सोमवार, 23 सितंबर 2024

कौन बचा रहा है अभिषेक पल्लव को...

 कौन बचा रहा है अभिषेक पल्लव को...

 


सारे गवाह, सारे सबूत चीख-चीख कर कह रहे हैं कि गृहमंत्री विजय शर्मा के विधानसभा क्षेत्र के लोहाराडीह में पुलिसिया बर्बरता उस रात चरम पर थी। घरों के दरवाजे तोड़‌कर आधी रात को पुलिस ने सोते से जगाकर या सोते हुए महिलाओं और बच्चों पर कहर बरसाया है। साहू समाज आन्दोलित है।  पूरे देश में इस घटना को लेकर साय सरकार के कथित सुशासन की थू-थू हो रही है लेकिन तत्कालीन एस पी अभिषेक पल्लव को न तो निलंबित किया गया और न ही पुलिसिया बर्बरता को लेकर ही कोई एफ आई आर हो दर्ज हुई।

क्यो ?

यह सवाल अब न केवल बहा होने लगा है बल्कि अब इस सवाल का जवाब भी तलाशा जा रहा है कि अभिषेक पल्लव को कौन बचा रहा है। यह सवाल इसलिए भी उठाये जा रहे हैं क्योंकि छत्तीसगढ़ में साहू समाज को भाजपा का वोट बबैंक माना जाता है और  इस वोट बैंक के खिसकने या नाराजगी को लेकर किस किमत पर अभिषेक पल्लव को बचाया जा रहा है यह सवाल चर्चा में है।

हालांकि कभी रमन सिंह पर साहू समाज की उपेक्षा का आरोप लगाकर भरे मंच से गरियाने वाले मोतीलाल साहू न केवल भाजपा में चले गये बल्कि राजधानी के ग्रामीण का विधायक भी है। ऐसे में साहू समाज में क्या आन्दोलन को लेकर दो फाड् या दो मत है?

कवर्धा यदि गृहमंत्री विजय शर्मा का  विधानसभा है तो रमन सिंह का भी गृह  है ऐसे में  दोनों नेतार्थों पर अभिषेक पल्लव को बचाने का आरोप खुलकर लगाया जा रहा है लेकिन दूसरी तरफ सुपर सीएम के रूप में चर्चित ओपी चौधरी का नाम भी कम सुर्खियों में नहीं है। और मुख्यमंत्री साय को लेकर जो चर्चा है वह रिमोट पर आकर समाप्त हो जाता है।

अब समझने नहीं बल्कि जानने बाली बात है कि साहू समाज कब तक अपने समाज को न्याय दिलाने अड़े रहेंगे १

रविवार, 22 सितंबर 2024

राजधानी में मोबाईल लुटेरों ने कर दी हत्या पर उठते सवाल

जंगलराज में तब्बिल होता छत्तीसगढ़…

राजधानी में मोबाईल लुटेरों ने कर दी हत्या



राजधानी के तेलीबांधा मेरिन ड्राईव जैसे व्यस्त इलाने में यदि सुबह-सुबह मोबाईल लुटेरे सक्रिय हो और वे हत्या तक को अंजाम देने आमादा  हो तब क्या यह मार्निंग वॉक करने वालों के लिए खतरे की घंटी नहीं है।

जब से डबल इंजन की सरकार सत्ता में आई है, छत्तीसगढ़  में अपराधियों के होसले बुलंदी पर है। दिल दहला देने वाली घटनाओं के बाद भी यदि सरकार सुशासन का विज्ञापन करें तो किर इसे सत्ता की बेशर्मी नहीं तो और क्या कहना चाहिए।

बलौदा बाजार से लेकर लोहारा डीह जैसे बड़ी घटनाओं के  बाद पुलिस का जो चरित्र  सामने आया है, वह सतनामी समान और साहू समाज भूला नहीं है लेकिन लगातार हो रही हत्या,लूट, चोरी की घटनाए भी क्या राजनैतिक साज़िश का हिस्सा है।

सप्ताह भी मुश्किल बीते होगे कि मेरीन हाइव में हत्या की यह दूसरी वारदात हो गई पहली वारदात को प्रेमी युगल की करतूत बता मामले पर परदा डालने वाली पुलिस अब इस पर परदा कैसे डालेगी।

सच तो यही है कि अपराधियों को धर्म के आधार पर पहचानने वाली सत्ता  के लोग ही संरक्षक बने है, कहा जाए तब भी गलत इसलिए नहीं होगा क्योंकि लोहाराडीह में जिस प्रशांत साहू की पुलिस ने हत्या की वह प्रशांत साहू के साथ खुद गृहमंत्री विजय शर्मा की तस्वीर है कार्यक्रम में नहीं, सीधे फोटो खिचाते । 


धर्म के नाम पर भाजपा ने किस तरह से गुण्डे बदमाशों के साथ गलबहिया की वह बजरंगदल को लेकर उठे विवाद से भी समझा जा सकता है। तब गृहमंत्री यदि इस्तीफा दे दे तब भी अपराधियों को विपक्ष में रहते  संरक्षण देने की धार्मिक अनुष्ठान का असर तो रहेगा ही। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ राजधानी रायपुर स्थित मरीन ड्राइव इन दिनों खूब सुर्खियों में है। यहां आए दिन कुछ ऐसी घटनाएं हो रही है, जो अब चिंता का विषय बन गई है। ताजा मामला सामने आ रहा है कि मरीन ड्राइव में युवक की हत्या कर दी गई है। ये युवक कोई और नहीं बल्कि अंबिकापुर कलेक्ट्रेट का ड्राइवर बताया जा रहा है

मिली जानकारी के मुताबिक, चाकू मारकर हत्या कर दी गई है। 3 अज्ञात बाइक सवार लुटेरों ने मोबाइल लूटने के विवाद में ड्राइवर की चाकू मारकर अंबिकापुर निवासी ईश्वर राजवाड़े की हत्या की है। बताया जा रहा है कि शासकीय काम से मृतक ईश्वर राजवाड़े अधिकारी को रायपुर लेकर आया था।

यह पूरा मामला .तेलीबांधा थाना इलाके का है। वहीं, इस मामले में अभी तीनों अज्ञात बाइक सवार लुटेरे फरार बताए जा रहे हैं। बता दें कि पिछले हफ्ते ही मरीन ड्राइव में दिनदहाड़े युवक ने अपनी प्रेमिका की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। प्रेमिका का गला काटने के बाद युवक अपना हाथ काटकर तालाब में कूद गया था। हालांकि इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

लूट के दौरान हुआ विवाद

मिली जानकारी के मुताबिक ईश्वर राजवाड़े अधिकारी को लेकर रायपुर आया था। तेलीबांधा तालाब के पास गाड़ी लगाया था, तभी तीन बदमाश मोबाइल लूटने लगे। इसी बीच विवाद हो गया। बीच बचाव के कारण 3 अज्ञात लुटेरों ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। युवक की मौत हो गई।

आरोपी गिरफ्त से बाहर

बताया जा रहा है कि चाकू मारने वाले 3 बदमाश फरार हैं। तेलीबांधा पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। वहीं फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीम जुट गई है। घटना स्थल के आस-पास की CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

शनिवार, 21 सितंबर 2024

वन नेशन-वन इलेक्शन : सब कुछ तहस नहस करने की कोशिश

  वन नेशन-वन इलेक्शन : सब कुछ तहस नहस करने की कोशिश


मोदी सरकार के केबिनेट ने वन नेशन-वन इलेक्शन पर मुहर लगा दी। हालांकि इसके संसद में पारित हो जाने की संभावना दूर-दूर तक नहीं है और यह मुद्‌दा भाजपा के पिछले तीन घोषणा पत्र की तर्ज पर आने वाले चुनाव के घोषणा पत्र का हिस्सा ही रहेगा।

सोचा था इस पर नहीं लिखूँगा लेकिन प्रशंसकों ने जब जोर देकर कहा तो इस पर हतने दिनों के बाद लिख रहा हूँ। तो इससे पहले बता दूं कि मोदी सरकार का  हमेशा ही ऐसी पॉलिसी लाती करने है जिसकी क़ीमत  इस देश को चुकानी पड़‌ती है, आमजन से लेकर अर्थ व्यवस्था को और समाज से लेकर संविधान तक को…।

चाहे वह नोटबंदी हो या जीएसटी , इलेक्ट्रोरोलर बांड हो या तीन कृषि क़ानून, आप कोई भी पॉलिसी को देख लीजिए, इसकी क़ीमत जनताऔर देश दोनों को चुकानी पड़ी है । 

इसलिए एक लाईन में कहे तो वन नेशन वन इलेक्शन का मतलब भी यही है- 

बाक़ी इसका प्रभाव क्या होगा इसे थोड़ा ऐसे समझ लें

यह पिछले तीन लोकसभा चुनावों में बीजेपी के घोषणापत्र का वादा रहा है। लेकिन यह कैसे लागू होगा, कब होगा और क्यों ऐसा हो रहा है? ऐसे कई सवाल हैं... 

कांग्रेस ने तो ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को संविधान के खिलाफ बताया है। 

पिछले साल मोदी सरकार ने लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और नगर निगमों के चुनाव एक साथ कराने के तरीके सुझाने के लिए कोविंद कमेटी गठित की थी।पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली इस कमेटी ने लोकसभा चुनाव से पहले इस साल मार्च में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें अलग-अलग संवैधानिक संशोधनों की सिफारिश की गई थी। इस कमेटी ने सिफ़ारिश की थी कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं और इसके 100 दिनों के अंदर स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जा सकते हैं... 

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बीजेपी बिल को कैसे कराएगी पास....??  बीजेपी के पास लोकसभा में 240 सीटें हैं। बहुमत के लिए उसे टीडीपी, जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) जैसे सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ता है। अब ऐसे भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि एक साथ चुनाव कराने की बीजेपी की योजना उसके सहयोगी दलों का समर्थन मिलेगा या नहीं...? 

अगर 2029 में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ होना है तो कई राज्य विधानसभाओं को उनके पांच साल के कार्यकाल से पहले भंग कर दिया जाएगा। यानी उनका कार्यकाल पूरा होने से काफी पहले चुनाव के लिए राज्य को तैयार होना होगा.. 

पिछले साल जिन 10 राज्यों में नई सरकारें बनीं उनमें 2028 में फिर से चुनाव होंगे और नई सरकारें लगभग एक साल या उससे भी कम समय तक सत्ता में रहेंगी। ये राज्य हिमाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, तेलंगाना, मिजोरम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान हैं.... 

उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में चुनाव 2027 में होने हैं यानी इन राज्यों में 2027 में बनने वाली सरकारें दो साल या उससे कम समय तक चलेंगी, इसी तरह पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और केरल में चुनाव 2026 में होने हैं। यहां ऐसी सरकारें होंगी तीन साल तक चल पाएंगी...

अथवा इन राज्यों का निर्धारित समय में चुनाव ना कराकर इनके कार्यकाल को 2029 तक बढ़ाना पड़ेगा.... 

केवल अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा में जहां इस साल चुनाव हो चुके हैं या हो रहे हैं पांच साल तक एक ही सरकार चल सकती है.... 

यानी अब आप सोचिए की इसकी वजह से क्या खेल होगा…।


शुक्रवार, 20 सितंबर 2024

प्रसादम में चर्बी की साजिश के पीछे की कहानी...

 प्रसादम में चर्बी की साजिश के पीछे की कहानी...


तिरूपति के श्री वेंकैंटेश्वर बालाजी के प्रसाद लड्‌डू में गाय की चर्बी और मछली के तेल की पुष्टि से संघ सहित कई हिन्दूवादियों का मुंह धीरे धीरे खुलने लगा है लेकिन वह क्या इतना खुल पायेगा कि इसकी सच्चाई से परदा उठ जाए?

इस सवाल का उत्तर जानने के लिए उस बाजारवाद के खेल को समझना जरुरी है जिस बाजार वाद के खेल में सत्ता सब  कुछ अपने मित्रों को सौंप देना चाहती है?

याद कीजिए नंदनी दूध को लेकर मचे बवाल में सरकार को अमूल को घुसाने के कद‌म को वापस लेना पड़ा  था । लेकिन चुनाव भर यह मुद्दा छाया रहा क्योंकि वह दक्षिण का राज्य है, हिन्दीभाषी राज्य नहीं जहाँ धर्म की पट्टी ने लोगों की सोचने  समझने की शक्ति ही छीन ली है।

मेरा दावा है कि अब आपके जेहन में यह बात आ गई होगी कि प्रसादम के लड्डू में गाय और सुअर की चर्बी कैसे आई । नहीं आई है तो दंतक्रांति में मछली की हड्‌डी का मामला कोर्ट कैसे पहुंचा वह ध्यान में रख ले।

और यदि अब भी नहीं आई समझ में तो इसे ऐसे जान ले करोड़ो रूपये कमाने वाले मंदिर ने जब नदिनी डेयरी के दो चार रुपये कीमत बढ़ाने पर दूसरी जगह से घी लेना शुरु किया तो नंदिनी डेयरी के कर्ताधर्ताओं ने कहा दो चार रूपयों के लिए था  यह न किया जाए।


अब इसे सुनील सिंह बघेल मध्यप्रदेश  के शब्दों में ऐसे समझ लिजिए

#तिरुपति के प्रसाद लड्डू जिस घी से बनता है उसमें  मछली का तेल.. सूअर.. बीफ की चर्बी मिले होने की खबर आपने पढ़ ली होगी.. चलिए इस दुखद कथा के पीछे कौन सी पटकथा शामिल है.. और उस पटकथा का एक हिस्सा मध्य प्रदेश भी है... कैसे..?? तो आइए उसे समझते हैं.. कुछ तथ्य आपके सामने रखता हूं..निष्कर्ष आप निकाल लीजिएगा..।

तो पहला तथ्य.. कभी इंदिरा गांधी के जमाने में शुरू हुए ऑपरेशन श्वेत क्रांति की पैदाइश थे, देश भर के सांची ,अमूल जैसे दुग्ध संघ.. इसमें सबसे प्रतिष्ठित दुग्ध सघों में से एक रोजाना 80 लाख लीटर दूध एकत्र करने वाला कर्नाटक दुग्ध संघ (#KMF) का ब्रांड #नंदिनी भी शामिल है..

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दूसरा तथ्य दिमाग में रखिए ..बड़ी कंपनियों की नजर काफी समय से ,डेयरी क्षेत्र के अरबों के कारोबार को दुहने पर है.. केंद्र सरकार लंबे समय से प्रयासरत है कि देशभर के सांची, नंदिनी जैसे स्थापित ब्रांड वाले सहकारी दुग्ध संघ, केंद्र के अधीन आ जाएं.. उनका संचालन नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के पास आ जाए। इसके पीछे तर्क..दावा वही "तपस्या में कोई कमी रह गई होगी " वाले 3 किसान बिल जैसा , यानी किसान हित का था..

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अब जरा कर्नाटक की एक पुरानी घटना याद दिलाता हूं..यूं तो 6-7 सालों से दुग्ध संघों को पहले बदहाल करो और फिर  हथियाने की रणनीति के तहत.. समय-समय पर हमले होते रहे हैं.. ऐसी ही हड़पने की अप्रत्यक्ष कोशिश कर्नाटक के नंदिनी ब्रांड के साथ भी की गई... लेकिन कर्नाटक की जनता का इस ब्रांड से जुड़ाव और भरोसा कितना होगा कि, इसकी भनक लगते ही जनता, स्थानीय राजनीतिक दल विरोध में आ गए.. यहां तक की #NANDANI यह चुनावी मुद्दा बन गया.. केंद्र को कदम वापस खींचने पड़े।

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अब आते हैं चौथे तथ्य पर ..तिरुमाला देवस्थान में बनने वाले लड्डू प्रसादम के लिए घी सप्लाई करने की जिम्मेदारी 40-50 सालों से सहकारिता क्षेत्र के कर्नाटक के नंदिनी घी के पास थी। तिरुपति में सालाना करीब 4.5 हजार मी.टन की की जरूरत होती है। यानी नंदिनी घी का एक बड़ा स्थाई ग्राहक।

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#nandani को हड़पने की कोशिश कर्नाटक की जनता और नेताओं ने असफल कर दी.. चोर दरवाजे से अमूल को घुसाने की कोशिश असफल हो गई। जाहिर है यह बात केंद्र में बैठे हुक्मरानों को नागवार गुजरी। नजरे टेढ़ी हुई। 40-50 सालों से तिरुपति को रियायती दामों पर घी सप्लाई कर रहे कर्नाटक दुग्ध संघ के हाथ से ,घी सप्लाई का ठेका निकाल कर निजी हाथों में पहुंचा दिया गया।

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 दरअसल जब दूध की कीमत बढ़ी तो घी की कीमत भी बढ़ी.. नंदिनी घी के भाव भी बढ़े.. लेकिन सिर्फ लड्डू बेचकर 500 करोड़ से ज्यादा कमाने वाले तिरुमाला देवस्थान ने, दो चार रुपए के पीछे घी सप्लाई का ठेका, निजी हाथों में दे दिया। तब भी कर्नाटक दुग्ध संघ के अध्यक्ष ने आगाह किया था कि  दूध के जो भाव है उसे देखते हुए, इतने कम भावों पर घी बनाना और बेचना संभव ही नहीं है.. यदि कोई देता है तो यह गुणवत्ता से समझौता करना होगा.. (ऐसी तमाम पुरानी मीडिया रिपोर्ट यूट्यूब पर मौजूद हैं).. खैर सनातन के इन नए तथाकथित रखवालो को गुणवत्ता से क्या लेना देना..?? नंदिनी से हजारों टन घी का ठेका छीनकर हुकुम उदूली का सबक तो सिखा दिया ना..!!

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अब आईए समझते हैं तिरुमाला देवस्थान के चर्बी वाले लड्डू , नंदिनी घी और इस घटना का प्रदेश से क्या रिश्ता है..?? सांची हमारा जाना पहचाना नाम है.. पीढियां सांची दूध पीकर बड़ी हुई है..। प्रदेश में सांची के 11000 गांव में फैली 33000 दुग्ध समितियां के नेटवर्क को हथियाने कोशिश तो शिवराज जी के जमाने से ही होने लगी थी। शायद वे असली खेल को समझते थे.. इसलिए केंद्र का खेल पूरी तरह सफल नहीं हो पाया.. लेकिन इसकी पूर्णाहुति, मौजूदा सरकार के कुछ दिन पहले लिए गए निर्णय से हो चुकी है.. 

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अभी तो किसान हित की आड़ में सांची की कमान नेशनल  डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के पास पहुंचने का रास्ता साफ हुआ है.. फिर यह कमान धीरे से किन हाथों मे  पहुंचेगी..?? इस को समाजशास्त्रीय राजनीति शास्त्र नहीं, बल्कि अपराध शास्त्र के नजरिए से समझने की कोशिश कीजिए.. पूरा असली खेल समझ में आ जाएगा।

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सांची को हड़पने की शुरुआत हो चुकी है ...लेकिन यह कर्नाटक की नहीं ,मध्य प्रदेश की जनता है.. वह तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से आए 'हिंदू खतरे में है' वाले मैसेज पढ़ने फॉरवर्ड करने.. हनुमान आरती बाबाओ के दरबार में हाजिरी लगाने.. 5 किलो राशन, लाडली बहना मे मगन है.. रही बात नपुंसक हो चुके विपक्षी दलों के नेताओं की तो, उनके पास ना तो इस षड्यंत्र को समझने की समझ है और ना ही साहस..हां जिस ईमानदार अधिकारी प्रमुख सचिव गुलशन बामरा ने समझा, उसे इस 'केंद्र शासित प्रदेश' ने रातों-रात बाहर का रास्ता दिखा दिया.. लूट पर मोहर लग चुकी है।

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तो हे #व्हाट्सएपिया_सनातनी ..!!यदि तुमने भी पिछले साल 2 सालों में तिरुपति का प्रसाद खाया है तो भी चिंता करने की जरूरत नहीं है... किसी पंडित ब्राह्मण से संपर्क करो.. हमारे धर्म में प्रायश्चित पूजा पाठ का विधान है.. वह तुम्हारा सनातन सुरक्षित कर देगा.. बस फिर क्या नए जोर से से जुट जाना अपने राष्ट्रीय कर्तव्य में.. भूल गए..??अरे वही काम.. हिंदू खतरे में जो ह…!

गुरुवार, 19 सितंबर 2024

तिरुपति प्रसादम् लड्‌डू में गाय की चर्बी हिन्दू‌वादियों की बोलती बंद हो गई...

 तिरुपति प्रसादम् लड्‌डू में गाय की चर्बी हिन्दू‌वादियों की बोलती बंद हो गई...


दुनिया के सबसे अमीर मंदिर माने जाने वाले तिरुपति स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर के प्रसाद‌म लड्‌डू में गाय की चर्बी, मछली का तेल और अन्य जानवरों की चर्बी के इस्तेमाल की पुष्टि हो जाने के बाद न तो देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का खून खौल रहा है और न ही हिन्दू‌वादी संगठनों की आस्था ही आहत हो रही है। 

यह आश्चर्यजनक स्थिति इसलिए बनी क्योंकि इस पूरे मामले में न तो कांग्रेस है और ही मुसलमान ।

दरअसल इस देश में हिन्दूवादियों का खून तभी खोलता है जब मुसलमान या कांग्रेस जुड़ा होता है वरना छोटे छोटे मासूम पहलवानों की छाती पर हाथ मारने वाला छिछोरा पहलवान बृजभूषण सिंह को पास्को एक्ट की धारा  हटवाने का मौका नहीं दिया जाता। और न ही उसके बेटे को बीजेपी टिकिट ही देती।

क्या है पूरा मामला हम बताये इससे इस देश में हिन्दुत्व के नाम पर पहले क्या चल रहा है। इस कहानी से समझने की कोशिश करते है

भेड़िये को मेमने को ख़ाना है

भेड़िया - मेमने तुम ने मुझे गाली दी 

मेमना - नहीं मैंने नहीं दी 

भेड़िया - फिर तुम्हारे बाप ने दी होगी 

मेमना - नहीं उसने भी नहीं दी 

भेड़िया - फिर तो तुम्हारे बाप के बाप ने दी होगी

मेमना - नहीं यह हो ही नहीं सकता 

भेड़िया- गाली तो दी है , साबित करों कि गाली नहीं दी है।

मेमना-कैसे साबित करूँ 

भेड़िया - साबित नहीं कर सकता ना ! तब तो गाली जरूर दी है और भेड़िया झपट कर मेमने को खा जाता है।

अच्छे दिन का नारा लगाते कट्टरपंथी जयघोष करते है संघ में ताकत है।अब, पशु आहार और दूध तथा दूध उत्पादों के परीक्षण पर केंद्रित एक निजी प्रयोगशाला एनडीडीबी कैल्फ की रिपोर्ट से पता चला है कि तिरुपति लड्डू बनाने में इस्तेमाल किए गए घी के नमूनों में विदेशी वसा शामिल थी, जिसमें पाम ऑयल, मछली का तेल, बीफ टैलो और लार्ड (सूअर के वसा ऊतक को निकालकर प्राप्त किया गया) शामिल था। रिपोर्ट की प्रति सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रवक्ता अनम वेंकट रमना रेड्डी ने साझा की।

रेड्डी ने कहा, "नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट प्रमाणित करती है कि तिरुमाला को आपूर्ति किए गए घी को तैयार करने में गोमांस की चर्बी और पशु वसा तथा मछली के तेल का उपयोग किया गया था, तथा एस मान केवल 19.7 है।"


चंद्रबाबू नायडू के आरोपों के बाद आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने भी इस मुद्दे को लेकर जगन मोहन रेड्डी सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर हमारा सबसे पवित्र मंदिर है। मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी प्रशासन ने तिरुपति प्रसादम में घी के बजाय पशु वसा का इस्तेमाल किया।"

इस बीच, वाईएसआरसीपी ने नायडू के आरोप को "दुर्भावनापूर्ण" करार दिया और कहा कि टीडीपी सुप्रीमो "राजनीतिक लाभ के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं"।

वाईएसआरसीपी नेता और राज्यसभा सदस्य सुब्बा रेड्डी ने आरोप लगाया कि नायडू ने अपनी टिप्पणियों से पवित्र तिरुमाला की पवित्रता और करोड़ों हिंदुओं की आस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

सुब्बा रेड्डी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "तिरुमाला प्रसादम के बारे में उनकी टिप्पणी बेहद दुर्भावनापूर्ण है। कोई भी व्यक्ति ऐसे शब्द नहीं बोलेगा या ऐसे आरोप नहीं लगाएगा।"

आंध्र प्रदेश कांग्रेस समिति (एपीसीसी) की अध्यक्ष वाईएस शर्मिला ने सीबीआई जांच की मांग की ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या मिठाई बनाने में वास्तव में पशु वसा का इस्तेमाल किया गया था।

शर्मिला ने कहा कि नायडू के आरोपों से करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं जो भगवान वेंकटेश्वर को पूज्य देवता मानते हैं।

शर्मिला ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "तुरंत एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए या सीबीआई से जांच कराई जाए कि क्या घी की जगह पशु वसा का इस्तेमाल किया गया था।"


बुधवार, 18 सितंबर 2024

वाराणासी में क्यों पीटा गया सं‌धी ..


 वाराणासी में क्यों पीटा गया सं‌धी ..

पूरा वीडियो भी देखिए…


 सबसे ताकतवर होने का दम भरने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बुल्डोजर चलाकर रोब जमाने वाले योगी आदित्यनाथ के वाराणासी में यदि संघ के नेता की जमकर धुनाई हो जाये तो फिर इसे क्या आने वाले राजनीति के लिए कोई संकेत माना जाना चाहिए।

झूठ और अफवाह के आसरे नफरत की राजनीति में माहिर लोगों ने इस कदर जहर फैला रखा है कि अब उनके कुकर्म खुलकर सामने आने लगे हैं।

ऐसा ही मामला वाराणासी में तब सामने आया जब प्रेगनेंट कर देने की धमकी पर योगी की पुलिस इसलिए खामोश रह गई क्योंकि धमकी देने वाला संधी था। और इसके बाद युवती और उसके परिजनों  ने इस संघी राजेश सिंह की वह हाल कर दी कि आज पूरा देश इस संधी पर थू-थू कर रहा है। पूरे मामले का विडियो वायरल होते ही हिन्दू वादियों को साँप सूँघ गया है।


मंगलवार, 17 सितंबर 2024

फिर मोदी के आगे संघ शरणागत…!

 फिर मोदी के आगे संघ शरणागत !


 नान बायोलाजिकल क्रियेचर के इस दौर में एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी ताकत का रौब संघ को  दिखा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रत्यक्ष रुप से आलोचना करने में लगे संघ प्रमुख मोहन भागवत  की लाचारी के कई किस्सों के बीच अब जो क़िस्सा सामने आया है । उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी किसी और के लिए नान बायोलाजी हो  न हो, संघ के लिए तो है ही।

दरअसल लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद जिस तरह से संघ प्रमुख हमलावर थे उसे देखते हुए  स्वयंसेवकों और मोदी विरोधियों में नए तरह की आशा की उम्मीद जगी थी। और जब केरल में आयोजित बैठक  में भाजपाध्यक्ष जेजी नड्‌डा पहुंचे थे तो यह माना जा रहा था कि संघ अब मोदी सत्ता को कड़ा संदेश देगी। लेकिन कहा जाता है कि जेपी नड्‌डा ने ही मोदी का कड़ा संदेश सुनाकर मोहन भागवत की  बोलती बंद कर दी।

सूत्रों की माने तो जेपी नड्डा ने साफ तौर पर कह दिया कि बग़ैर सत्ता के संघ  का कोई मतलब नहीं रहेगा इसलिए आलोचना करने की बजाय अब तक बीजेपी के लिये जिस ताह से संघ काम करती रही है वैसा ही करे। यहीं नहीं राज्यों के चुनाव में भी संघ के लोगों को सक्रिय बनाने की रूपरेखा तैयार कर ले। और अपनी पूरी ताक़त लगाये।

कहा जाता है कि मोदी के इस स्पष्ट संदेश ने संघ प्रमुख को सकते में ला दिया है, क्योंकि एक तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लगातार हमले से स्वयंसेवकों में घबराहट है और ऐसे में यदि मोदी ने भी हाथ खींच लिया तो मुश्किल बढ़ सकती है । इसलिए इस संदेश के बाद अब संघ ने बैठकों का सिलसिला शुरु करते में ही अपनी भलाई मानकर हरियाणा में वनवासी कल्याण आश्रम की बैठक तय कर ली है। जबकि हरियाणा में आदिवासियों की जनसंख्या क्या  है वह भी अच्छी तरह से जानते है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के तीन दिवसीय सम्मेलन का हरियाणा के समालखा में आयोजन होगा। इस सम्मेलन को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण के प्रचार प्रमुख प्रमोद पेठकर ने बताया कि इसमें करीब 80 जनजातियों को बुलाया गया है। इसमें दो हजार लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।मोद पेठकर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय सम्मेलन का 20, 21 और 22 सितंबर को हरियाणा के समालखा में आयोजन किया जाएगा। इसमें 80 जनजातियों को बुलाया गया है, जो अपनी पूजा-पद्धति को सामने रखेंगे। इसमें पूरे भारत के एकता के दर्शन हो पाएंगे। हम चाहते हैं कि समाज तक जनजातीय जीवन के गौरवपूर्ण पूजा-पद्धति को पहुंचाया जाए।