गुरुवार, 21 अक्टूबर 2010

सात विभागों का सात हाल भ्रष्टाचार से हुआ बुरा हाल

सबसे ज्यादा विभाग वाले बृजमोहन के पौ बारह
 छत्तीसगढ़ के सबसे दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल विभागों के मामले में न केवल अन्य मंत्रियों से भारी है बल्कि उनके विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के चर्चे चौक-चौराहे पर सुनाई देते हैं। यही नहीं बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ कोई कांग्रेसी इसलिए भी आवाज नहीं उठाते क्योंकि उनकी जबरदस्त सेटिंग है। यही नहीं इस स्थिति के फायदे को लेकर अब भाई वाद के चर्चे भी आम होने लगे हैं।
चुनाव प्रबंधन ही नहीं अफसरों के साथ कांग्रेसियों के प्रबंधन में भी माहिर बृजमोहन अग्रवाल के पीडब्ल्यूडी सबसे भ्रष्ट विभाग के रुप में जाना जाता है। डामर घोटाले से लेकर उखड़ती सडक़ें इस विभाग की सच्चाई है जबकि हर ठेके में 20 फीसदी कमीशन से अब ठेकेदार भी परेशान है। पूरे प्रदेश में सडक़ों के निर्माण में जिस तरह से कमीशनखोरी की जा रही है उसकी जांच की जाए तो कई लोग जेल के सलाखों परनजर आएंगे। यही नहीं हर साल 50 करोड़ से उपर के बजट वाले पर्यटन विभाग का हाल भी सबसे बुरा है। पर्यटन के प्रचार प्रसार के नाम पर इन सात वर्षों में जितना भ्रष्टाचार हुआ उसकी अपनी ही कहानी है। यहां स्टेशनरी घोटाले से लेकर रोप वे तथा मोटल निर्माण में हुए घोटाले की कहानी भी सडक़ों पर सुनी जा सकती है। जबकि विवादास्पद अधिकारियों एम.जी. श्रीवास्तव और अजय श्रीवास्तव से मंत्री जी की गलबतियां ने आम लोगों को सोचने मजबूर करता है कि रावण इसलिए नहीं मरता है? शिक्षा विभाग का तो सर्वाधिक बुरा हाल है। केबिनेट के फैसलों का सर्वाधिक उल्लंघन इसी विभाग में हो रहा है। जबकि तवारिस जैसे आरोपियों की बहाली से बृजमोहन अग्रवाल स्वयं चर्चा में है जबकि यहां भी विवादास्पद अफसरों का जमावड़ा है। श्रीमती बाम्बरा, डॉ. एच.आर. शर्मा, जैसे लोग प्रमुख पदों पर बैठे हुए हैं। शिक्षा विभाग में पुस्तक खरीदी का मामला तो सर चढक़र बोलने लगा है।
नियम कानून को ताक पर रखकर जिस तरह से मनमाने कीमतों में पुस्तक खरीदी की गई और कमीशन खोरी हुई उसे लेकर दांतों तले उगली दबाया जा रहा है। संस्कृति विभाग में तो उनके लाड़ले भाई योगेश अग्रवाल के कारनामें समय-समय पर अखबारों में छपते रहे हैं। जबकि राज्योत्सव को तो अब लोग लुटोत्सव की संज्ञा तक देने लगे हैं। यही नहीं सबै भूमि गोपाल की कहावत भी खूब चर्चा में है। नामी बेनामी जमीनों के अलावा सिरपुर की जमीन पर पीडब्ल्यूडी का बाउण्ड्रीवाल इन दिनों चर्चा है। बृजमोहन अग्रवाल ने मंत्री बनने के बाद उनके भाईयों का पेट्रोल पंप और लोडिंग अनलोडिंग के धंधे में आने की खबर पर तो लोगों की प्रतिक्रिया असंवैधानिक होने लगी है। हालांकि मोहन परिवार का अनाज व्यवसाय के संगठनों में मोनोपल्ली रहा है। बड़ा भआई गोपाल अग्रवाल जहां सालों से दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष है तो छोटा भाई योगेश अग्रवाल राईस मिल एसोसिएशन में बैठे हैं। योगेश का फिल्मी पक्ष भी जबरदस्त विवादास्पद रहा है। जबकि उन्हें हाल ही में बृजमोहन अग्रवाल के ससुराल गोदिया में पुरस्कार भी मिला है। इधर बृजमोहन अग्रवाल की कांग्रेसियों से सेटिंग की चर्चा सदैव रही है कहा जाता है कि एक दूसरे को सहयोग करने के वादे ने ही बृजमोहन के खिलाफ कांग्रेसियों को चुप रहने मजबूर किया है। बड़े से बड़े नेता उनके खिलाफ बोलने से घबराते हैं और भटगांव चुनाव के परिणाम को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। बहरहाल बृजमोहन अग्रवाल के विभागों में भ्रष्टाचार चरम पर है और इस पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की भूमिका को लेकर आम लोगों में तीखी प्रतिक्रिया है।

बुधवार, 20 अक्टूबर 2010

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे...

कार्रवाई की बजाय पुलिस का संरक्षण
 छत्तीसगढ़ में अपराधियों के हौसले किस तरह से बुलंद है इसका ताजा उदाहरण ऋषभ काम्पलेक्स से लोगों का करोड़ों रुपया उड़ा लेने वाले फायनेंस कंपनी के मालिकों की दादागिरी से लगाया जा सकता है। अब तो दुकान मालिक सेट्टी ने अखबार को नोटिस भिजवाई है। उनका कहना है कि उनका फरार आरोपी से कोई लेना देना नहीं है जबरन उनका नाम घसीटा जा रहा है लेकिन हमें कर्मचारियों ने जो जानकारी दी है उसके बाद सारे सबूत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है।
उल्लेखनीय है कि करीब 15 दिन पहले ऋषभ काम्पलेक्स स्थित वैष्णव फायनेंस के द्वारा करीब चार सौ लोगों का करोड़ों रुपया लेकर फरार हो गया। इसकी खबर पर जब तहकीकात की गई तो पता चला कि यह आफिस न्यू शांति नगर निवासी मदनमोहन राये सेट्टी की है और वे लोग भी इस कंपनी से जुड़े हुए थे। मदन मोहन सेट्टी ने नोटिस में कहा है कि कमल सेट्टी वहां नौकरी करता था जबकि कर्मचारियों व पीडि़तों ने हमें जो शिकायत लिखकर दी है उसके मुताबिक कमल सेट्टी वहां पार्टनर था और उसके पास ही आफिस की चाबी व पैसे रहते थे जिस दिन आखरी बार आफिस बंद हुआ तब भी चाबी कमल सेट्टी के पास ही थी और उस दिन लगभग ढाई लाख रुपए भी आफिस में रहा है। यही नहीं इस मामले में पुलिस की भूमिका शुरु से ही संदेहास्पद रही है। जिस आरोपी शिवकुमार शर्मा को फरार बताया जा रहा है उससे पुलिस न केवल मुलाकात कर चुकी है बल्कि पुलिस पर यह आरोप भी है कि उसने साढ़े तीन लाख रुपए लेकर आरोपी को छोड़ दिया। मामूली अपराध में मकान मालिक के खिलाफ जुर्म दर्ज करने वाली पुलिस इस मामले में पीछे क्यों है? यही बात अनेक संदेहों को जन्म देता है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक मैादाहापारा थाना में अब तक चार दर्जन से अधिक पीडि़तों ने लिखित में शिकायत की है लेकिन पुलिस द्वारा जांच के नाम पर अपराध दर्ज नहीं करना भी पुलिस की करतूत को ही उजागर करता है। इधर हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों का दावा है कि यदि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए तो कई और मुजरिम भी पकड़ में आएंगे। इधर मदनमोहन राय सेट्टी ने पुलिस में शिवकुमार शर्मा द्वारा बगैर किराये दिए भाग जाने की शिकायत की है और उनके पुत्र व कुछ कर्मचारियों ने वेतन नहीं दिए जाने की शिकायत की है। वह भी घटना के दो दिन बाद।
बताया जाता है कि राजनैतिक एप्रोच के चलते मामले को दबाया जा रहा है जबकि आम लोगों से करोड़ों रुपए दबाने वाले पुलिस की करतूत की वजह से बेखौफ घूम रहे हैं। बहरहाल इस मामले के पीडि़त अब मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश में है जबकि इस मामले में दुकान मालिक-फायनेंस कंपनी व पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं ऐसे में देखना है कि इस मामले में जुर्म दर्ज कर गिरफ्तारी होती है या अन्य मामलों की तरह इसे भी भूला दिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ बुनकर संघ की जमीन पर बालकृष्ण अग्रवाल का कब्ज़ा हटाने रैली व् आमसभा




छत्तीसगढ़ के तमाम समाज के लोगो ने आज छत्तीसगढ़ बुनकर संघ की जमीन पर बालकृष्ण अग्रवाल का कब्ज़ा हटाने की मांग को लेकर रैली व् आमसभा की साथ ही यंहा से शराब दुकान हटाने की मांग भी की .समाज प्रमुखों ने इस दौरान सरकार की जमकर खिंचाई भी की

ट्रक ने साईकिल सवार लड़की को कुचल दिया






पचपेड़ी नका रायपुर के पास ट्रक ने साईकिल सवार १४ साल की लड़की शीतल  को कुचल दिया लड़की की मौके पर ही मौत हो गई .

मंगलवार, 19 अक्टूबर 2010

कांग्रेस के चर्चित दलाल

 शंकर नगर के इस दलाल का संबंध राजा महाराजाओं के अलावा भाजपा के नगर मंत्री से है। कांग्रेस की बुराई में माहिर इस दलाल को बड़े नेता भी अपने बगल में बिठाते हैं ताकि काम चलता रहे।
ऐसे ही कई दलालों की चर्चा कांग्रेस में आम रुप से सुनी जा सकती है। टिकरापारा क्षेत्र के एक दलाल की सांसद व नगर मंत्री से सेटिंग की बात हो या ब्राम्हणपारा के कुछ कांग्रेसियों की नगर मंत्री से सेटिंग की बात आम है। समता कालोनी के पास के वीसी के करीबी रहे अब जोगी के करीबी एक नेता की भी भूमिका सभापति चुनाव में दलाली की रही है। जबकि सुंदरनगर के शराब खोर पदाधिकारी का तो नाम ही दलाल रख दिया गया है। जबकि इसके खास फाफाडीह वाले को तो दलाल का दलाल कहा जाता है।
राजधानी के बाहर के भी कई नेताओं को दलाल के नाम से संबोधित किया जाता है। जबकि कई विधायक की भाजपाईयों से सेटिंग की चर्चा आम है। ऐसे में कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष वीसी-जोगी जैसा दमदार नहीं होगा तो स्थिति विकराल हो सकती है।

पार्टी में दलाल, कांग्रेस हुई हलाल

भाजपा नेताओं से संबंध, गुटबाजी

चरम पर, पैसा कमाना उद्देश्य
 कमजोर नेतृत्व गुटबाजी और पार्टी में दलालों की सक्रियता ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बदतर स्थिति में ला खड़ा किया है। हालत यह है कि कांग्रेस के नेताओं को भाजपा नेताओं के हार में दो-पांच हजार के चक्कर में लाईन लगाते देखा जा सकता है। अनुशासन का डर खत्म हो चुका है और संगठन में भाजपा की दलाली करने वालों का बोलबाला है?
छत्तीसगढ़ में इन दिनों नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कवायद चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा, किस गुट का होगा इसे लेकर सवाल चर्चा में है। छत्तीसगढ़ में मुख्यत: विद्याचरण शुक्ल, अजीत जोगी और मोतीलाल वोरा जैसे लोग गुटबाजी को हवा देने में लगे है। जिसकी वजह से आम कार्यकर्ताओं में आक्रोश है और वे चौक चौराहों में इन नेताओं की बुराई करते देखे जा सकते हैं।
वास्तव में देखा जाए तो कार्यकर्ताओं की फौज और जमीनी ताकत सिर्फ विद्याचरण और अजीत जोगी के पास है जबकि मोतीलाल वोरा के साथ जुडऩे की वजह उनका हाईकमान के साथ सिर्फ संबंध होना है? और पार्टी का छत्तीसगढ़ में बदतर स्थिति के लिए इस गुट का ही सबसे बड़ा हाथ है। हाईकमान से संबंधों के चलते जानबूझकर ऐसे लोगों को प्रदेश का नेतृत्व दिया गया जिनकी औकात अपने विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र तक ही रही और इन अध्यक्षों ने अपनी कुर्सी बचाने भाजपा के साथ मिलकर दलाली ज्यादा की है।
दूसरी ओर अजीत जोगी और विद्याचरण शुक्ल के साथ भी ऐसे लोग जुड़ते चले गए हैं जिनका काम सिर्फ व्यापार करना है ऐसे लोगों ने अपने नेताओं को भाजपा के खिलाफ यह कहकर नहीं खड़ा होने दिया कि इससे वोरा गुट मजबूत होगा? लगातार सत्ता से दूर रहने की वजह से कांग्रेस में बेचैनी तो है लेकिन सत्ता से मिल रहे फायदे ने इन्हें संघर्ष करने से रोका। सर्वाधिक बुरी स्थिति राजधानी व आदिवासी क्षेत्रों की है। सरकार की मनमानी के खिलाफ उतना ही बोला गया जितने में पैसा मिल सके? इस स्थिति के चलते आम कार्यकर्ताओं में भी यह चर्चा होने लगी है कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने भाजपा से सेटिंग कर ली है जबकि विधायकों व संगठन के पदाधिकारियों पर बिक जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
टिकिट वितरण से लेकर पद देने में जिस तरह से खरीदी बिक्री के आरोप लग रहे हैं उसकी वजह से भी कांग्रेस की स्थिति बदतर होते जा रही है। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जिस तरह से बड़े नेताओं में रूचि और आम कार्यकर्ताओं में बेरुखी देखी जा रही है इससे भी कांग्रेस की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। दरअसल जोगी वर्सेस ऑल की राजनीति ने कांग्रेस को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया है और भाजपा की दलाली में भी जोगी विरोधी गुट के लोग ही अधिक नजर आते हैं। इस स्थिति में यदि प्रदेश अध्यक्ष किसी दमदार नेता को नहीं बनाया गया तो एक बार फिर कांग्रेस हाशिये में चली जाएगी। वैसे कांग्रेस के हित में विद्याचरण शुक्ल या अजीत जोगी को ही प्रदेशाध्यक्ष बना दिए जाने की मांग निष्ठावान कांग्रेसी कर रहे है लेकिन वोरा गुट कभी नहीं चाहेगा कि उसके लोगों की दलाली बंद हो और प्रदेश से उसकी जमीन खिसके।
बहरहाल कांग्रेस में सक्रिय दलालों ने कांग्रेस को कहीं का नहीं छोड़ा है हालत यह है कि इन दलालों को लेकर आम लोगों में चर्चा है लेकिन बड़े नेताओं को भी ये दलाल ज्यादा पसंद आते हैं?

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी नारायण सामी को कालिख पोता









प्रदेश कांग्रेस के डेलिगेट्स की बैठक लेने आये  प्रभारी नारायण सामी को चार लड़कों ने कालिख पोत दी