गुरुवार, 11 जुलाई 2024

संघ का खेल, शंकराचार्य फेल

 संघ का खेल, शंकराचार्य फेल

करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान 

रसरी आवत जात है, सील पर पड़त निशान ।


वृंद सतसई ने यह दोहा लिखते समय यह नहीं सोचा होगा कि इसका उपयोग नरैटिव बनाने के लिए भी जब किया जायेगा तो लोग झूठ को भी सच मान बैठेंगे। हालांकि हिटलर ने बहुत पहले ही कह दिया था कि किसी झूठ को बार-बार बोलने से वह सच लगने लगता है। 

और इस खेल को क्या संघ यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने इस तरह खेला कि अब हिन्दू‌ओं के सर्वोच्च गुरु की बातों की बजाय समाज संघ और बीजेपी के हिंदुत्व पर ही भरोसा करने लगी। 

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हो चला है क्योंकि हाल की दो घटनाओं में हिंदू समाज के एक बड़े वर्ग ने न केवल हिन्दू समाज के सर्वोच्च गुरु शंकराचार्यों की बातों की बजाय संघ के प्रचारक रहे  देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातों का समर्थन ही नहीं किया बल्कि शंकराचार्यों के खिलाफ विषवमन करते नजर आये।

पहली घटना राममंदिर के प्राण प्रतिष्छा समारोह से जुड़ी है, इस मामले में प्राणप्रतिष्ता समारोह को लेकर शंकराचार्यों ने जब आपत्ति की, और इसे पूरे समारोह को धर्म-शास्त्र के खिलाफ बताते हुए इसके गंभीर दुष्परिणाम की चेतावनी भी दी।

लेकिन स्वयं को धार्मिक मानने वाले या धर्म का रक्षक बताने वाले संघ ने ही शंकराचार्यो की बात नहीं मानी और न ही हिदुत्व का बखेड़ा खड़ा करने वाली पार्टी भाजपा ने ही शंकराचार्यों का कहा माना। इतना ही नहीं शंकराचार्यों की नाराजगी की खबर पर इन संगठनों से जुड़े लोगों ने शंकराचार्यों की आलोचना करना शुरू कर दिया ।

दूसरी घटना संसद में राहुल गांधी के द्वारा हिंदुओं को कथित तौर पर हिंसक बताने वाले बयान से जुड़ा है। राहुल गांधी ने संसद में जिस तेवर के साथ मोदी, भाजपा और संघ  पर हिंसा फैलाने, डराने दौर नफरत फैलाने का आरोप लगाया उसके बाद ख़ुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहना शुरू कर दिया कि राहुल गांधी ने हिन्दु समाज को हिंसक बताया है।

इसके बाद देश भर में किस तरह से संघ और भाजपा से जुड़े संगठनों ने धमाचौकड़ी मचाई, वह किसी से छिपा नहीं है।

इस धमाचौकड़ी को रोकने जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी सामने आकर कहा कि राहुल गांधी ने हिन्दू समाल को हिसक नहीं कहा है और उन संगठनो को हिंसक कहा  है, तब भी न तो भाजपा सुनने को तैयार है और न ही संघ से जुड़े संगठन ही प्रदर्शन रोक रहे हैं ।

यानी इस घटना के बाद भी शंकराचार्यों की अवहेलना की जा रही है तब यह सवाल इसलिए भी बड़ा हो जाता है कि क्या संघ और भाजपा ने स्वयं को हिंदुओं का ठेकेदार और रक्षक के रूप में जो प्रचारित-प्रसारित किया है (सालों से) वह अब आम लोगों के दिलो-दिमाग में इस कदर बैठ गया है कि सर्वोच्च गुरु भी अब उनके  लिए कोई मायने नहीं रखता ।

बुधवार, 10 जुलाई 2024

फजीहत करवा रहे रमन सिंह…

 फजीहत करवा रहे रमन सिंह 


कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गाज नेताओं में शुमार और छत्तीसगढ़ में पन्द्रह साल सत्ता की बागडोर संभालने वाले डॉ. रमन सिंह क्या खुद अपनी फजीहत करवा रहे है।


यह सवाल इसलिए इन दिनों चर्चा में है क्योंकि लोगों ने मुख्यमंत्री रहते डॉ. रमन सिंह की धमक देखी है जो व्यक्ति स्पीकर से लेकर प्रदेश अध्यक्ष बनाता रहा हो उसे ही स्पीकर बना दिया जाए तो फिर अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थिति क्या हो गई है।

ताजा मामला भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का है। जिसे लेकर एक बार फिर डॉ. रमन सिंह की उपस्थिति को लेकर पार्टी के भीतर ही सवाल खड़े हो गये है कि उपस्थिति और क्रियाकलाप को लेकर पार्टी के भीतर ही चर्चा है कि मोदी-शाह ने डॉ. रमन सिंह की क्या स्थिति कर दी है।


दरअसल छत्तीसगढ़ की राजधानी मैं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठ को लेकर आयोजन स्थल दिनदयाल उपाध्याय स्टेडियम के सामने से गुजाने वाली जीईरोड में इस बैठक के आयोजन को लेकर पार्टी के नेताओं ने पोस्टर लगाये हैं।

मंत्री से लेकर विधायकों का अपनी तस्वीर के साथ पोस्टर लगाना तो समझ में आता है लेकिन यहि विधानसमा अध्यक्ष जैसे पद पर बैठे डॉ. रमन सिंह भी पोस्टर लगवाये तो पद‌ की गरिमा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

डॉ रमन सिंह ने जी ई रोड में पोस्टर तो लगवाया ही कार्यसमिति की बैठक में भी पहुंच गये।

विधानसमा अध्यक्ष  जैसे संवैधानिक पदो पर बैठा व्यक्ति यदि पार्टी के कार्यक्रमों में इस तरह हिस्सा ले तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि अभी तक डॉ रमन सिंह के पार्टी कार्यक्रमों में शामिल होने को लेकर कांग्रेस या दूसरे दलों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

लेकिन इसे लेकर पार्टी के भीतर ही कई तरह की चर्चा  है। कहा जा रहा है कि डॉ रमन सिंह के बैठक  में शामिल होने को लेकर कई नेताओ में नाराजगी है तो कई ने कहा कि डॉ रमन सिंह जैसे नेता यदि  अपनी पदों की गरिमा न रख पाये तो फिर आम कार्यकर्ताओ से किस ताह की उम्मीद की जा सकती है।

इधर इस मामले में छीछालेदर से बचने मीडिया मैनेज भी कर रमन की उपस्थिति को खबर से ग़ायब करवाने का खेल कि भी चर्चा है।

तो दूसरी तरफ़ चर्चा इस बात की भी है कि डा रमन सिंह को विधानसमा अध्यन का पद रास नहीं  आ रहा है और वे राज्यपाल बनना चाहते है।

विधानसमा अध्यन के पद पर रहते हुए पार्टी की बैठकों में भागीदारी को लेकर उठते सवालों से एक बात तो तय है कि भारतीय जनता पार्टी में मोदी शाह के दौर में जिस बेशर्मी के साथ मान्य परम्पराओं को तोड़ा है ऐसा कभी नहीं हुआ है।

लोकसभा के स्पीकर को लेकर सवाल तो उठ ही रहे हैं, अब लोग सोमनाथ चटर्जी को भी याद करते हैं जिन्होंने राजनैतिक शुचिता और नैतिकता के लिए पार्टी से निस्कासन का दंशझेलने को तैयार हो गये लेकिन सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

लेकिन मोदी शाह के इस दौर में जिस तरह से डॉ रमन  सिंह ने विधानसमा के स्पीकर जैसे पद पर रहते हुए पार्टी कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे है वह शर्मनाक है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा।


पैसों के दम पर अय्याशी का दिखावा…

 पैसों के दम पर अय्याशी का दिखावा…


यह सच है कि अय्याशी पैसों के दम पर ही की जाती है लेकिन दिखावा कौन करता है?

बेशक अंबानी के पास पैसों की कमी नहीं है, वह दुनिया के तमाम दौलतमंद लोगों में शुमार भी है। लेकिन छोटे अंबानी की शादी जिस तरह से हो रही है, वह एक तरह से मज़ाक़ बन कर रह गया है।

हम इन सवालो में नहीं जा रहे है जिसमें लोग कह रहे हैं कि विजय माल्या कितना भी बुरा आदमी रहा हो लेकिन उसने अपने बच्चों की शादी के लिए किंगफिशर बियर की कीमत कभी  नहीं बढ़‌ाई, न ही छोटे अंबानी की शादी  के लिए जियों के टैरिफ़ में बढ़ोतरी  के सवाल उठा रहे हैं।


सवाल यह भी नहीं है कि कोई अपने बच्चों की शादी के लिए साल भर फंक्शन करे।

सवाल यह भी नहीं है कि साल  भर चलने वाले इस विवाह कार्यक्रम में दुनिया भर के महँगे से मंहगे कलाकारों को बुलाया गया।


सवाल तो यही है कि पैसों के दम पर साल भर से चल रही इस अय्याशी का दिखावा क्यों? 

आपने इस दौर में हर सवाल पर चुप्पी ओढ़ी है, महगाई बेरोज़गारी, किसान आंदोलन, पीएम केयर फंड, इलेक्ट्रोल बांड, सार्वजनिक क्षेत्र की कपनियों का निजीकरण, सत्ता की तानाशाही, वाशिग मशीन से लेकर कापेरिट को करोड़ों रुपये की माफ़ी, सब पर चुप्पी ओढ़ी है जिसका शायद परिणाम है पैसों के दम पर अय्याशी का दिखावा…?

मंगलवार, 9 जुलाई 2024

टोप्पो का फिर शुरू होगा खेल, केदार ने कर लिया मेल

  टोप्पो का फिर शुरू होगा खेल, केदार ने कर लिया मेल

प्रमोशन भी मिला , पैसा वाला विभाग भी 


भ्रष्टाचार के जिन आरोपी अफसरों को कोग्रेस सरकार ने किनारे लगा दिया था अब वहीं अफसर एक बार फिर सक्रिय हो गये हैं और एक बार फिर से वे मलाईदार पदों पर बैठने लगे हैं।ऐसा ही एक मामला राजेश टोप्पो का है जिन्हें पदोन्नति के साथ ही भारी भरकम जल संसाधन विभाग का सचिव बना दिया गया है। इस विभाग का मंत्री केदार कश्यप हैं और उनकी अपनी कहानी है।

एक तरफ विष्णुदेव साय की सरकार ने कल ही केबिनेट की बैठक में भ्रष्टाचार रोकने का दावा करते हुए सीआईडीसी के सभी रेट कांट्रेक्ट निरस्त करने का निर्णय लेते हुए शासकीय खरीदी जेम पोर्टल से खरीदने का निर्णय लिया है तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के आरोपी राजेग सुकुमार टोप्पो को जल संसाधन विभाग का सचिव बना दिया।

बताया जाता है कि 2005 बैच के आईएएस राजेश कुमार टोप्पो जिस भी विभाग में रहे उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। वे बलोदा बाजार के कलेक्टर भी रहे हैं और जनसंपर्क आयुक्त के पद पर रहने के दौरान उन पर प्राईवेट कंपनी से साँठ गाँठ कर सरकार को करोड़ों रूपये का चूना लगाने का भी आरोप है।

भूपेश साकार ने तो उनके खिलाफ़ ई ओ डब्ल्यू में रिपोर्ट भी लिखवाई है।अप्रैल 2019 तब राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी। तब संवाद के पूर्व सीईओ राजेश सुकुमार टोप्पो के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने FIR दर्ज की। आईएएस टोप्पो पर अलग-अलग मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 7 सी, 13 (1)(अ) और आईपीसी की धारा 120(बी) लगाई गई ।

EOW के अधिकारी जीवन प्रकाश कुजूर ने यह FIR दर्ज कराई थी। तब मेसर्स क्यूब मीडिया एंड ब्रांडिंग प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपी बनाया गया था। आईएएस टोप्पो पर आरोप था कि उन्होंने 2016-2018 के कार्यकाल में शासकीय पैसे का दुरुपयोग कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया। हालांकि, टोप्पो पर कोई खास कार्रवाई हुई नहीं। अब सरकार बदली, और टोप्पो की मंत्रालय में पोजिशन भी।

बता दें कि वर्ष 2018 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही राजेश सुकुमार टोप्‍पो को मंत्रालय में पदस्‍थ कर दिया गया था, लेकिन उन्‍हें कोई विभाग नहीं दिया गया था। कोविड महामारी के दौरान उन्हें OSD बनाया गया और फिर राजस्‍व मंडल का सचिव बनाया गया था।

सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही राजेश टोप्पो ने एक प्राईवेट कंपनी के मालिक के  सहयोग से सरकार में पैठ बनाना शुरु कर दिया था केदार कश्यप और कहा जाता है कि केदार कश्यप के साथ उनकी  दो-दो बार मुलाकात भी हुई। इस संबंध में जब केदार कश्यप से जानकारी लेने की कोशिश की गई तो वे उपलब्ध नहीं थे।

इधर केदार कश्यप को लेकर जिस तरह की चर्चा है वह हैरान कर देने वाला है। संविदा नियुक्ति के अलावा  भी बड़े पैमाने पर भ्रस्टाचार के मामले की लीपापोती की चर्चा भी शुरु हो गई है।

ऐसे में राजेश टोप्पो को जल संसाधन विभाग का सचिव बनाना किसी बड़े खेल को अंजाम देने वाला बताया जा रहा है।

सूत्रों की माने तो राजेय टोप्पो को जल संसाधन विभाग का सचिव बनाने के पीछे रमन सरकार में मंत्री रहे एक विधायक का भी बड़ा रोल है जिसका एक  प्राईवेट कंपनी से रिश्ते की भी चर्चा जमकर होते रही है।

इधर राजेश रोप्पो को सचिव बनाने की खबर से उन अधिकारियों की बाँछे खिल गई है जो कांग्रेस शासन में मलाईदार पदो से वंचित थे। 

इधर विभाग में दैनिक वेतन भोगी और अनियमित कर्मचारियों ने भी दबाव बनाना शुरू  कर दिया है। और कल तो ज्ञापन देने के दौरान मंत्री को कार से उतरने नहीं देने की भी खबर है ।


एसडीएम वर्मा की दादागिरी

 एसडीएम की दादागिरी मारपीट करते हुए मोबाईल तोड़ा 

हरिभूति के पत्रकार की बेदम पिराई...


एक तरफ हरिभूमि के मालिक के सत्ता प्रेम को लेकर चर्चा गर्म है तो दूसरी तरए उसके पत्रकार की पिटाई का मामला गरमाने लगा है। कहा जाता है कि सरे आम पत्रकार को पिटने वाला कोई और नहीं एसडीएम जगन्नाथ वर्मा है।

बताया जाता है कि असंगठित कामगार कांग्रेस पार्टी के बैनर तले हो रहे प्रदर्शन का कवरेज करने वाले पत्रकार की ज्ञापन सौपने के दोरान एसडीएफ से कहा सुनी हुई तो एसडीएम ने अपना आपा खो दिया। और पत्रकार से बदसलूकी करने लगा जब पत्रकार ने इस पर आपत्ति की तो उसने मारपीट करना शुरु कर दिया और पत्रकार का मोबाईल को छिनकर इसे भी जमीन में पटककर तोड़ दिया।

ऐसा नहीं है के एसडीएम जगन्नाथ वर्मा की दादागिरी का खामियाजा किसी पत्रकार ने पहली बार भुगता हो इसके पहले भी एसडीएम के द्वारा सामान्य लोगो से बदसलूकी की खबरें आती रही है। कहा जाता है कि उसके अभनपुर और दुर्ग ज़िले में पोस्टिंग के दौरान इसी तरह की खबरों के चलते उन्हें सूरजपुर भेजा गया था।


इस मामले को लेकर भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ और सूरजपुर जिले के निष्पक्ष पत्रकार मोहन प्रताप सिंह ने बताया कि सूरजपुर,, गुरुवार को थाने के समीप न्यूज़ कवरेज के दौरान सूरजपुर जिले के वरिष्ठ पत्रकार के साथ एस -डी एम के द्वारा की गई मारपीट और मोबाइल छीन कर तोड़ देने की घटना के विरोध में जिला अध्यक्ष मोहन प्रताप सिंह के नेतृत्व में व प्रदेश अध्यक्ष महेश प्रसाद प्रदेश उपाध्यक्ष दयानिधि, प्रदेश सचिव हेमंत, संभागीय अध्यक्ष राकेश जयसवाल की उपस्थिति में जिला कलेक्टर एवं एसपी को ज्ञापन सौंपकर एस डी एम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, 

लिखेपत्र में भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ ने कहा की- पिछले दिनों 04/07/2024 को दोपहर में असंगठित कामगार कांग्रेस पार्टी के द्वारा किए जा रहे कलेक्टर घेराव के दौरान पत्रकार अनवर खान दैनिक हरिभूमि ब्यूरो प्रमुख जिला सूरजपुर के द्वारा समाचार कवरेज करने के दौरान न्यायिक दंडाधिकारी जगरनाथ वर्मा के द्वारा बदसलूकी करते हुए मारपीट की गई है जो एक स्वतंत्र पत्रकार के अधिकारों का हनन है, जो पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर हर मुद्दे को लोगों के बीच लाता है शासन प्रशासन के द्वारा किए जा रहे कार्यों को आम जनता के बीच पहुंचाने का काम करता है वही जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा पत्रकार के साथ मारपीट करना निंदनीय है।

संघ ने मांग किया की अधिकारी पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और 10 दिनों के अंदर इस विषय को संज्ञान में लेकर वास्तविक स्थिति की सही जांच कर संबंधित अधिकारी पर अतिशीघ्र कार्यवाही करें ताकि आने वाले समय के लिए एक अच्छा संदेश निकल कर आए और एक पत्रकार स्वतंत्र रूप से शासन प्रशासन के बीच एक अच्छी कड़ी बनकर निष्पक्ष रूप से कार्य कर सके वही कार्यवाही न होने पर भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ जिला इकाई सूरजपुर आगे रूप रेखा तय कर धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा।।

ज्ञापन देने के दौरान भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष महेश प्रसाद, प्रदेश उपाध्यक्ष दया निधि प्रदेश सचिव हेमंत संभागीय अध्यक्ष राकेश जयसवाल, सूरजपुर जिला अध्यक्ष मोहन प्रताप सिंह, कोरिया जिला अध्यक्ष व संभागीय उपाध्यक्ष अजीम अंसारी, अंबिकापुर जिला अध्यक्ष विनीत मिश्रा, कय्युम खान, एम सी बी जिला अध्यक्ष रामचरित्र द्विवेदी, अमित श्रीवास्तव मोहित राजवाड़े, राजू खान, लोकेश गोस्वामी, शशि रंजन सिंह, राजकुमार जशपुर, सोनू चौधरी, राजेंद्र पासवान, तुषार साहू सहित काफी संख्या में पत्रकार संघ के कार्यकर्ताओं मौजूद थे।।

सोमवार, 8 जुलाई 2024

शंकराचार्य की फिर अवहेलना...

शंकराचार्य ने साफ कर दिया तब बीजेजी का शोर क्यों?

राहुल पर हमले की आशंका, सुरक्षा बढ़ाई गई 


राहुल गांधी के संसद में हिन्दुत्व को लेकर दिये बयान के बाद भाजपा सहित कई हिन्दू संगठन देश भर में बवाल काटने लगे हैं लेकिन इस बवाल का तब कोई मतलब नहीं रह जाता, जब हिदू धर्म के सर्वोच्च गुरु शंकराचार्य जी को राहुल गांधी के बयान में कुछ भी गलत नजर नहीं आता, लेकिन धर्म के आसरे राजनैतिक रोटी सेकने में माहिर भाजपा का अब भी राहुल गांधी पर हमला जारी है और इस हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंटेलीजेसियों ने राहुल गांधी पर हमले की आशंका जाहिर कर दी है।

ज्ञात हो कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान  देश की वर्तमान स्थिति फोर भाजपा के द्वारा धर्म के नाम पर नफरत फैलाने को लेकर संसद में राहुल गांधी ने साफ कहा था कि न तो नरेंद्र मोदी हिंदू  समाज है और न भाजपा या आरएसएस ही हिंदू समाज है। 

इस वक्तव्य के बाद खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद में यह आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने पूरे हिन्दू समाज को हिंसक बता दिया और इसरे बाद देश भर राहुल गांधी के खिलाए भाजपा और हिन्दू‌वादी संगठनों ने प्रदर्शन किया।

राहुल गांधी के वकतव्य को लेकर जब पत्रकारों ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदजी से इस संबंध में सवाल पूछा तो स्वामी शंकराचार्य जी ने साफ कर दिया कि उन्होंने राहुल गांधी के पूरे भाषण को सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि राहुल गांधी के भाषण को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है और इसके लिए दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कारवाई करनी चाहिए ।

लेकिन जब देश के प्रधानमंत्री ही राहुल गांधी के भाषण को हिंसक बता रहे हैं तो कारवाई कौन करे।

हालांकि मोदी सत्ता के इस दौर में शंकराचार्यो की बातों को कितना सुना जा रहा है, कहना कठिन इसलिए भी है क्योंकि राममंदिर के प्राण प्रतिस्था को लेकर भी शंकराचार्यों ने आपति की थी, तब भी मोदी सत्ता और उनसे जुड़े लोगों ने शंकराचार्यों की बात मानने की बात तो दूर उनके ख़िलाफ़ ही विषवमन शुरु कर दिया था। तब ऐसे में राहुल गांधी को क्लीन चीट देने के बाद भी शंकराचार्यो की बात कितनी मानी जायेगी कहना कठिन है।

लेकिन एक बात तो तय है कि शंकराचार्यो की अहमियत को जिस तरह से मोही सत्ता ने गिरोने का काम किया है ऐसा किसी दूसरे धर्म में कहीं नहीं दिखेगा । 

इस मामले में संघ भी इसलिए ख़ामोश है क्योंकि वे भी अब सत्तालोलुपता में पड़ गये है तब हिन्दुत्व की दु‌हाई देने वाले मोदी सत्ता और संघ को शंकराचार्यो की अनदेखी, उपेक्षा को अपमान के लिए भी इतिहास याद रखेगा।

होटल बेबीलोन से खौफ खाती है छत्तीसगढ पुलिस…!



 होटल बेबीलोन से खौफ खाती है छत्तीसगढ पुलिस…

वाणी- हत्याकांड का डरावना सच 


छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बड़े होटलों में शुमार बेबीलान ग्रुप के होटलों की करतूत के आगे छत्तीसगढ़ पुलिस किस तरह नतमस्तक है,  यह वाणी हत्याकांड के मामले में सामने आ गया । वर्ना बेवीलान प्रबंधकों की धौंस के आगे पुलिस भी लावार है , इसका पता ही नहीं चलता ।

ज्ञात हो कि कल सुबह राजधानी के जेल रोड स्थित होटल बेबीलान इन कमरा नम्बर 410 में जिस वाणी गोयल नामक युवती की हत्या हुई लाश बरामद की गई । उस युवती की गुमशुदगी की  रिपोर्ट पर पुलिस जब जाँच के लिए पहुंची थी तो बेबीलान प्रबंधक ने अपनी पहुंच का धौंस दिखाते हुए दो-दो थानेदार और उसकी पूरी टीम को चलता कर दिया था।

दरअसल मामला प्रेम-प्रसंग से जुड़ा हुआ है। अम्बीकापुर के व्यवसायी परिवार की लड़‌की राजधानी में मारुति लाईफ़ स्टाईल में अपने चाचा  के घर में पढ़ाई करने के लिए रहती थी।और 7 जुलाई को जब वह शाम तक घर नहीं लौटी तो वाणी के रिश्तेदारों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कर दी, चूँकि वाणी गोयल के चाचा बाबूलाल गोयल बीजेपी के ज़िला अध्यक्ष है इसलिए राजनैतिक दबाव में पुलिस तलाल सक्रिय हो गई। और वाणी के मोबाईल लोकेशन के आधार पर गंज थाना और सरस्वती नगर  थाना की पुलिस रात ११ बजे ही होटल बेबिलॉन पहुँच गई लेकिन वह होटल में जांच नहीं कर पाई।

कहा जाता है कि पुलिस को होटल में आये देख प्रबंधक ने अपनी पहुंच का ऐसा धौंस दिखाया तो पुलिस चुपचाप लौट आई । लेकिन जब वाणी के घरवालों का दबाव बढ़ा तो वह फिर जांच करने दोबारा पहुँची , लेकिन तब भी होटल प्रबंधकों ने पुलिस को चमका कर भगा दिया।

कहा जाता है कि होटल प्रबंधकों ने जाँच के लिए पहुंची पुलिस टीम को अपनी पहुंच का हवाला देते हुए वर्दी उतरवा देने या संस्पेंड करवा  देने की धमकी दी थी।

इधर इस मामले में नया मोड़ तब आया जब अचानक मोबाईल का लोकेशन नागपुर की तरफ़ जाते दिखाया गया और पुलिस तत्काल नागपुर पहुंचकर मोबाईल  ट्रेन के डिब्बे में लावारिस हालत में बरामद की।


वाणी के परिजनों के बढ़ते दबाव के चलते पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी जब होटल बेबीलान पहुंचे और एंट्री रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज देखे तो पता चला कि वाणी गोयल 7 जुलाई को दोपहर होटल पहुँची है और उसके साथ विशाल गर्ग नामक युवक था।


इसके बाद जब चौथी मंजिल के रूम नम्बर चार सौ दस को खुलवाया गया तो वाणी गोयल की हत्या हो जाने की खबर आई। और खबर  सामने आते ही वाणी ग़ोयल के परिजनों का गुासा होटल कर्मियों और होटल पर फूटने लगा ।होटल कर्मचारियों की पिराई होने लागी, तोड्‌फोड़ की गई। कर्मचारी डर कर  होटल छोड़ भागने लगे और कई देर तक यह हंगामा होता रहा।


पुलिस ने जैसे तैसे इस पर काबू पाया।

इ‌धर के हत्या के बाद ट्रेन के आगे कूदकर विशाल गर्ग के द्वारा आत्महत्या कर लेने की खबर भी आ गई और पुलिस के लिए इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाना आसान हो गया।

ऐक्षा नहीं है के बेबीलोन होटल प्रबंधकों के धौंस के आगे शासन-प्रशासन पहली बार नतमस्तक हुआ है। इससे पहले वीआईपी रोड व्यत इसी ग्रुप के होटल बेबीलोन मैं पर नाले पर ही कब्जा कर पक्का निर्माण की बात सामने आई थी और इसे हराने में निगम के हाथ पाँव फूल गये थे।



सालों कब्जा रहा जब जलभराव से त्रस्त नागरिकों ने मोर्चा खोला तब कहीं जाकर आधा अधूरा कब्जा हटाया गया। 


देखना है इस मामले में अब पुलिस होटल प्रबंधकों पर कार्रवाई  करती है।या फिर कर्मचारियो को पकड़ कर ख़ानापूर्ति कर ली जायेगी।