रविवार, 8 सितंबर 2024

मोदी की मनमानी पीएम-श्री का पुलिंदा...



 मोदी की मनमानी 

पीएम-श्री का पुलिंदा...



प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नई  शिक्षा नीति  को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं शिक्षण सस्थानों में संघ के विचार धारा के साथ-साथ इतिहास के महत्वपूर्ण कालों को विलोपित करने जैसे आरोपों  के बीच नाम थोपने का विवाद है। भाजपाई राज्य तो इस शिक्षा नीति को बगैर चु-चपड़ के स्वीकार कर दिया है।और केंद्र से पैसा लेने पुराने स्कूलों को इस योजना में शामिल कर मोदी का फ़ोटो भी लगा रहे हैं।

नई शिक्षा नीति के तहत पीएम-श्री स्कूल का मॉडल तैयार किया गया है जिसमें केंद्र सरकार 60 फीसदी हिस्सा तभी देगा जब राज्य सरकार 40 फीसदी  हिस्सा देगा।

यानी राज्यों के चालीस फीसदी हिस्सा के बाद भी स्कूल पीएम श्री इसलिए कहलायेगा क्योंकि केन्द्र 60 फीसदी हिस्सा दे रहा है। और केंद्र तभी पैसा देगा जब राज्य पीएम श्री नाम रखेगा। मोदी का फ़ोटो लगाएगा।

इसे लेकर विवाद के चलते कई राज्यों को पैसा नहीं मिल रहा है लेकिन राज्यों के पास फंड की कमी है और स्कूलों को सुविधा सम्पन्न करना है तो केंद्र की बात यानी मोदी  की तस्वीर लगानी ही होगी।

छत्तीसगढ़ में तो पुराने स्कूलों को ही पीएमश्री योजना में शामिल कर पैसे लिये जा रहे है, अन्य भाजपा शासित  राज्यों में भी यही हाल है। यानी नया कोई पीएमश्री स्कूल  नहीं होगा, पुराने स्कूलों को ही नाम बदलकर पीएम श्री कर दिया जायेगा।वह भी सिर्फ ६० फ़ीसदी हिस्सेदारी के साथ।

पंजाब तो पहले ही क़र्ज़ में लदा है इसलिए वह पुराने स्कूलों को इस योजना में लाकर   राजी हो गया, दिल्ली की मजबूरी किसी से छिपी नहीं है । वह ऐसा राज्य है जहां की चुनी हुई सरकार पूरी तरह से केन्द्र पर निर्भर है हालिए वह तैयार हो गई। तो बाक़ी  राज्य भी मजबूरी में तैयार हो गये हैं ।


लेकिन अभी तक तमिलनाडू और बंगाल तैयार नहीं हुए है। वे प्रधानमंत्री मोदी का फोटो सिर्फ 60 फीसदी अंशदान में तैयार नहीं है। लेकिन कोई अपने फोटो के बगैर पैसा न दे तो इसे आप क्या कहेंगे। 

यदि नाम का केंद्र को इतना ही शौक है तो पूरा पैसा दें। राज्यों से 40 फीसदी राशि क्यों लिया जा रहा है ।


शनिवार, 7 सितंबर 2024

थम नहीं रहा भाजपाईयों का रेप कांड...

 बंगाल पर बवाल, राजकोट पर चुप्पी... 

थम नहीं रहा भाजपाईयों का रेप कांड...



कलकत्ता में जूनियर डाक्टर  के साथ बलात्कार के बाद हत्या का आरोपी गिरफ्तार हो गया, सीबीआई जांच शुरु हो गई, विधानसभा में कड़े कानून भी बन गये लेकिन बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है लेकिन दूसरी तरफ राजकोट में एक छात्रा के साथ हुई बलालार के मामले में बीजेपी शायद इस लिए चुप है क्योंकि बलालार करने वाले भाजपाई है और उन्हें ४० दिनों बाद भी पुलिस गिरफ्तार करने से बचती रही और कोर्ट के द्वारा जमानत खारिज करने के बाद आरोपी ने ख़ुद सरेंडर किया।

जबकि एक अन्य मामले में हिमाचल प्रदेश के भाजपा विधायक हंसराज के खिलाफ बलाकार की शिकायत लिखाने वाली युवती ने यह कहते हुए शिकायत वापस ले ली कि उसने बहकावे में शिकायत की थी। बाकि आप समझदार है कि कैसे वृजभूषण शरन सिंह के खिलाफ पास्को एक्ट हट गया था। दोनों ही मामलो को लेकर जो मीडिया रिपार्ट आई है उससे बीजेपी में हड़कंप मचा हुआ है लेकिन दोनों ही राज्यों में सरकार होने और आरोपियों के पार्टी से जुड़े होने के बाद यह सवाल सोशल मीडिया में तेजी से उठ रहा है कि आखिर भाज़पा के नेताओं पर इतने आरोप  क्यों. ? भाजपा के 12 सांसदों के नामो के अलावा बृजभूषण शरण सिंह, राम-रहीम को संरक्षण के  अलावा बलात्कारियों के स्वागत सत्कार की तस्वीरें एक बार फिर वायरल हो रही है। राजकोट और हिमाचल की खबरें कुछ इस प्रकार है

एक 21 साल की युवती के रेप के आरोप में 40 दिनों से फरार BJP कार्यकर्ता विजय रादड़िया ने आत्मसमर्पण कर दिया है. उसे जेल भेज दिया गया है). विजय, राजकोट के एक गांव में स्थित शैक्षणिक संस्थान का ट्रस्टी है. पीड़िता उसी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ती थी. कोर्ट के आदेश के बाद विजय को 9 सितंबर तक पुलिस हिरासत में रखा जाएगा

विजय की पत्नी दक्षा राजकोट ज़िला पंचायत की सदस्य हैं. उन्होंने इस मामले में अपने पति की गिरफ़्तारी पर रोक लगाने की मांगी की थी. लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. इसी के दो दिन बाद ये गिरफ़्तारी हुई है. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि जून 2023 में शैक्षणिक परिसर में 2 लोगों ने उसका रेप किया. इसके बाद विजय और गांव के पूर्व सरपंच मधु थधानी के ख़िलाफ़ 25 जुलाई को मामला दर्ज किया गया.

युवती ने बताया कि वो संस्थान में ग्रैजुएशन की पढ़ाई कर रही थी और कैंपस के एक हॉस्टल में भी काम कर रही थी. मधु थधानी और विजय रादड़िया की संस्थान के तत्कालीन मैनेजिंग ट्रस्टी से दोस्ती थी. इसीलिए वो अक्सर कैंपस में आया करते थे. FIR के मुताबिक़, जून 2023 से मधु और विजय ने कथित तौर पर उसे 'आंख मारना और मुस्कुराना' शुरू कर दिया. लगभग 15 दिन बाद मधु ने उसे फ़ोनकिया।

इसके बाद दोनों व्यक्ति कथित तौर पर उसके कमरे में गए, उसे धमकाया और बारी-बारी से उसके साथ रेप किया. FIR में युवती ने ये भी आरोप लगाया कि मधु ने कहा कि संस्थान के तत्कालीन मैनेजिंग ट्रस्टी को सब कुछ पता था. मधु यधानी ने इसके बाद भी उसका यौन उत्पीड़न किया. मई, 2024 में वो आगे की पढ़ाई के लिए सूरत चली गई. लेकिन मधु ने फिर भी उससे दो बार मुलाक़ात की, आख़िरी बार 12 जुलाई को.इस दौरान भी मधु यधानी ने उसका यौन उत्पीड़न किया और उसे धमकाया. उससे शादी करने के लिए कहा और चेतावनी दी कि वो उसे किसी और आदमी से सगाई नहीं करने देगा. मधु पेशे से किसान और बिल्डर है. मधु को 2 अगस्त, 2024 को गिरफ़्तार किया गया था. वो फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।

इस बीच, विजय रादड़िया फरार हो गया था. उसने 26 जुलाई को राजकोट डिस्ट्रिक्ट एंट सेशल कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की अर्जी दी थी. याचिका का विरोध करते हुए राजकोट ग्रामीण पुलिस ने अपने हलफ़नामे में कहा,आरोपी याचिकाकर्ता की पत्नी राजकोट ज़िला पंचायत की सदस्य हैं. वो ख़ुद राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है और इसलिए अग्रिम ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए. क्योंकि अगर उसे अग्रिम ज़मानत दी जाती है, तो वो गवाहों को प्रभावित करने और सज़ा से बचने की कोशिश करेगा.

इसी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 3 सितंबर को विजय रादड़िया की ज़मानत याचिका खारिज कर दी. फिर 5 सितंबर को उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया. उसे गिरफ़्तार किया गया और 6 सितंबर को कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने उसे 9 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

BJP की प्रतिक्रिया

इस बीच, राजकोट के BJP नेताओं का कहना है कि मामले के बारे में पार्टी हाईकमान को बताया जाएगा. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, BJP की राजकोट ज़िला इकाई के महासचिव हरेश हेरभा ने कहा,

चूंकि वो हमारे कार्यकर्ता हैं, इसलिए हम इस मामले की रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को देंगे. आगे की कार्रवाई के लिए उनसे मार्गदर्शन मांगेंगे.

वहीं, शैक्षणिक संस्थान के मौजूदा मैनेजिंग ट्रस्टी ने कहा कि वो जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं. विक्टिम को न्याय दिलाने के लिए पूरी शक्ति से काम किया जा रहा है. परिसर में 200 CCTV कैमरे लगे हैं और बाहरी लोगों को परिसर में एंट्री की अनुमति नहीं है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है

BJP विधायक पर पार्टी कार्यकर्ता की बेटी से नग्न तस्वीरें मांगने का आरोप, FIR के बाद पलट क्यों गई युवती?

हंसराज, हिमाचल प्रदेश के चंबा ज़िले के चुराह से तीसरी बार के विधायक हैं. वो हिमाचल प्रदेश विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और BJP की राज्य इकाई के वर्तमान उपाध्यक्ष भी हैं. उनके ख़िलाफ़ 9 अगस्त को चंबा के महिला पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज किया।

बाद में युवती ने कहा कि 'मानसिक तनाव' में और किसी के 'बहकावे' में आकर शिकायत दर्ज कराई है. 

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के BJP विधायक हंस राज (BJP MLA Hans Raj) के ख़िलाफ़ एक 20 साल की युवती की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है. FIR के मुताबिक़, हंस राज ने कथित तौर पर युवती को अश्लील मैसेज भेजे, नग्न तस्वीरें मांगी और धमकाया. बताया गया कि युवती एक BJP कार्यकर्ता की बेटी है. हालांकि, बाद में युवती ने फ़ेसबुक पर लाइव आकर बताया कि उसने 'मानसिक तनाव' में और किसी के 'बहकावे' में आकर शिकायत दर्ज कराई है.

शुक्रवार, 6 सितंबर 2024

न निलंबन, न एफ़आईआर-कड़ी कार्रवाई का प्रचार

 बच्ची का आंसू पोछने सत्त्रा व खेल...

न निलंबन, न एफ़आईआर-कड़ी कार्रवाई का प्रचार 


आलीवारा की छात्रा को जिन्दगी भर जेल की हवा खिलाने की धमकी देने वाले जिला शिक्षा अधिकारी अभय जायसवाल को लोक शिक्षण संचालनालय में सहायक संचालक के पद पर बिठा दिया गया।

इस आदेश को सरकार और उससे जुड़े लोग मुख्यमंत्री के कड़े तेवर के रूप में प्रचारित-प्रसारित कर रहे हैं लेकिन यही सरकार जब न्यायालय में ट्रांसफर को सजा से इंकार करती है तब सवाल यही है कि क्या अभय जायसवाल को सरकार ने कोई सजा दी ?

सिर्फ कुर्सी बदला गया, सजा तो उसे मिली ही नहीं । लेकिन सत्ता का अपना चरित्र है और दलाल मिडिया' का अपना चरित्र।

दो दिन पहले अलिवारा स्कूल के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी से मिलने पहुंचे थे जहाँ शिक्षा अधिकारी अभय जायसवाल ने बच्चों को जिन्दगी भर जेल की हवा खिलाने की धमकी देते हैं। सहमी बच्चियां इस धमकी से डरीसहमी बच्चियाँ  शिक्षा अधिकारी के कक्ष से रोते-बिलखते बाहर निकलती है तो उस पर पत्रकारों की नजर पड़‌ जाती है और पत्रकारो ने जब रोने की वजह पूछी तो बच्चियों ने सब कुछ साफ-साफ बता दिया कि किस तरह से अभय जायसवाल ने उन्हें जेल की हवा खिलाने की धमकी दे रहे हैं।

इस धमकी का वीडियो जब वायरल हुआ तो प्रशासन के हाथ-पांव फूल गये, लेकिन अभय जायसवाल के खिलाक कार्रवाई करने की बजाय उनका तबादला कर यह प्रचारित किया गया कि बच्ची के आंसू देख मुख्यमंत्री ने कड़े तेवर दिखाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को हटा दिया।

जबकि कड़ा तेवर तो तब माना जाता जब अभय जायसवाल को निलंबित किया जाता और एफ़ आई आर की जाती।

लेकिन सूत्रों  का कहना है कि लेन देन कर शिक्षा अधिकारी बनने-बनाने का खेल जब चलता हो तो फिर हटाने की प्रक्रिया को ही कड़ी कार्रवाई के रूप में प्रचारित किया जाता है। और इस मामले में भी यही हुआ। सच तो यह है कि जन आक्रोश से बचने का यह तरीक़ा है।


गुरुवार, 5 सितंबर 2024

सांप पालने का परिणाम...

 सांप पालने का परिणाम...


आप अपने घर साँप पालकर यह उम्मीद या आशा नहीं कर सकते कि वह आपको नहीं सिर्फ आपके पड़‌ोसी को ही काटेगा।

इसी तरह की बात 2011 में पाकिस्तान से हिलेरी क्लिंटन ने कही थी, तो पंचतंत्र की कहानी में आचार्य विष्णु शर्मा ने भी एक कहानी के माध्‌यम से कहा था कि सांप और बिच्छू को पालकर लम्बे समय तक इन्हें नियंत्रित नहीं किया जा सकता ।

लेकिन २०११ की बात को पाकिस्तान ने अनसुना कर दिया और आज पूरी दुनिया में न केवल पाकिस्तान आतंकवाद के पोषक के रूप में बदनाम है बल्कि उसकी समूची अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई है , बरबादी के कगार पर पहुंच गया है पाकिस्तान , तो इसकी बड़ी वजह उनका आतंकवाद के रूप में सांप को पालना ही है।

लेकिन भारत में भी पंचतंत्र की कहानियों को अनसुना करना शुरु कर दिया है तो उसका परिणाम धीरे-धीरे ही सही सामने आने लगा है। ताजा परिणाम तो आर्यन मिश्रा की गोरक्षकों के द्वारा की गई हत्या है जिस पर ने दुखी मन से आर्यन के पिता से कहा है कि देश के प्रधानमंची नरेद्र मोदी ने हत्या करने की छूट दे रखी है।

लेकिन इन सांपों ने इंस्पेक्टर सुबोध सिंह को उत्तरप्रदेश में भी डसा था। गौरक्षक के नाम पर गुण्डागर्दी और हत्या की फेहरिश्त है, सड़क से संसद तक हंगामा तो हो रहा है लेकिन यदि इनको पालने वाला ख़ुद सत्ता हो तो फिर पंचतंत्र की सीख का क्या मतलब रह जाता है।

बजरंग दल के नाम पर सड़‌कों में क्या कुछ नहीं हो रहा है तो विश्वहिन्दू परिषद के नाम पर मंदिरों में।

लेकिन एक बात जान लेना या समझ लेना जरूरी है कि इस देश में कानून का राज है और कानून के राज में न बुलडोजर के लिए जगह है और न ही मॉब लिंचिंग के लिए। और जो लोग धर्म की आड़ में पट्टी बांधे ऐसे अपराधों का समर्थन कर रहे है, वे अपने आर्यन या सुबोध के लिए तैयार रहें।


और कितनी बे-इज्जती…

 और कितनी बे-इज्जती…


गोस्वामी तुलामी दास ने कहा है कि आवत ही हर्षय नहीं 

नैनन नही सनेह, 

तुलसी तहां न जाइए

कंचन बरसे नेह ।

इतनी सी बात यदि स्वार्थ में अंधा हो चुके व्यक्ति को समझ में नहीं आता तो क्या ऐसा व्यक्ति खुद अपनी बेईज्जती के लिए जिम्मेदार नहीं है?

यह सवाल इन दिनों छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी नेता नंद कुमार साय के भाजपा प्रवेश को लेकर उठ रहा है तो यकीन मानिये कि अब भी ऐसे लोग हैं जो मान-सम्मान के नाम पर धन-दौलत और कुर्सी को लात मारने का माद्दा रखते हैं।

दरअसल नंद कुमार साय ने विधानसभा चुनाव से पहले उस भाजपा को लतिया दिया था जिस भाजपा ने उन्हें मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य का अध्यक्ष बनाया था, विधायक से लेकर सांसद तक बनवाया था तो केन्द्र में भी सर आंखों पर बिठाया था। राज्य बनने के बाद एकात्म परिसर में बृजमोहन अग्रवाल के समर्थकों की गुण्डईं के बाद भी नेता प्रतिपक्ष बनाया था। यानी भाजपा ने 'नंद कुमार साय - लखीराम की गाय' जैसे नारों का  परवाह नहीं कर कई महत्वपूर्ण पदों पर बिठाया था । लेकिन सत्त्रा जाते ही नंद‌कुमार साय ने भूपेश बघेल के प्रभामंडल में आकर पार्टी छोड़ दी।

मजेदार बात तो यह है कि कांग्रेस के हारते ही वे कांग्रेस भी इस आशा से छोड़े होंगे कि उन्हें भाजपा सिर माथे पर बिठा लेगी लेकिन सत्ता अब उन्हीं विष्णुदेव साय और पवन साय के हाथ में हैं जिन्होंने नंदकुमार को कांग्रेस में नहीं जाने के लिए मनाने घर तक गये थे ।

ऐसे में पिछले दरवाजे यानी मिस कॉल के जरिये भाजपा की सद‌स्यता हासिल करने की कोशिश पर यदि बवाल मचा है या चर्चा चल रही है तो इसकी वजह नंद कुमार की करतूत ही जिम्मेदार है।

कहा जाता है कि एक उम्र के पड़ाव में आकर यदि आद‌मी अपनी इज्जत का ध्यान न रखे तो छिछालेदर होना तय है।

कहते भी है कि आद‌मी अपनी बेइज्जती के लिए स्वयं जिम्मेदार होता है। अच्छा खासा पेंशन तो मिल ही रहा होगा तो फिर भी कोई अपनी बेइज्जती कराए तो इसे क्या कहा जाये ?

मंगलवार, 3 सितंबर 2024

पवन नहीं यह झोंका है...

 पवन नहीं यह झोंका है...


रिमोट से चलने वाली सरकार के रूप में बदनाम हो चुने साय सरकार कब तक मंत्रिमंडल का विस्तार करेगी, निगम-मंडल में नियुक्ति कौन करेगा के सवालों के बीच पवन साय अचानक भाजपा के संगठन मंत्री पारी नेताकों में सबसे ताकतवर शख्स नजर आने लगे है तो इसकी कई वजह है।

वैसे तो भाजपा में संगठन मंत्री की ताकत क्या होती है यह किसी से छिपा नहीं है, सारंग बंधु से लेकर सौदान सिंह और अब पवन साय की ताकत का अहसास पार्टी के नेताकों को भी है, लेकिन कहा जाता है कि सत्ता आने के बाद भी ताकतवर होने का ऐसा उदाहरण बहुत कम देखने को मिलता है कि लालबत्ती के लिए भी भीड़ मुख्यमंत्री से ज्यादा संगठन मंत्री जुटा ले। हालांकि कुछ लोग नीतिन नबीन और जामवाल के पास भी पहुंच रहे हैं लेकिन जब सब कुछ तय करने का ईशारा संगठन मंत्री की ओर किया जाए तो फिर क्यों न पवन साय को ही सत्ता केन्द्र मानकर भीड़ बढ़े।

और शायद यही वजह है कि बिल्डर्स से लेकर भ्रष्टाचारी हो या आपराधिक छवि वाले नेता ही क्यों न हो, सत्ता केन्द्र को ही खुश करने में लगे हैं।

ऐसे में यदि मंत्रालय में भी भाई साहब ! वाली संस्कृति का ही प्रभाव बढ़ रहा हो तो फिर अफसरों के काम काज पर इसका असर पड़‌ना तय है।

ऐसे में लालबत्ती की चाह में चक्कर पर चक्कर लगा रहे नेता अब पवन साय को खुश करने में लगे हैं लेकिन पवन साय को जानने वाले कहते हैं कि वे भी सायं सायं  में माहिर है।

सायं साये में माहिर तो सौदान सिंह भी थे लेकिन इतनी भीड़ वे भी नहीं खींच पाये थे, और चर्चा इसी बात की है कि जब इतनी भीड़ नहीं खींच पाने के बाद भी सौदान सिंह इतना खींच गये तो फिर भीड़ वाले कितना खींच रहे हैं। और शायद यही वजह है कि भाजपाई राजनीति में इन दिनों यह नारा जोरों से उछाला जा रहा है—-

  पवन नहीं यह झोंका है

 लालबत्ती का धोखा है...।

सोमवार, 2 सितंबर 2024

गजब पार्टनरशीप राजनीति में भी…

 गजब पार्टनरशीप 

राजनीति में भी…


ये अलग बात है कि गैर परिवार वाले याने जो परिवार नहीं चला पाते वे राजनीति में परिवार बाद का विरोध करते नहीं थकते, लेकिन इस राजनीति में शामिल लोग मौका मिलते ही अपनी संतानों को राजनै‌तिक लाभ दिलाने में कोई कसर भी नहीं छोड़ते ।

लेकिन छत्तीसगढ़ की राजनीति में पार्टनरशीप का खेल भी गजब है। कारोबार से लेकर राजनीति तक पार्टनरशीप का  ऐसा उदाहरण बहुत कम देखने को मिलेगा। बाक़ी और किस किस मामले में पार्टनरशीप चल रही है इसका खुलासा बाक़ी है।

रियल स्टेट के कारोबार में पार्टनरशीप के बाद अब रिटेल के क्षेत्र में पार्टनरी करने वाले राजीव अग्रवाल और छगनलाल मुंदडा को लेकर इन दिनों पार्टी के भीतर यदि खूब चर्चा चल रही है तो इसकी वजह साय सरकार की वह प्रतिक्षारत लालबत्ती की सूची है जिसमें एक पार्टनर का नाम धड़ल्ले से वायरल हो रहा है,। रमन सरवार में एक पार्टनर छ‌गन‌लाल मुंदड़ा को लालबत्ती भी मिल चुका है। उसे सीएसआईडीसी वा चेयरमेन बनाया गया था। इस बार वायरल सूची के 18 वे नम्बर में इसी पद पर राजीव आवाल का नाम है। भाजपाई चर्चा की बात करें तो दोनों के राजनैतिक जीवन में भी पार्टनर शीप का जबरदस्त समानता देखने को मिल रहा है। यानी दोनों पार्षद चुनाव लड़ चुके हैं। मुंदड़ा एक बार तो राजीव अग्रवाल दो बार । 

लेकिन वार्ड मेबर का चुनाव नहीं जीत पाने वाले इन दोनों पार्टरों का संगठन में भी प्रभाव कम नहीं है। दोनों ही पार्टनर भारतीम जनता पार्टी का रायपुर शहर का जिलाध्यक्ष भी बन चुके है।

दोनों ही विधानसभा का टिकिट मांगते रहे लेकिन मिला नहीं।

लालबत्ती वाले मामले में जो पार्टनरी की कमी अधूरी रह गई है क्या वह भी पूरा होने जा रहा है क्योंकि वायरल सूची तो यही बता रहा है।

दरअसल इस पार्टनरी में अभी छगन भारी पड़ गये है, लालबत्ती के मामले में। ऐसे में वायरल सूची ही असली हुई तो यह भी एक रिकार्ड ही होगा।