और उसकी शक्ति जाती रही बचपन में दादी-नानी की गोद में रात को एक कहानी सुनी थी कि किसी व्यक्ति को ईश्वर से यह वरदान मिला था कि उसके हाथ लगाते ही बीमारियां दूर हो जाती। उसने इस शक्ति का प्रयोग करना शुरु कर दिया। धीरे-धीरे उसकी ख्याति फैलने लगी। जब ख्याति फैलने लगी तो उसकी जय-जयकार होने लगी। अपनी जय-जयकार सुन वह प्रसन्न होने लगा और इस प्रसन्नता के साथ उसके मन में लालच घर करने लगा अब वह इस वरदान के एवज में उपहार भी स्वीकार करने लगा और इसके बाद और लालच बढ़ी तो वह फीस तय कर दिया। फीस तय करने के बाद उसकी शक्ति ईश्वर ने छिन ली। क्योंकि उसे यह वरदान देते समय ही चेता दिया गया था कि वह लालच में न आए।
कहने का तात्पर्य है लालच एक ऐसा तृष्णा है जो बुझती नहीं है इन दिनों इसी तरह की विचित्रता पूरे देश में हैं। कोई भी सांधु-संत प्रसिध्द होता है वह अपराधियों के धन के आगे नतमस्तक हो जाता है। इनके आसपास काले धन वालों का जमावड़ा होने लगता है। पाप करने वाले तो इसलिए दान कर रहे है कि उनका पाप थोड़ा बहुत उतर जाए। पर यह पाप उतर कर इन्हीं साधु-संतों के ऊपर चढ़ने लगा है। वे ऐसे लोगों को समाजसेवी कहने लगे है और आम आदमी मूकदर्शक बना है। बाबा रामदेव हो या मुरारीबाबू या फिर और संतों को मदद करने वालों की लिस्ट में ऐसे अपराधिक लोगों के नाम देख सकते है। भले ही ये साधु संत घृणा पाप से करो पापियों से नहीं या सुधरने का मौका देना चाहिए जैसे चिंतन लोगों के सामने प्रस्तुत करे लेकिन वास्तविकता यह है कि इनसे मिलने वाली मोटी रकन का लोभ साधु-संत भी नहीं छोड़ पा रहे हैं। देखते ही देखते संतों की संपत्ति कई गुणा बढ़ जा रही है। काले धन साधु-संतों के पास खपाये जा रहे हैं और आयकर विभाग भी इस दान के काले धन पर कुछ नहीं कर पा रहा है। क्या आए दिन साधु-संतों का विवाद में फंसना इन काले धन का परिणाम नहीं है?
बुलंद ने अपने अभियान में इसे भी हिस्सेदार बनाया है कि अब अपराधियों का बहिष्कार का समय आ गया है और इनका साथ देने या अपने साथ बिठाने वालों की भी सार्वजनिक भर्त्सना होनी चाहिए। हिरण माकर या दारु पीकर गाड़ी चढ़ाने वाले या लड़कियों से छेड़छाड़ करने वालों का बहिष्कार होना ही चाहिए। युवाओं और आम लोगों को भी सोचना होगा कि जिसे नायक बनाकर पेश किया जा रहा है क्या वह वास्तविक जीवन में भी नायक है। ऐसे लोगों की करतूतों पर चुप बैठने की वजह या ऐसे लोगों को नायक बनाने का दुष्चक्र की वजह से ही आम आदमी का जीना दूभर हुआ है। आईये इस अभियान में आप भी हिस्सा ले और खलनायक को नायक बनाने की चेष्टा का प्रतिकार करें।
http://midiaparmidiaa.blogspot.in/
मंगलवार, 9 नवंबर 2010
गजब हैं गृहमंत्री
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ननकीराम कंवर पूरे देश में मिसाल कायम कर रहे हैं। ऐसे गृहमंत्री को पाकर छत्तीसगढ़ के लोग खुश हैं। अपनी ईमानदारी का डंका बजा चुके गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने निजी स्क्वाड से अपराधियों में दहशत है। यही वजह है कि उन्हें पूरे देश का सर्वश्रेष्ठ गृहमंत्री माना जा रहा है। सरकार को भी चाहिए कि जिस तरह से गुजरात मॉडल और हैदराबाद को मॉडल बनाकर भ्रमण यात्रा किया जाता है उसी तरह से देश के दूसरे रायों के गृहमंत्रियों को भी बुलाया जाना चाहिए ताकि वे भी देख सकें कि किस तरह से गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने छत्तीसगढ़ में एक नया मिसाल कायम किया है।
गृहमंत्री ननकीराम कंवर के इस कार्यशैली से सबसे यादा दुखी डीजीपी विश्वरंजन जी है क्योंकि गृहमंत्री की ईमानदारी से वे परेशान है। परेशानी की प्रमुख वजह नक्सलियों के खिलाफ केन्द्र से आने वाली बड़ी रकम को माना जा रहा है। अब इसका बंदरबांट ठीक से न हो तो लड़ाई तो छिड़नी है। गृहमंत्री सिर्फ विश्वरंजन के पीछे ही नहीं पड़े हैं उन्होंने एसपी को निकम्मा और कलेक्टर को दलाल कहकर अपनी साफ गोई का परिचय दिया है। है किसी गृहमंत्री में दम जो इतनी बड़ी बात कह दे न किसी गृहमंत्री में ये दम है कि वह विधानसभा में सरकार की खिंचाई करते हुए कह दें कि शराब माफिया थाने चला रहे हैं। इतना सब कुछ देखते-सुनते कोई गृहमंत्री कैसे थानों पर भरोसा करे इसलिए तो वे अपना निजी स्क्वाड बना रखे हैं। आम आदमी को न्याय दिलाने के लिए?
अब थानों की कमाई बंद हो गई है। ढाबों में शराबखोरी तो छोड़िए अवैध शराब बेचने वाले भी भाग लिए है और थानों को सट्टा-जुआ या अपराधियों से मोटी रकम नहीं मिल रही है। इसलिए सब साजिश के तहत निजी स्क्वाड के पीछे पड़ गए हैं। आखिर प्रदेश को अपराध मुक्त करना हो तो अवैध रुप से पैसा कमाने वाले पुलिस पर अंकुश जरूरी है इसलिए निजी स्क्वाड खड़ा किया गया है। अपराधियों को पकड़ों तो दो चार दिन में वह छूट जाता है क्योंकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते इसलिए पिटाई जरूर है।
निजी स्क्वाड की ईमानदारी से थाने से लेकर अपराधियों के होश उड़े हुए है इसलिए भी साजिश रच कर उन्हें बदनाम किया जा रहा है। चूंकि मुख्यमंत्री डा. साहब भी जानते हैं कि गृहमंत्री ईमानदार है और वे गलत नहीं करेंगे। इसलिए वे भी निजी स्क्वाड की शिकायतों को तवाों नहीं दे रहे हैं। गृहमंत्री की एक और आदत है वे जिस काम का बीड़ा उठाते हैं उसे पूरा करके ही दम लेते हैं अब देखिए डेढ़ साल हो गया दमदार मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के भाई कैलाश अग्रवाल का कबाड़ खरीदने का धंधा बंद हुए। है किसी में हिम्मत जो चालू करवा दे। अब दूसरे नए लोग धंधा कर रहे है। गृहमंत्री को पता नहीं है। पता चलेगा तो उनकी भी शामत आएगी। आखिर बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी।
गृहमंत्री ननकीराम कंवर के इस कार्यशैली से सबसे यादा दुखी डीजीपी विश्वरंजन जी है क्योंकि गृहमंत्री की ईमानदारी से वे परेशान है। परेशानी की प्रमुख वजह नक्सलियों के खिलाफ केन्द्र से आने वाली बड़ी रकम को माना जा रहा है। अब इसका बंदरबांट ठीक से न हो तो लड़ाई तो छिड़नी है। गृहमंत्री सिर्फ विश्वरंजन के पीछे ही नहीं पड़े हैं उन्होंने एसपी को निकम्मा और कलेक्टर को दलाल कहकर अपनी साफ गोई का परिचय दिया है। है किसी गृहमंत्री में दम जो इतनी बड़ी बात कह दे न किसी गृहमंत्री में ये दम है कि वह विधानसभा में सरकार की खिंचाई करते हुए कह दें कि शराब माफिया थाने चला रहे हैं। इतना सब कुछ देखते-सुनते कोई गृहमंत्री कैसे थानों पर भरोसा करे इसलिए तो वे अपना निजी स्क्वाड बना रखे हैं। आम आदमी को न्याय दिलाने के लिए?
अब थानों की कमाई बंद हो गई है। ढाबों में शराबखोरी तो छोड़िए अवैध शराब बेचने वाले भी भाग लिए है और थानों को सट्टा-जुआ या अपराधियों से मोटी रकम नहीं मिल रही है। इसलिए सब साजिश के तहत निजी स्क्वाड के पीछे पड़ गए हैं। आखिर प्रदेश को अपराध मुक्त करना हो तो अवैध रुप से पैसा कमाने वाले पुलिस पर अंकुश जरूरी है इसलिए निजी स्क्वाड खड़ा किया गया है। अपराधियों को पकड़ों तो दो चार दिन में वह छूट जाता है क्योंकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते इसलिए पिटाई जरूर है।
निजी स्क्वाड की ईमानदारी से थाने से लेकर अपराधियों के होश उड़े हुए है इसलिए भी साजिश रच कर उन्हें बदनाम किया जा रहा है। चूंकि मुख्यमंत्री डा. साहब भी जानते हैं कि गृहमंत्री ईमानदार है और वे गलत नहीं करेंगे। इसलिए वे भी निजी स्क्वाड की शिकायतों को तवाों नहीं दे रहे हैं। गृहमंत्री की एक और आदत है वे जिस काम का बीड़ा उठाते हैं उसे पूरा करके ही दम लेते हैं अब देखिए डेढ़ साल हो गया दमदार मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के भाई कैलाश अग्रवाल का कबाड़ खरीदने का धंधा बंद हुए। है किसी में हिम्मत जो चालू करवा दे। अब दूसरे नए लोग धंधा कर रहे है। गृहमंत्री को पता नहीं है। पता चलेगा तो उनकी भी शामत आएगी। आखिर बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी।
रविवार, 7 नवंबर 2010
भास्कर का फरमान, प्रेस हटाओ!
वैसे तो अपने नए-नए फरमान को लेकर छत्तीसगढ़ के अखबार मालिक हमेशा ही सुर्खियों में रहे हैं। हरिभूमि ने हर शनिवार को अपने कर्मचारी पत्रकारों व फोटोग्राफरों के ही लिए फरमान जारी किया है कि वे इस दिन सफेद टी-शर्ट जिसमें हरिभूमि लिखा हो ही पहना करें। पत्रिका ने भी कोशिश की कि ग्रेजुएट ही रखेंगे लेकिन दोनों फेल हो गए अब भास्कर ने अपने कर्मचारियों, पत्रकारों और फोटोग्राफरों को नया फरमान जारी किया है कि वे अपनी वाहन में प्रेस नहीं लिखेंगे।जनसंपर्क सचिव का डर...
मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले एन बैजेन्द्र कुमार को यह डर हमेशा ही सताता रहता है कि कहीं जनसंपर्क में बैठे वर्तमान चंडाल चौकड़ी कहीं कुछ ऐसा वैसा न कर दें जिससे जवाब देना मुश्किल हो जाए। पहले ही घपलेबाजी यहां कम नहीं हुई है उसकी लीपापोती में पसीने छूट गए है अब फोटोग्राफरों की नियुक्ति को लेकर स्वराज दास की भूमिका पर सवाल उठ रहे है। कुरैटी के कारनामों की चर्चा भी कम नहीं है। दिक्कत ये है कि छोटे कर्मचारी इन चंडाल चौकड़ी से अलग दुखी है और अपने से होशियार को कोई पसंद नहीं करता तो हाशिये पर रखना मजबूरी है।
नवभारत और नार्को...
नवभारत ने बैंक घोटाले में लिप्त सिंहा के नार्कों टेस्ट की सीडी होने का दावा कर स्टोरी लगा दिया और कह दिया कि जिसे देखना है वे दफ्तर आ जाए। दफ्तर आने वालों को निराशा लगी और ये लोग दावा कर रहे हैं कि अब तक सेटिंग से दूर की ईमेज बनाने वाले नवभारत के रंगा-बिल्ला ने सेटिंग कर ली है। इस खबर से रंगा-बिल्ला को दस लाख मिला हो या नहीं ये तो रंगा-बिल्ला जाने लेकिन सीडी की क्लिपिंग लाने वाले रमेश बैस के करीबी पत्रकार दुखी हैं? उनका दुख दूसरे से सेटिंग की है या सीडी नहीं मिल पाने का यह तो वही जाने लेकिन दुष्प्रचार में यही सबसे आगे है।
और अंत में...
पत्रिका और नेशनल लुक की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि भास्कर के द्वारा इनके हॉकर खरीद लिए जाते हैं। अब यह भास्कर कर रहा है या नवभारत इसे लेकर आम चर्चा है। क्योंकि इस लड़ाई में नवभारत के मजे हैं।
बुधवार, 3 नवंबर 2010
दस साल पहले भी हुआ था भाजपा शर्मसार
मोहन के वरदहस्त का कारनामा...!
मोहन के खरीद-फरोख्त पर मुहर...!
ऐसा नहीं है कि बृजमोहन अग्रवाल के संरक्षण में चल रहे लोगों ने सलमान खान मामले में पहली बार भाजपा को शर्मसार किया हो। इससे ठीक दस साल पहले भी बृजमोहन अग्रवाल के समर्थकों ने भाजपा को तब शर्मसार किया था जब नेता प्रतिपक्ष के चुनाव में नंदकुमार साय को चुना गया था। इस हंगामें व तोडफ़ोड़ की वजह से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को पलंग के नीचे छीपकर जान बचानी पड़ी थी जबकि पार्टी ने दर्जनभर लोगों को निलंबित किया था।
इस साल राज्योत्सव में अपराधिक छवि वाले सलमान खान को मंच पर स्थान देने को लेकर भाजपा के सिद्धांत कटघरे में हैं। इस घटना ने न केवल भाजपाईयों को शर्मसार किया है बल्कि प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। हालात यह है कि इस वजह से न तो भाजपाईयों को जवाब देते बन रहा है और न ही सरकार के पास ही कोई जवाब है। ज्ञात हो कि राज्योत्सव के आयोजन की पूरी जिम्मेदारी बृजमोहन अग्रवाल के संस्कृति विभाग की है और चर्चा इस बात की भी है कि यह सब अचानक नहीं हुआ है। कब सलमान खान आना है और किस तरह से सलमान खान का स्वागत होगा यह सब बृजमोहन अग्रवाल की जानकारी में तय हुआ है।
ऐसा नहीं है कि बृजमोहन अग्रवाल ने पार्टी को पहली बार इस स्थिति में लाया है। उनकी कार्यशैली हमेशा ही विवादों में रही है इससे पहले जब राज्य निर्माण हुआ तब भी बृजमोहन अग्रवाल को उनके समर्थक नेता प्रतिपक्ष के रुप में पेश किए थे और जब नरेन्द्र मोदी के प्रभार ने नेता प्रतिपक्ष बृजमोहन की बजाय नंदकुमार साय को बना दिया। इस बौखलाए बृजमोहन समर्थकों ने भाजपा के एकात्म परिसर में हंगामा और तोडफ़ोड़ किया। कई लोगों के साथ बदसलूकी और मारपीट भी हुई। यही नहीं नरेन्द्र मोदी जैसे कद्दावर नेता की पलंग के नीचे छीपकर अपनी जान बचानी पड़ी। तब चर्चा इस बात की भी रही कि यह सब बृजमोहन अग्रवाल की सहमति से हुआ। तब भाजपा ने इसे गंभीरता से लेते हुए बृजमोहन समर्थकों की जमकर खबर ली थी और करीब दर्जनभर लोगों को पार्टी से निलंबित किया था। बृजमोहन अग्रवाल ने तब भी इस मामले में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर हीरों बने थे।
ऐसा नहीं है कि बृजमोहन अग्रवाल ने पार्टी को विवाद में नहीं फंसाया है हाल ही में निगम सभापति के चुनाव में भी उस पर पार्षदों के खरीद फरोख्त का आरोप लगा लेकिन सभापति बनाने के कारण इस खरीद फरोख्द को कसके अच्छे कारनामें के रुप में प्रस्तुत किया गया। इस बार भी सलमान को लेकर फजीहत तो हुई लेकिन उसके प्रभाव की वजह से मुख्यमंत्री व पार्टी संगठन कुछ भी कहने से बच रही है।
सलमान का सम्मान और नत्था का...
छत्तीसगढ़ सरकार की नीति है या संस्कृति विभाग की यह तो वही जाने लेकिन सलमान के लिए पलक पखड़े बिछाने वाले संस्कृति विभाग ने पिपली लाइव के हीरों मोहनदास मानिकपुरी उर्फ नत्था के मामले में अपने को अलग कर लिया। कई छत्तीसगढिय़ा कलाकार की उपेक्षा ने राज्योत्सव के आयोजकों के करतूतों पर सवाल उठाने लगे है।
जब मोहन ने योगेश को राज्योत्सव से दूर रहने कहा?
हर साल राज्योत्सव में अपना जलवा दिखाने वाले लाड़ले योगेश अग्रवाल ने इस साल राज्योत्सव से दूरी बनाई है तो इसकी वजह योगेश की वजह से मोहन पर लगने वाला आरोप और बदनामी है। हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक हर साल राज्योत्सव के नाम पर लुटोत्सव की संज्ञा देने और छिछालेदर से संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल काफी खिन्न है। कहा जाता है कि उन्होंने इस बार अपने लाड़ले भाई योगेश अग्रवाल से साफ कह दिया था कि वह इस बार राज्योत्सव बनाम लुटोत्सव से अपने को दूर ही रखे। इसलिए योगेश ने इस बार दूरी बना ली।
ज्ञात हो कि पिछले साल योगेश अग्रवाल को लेकर जबरदस्त विवाद हुआ था। दलाली से लेकर संस्कृति आयुक्त से उनकी लड़ाई तक खबरों की सुर्खियों में रही यही नहीं एक बड़े कलाकार के साथ दुव्र्यवहार की चर्चा भी जोरों पर रही और योगेश की वजह से राज्योत्सव को लुटोत्सव की संज्ञा दी जाती रही। हमारे सूत्रों के मुताबिक लगातार हो रही बदनामी व छिछालेदर की वजह से ही योगेश को दूर रखा गया।
मिसेस सीएम ने बचा लिया...
कहते हैं सलमान खान को सीएम हाउस लाने के लिए रमन सिंह के बच्चों ने जिद पकड़ ली थी लेकिन मिसेस सीएम श्रीमती वीणा सिंह ने साफ कह दिया कि ऐसे लोगों को बुलाने से बदनामी होगी और उनके इस कठोर रुख पर रमन सिंह को सहमत होना पड़ा। हालांकि चर्चा इस बात की है कि इस मामले में बाप-बेटे के बीच विवाद हुआ।
मोहन के खरीद-फरोख्त पर मुहर...!
ऐसा नहीं है कि बृजमोहन अग्रवाल के संरक्षण में चल रहे लोगों ने सलमान खान मामले में पहली बार भाजपा को शर्मसार किया हो। इससे ठीक दस साल पहले भी बृजमोहन अग्रवाल के समर्थकों ने भाजपा को तब शर्मसार किया था जब नेता प्रतिपक्ष के चुनाव में नंदकुमार साय को चुना गया था। इस हंगामें व तोडफ़ोड़ की वजह से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को पलंग के नीचे छीपकर जान बचानी पड़ी थी जबकि पार्टी ने दर्जनभर लोगों को निलंबित किया था।
इस साल राज्योत्सव में अपराधिक छवि वाले सलमान खान को मंच पर स्थान देने को लेकर भाजपा के सिद्धांत कटघरे में हैं। इस घटना ने न केवल भाजपाईयों को शर्मसार किया है बल्कि प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। हालात यह है कि इस वजह से न तो भाजपाईयों को जवाब देते बन रहा है और न ही सरकार के पास ही कोई जवाब है। ज्ञात हो कि राज्योत्सव के आयोजन की पूरी जिम्मेदारी बृजमोहन अग्रवाल के संस्कृति विभाग की है और चर्चा इस बात की भी है कि यह सब अचानक नहीं हुआ है। कब सलमान खान आना है और किस तरह से सलमान खान का स्वागत होगा यह सब बृजमोहन अग्रवाल की जानकारी में तय हुआ है।
ऐसा नहीं है कि बृजमोहन अग्रवाल ने पार्टी को पहली बार इस स्थिति में लाया है। उनकी कार्यशैली हमेशा ही विवादों में रही है इससे पहले जब राज्य निर्माण हुआ तब भी बृजमोहन अग्रवाल को उनके समर्थक नेता प्रतिपक्ष के रुप में पेश किए थे और जब नरेन्द्र मोदी के प्रभार ने नेता प्रतिपक्ष बृजमोहन की बजाय नंदकुमार साय को बना दिया। इस बौखलाए बृजमोहन समर्थकों ने भाजपा के एकात्म परिसर में हंगामा और तोडफ़ोड़ किया। कई लोगों के साथ बदसलूकी और मारपीट भी हुई। यही नहीं नरेन्द्र मोदी जैसे कद्दावर नेता की पलंग के नीचे छीपकर अपनी जान बचानी पड़ी। तब चर्चा इस बात की भी रही कि यह सब बृजमोहन अग्रवाल की सहमति से हुआ। तब भाजपा ने इसे गंभीरता से लेते हुए बृजमोहन समर्थकों की जमकर खबर ली थी और करीब दर्जनभर लोगों को पार्टी से निलंबित किया था। बृजमोहन अग्रवाल ने तब भी इस मामले में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर हीरों बने थे।
ऐसा नहीं है कि बृजमोहन अग्रवाल ने पार्टी को विवाद में नहीं फंसाया है हाल ही में निगम सभापति के चुनाव में भी उस पर पार्षदों के खरीद फरोख्त का आरोप लगा लेकिन सभापति बनाने के कारण इस खरीद फरोख्द को कसके अच्छे कारनामें के रुप में प्रस्तुत किया गया। इस बार भी सलमान को लेकर फजीहत तो हुई लेकिन उसके प्रभाव की वजह से मुख्यमंत्री व पार्टी संगठन कुछ भी कहने से बच रही है।
सलमान का सम्मान और नत्था का...
छत्तीसगढ़ सरकार की नीति है या संस्कृति विभाग की यह तो वही जाने लेकिन सलमान के लिए पलक पखड़े बिछाने वाले संस्कृति विभाग ने पिपली लाइव के हीरों मोहनदास मानिकपुरी उर्फ नत्था के मामले में अपने को अलग कर लिया। कई छत्तीसगढिय़ा कलाकार की उपेक्षा ने राज्योत्सव के आयोजकों के करतूतों पर सवाल उठाने लगे है।
जब मोहन ने योगेश को राज्योत्सव से दूर रहने कहा?
हर साल राज्योत्सव में अपना जलवा दिखाने वाले लाड़ले योगेश अग्रवाल ने इस साल राज्योत्सव से दूरी बनाई है तो इसकी वजह योगेश की वजह से मोहन पर लगने वाला आरोप और बदनामी है। हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक हर साल राज्योत्सव के नाम पर लुटोत्सव की संज्ञा देने और छिछालेदर से संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल काफी खिन्न है। कहा जाता है कि उन्होंने इस बार अपने लाड़ले भाई योगेश अग्रवाल से साफ कह दिया था कि वह इस बार राज्योत्सव बनाम लुटोत्सव से अपने को दूर ही रखे। इसलिए योगेश ने इस बार दूरी बना ली।
ज्ञात हो कि पिछले साल योगेश अग्रवाल को लेकर जबरदस्त विवाद हुआ था। दलाली से लेकर संस्कृति आयुक्त से उनकी लड़ाई तक खबरों की सुर्खियों में रही यही नहीं एक बड़े कलाकार के साथ दुव्र्यवहार की चर्चा भी जोरों पर रही और योगेश की वजह से राज्योत्सव को लुटोत्सव की संज्ञा दी जाती रही। हमारे सूत्रों के मुताबिक लगातार हो रही बदनामी व छिछालेदर की वजह से ही योगेश को दूर रखा गया।
मिसेस सीएम ने बचा लिया...
कहते हैं सलमान खान को सीएम हाउस लाने के लिए रमन सिंह के बच्चों ने जिद पकड़ ली थी लेकिन मिसेस सीएम श्रीमती वीणा सिंह ने साफ कह दिया कि ऐसे लोगों को बुलाने से बदनामी होगी और उनके इस कठोर रुख पर रमन सिंह को सहमत होना पड़ा। हालांकि चर्चा इस बात की है कि इस मामले में बाप-बेटे के बीच विवाद हुआ।
मंगलवार, 2 नवंबर 2010
छत्तीसगढ़ के लिए काला अध्याय
छत्तीसगढ़ में पिछले पखवाड़े भर में जिस तरह से कारनामें हुए वह किसी भी राजनैतिक दल के लिए शर्मनाक तो है ही राजनैतिक दलों की बेशर्मी की हदें भी है। इन दो घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्य निर्माण के समय वीसी शुक्ल के फार्म हाउस और एकात्म परिसर में बृजमोहन अग्रवाल के समर्थकों के द्वारा मचाए हंगामें की याद तो ताजा की ही है साथ ही इससे यह साबित भी हुआ है कि किस तरह से एक नेता के करतूतों से पूरी पार्टी या सरकार को शर्मसार होना पड़ता है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के प्रभारी नारायण सामी पर कालिख पोतने की शर्मनाक घटना की सुर्खियों से छत्तीसगढ़ अभी उभर भी नहीं पाया था कि राज्योत्सव के आयोजकों ने सलमान खान जैसे अपराधिक रिकार्ड वाले को राज्योत्सव में मंच देकर छत्तीसगढ़ को शर्मसार कर दिया। मामला सिर्फ इतना ही होता तो सरकार अपनी करतूतें छुपा लेती लेकिन इससे भी बढक़र शर्मनाक स्थिति तब निर्मित हो गई जब सलमान खान के स्वागत के लिए राज्यपाल मुख्यमंत्री तक को लाईन में लगा दिया गया। इतने में ही मामला शांत नहीं हुआ। इससे बढक़र सलमान खान की वह बोल है जो उन्होंने राज्योत्सव के मंच से कहा। सिर्फ एक कंपनी के विज्ञापन के लिए पहुंचे सलमान खान ने जिस तरह से अपने दस मिनट में जो दमदारी दिखाई वह सरकार के अस्तित्व पर ही सवाल उठाते है।
सवाल यह भी उठने लगा है कि राज्योत्सव के आयोजन का भार बृजमोहन अग्रवाल जैसे दमदार मंत्री के विभाग के कंधे पर है इसके बाद भी यह शर्मनाक स्थिति निर्मित हुई है। छत्तीसगढ़ व सरकार को शर्मसार करने वाले इस वाक्ये ने कई सवाल उठाए हैं। क्या यह सब बृजमोहन अग्रवाल की सहमति से हुआ है। यह सवाल इसलिए भी उठाए जा रहे हैं क्योंकि इस मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा नहीं है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में ऐसा पहली बार हुआ है। इससे ठीक दस साल पहले भी दोनों पार्टियों में दबंगों के समर्थकों के द्वारा इस तरह का कारनामा किया जा चुका है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकार में बैठे मंत्री की दमदारी के बावजूद राज्योत्सव जैसे कार्यक्रम में किसी अपराधी को न केवल जगह मिली है बल्कि उसके स्वागत के लिए राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री तक को लाईन लगानी पड़ी हो। इस मामले में देर से ही सही कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर सीधा हमला किया है।
जब डीजीपी को गुस्सा आया...
सलमान खान जैसे अपराधिक पृष्ठभूमि को बुलाए जाने के बाद राज्योत्सव में पूरी व्यवस्था अस्त व्यस्त रही और इस अव्यवस्था से डीजीपी विश्वरंजन को इतना गुस्सा आया कि वे कार्यक्रम बीच में ही छोडक़र चले गए। जबकि इस समय सलमान खान मंच पर मौजूद थे। इतना ही नहीं उन्हें मनाने पहुंचे जी.एस. बाम्बरा को गाली तक सुननी पड़ी।
लाठी खानी पड़ी...
वैसे तो दाउद और कसाब को भी देखने भीड़ जुट जाती है ऐसे में सलमान खान को देखने वालों की कमी नहीं थी। पुलिस व सरकार की अव्यवस्था के चलते जब भीड़ बढ़ गई तो लाठियां भांजनी पड़ी। कई लोगों की पिटाई हुई। गांव-गांव से आने वाले बाद में सरकार को कोसते वापस लौटे।
मौत कैसे हुई...
राज्योत्सव के पहले ही दिन पोड़ निवासी साहू युवक की मौत हो गई। पहले तो उसकी मौत की करंट लगने को बताया गया लेकिन बाद में यह भी चर्चा हुई कि पुलिस द्वारा लाठी भांजने से हुई भगदड़ के दौरान उसकी मौत हुई। मौत कैसे हुई कोई बोलने को तैयार नहीं है।
वाह रे सरकार...
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्योत्सव में जिस तरह से पटाखे फोड़े वह सरकार की कथी व करनी को तो दर्शाता ही साथ ही प्रदूषण के प्रति सरकार की लापरवाही को भी उजागर करता है। भाजपा सरकार के कई मंत्री व विधायक दीपावली में पटाखा फोडऩे पर होने वाले प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते नहीं थकते लेकिन यही सरकार राज्योत्सव में जिस पैमाने पर पटाखा फोडक़र प्रदूषण फैलाने का काम किया है वह दुखद है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के प्रभारी नारायण सामी पर कालिख पोतने की शर्मनाक घटना की सुर्खियों से छत्तीसगढ़ अभी उभर भी नहीं पाया था कि राज्योत्सव के आयोजकों ने सलमान खान जैसे अपराधिक रिकार्ड वाले को राज्योत्सव में मंच देकर छत्तीसगढ़ को शर्मसार कर दिया। मामला सिर्फ इतना ही होता तो सरकार अपनी करतूतें छुपा लेती लेकिन इससे भी बढक़र शर्मनाक स्थिति तब निर्मित हो गई जब सलमान खान के स्वागत के लिए राज्यपाल मुख्यमंत्री तक को लाईन में लगा दिया गया। इतने में ही मामला शांत नहीं हुआ। इससे बढक़र सलमान खान की वह बोल है जो उन्होंने राज्योत्सव के मंच से कहा। सिर्फ एक कंपनी के विज्ञापन के लिए पहुंचे सलमान खान ने जिस तरह से अपने दस मिनट में जो दमदारी दिखाई वह सरकार के अस्तित्व पर ही सवाल उठाते है।
सवाल यह भी उठने लगा है कि राज्योत्सव के आयोजन का भार बृजमोहन अग्रवाल जैसे दमदार मंत्री के विभाग के कंधे पर है इसके बाद भी यह शर्मनाक स्थिति निर्मित हुई है। छत्तीसगढ़ व सरकार को शर्मसार करने वाले इस वाक्ये ने कई सवाल उठाए हैं। क्या यह सब बृजमोहन अग्रवाल की सहमति से हुआ है। यह सवाल इसलिए भी उठाए जा रहे हैं क्योंकि इस मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा नहीं है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में ऐसा पहली बार हुआ है। इससे ठीक दस साल पहले भी दोनों पार्टियों में दबंगों के समर्थकों के द्वारा इस तरह का कारनामा किया जा चुका है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकार में बैठे मंत्री की दमदारी के बावजूद राज्योत्सव जैसे कार्यक्रम में किसी अपराधी को न केवल जगह मिली है बल्कि उसके स्वागत के लिए राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री तक को लाईन लगानी पड़ी हो। इस मामले में देर से ही सही कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर सीधा हमला किया है।
जब डीजीपी को गुस्सा आया...
सलमान खान जैसे अपराधिक पृष्ठभूमि को बुलाए जाने के बाद राज्योत्सव में पूरी व्यवस्था अस्त व्यस्त रही और इस अव्यवस्था से डीजीपी विश्वरंजन को इतना गुस्सा आया कि वे कार्यक्रम बीच में ही छोडक़र चले गए। जबकि इस समय सलमान खान मंच पर मौजूद थे। इतना ही नहीं उन्हें मनाने पहुंचे जी.एस. बाम्बरा को गाली तक सुननी पड़ी।
लाठी खानी पड़ी...
वैसे तो दाउद और कसाब को भी देखने भीड़ जुट जाती है ऐसे में सलमान खान को देखने वालों की कमी नहीं थी। पुलिस व सरकार की अव्यवस्था के चलते जब भीड़ बढ़ गई तो लाठियां भांजनी पड़ी। कई लोगों की पिटाई हुई। गांव-गांव से आने वाले बाद में सरकार को कोसते वापस लौटे।
मौत कैसे हुई...
राज्योत्सव के पहले ही दिन पोड़ निवासी साहू युवक की मौत हो गई। पहले तो उसकी मौत की करंट लगने को बताया गया लेकिन बाद में यह भी चर्चा हुई कि पुलिस द्वारा लाठी भांजने से हुई भगदड़ के दौरान उसकी मौत हुई। मौत कैसे हुई कोई बोलने को तैयार नहीं है।
वाह रे सरकार...
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्योत्सव में जिस तरह से पटाखे फोड़े वह सरकार की कथी व करनी को तो दर्शाता ही साथ ही प्रदूषण के प्रति सरकार की लापरवाही को भी उजागर करता है। भाजपा सरकार के कई मंत्री व विधायक दीपावली में पटाखा फोडऩे पर होने वाले प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते नहीं थकते लेकिन यही सरकार राज्योत्सव में जिस पैमाने पर पटाखा फोडक़र प्रदूषण फैलाने का काम किया है वह दुखद है।
खनिज के ‘खा’
लगता है छत्तीसगढ़ सरकार ने खनिज मामले में तय कर लिया है कि खदानों को लीज में देने की बजाय अवैध उत्खनन से पैसा कमाया जाए। तभी तो यहां लीज देने की प्रक्रिया इतना जटिल कर दिया है कि सालों से लीज देने का आवेदन लंबित है। यही नहीं आए दिन खनिज को लेकर नई-नई नीतियां बनाई जाती है ताकि खनिज की चोरी चलता रहे अधिकारियों की जेब गरम होते रहे। चूंकि यह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पास है इसलिए भी अधिकारियों की दादागिरी चरम पर है।
छत्तीसगढ़ में जिस तरह से लूट मची है उसमें खनिज विभाग के अधिकारी भी पीछे नहीं है। खनिज चोरी की बढ़ती घटना से चिंतित नजर आने वाले अधिकारियों की एफआईआर दर्ज कराने की घोषणा भी टांय-टांय फिस्स हो चुका है। एफआईआर कराने की बात तो दूर नई राजधानी जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र से भी खनिज चोरी को वह नहीं रोक पाई है।
ज्ञात हो कि नई राजधानी क्षेत्र व उससे लगे गांवों में मुरुम व गिट्टी उत्खनन पर प्रतिबंध है लेकिन आज भी सैकड़ों ट्रके मुरुम व गिट्टी शहर में बेधडक़ परिवहन किया जा रहा है। खनिज नाका तो अवैध उत्खनन को रोकने की बजाय वसूली व कमीशनखोरी का अड्डा बन चुका है। यही नहीं दुर्ग जिले के नंदनी अहिवारा क्षेत्र से भी प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकें मुरुम व गिट्टी लेकर रायपुर आ रही है। चूंकि इन दोनों ही क्षेत्रों से आने वाले मुरुम-गिट्टी की कीमत अत्यंत कम है इसलिए भी सडक़ निर्माण से लेकर भवन निर्माण में इसका बेतहाशा उपयोग हो रहा है। आश्चर्य का विषय तो यह है कि कुम्हारी बीटीओ नाके में 100 रुपए टैक्स वसूलने के बाद भी रायपुर में सस्ते में कैसे आ रहा है यह जांच का विषय है।
इधर उड़ीसा व महासमुंद में खदान चलाने वाले एक व्यापारी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में वही काम कर सकता है जो अवैध काम करेगा हमारे जैसे नियम में काम करने वालों के लिए जगह नहीं है। उन्होंने खदान लीज पर देने की प्रक्रिया को भी घुमावदार बताते हुए यहां तक कहा कि वे यहां की खदान को सिर्फ इसलिए चालू नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनसे बेवजह पैसे मांगे जाते हैं। अवैध उत्खनन करने वालों से सांठगांठ की वजह से ही लीज देने की प्रक्रिया को जटिल किया गया है और लीज लेने का आवेदन देने वालों को आफिस का चक्कर लगवाया जा रहा है।
चर्चा तो यह है कि सैकड़ों एकड़ जमीन लीज पर लेने वालों के लिए पूरा अमला लग जाता है और निजी वन जमीनों तक को लीज पर दे दिया जाता है। इसका उदाहरण पलारी के पास स्थित गांव रिंगनी तथा चुआं, मालूकोना, देवरानी जेठानी नामक गांव तक को लीज पर दे दिया गया है और यह सब मंत्री से लेकर अधिकारियों तक से सांठगांठ कर की जाती है।
छत्तीसगढ़ में जिस तरह से लूट मची है उसमें खनिज विभाग के अधिकारी भी पीछे नहीं है। खनिज चोरी की बढ़ती घटना से चिंतित नजर आने वाले अधिकारियों की एफआईआर दर्ज कराने की घोषणा भी टांय-टांय फिस्स हो चुका है। एफआईआर कराने की बात तो दूर नई राजधानी जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र से भी खनिज चोरी को वह नहीं रोक पाई है।
ज्ञात हो कि नई राजधानी क्षेत्र व उससे लगे गांवों में मुरुम व गिट्टी उत्खनन पर प्रतिबंध है लेकिन आज भी सैकड़ों ट्रके मुरुम व गिट्टी शहर में बेधडक़ परिवहन किया जा रहा है। खनिज नाका तो अवैध उत्खनन को रोकने की बजाय वसूली व कमीशनखोरी का अड्डा बन चुका है। यही नहीं दुर्ग जिले के नंदनी अहिवारा क्षेत्र से भी प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकें मुरुम व गिट्टी लेकर रायपुर आ रही है। चूंकि इन दोनों ही क्षेत्रों से आने वाले मुरुम-गिट्टी की कीमत अत्यंत कम है इसलिए भी सडक़ निर्माण से लेकर भवन निर्माण में इसका बेतहाशा उपयोग हो रहा है। आश्चर्य का विषय तो यह है कि कुम्हारी बीटीओ नाके में 100 रुपए टैक्स वसूलने के बाद भी रायपुर में सस्ते में कैसे आ रहा है यह जांच का विषय है।
इधर उड़ीसा व महासमुंद में खदान चलाने वाले एक व्यापारी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में वही काम कर सकता है जो अवैध काम करेगा हमारे जैसे नियम में काम करने वालों के लिए जगह नहीं है। उन्होंने खदान लीज पर देने की प्रक्रिया को भी घुमावदार बताते हुए यहां तक कहा कि वे यहां की खदान को सिर्फ इसलिए चालू नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनसे बेवजह पैसे मांगे जाते हैं। अवैध उत्खनन करने वालों से सांठगांठ की वजह से ही लीज देने की प्रक्रिया को जटिल किया गया है और लीज लेने का आवेदन देने वालों को आफिस का चक्कर लगवाया जा रहा है।
चर्चा तो यह है कि सैकड़ों एकड़ जमीन लीज पर लेने वालों के लिए पूरा अमला लग जाता है और निजी वन जमीनों तक को लीज पर दे दिया जाता है। इसका उदाहरण पलारी के पास स्थित गांव रिंगनी तथा चुआं, मालूकोना, देवरानी जेठानी नामक गांव तक को लीज पर दे दिया गया है और यह सब मंत्री से लेकर अधिकारियों तक से सांठगांठ कर की जाती है।
रविवार, 31 अक्टूबर 2010
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