छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही जिस तरह की पत्रकारिता चल रही है वह शर्मनाक है पत्रकार सरे राह मारे जा रहे हैं और अखबार मालिक कुत्तों की तरह रोटी के टुकड़ों पर ध्यान रख रहे हैं बेशर्मी तो यह है की अखबार का संपादक भी उसे अपना कर्मचारी मानाने से इंकार कर रहा है और पत्रकारों का हितचिन्तक बनाने वालों की बजाय ऑटो वाले आन्दोलन कर रहे हैं.मैनेजमेंट को तो अपनी अय्याशी से फुर्सत नहीं है चाहे अखबार का इमेज ख़राब हो जाये तजा मामला अंग्रेजी अखबार के जी एम् का रंगरेलियां मानाने का है नाम के अनरूप नीले फिल्मो के शौक़ीन ने वह सब कर दिया जो शर्मनाक ही नहीं अखबार जगत के लिए मुंह छुपाने जैसी है. इस नामी अंग्रेजी अखबार के जी एम् को पुलिस ने गायत्री नगर में पकड़ा और दबाव में छोड़ भी दिया krietivi संस्था के इस महिला को भी पुलिस ने छोड़ दिया . पिता लगाने वाली पुलिस ने क्यों छोड़ा यह सभी जानते है लेकिन इस अख़बार के रिपोर्टरों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है हालाँकि इस अखबार के हिंदी एडिसन के रंग - बिल्ला की चर्चा भी कम नहीं है छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही जिस तरह की पत्रकारिता चल रही है वह शर्मनाक है पत्रकार सरे राह मारे जा रहे हैं और अखबार मालिक कुत्तों की तरह रोटी के टुकड़ों पर ध्यान रख रहे हैं बेशर्मी तो यह है की अखबार का संपादक भी उसे अपना कर्मचारी मानाने से इंकार कर रहा है और पत्रकारों का हितचिन्तक बनाने वालों की बजाय ऑटो वाले आन्दोलन कर रहे हैं.मैनेजमेंट को तो अपनी अय्याशी से फुर्सत नहीं है चाहे अखबार का इमेज ख़राब हो जाये तजा मामला अंग्रेजी अखबार के जी एम् का रंगरेलियां मानाने का है नाम के अनरूप नीले फिल्मो के शौक़ीन ने वह सब कर दिया जो शर्मनाक ही नहीं अखबार जगत के लिए मुंह छुपाने जैसी है. इस नामी अंग्रेजी अखबार के जी एम् को पुलिस ने गायत्री नगर में पकड़ा और दबाव में छोड़ भी दिया krietivi संस्था के इस महिला को भी पुलिस ने छोड़ दिया . पिता लगाने वाली पुलिस ने क्यों छोड़ा यह सभी जानते है लेकिन इस अख़बार के रिपोर्टरों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है हालाँकि इस अखबार के हिंदी एडिसन के रंग - बिल्ला की चर्चा भी कम नहीं है छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही जिस तरह की पत्रकारिता चल रही है वह शर्मनाक है पत्रकार सरे राह मारे जा रहे हैं और अखबार मालिक कुत्तों की तरह रोटी के टुकड़ों पर ध्यान रख रहे हैं बेशर्मी तो यह है की अखबार का संपादक भी उसे अपना कर्मचारी मानाने से इंकार कर रहा है और पत्रकारों का हितचिन्तक बनाने वालों की बजाय ऑटो वाले आन्दोलन कर रहे हैं.मैनेजमेंट को तो अपनी अय्याशी से फुर्सत नहीं है चाहे अखबार का इमेज ख़राब हो जाये तजा मामला अंग्रेजी अखबार के जी एम् का रंगरेलियां मानाने का है नाम के अनरूप नीले फिल्मो के शौक़ीन ने वह सब कर दिया जो शर्मनाक ही नहीं अखबार जगत के लिए मुंह छुपाने जैसी है. इस नामी अंग्रेजी अखबार के जी एम् को पुलिस ने गायत्री नगर में पकड़ा और दबाव में छोड़ भी दिया krietivi संस्था के इस महिला को भी पुलिस ने छोड़ दिया . पिता लगाने वाली पुलिस ने क्यों छोड़ा यह सभी जानते है लेकिन इस अख़बार के रिपोर्टरों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है हालाँकि इस अखबार के हिंदी एडिसन के रंग - बिल्ला की चर्चा भी कम नहीं है
http://midiaparmidiaa.blogspot.in/
सोमवार, 14 फ़रवरी 2011
अंग्रेजी अखबार का जी एम् रंगरेलियां मानते पकडाया , पुलिस के हाथ - पावं फुले बगैर कार्रवाई के छोड़ा
छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही जिस तरह की पत्रकारिता चल रही है वह शर्मनाक है पत्रकार सरे राह मारे जा रहे हैं और अखबार मालिक कुत्तों की तरह रोटी के टुकड़ों पर ध्यान रख रहे हैं बेशर्मी तो यह है की अखबार का संपादक भी उसे अपना कर्मचारी मानाने से इंकार कर रहा है और पत्रकारों का हितचिन्तक बनाने वालों की बजाय ऑटो वाले आन्दोलन कर रहे हैं.मैनेजमेंट को तो अपनी अय्याशी से फुर्सत नहीं है चाहे अखबार का इमेज ख़राब हो जाये तजा मामला अंग्रेजी अखबार के जी एम् का रंगरेलियां मानाने का है नाम के अनरूप नीले फिल्मो के शौक़ीन ने वह सब कर दिया जो शर्मनाक ही नहीं अखबार जगत के लिए मुंह छुपाने जैसी है. इस नामी अंग्रेजी अखबार के जी एम् को पुलिस ने गायत्री नगर में पकड़ा और दबाव में छोड़ भी दिया krietivi संस्था के इस महिला को भी पुलिस ने छोड़ दिया . पिता लगाने वाली पुलिस ने क्यों छोड़ा यह सभी जानते है लेकिन इस अख़बार के रिपोर्टरों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है हालाँकि इस अखबार के हिंदी एडिसन के रंग - बिल्ला की चर्चा भी कम नहीं है छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही जिस तरह की पत्रकारिता चल रही है वह शर्मनाक है पत्रकार सरे राह मारे जा रहे हैं और अखबार मालिक कुत्तों की तरह रोटी के टुकड़ों पर ध्यान रख रहे हैं बेशर्मी तो यह है की अखबार का संपादक भी उसे अपना कर्मचारी मानाने से इंकार कर रहा है और पत्रकारों का हितचिन्तक बनाने वालों की बजाय ऑटो वाले आन्दोलन कर रहे हैं.मैनेजमेंट को तो अपनी अय्याशी से फुर्सत नहीं है चाहे अखबार का इमेज ख़राब हो जाये तजा मामला अंग्रेजी अखबार के जी एम् का रंगरेलियां मानाने का है नाम के अनरूप नीले फिल्मो के शौक़ीन ने वह सब कर दिया जो शर्मनाक ही नहीं अखबार जगत के लिए मुंह छुपाने जैसी है. इस नामी अंग्रेजी अखबार के जी एम् को पुलिस ने गायत्री नगर में पकड़ा और दबाव में छोड़ भी दिया krietivi संस्था के इस महिला को भी पुलिस ने छोड़ दिया . पिता लगाने वाली पुलिस ने क्यों छोड़ा यह सभी जानते है लेकिन इस अख़बार के रिपोर्टरों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है हालाँकि इस अखबार के हिंदी एडिसन के रंग - बिल्ला की चर्चा भी कम नहीं है छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही जिस तरह की पत्रकारिता चल रही है वह शर्मनाक है पत्रकार सरे राह मारे जा रहे हैं और अखबार मालिक कुत्तों की तरह रोटी के टुकड़ों पर ध्यान रख रहे हैं बेशर्मी तो यह है की अखबार का संपादक भी उसे अपना कर्मचारी मानाने से इंकार कर रहा है और पत्रकारों का हितचिन्तक बनाने वालों की बजाय ऑटो वाले आन्दोलन कर रहे हैं.मैनेजमेंट को तो अपनी अय्याशी से फुर्सत नहीं है चाहे अखबार का इमेज ख़राब हो जाये तजा मामला अंग्रेजी अखबार के जी एम् का रंगरेलियां मानाने का है नाम के अनरूप नीले फिल्मो के शौक़ीन ने वह सब कर दिया जो शर्मनाक ही नहीं अखबार जगत के लिए मुंह छुपाने जैसी है. इस नामी अंग्रेजी अखबार के जी एम् को पुलिस ने गायत्री नगर में पकड़ा और दबाव में छोड़ भी दिया krietivi संस्था के इस महिला को भी पुलिस ने छोड़ दिया . पिता लगाने वाली पुलिस ने क्यों छोड़ा यह सभी जानते है लेकिन इस अख़बार के रिपोर्टरों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है हालाँकि इस अखबार के हिंदी एडिसन के रंग - बिल्ला की चर्चा भी कम नहीं है
मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011
क्या छत्तीसगढ़ में शराब माफियाओं की चलती है ?
शराब-बंदी सहित विभिन्न मांगों को लेकर आज़ाद चौक स्थित गाँधी प्रतिमा के सामने धरना दे रहे लोगों को यह कहकर पुलिश ने हटा दिया की यह प्रतिबंधित छेत्र है जबकि धरना सिर्फ एक घंटे का है और यह रोज दिया जाना है . पुलिश का कहना था की धरना देना हो तो बुदापारा स्थित धरना स्थल में दो.
धरना देने वालों में दाऊ आनंद कुमार , गणपत सेन नवरतन गोलछा और कौशल तिवारी शामिल है
आज महात्मा गाँधी की प्रतिमा में माल्यार्पण के बाद जैसे ही माम्बत्ति जलाकर धरना पर बैठा गया पुलिश पहुँच गई और चले जाने का फरमान सुना दिया.
इस बात से दुखी आन्दोलन-कारियों ने कलेक्टर से मिलाने का निर्णय लिया है
सवाल यह है की क्या शराब के खिलाफ आन्दोलन दबाये जायेंगे और माफिया इस तरह से हावी हैं की एक घंटे का धरना बर्दाश्त नहीं किया जायेगा
आन्दोलन की अन्य मांग राजधानी निर्माण तब तक रोका जय जब तक छग के गावों में पानी शिक्छा व् स्वस्थ सुविधा न हो जाय, चुनाव की जमानत राशि १०० रुपये से ज्यादा न हो खेती की जमीनों का उपयोग न बदला जाय और सरकारी जमीनों का संरक्षण तथा विदेशो में जमा काले धन की वापसी शामिल हैं.
धरना देने वालों में दाऊ आनंद कुमार , गणपत सेन नवरतन गोलछा और कौशल तिवारी शामिल है
आज महात्मा गाँधी की प्रतिमा में माल्यार्पण के बाद जैसे ही माम्बत्ति जलाकर धरना पर बैठा गया पुलिश पहुँच गई और चले जाने का फरमान सुना दिया.
इस बात से दुखी आन्दोलन-कारियों ने कलेक्टर से मिलाने का निर्णय लिया है
सवाल यह है की क्या शराब के खिलाफ आन्दोलन दबाये जायेंगे और माफिया इस तरह से हावी हैं की एक घंटे का धरना बर्दाश्त नहीं किया जायेगा
आन्दोलन की अन्य मांग राजधानी निर्माण तब तक रोका जय जब तक छग के गावों में पानी शिक्छा व् स्वस्थ सुविधा न हो जाय, चुनाव की जमानत राशि १०० रुपये से ज्यादा न हो खेती की जमीनों का उपयोग न बदला जाय और सरकारी जमीनों का संरक्षण तथा विदेशो में जमा काले धन की वापसी शामिल हैं.
रविवार, 6 फ़रवरी 2011
पूर्ण शराब-बंदी को लेकर अखंड धरना ८ फरवरी से
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माता दाऊ आनंद कुमार कल ८ फरवरी से पूर्ण शराब-बंदी सहित विभिन्न मांगो को लेकर आज़ाद चौक स्थित महात्मा गाँधी कि प्रतिमा के सामने शाम ५ बजे से अखंड धरना पर बैठेंगे . धरना प्रतिदिन एक घंटे का होगा.
धरने कि प्रमुख अन्य मांग विदेशो में जमा काले धन कि वापसी , खेती कि जमीनों का उपयोग नहीं बदलने, सरकारी जमीनों का संरक्षण व् बंदरबांट बंद करने और छग के गाँवो के विकास व् सुविधा संपन्न के बाद ही नई राजधानी का निर्माण जैसे mudde shamil hai
बुधवार, 2 फ़रवरी 2011
भ्रष्ट, लालची, बेईमान और बेशरम ?
वैसे तो इन दिनों पुरे देश में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं.सवाल इसलिए भी उठाये जा रहें हैं क्योकि उन्हें उनकी जसव के बदले न केवल वेतन दिया जाता है बल्कि भरपूर भत्ता भी दिया जाता है इसके बावजूद वे जनसेवा की बजे अपना पेट भरने में ज्यादा रूचि रख रहें हैं.छत्तीसगढ़ में भी जनसेवा के नाम पर लुट मची है जिसे जन्हा मौका मिल रहा है वह लुटने में कोई कसार बाकि नहीं रख रहा है, छत्तीसगढ़ में सबसे भ्रष्ट , बेईमान , लालची और बेशरम जनप्रतिनिधि बनाने की होड़ मची हुई है और इस कम में भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व भी आगे है
वैसे तो इन दिनों पुरे देश में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं.सवाल इसलिए भी उठाये जा रहें हैं क्योकि उन्हें उनकी जसव के बदले न केवल वेतन दिया जाता है बल्कि भरपूर भत्ता भी दिया जाता है इसके बावजूद वे जनसेवा की बजे अपना पेट भरने में ज्यादा रूचि रख रहें हैं.छत्तीसगढ़ में भी जनसेवा के नाम पर लुट मची है जिसे जन्हा मौका मिल रहा है वह लुटने में कोई कसार बाकि नहीं रख रहा है, छत्तीसगढ़ में सबसे भ्रष्ट , बेईमान , लालची और बेशरम जनप्रतिनिधि बनाने की होड़ मची हुई है और इस कम में भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व भी आगे है.
छत्तीसगढ़ में इन दिनों किसानो के पैसों का गिफ्ट और उसमे भी भ्रष्टाचार का मामला सुर्ख़ियों में हैं लेकिन कोई भी नेता गिफ्ट लौटने तैयार नहीं हैं, लगता है जैसे मुफ्त-खोरी की आदत ने उनकी सारी नैतिकता को निष्ठुर बना दिया है उनमे इतनी भी शर्म नहीं बची है की वे मामले का खुलाशा होने के बाद गिफ्ट लौटा दे या उन्हें इस बात की चिंता भी नहीं है की लोग क्या कहेंगे वे शायद भूल गए हैं की जनता यदि इस मामले में सड़क पर आ गयी तो क्या होगा,उन्हें जनप्रतिनिधियों की पिटाई,चप्पल मरने की घटना भी यद् नहीं रहा यदि ऐसा ही चलता रहा तो जनता के पास क्या रास्ता होगा ? क्या बेशरम लिखाकर टांगने या जगह-जगह अपमान करने पर ही ये सुधरेंगे या इन्हें ठीक करने कोई और रास्ता निकला जायेगा . अब जनता ही तय करेगी की उसने किसे चुना है और छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा भ्रष्ट, लालची, बेईमान और बेशरम नेता कौन है ? वैसे हमने बता दिया है चावक-चौराहों पर भी नाम लिखे जायेंगे और यह कम जनता ही करेगी तभी शायद किसानो के पैसों का गिफ्ट लौटाया जायेगा या बड़े नेताओ को शर्म आएगी ?
वैसे तो इन दिनों पुरे देश में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं.सवाल इसलिए भी उठाये जा रहें हैं क्योकि उन्हें उनकी जसव के बदले न केवल वेतन दिया जाता है बल्कि भरपूर भत्ता भी दिया जाता है इसके बावजूद वे जनसेवा की बजे अपना पेट भरने में ज्यादा रूचि रख रहें हैं.छत्तीसगढ़ में भी जनसेवा के नाम पर लुट मची है जिसे जन्हा मौका मिल रहा है वह लुटने में कोई कसार बाकि नहीं रख रहा है, छत्तीसगढ़ में सबसे भ्रष्ट , बेईमान , लालची और बेशरम जनप्रतिनिधि बनाने की होड़ मची हुई है और इस कम में भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व भी आगे है.
छत्तीसगढ़ में इन दिनों किसानो के पैसों का गिफ्ट और उसमे भी भ्रष्टाचार का मामला सुर्ख़ियों में हैं लेकिन कोई भी नेता गिफ्ट लौटने तैयार नहीं हैं, लगता है जैसे मुफ्त-खोरी की आदत ने उनकी सारी नैतिकता को निष्ठुर बना दिया है उनमे इतनी भी शर्म नहीं बची है की वे मामले का खुलाशा होने के बाद गिफ्ट लौटा दे या उन्हें इस बात की चिंता भी नहीं है की लोग क्या कहेंगे वे शायद भूल गए हैं की जनता यदि इस मामले में सड़क पर आ गयी तो क्या होगा,उन्हें जनप्रतिनिधियों की पिटाई,चप्पल मरने की घटना भी यद् नहीं रहा यदि ऐसा ही चलता रहा तो जनता के पास क्या रास्ता होगा ? क्या बेशरम लिखाकर टांगने या जगह-जगह अपमान करने पर ही ये सुधरेंगे या इन्हें ठीक करने कोई और रास्ता निकला जायेगा . अब जनता ही तय करेगी की उसने किसे चुना है और छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा भ्रष्ट, लालची, बेईमान और बेशरम नेता कौन है ? वैसे हमने बता दिया है चावक-चौराहों पर भी नाम लिखे जायेंगे और यह कम जनता ही करेगी तभी शायद किसानो के पैसों का गिफ्ट लौटाया जायेगा या बड़े नेताओ को शर्म आएगी ?
सोमवार, 24 जनवरी 2011
छत्तीसगढ़ में अब तक के सबसे बड़े शराब-बंदी आन्दोलन की तैयारी
अखंड धरना में बैठेंगे दाऊ आनंद कुमार, कई और मांग भी शामिल
छत्तीसगढ़ में शराब खोरी की वजह से बाद रहे अपराध को देखते हुए दाऊ आनंद कुमार ने चिंता जताई है और महंगाई व् भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन करने का निर्णय लिया गया है . दाऊ आनंद कुमार का कहना है कि राज्य बनाने के दस वर्ष में अपराध ही नहीं भ्रष्टाचार भी बड़ा है हमने ऐसे राज्य कि कल्पना कतई नहीं कि थी इसलिए वे एक बार फिर राज्य के लोगों कि खुशहाली के लिए अखंड धरना पर बैठने का निर्णय लिया है.
इस आन्दोलन कि प्रमुख मांग छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराब-बंदी लागु करने के आलावा विदेशों में कला धन जमा करने वालों का नाम उजागर करने , चुनाव में जमानत राशि १०० रुपये से अधिक नहीं रखने, छत्तीसगढ़ में सरकारी जमीनों का संरक्षण तथा घोटाले बज शासकीय सेवकों को तत्काल बर्खाश्त करने जैसी मांग शामिल है.
दाऊ आनंद कुमार वाही आन्दोलन करी हैं जिन्होंने राज्य निर्माण के लिए तब तक धरना जरी रखा था जब तक राज्य नहीं बन गया , शुरुवात में राज्य निर्माण के अखंड धरने का सब उपहास उड़ाते रहे लेकिन आन्दोलन विरोधी विद्या-चरण शुक्ला ने भी आन्दोलन किया वाही राज्य निर्माण कि मांग करने वाली भाजपा ने भी आन्दोलन का समर्थन किया.
मार्च-अप्रैल में शराब ठेका को देखते हुए आन्दोलन कि तिथि शीघ्र घोषित कि जाएगी और इसका विस्तार भी पुरे प्रदेश व् देश में करने कि तैयारी है.
छत्तीसगढ़ में शराब खोरी की वजह से बाद रहे अपराध को देखते हुए दाऊ आनंद कुमार ने चिंता जताई है और महंगाई व् भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन करने का निर्णय लिया गया है . दाऊ आनंद कुमार का कहना है कि राज्य बनाने के दस वर्ष में अपराध ही नहीं भ्रष्टाचार भी बड़ा है हमने ऐसे राज्य कि कल्पना कतई नहीं कि थी इसलिए वे एक बार फिर राज्य के लोगों कि खुशहाली के लिए अखंड धरना पर बैठने का निर्णय लिया है.
इस आन्दोलन कि प्रमुख मांग छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराब-बंदी लागु करने के आलावा विदेशों में कला धन जमा करने वालों का नाम उजागर करने , चुनाव में जमानत राशि १०० रुपये से अधिक नहीं रखने, छत्तीसगढ़ में सरकारी जमीनों का संरक्षण तथा घोटाले बज शासकीय सेवकों को तत्काल बर्खाश्त करने जैसी मांग शामिल है.
दाऊ आनंद कुमार वाही आन्दोलन करी हैं जिन्होंने राज्य निर्माण के लिए तब तक धरना जरी रखा था जब तक राज्य नहीं बन गया , शुरुवात में राज्य निर्माण के अखंड धरने का सब उपहास उड़ाते रहे लेकिन आन्दोलन विरोधी विद्या-चरण शुक्ला ने भी आन्दोलन किया वाही राज्य निर्माण कि मांग करने वाली भाजपा ने भी आन्दोलन का समर्थन किया.
मार्च-अप्रैल में शराब ठेका को देखते हुए आन्दोलन कि तिथि शीघ्र घोषित कि जाएगी और इसका विस्तार भी पुरे प्रदेश व् देश में करने कि तैयारी है.
शुक्रवार, 21 जनवरी 2011
सुब्रत साहू को सरकार का संरक्षण , कांग्रेसी फिर चुप
सुब्रत साहू वैसे तो कई मामले में विवादस्पद रहे है इसके बाद भी उन्हें हर बार महत्वपूर्ण पदों पर बिठाया जाता रहा है . धमतरी कांड में तो उनकी नौकरी तक जाने की बात कही जाते रही है एक बिमा कंपनी को लाखों का फायदा पहुचने के अलावा उनके खिलाफ दवा छिडकाव में एक करोड़ के घपले का मामला है कहा जाता है की विपणन संघ में उनके कार्यकाल में दवा छिद्काया ही नहीं गया और एक करोड़ का भुगतान तक हो गया छत्तीसगढ़ सरकार एक बार फिर घपला उजागर होने के बाद आई ए एस सुब्रत साहू को बचाने का प्रयास कर रही है और पुरे मामले की लीपापोती में कई आई ए एस भी लग गएँ हैं.आश्चर्य का विषय तो यह भी है की इस मामले में कांग्रेसी भी खामोश होकर अपना बेशर्मी का परिचय दे रहें हैं ? पुरे मामले की स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद सुब्रत साहू पद पर बने हुए है और कांग्रेसी भी इतने बड़े घपले पर चुप है
इस सम्पूर्ण मामले का सबसे दुर्भाग्य जनक पहलू यह है की जिस दवा खरीदी में घपला किया गया है वैसा दवा का छिडकाव इस घटम के न तो कभी पहले हुआ है और न कभी बाद में ही दवा का छिडकाव ही कभी हुआ हा है यानि कहा जा सकता है की पैसा खाने पहली बार यंहा नए तरीके का इस्तेमाल हुआ
जय बोलो बेईमान की !!!!
इस सम्पूर्ण मामले का सबसे दुर्भाग्य जनक पहलू यह है की जिस दवा खरीदी में घपला किया गया है वैसा दवा का छिडकाव इस घटम के न तो कभी पहले हुआ है और न कभी बाद में ही दवा का छिडकाव ही कभी हुआ हा है यानि कहा जा सकता है की पैसा खाने पहली बार यंहा नए तरीके का इस्तेमाल हुआ
जय बोलो बेईमान की !!!!
बुधवार, 19 जनवरी 2011
महंगाई रोकने का उपाय ?
महंगाई को लेकर इन दिनों पूरा देश चिंतित दिखाई पद रहा है.सरकार से लेकर आम आदमी तक चौक - चौराहों में महंगाई के खिलाफ भाषण देते दिखलाई पड़ जातें हैं.लोगों का गुस्सा भी कंही - कंही दिखलाई पड़ रहा है.लेकिन सिर्फ बातें ही हो रही है ?
इसे रोकने का उपाय का उपाय पर कोई नहीं बोलता ?
हो सकता है मेरे इस उपाय से कोई भी आदमी सहमत न हो पर यही एकमात्र उपाय है ...
??????????????
हिम्मत के साथ ईमानदारी से सभी गलत कारनामों की खिलाफत करते हुए जोरदार ढंग से विरोध.जरुरत पड़े तो आमरण अनशन पर बैठ जाओ भले ही वह किसी के खिलाफ व्यक्तिगत क्यों न लगे.पर सच के लिए खड़े हो जावोगे तो महंगाई ही नहीं दूसरी समस्या भी दूर हो जाएगी .
इसे रोकने का उपाय का उपाय पर कोई नहीं बोलता ?
हो सकता है मेरे इस उपाय से कोई भी आदमी सहमत न हो पर यही एकमात्र उपाय है ...
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हिम्मत के साथ ईमानदारी से सभी गलत कारनामों की खिलाफत करते हुए जोरदार ढंग से विरोध.जरुरत पड़े तो आमरण अनशन पर बैठ जाओ भले ही वह किसी के खिलाफ व्यक्तिगत क्यों न लगे.पर सच के लिए खड़े हो जावोगे तो महंगाई ही नहीं दूसरी समस्या भी दूर हो जाएगी .
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