सरगुजा में उठी बगावत की नई आवाज –
क्या सत्ता के समीकरण बिगाड़ेंगे रवि भगत?
छत्तीसगढ़ के उत्तरी बेल्ट—सरगुजा और रायगढ़ अंचल से इन दिनों एक ऐसा राजनीतिक तूफान उठ रहा है, जिसकी गूंज आने वाले समय में रायपुर की सत्ता के गलियारों तक सुनाई देगी [00:11]। कभी भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश अध्यक्ष रहे एक युवा आदिवासी चेहरे ने अपनी ही सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं [00:22]।
हम बात कर रहे हैं रवि भगत की [00:57]। रवि भगत को पहले कारण बताओ नोटिस (Showcause Notice) थमाया गया, फिर पद से हटाया गया और अब लैलूंगा में 'साइकिल कांड' के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सलाखों के पीछे धकेल दिया गया है [00:35], [06:50]।
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या रवि भगत सिर्फ घटिया साइकिल या डीएमएफ (District Mineral Foundation) फंड का मुद्दा उठा रहे हैं, या फिर वे सरगुजा संभाग में एक नया आदिवासी शक्ति केंद्र बनने की राह पर हैं? [01:22]
1. बगावत की वजह: DMF फंड और जल-जंगल-जमीन का सवाल [03:42]
रवि भगत के इस कड़े रुख और बगावत की शुरुआत डीएमएफ (DMF) फंड के मुद्दे से हुई [03:42]।
क्या है नियम: नियम के मुताबिक, जिस इलाके में खदानें और उद्योग चल रहे हैं, वहाँ के आदिवासी प्रदूषण और तबाही झेलते हैं, इसलिए डीएमएफ का पैसा सीधे वहीं के प्रभावित गांवों के विकास पर खर्च होना चाहिए [03:42]।
सीधा सवाल: खुद इसी आदिवासी अंचल से आने वाले रवि भगत ने अपनी ही सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों से पूछ लिया कि तमनार और रायगढ़ के खनन प्रभावित गांवों का हक मारकर यह पैसा कहाँ भेजा जा रहा है? [04:04]
इसी सवाल के बाद राजनीति गरमा गई [04:28]। रायगढ़ का इलाका, जिसे राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी अपना गढ़ बनाने में लगे हुए हैं, वहाँ रवि भगत की इस आवाज ने सत्ता को असहज कर दिया [04:28], [04:43]। सत्ता के पावर सेंटर और रवि भगत के बीच ऑल इज नॉट वेल (All is not well) की खबरें छन-छन कर बाहर आने लगीं [04:57]।
2. कारण बताओ नोटिस से गिरफ्तारी तक का सफर [05:08]
अनुशासनहीनता का आरोप: जब रवि भगत ने डीएमएफ फंड और स्थानीय आदिवासियों की आवाज उठाई, तो पार्टी हाईकमान ने इसे अनुशासनहीनता मानकर शोकाज नोटिस जारी किया [05:08]।
इस्तीफा और सीधा संघर्ष: रवि भगत ने झुकने के बजाय पार्टी से इस्तीफा दे दिया और स्थानीय मुद्दों (पेड़ों की कटाई, घटिया सड़क निर्माण, और भ्रष्टाचार) को लेकर जनता के बीच चले गए [05:34], [06:21]।
साइकिल घोटाला विरोध और गिरफ्तारी: लैलूंगा में सरस्वती साइकिल योजना के तहत आदिवासी बच्चियों को दी जा रही घटिया साइकिलों के विरोध में जब रवि भगत अपने समर्थकों के साथ पहुँचे [06:50], तो प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया [07:01]।
मांग: रवि भगत ने सवाल उठाया कि आदिवासी बच्चियों को घटिया साइकिलें बाँटने के बजाय सरकार सीधे उनके खातों में फंड क्यों स्थानांतरित नहीं कर देती? [07:23]
गिरफ्तारी के वक्त रवि भगत ने आक्रामक अंदाज में कहा कि “2 तारीख का प्रस्तावित आंदोलन रुकेगा नहीं, हर व्यक्ति रवि भगत बनकर इस आंदोलन को सफल बनाएगा।” [06:41], [07:13]
3. सामाजिक और जनसांख्यिकीय गणित: उरांव बनाम कंवरा समीकरण [08:07]
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रवि भगत की गिरफ्तारी सिर्फ एक तात्कालिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह संदेश देने की कोशिश है कि सत्ता और नेतृत्व के खिलाफ उठने वाली आवाज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा [07:44]। हालांकि, यह दांव पासा उल्टा भी कर सकता है [08:07]:
1. आबादी का गणित: रवि भगत उरांव जनजाति से आते हैं [08:07]। छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या में उरांव समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 9% के आसपास है [08:41]।
2. मुख्यमंत्री का समीकरण: राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कंवर समुदाय से आते हैं, जिसकी जनसंख्या राज्य में लगभग 11% से अधिक है [08:20], [08:30]।
3. सरगुजा का जनमत: पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने सरगुजा संभाग की सभी 14 सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया था [06:10]। ऐसे में उरांव बहुल इलाकों में रवि भगत का उभार भाजपा के बने-बनाए समीकरणों को बिगाड़ सकता है [01:44], [08:07]।
4. क्या मैदानी अंचल के अमित बघेल की तर्ज पर उभरेगा सरगुजा का नया शक्ति केंद्र? [01:56]
मैदानी इलाकों में जिस तरह जय जोहार पार्टी/क्रांति सेना के अमित बघेल ने 'छत्तीसगढ़ियावाद' के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा दोनों की नींद उड़ा रखी है (और लंबे समय तक जेल में रहने के बाद हाल ही में जमानत पर छूटे हैं) [02:20], [02:45], ठीक उसी तर्ज पर क्या रवि भगत भी सरगुजा और रायगढ़ अंचल में एक नया क्षेत्रीय/आदिवासी शक्ति केंद्र बन जाएंगे? [01:56], [03:19]
छत्तीसगढ़ में अतीत का इतिहास यह भी दर्शाता है कि भाजपा की अनुशासित कार्यशैली में जो भी बड़ा चेहरा पार्टी लाइन से अलग हटा, उसका करियर धीरे-धीरे हाशिए पर चला गया [09:15]। चाहे बस्तर के सोहन पोटाई हों, सरगुजा संभाग के वरिष्ठ नेता नंदकुमार साय हों, या फिर ननकीराम कंवर—कई बड़े आदिवासी नेताओं को किनारे किया जा चुका है [09:33]।
निष्कर्ष: सत्ता के लिए नई सिरदर्दी या बगावत का अंत? [09:54]
रवि भगत का यह तेवर सिर्फ वित्त मंत्री ओपी चौधरी ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और रायगढ़-सरगुजा अंचल की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है [09:54]।
क्या रवि भगत जेल से बाहर आकर अपने संघर्ष को एक बड़े जन-आंदोलन में बदल पाएंगे [09:02]? या फिर अनुशासित संगठन की मशीनरी इस बगावत को शांत कर देगी? यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि सरगुजा की वादियों में उठा यह तूफान रायपुर की सत्ता को आराम से बैठने नहीं देगा [00:11]।
