शनिवार, 3 अगस्त 2024

बीएसएसएल की इस योजना से जियों की मुश्किलें बढ़ी...

 बीएसएसएल की इस योजना से जियों की मुश्किलें बढ़ी...


जियों सहित अन्य निजी टेलीकाम कंपनियों की कीमत में बढ़ोतरी से बीएसएनएल के ग्राहकों में जबरदस्त वृद्धि हुई है और इससे उत्साहित बीएसएनएल ने ऐसी योजना पर काদ शुरु कर दिया है जिससे निजी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई है । कहा जा रहा है कि बीसएसएल की इस रणनीति का सबसे ज्यादा नुकसान अंबानी ग्रुप के जियों को हो रहा है।

ज्ञात हो कि जियो एयरटेल और वीआई द्वारा टैरिफ प्लान में बढ़ोतरी  करने का असर साफ दिखाई देने लगा है और निजी टेलीकॉम कपनी के ग्राहक लाखों की संख्या में बीएसएनएल का ग्राहक बन रहे हैं। बैठे बिठाए लाखों ग्राह‌क मिलने से उत्साहित बीएसएनएल ने 4जी सैचुरेशन प्रोजेक्ट के तहत तेजी से काम शुरु कर दिया है जिसके चलते गाँवों में बीएसएनएल को भारी सफलता मिल रही है जबकि शहरो में महंगाई का भारी असर है ।

अब बीएसएनएल ने अपने 4G सैचुरेशन प्रोजेक्ट के तहत कर्नाटक में एक खास माइलस्टोन हासिल किया है. कंपनी ने इस राज्य में 501 4G साइट्स को एक्टिव किया है. बीएसएनएल का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी गैप को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होता.

बीएसएनएल ने अपने एक आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पोस्ट करके इस बात की जानकारी दी है. 4G सैचुरेशन प्रोजेक्ट के तहत बीएसएनएल का लक्ष्य गांव-गांव तक हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी को पहुंचाना है.

बता दें कि बीएसएनएल की यह उपलब्धि सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत उनकी प्रगति को दर्शाती है. कंपनी ने पहले ही पूरे देश में 10,000 4G साइट्स को स्थापित किया है. इसके अलावा, बीएसएनएल ने ग्राहकों को मुफ्त 4G सिम अपग्रेड और मुफ्त 4GB डेटा भी प्रदान किया है.

बीएसएनएल के इस कदम सेछत्तीसगढ़ सहित कई राज्यो के  ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति को बढ़ावा मिलेगा. इससे वहां के स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अन्य क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का लाभ उठाने में मदद मिलेगी. बीएसएनएल अपने इस मुहीम को भारत देश के हरेक राज्य के हरेक गांव तक पहुंचाना चाहती है.

शुक्रवार, 2 अगस्त 2024

75 सालों से बसा कालोनी अचानक अवैध घोषित...

 75 सालों से बसा कालोनी अचानक अवैध घोषित...

पेरिस ओलंपिक में पदक दिलाने वाले का घर भी टूटेगा ...


सत्ता की अपनी ताकत है और उसका निर्णय कब किस पर कहर बनकर टूट जाये  कहना मुश्किल है। ऐसा ही एक मामला दिल्ली के सिविल लाईन में ख़ैबर पास स्थित कालोनी का है। 1950 से बसे इस कालोनी की जमीन को रक्षा मंत्रालय को दे दिया गया और अब मकान ख़ाली  करने का नोटिस जारी कर दिया गया, कोर्ट ने भी कालोनीवासियों की याचिका खारिज कर दी। इसने जद में ओलपिंक में कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले नेशनल पिस्टल शूटिंग कोच समरेश जंग का मकान भी आ गया है जिसे कभी भी गिराया जा सकता है। 

मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर और सरबजोत सिंह को कांस्य पदक जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले नेशनल पिस्टल शूटिंग कोच समरेश जंग का घर कभी भी गिराया जा सकता है। ओलंपियन समरेश जंग नई दिल्ली के सिविल लाइंस में खैबर पास इलाके में रहते हैं। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के भूमि और विकास कार्यालय (एलएनडीओ) ने समरेश जंग समेत अन्य कई निवासियों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में दावा किया गया है कि जिस जमीन पर खैबर पास कॉलोनी स्थित है वह रक्षा मंत्रालय की है और इसलिए अवैध है।

बीजिंग 2008 ओलंपिक में भाग लेने वाले जंग ने कहा कि एक ओलंपियन के रूप में, वह कम से कम एक सम्मानजनक विदाई की उम्मीद करते हैं, साथ ही मामले पर स्पष्टता के साथ कम से कम 2 महीने की मोहलत की अपील भी करते हैं। मीडिया को दिए इंटरव्यू में अर्जुन अवॉर्ड समरेश जंग कहते हैं कि मुझे नहीं पता कि ये तोड़फोड़ क्यों हो रही है। क्यों लोगों के घर गिराए जा रहे हैं? उन्होंने अचानक पूरी कॉलोनी को ही अवैध घोषित कर दिया। बीती रात बताया गया कि दो दिन के भीतर हमें जगह छोड़नी है। मेरा परिवार यहां बीते 75 साल से रह रहा है। 1950 से हम यहां के रहवासी हैं। हम कोर्ट गए थे और याचिका भी दायर की थी, लेकिन उसे नकार दिया गया।

समरेश ने गुरुवार रात एक्स पर पोस्ट किया, 'भारतीय निशानेबाजों के दो ओलंपिक पदक जीतने के बाद बेहद उत्साहित होकर मैं स्वदेश लौटा, लेकिन निराशाजनक खबर मिली कि मेरा घर और पूरा इलाका दो दिनों में ध्वस्त कर दिया जाएगा। जंग ने निष्कर्ष निकाला, 'एक ओलिंपियन और अर्जुन पुरस्कार विजेता होने के नाते कम से कम मुझे उम्मीद है कि समुदाय के साथ-साथ एक सम्मानजनक निकास होगा। मैं मामले पर स्पष्टता और उचित तरीके से खाली करने के लिए कम से कम दो महीने की अपील करता हूं।'

उन्होंने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, खेल मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ-साथ दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, भारतीय ओलंपिक संघ प्रमुख पीटी उषा, आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर और आईओए उपाध्यक्ष और साथी निशानेबाज गगन नारंग को भी टैग किया। शेफ डी मिशन के रूप में इस समय भारतीय दल के साथ पेरिस में हैं।

नया बंगला वाले नेताम...

 नया बंगला वाले नेताम...


छत्तीसगर में डबल इंजन सरकार के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने आनन फानन में नये बंगले में शिफ्ट क्यों हो गए, उससे पहले यह जान लेना जरूरी है कि पुराने बंगले में चल रहे खेल का क्या हाल है? हालाँकि चर्चा तो यह भी रही कि रामविचार नेताम का काम न तो मंत्रालय से चलता था, न ही पुराने बंगले से। काम एश्वर्या के बंगले से चलता था और जब काम एश्वर्या से ही चलना है तब इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है कि वे नये बंगले में रहे या पुराने में।

रामविचार नेताम अब भी उतने ही प्रभावशाली हैं जितने वे रमन राज में हुआ करते थे। आदिवासी एक्सप्रेस की बात को भूल भी जाये तब भी इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाले को कोई कैसे भूल सकता है।

लेकिन डबल इंजन सरकार में उनका अपना तरीका है। वोल्वों का शौक़ रखने वाले रामविचार नेताम ने जब से कृषि विभाग संभाला है उनके चहेते राकेश अग्रवाल की ज़िम्मेदारी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। कृषि विभाग के सप्लायरों और ठेकेदारों के लोक लुभावन खेल से भले ही किसानों की लुटिया डूब जाये लेकिन अपने को चाँदी मिलना चाहिए । अब नकली, मिलावटी और बनावटी का खेल भी जनचर्चा का विषय बन गया है।

कहा जाता है कि जिस वजह से नया बंगला सबसे पहले हथियाया गया है उस उद्देश्य के भी पूरा होने में संशय के बादल उम‌ड़‌ने लगे हैं।तब एश्वर्या ही गुड-गाड…।

जात न पूछो राहुल की...

जात न पूछो राहुल की... 


राहुल गांधी किस जाति के हैं यह बताये इसमे पहले यह जान लेना जरूरी है झूठ और अफवाह के आसरे नफरत की राजनीति में माहिर भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी पर सीधे हमला क्यों बोल दिया है। इस हमले से भाजपा की खीज साफ दिखाई भी देने लगी है। क्योंकि अनुराग ठाकुर की बातों को जब स्पीकर ने विलोपित कर दिया उसके बाद भी देश के प्रधानमंत्री ने अपने एक्स हेडल में इसे प्रदर्शित कर संसद की गरिमा का अवमानना करने से नहीं चूके।

दरअसल यह सारा मामला जातिय जनगणना से जुड़ा हुआ है जिसका भाजपा खुलकर समर्थन नहीं कर पा रही है। और मीडिल क्लास और पिछड़े वर्ग के बिखरते वोट ने उनके भीतर के हिन्दूत्व को हिला कर रख दिया है।

दरअसल हिन्‌दु वोटरों के ध्रुवीयकरण के आसरे सत्ता तक पहुंची भाजपा के लिए नरेंद्र मोदी के करिश्में से ज़्यादा असरदार कैग का वह फर्जी रिपोर्ट और लोक आयोग को लेकर अन्ना आन्दोलन का वह तूफान था जिसकी वजह से कांग्रेस को बदनाम करने की साज़िश रची गई । लेकिन लोगों को समझाया गया कि नरेंद्र मोदी के चेहरे के आसरे ही बीजेपी सत्ता में आ सकी।

अच्छे दिन आयेंगे के सपने 2047 के विकसित भारत तक आते आते इस कदर  रिसने लगा कि मीडिल और पिछड़ा वर्ग मोदी के हाथों से फिसलते गया।

२०१९ के परिणाम का ठसक, अहंकार, आत्ममुग्धता की हवा निकल गई तो इसकी वजह राहुल गांधी का वह भारत जोड़ो यात्रा थी जो कांग्रेस को वैचारिक रूप से भी बदलकर जाति जनगणना तक पहुंचा दिया। और यही जाति जनगणना अब भाजपा और संघ के कथित हिदुत्व के आधार को हिला कर रख दिया है।

जाति किसी जननेता की क्या होती है? यह सवाल इसलिए भी भाजपा ने उठाये हैं ताकि खिसकते जनाधार को बचा लें या मोदी सत्ता की करतू‌तों पर पर्दा डाल ले।

इसरे अलावा एक बड़ी वजह है राहुल गांधी की भारतीयता की वह छवि जो किसी भी जाति या धर्म से उपर हो चुका है। 

हालांकि भाजपा के स्लीपर सेल का गांधी नेहरू परिवार की जाति और धर्म को लेकर पहला वार नहीं है इससे पहले भी वे इसे हवा देते रहे है। 

लेकिन आमने - सामने मी स्थिति पहली बार बनी है। लेकिन भाजपा ने राहुल गांधी की जाति पूछने में देर कर दी क्योंकि अब राहुल गांधी की जाति भारतीयता हो चुकी है, पूरा देश धीरे-धीरे राहुल को स्वीकार कर चुका  है सिवाय संधी संस्कारित्रों के…?


इसके बाद भी यदि सवाल राहुल के दादा फिरोज गांधी के मुसलमान  होने की अफ़वाह को हवा दी जा रही है तो देश को यह जान लेना जारी है कि फिरोज गांधी मुसलमान नहीं पारसी थे, वे फिरोज खान लिखते थे और महात्मा गांधी के द्वारा उन्हें गोद लेने के बाद वे गांधी  कहलाने लगे। उनका अंतिम संस्कार भी इसी वजह से हिन्दू रिति रिवाज से हुआ।

पारसी जोरास्ट्रि‌यन धर्म का पालन करते हैं, जो आग को पवित्र मानकर उसकी पूजा करते हैं। और जिनके बारे में आचार्य चतुर सेन ने अपने उपन्यास वयम रक्षाम में इनको यमराज की जाति के वंशज माना है....

अब सवाल पंडित नेहरू के मुसलमान होने के अफवाह का है तो इस पर केवल वहीं लोग भरोसा कर सकते है जो आँखों में कट्टरता की पट्टी बांधे घूम रहे हैं।

दररूसल पूरा खेल या षड्यंत्र की वजह अंग्रेजों की चापलूसी के सच को विस्मृत कर देने की कवायद है और कुछ नही...!

बुधवार, 31 जुलाई 2024

मोदी सत्ता के इन रिकार्डो का कोई तोड़ नहीं...

 मोदी सत्ता के इन  रिकार्डो का कोई तोड़ नहीं...


हालांकि आम तौर पर कहा जाता है कि रिकार्ड तो टूटने के लिए ही बनता है लेकिन यदि रिकार्ड भयावकता का हो, कालिख भरा हो तो ऐसे रिकार्ड कोई नहीं तोड़‌ना चाहेगा कि इतिहास उन्हें खलनायक के रूप में दर्ज करे। लेकिन हाल में सोशल मीडिया में जो चर्चा है वह मोदी सरकार के अपने मंत्रियों की ही नहीं, उनके सहयोगियों की भी चर्चा जमकर हो रही है।

हावड़ा मुंबई मेल के दुर्घटना ग्रस्त होने के बाद लोगों का गुस्सा सोशल मीडिया के जरिये जिस तरह से सामने आया है वह किसी भी सरकार और उसके मंत्रियों के लिए बेचैन करने वाला है लेकिन बेशमी के इस दौर में नैतिकता की दुहाई देने का मतलब स्वयं का अपमान कराने वाली बात हो गई है।

मोदी की रिकार्ड तोड़ सरकार नामक शीर्षक से चल रहे विडियों और तस्वीर जमकर वायरल हो रहे हैं। जिसमें सबसे पहले नम्बर पर मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तस्वीर के आगे लिखा गया है 'पेपर लीक का रिकार्ड '

धर्मेंद्र प्रधान उड़ीसा राज्य से आते हैं और मोदी सरकार में दमदार मंत्री माने जाते हैं। 2014 के बाद अब तक 70 से अधिक बार पेपर लीक होने का मामला सामने आया है, इससे लोगों के डॉक्टर बनने का सपना ही नहीं टूटा बल्कि कितने ही युवाओं का भविष्य चकनाचूर हो गया, क्योंकि कई युवाको की नौकरी के लिए निर्धारित आयु सीमा ही समाप्त हो गई। यहीं नहीं सरकार्र ने परीक्षा फॉर्म बेचकर करोड़ों कमाये।

आपदा में अवसर का इससे सटिक उदाहरण और क्या होगा।

दूसरे नम्बर पर जो तस्वीर है वह नीतिश कुमार की है। बिहार के मुख्यमंत्री जो बीजेपी के सहयोग से चल रहे हैं। पुल गिरने का रिकार्ड। लेकिन मजाक है कोई उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा दे। दस से ज्यादा पुल तो  2023-24 में ही गिर गये।

तीसरे नम्बर पर मोदी सत्मार के रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव की तस्वीर है। एक दुर्घटना होते ही मंत्री पद से इस्तीफा दे देने की नैतिकता से इतर दर्जनों दुर्घटना के बाद भी यदि उनके माथे  पर शिकन नहीं होने का दावा किया जाता है तो यह इतिहास के पन्नों में बेशर्म राजनीतिज्ञ के रूप में जरूर दर्ज होगा। 

हर दुर्घटना के बाद रेलों में बेहतर सुविधा का दावा करने के अश्वनी यैष्णव के इस दौर में बुजुर्गो की सुविधा छिन लेने के साथ ही स्टेशन-पटरी, ट्रेन बेच देने या निजिकरण कर देने का खेल भी हुआ तो मालगाड़ी से अधिक कमाई के लिए सर्वाधिक यात्री ट्रेने भी इसी दौर में रद्द हुई।

वंदेभारत के चक्कर में भारत के ग़रीबों की जेबों पर डाका डालने का आरोप भी लगे।

तब देखना है कि आगे और कौन, कितने रिकार्ड तोड़‌ता है। 

सोमवार, 29 जुलाई 2024

बिजली दर में वृद्धि में भी अदानी…?

 सरकार का खेल, छोटे उ‌द्योग फेल


छत्तीसगढ़ में एकतरफ अडानी के पावर प्लाट को विस्तार देने कीखबर है तो दूसरी यहाँ के छोटे उद्योगों में संकट गहराता जा रहा है।

क्या इन दोनों खबरों में कोई ताल-मेल है, कहना मुश्किल है लेकिन जिस तरह से अडानी पावर प्लॉट के विस्तार के लिए होने जा रहे जनसुनवाई में पूरा प्रशासन जुटा हुआ है वह हैरान करने वाला है। तिल्दा क्षेत्र स्थित अदानी पॉवर प्लाट हो या रायगढ़ क्षेत्र का मामला हो। अदानी पॉवर प्लांट के विस्तार को लेकर जन‌सुनवाई में प्रशासन की ताकत के आगे जन विरोध को दबाने की जो खबरे आ रही है वहा कम चौकाने वाला नहीं है। पॉवर प्लोर के विस्तार के लिए किसान अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है और क्षेत्र में स्थित सरकारी जमीनों को दे दिये जाने की खबर सुर्खियों में है।

सत्ता बदलते ही जिस तरह से हसदेव से लेकर पॉवर प्लांटों तक  अदानी की योजनाओ के विस्तार की खबरें आ रही है, वह डबल इंजन वाली विष्णु देव साय सरकार की नियत पर सवाल खड़ा  कर रही है। 

तो दूसरी तरफ साय सर‌कार ने  सत्ता में बैठने के 6 माह के भीतर ही बिजली की दरों में जो बढ़ोतरी की है उसे लेकर प्रदेश के उद्योग संघों में नाराजगी की खबर ज़ोर पकड़ने लगी है।

उद्योग संघ ने बिजली दर में वृद्धि के खिलाफ मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा है लेकिन अभी तक इनकी माँगो पर विचार तक नहीं होने की खबर ने उद्योगों के बंद होने में खतरे को बढ़ा दिया है।

खबर यह भी है कि बिजली दर में बढ़ोतरी से परेशान कई उद्योगों ने अन्य विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है। स्पंज आयरन मैन्युफैक्चरर्स, रोलिंग मिल , मिनी स्टील प्लांट से जुड़े उद्योगपतियों में से कई लोग निजी बिजली कंपनियों की ओर रुख़ कर रहे हैं तो कुछ लोग धंधा ही बदल देने की बात कर रहे हैं।

री-रोलिंग मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी का कहना है कि एकाएक बिजली की कीमत बढ़ा देने से लागत तीन सौ से पांच सौ रूपये टन बढ़ गई है। तो मिनी स्टील प्लांट के महासचिव मनीष घुष्पड़ का कहना है कि यह उद्योगों के लिए गंभीर मसला है और उम्मीद है कि सरकार इस पर विचार करेगी।

इधर चर्चा इस बात की भी है कि निजी बिजली कंपनी को फायदा पहुंचाने ही बिजली की दरों में बढ़ोतरी की गई है, क्योंकि इस बढ़े दर से उद्योगों को बिजली करीब 7.60 रुपये प्रति मिल रही है और निजी कंपनी से ख़रीदने पर यह 6 रुपये पड़ेगी।

निजी कपनी को लेकर जब हमारी टीम ने पड्‌‌ताल की तो बताया गया कि अदानी से बिजली ख़रीदना सस्ता पड़े‌गा । यानी अदानी से बिजली खरीदने पर 6 रुपये प्रति यूनिट पड़े‌गा।

ऐसे में सवाल यही है अदानी को फायदा पहुंचाने कि क्या यह  कोई नया खेल है।

इधर बड़े हुए बिजली के दामों को लेकर युवा कांग्रेस ने बूढ़ा तालाब पर बने बिजली दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया ।प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बिजली बिल जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया. प्रदर्शन के दौरान युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा ने कहा कि '' प्रदेश की जनता बढ़े हुए बिजली के दामों से परेशान है. कांग्रेस की सरकार ने पूर्व में बिजली बिल हॉफ कर दिया था. जब बीजेपी की सरकार आई तो उसने बिजली बिल में लंबा चौड़ा इजाफा कर दिया.''कंपनी मालिकों ने शटडाउन का ऐलान किया है उसका समर्थन कांग्रेस ने किया है. जिला कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश दुबे ने कहा कि ''प्रदेश में जब तक भूपेश बघेल की सरकार रही है तब उद्योग नीति लाया गया था, उसके तहत 5 साल उद्योग फला फूला और यहां के उद्योगों ने बहुत अच्छा काम किया. पूर्व की सरकार में छत्तीसगढ़ की जीडीपी बढ़ी लेकिन 6 माह में ऐसा क्या हो गया कि इन उद्योगों को बंद कराने पर ये सरकार आमादा हो गई है.''

राहुल ने सुना दिया चक्रव्यूह…

 अदानी-अंबानी का जिक्र क्यों बर्दाश्त नहीं  कर पाती बीजेपी...


राहुल गांधी ने एक बार फिर मोदी सत्ता के दुखती  नस पर हाथ रख दिया। महाभारत के चक्रव्यूह को लेकर जैसे ही राहुल गांधी ने अदानी-अंबानी का जिक्र किया वैसे ही पूरा सदन शोर-शराबे में डूब गया। राहुल ने यहा तक कह दिया कि यदि अदानी अंबानी का नाम सदन में नहीं ले सकते तो कोई ऑप्शन दें। इस नामों का।

दरअसल बजट भाषण में राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार अपने 6 लोगों के साथ मिलकर जो चक्रव्यूह रचा है उसने किसान, मजदूर, मीडिल क्लास, छोटे उद्योगों को अभिमन्यु  की तरह फँसा  दिया है।


राहुल गांधी ने अग्निवीर को लेकर भी मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि बजट में इसका ज़िक्र नहीं है।राहुल गांधी ने देश में डर के माहौल की बात कही। राहुल गांधी ने महाभारत के जरिये बीजेपी पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने चक्रव्यूह का जिक्र करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि चक्रव्यूह को 6 लोग कंट्रोल कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि चक्रव्यूह में देश को फंसाया गया है। राहुल गांधी ने भाषण के दौरान सरकार पर हमला करते हुए कहा कि कहा कि डरो मत, डराओ मत।


'मंत्री, किसान, वोटर सब डरे हैं'

राहुल गांधी ने कहा कि आज मंत्री, किसान, वोटर, वर्कर सभी डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसके बारे में मैंने काफी सोचा और एक जवाब मैं प्रस्तावित करता हूं। हजारों साल पहले हरियाणा में कुरुक्षेत्र में एक युवा अभिमन्यु को 6 लोगों ने चक्रव्यूह में मारा था। फंसाकर मारा था। चक्रव्यूह के अंदर डर होता है, हिंसा होती है, और अभिमन्यु को चक्रव्यूह में फंसाकार मारा। राहुल ने कहा कि मैंने चक्रव्यूह के बारे में तोड़ी रिसर्च की, पता लगा कि उसका दूसरा नम पद्म व्यूह वो लोटस के शेप में होता है। 21वीं सदी में सर एक नया चक्रव्यूह तैयार हुआ है। वो भी लोट्स की शेप में है, उनका चिह्न पीएम अपनी छाती पर लगाकर चलते हैं। यही चक्रव्यूह किसान, मीडियम साइज बिजनेस के साथ हो रहा है, द्रोण, कृतवर्मा, शकुनी, कृपाचार्य, अश्वस्थामा, आज भी चक्रव्यूह के बीज में है 6 लोग हैं।


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Rahul Gandhi Speech: पूरा परीक्षा सिस्टम ही फ्रॉड, शिक्षा मंत्री कुछ समझ नहीं पा रहे... संसद में राहुल गांधी के बयान पर बवाल


संपत्ति के हक पर सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि किसी एक शख्स को देश की पूरी संपत्ति का हक रखने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि वित्तीय शक्ति, संस्थान, एजेंसी, सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स और तीसरा राजनीतिक कार्यकारी इस चक्रव्यूह का हार्ट है। राहुल ने कहा कि मेरी उम्मीद है थी कि इस बजट में इस चक्रव्यूह को कमजोर करेगा। किसान, मजदूर की मदद करने वाला होगा। इसकी नीयत जो है वो है बिग बिजनेस, राजनीतिक मोनोपली को मजबूत करने वाला है, एजेंसी को मजबूत करने वाला है।कुर्सी बचाओ बजट, सरकार बचाओ योजना... पढ़िए बजट को लेकर विपक्ष के नेताओं के रिएक्शन राहुल गांधी ने नोटबंदी, जीएसटी और टैक्स टेररिज्म के जरिए हमला किया गया। इसको रोकने के लिए बजट में आपने कुछ नहीं किया है। ये जो आपकी नीतियां है जो कोविड के समय बड़े बिजनेस की मदद की और छोटी बिजनेस को खत्म किया, उसके कारण आज देश के युवा को रोजगार नहीं मिल सकता है। एक युवा को रोजगार नहीं मिल सकते हैं।

पेपर लीक की हकीकत राहुल गांधी और अखिलेश, दोनों की मुश्किलें... शिक्षा मंत्री ने किस बात पर किया राहुल गांधी ने कहा कि बजट में आपने इंटर्नशिप प्रोग्राम है। आपने कहा कि सबसे बड़ी 5 कंपनियों में होगा। 99 फीसदी युवा को इस इंटर्नशिप प्रोग्राम से कोई लेना देना नहीं है। कांग्रेस नेता ने कहा कि मेन मुद्दा आज युवाओं का परीक्षा में पेपर लीक है। जहां भी हम जाते हैं वो कहते हैं बेरोजगारी है लेकिन पेपर लीक भी होता है। 10 साल में 70 बार हुआ है पेपर लीक।