरण है निगम मंडलों की आड़ में सरकारी खजाने की जमकर लूट खसोट हुई। बताया जाता है कि निगम मंडल के अध्यक्षों ने डॉ. रमन सिंह के पिछले कार्यकाल में पैसा कमाने का कोई मौका नहीं छोड़ा और कमाई को देखते हुए एक बार फिर निगम मंडल अध्यक्ष बनने होड़ मची है। सफेदपोश अपराधियों की मंडली इस कार्य में जुट गई है। एक तरफ सरकार के पास बड़ी योजनाओं के लिए पैसे का अभाव है और दूसरी तरफ निगम मंडल में अध्यक्षों की नियुक्ति कर सरकारी खजाने में बोझ डालने की कोशिश हो रही है।
भूमाफिया से लेकर शराब माफियाओं का दबदबा तो सरकार पर स्पष्ट दिखता है ऐसे में सफेदपोश अपराधियों की मंडली यदि निगम मंडल में अध्यक्षों की नियुक्ति में सफल हो जाती है तो छत्तीसगढ़ की राजधानी एक बार फिर माफियाओं के चंगुल में होगा। इस सरकार ने तो शायद फैसला ही कर लिया है कि यदि हमारी पार्टी या हमारे लोग गलत हैं तो भी हमारे हैं और उन्हें मलाईदार पदों पर बिठाया ही जाएगा। पुलिस विभाग में ही जिन्हें संविदा नियुक्ति दी गई है क्या उनके विवादास्पद चरित्र किसी से छीपे हैं। इसी तरह अन्य विभाग में रिटायर्ड या किस तरह के लोगों को संविदा नियुक्ति दी गई है किसी से छीपा नहीं है। महाधिवक्ता के पद पर नियुक्त देवराज सुराना और उनके परिवार के विवादास्पद कार्य क्या किसी से छिपे हैं। इसी तरह से निगम मंडल में पिछली बार जिन्हें नियुक्त किया गया था उनके घपले सबके सामने हैं।
भाजपा के बड़े नेता जब विपक्ष में थे तब सिध्दांतों की राजनीति का कितना वकालत करते थे किसी से छिपा नहीं है। सत्ता में आते ही उनकी भूमिका क्या हो गई यह भी किसी से छिपा नहीं है। लेकिन छत्तीसगढ़ में जिस तरह से सरकारी खजानों पर डाका डाला जा रहा है ऐसा कहीं देखने को नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री का विभाग ऊर्जा, खनिज और जनसंपर्क में जब खुलेआम भ्रष्टाचार किया जा रहा हो तब बृजमोहन अग्रवाल के विभागों से ईमानदारी की उम्मीद बेमानी है। इतनी अंधेरगर्दी के बाद भी सरकारें चलती है तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि लोग खुश है। सरकारें तो 20-30 प्रतिशत लोगों का वोट पाकर बन जाती है।
भूमाफिया से लेकर शराब माफियाओं का दबदबा तो सरकार पर स्पष्ट दिखता है ऐसे में सफेदपोश अपराधियों की मंडली यदि निगम मंडल में अध्यक्षों की नियुक्ति में सफल हो जाती है तो छत्तीसगढ़ की राजधानी एक बार फिर माफियाओं के चंगुल में होगा। इस सरकार ने तो शायद फैसला ही कर लिया है कि यदि हमारी पार्टी या हमारे लोग गलत हैं तो भी हमारे हैं और उन्हें मलाईदार पदों पर बिठाया ही जाएगा। पुलिस विभाग में ही जिन्हें संविदा नियुक्ति दी गई है क्या उनके विवादास्पद चरित्र किसी से छीपे हैं। इसी तरह अन्य विभाग में रिटायर्ड या किस तरह के लोगों को संविदा नियुक्ति दी गई है किसी से छीपा नहीं है। महाधिवक्ता के पद पर नियुक्त देवराज सुराना और उनके परिवार के विवादास्पद कार्य क्या किसी से छिपे हैं। इसी तरह से निगम मंडल में पिछली बार जिन्हें नियुक्त किया गया था उनके घपले सबके सामने हैं।
भाजपा के बड़े नेता जब विपक्ष में थे तब सिध्दांतों की राजनीति का कितना वकालत करते थे किसी से छिपा नहीं है। सत्ता में आते ही उनकी भूमिका क्या हो गई यह भी किसी से छिपा नहीं है। लेकिन छत्तीसगढ़ में जिस तरह से सरकारी खजानों पर डाका डाला जा रहा है ऐसा कहीं देखने को नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री का विभाग ऊर्जा, खनिज और जनसंपर्क में जब खुलेआम भ्रष्टाचार किया जा रहा हो तब बृजमोहन अग्रवाल के विभागों से ईमानदारी की उम्मीद बेमानी है। इतनी अंधेरगर्दी के बाद भी सरकारें चलती है तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि लोग खुश है। सरकारें तो 20-30 प्रतिशत लोगों का वोट पाकर बन जाती है।
संवाद में कुरेटी के हाथ से जनसंपर्क का विज्ञापन फिसला
सालों से जमें संवाद में सुखदेव कुरोटी के विवादास्पद छवि के बाद शायद शासन की नींद टूटी है और कहा जा रहा है उनसे जनसंपर्क विभाग के विज्ञापन का प्रभार छिना गया है।
उल्लेखनीय है कि जनसंपर्क और संवाद में चल रहे कमीशनखोरी को लेकर जबरदस्त चर्चा है और इसकी शिकायत जनसंपर्क सचिव से लेकर मुख्यमंत्री तक की गई है। बताया जाता है कि लगातार शिकायत के बाद संवाद में व्यवस्था परिवर्तन किए जाने की खबर है। हालांकि इस व्यवस्था परिवर्तन की कोई लिखित में आदेश जारी नहीं किए है लेकिन उच्च पदस्थ अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
सूत्रों के मुताबिक अब तक संवाद के द्वारा जारी किए जाने वाले सारे विज्ञापन सुखदेव कुरोटी के पास से जारी किए जाते थे लेकिन लगातार शिकायत को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि अब जनसंपर्क द्वारा जारी किए जाने वाले विज्ञापन कुरोटी की बजाय उनके जूनियर श्री पुजारी के मार्फत जारी होंगे। संवाद में हुए इस परिवर्तन की मीडिया जगत में जबरदस्त चर्चा है और कहा जा रहा है कि यह कुरोटी के पर कतरे जाने की शुरुआत है।
उल्लेखनीय है कि जनसंपर्क और संवाद में चल रहे कमीशनखोरी को लेकर जबरदस्त चर्चा है और इसकी शिकायत जनसंपर्क सचिव से लेकर मुख्यमंत्री तक की गई है। बताया जाता है कि लगातार शिकायत के बाद संवाद में व्यवस्था परिवर्तन किए जाने की खबर है। हालांकि इस व्यवस्था परिवर्तन की कोई लिखित में आदेश जारी नहीं किए है लेकिन उच्च पदस्थ अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
सूत्रों के मुताबिक अब तक संवाद के द्वारा जारी किए जाने वाले सारे विज्ञापन सुखदेव कुरोटी के पास से जारी किए जाते थे लेकिन लगातार शिकायत को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि अब जनसंपर्क द्वारा जारी किए जाने वाले विज्ञापन कुरोटी की बजाय उनके जूनियर श्री पुजारी के मार्फत जारी होंगे। संवाद में हुए इस परिवर्तन की मीडिया जगत में जबरदस्त चर्चा है और कहा जा रहा है कि यह कुरोटी के पर कतरे जाने की शुरुआत है।
गृहमंत्री के बंगले में घंटो युवक को जबरिया रखा गया...
चिरमिरी से उठाकर पुलिस लाई थी
कहते हैं पुलिस वालों से बड़ा गुण्डा कोई नहीं होता और ऐसे में जब गृहमंत्री का संरक्षण हो तो आम आदमी को क्या कुछ भुगतना पड़ सकता है यह चिरमिरी निवासी कुलदीप सलूजा की आपबीती से जाना जा सकता है। पुलिस उसे चिरमिरी से उठा लाती है गृहमंत्री के सरकारी आवास पर रखती है और फिर छोड़ देती है।
घटना 2 मई 2010 की शाम सात बजे की है जब चिरमिरी निवासी कुलदीप सलूजा अपने घर में था तब शाम सात बजे गृहमंत्री का खास कहने वाले जे. कौशिक ने टीआई लता चौरे और अन्य पुलिस कर्मियों के साथ कुलदीप सलूजा को पकड़कर रायपुर चलने की बात कही। कहा जाता है कि जे. कौशिक गृहमंत्री ननकीराम कंवर का खास आदमी है और उसने कुलदीप सलूजा पर चिरमिरी में डांस बाला बुलाने और स्थानीय पुलिस वालों को शराब पिलाने का आरोप लगाते हुए खूब चमकाया। उसके साथ लता चौरे और उपस्थित स्टॉफ ने भी उसे साथ चलने मजबूर किया।
एक तरफ पुलिस कुलदीप सलूजा को कोल माफिया बता रही है और उस पर कई तरह के आरोप लगा रही है वहीं दूसरी तरफ कुलदीप सलूजा का कहना है कि उन पर लगाए जा रहे सारे आरोप बेबुनियाद है। उनका कहना है कि शादी समारोह में उत्तर प्रदेशवासियों द्वारा नाच गाने का आयोजन होता है और शादी में पुलिस वाले भी आए थे चूंकि दुल्हा पुलिस में है इसलिए भी पुलिस वाले थे। इधर लता चौरे की टीम पूछताछ करने के नाम पर कुलदीप सलूजा को चिरमिरी से शाम को ही लाया गया और रात बिलासपुर के गेस्ट हाउस में रुके और फिर सुबह किसी थाने में ले जाने की बजाय लता चौरे की टीम उसे गृहमंत्री के सरकारी बंगले में ले गई। जहां उन्हें रात आठ बजे तक रोक कर रखा गया और फिर बिना पूछताछ किए छोड़ दिया गया। गृहमंत्री के भी बंगले में मौजूद रहने की खबर है। इधर बताया जाता है कि गृहमंत्री की मंशा कोल माफियाओं पर शिकंजा कसने की है लेकिन जिस तरह से कुलदीप सलूजा को चिरमिरी से लाया गया और बगैर पूछताछ किए छोड़ा गया उसे लेकर कई तरह की चर्चा है।
हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि इस मामले में कोल माफियाअओं के साथ जबरदस्त लेन-देन की चर्चा है जबकि यह भी कहा जा रहा है कि गृहमंत्री की आड़ में लेन देन का जबरदस्त खेल चल रहा है और कुलदीप सलूजा को इसी के चलते उठाया गया था। इधर हमारे चिरमिरी संवाददाता रतन जैन ने कहा कि जिस तरह से यहां कोल माफिया सक्रिय है उसकी शिकायत लगातार की जाती है और गृहमंत्री के स्टाफ की इस कार्रवाई से कोल माफियाओं में हड़कम्प मचा है। बहरहाल कुलदीप सलूजा को उठाने और बिना पूछताछ किए छोड़े जाने की यहां जबरदस्त चर्चा है और इससे गृहमंत्री की छवि पर भी प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है।
कहते हैं पुलिस वालों से बड़ा गुण्डा कोई नहीं होता और ऐसे में जब गृहमंत्री का संरक्षण हो तो आम आदमी को क्या कुछ भुगतना पड़ सकता है यह चिरमिरी निवासी कुलदीप सलूजा की आपबीती से जाना जा सकता है। पुलिस उसे चिरमिरी से उठा लाती है गृहमंत्री के सरकारी आवास पर रखती है और फिर छोड़ देती है।
घटना 2 मई 2010 की शाम सात बजे की है जब चिरमिरी निवासी कुलदीप सलूजा अपने घर में था तब शाम सात बजे गृहमंत्री का खास कहने वाले जे. कौशिक ने टीआई लता चौरे और अन्य पुलिस कर्मियों के साथ कुलदीप सलूजा को पकड़कर रायपुर चलने की बात कही। कहा जाता है कि जे. कौशिक गृहमंत्री ननकीराम कंवर का खास आदमी है और उसने कुलदीप सलूजा पर चिरमिरी में डांस बाला बुलाने और स्थानीय पुलिस वालों को शराब पिलाने का आरोप लगाते हुए खूब चमकाया। उसके साथ लता चौरे और उपस्थित स्टॉफ ने भी उसे साथ चलने मजबूर किया।
एक तरफ पुलिस कुलदीप सलूजा को कोल माफिया बता रही है और उस पर कई तरह के आरोप लगा रही है वहीं दूसरी तरफ कुलदीप सलूजा का कहना है कि उन पर लगाए जा रहे सारे आरोप बेबुनियाद है। उनका कहना है कि शादी समारोह में उत्तर प्रदेशवासियों द्वारा नाच गाने का आयोजन होता है और शादी में पुलिस वाले भी आए थे चूंकि दुल्हा पुलिस में है इसलिए भी पुलिस वाले थे। इधर लता चौरे की टीम पूछताछ करने के नाम पर कुलदीप सलूजा को चिरमिरी से शाम को ही लाया गया और रात बिलासपुर के गेस्ट हाउस में रुके और फिर सुबह किसी थाने में ले जाने की बजाय लता चौरे की टीम उसे गृहमंत्री के सरकारी बंगले में ले गई। जहां उन्हें रात आठ बजे तक रोक कर रखा गया और फिर बिना पूछताछ किए छोड़ दिया गया। गृहमंत्री के भी बंगले में मौजूद रहने की खबर है। इधर बताया जाता है कि गृहमंत्री की मंशा कोल माफियाओं पर शिकंजा कसने की है लेकिन जिस तरह से कुलदीप सलूजा को चिरमिरी से लाया गया और बगैर पूछताछ किए छोड़ा गया उसे लेकर कई तरह की चर्चा है।
हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि इस मामले में कोल माफियाअओं के साथ जबरदस्त लेन-देन की चर्चा है जबकि यह भी कहा जा रहा है कि गृहमंत्री की आड़ में लेन देन का जबरदस्त खेल चल रहा है और कुलदीप सलूजा को इसी के चलते उठाया गया था। इधर हमारे चिरमिरी संवाददाता रतन जैन ने कहा कि जिस तरह से यहां कोल माफिया सक्रिय है उसकी शिकायत लगातार की जाती है और गृहमंत्री के स्टाफ की इस कार्रवाई से कोल माफियाओं में हड़कम्प मचा है। बहरहाल कुलदीप सलूजा को उठाने और बिना पूछताछ किए छोड़े जाने की यहां जबरदस्त चर्चा है और इससे गृहमंत्री की छवि पर भी प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है।
नगरीय निकाय मंत्री और पार्षदों में टकराव...
मुंह फट और अनाप-शनाप बोलने में माहिर प्रदेश के नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत का इन दिनों राजधानी के आधा दर्जन पार्षदों से टकराव चल रहा है जिसमें से कई भाजपा के भी है और वे पार्टी के होने के कारण खामोश है। जबकि निर्दलीय पार्षद श्रीमती अंजू तिवारी ने मंत्री के खिलाफ सीधे मोर्चा खोल रखा है और उसे भाजपा के एक विधायक सहित आधा दर्जन से अधिक पार्षदों का समर्थन मिल रहा है।
नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत के व्यवहार को लेकर समय समय पर विवाद होता रहा है कहा जाता है कि विरोधियों के साथ तो उनका रवैये को लेकर सवाल उठाये जाते ही रहे हैं लेकिन पार्टी के भीतर भई आम कार्यकर्ताओं के प्रति उनके व्यवहार की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
बताया जाता है कि कोटा वार्ड की निर्दलीय पार्षद श्रीमती अंजू तिवारी ने उनके व्यवहार को लेकर नाराज हैं। श्रीमती अंजू तिवारी का कहना है कि मंत्री का व्यवहार सभी के लिए बराबर होना चाहिए लेकिन पिछली बार श्री मूणत ने सभी वार्डों में 20-20 लाख रुपए के कार्य कराए जबकि कोटा में 3-4 लाख के ही कार्य हुए। इसी तरह सूत्रों के मुताबिक निगम में नेता प्रतिपक्ष सुभाष तिवारी, सुनील बांद्रे सहित आधा दर्जन भाजपाई पार्षद भी नाराज हैं। नाराज भाजपाई पार्षदों से जब इस बारे में पूछा गया तो एक पार्षद ने कहा कि जैन मुनि के सानिध्य के बाद उनके सुधर जाने की उम्मीद थी लेकिन उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया हैं हमने तो वहां जाना ही बंद कर दिया। इसी तरह एक पार्षद ने तो साफ कह दिया कि वे तो इस मंत्री का नाम तक सुनना पसंद नहीं करते।
बताया जाता है कि नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत के व्यवहार की शिकायत छत्तीसगढ़ के प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान से भी की गई है। जबकि भाजपा के कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि युवा मोर्चा वाला रवैया अब उचित नहीं हैं। नगरीय निकाय मंत्री और पार्षदों में चल रहे टकराव को लेकर यहां कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि एक विधायक ने तो निर्दलीय पार्षद अंजू तिवारी को आश्वस्त किया है कि लड़ाई जारी रखे मदद किया जाएगा। हालांकि निर्दलीय पार्षद ने विधायक का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि वे कोटा से दूसरी बार जीत कर आए हैं और वे अपनी बात मंत्री के समक्ष नहीं रखेंगे तो कैसे चलेगा। बहरहाल नगरीय निकाय मंत्री के प्रति भाजपा कार्यकर्ताओं और पार्षदों में बढ़ते असंतोष की शिकायत प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान से की गई है देखना है कि इस मामले में क्या होता है।
नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत के व्यवहार को लेकर समय समय पर विवाद होता रहा है कहा जाता है कि विरोधियों के साथ तो उनका रवैये को लेकर सवाल उठाये जाते ही रहे हैं लेकिन पार्टी के भीतर भई आम कार्यकर्ताओं के प्रति उनके व्यवहार की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
बताया जाता है कि कोटा वार्ड की निर्दलीय पार्षद श्रीमती अंजू तिवारी ने उनके व्यवहार को लेकर नाराज हैं। श्रीमती अंजू तिवारी का कहना है कि मंत्री का व्यवहार सभी के लिए बराबर होना चाहिए लेकिन पिछली बार श्री मूणत ने सभी वार्डों में 20-20 लाख रुपए के कार्य कराए जबकि कोटा में 3-4 लाख के ही कार्य हुए। इसी तरह सूत्रों के मुताबिक निगम में नेता प्रतिपक्ष सुभाष तिवारी, सुनील बांद्रे सहित आधा दर्जन भाजपाई पार्षद भी नाराज हैं। नाराज भाजपाई पार्षदों से जब इस बारे में पूछा गया तो एक पार्षद ने कहा कि जैन मुनि के सानिध्य के बाद उनके सुधर जाने की उम्मीद थी लेकिन उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया हैं हमने तो वहां जाना ही बंद कर दिया। इसी तरह एक पार्षद ने तो साफ कह दिया कि वे तो इस मंत्री का नाम तक सुनना पसंद नहीं करते।
बताया जाता है कि नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत के व्यवहार की शिकायत छत्तीसगढ़ के प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान से भी की गई है। जबकि भाजपा के कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि युवा मोर्चा वाला रवैया अब उचित नहीं हैं। नगरीय निकाय मंत्री और पार्षदों में चल रहे टकराव को लेकर यहां कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि एक विधायक ने तो निर्दलीय पार्षद अंजू तिवारी को आश्वस्त किया है कि लड़ाई जारी रखे मदद किया जाएगा। हालांकि निर्दलीय पार्षद ने विधायक का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि वे कोटा से दूसरी बार जीत कर आए हैं और वे अपनी बात मंत्री के समक्ष नहीं रखेंगे तो कैसे चलेगा। बहरहाल नगरीय निकाय मंत्री के प्रति भाजपा कार्यकर्ताओं और पार्षदों में बढ़ते असंतोष की शिकायत प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान से की गई है देखना है कि इस मामले में क्या होता है।
महाराष्ट्र में पैसा खपाने वाले मुकेश-दिनेश का जलवा
क्यों न हो महाराष्ट्र का विकास
महाराष्ट्र के विकास में अब छत्तीसगढ़ का योगदान बढ़ने लगा है कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ के राजनेताओं और अधिकारियों के करोड़ों-अरबों रुपए महाराष्ट्र में खर्च किए जा रहे हैं। प्रदेश के एक मंत्री के तो नागपुर-गोंदिया में अरबों रुपए जमीन खरीदी में लगा है और इस काम में मुकेश व दिनेश की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ वैसे तो भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। राजधानी की जमीनें आसमान छूने लगी है और फिर भ्रष्टाचार का पैसा खपाना आसान नहीं है इसलिए यहां के कई अधिकारी व नेता अपनी काली कमाई दूसरे प्रदेशों में खपाने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री का आया है। कहा जाता है कि राजधानी में रिश्तेदारों और दोस्तों के नाम बेनामी जमीनें खरीदने के साथ-साथ अब इस मंत्री ने गोंदिया-नागपुर और मुंबई में भी अपने रिश्तेदारों व विश्वसनीय लोगों के नाम पर जमीन खरीदना शुरु कर दिया है।
हमारे सूत्रों व नागपुर संवाददाताओं के मुताबिक पिछले 5-6 सालों में यहां की जमीनों की कीमत में बेतहाशा वृध्दि हुई है और इसकी वजह छत्तीसगढ़ के एक मंत्री की रूचि है जिनके रिश्तेदारों द्वारा यहां भारी पैमाने पर जमीनें खरीदी गई है। हमारे सूत्रों के मुताबिक गोंदिया और नागपुर में इन 6 सालों में दिनेश-मुकेश की जोड़ी ने तहलका मचा रखा है और इन लोगों ने कई जमीनें अपने नाम पर खरीदी है या फिर अपने रिश्तेदारों के नाम पर रजिस्ट्री कराई है। सूत्रों का दावा है कि इन 6 सालों में गोंदिया व नागपुर में खरीदी गई जमीनों की उच्च स्तरीय जांच की गई तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
हमारे सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र के तेजी से विकास में भी काली कमाई का बहुत बड़ा हाथ है पूरे देशभर के कई अधिकारी व नेता यहां पैसा खपा रहे हैं इसलिए इस प्रदेश में बढते निर्माण कार्य ने विकास दर में वृध्दि किया है। सूत्रों का कहना है कि यदि छत्तीसगढ़ के राजनेता व अधिकारी अपने ही प्रदेश में पैसा खपाये तो प्रदेश का विकास तेजी से होगा लेकिन नाम उजागर होने और पकड़े जाने के डर से ये लोग दूसरे प्रदेशों में पैसा लगाते हैं।
इधर मुकेश-दिनेश के जलवे को लेकर राजधानी में जबरर्दस्त चर्चा है और कहा जा रहा है कि इन्हें पैसा किसी राजेन्द्र अग्रवाल और उपाध्याय के मार्फत भेजा जाता है। हालांकि अधिकांश राशि हवाला के माध्यम से ही पहुंचाई जाती है। बहरहाल नागपुर और गोंदिया में बड़े पैमाने पर चल रही जमीन खरीदी को लेकर यहां कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि यदि मुख्यमंत्री ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में कोई बड़ी मुसिबत आ सकती है।
महाराष्ट्र के विकास में अब छत्तीसगढ़ का योगदान बढ़ने लगा है कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ के राजनेताओं और अधिकारियों के करोड़ों-अरबों रुपए महाराष्ट्र में खर्च किए जा रहे हैं। प्रदेश के एक मंत्री के तो नागपुर-गोंदिया में अरबों रुपए जमीन खरीदी में लगा है और इस काम में मुकेश व दिनेश की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ वैसे तो भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। राजधानी की जमीनें आसमान छूने लगी है और फिर भ्रष्टाचार का पैसा खपाना आसान नहीं है इसलिए यहां के कई अधिकारी व नेता अपनी काली कमाई दूसरे प्रदेशों में खपाने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री का आया है। कहा जाता है कि राजधानी में रिश्तेदारों और दोस्तों के नाम बेनामी जमीनें खरीदने के साथ-साथ अब इस मंत्री ने गोंदिया-नागपुर और मुंबई में भी अपने रिश्तेदारों व विश्वसनीय लोगों के नाम पर जमीन खरीदना शुरु कर दिया है।
हमारे सूत्रों व नागपुर संवाददाताओं के मुताबिक पिछले 5-6 सालों में यहां की जमीनों की कीमत में बेतहाशा वृध्दि हुई है और इसकी वजह छत्तीसगढ़ के एक मंत्री की रूचि है जिनके रिश्तेदारों द्वारा यहां भारी पैमाने पर जमीनें खरीदी गई है। हमारे सूत्रों के मुताबिक गोंदिया और नागपुर में इन 6 सालों में दिनेश-मुकेश की जोड़ी ने तहलका मचा रखा है और इन लोगों ने कई जमीनें अपने नाम पर खरीदी है या फिर अपने रिश्तेदारों के नाम पर रजिस्ट्री कराई है। सूत्रों का दावा है कि इन 6 सालों में गोंदिया व नागपुर में खरीदी गई जमीनों की उच्च स्तरीय जांच की गई तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
हमारे सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र के तेजी से विकास में भी काली कमाई का बहुत बड़ा हाथ है पूरे देशभर के कई अधिकारी व नेता यहां पैसा खपा रहे हैं इसलिए इस प्रदेश में बढते निर्माण कार्य ने विकास दर में वृध्दि किया है। सूत्रों का कहना है कि यदि छत्तीसगढ़ के राजनेता व अधिकारी अपने ही प्रदेश में पैसा खपाये तो प्रदेश का विकास तेजी से होगा लेकिन नाम उजागर होने और पकड़े जाने के डर से ये लोग दूसरे प्रदेशों में पैसा लगाते हैं।
इधर मुकेश-दिनेश के जलवे को लेकर राजधानी में जबरर्दस्त चर्चा है और कहा जा रहा है कि इन्हें पैसा किसी राजेन्द्र अग्रवाल और उपाध्याय के मार्फत भेजा जाता है। हालांकि अधिकांश राशि हवाला के माध्यम से ही पहुंचाई जाती है। बहरहाल नागपुर और गोंदिया में बड़े पैमाने पर चल रही जमीन खरीदी को लेकर यहां कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि यदि मुख्यमंत्री ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में कोई बड़ी मुसिबत आ सकती है।
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