शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

रंगगेलियां मनाने वाले जीएम की छुट्टी

एक   अंग्रेजी अखबार के  जीएम जब गायत्री  नगर में रंगरेलिया मनाते पकडाया  तब -किसी  ने नहीं सोचा था कि मीडिया का  स्तर इस तरह से गिर जाएगा। दरअसल डांस क्लास चलाने वाली को अपना फोटो  छपवाने का  शौक कि  यह परिणिति  रही। इस मामले का  खुलासा जब वेदांत  भूमि डाट --काम में हुआ तो नागपुर में बैठे मालिक  नींद से जागे और  जीएम कि  नौकरी  गई। अब लोगों कि  नजर इसके  हिंदी संसकरण छपने वाले रंगा-बिल्ला पर है क्योंकि ब्लाक्मेलिंग से लेकर  शराब-शबाब के ये दोनों भी शौकिन है.

बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

दूसरे गांधी की अब जरूरत है।

पूरा देश मंहगाई और भ्रष्टाचार की चपेट में है मंहगाई की असली वजह भ्रष्टाचार है। अनाप -शनाप पैसे कमाने वालों की वजह से ही जरूरत की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं। कांग्रेस से लेकर तमाम राजनेतिक दल भ्रष्टाचार और मंहगाई के खिलाफ बोल रहे है। यहां तक कि न्यायालय ने भी भ्रष्टाचार पर चिंता जाहिर की है लेकिन न तो भ्रष्टाचार ही रूक रहा है।

आम आदमी भी भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने के सिवाय कुछ नही कर पा रहा है। ऐसे में अब एक गांधी जी की जरूरत है जो भ्रष्टाचार और मंहगाई के खिलाफ अपना सब कुछ छोड़कर सड़क पर सिर्फ एक लाठी लेकर निकल पड़े। भ्रष्टाचारियो के खिलाफ सामाजिक बहिस्कार जैसे आंदोलन खड़े हो और ऐसे लोगों की संपत्ति राजपत्र करने का कानून बनाने सरकार को मजबूर करे।

गांधी जी की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि मंहगाई के खिलाफ आंदोलन हो। क्या ऐसे व्यक्ति की अब जरूरत नही है जो पूरे देश के लोग एक आव्हान पर हफ्ता भर तक सब्जी खाना बंद कर दे। क्या इससे मंहगाई नही रूक जायेगी। या एक समय ही सब्जी खाने का प्रभावशील आव्हान किया जा सके।

दरअसल मंहगाई का विरोध की बजाय सरकार के विरोध वह भी राजनीतिक स्वार्थ के लिए किये जा रहे है इससे न तो मंहगाई कम हो रही है और न ही आप लोगों की पीड़ा। अनाप शनाप ढंग से पैसे कमाने वाले लोगों ने अनाप शनाप ढंग से खरीददारी कर मंहगाई बढ़ा दी है और सरकार से लेकर विपत्ति दल केवल हल्ला मचा रहे है क्योंकि उन्हें जनता से वोट चाहिए। यदि वोट की मजबूरी नहीं होती तो ये लोग कभी हल्ला ही नही मचाते।

क्या राजनैतिक दलों ने चुनाव में जीतने वाले को टिकिट देने की शर्त रखकर राजनैतिक दलों ने भ्रष्ट आचरण को बढ़ावा नही दिया है। सत्ता की भूख और सत्ता पाने अनाप शनाप कमाई अपराधियों को संरक्षण देने का खामियाजा आज पुरे देश को मंहगाई के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

छत्तीसगढ़ तो लुटेरों के लिए पनाहगार होते जा रहा है। भ्रष्टाचार चरम पर है और सरकार ऐसे लोंगों पर कार्यवाही करने की बजाय उसे बचा रही है। आम आदमी में शराब का जहर खोला जा रहा है। महयपवर्ग चावल योजना से त्रस्त है और पूरा प्रदेश आजक की स्थिति पर पहूंच गया है।

क्या अब भी आप लोगों में से किसी की ईच्छा नही है कि वह इस अराजक के खिलाफ गांधी जी बनकर खड़ा हो सके। विदेशी वस्त्रों की होली जलाने की तर्ज पर सब्जी न खाने की घोषणा करें। भ्रष्टाचारियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करें।

पंडित सुन्दरलाल शर्मा, खूब चंद बघेल, शहीद वीर नारायण सिंह की धरती एक बार फिर लहुलुहान है और एक बार फिर गांधी जी कि जरूरत है तो आइये इस आंदोलन को सफल बनायें।

सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

अंग्रेजी अखबार का जी एम् रंगरेलियां मानते पकडाया , पुलिस के हाथ - पावं फुले बगैर कार्रवाई के छोड़ा


छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही जिस तरह की पत्रकारिता चल रही है वह शर्मनाक है पत्रकार सरे राह मारे जा रहे हैं और अखबार मालिक कुत्तों की तरह रोटी के टुकड़ों पर ध्यान रख रहे हैं बेशर्मी तो यह है की अखबार का संपादक भी उसे अपना कर्मचारी मानाने से इंकार कर रहा है और पत्रकारों का हितचिन्तक बनाने वालों की बजाय ऑटो वाले आन्दोलन कर रहे हैं.मैनेजमेंट को तो अपनी अय्याशी से फुर्सत नहीं है चाहे अखबार का इमेज ख़राब हो जाये तजा मामला अंग्रेजी अखबार के जी एम् का रंगरेलियां मानाने का है नाम के अनरूप नीले फिल्मो के शौक़ीन ने वह सब कर दिया जो शर्मनाक ही नहीं अखबार जगत के लिए मुंह छुपाने जैसी है. इस नामी अंग्रेजी अखबार के जी एम् को पुलिस ने गायत्री नगर में पकड़ा और दबाव में छोड़ भी दिया krietivi संस्था के इस महिला को भी पुलिस ने छोड़ दिया . पिता लगाने वाली पुलिस ने क्यों छोड़ा यह सभी जानते है लेकिन इस अख़बार के रिपोर्टरों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है हालाँकि इस अखबार के हिंदी एडिसन के रंग - बिल्ला की चर्चा भी कम नहीं है छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही जिस तरह की पत्रकारिता चल रही है वह शर्मनाक है पत्रकार सरे राह मारे जा रहे हैं और अखबार मालिक कुत्तों की तरह रोटी के टुकड़ों पर ध्यान रख रहे हैं बेशर्मी तो यह है की अखबार का संपादक भी उसे अपना कर्मचारी मानाने से इंकार कर रहा है और पत्रकारों का हितचिन्तक बनाने वालों की बजाय ऑटो वाले आन्दोलन कर रहे हैं.मैनेजमेंट को तो अपनी अय्याशी से फुर्सत नहीं है चाहे अखबार का इमेज ख़राब हो जाये तजा मामला अंग्रेजी अखबार के जी एम् का रंगरेलियां मानाने का है नाम के अनरूप नीले फिल्मो के शौक़ीन ने वह सब कर दिया जो शर्मनाक ही नहीं अखबार जगत के लिए मुंह छुपाने जैसी है. इस नामी अंग्रेजी अखबार के जी एम् को पुलिस ने गायत्री नगर में पकड़ा और दबाव में छोड़ भी दिया krietivi संस्था के इस महिला को भी पुलिस ने छोड़ दिया . पिता लगाने वाली पुलिस ने क्यों छोड़ा यह सभी जानते है लेकिन इस अख़बार के रिपोर्टरों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है हालाँकि इस अखबार के हिंदी एडिसन के रंग - बिल्ला की चर्चा भी कम नहीं है छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही जिस तरह की पत्रकारिता चल रही है वह शर्मनाक है पत्रकार सरे राह मारे जा रहे हैं और अखबार मालिक कुत्तों की तरह रोटी के टुकड़ों पर ध्यान रख रहे हैं बेशर्मी तो यह है की अखबार का संपादक भी उसे अपना कर्मचारी मानाने से इंकार कर रहा है और पत्रकारों का हितचिन्तक बनाने वालों की बजाय ऑटो वाले आन्दोलन कर रहे हैं.मैनेजमेंट को तो अपनी अय्याशी से फुर्सत नहीं है चाहे अखबार का इमेज ख़राब हो जाये तजा मामला अंग्रेजी अखबार के जी एम् का रंगरेलियां मानाने का है नाम के अनरूप नीले फिल्मो के शौक़ीन ने वह सब कर दिया जो शर्मनाक ही नहीं अखबार जगत के लिए मुंह छुपाने जैसी है. इस नामी अंग्रेजी अखबार के जी एम् को पुलिस ने गायत्री नगर में पकड़ा और दबाव में छोड़ भी दिया krietivi संस्था के इस महिला को भी पुलिस ने छोड़ दिया . पिता लगाने वाली पुलिस ने क्यों छोड़ा यह सभी जानते है लेकिन इस अख़बार के रिपोर्टरों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है हालाँकि इस अखबार के हिंदी एडिसन के रंग - बिल्ला की चर्चा भी कम नहीं है 

मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

क्या छत्तीसगढ़ में शराब माफियाओं की चलती है ?

शराब-बंदी सहित विभिन्न मांगों को लेकर आज़ाद चौक स्थित गाँधी प्रतिमा के सामने धरना दे रहे लोगों को यह कहकर पुलिश ने हटा दिया की यह प्रतिबंधित छेत्र है जबकि धरना सिर्फ एक घंटे का है और यह रोज दिया जाना है . पुलिश का कहना था की धरना देना हो तो बुदापारा स्थित धरना स्थल में दो.
धरना देने वालों में दाऊ आनंद कुमार , गणपत सेन नवरतन गोलछा और कौशल तिवारी शामिल है
आज महात्मा गाँधी की प्रतिमा में माल्यार्पण के बाद जैसे ही माम्बत्ति जलाकर धरना पर बैठा गया पुलिश पहुँच गई और चले जाने का फरमान सुना दिया.
इस बात से दुखी आन्दोलन-कारियों ने कलेक्टर से मिलाने का निर्णय लिया है
सवाल यह है की क्या शराब के खिलाफ आन्दोलन दबाये जायेंगे और माफिया इस तरह से हावी हैं की एक घंटे का धरना बर्दाश्त नहीं किया जायेगा
आन्दोलन की अन्य मांग राजधानी निर्माण तब तक रोका जय जब तक छग के गावों में पानी शिक्छा व् स्वस्थ सुविधा न हो जाय, चुनाव की जमानत राशि १०० रुपये से ज्यादा न हो खेती की जमीनों का उपयोग न बदला जाय और सरकारी जमीनों का संरक्षण तथा विदेशो में जमा काले धन की वापसी शामिल हैं.

रविवार, 6 फ़रवरी 2011

पूर्ण शराब-बंदी को लेकर अखंड धरना ८ फरवरी से


छत्तीसगढ़ राज्य निर्माता दाऊ आनंद कुमार कल ८ फरवरी से पूर्ण शराब-बंदी सहित विभिन्न मांगो को लेकर आज़ाद चौक स्थित महात्मा गाँधी कि प्रतिमा के सामने शाम ५ बजे से अखंड धरना पर बैठेंगे . धरना प्रतिदिन एक घंटे का होगा.
धरने कि प्रमुख अन्य मांग विदेशो में जमा काले धन कि वापसी , खेती कि जमीनों का उपयोग नहीं बदलने, सरकारी जमीनों का संरक्षण व् बंदरबांट बंद करने और छग के गाँवो के विकास व् सुविधा संपन्न के बाद ही नई राजधानी का निर्माण जैसे mudde shamil hai

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

भ्रष्ट, लालची, बेईमान और बेशरम ?

वैसे तो इन दिनों पुरे देश में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं.सवाल इसलिए भी उठाये जा रहें हैं क्योकि उन्हें उनकी जसव के बदले न केवल वेतन दिया जाता है बल्कि भरपूर भत्ता भी दिया जाता है इसके बावजूद वे जनसेवा की बजे अपना पेट भरने में ज्यादा रूचि रख रहें हैं.छत्तीसगढ़ में भी जनसेवा के नाम पर लुट मची है जिसे जन्हा मौका मिल रहा है वह लुटने में कोई कसार बाकि नहीं रख रहा है, छत्तीसगढ़ में सबसे भ्रष्ट , बेईमान , लालची और बेशरम जनप्रतिनिधि बनाने की होड़ मची हुई है और इस कम में भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व भी आगे है
वैसे तो इन दिनों पुरे देश में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं.सवाल इसलिए भी उठाये जा रहें हैं क्योकि उन्हें उनकी जसव के बदले न केवल वेतन दिया जाता है बल्कि भरपूर भत्ता भी दिया जाता है इसके बावजूद वे जनसेवा की बजे अपना पेट भरने में ज्यादा रूचि रख रहें हैं.छत्तीसगढ़ में भी जनसेवा के नाम पर लुट मची है जिसे जन्हा मौका मिल रहा है वह लुटने में कोई कसार बाकि नहीं रख रहा है, छत्तीसगढ़ में सबसे भ्रष्ट , बेईमान , लालची और बेशरम जनप्रतिनिधि बनाने की होड़ मची हुई है और इस कम में भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व भी आगे है.




छत्तीसगढ़ में इन दिनों किसानो के पैसों का गिफ्ट और उसमे भी भ्रष्टाचार का मामला सुर्ख़ियों में हैं लेकिन कोई भी नेता गिफ्ट लौटने तैयार नहीं हैं, लगता है जैसे मुफ्त-खोरी की आदत ने उनकी सारी नैतिकता को निष्ठुर बना दिया है उनमे इतनी भी शर्म नहीं बची है की वे मामले का खुलाशा होने के बाद गिफ्ट लौटा दे या उन्हें इस बात की चिंता भी नहीं है की लोग क्या कहेंगे वे शायद भूल गए हैं की जनता यदि इस मामले में सड़क पर आ गयी तो क्या होगा,उन्हें जनप्रतिनिधियों की पिटाई,चप्पल मरने की घटना भी यद् नहीं रहा यदि ऐसा ही चलता रहा तो जनता के पास क्या रास्ता होगा ? क्या बेशरम लिखाकर टांगने या जगह-जगह अपमान करने पर ही ये सुधरेंगे या इन्हें ठीक करने कोई और रास्ता निकला जायेगा . अब जनता ही तय करेगी की उसने किसे चुना है और छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा भ्रष्ट, लालची, बेईमान और बेशरम नेता कौन है ? वैसे हमने बता दिया है चावक-चौराहों पर भी नाम लिखे जायेंगे और यह कम जनता ही करेगी तभी शायद किसानो के पैसों का गिफ्ट लौटाया जायेगा या बड़े नेताओ को शर्म आएगी ?



सोमवार, 24 जनवरी 2011

छत्तीसगढ़ में अब तक के सबसे बड़े शराब-बंदी आन्दोलन की तैयारी

अखंड धरना में बैठेंगे दाऊ आनंद कुमार, कई और मांग भी शामिल
छत्तीसगढ़ में शराब खोरी की वजह से बाद रहे अपराध को देखते हुए दाऊ आनंद कुमार ने चिंता जताई है और महंगाई व् भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन करने का निर्णय लिया गया है . दाऊ आनंद कुमार का कहना है कि राज्य बनाने के दस  वर्ष में अपराध ही नहीं भ्रष्टाचार भी बड़ा है हमने ऐसे राज्य कि कल्पना कतई नहीं कि थी इसलिए वे एक बार फिर राज्य के लोगों कि खुशहाली के लिए अखंड धरना पर बैठने का निर्णय लिया है.
इस आन्दोलन कि प्रमुख मांग छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराब-बंदी लागु करने के आलावा विदेशों में कला धन जमा करने वालों का नाम उजागर करने , चुनाव में जमानत राशि १०० रुपये से अधिक नहीं रखने, छत्तीसगढ़ में सरकारी जमीनों का संरक्षण तथा घोटाले बज शासकीय सेवकों को तत्काल बर्खाश्त करने जैसी मांग शामिल है.
दाऊ आनंद कुमार वाही आन्दोलन करी हैं जिन्होंने राज्य निर्माण के लिए तब तक धरना जरी रखा था जब तक राज्य नहीं बन गया , शुरुवात में राज्य निर्माण के अखंड धरने का सब उपहास उड़ाते रहे लेकिन आन्दोलन विरोधी विद्या-चरण शुक्ला ने भी आन्दोलन किया वाही राज्य निर्माण कि मांग करने वाली भाजपा ने भी आन्दोलन का समर्थन किया.
मार्च-अप्रैल में शराब ठेका को देखते हुए आन्दोलन कि तिथि शीघ्र घोषित कि जाएगी और इसका विस्तार भी पुरे प्रदेश व् देश में करने कि तैयारी है.