एक तरफ छत्तीसगढ़ पुलिस में अफसरों की कमी का रोना रोया जा रहा है वहीं आधा दर्जन पुलिस अफसर दूसरे विभाग के मालदार विभाग में मलाई खाने में व्यस्त है। ऐसे में सरकार का कमी का रोना उसकी मानसिकता को ही प्रदर्शित करता है।
छत्तीसगढ़ में अफसर राज किस कदर हावी है यह किसी से छिपा नहीं है। गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने पहले ही एसपी को निकम्मा और कलेक्टर को दलाल कह कर पोल खोल चुके हैं ऊपर से जी हुजूरी और महिना पहुंचाने वाले पुलिस अफसर अन्य विभाग के मलाईदार पदों पर बैठकर चापलूसी की सारी सीमाएं लांघने में लगे हैं।
हाल ही में सरकार के तरफ से यह बयान आया कि पुलिस विभाग में अफसरों की कमी है आश्चर्य का विषय तो यह है कि जब पुलिस विभाग में अफसरों की कमी है तब इस विभाग के आधा दर्जन अफसरों को सरकार दूसरे विभाग में बिठाकर क्यों रखी है उन्हें मूल विभाग में वापस क्यों नहीं बुला लेती। सूत्रों का दावा है कि मलाईदार विभाग में अपने खास अफसरों को बिठाकर अपनी जेबें भरने की रणनीति के तहत ही प्रतिनियुक्ति का खेल खेला जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन पुलिस अफसरों को दूसरे विभाग में बिठाया गया हैं उनमें मुख्य रुप से राजीव श्रीवास्तव को संस्कृति विभाग में आर.पी. सिंग को खेल में अजात बहादुर शत्रु को परिवहन में बीएस मरावी मुख्य रुप से शामिल है। बहरहाल पुलिस अफसरों की कमी का रोना रोने को लेकर सरकार की यह नीति आश्चर्यजनक है और इसे लेकर आम लोगों में तीखी प्रतिक्रिया है।
http://midiaparmidiaa.blogspot.in/
बुधवार, 7 जुलाई 2010
मंगलवार, 6 जुलाई 2010
छापा पड़ा तो अखबार ने दुश्मनी भंजा ली...
तब विज्ञापन नहीं दिए अब भुगतो
शहर के एक प्रतिष्ठित दैनिक ने आयकर विभाग द्वारा की गई छापे की कार्रवाई की आड़ में जमकर दुश्मनी भुनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भारत को नया बनाने के चक्कर में लगे इस अखबार पर प्लांटेशन की आड़ में आम लोगों का करोड़ों रुपए हजम कर लेने का भी आरोप है।
छत्तीसगढ़ में व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा ने अखबारों का स्तर किस हद तक गिरा दिया है और मैनेजमेंट किस हद तक हावी है इसका उदाहरण हाल ही में बिल्डरों के खिलाफ आयकर विभाग द्वारा मारे गए छापों की खबरों से देखा जा सकता है। अखबार बेचने सनसनीखेज खबरें बनाने का आरोप तो मीडिया पर लगता ही रहा है लेकिन दुश्मनी भुनाने भ्रामक खबरें छापने की नई परम्परा भी शुरू हो गई है।
बताया जाता है कि आयकर विभाग ने भाजपा नेताओं के आरती बिल्डकान, कांग्रेस के अविनाश बिल्डर्स, अटलानी और रहेजा ग्रुप पर छापे की कार्रवाई की गई लेकिन इस छापे में भाजपा की सत्ता होने की वजह से राजीव अग्रवाल और छगन मूंदड़ा सर्वाधिक चर्चा में आए। बताया जाता है कि आम लोगों में अपनी विश्वसनियता की आड़ में एक अखबार ने आरती बिल्डकॉन के खिलाफ इसलिए अभियान छेड़ दिया क्योंकि इसने कभी इस अखबार पर विज्ञापन का रिस्पांस नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पैकेज में विज्ञापन देने से मना कर दिया और इसके प्रतिद्वंदी अखबार को विज्ञापन दिया।
खबरों को भ्रामक बनाते हुए आरती बिल्डकॉन के खिलाफ जमकर खबर प्रकाशित की गई और खबरें इस तरह बनाई गई कि लाकर जो मिले वो इन्ही ग्रुप के मिले। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक आरती बिल्डकॉन से केवल 1 लाकर मिला वह भी छगन मूंदड़ा के मां के नाम पर बैंक आफ बड़ौंदा का है छगन मूंदड़ा से 5 लाख केस बरामद हुआ जबकि यहां सोना नहीं मिला राजीव अग्रवाल से न कोई लाकर बरामद हुआ और न ही नगद रकम ही जब्त की गई। 700 ग्राम सोना जरूर जब्त हुआ वह भी बिस्किट की शक्ल में होने की वजह से। बताया जाता है कि बिल्डरों ने भारी रकम आयकर विभाग में सरेंडर की है और इस मामले में अभी भी कार्रवाई चल रही है।
हमारे सूत्रों के मुताबिक आरती बिल्डकॉन के खिलाफ किसी विमल के द्वारा लगातार की गई शिकायत पर कार्रवाई हुई और इस कार्रवाई में विमल के पार्टनर भी चपेट में आ गए। इधर कांग्रेस और भाजपा में भी यह मामला गर्म होता जा रहा है और दोनों ही दलों में इन बिल्डरों के विरोधी इन्हें पार्टी से निकालने में सक्रिय हो गए हैं।
बहरहाल छापे की कार्रवाई और इसके बाद छपी खबरों ने विज्ञापन की लालच में फंसे अखबार की प्रतिष्ठा पर आंच पहुंचाई है। कहा जाता है कि इस अखबार ने पार्षद चुनाव में भी पैकेज को लेकर महापौर किरणमयी नायक, सभापति संजय श्रीवास्तव और भाजपा प्रत्याशी विनोद अग्रवाल को भी परेशान कर चुके हैं।
मुसिबत के लिए रखे पैसे
ने मुसीबत बढ़ाई
बिल्डरों के यहां पड़े छापे में उन बिल्डरों की मुसीबत बढ़ा दी है जहां मोटी रकम बरामद हुई है। बताया जाता है कि पति से छिपा कर पैसा रखने की महिलाओं की प्रवृत्ति की वजह से बिल्डरों के घरों में मोटी रकम बरामद हुई। ऐसे ही एक बिल्डर की पत्नी ने कहा कि वे इसलिए थोड़ा-थोड़ा पैसा छिपाकर इकट्ठा रखती थी ताकि मुसीबत या अचानक जरूरत के समय काम आ सके लेकिन आयकर वालों की नजरों से ये पैसे नहीं बच सके।
शहर के एक प्रतिष्ठित दैनिक ने आयकर विभाग द्वारा की गई छापे की कार्रवाई की आड़ में जमकर दुश्मनी भुनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भारत को नया बनाने के चक्कर में लगे इस अखबार पर प्लांटेशन की आड़ में आम लोगों का करोड़ों रुपए हजम कर लेने का भी आरोप है।
छत्तीसगढ़ में व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा ने अखबारों का स्तर किस हद तक गिरा दिया है और मैनेजमेंट किस हद तक हावी है इसका उदाहरण हाल ही में बिल्डरों के खिलाफ आयकर विभाग द्वारा मारे गए छापों की खबरों से देखा जा सकता है। अखबार बेचने सनसनीखेज खबरें बनाने का आरोप तो मीडिया पर लगता ही रहा है लेकिन दुश्मनी भुनाने भ्रामक खबरें छापने की नई परम्परा भी शुरू हो गई है।
बताया जाता है कि आयकर विभाग ने भाजपा नेताओं के आरती बिल्डकान, कांग्रेस के अविनाश बिल्डर्स, अटलानी और रहेजा ग्रुप पर छापे की कार्रवाई की गई लेकिन इस छापे में भाजपा की सत्ता होने की वजह से राजीव अग्रवाल और छगन मूंदड़ा सर्वाधिक चर्चा में आए। बताया जाता है कि आम लोगों में अपनी विश्वसनियता की आड़ में एक अखबार ने आरती बिल्डकॉन के खिलाफ इसलिए अभियान छेड़ दिया क्योंकि इसने कभी इस अखबार पर विज्ञापन का रिस्पांस नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पैकेज में विज्ञापन देने से मना कर दिया और इसके प्रतिद्वंदी अखबार को विज्ञापन दिया।
खबरों को भ्रामक बनाते हुए आरती बिल्डकॉन के खिलाफ जमकर खबर प्रकाशित की गई और खबरें इस तरह बनाई गई कि लाकर जो मिले वो इन्ही ग्रुप के मिले। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक आरती बिल्डकॉन से केवल 1 लाकर मिला वह भी छगन मूंदड़ा के मां के नाम पर बैंक आफ बड़ौंदा का है छगन मूंदड़ा से 5 लाख केस बरामद हुआ जबकि यहां सोना नहीं मिला राजीव अग्रवाल से न कोई लाकर बरामद हुआ और न ही नगद रकम ही जब्त की गई। 700 ग्राम सोना जरूर जब्त हुआ वह भी बिस्किट की शक्ल में होने की वजह से। बताया जाता है कि बिल्डरों ने भारी रकम आयकर विभाग में सरेंडर की है और इस मामले में अभी भी कार्रवाई चल रही है।
हमारे सूत्रों के मुताबिक आरती बिल्डकॉन के खिलाफ किसी विमल के द्वारा लगातार की गई शिकायत पर कार्रवाई हुई और इस कार्रवाई में विमल के पार्टनर भी चपेट में आ गए। इधर कांग्रेस और भाजपा में भी यह मामला गर्म होता जा रहा है और दोनों ही दलों में इन बिल्डरों के विरोधी इन्हें पार्टी से निकालने में सक्रिय हो गए हैं।
बहरहाल छापे की कार्रवाई और इसके बाद छपी खबरों ने विज्ञापन की लालच में फंसे अखबार की प्रतिष्ठा पर आंच पहुंचाई है। कहा जाता है कि इस अखबार ने पार्षद चुनाव में भी पैकेज को लेकर महापौर किरणमयी नायक, सभापति संजय श्रीवास्तव और भाजपा प्रत्याशी विनोद अग्रवाल को भी परेशान कर चुके हैं।
मुसिबत के लिए रखे पैसे
ने मुसीबत बढ़ाई
बिल्डरों के यहां पड़े छापे में उन बिल्डरों की मुसीबत बढ़ा दी है जहां मोटी रकम बरामद हुई है। बताया जाता है कि पति से छिपा कर पैसा रखने की महिलाओं की प्रवृत्ति की वजह से बिल्डरों के घरों में मोटी रकम बरामद हुई। ऐसे ही एक बिल्डर की पत्नी ने कहा कि वे इसलिए थोड़ा-थोड़ा पैसा छिपाकर इकट्ठा रखती थी ताकि मुसीबत या अचानक जरूरत के समय काम आ सके लेकिन आयकर वालों की नजरों से ये पैसे नहीं बच सके।
सोमवार, 5 जुलाई 2010
मोहन की बांसुरी का सूर बेसुरा हुआ

चौतरफा भ्रष्टाचार से भाजपाई नाराज, सुषमा से शिकायत
हाय-हलो स्टाईल से आम लोगों की नजर में चढ़े प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग में बड़े पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार और विवादास्पद अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर आम लोगों में जबरदस्त चर्चा है और कहा जा रहा है कि बृजमोहन अग्रवाल के विभागों में चल रहे घपलेबाजी की शिकायत महंगाई वाले धरने में पहुंची वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज से भी की गई है।
आम लोगों में मिलनसार की छवि की वजह से रायपुर ही नहीं प्रदेश में दमदारी से नेतागिरी करने वाले बृजमोहन अग्रवाल से इन दिनों उनके दक्षिण विधानसभा के लोग ही नाराज होने लगे हैं। कहा जाता है कि पुराने समर्थक जहां घर बैठ गए हैं वही नए समर्थक भी किसी राजेन्द्र व प्रकाश नामक व्यक्ति की दलाली से परेशान हैं। संतोषी नगर में हुई तोड़फोड़ से लेकर आपराधिक लोगों के जमावड़े को लेकर उनके खिलाफ जबरदस्त आक्रोश पनपने लगा है और उनके विभाग में चल रहे घपलेबाजी ने रही सही कसर भी पूरी कर दी है।
सूत्रों की माने तो भ्रष्टाचार की वजह से पार्टी की खराब होती छवि को लेकर भाजपा के कुछ वरिष्ठ लोगों ने श्रीमती सुषमा स्वराज को बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत करते हुए गोदिंया से लेकर छत्तीसगढ़ तक की न केवल कहानी सुनाई है बल्कि कुछ दस्तावेज भी दिए हैं यही नहीं शिक्षा, पीडब्ल्यूडी, पर्यटन व संस्कृति में विवादास्पद नियुक्तियों व विवादास्पद अधिकारियों को संरक्षण दिए जाने का आरोप लगाते हुए दस्तावेज श्रीमती स्वराज को सौंपे गए हैं। बताया जाता है कि श्रीमती स्वराज ने शिकायकर्ताओं को कार्रवाई का न केवल आश्वासन दिया है बल्कि मुख्यमंत्री से चर्चा करने की भी बात कही है।
हमारे सूत्रों के मुताबिक श्रीमती स्वराज को किए गए शिकायत में जमीन कारोबार के अलावा पर्यटन के अधिकारी एमजी श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, शिक्षा विभाग के मैडम तवारिस, मैडम आर. बाम्बरा, संस्कृति विभाग और पीडब्ल्यूडी विभाग के कुछ विवादास्पद अधिकारियों को मंत्री द्वारा संरक्षण दिए जाने का आरोप लगाया गया है। यहीं नहीं पीडब्ल्यूडी के सड़क व भवन निर्माण में बढ़ती कमीशन को लेकर भी सबूत दिए जाने की चर्चा है। कहा जाता है कि बिलासपुर के किसी राजेन्द्र व कवर्धा के किसी प्रकाश के द्वारा दलाली करने की शिकायत करते हुए शिकायकर्ताओं ने यहां तक कहा है कि कांग्रेसियों को यादा महत्व दिया जा रहा है।
बहरहाल बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ की गई शिकायत पर क्या कार्रवाई होगी यह तो बाद में पता चलेगा लेकिन दक्षिण विधानसभा ही नहीं राजधानी में इस मामले की जबरदस्त चर्चा है।
रविवार, 4 जुलाई 2010
महंगाई की मार
छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में तमाम विपक्ष मंहगाई को लेकर हो हल्ला मचा रहे हैं केन्द्र सरकार ने पेट्रोल डीजल केरोसीन और घरेलू गैस से यह कहते हुए सब्सिडी हटा दी कि यह सरकार के लिए बोझ है और यूपीए को छोड़ तमाम राजनैतिक दल मंहगाई के खिलाफ ऐसे कूद पड़े हैं मानों वे मैदान ए जंग में उतर आए हैं।
मंहगाई लगातार बढ़ रही है अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब नारकीय जीवन जीने मजबूर हैं। ऐसे में राजनैतिक दल महंगाई को लेकर सजग हैं यह एक अच्छी बात है लेकिन सवाल यह है कि क्या मंहगाई बढ़ने की वजह सिर्फ पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृध्दि है। यदि सरकार के लिए सब्सिडी बोझ है तो फिर जनता के लिए टैक्स बोझ है तब सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों पर कोई टैक्स नहीं लेना चाहिए। देश में ऐसे कई राय हैं जहां यूपीए के विरोधी राजनैतिक दलों की सरकार है यदि यूपीए महंगाई के लिए दोषी है तब वे राय सरकार आम लोगों से पेट्रोलियम पदार्थ पर टैक्स क्यों ले रही है।
दरअसल इस देश में नेताओं और अधिकारियों ने पूंजीवादी व्यवस्था की गोद में बैठकर ऐसे निर्णय लेना शुरू किया है ताकि गरीब और मध्यम वर्ग अपनी पेट परिवार की चिंता में लगे रहे और एक कुलीन व धनाडय वर्ग मजा करता रहे। महंगाई बढ़ने के पीछे सिर्फ पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृध्दि दोषी नहीं है। महंगाई बढ़ने की वजह सरकार की पेंशन नीति है, सांसदों विधायकों के वेतन में किए जा रहे लगातार बढ़ोत्तरी है जिन पर सीधे जनता का हक है और अधोसंरचना के नाम पर जनता के पैसों को भ्रष्टाचार कर सीधे जेब में रखने की प्रवृत्ति हैं।
महंगाई किसके लिए है। यदि महंगाई की इतनी चिंता नेताओं को है तो जिन नेताओं के पास अथाह पैसे हैं वे सरकारी वेतन भत्ता व अन्य सुविधा लेना बंद क्यों नहीं करते। क्या इस देश में महंगाई पर चिंता व्यक्त करने वाली सोनिया गांधी हो या लालकृष्ण आडवानी हो इनका गुजारा क्या सरकारी वेतन व अन्य सुविधाओं पर निर्भर है तब इस देश की खातिर वे सरकारी वेतन भत्ते नहीं लेने की घोषणा कर आदर्श राजनीति व अपना देश सेवा को नए सिरे से परिभाषित क्यों नहीं करते। देश व उसकी जनता की सेवा के बदले वेतन लेने वालों को दरअसल महंगाई की नहीं स्वयं की राजनीति की चिंता है। देश में राहुल गांधी, नवीन जिंदल से लेकर ऐसे कई सांसद हैं जिन्हें आगे आकर अपना वेतन नहीं लेने की घोषणा करनी चाहिए तभी अंधेरगर्दी खत्म होगी।
मंहगाई लगातार बढ़ रही है अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब नारकीय जीवन जीने मजबूर हैं। ऐसे में राजनैतिक दल महंगाई को लेकर सजग हैं यह एक अच्छी बात है लेकिन सवाल यह है कि क्या मंहगाई बढ़ने की वजह सिर्फ पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृध्दि है। यदि सरकार के लिए सब्सिडी बोझ है तो फिर जनता के लिए टैक्स बोझ है तब सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों पर कोई टैक्स नहीं लेना चाहिए। देश में ऐसे कई राय हैं जहां यूपीए के विरोधी राजनैतिक दलों की सरकार है यदि यूपीए महंगाई के लिए दोषी है तब वे राय सरकार आम लोगों से पेट्रोलियम पदार्थ पर टैक्स क्यों ले रही है।
दरअसल इस देश में नेताओं और अधिकारियों ने पूंजीवादी व्यवस्था की गोद में बैठकर ऐसे निर्णय लेना शुरू किया है ताकि गरीब और मध्यम वर्ग अपनी पेट परिवार की चिंता में लगे रहे और एक कुलीन व धनाडय वर्ग मजा करता रहे। महंगाई बढ़ने के पीछे सिर्फ पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृध्दि दोषी नहीं है। महंगाई बढ़ने की वजह सरकार की पेंशन नीति है, सांसदों विधायकों के वेतन में किए जा रहे लगातार बढ़ोत्तरी है जिन पर सीधे जनता का हक है और अधोसंरचना के नाम पर जनता के पैसों को भ्रष्टाचार कर सीधे जेब में रखने की प्रवृत्ति हैं।
महंगाई किसके लिए है। यदि महंगाई की इतनी चिंता नेताओं को है तो जिन नेताओं के पास अथाह पैसे हैं वे सरकारी वेतन भत्ता व अन्य सुविधा लेना बंद क्यों नहीं करते। क्या इस देश में महंगाई पर चिंता व्यक्त करने वाली सोनिया गांधी हो या लालकृष्ण आडवानी हो इनका गुजारा क्या सरकारी वेतन व अन्य सुविधाओं पर निर्भर है तब इस देश की खातिर वे सरकारी वेतन भत्ते नहीं लेने की घोषणा कर आदर्श राजनीति व अपना देश सेवा को नए सिरे से परिभाषित क्यों नहीं करते। देश व उसकी जनता की सेवा के बदले वेतन लेने वालों को दरअसल महंगाई की नहीं स्वयं की राजनीति की चिंता है। देश में राहुल गांधी, नवीन जिंदल से लेकर ऐसे कई सांसद हैं जिन्हें आगे आकर अपना वेतन नहीं लेने की घोषणा करनी चाहिए तभी अंधेरगर्दी खत्म होगी।
शनिवार, 3 जुलाई 2010
हसदा पंचायत में निर्मित रंगमंच के नाम पर पैसा निकाला
चार माह पहले बन चुका है रंग मंच
कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू के विधानसभा क्षेत्र के ग्राम हसदा में पूर्व सरपंच की करतूत से आम लोग हैरान है। कहा जाता है कि कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू के वरदहस्त होने के कारण यहां लोग हैरान है।
बताया जाता है कि चाह माह पहले लंकापारा ग्राम हसदा में रंगमंच भवन निर्माण हो चुका है जो कि माननीय कृषि मंत्री द्वारा रंगमंच निर्माण हेतु 1 लाख रुपया घोषणा किया गया था घोषणा के कुछ ही दिन बाद रंगमंच भवन का निर्माण कर दिया गया। इसका निर्माण पंचायत चुनाव के पहले पूर्व सरपंच के द्वारा जनवरी माह में करा दिया गया था। वर्तमान जून माह में सब इंजीनियर भार्गव के द्वारा लेआउट देकर जनपद पंचायत अभनपुर से पहली किश्त 40 हजार रुपया का चेक ग्राम पंचायत हसदा को भेज दिया गया जबकि उस भवन का निर्माण सब इंजीनियर के दिशा निर्देशन पर नहीं हुआ है और ग्राम पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पास नहीं होने के बाद 40 हजार रुपए का आहरण किया गया जनपद पंचायत में 16 जून को सामान्य सभा की मीटिंग में जनपद सदस्य शशि प्रकाश साहू के द्वारा रंगमंच निर्माण की बात रखा गया। जिसमें सब इंजीनियर भागर्व ने अपनी गलती स्वीकार किया शिकायत करने के बावजूद नहीं सचिव के ऊपर न ही सब इंजीनियर भार्गव के उपर कार्यवाही किया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि इसमें सचिव एवं सब इंजीनियर के साथ-साथ और बहुत से लोगों की मिलीभगत है। जनपद सदस्य शशि प्रकाश साहू एवं जनपद पंचायत उपाध्यक्ष चन्द्रहास साहू के साथ उपस्थित समस्त जनपद सदस्यों ने कार्यवाही अतिशीघ्र करने की मांग की है।
कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू के विधानसभा क्षेत्र के ग्राम हसदा में पूर्व सरपंच की करतूत से आम लोग हैरान है। कहा जाता है कि कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू के वरदहस्त होने के कारण यहां लोग हैरान है।
बताया जाता है कि चाह माह पहले लंकापारा ग्राम हसदा में रंगमंच भवन निर्माण हो चुका है जो कि माननीय कृषि मंत्री द्वारा रंगमंच निर्माण हेतु 1 लाख रुपया घोषणा किया गया था घोषणा के कुछ ही दिन बाद रंगमंच भवन का निर्माण कर दिया गया। इसका निर्माण पंचायत चुनाव के पहले पूर्व सरपंच के द्वारा जनवरी माह में करा दिया गया था। वर्तमान जून माह में सब इंजीनियर भार्गव के द्वारा लेआउट देकर जनपद पंचायत अभनपुर से पहली किश्त 40 हजार रुपया का चेक ग्राम पंचायत हसदा को भेज दिया गया जबकि उस भवन का निर्माण सब इंजीनियर के दिशा निर्देशन पर नहीं हुआ है और ग्राम पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पास नहीं होने के बाद 40 हजार रुपए का आहरण किया गया जनपद पंचायत में 16 जून को सामान्य सभा की मीटिंग में जनपद सदस्य शशि प्रकाश साहू के द्वारा रंगमंच निर्माण की बात रखा गया। जिसमें सब इंजीनियर भागर्व ने अपनी गलती स्वीकार किया शिकायत करने के बावजूद नहीं सचिव के ऊपर न ही सब इंजीनियर भार्गव के उपर कार्यवाही किया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि इसमें सचिव एवं सब इंजीनियर के साथ-साथ और बहुत से लोगों की मिलीभगत है। जनपद सदस्य शशि प्रकाश साहू एवं जनपद पंचायत उपाध्यक्ष चन्द्रहास साहू के साथ उपस्थित समस्त जनपद सदस्यों ने कार्यवाही अतिशीघ्र करने की मांग की है।
शुक्रवार, 2 जुलाई 2010
दमदार मंत्री के विभाग में दमदारी से घोटाला...

छत्तीसगढ़ के दमदार मंत्री माने जाने वाले पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग में घोटाले थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। दमदारी से घोटाले करने वाले अफसर अब किसी की परवाह भी नहीं करते तो इसकी वजह उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होना हैं।
हमारे सूत्रों के मुताबिक पीडब्ल्यूडी में सर्वाधिक घोटाले होने लगे हैं। यहां मंत्री को कमीशन पहुंचाने के नाम पर 20 प्रतिशत हिस्सा लिया जा रहा है। सड़कें घटिया बनाई जा रही है और अब बिलासपुर में नवनिर्मित हाईकोर्ट भवन पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं।
पर्यटन विभाग में तो घोटाले की लंबी फेहरिश्त है यहां बगैर नाम पते के लाखों रुपए बांटे गए वहीं प्रचार व मोटल निर्माण के नाम पर भी घोटाले हुए हैं। यहीं नहीं जिस पर रिकवरी आदेश निकला वह अधिकारी संजय सिंह को परिवहन जैसे कमाउ विभाग में भेज दिया गया जबकि विवादास्पद रहे अजय श्रीवास्तव के संविलियन को लेकर मामला कोर्ट में जा पहुंचा है।
इधर शिक्षा विभाग में तो मैडम तवारिस और मैडम आर. बाम्बरा का मामला सुर्खियों में है लेकिन मंत्री की दमदारी की वजह से मुख्यमंत्री के पास भी शिकायतों को रद्दी की टोकरी में फेंका जा रहा है। बहरहाल बृजमोहन अग्रवाल के विभागों में बढ़ते भ्रष्टाचार की चर्चा अब चौक-चौराहों पर भी सुनी जा सकती है।
गुरुवार, 1 जुलाई 2010
क्या भाजपाई इशारे पर चलते हैं हिन्दुत्व के झंडा बरदार

सब कह रहे हैं गलत है
पर हिन्दू संगठन खामोश है!
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पिता स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह के तेरहवीं कार्यक्रम में श्री भागवत गीता में छेड़छाड़ को लेकर आम लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त है वहीं हिन्दुत्व के नाम पर राजनीति करने वाले संगठनों को सांप सूंघ गया है और वे कुछ भी कहने से बचते रहे।
उल्लेखनीय है कि स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह के तेरहवीं कार्यक्रम में ठाकुर साहब की तस्वीर वाली गीता का वितरण किया गया था। इसे लेकर आम लोगों में भारी रोष है। इस मामले में पंडित आशुतोष मिश्रा का कहना है कि तेरहवीं कार्यक्रम में इस तरह से स्वर्गीय व्यक्तियों की तस्वीर लगाकर गीता वितरित की जाती है वह गलत है लेकिन जिसके ऊपर धर्म की रक्षा का दायित्व हो वह भी इस तरह की हरकत करे तो न केवल यह पाप है बल्कि दंड का भागीदार भी है।
दूसरी तरफ राजधानी के कई हिन्दू संगठन विश्व हिन्दू परिषद, धर्मसेना, शिवसेना, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित छोटे-छोटे कई संगठनों के पदाधिकारियों से हमने इस मामले में प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की लेकिन इनके द्वारा प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। गीता सखा प्रेस के मन्नूलाल यदु ने जरूर कहा कि धर्मग्रंथों में अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाने से धर्मग्रंथ का अपमान नहीं होता। दूसरी तरफ हिन्दू संगठनों की चुप्पी पर भी सवाल उठने लगे हैं धर्म के नाम पर हाय तौबा मचाने वालों की चुप्पी को लेकर अब यह सवाल उठने लगा है कि भाजपा को छोड़ यदि कोई दूसरा धर्मग्रंथ का अपमान करेगा उसके खिलाफ ही आवाज उठाई जाएगी।
नीराबाई चंद्राकर- ग्राम पंचायत दुधिया की सरपंच श्रीमती नीराबाई चंद्राकर का कहना है कि भागवत गीता में जिस किसी ने यह फोटो डाला है। उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। जो हमारे हिन्दु धर्म के लिए शर्म की बात है।
पं. अर्जुन महाराज जी कवर्धा निवासी है जो राधा माधव गौ सेवा समिति बोलबम अध्यक्ष, सीताराम संर्कीतन संस्थापक, जिला वृक्षारोपण समिति के सरंक्षक है। उन्होंने इस कृत्य के लिए भर्त्सना करते हुए कहा कि यह एक निंदनीय कार्य है। इस तरह किसी भी धर्मग्रंथों में फोटो डलवाना अशोभनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष डा. रमन सिंह जी के माता जी का फोटो हनुमान चालीसा में डाला गया था। इसका विरोध हिन्दु धर्म अनुयाइयों को करना चाहिए। रामायण भागवत गीता में इस प्रकार फोटो छपवाना घोर अपराध है। इस तरह से हिन्दु धर्म ग्रंथ को अपमान करने का हक किसी को नहीं है।
पं. द्वारिका महाराज- लोहारा रोड में स्थित सिध्दपीठ मां विन्ध्यवासिनी मंदिर के आचार्य ने श्रीमद् भागवत गीता में स्व. ठा. विघ्नहरण सिंह जी का फोटो देखकर कहा कि यह अधिकार इन्हें किसने दिया। अगर बांटना ही था तो अलग से बांट देते इस तरह से धर्मग्रंथ का अपमान करने का हक किसी को नहीं है।
पं. रविशंकर मिश्रा- गीता भगवान की कृष्णा की अलौकिक शक्ति का श्रोत है जो कि उनके श्रीमुख से निकला हुआ सृष्टि कल्याणार्थ अनुपम ग्रंथ है जिसके ऊपर न जाने कितने मनुष्य ने टीकाकरण किए और गाथा चारो वेद गाती है। ऐसा धर्मग्रंथ किसी की बपौती नहीं है। चाहे वह मुख्यमंत्री हो प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति हो। ये निंदनीय कृत्य है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह की इस गलती के लिए उन्हें सार्वजनिक रुप से माफी मांगकर प्रायश्चित करना चाहिए।
पं. देवीप्रसाद शास्त्री- इस तरह पवित्र धर्मग्रंथों में फोटो डलवाना घोर पाप है। हो सकता है यह व्यवस्थापक की गलती हो। फिर भी यह एक नासमझी का प्रतीक है। यह एक निंदनीय कार्य है।
पं. श्री विनोद तिवारी जी- यह कृत्य श्रीमद् भागवत गीता का घोर अपमान है। यह धर्मग्रंथ के साथ छेड़छाड़ है। यह अधिकार किसी को नहीं है।
पं. कन्हैयाप्रसाद मिश्रा जी ने श्रीमद् भागवत गीता में छपे फोटो को देखते ही कहा कि यह पद का दंभ है, यह एक घृणित कार्य है। यह हिन्दुओं का पवित्र ग्रंथ है। इसके साथ खिलवाड़ अशोभनीय है।
पं. शिव पाण्डेय ने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता या रामायण किसी भी महान धर्मग्रंथों में इस प्रकार फोटो छपवाकर हिन्दु धर्म आस्था में ठेस पहुंचाना है। यह एक अनापेक्षित राजनीति है।
हरिप्रसाद पाठक ने कहा कि यह पूर्णत: अनुचित है। आज मुख्यमंत्री है। डा. साहब तो स्व. विघ्नहरण जी का फोटो गीता में छपवा दिए कहीं प्रधान हो जाएंगे तो अपना फोटो धर्मग्रंथों में छपवाकर न बंटवा दें।
यस वर्धन (नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस) जगदलपुर
ब्ण्डण् के पिता हो या प्रधान मंत्री के पिता यह कृत्य गलत है किसी को भी यह अधिकार नही की पवित्र ग्रंथ में फोटो छपवा कर बटायें मुख्य मंत्री रमन सिंह के जिस भी उददेष्य से यह परम्परा शुरू कि हो वो चाहे अपनें प्रचार के लिए हो या अपनें पिता को भगवान का दर्जा दिलानें के लिए हो यह सरासर एक धार्मिक ग्रंथ का अपमान है इसकी हम निंदा करते हैं।
तरसेम सिंह गिल(नगर पालिका उपाध्यक्ष) कोंण्डागांव.
धार्मिक ग्रंथ वो चाहे किसी धर्म का हो इस तरह से उसके अपमान करना वो भी राय के मुखिया द्वारा यह कृत्य गलत है और हम इसकी निंदा करते हैं।
मोहन मरकाम कोंण्डागांव.
राय के मुखिया सत्ता के नषे में चुर हो कर पवित्र ग्रंथ का अपमान सम्मान का अर्थ ही भुल गये हैं ये धर्म कि बात है हम इसकी निंदा करते हैं।
मनीश श्रीवास्तव कांग्रेसी कोंण्डागांव.
लगता है डां रमन सिंग दुसरी पारी में अपनें आप कों भगवान समक्षनें लगे हैं इतिहास में कभी आज तक एैसा नही हुआ रमन सिंग जी भले ही अपनें पिता को भगवान समक्षते हों मगर पवित्र धार्मिक ग्रंथ का अपमान करनें का उन्हें कोई हक नही।
पर हिन्दू संगठन खामोश है!
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पिता स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह के तेरहवीं कार्यक्रम में श्री भागवत गीता में छेड़छाड़ को लेकर आम लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त है वहीं हिन्दुत्व के नाम पर राजनीति करने वाले संगठनों को सांप सूंघ गया है और वे कुछ भी कहने से बचते रहे।
उल्लेखनीय है कि स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह के तेरहवीं कार्यक्रम में ठाकुर साहब की तस्वीर वाली गीता का वितरण किया गया था। इसे लेकर आम लोगों में भारी रोष है। इस मामले में पंडित आशुतोष मिश्रा का कहना है कि तेरहवीं कार्यक्रम में इस तरह से स्वर्गीय व्यक्तियों की तस्वीर लगाकर गीता वितरित की जाती है वह गलत है लेकिन जिसके ऊपर धर्म की रक्षा का दायित्व हो वह भी इस तरह की हरकत करे तो न केवल यह पाप है बल्कि दंड का भागीदार भी है।
दूसरी तरफ राजधानी के कई हिन्दू संगठन विश्व हिन्दू परिषद, धर्मसेना, शिवसेना, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित छोटे-छोटे कई संगठनों के पदाधिकारियों से हमने इस मामले में प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की लेकिन इनके द्वारा प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। गीता सखा प्रेस के मन्नूलाल यदु ने जरूर कहा कि धर्मग्रंथों में अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाने से धर्मग्रंथ का अपमान नहीं होता। दूसरी तरफ हिन्दू संगठनों की चुप्पी पर भी सवाल उठने लगे हैं धर्म के नाम पर हाय तौबा मचाने वालों की चुप्पी को लेकर अब यह सवाल उठने लगा है कि भाजपा को छोड़ यदि कोई दूसरा धर्मग्रंथ का अपमान करेगा उसके खिलाफ ही आवाज उठाई जाएगी।
नीराबाई चंद्राकर- ग्राम पंचायत दुधिया की सरपंच श्रीमती नीराबाई चंद्राकर का कहना है कि भागवत गीता में जिस किसी ने यह फोटो डाला है। उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। जो हमारे हिन्दु धर्म के लिए शर्म की बात है।
पं. अर्जुन महाराज जी कवर्धा निवासी है जो राधा माधव गौ सेवा समिति बोलबम अध्यक्ष, सीताराम संर्कीतन संस्थापक, जिला वृक्षारोपण समिति के सरंक्षक है। उन्होंने इस कृत्य के लिए भर्त्सना करते हुए कहा कि यह एक निंदनीय कार्य है। इस तरह किसी भी धर्मग्रंथों में फोटो डलवाना अशोभनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष डा. रमन सिंह जी के माता जी का फोटो हनुमान चालीसा में डाला गया था। इसका विरोध हिन्दु धर्म अनुयाइयों को करना चाहिए। रामायण भागवत गीता में इस प्रकार फोटो छपवाना घोर अपराध है। इस तरह से हिन्दु धर्म ग्रंथ को अपमान करने का हक किसी को नहीं है।
पं. द्वारिका महाराज- लोहारा रोड में स्थित सिध्दपीठ मां विन्ध्यवासिनी मंदिर के आचार्य ने श्रीमद् भागवत गीता में स्व. ठा. विघ्नहरण सिंह जी का फोटो देखकर कहा कि यह अधिकार इन्हें किसने दिया। अगर बांटना ही था तो अलग से बांट देते इस तरह से धर्मग्रंथ का अपमान करने का हक किसी को नहीं है।
पं. रविशंकर मिश्रा- गीता भगवान की कृष्णा की अलौकिक शक्ति का श्रोत है जो कि उनके श्रीमुख से निकला हुआ सृष्टि कल्याणार्थ अनुपम ग्रंथ है जिसके ऊपर न जाने कितने मनुष्य ने टीकाकरण किए और गाथा चारो वेद गाती है। ऐसा धर्मग्रंथ किसी की बपौती नहीं है। चाहे वह मुख्यमंत्री हो प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति हो। ये निंदनीय कृत्य है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह की इस गलती के लिए उन्हें सार्वजनिक रुप से माफी मांगकर प्रायश्चित करना चाहिए।
पं. देवीप्रसाद शास्त्री- इस तरह पवित्र धर्मग्रंथों में फोटो डलवाना घोर पाप है। हो सकता है यह व्यवस्थापक की गलती हो। फिर भी यह एक नासमझी का प्रतीक है। यह एक निंदनीय कार्य है।
पं. श्री विनोद तिवारी जी- यह कृत्य श्रीमद् भागवत गीता का घोर अपमान है। यह धर्मग्रंथ के साथ छेड़छाड़ है। यह अधिकार किसी को नहीं है।
पं. कन्हैयाप्रसाद मिश्रा जी ने श्रीमद् भागवत गीता में छपे फोटो को देखते ही कहा कि यह पद का दंभ है, यह एक घृणित कार्य है। यह हिन्दुओं का पवित्र ग्रंथ है। इसके साथ खिलवाड़ अशोभनीय है।
पं. शिव पाण्डेय ने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता या रामायण किसी भी महान धर्मग्रंथों में इस प्रकार फोटो छपवाकर हिन्दु धर्म आस्था में ठेस पहुंचाना है। यह एक अनापेक्षित राजनीति है।
हरिप्रसाद पाठक ने कहा कि यह पूर्णत: अनुचित है। आज मुख्यमंत्री है। डा. साहब तो स्व. विघ्नहरण जी का फोटो गीता में छपवा दिए कहीं प्रधान हो जाएंगे तो अपना फोटो धर्मग्रंथों में छपवाकर न बंटवा दें।
यस वर्धन (नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस) जगदलपुर
ब्ण्डण् के पिता हो या प्रधान मंत्री के पिता यह कृत्य गलत है किसी को भी यह अधिकार नही की पवित्र ग्रंथ में फोटो छपवा कर बटायें मुख्य मंत्री रमन सिंह के जिस भी उददेष्य से यह परम्परा शुरू कि हो वो चाहे अपनें प्रचार के लिए हो या अपनें पिता को भगवान का दर्जा दिलानें के लिए हो यह सरासर एक धार्मिक ग्रंथ का अपमान है इसकी हम निंदा करते हैं।
तरसेम सिंह गिल(नगर पालिका उपाध्यक्ष) कोंण्डागांव.
धार्मिक ग्रंथ वो चाहे किसी धर्म का हो इस तरह से उसके अपमान करना वो भी राय के मुखिया द्वारा यह कृत्य गलत है और हम इसकी निंदा करते हैं।
मोहन मरकाम कोंण्डागांव.
राय के मुखिया सत्ता के नषे में चुर हो कर पवित्र ग्रंथ का अपमान सम्मान का अर्थ ही भुल गये हैं ये धर्म कि बात है हम इसकी निंदा करते हैं।
मनीश श्रीवास्तव कांग्रेसी कोंण्डागांव.
लगता है डां रमन सिंग दुसरी पारी में अपनें आप कों भगवान समक्षनें लगे हैं इतिहास में कभी आज तक एैसा नही हुआ रमन सिंग जी भले ही अपनें पिता को भगवान समक्षते हों मगर पवित्र धार्मिक ग्रंथ का अपमान करनें का उन्हें कोई हक नही।
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