राजनीति का अजब रंग: जब अपनों ने मोड़ा मुंह, तो विरोधियों ने बनाई ढाल!
राजनीति के शतरंज पर कौन कब मोहरा बन जाए और कौन शह दे दे, यह कहना मुश्किल होता है। छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला दृश्य देखने को मिल रहा है [00:00]। रायपुर से लगातार आठ बार विधायक रहे और वर्तमान सांसद बृजमोहन अग्रवाल [00:07], जिन्हें कभी प्रदेश का सबसे असरदार और कद्दावर नेता माना जाता था, आज अपनी ही पार्टी और सरकार में अलग-थलग पड़ते दिखाई दे रहे हैं [02:51]।
अजीब विडंबना यह है कि जिस नेता की मदद और रहमों-करम पर दर्जनों राजनीतिक करियर खड़े हुए, आज वे संकट के समय चुप्पी साधे बैठे हैं [01:07]। वहीं दूसरी ओर, जीवन भर जिन कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ उन्होंने राजनीतिक लड़ाई लड़ी, वे आज उनके समर्थन में ढाल बनकर खड़े हैं [01:18]।
विवाद की चिंगारी: IAS अफसर से तल्खी और लोकसभा में शिकायत
पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा जनता के कामों के लिए लिखे गए पत्रों को लेकर प्रशासनिक उपेक्षा की बात सामने आई [02:02]। जब उन्होंने मुख्यमंत्री सचिवालय में इसकी शिकायत की, तो आईएएस अधिकारी अमित कटारिया के साथ उनकी बातचीत कहासुनी में बदल गई [02:22]। आरोप है कि अफसर के तीखे रवैये से आहत होकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल को लोकसभा में विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) की शिकायत दर्ज करानी पड़ी [00:18]।
पार्टी के भीतर सन्नाटा: क्या यह सत्ता का डर है या रणनीतिक किनारा?
सांसद बृजमोहन अग्रवाल के इस स्टैंड के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पूरी पार्टी और संगठन उनके साथ खड़ा होगा [00:43]। लेकिन इसके उलट, भाजपा संगठन और सरकार में बैठे दिग्गजों ने साध ली है चुप्पी [01:46]।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता के नए समीकरणों के चलते कोई भी नेता अनुशासन का डंडा चलने के डर से बृजमोहन अग्रवाल के समर्थन में बयान देने का जोखिम नहीं उठाना चाहता [03:12]। चर्चाएं तो यह भी हैं कि प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी जैसे दिग्गजों का वरदहस्त प्राप्त है, जिसके कारण नेता खुलकर सामने आने से बच रहे हैं [03:47]।
विरोधी बने ढाल: कांग्रेस ने उठाया प्रशासनिक अराजकता का मुद्दा
एक तरफ जहां अपनों ने मुंह फेर लिया है, वहीं कांग्रेस नेता इस मुद्दे पर पूरी ताकत से बृजमोहन अग्रवाल के समर्थन में उतर आए हैं [01:18]।
भूपेश बघेल का हमला: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि जब राज्य की कमान नागपुर और दिल्ली से संचालित होगी, तो चुने हुए जनप्रतिनिधियों का ऐसा अपमान होना स्वाभाविक है [05:27]।
डॉ. शिव डहरिया की आपत्ति: पूर्व मंत्री डॉ. शिव डहरिया ने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक अराजकता का माहौल है और अफसरों को कुछ मंत्रियों का संरक्षण मिला हुआ है [06:08]।
मोहम्मद अकबर का पत्र: पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने तो मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जनप्रतिनिधियों के सम्मान और उनके पत्रों पर कड़ाई से अमल करने के शासकीय परिपत्रों की याद दिलाई है [06:45]।
भविष्य की सियासत: टकराव या नया मोड़?
चाहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेडियम का मामला हो या मंत्री पद से अचानक इस्तीफे का घटनाक्रम [07:37], बृजमोहन अग्रवाल को किनारे करने के संकेत काफी समय से मिल रहे थे [07:37]। लेकिन एक आईएएस अफसर और वरिष्ठ सांसद के बीच शुरू हुई यह तल्खी अब सिर्फ व्यक्तिगत विवाद नहीं रही, बल्कि इसने सत्ता-संगठन और विपक्ष के बीच एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है [08:01]।
देखना दिलचस्प होगा कि छत्तीसगढ़ की राजनीति का यह 'बरगद' इस राजनीतिक और प्रशासनिक झोंके से खुद को कैसे संभालता है!
