हीरा ग्रुप ने भारत का गलत नक्शा वाला ग्लोब बांटा
महंगे गिफ्ट लेने वालों का नाम सार्वजित हो, सरकार चुप
छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित उद्योग समूह माने जाने वाले हीरा ग्रुप पर कोल ब्लाक का दाग अभी पूरी तरह से छूट भी नहीं पाया है कि वह एक बार फिर छत्तीसगढ़ के अधिकारियों व नेताओं-मंत्रियों को भारत का गलत नक्शा वाला ग्लोब बांटने को लेकर विवाद में आ गया है। इस मामले में हीरा ग्रुप की गलती कितनी है यह जांच का विषय तो हो सकता है लेकिन यह बात खुलकर सामने गई है कि बड़े उद्योग किस तरह से अधिकारियों व नेताओं को रिझाने महंगे गिफ्ट देती है। गिफ्ट लेने वाले अफसरों का नाम भी सावर्जनिक होना चाहिए।
छत्तीसगढ़ के इस उद्योग समूह ने दीपावली में छत्तीसगढ़ के नेताओं-मंत्रियों और अधिकारियों को कार्पोरेट गिफ्ट बांटा. इस गिफ्ट में जो ग्लोब बांटे गए उसमें भारत के नक्शे से जम्मू-कश्मीर और अरूणाचल प्रदेश ही गायब हैं। इस मामले को नागरिक संघर्ष समिति के डा. राकेश गुप्ता, अमिताभ दीक्षित, हरचरण जुनेजा और विश्वजीत मित्रा ने उठाते हुए मांग की कि हीरा ग्रुप इस गलती के लिए न केवल सार्वजनिक रूप से माफी मांगे बल्कि गिफ्ट वापस मंगवाकर जयस्तंभ में इसे जला दें। उन्होंने आश्चर्य जताया कि इतने बड़े मामले पर जांच एजेंसी की नजर नहीं पड़ी जबकि निर्माण कंपनी और हीराग्रुप पर भी उन्होंने देश विरोधी इस कार्रवाई के लिए जुर्म दर्ज की मांग सरकार से की। सरकार ने अभी तक इस पर जुर्म दर्ज नहीं किया है।
दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि इस बेशकीमती गिफ्ट हजारों की संघ्या में छत्तीसगढ़ के उन विभागों के अफसरों को बांटी गई है जिनका उद्योग समूह को आये दिन वास्ता पड़ता है। जिनमें बिजली, कोयला, खनिज और उद्योग विभाग के अफसर प्रमुख है। इसके अलावा मंत्री, विधायक व नेताों को भी यह बेशकीमती गिफ्त दी गई है।
कोल ब्लाक मामले में दाग लग चुके इस उद्योग समूह के इस करतूत से यह बात भी स्पष्ट हो गई है कि किस तरह से अपने पक्ष में करने उद्योग समूहों द्वारा गिफ्ट बांटे जाते हैं। क्या इस पर आयकर विभाग भी नजर डालेगा। दूसरीतरफ ऐसे लोगों से गिफ्ट लेना किस तरह उचित है। आम लोगों में इसे लेकर काफी तीखी प्रतिक्रिया है। बहरहाल इस सम्पूर्ण मामले में हीरा ग्रुप को एक बार फिर विवाद में तो लिया ही है प्रदेश के मंत्री और अफसरों पर भी उंगली उठने लगी है।
http://midiaparmidiaa.blogspot.in/
मंगलवार, 23 नवंबर 2010
सोमवार, 22 नवंबर 2010
मंत्री भाई की रूचि से चेम्बर चुनाव में विवाद!
आगामी माह होने वाले प्रतिष्ठित व्यापारी संगठन छत्तीसगढ़ चेम्बर आफ कामर्ल एंड इंडस्ट्रीज के चुनाव में प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के लाड़ले भाई योगेश अग्रवाल की रूचि से विवाद बढ़ गया है। कहा जाता है कि इस बार चुनाव में सत्ता की ताकत को बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है जिसकी वजह से चेम्पर के पूर्व अध्यक्ष पूरनलाल अग्रवाल नाराज हैं और कई व्यापारियों ने चिंता जताई है।
छत्तीसगढ़ चेम्पर का चुनाव को लेकर व्यापारियों में जबरदस्त चर्चा है। वर्तमान अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी के द्वारा पुन: अध्यक्ष बनने में रूचि दिखाने को विरोधी गुट पचा नहीं पा रहे हैं जबकि पूर्व अध्यक्ष पूरनलाल अग्रवाल ने भी अध्यक्ष बनने की ईच्छा जता दीहै। इधर पिछली बार ही चुनाव भले ही शांतिपूर्ण निपट गया था लेकि कहा जाता है कि चेम्बर की राजनीति को लेकर योगेश अग्रवाल और पूरनलाल अग्रवाल में ठन गई थी। मामला चमकी धमकी और रायपुर में रहने देने तक पहुंच गया था और एक पक्ष ने माफी नामे के बाद ही मामला शांत हो पाया था।
इस बार भी चेमबर चुनाव में मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के भाई योगेश अग्रवाल ने न केवल रूचि दिखाई है बल्कि बैठकों में वे बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। कहा जाता है कि जरूरत पड़ने पर वे भी अध्यक्ष का चुनाव लड़ सकते हैं। योगेश की इस रूचि से व्यापारियों के एक बड़े वर्ग में नाराजगी बताई जा रही है। दरअसल योगेश पर जमीन मामले से लेकर पिटाई व धमकी-चमकी के आरोप भी लगे हैं ऐसे विवादित को अध्यक्ष बनाने को लेकर व्यापारियों का एक वर्ग नाराज है यही वजह है कि पूरनलाल अग्रवाल और श्रीचंद सुंदरानी पुन: अध्यक्ष बनने को इच्छुक है।
चेम्बर सूत्रों के मुताबिक व्यापारियों पर पूरनलाल अग्रवाल और श्रीचंद सुंदरानी का अच्छा खासा प्रभाव है जबकि योगेश को राईस मिल एसोसियेशन तक का ठीक ढंग से समर्थन नहीं मिलने की चर्चा है। इधर व्यापारियों की एकता को बनाये रखने पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। जिसमें रमेश रमोदी, भारामल, पोहूमल,हरचरण सिंह साहनी और सुशील अग्रवाल शामिल है जो व्यापारी एकता पैनल में सर्वसम्मत उम्मीदवार का चयन करेंगे।
इधर व्यापारी नेता आनंद चोपकर ने निगम द्वारा तोड़फोड़ के मामले में चेम्बर की भूमिका को लेकर सवाल उठा दिया है जिसकी वजह से भी चुनाव में इस बार गर्मी बढ़ गई है। जबकि जितेंद्र बरलोटा, राजेंद्र जग्गी, गुलवानी, संधु जैसे लोग भी चुनाव लड़ने इच्छुक हैं।
सर्वाधिक घमासान की स्थिति अध्यक्ष और महामंत्री के पद को लेकर है। और इन पदों के लिए जिस तरह से मंत्री भाई ने रूचि दिखाई है उससे इस बार हंगामा खड़ा होने की संभावना भी जताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ चेम्पर का चुनाव को लेकर व्यापारियों में जबरदस्त चर्चा है। वर्तमान अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी के द्वारा पुन: अध्यक्ष बनने में रूचि दिखाने को विरोधी गुट पचा नहीं पा रहे हैं जबकि पूर्व अध्यक्ष पूरनलाल अग्रवाल ने भी अध्यक्ष बनने की ईच्छा जता दीहै। इधर पिछली बार ही चुनाव भले ही शांतिपूर्ण निपट गया था लेकि कहा जाता है कि चेम्बर की राजनीति को लेकर योगेश अग्रवाल और पूरनलाल अग्रवाल में ठन गई थी। मामला चमकी धमकी और रायपुर में रहने देने तक पहुंच गया था और एक पक्ष ने माफी नामे के बाद ही मामला शांत हो पाया था।
इस बार भी चेमबर चुनाव में मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के भाई योगेश अग्रवाल ने न केवल रूचि दिखाई है बल्कि बैठकों में वे बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। कहा जाता है कि जरूरत पड़ने पर वे भी अध्यक्ष का चुनाव लड़ सकते हैं। योगेश की इस रूचि से व्यापारियों के एक बड़े वर्ग में नाराजगी बताई जा रही है। दरअसल योगेश पर जमीन मामले से लेकर पिटाई व धमकी-चमकी के आरोप भी लगे हैं ऐसे विवादित को अध्यक्ष बनाने को लेकर व्यापारियों का एक वर्ग नाराज है यही वजह है कि पूरनलाल अग्रवाल और श्रीचंद सुंदरानी पुन: अध्यक्ष बनने को इच्छुक है।
चेम्बर सूत्रों के मुताबिक व्यापारियों पर पूरनलाल अग्रवाल और श्रीचंद सुंदरानी का अच्छा खासा प्रभाव है जबकि योगेश को राईस मिल एसोसियेशन तक का ठीक ढंग से समर्थन नहीं मिलने की चर्चा है। इधर व्यापारियों की एकता को बनाये रखने पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। जिसमें रमेश रमोदी, भारामल, पोहूमल,हरचरण सिंह साहनी और सुशील अग्रवाल शामिल है जो व्यापारी एकता पैनल में सर्वसम्मत उम्मीदवार का चयन करेंगे।
इधर व्यापारी नेता आनंद चोपकर ने निगम द्वारा तोड़फोड़ के मामले में चेम्बर की भूमिका को लेकर सवाल उठा दिया है जिसकी वजह से भी चुनाव में इस बार गर्मी बढ़ गई है। जबकि जितेंद्र बरलोटा, राजेंद्र जग्गी, गुलवानी, संधु जैसे लोग भी चुनाव लड़ने इच्छुक हैं।
सर्वाधिक घमासान की स्थिति अध्यक्ष और महामंत्री के पद को लेकर है। और इन पदों के लिए जिस तरह से मंत्री भाई ने रूचि दिखाई है उससे इस बार हंगामा खड़ा होने की संभावना भी जताई जा रही है।
रविवार, 21 नवंबर 2010
अनुपातहीन संपत्ति, फर्जी रजिस्ट्री, पत्नी को मारने के प्रयास के बाद भी नौकरी कायम!
पैसा और पहुंच -1
अनुपातहीन संपत्ति, फर्जी रजिस्ट्री, पत्नी को मारने के प्रयास के बाद भी नौकरी कायम!
छत्तीसगढ़ राय को बने 10 साल पूरे हो गये हैं किसी भी राय के विकास और कानून व्यवस्था कायम रखने दस बरस कम नहीं होते है। छत्तीसगढ़ के आम लोगों ने इन दस वर्षों में क्या पाया यह मायने नहीं रखता है। मायने यह रखता है कि हमने जो कुछ पाया वह किन शर्तों में पाया। क्या सरकार में बैठे लोगों ने नैतिकता का पालन किया। भ्रष्ट व चरित्रहीन सरकारी नौकरशाहों व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई हो पाई। या सिर्फ वोट बैंक और नोट कमाने का जरिया ही सर्वोपरि है। एक रिपोर्ट......
आज यहां हम सरकारी नौकरी यानि परिवहन विभाग के निरीक्षक विजय कुमार अनंत की बात कर रहे हैं। वैसे तो परिवनह यानी आरटीओ की सबसे कमाऊ विभाग में गिनती होती है। यहां कार्यरत आरटीओ इंस्पेक्टर विजय कुमार अनंत छत्तीसगढ़िया है और बिलासपुर क्षेत्र के निवासी है।
इनके खिलाफ जनवरी 2006 में जब आर्थिक अपराध ब्यूरो ने कार्रवाई की तब पता चला कि अनंत के पास एक करोड़ से ऊपर की अनुपातहीन संपत्ति मिली। तब प्रकरण क्रमांक 1-103 में अपराध पंजीबध्द किया गया। मीडिया से लेकर आम लोगों ने खूब हल्ला मचाया। लेकिन आर्थिक अपराध ब्यूरो ने चार साल बीत जाने के बाद भी चालान पेश नहीं किया। जनवरी 2011 में 5 साल पूरे हो जाएंगे। जाहिर है पैसे की ताकत के आगे ही ऐसा हुआ होगा। इस दौरान अनंत जगदलपुर में पदस्थ थे।
अनंत का मामला यहीं खत्म नहीं होता। इसके पहले उन पर ग्राम मुजगहन की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराने का भी आरोप लगा है। कहा जाता है कि 10-2-2004 को अशोक वर्मा ने अनंत को जो जमीन की रजिस्ट्री कराई। इस दौरान वह रजिस्ट्री आफिस में मौजूद ही नहीं था। इस दिन सरकारी रिकार्ड के मुताबिक वह लोदाम स्थित शंकर बेरियर में डयूटी पर न केवल तैनात था बल्कि इस दौरन उन्होंने चालानी कार्रवाई तक की। ऐसे में 10-2-2004 को उनके उपस्थिति की बात ही बेमानी थी। इसका सबूत तब मिला जब अनंत ने 5-5-2005 को इसी जमीन के बाजू स्थित जमीन की रजिस्ट्री के दौरान उपस्थित हुआ तब दोनों हस्ताक्षर भिन्न मिले।
मामली यही खत्म नहीं होता इस साल 2010 को उनकी पत्नी उर्मिला ने कोर्ट में शपथ पत्र दिया कि उसके पति विजय कुमार अनंत ने उन्हें जान से मारने की कोशिश की उन पर मिट्टी तेल डाला गया। इस दौरन अनिता नायक महिला ने भी द्वारा उन्हें मारने में सहयोग देने की बात कही गई। इस पर न्यायालय ने अनंत के खिलाफ धारा 307 के तहत कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया। ये विजय कुमार अनंत पर लगे आरोप हैं। इन आरोपों के बाद भी उनकी नौकरी कायम है और सरकार में बैठे संबंधित विभाग के अधिकारी से लेकर मंत्री तक खामोश है।
इस संबंध में जब हमने संबंधित लोगों सेचर्चा करनाचाही तो सभी का रटा रटाया डायलाग था कि सिर्फ आरोप से कुछ नहीं होता जबकि अनंत से संपर्क नहीं हो पाया।
अनुपातहीन संपत्ति, फर्जी रजिस्ट्री, पत्नी को मारने के प्रयास के बाद भी नौकरी कायम!
छत्तीसगढ़ राय को बने 10 साल पूरे हो गये हैं किसी भी राय के विकास और कानून व्यवस्था कायम रखने दस बरस कम नहीं होते है। छत्तीसगढ़ के आम लोगों ने इन दस वर्षों में क्या पाया यह मायने नहीं रखता है। मायने यह रखता है कि हमने जो कुछ पाया वह किन शर्तों में पाया। क्या सरकार में बैठे लोगों ने नैतिकता का पालन किया। भ्रष्ट व चरित्रहीन सरकारी नौकरशाहों व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई हो पाई। या सिर्फ वोट बैंक और नोट कमाने का जरिया ही सर्वोपरि है। एक रिपोर्ट......
आज यहां हम सरकारी नौकरी यानि परिवहन विभाग के निरीक्षक विजय कुमार अनंत की बात कर रहे हैं। वैसे तो परिवनह यानी आरटीओ की सबसे कमाऊ विभाग में गिनती होती है। यहां कार्यरत आरटीओ इंस्पेक्टर विजय कुमार अनंत छत्तीसगढ़िया है और बिलासपुर क्षेत्र के निवासी है।
इनके खिलाफ जनवरी 2006 में जब आर्थिक अपराध ब्यूरो ने कार्रवाई की तब पता चला कि अनंत के पास एक करोड़ से ऊपर की अनुपातहीन संपत्ति मिली। तब प्रकरण क्रमांक 1-103 में अपराध पंजीबध्द किया गया। मीडिया से लेकर आम लोगों ने खूब हल्ला मचाया। लेकिन आर्थिक अपराध ब्यूरो ने चार साल बीत जाने के बाद भी चालान पेश नहीं किया। जनवरी 2011 में 5 साल पूरे हो जाएंगे। जाहिर है पैसे की ताकत के आगे ही ऐसा हुआ होगा। इस दौरान अनंत जगदलपुर में पदस्थ थे।
अनंत का मामला यहीं खत्म नहीं होता। इसके पहले उन पर ग्राम मुजगहन की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराने का भी आरोप लगा है। कहा जाता है कि 10-2-2004 को अशोक वर्मा ने अनंत को जो जमीन की रजिस्ट्री कराई। इस दौरान वह रजिस्ट्री आफिस में मौजूद ही नहीं था। इस दिन सरकारी रिकार्ड के मुताबिक वह लोदाम स्थित शंकर बेरियर में डयूटी पर न केवल तैनात था बल्कि इस दौरन उन्होंने चालानी कार्रवाई तक की। ऐसे में 10-2-2004 को उनके उपस्थिति की बात ही बेमानी थी। इसका सबूत तब मिला जब अनंत ने 5-5-2005 को इसी जमीन के बाजू स्थित जमीन की रजिस्ट्री के दौरान उपस्थित हुआ तब दोनों हस्ताक्षर भिन्न मिले।
मामली यही खत्म नहीं होता इस साल 2010 को उनकी पत्नी उर्मिला ने कोर्ट में शपथ पत्र दिया कि उसके पति विजय कुमार अनंत ने उन्हें जान से मारने की कोशिश की उन पर मिट्टी तेल डाला गया। इस दौरन अनिता नायक महिला ने भी द्वारा उन्हें मारने में सहयोग देने की बात कही गई। इस पर न्यायालय ने अनंत के खिलाफ धारा 307 के तहत कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया। ये विजय कुमार अनंत पर लगे आरोप हैं। इन आरोपों के बाद भी उनकी नौकरी कायम है और सरकार में बैठे संबंधित विभाग के अधिकारी से लेकर मंत्री तक खामोश है।
इस संबंध में जब हमने संबंधित लोगों सेचर्चा करनाचाही तो सभी का रटा रटाया डायलाग था कि सिर्फ आरोप से कुछ नहीं होता जबकि अनंत से संपर्क नहीं हो पाया।
शनिवार, 20 नवंबर 2010
बात जब निकली है तो दूर तलक जायेगी!
पत्रिका का आना खबर प्रेमियों के लिए शुभ साबित हो रहा है तो नेताओं और अधिकारियों की बेचैनी बढ़ गई है। यह बात अलग है कि बेशर्मी इतनी ज्यादा है कि कार्रवाी नहीं हो रही है लेकिन सिर्फ कार्रवाई नहीं होने के नाम पर खबर तो नहीं रोकी जा सकती।
लगातार भ्रष्ट आचरण की खबरों से सरकार और उसमें बैठे अधिकारी परेशान है। लेकिन बचने के रास्ते निकाल लिए जा रहे हैं और जिम्मेदारी से मुकरा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के मीडिया के इस तेवर से हैरानी भले ही न हो लेकिन अचानक चले इस बयार से राज्य बनने के पहले की प्रतिष्ठा को लौटा दी है। उन लोगों के मुंह में भी तमाचा जड़ गया है जो लोग मीडिया को सेटर और बिक जाने का दावा करते थे। अब तो सिर्फ सरकारी बेशर्मी की चर्चा ही अधिक हो रही है।
मृत देश की चर्चा
छत्तीसगढ़ से एक बड़े कांग्रेसी नेता के भाई के अखबार ने अपने शिक्षण संस्थान में गबन पर खूब हल्ला मचाया। हालाकि गबन का आरोपी धरा गया और उसे जेल भिजवा कर ही दम लिया गया लेकिन आम लोगों की चर्चा का क्या वे तो बोल ही रहे कि दो-ढाई लाख के गबन पर इतना हाय तौबा मचाने वाले जब ग्रामोद्योग में करोड़ों का गबन करते हैं तब दूसरे लोगों को भी हल्ला मचाना चाहिए।
बेचारा दामू
प्रेस क्लब के इस स.सचिव दामू आम्बेडोर को कानूनी दांव पेंच की वजह से अंदर होना पड़ा। दरअसल प्रेम प्यार के फेर में फंसे इस पत्रकार को फंसा दिया गया और उसके सहयोगी पदाधिकारियों ने भी पल्ला झाड़ लिया। सब कुछ शांति से निपटने से पुलिस भी राहत में है क्योंकि मामला ही ऐसा था कि किसी की कुछ बोलने की हिम्मत ही नहीं हुई।
बौना बंधु फुर्र हुए
प्रेस क्लब में पिछले दिनों बौना बंधुओं ने कांफ्रेंस रखी। उनकी अपनी पीड़ा है लेकिन संयोग से पत्रिका मे भी एक फोटोग्राफर बौना बंधु है। संगठन से जुड़ने इस बंधु को जब साथी फोटोग्राफरों ने दबाव डाला तो वह भाग लिया। ग्रुप फोटो के दौरान हीरा की खोज खबर होते रही।
और अंत में ...
राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ के प्रिंट मीडिया में हरियाली है। वेतन के लिए दिन नहीं गिनने पड़ते लेकिन डीडी न्यूज में काम करने वाले परेशान है। 12 लाख आने की खबर की खुशी भी इंतजार में खत्म होने लगी है।
लगातार भ्रष्ट आचरण की खबरों से सरकार और उसमें बैठे अधिकारी परेशान है। लेकिन बचने के रास्ते निकाल लिए जा रहे हैं और जिम्मेदारी से मुकरा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के मीडिया के इस तेवर से हैरानी भले ही न हो लेकिन अचानक चले इस बयार से राज्य बनने के पहले की प्रतिष्ठा को लौटा दी है। उन लोगों के मुंह में भी तमाचा जड़ गया है जो लोग मीडिया को सेटर और बिक जाने का दावा करते थे। अब तो सिर्फ सरकारी बेशर्मी की चर्चा ही अधिक हो रही है।
मृत देश की चर्चा
छत्तीसगढ़ से एक बड़े कांग्रेसी नेता के भाई के अखबार ने अपने शिक्षण संस्थान में गबन पर खूब हल्ला मचाया। हालाकि गबन का आरोपी धरा गया और उसे जेल भिजवा कर ही दम लिया गया लेकिन आम लोगों की चर्चा का क्या वे तो बोल ही रहे कि दो-ढाई लाख के गबन पर इतना हाय तौबा मचाने वाले जब ग्रामोद्योग में करोड़ों का गबन करते हैं तब दूसरे लोगों को भी हल्ला मचाना चाहिए।
बेचारा दामू
प्रेस क्लब के इस स.सचिव दामू आम्बेडोर को कानूनी दांव पेंच की वजह से अंदर होना पड़ा। दरअसल प्रेम प्यार के फेर में फंसे इस पत्रकार को फंसा दिया गया और उसके सहयोगी पदाधिकारियों ने भी पल्ला झाड़ लिया। सब कुछ शांति से निपटने से पुलिस भी राहत में है क्योंकि मामला ही ऐसा था कि किसी की कुछ बोलने की हिम्मत ही नहीं हुई।
बौना बंधु फुर्र हुए
प्रेस क्लब में पिछले दिनों बौना बंधुओं ने कांफ्रेंस रखी। उनकी अपनी पीड़ा है लेकिन संयोग से पत्रिका मे भी एक फोटोग्राफर बौना बंधु है। संगठन से जुड़ने इस बंधु को जब साथी फोटोग्राफरों ने दबाव डाला तो वह भाग लिया। ग्रुप फोटो के दौरान हीरा की खोज खबर होते रही।
और अंत में ...
राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ के प्रिंट मीडिया में हरियाली है। वेतन के लिए दिन नहीं गिनने पड़ते लेकिन डीडी न्यूज में काम करने वाले परेशान है। 12 लाख आने की खबर की खुशी भी इंतजार में खत्म होने लगी है।
खबर
घुसेरा पंचायत का स्कूल जर्जर
रायपुर। अभनपुर विकासखंड के ग्राम घुसेरा के सरपंच कुमारी बाई ने बताया कि उनके यहां प्राथमिक शाला भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है वहीं स्कूल मार्ग की हालत भी दयनीय है जिसके चलते छात्र-छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आंगन बाड़ी केंद्र के लिए भवन निर्माण की भी मांग की है।
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पंचायत भवन जर्जर
रायपुर। अभनपुर विकास खंड के ग्राम पंचायत सिंगारभाठा स्थित पंचायत भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। यह जानकारी देते हुए सरपंच ने बताया कि उन्होंने इसकी सूचना जनपद पंचायत अभनपुर को कई बार दी है लेकिन कोई कार्रवाई नहींहो रही है। पंचायत भवन में बैठना तक मुश्किल हो गया है।
रायपुर। अभनपुर विकासखंड के ग्राम घुसेरा के सरपंच कुमारी बाई ने बताया कि उनके यहां प्राथमिक शाला भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है वहीं स्कूल मार्ग की हालत भी दयनीय है जिसके चलते छात्र-छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आंगन बाड़ी केंद्र के लिए भवन निर्माण की भी मांग की है।
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पंचायत भवन जर्जर
रायपुर। अभनपुर विकास खंड के ग्राम पंचायत सिंगारभाठा स्थित पंचायत भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। यह जानकारी देते हुए सरपंच ने बताया कि उन्होंने इसकी सूचना जनपद पंचायत अभनपुर को कई बार दी है लेकिन कोई कार्रवाई नहींहो रही है। पंचायत भवन में बैठना तक मुश्किल हो गया है।
शुक्रवार, 19 नवंबर 2010
लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं,इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं
कमल विहार योजना को लेकर राजधानी के दो मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल और राजेश मूणत में भिड़ंत हो गई। हालांकि मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस जंग को यह कहकर टाल दिया कि योजना लागू की जाएगी और जनप्रतिनिधियों से राय लेकर विसंगतियां दूर कर दी जाएगी। कहते हैं इस योजना के पीछे मुख्य उद्देश्य भाजपा के चुनाव चिन्ह को प्रचारित करने के अलावा पैसा खाना भी है। पूरी योजना को जिस तरह से जबरिया लागू करने की कोशिश की गई वह आम लोगों के साथ चार सौ बीसी के अलावा कुछ नहीं है। धारा 50 का उल्लंघन तो किया ही गया क्षेत्रीय विधायकों-सांसदों तक से राय लेने की जरूरत नहीं समझी गई।
इसी योजना के सूत्रधार की नियत पर पहले से ही संदेह रहा है। अमित कटारिया का नाम राजधानी वालों के लिए नया नहीं है उसके अंधेरगर्दी मचाने के किस्से नगर निगम में भी खूब चर्चा में रही है और उन्हें अपनी करतूत की वजह से ही निगम से हटना पड़ा। लेकिन उसने अपनी ईमानदारी का ऐसा जाल अपने आसपास बुन रखा है कि आम जनता को भी लगने लगा कि उनके साथ गलत हुआ औार शायद सरकार को भी लगा कि ईमानदार अफसर हतोत्साहित न हो और अमित कटारिया को राविप्रा में बिठा दिया गया जहां से कमल विहार की बुनियाद रखी जानी थी।
योजना का विरोध बृजमोहन अग्रवाल द्वारा किया जाने के पीछे भले ही उनका निहित स्वार्थ हो लेकिन योजना का खुलेआम विरोध विधायक देवजीभाई पटेल से लेकर सांसद रमेश बैस कर चुके थे। पूरी योजना में जिस तरह से आम लोगों के साथ धोखाधड़ी व चार सौ बीसी की जा रही थी। सच छपाया जा रहा था और लोगों को लूटने की साजिश रची जा रही थी। उनका वहां के लोग विरोध तो कर रहे थे लेकिन अमित कटारिया अपनी मनमानी में अड़े हुए थे। यहां तक कि उसने इस कमल विहार योजना के खिलाफ खबर छापने वाले दैनिक अखबार पत्रिका तक को नोटिस ही नहीं भेजा बल्कि इसके प्रचार में विज्ञापन में करोड़ों खर्च कर दिया। राविप्रा के इस विज्ञापन में कमल विहार की विसंगतियों के खिलाफ छापने वाले को चेतावनी तक दी गई और लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ के अधिकार पर कुठाराघात की कोशिश हुई। लेकिन जिस दमदारी से पत्रिका को नोटिस दी गई। विज्ञापन में नाम छापने से राविप्रा डर गया। अब जब योजना का विरोध सरकार के विधायक-सांसद और मंत्री करने लगे हैं तब भी इस योजना को लागू करने की बात अंधेरगर्दी नहीं तो और क्या है।
अमित कटारिया को यह बात भी नहीं भूलना चाहिए कि वे सिर्फ जनता के नौकर हैं। उन्हें तो वेतन मिलता है वह जनता के द्वारा दिए गए टैक्स से दिया जाता है और लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। अपनी बात सही हो तब भी जनता की भावनाओं का ध्यान रखना होगा यही नहीं कानूनी नोटिस के पहले क्या सरकार से अनुमति ली गई है या यहां भी अंधेरगर्दी मचाई गई है? इस सवाल का जवाब अमित कटारिया ही नहीं सरकार को भी देना होगा। लोकतंत्र में न तो किसी की मनमानी चलनी है न ही अंधेरगर्दी। यदि आप ईमानदार हैं तो अपनी ईमानदारी अपने पास रखे। सिर्फ एक रुपए वेतन लेने का प्रोपोगेण्डा इस राजधानी ने बहुत देखा है और लोगों को मालूम है कि ऐसा सिर्फ अपनी छवि बनाने का तिकड़म मात्र है। इसलिए जिसमें दमदारी और ईमानदारी होती है उसे खुलकर अपनी बात कहनी चाहिए। चोरी छिपे काम चार सौ बीसी कहलाता है।
इसी योजना के सूत्रधार की नियत पर पहले से ही संदेह रहा है। अमित कटारिया का नाम राजधानी वालों के लिए नया नहीं है उसके अंधेरगर्दी मचाने के किस्से नगर निगम में भी खूब चर्चा में रही है और उन्हें अपनी करतूत की वजह से ही निगम से हटना पड़ा। लेकिन उसने अपनी ईमानदारी का ऐसा जाल अपने आसपास बुन रखा है कि आम जनता को भी लगने लगा कि उनके साथ गलत हुआ औार शायद सरकार को भी लगा कि ईमानदार अफसर हतोत्साहित न हो और अमित कटारिया को राविप्रा में बिठा दिया गया जहां से कमल विहार की बुनियाद रखी जानी थी।
योजना का विरोध बृजमोहन अग्रवाल द्वारा किया जाने के पीछे भले ही उनका निहित स्वार्थ हो लेकिन योजना का खुलेआम विरोध विधायक देवजीभाई पटेल से लेकर सांसद रमेश बैस कर चुके थे। पूरी योजना में जिस तरह से आम लोगों के साथ धोखाधड़ी व चार सौ बीसी की जा रही थी। सच छपाया जा रहा था और लोगों को लूटने की साजिश रची जा रही थी। उनका वहां के लोग विरोध तो कर रहे थे लेकिन अमित कटारिया अपनी मनमानी में अड़े हुए थे। यहां तक कि उसने इस कमल विहार योजना के खिलाफ खबर छापने वाले दैनिक अखबार पत्रिका तक को नोटिस ही नहीं भेजा बल्कि इसके प्रचार में विज्ञापन में करोड़ों खर्च कर दिया। राविप्रा के इस विज्ञापन में कमल विहार की विसंगतियों के खिलाफ छापने वाले को चेतावनी तक दी गई और लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ के अधिकार पर कुठाराघात की कोशिश हुई। लेकिन जिस दमदारी से पत्रिका को नोटिस दी गई। विज्ञापन में नाम छापने से राविप्रा डर गया। अब जब योजना का विरोध सरकार के विधायक-सांसद और मंत्री करने लगे हैं तब भी इस योजना को लागू करने की बात अंधेरगर्दी नहीं तो और क्या है।
अमित कटारिया को यह बात भी नहीं भूलना चाहिए कि वे सिर्फ जनता के नौकर हैं। उन्हें तो वेतन मिलता है वह जनता के द्वारा दिए गए टैक्स से दिया जाता है और लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। अपनी बात सही हो तब भी जनता की भावनाओं का ध्यान रखना होगा यही नहीं कानूनी नोटिस के पहले क्या सरकार से अनुमति ली गई है या यहां भी अंधेरगर्दी मचाई गई है? इस सवाल का जवाब अमित कटारिया ही नहीं सरकार को भी देना होगा। लोकतंत्र में न तो किसी की मनमानी चलनी है न ही अंधेरगर्दी। यदि आप ईमानदार हैं तो अपनी ईमानदारी अपने पास रखे। सिर्फ एक रुपए वेतन लेने का प्रोपोगेण्डा इस राजधानी ने बहुत देखा है और लोगों को मालूम है कि ऐसा सिर्फ अपनी छवि बनाने का तिकड़म मात्र है। इसलिए जिसमें दमदारी और ईमानदारी होती है उसे खुलकर अपनी बात कहनी चाहिए। चोरी छिपे काम चार सौ बीसी कहलाता है।
आज की खबर
आज की खबर
| १-रायपुर,संतोषी नगर खदान में किसान साहू नामक इस बालक कि सर कटी लाश मिली , बालक तिन दिन से लापता था. |
| २-रायपुर, कांग्रेसियों ने आज पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा जी कि जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की. |
| ३-छत्तीसगढ़ में प्रधान पाठक भारती में अनियमितता को लेकर धरना दिया गया. |
| ४-रायपुर,शंकराचार्य श्री निश्चलानंद जी आज रायपुर पहुंचे. |
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