गुरुवार, 20 जून 2024

मूणत की मलाई पर नजर

 मूणत की मलाई  पर नजर…



हालांकि सभी से यह कहना ठीक नहीं होगा कि बिल्ली के भाग से छींका टूटा,  लेकिन बृजमोहन अग्रवाल यानी मोहन सेठ के इस्तीफ़े से सबसे ज्यादा कोई खुश है तो वह रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत का नाम लिया जा रहा है।

पन्द्रह साल रमन राज में मंत्री रहने माले राजेश मूणत के बारे में कहा जाता है कि 2018 का चुनाव वे अपनी जुबान और अहंकार की वजह से ही हारे थे। और जब 2023 में सत्ता मिली तो उन्हें मंत्री नहीं बनाने के पीछे भी तरह तरह के चर्चे हैं। कथित सीडी कांड के अलावा उन पर डॉ. रमन सिंह के हनु‌मान होने का भी तमगा है। और शायद यही वजह है कि पंद्रह साल मंत्री रहने वाले इस नेता को चुनाव जीतने के बाद भी कुछ नहीं मिला।

हालांकि उनके समर्थक दम भरते रहे कि मंत्रीमंडल के विस्तार में राजेश मूणत का नम्बर सबने उपर हे और अब जब रमन सिंह की नीचे से लेकर उपर तक चलने की चर्चा है तो राजेश मूणत का मंत्री बनना तय मान समर्थक खुशियां भी मना रहे हैं।

कहा जाता है कि के मंत्री बनने के लिए साम दाम का जमकर उपयोग किया ही जा रहा है। मध्यप्रदेश वाला एप्रोच भी लगाया जा रहा है।

चर्चा तो इस बात की भी है कि बृजमोहन अग्रवाल को मोहन सेठ का नाम भूपेश बघेल से पहले किसी और ने नहीं राजेश मूणत ने ही दिया था, और डाक्टर साहब का राजेश मूणत को पंद्रह साल मंत्री बनाये रखने की प्रमुख वजह में से हनुमान के अलावा एक बड़ी वजह सेठ का काट समझा  जाना है।

यानी चर्चा गरम है डाक्टर साहब की जब चल रही है तो राजेश मूणत को मलाई मिलना तय है।

बलौदाबाज़ारकांड-बीजेपी की जाँच समिति क्यों बनी

  आख़िर बीजेपी ने जाँच समिति क्यों बनाई, सत्ता का कैसा खेल 

कांग्रेस की जाँच समिति तो समझ आता है लेकिन सत्ता में बैठी पार्टी का जाँच समिति बनाने का मतलब क्या बीजेपी में विवाद या कोई षड्यंत्र




बलौदाबाज़ार की घटना के बाद क्या सरकार  साँप गुजरने के बाद लकीर पीटने वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है । यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि इस मामले को लेकर जहां कांग्रेस हमलावर है वही विष्णुदेव सरकार बैकफ़ुट में आ  गई है और अब सरकार को बचाने बीजेपी सामने ए गई है 

बीजेपी ने जाँच समिति की घोषणा कर दी है जिसे लेकर कांग्रेस ने तो सवाल उठाये ही है , आम लोगो में भी चर्चा गरम है कि क्या बीजेपी को अपनी ही सरकार पर भरोसा नहीं है या यह किसी को बदनाम करने की साज़िश है ।

छत्तीसगढ़ की पहचान हमेशा से शांत जगहों के रूप में होती है, जीयो और जीने दो की संस्कृति से ओतप्रोत छत्तीसगढ़ में यह घटना हर किसी को हैरानी में डालने वाली है।'मनखे मनखे एक समान का संदेश देने वाले सतनाम समाज के   गुरु घासीदास के तपोभूमि क्षेत्र माने जाने वाले बलौदा बाजार जिले में अब तक जो भी घटनाएं हुई हैं उनमें बाहरी तत्वों का हाथ रहा है. यही वजह है कि प्रशासन सतनाम समाज के प्रदर्शन को उस रूप में नहीं लिया और प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़प और आगजनी हो गई.

जानकारी के मुताबिक, अब तक के जांच में ये सामने आया है कि इस घटना के पीछे भी बाहरी तत्वों का हाथ था. दरअसल, पुलिस ने लिखित कथन दिया है कि उत्पात मचाकर तोड़फोड़ और आगजनी भीम आर्मी, भीम रेजिमेंट और भीम कांतीवीर सेना के कार्यकर्ता, पदाधिकारियों ने किया है. 

सतनामी समाज के प्रवर्तक गुरु बाबा गुरु घासीदास की तपोभूमि गिरौधपुरी से लगे महकोनी गांव के अमर गुफा स्थित तीन जैतखाम को असामाजिक तत्वों ने 15-16 मई की रात आरी से कटकर गिरा दिया था. इस घटना की जानकारी पूजा करने वाले पुजारी ने समाज प्रमुखों को दी. जिसके बाद सतनामी समाज के लोग एफआईआर दर्ज कराने गिरौदपुरी पुलिस चौकी पहुंचे.

आरोप है कि घटना को पुलिस बहुत हल्के में लेते हुए एफआईआर दर्ज नहीं की. जैतखाम काटे जाने के कारण सतनामी समाज खुद को अपमानित महसूस कर रहे थे. यही वजह रही कि समाज के लोग वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिए और देखते ही देखते मामला पूरे राज्य में गया. इसके बाद  इस मामले की शिकायत एसपी से की गई. वहीं उग्र प्रदर्शन की चेतावनी के बाद 17 मई को पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया.एफआईआर में देरी, आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी और पूरी कार्रवाई में पारदर्शिता का अभाव ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए. इतना ही नहीं बलौदा बाजार जिले में पुलिस द्वारा अपराधियों को बदले जाने की परंपरा ने इस मामले में भी संदेह पैदा किया. बिहार के जिन तीन मजदूरों को पुलिस सैड कम काटने के मामले में गिरफ्तार किया गया, उन्हें भी कुछ दिनों बाद जमानत मिल गई और वो छूटते ही प्रदेश से गायब हो गए और यही वजह थी सतनामी समाज में विद्रोह पैदा हो गया.

गिरोदपुरी धाम के अमरगुफा के जैतखाम को अज्ञात आरोपी ने 15-16 मई की रात तोड़फोड़ कर जैतखाम को नष्ट करने की कोशिश की. आरोपियों के खिलाफ गिरौदपुरी पुलिस चौकी में आईपीसी की धारा 295 के तहत मामला दर्ज किया गया. वहीं दूसरी ओर जैतखाम को अपमानित किए जाने के मामले में सतनाम समाज के लोगों के भीतर गुस्सा फूट पड़ा. बाबा गुरु घासीदास को मानने वाले तपोभूमि गिरौदपुरी आने वाले श्रद्धालु जैतखाम काटे जाने से अमरपुर की ओर जाने लगे और प्रदर्शन व कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस पर दबाव बनाने लगे।

इधर, पुलिस बढ़ते दबाव के बीच आरोपी की पतासाजी कर रही थी. पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान पता चला कि भोजराम अजगल्ले जो कि ठेकेदारी का काम करता है उसके द्वारा गांव महकोनी में नल जल मिशन के तहत पानी टंकी का निर्माण किया जा रहा था. जिसका ठेका उसने 4.50 लाख में आरोपियों को दिया था. शुरुआत में ठेकेदार ने 1 लाख रुपये ही भुगतान किया गया था, जबकि कार्य 90 फीसदी हो जाने पर भी बाकी रकम का भुगतान नहीं किया जा रहा था.पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कार्य का भुगतान मांगने पर ठेकेदार ने गाली गलौज दिया था. पुलिस अपने संपूर्ण जांच और विवेचना क्रम में ग्राम महकोनी में नल जल योजना के तहत पानी टंकी का निर्माण करने वाले 03 आरोपियों को दबोचा. जिनसे कड़ाई से पूछताछ पर तीनों आरोपियों ने अमर गुफा में स्थित जैतखाम को काटना और लोहे के गेट में तोड़फोड़ करना स्वीकार किया.आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि सभी आरोपी ग्राम महकोनी में नल जल योजना के तहत पानी टंकी का निर्माण ठेकेदार भोजराम अजगल्ले के माध्यम से ठेका राशि 4.50 लाख में कर रहे थे. जिसका काम लगभग 90 फीसदी पूरा होने के बाद भी भोजराम अजगल्ले ने बकाया राशि आरोपियों को नहीं दिया था. आरोपियों ने बार-बार बकाया रकम मांगा, लेकिन ठेकेदार रकम नहीं दी, जिसके कारण ठेकेदार से नाराज आरोपियों ने अमर गुफा में तोड़फोड़ करने की योजना बना डाली.

योजना के अनुसार, तीनों आरोपियों ने शराब का सेवन कर 15 मई 2024 की रात 11.30 बजे लगभग अपनी बजाज मोटरसाइकिल में बैठकर आरी और अन्य सामान लेकर अमर गुफा गए. तीनों ने गुस्से में आकर सतनामी समाज के प्रतीक जैतखाम को आरी से काट दिया और लोहे के गेट को उखाड़ कर तोड़फोड़ किया।पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों से घटना में प्रयुक्त आरी और मोटरसाइकिल जब्त किया है और तीनों आरोपियों को विधिवत्त गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश कर उन्हें जेल भेज दिया. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में बिहार के सहरसा निवासी सल्टू कुमार, पिंटू कुमार और रघुनंदन कुमार हैं जो कि वर्तमान में ग्राम महकोनी पुलिस चौकी गिरौदपुरी में रह रहे थे।

बता दें कि पुलिस की बताई पैसे वाली कहानी से समाज में और गुस्सा बढ़ने लगा और समाज के लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करने लगे. पुलिस के द्वारा बताई गई बातों के बाद समाज ने सीबीआई जांच की मांग की.

अमर गुफा के तीन जैतखाम काटे जाने के अलावा पिछले कुछ अरसे और वर्षों में हुए सतनामी समाज से जुड़े मामले से भी समाज में गुस्सा था. बताया जा रहा है कि पूर्व में बिलासपुर के बोडसरा, कबीरधाम व अन्य जिलों में सतनामी समाज संबंधी विभिन्न मुद्दो को लेकर समाज के लोग व्यापक प्रदर्शन की तैयारी की. साथ ही 10 जून को दशहरा मैदान बलौदा बाजार में धरना स्थल के रूप में घोषित कर प्रदर्शन आयोजित किया.

https://youtu.be/YeiXWOoNCW4?si=GyxrkHHpx1Ug7a00


बुधवार, 19 जून 2024

मोदी का इटली दौरा क्यों विवाद में

 मोदी का इटली दौरा क्यों विवाद में, क्या वहाँ अपमान हुआ 


दुनिया के सात शक्तिशाली देशों के जी सेवन की बैठक में भारत को आमंत्रित तो किया गया लेकिन क्या पीएम मोदी को वहाँ जाना था ?

सबसे बड़ी बात तो यह है कि इटली का व्यवहार भारत के प्रति रूखा रहा, भले ही गोदी मीडिया इटली के प्रधानमंत्री जर्जिया से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भेंट को जोशीला बता रही हो लेकिन जर्जिया के दूसरे देशों के प्रमुखों से भेंट का जो वीडियो आया है वह सब कुछ साफ़ कर देता है 

पूरी रिपोर्ट आप देखें और तय करें…

https://youtu.be/JBGFAo7RYvI?si=8wAUWOzxS_PFs40R

बड़े बेआबरू होकर...

 बड़े बेआबरू होकर...


भले ही मोहन सेठ ने मूंछ पर ताव नहीं मारा हो, या मोदी की तरह छाती ठोंक कर  गारंटी नहीं दी थी कि, वे ६ माह मंत्री पद नहीं छोड़ेंगे लेकिन एक निजी चैनल को दिये इन्टखयू में उन्होंने मंशा  जता ही दी थी कि वे भले ही विधायकी छोड़ दें लेकिन मंत्री पद पर ६ माह रह सकते हैं। और इसलिए वे जब इस्तीफा देने निकले थे तो केवल विधायक पद से ही इस्तीफ़ा दिया था।

कांग्रेस को पटखनी देने में माहिर मोहन सेठ को तब कहां मालूम था कि उन्हें मंत्री पद पर रंगा-बिल्ला एक दिन भी देखना नहीं चाहते और न ही उन्हें यह भी मालूम था कि वे कांग्रेसियों को साधने के चक्कर में पार्टी के भीतर उन्होंने विरोधियों की फौज खड़ी कर रखी है, और इसी फ़ौज ने उन्हें पहले विधायकी से निपटाया फिर मंत्री पद से । लोग तो इस फ़ौज में डॉ. रमन सिंह, से लेकर राजेश मूणत, सहित कई नाम गिना रहे हैं जिसमें ताजा नाम अरुण साव का भी शामिल हो गया है, वैसे तो बिलासपुर जिले के कई नेताओं के नाम शामिल है खासकर अफसरी से राजनीति में आये ओपी चौधरी का नाम भी तो इस फौज में है।

और शायद यही वजह है विधायक पद से इस्तीफ़ा देने के बाद मोहन सेठ इस कदर निश्चिंत थे कि उन्होंने विभाग की बैठने तक ले ली, लेकिन वे अपनी फाइलें रोकने की घटना को नजर अंदाज करते रहे।

आड‌वानी-जोशी को किनारे लगाने वालों के लिए यह कोई मायने नहीं रखता कि मोहन सेठ रायपुर दक्षिण के अपराजेय योद्धा है. और शायद चर्चा इसलिए इस बात की है कि उन्हें कैबिनेट की भरी बैठक में इस्तीफ़ा देने कहा गया1 यानी घोर बे….!

तब मोहन सेठ का इस्तीफ़ा देते समय आंसू निकलना स्वाभाविक है, और लोगों का क्या ?  विरोधी कह रहे हैं कि उन्हें तो विधायकी के साथ ही मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए था, कम से कम ये स्थिति तो नहीं बनती तो समर्थक अब  रंगा-बिल्ला के साथ प्रदेश में पनप आये नये कॉकस को गरिया रहे हैं।


साय खिंचवा रहे हैं सायं-सायं फ़ोटो

 साय खिंचवा रहे हैं

सायं-सायं फ़ोटो 


इसे फोकट के पाय तो मरत ले खाय की  छतीसगढ़ी कहावत  से जोड़ना बेमानी होगी, लेकिन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इन दिनों सोशल मीडिया में छाए हुए हैं तो इसकी वजह  उनका मीडिया मैनेजमेंट हैं, हालांकि उनका मीडिया सलाह‌कार को लेकर पत्रकारो में जो चर्चा है वह पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मीडिया सलाहकार की तरह ही है। कंवल ओढ के...!

ख़ैर आज चर्चा तो मुख्यमंत्री के धान बोवाई की तस्वीर की है  जिसे लेकर लोग बेवजह विवाद पैदा कर रहे हैं और अब विष्णुदेव साय की तुलना एक ऐसे नेता से होने लगी है जो छत्तीसगढ़ी संस्कृति की दुहाई देते हुए हाथ में भौरा चलाते थे । उसका परिणाम अब सबके सामने है।

इसमें कोई शक नहीं होगा कि विष्णुदेव साय पहले भी किसानी करते रहे होंगे, लेकिन कभी फोटो-सोटो खिंचाने की नहीं सोची होगी, लेकिन अब मुख्यमंत्री बनने के बाद भी किसानी करनी है तो फ़ोटो-शोटो ठीक-ठाक आना चाहिए तो उसी ढंग से पहनावा भी तैयार किया गया। ऐसे में पूर्वगृहमंत्री ननकीराम कँवर की किसानी वाली तस्वीर को बाजू में चिपकाकर देखना चाहिए खेती का तरीका क्या होना चाहिए।



ख़ैर अब मीडिया सलाहकार का मैनेजमेंट का कोई जवाब नहीं , सभी बड़े अख़बारों में छप तो गया अब लोगों का क्या - वे तो बोलेंगे ही।

अब आने वाले तीज़ त्यौहार में कैसे मैनेजमेंट होगा बताने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए।

मंगलवार, 18 जून 2024

मंत्रालय में हावी हुआ भाई साहब… संस्कृति

 मंत्रालय में हावी हुआ 

भाई साहब… संस्कृति 



सत्रा बदलते ही मंत्रालय में क्या-क्या बदला कहना मुश्किल है क्योंकि मंत्रालय तो अफ़सर ही चलाते है लेकिन जिस बात से अफ़सर सबसे ज्यादा हैरान है वह है , मंत्रालय में तेजी से पनप रहे भाई साहब संस्कृति का ।

एक अफसर ने बड़े  दुखी मन से बताया कि सत्ता बदलते ही  मंत्रालय आने वाले नेताओं की वेशभूषा बदल गई है, नये-नये और ऐसे-ऐसे चेहरे दिखाई देने लगे है जो चेहरे से ही धंधे बाज लगते हैं, और इनके रौब के आगे मंत्रियों का रौब भी फीका पड़ जाये।

ऐसे लोग सीधे सचिवों के पास पहुंचते है और काम सौंपते हुए कहते हैं कि भाई साहब से बात हो गई है।

अब अफसर पूछ भी नहीं पा रहे हैं कि ये भाई साहब कौन है, क्योंकि भाजपा में  तो हर नेता, दूसरे नेता के लिए भाई साहब है, मुख्यमंत्री भी भाई साहब है तो प्रदेश अध्यत भी, गृह मंत्री भी भाई साहब है तो उपमुख्यमंत्री भी भाई साहब   है।

मोदी का रेल, पूरी तरह फेल

 न रेल दुर्घटना रुक रहा न समय पर ट्रेन ही चल रही, सबसे असफल 

आख़िर एक असफल मंत्री को दोबारा मौक़ा देकर मोदी ने ग़लत तो नहीं कर दिया  


बिहार-बंगाल की सीमा के पास सोमवार को बड़ा ट्रेन हादसा हुआ है। सियालदाह जा रही कंचनजंगा एक्सप्रेस (13174) को पीछे से मालगाड़ी ने टक्कर मार दी। हादसे में कंजनजंगा एक्सप्रेस के तीन डिब्बे बेपटरी हो गए। हादसे के बाद हड़कंप मच गया। रेलवे की टीम जांच में जुट गई है। इस हादसे के बाद एक बार फिर पुराने जख्म हरे हो गए हैं। पिछले साल ओडिशा के बालासोर जिले में दो जून को एक भीषण ट्रेन हादसा हुआ था, जिसकी यादें ताजा हो गई हैं।

मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद जिस तरह से बुनियादी ढाँचा चरमराया है वह गंभीर ख़तरे का संकेत है

।ऊपर से कभी भी ट्रेनें रद्द कर देने से भी यात्रियों कि मुसीबत बढ़ी है , हालत ये है कि यात्री परेशान है और मोदी सत्ता सुविधा के नाम पर लोगों की जेब ख़ाली करने में लगी है।

कहा जाता है कि निजीकरण से भी आम यात्रियों की तकलीफ़े बढ़ी है, जबकि ट्रेन रद्द करने की बड़ी वजह वन्दे भारत को सफल बनाने या बताने की रणनीति है ।


मोदी सरकार पर भारतीय रेलवे को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कांग्रेस ने कंचनजंघा एक्सप्रेस दुर्घटना के मद्देनजर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के इस्तीफे की मांग की। साथ ही कांग्रेस ने कहा कि उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। विपक्षी दल ने मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर दुर्घटना स्थल पर पहुंचने के लिए वैष्णव पर भी कटाक्ष करते हुए पूछा कि वह रेल मंत्री हैं या 'रील मंत्री'। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि जब भी कोई रेल दुर्घटना होती है, मोदी सरकार के रेल मंत्री कैमरों की रोशनी में घटनास्थल पर पहुंचते हैं और ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे सब कुछ ठीक है।

  1. कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा, 'नरेंद्र मोदी जी, हमें बताएं कि किसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, रेल मंत्री को या आपको?' खरगे ने सरकार से 7 सवाल पूछे और जवाब मांगे। उन्होंने पूछा कि बालासोर जैसी बड़ी दुर्घटना के बाद, बहुचर्चित 'कवच' ट्रेन टक्कर रोधी प्रणाली का दायरा एक किलोमीटर भी क्यों नहीं बढ़ाया गया? 
  2. कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा, 'रेलवे में करीब तीन लाख पद खाली क्यों हैं, पिछले 10 सालों में उन्हें क्यों नहीं भरा गया? एनसीआरबी (2022) की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच ही रेल दुर्घटनाओं में 1,00,000 लोगों की मौत हुई है! इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?' 
  3. उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड ने स्वयं स्वीकार किया है कि मानव बल की भारी कमी के कारण इंजन चालकों का लंबे समय तक काम करना दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण है। उन्होंने पूछा कि इन पदों को क्यों नहीं भरा गया।
  4. खरगे ने पूछा, 'अपनी 323वीं रिपोर्ट में संसद की स्थायी समिति ने रेलवे सुरक्षा आयोग (सीआरएस) की सिफारिशों के प्रति रेलवे बोर्ड द्वारा दिखाई गई 'उपेक्षा' के लिए रेलवे की आलोचना की थी। यह रेखांकित किया गया कि सीआरएस केवल 8 से 10 प्रतिशत दुर्घटनाओं की जांच करता है, सीआरएस को मजबूत क्यों नहीं किया गया?'
  5. उन्होंने पूछा कि कैग के अनुसार, 'राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष' (आरआरएसके) में 75 प्रतिशत धनराशि क्यों कम कर दी गई, जबकि हर साल 20,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाने थे। खरगे ने आगे पूछा कि रेलवे अधिकारियों द्वारा इस धन का उपयोग अनावश्यक खर्चों और सुख सुविधाओं पर क्यों किया जा रहा है?
  6. खरगे ने कहा, 'रेल में सामान्य शयनयान श्रेणी में यात्रा करना इतना महंगा क्यों हो गया है? शयनयान की संख्या क्यों कम कर दी गई है? रेल मंत्री ने हाल ही में कहा कि रेल डिब्बों में 'अधिक भीड़' करने वालों के खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। लेकिन क्या उन्हें यह नहीं पता कि पिछले साल सीटों की भारी कमी के कारण 2.7 करोड़ लोगों को अपनी टिकटें रद्द करानी पड़ीं - जो कि मोदी सरकार की डिब्बों की संख्या कम करने की नीति का सीधा नतीजा है?' 
  7. उन्होंने पूछा कि क्या मोदी सरकार ने किसी भी तरह की जवाबदेही से बचने के लिए 2017-18 में रेल बजट को आम बजट में मिला दिया था? खरगे ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'आत्म-प्रशंसा से मोदी सरकार द्वारा भारतीय रेलवे पर की गई आपराधिक लापरवाही को कम नहीं किया जा सकेगा! शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय करने की जरूरत है।'



06 जून 1981: यह वह दिन था जब बिहार को सबसे घातक ट्रेन दुर्घटना का सामना करना पड़ा था। ब्रिज को पार करते हुए ट्रेन बागमती नदी में जा गिरी थी। इस हादसे में 750 लोगों की मौत हो गई थी।
प्रमुख रेल हादसा 
20 अगस्त 1995: फिरोजाबाद के पास पुरुषोत्तम एक्सप्रेस खड़ी हुई कालिंदी एक्सप्रेस से टकरी गई। इस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 305 के करीब थी।  

26 नवंबर 1998: पंजाब के खन्ना में जम्मू तवी सियालदह एक्सप्रेस पटरी से उतरे फ्रंटियर गोल्डन टेंपल मेल की तीन डिब्बों से टकरा गई। इस हादसे में 212 लोग मारे गए थे।  

02 अगस्त 1999: ब्रह्मपुत्र मेल उत्तर सीमांत रेलवे के कटिहार मंडल के गैसल स्टेशन पर खड़ी अवध असम एक्सप्रेस से टकरा गई, जिसमें 285 लोग मारे गए और 300 के करीब घायल हुए थे।  

20 नवंबर 2016: पुखरायन में इंदौर राजेंद्र नगर एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतर जाने की वजह से घातक हादसा हुआ, जिसमें 152 लोगों की मौत और 260 घायल हुए थे।  

09 नवंबर 2002: रफिगंज के धावे नदी के ऊपर बने ब्रीज में हावड़ा-राजधानी एक्सप्रेस पलट गई, जिसमें 140 लोग मारे गए थे।  

23 दिसंबर 1964: रामेश्वरम में चक्रवात में पंबन धनुषकोडी पैसेंजर ट्रेन के बह जाने की वजह से 126 यात्री मारे गए थे।  

28 मई 2010: मुंबई जा रही ट्रेन झारग्राम के पास पटरी से उतर गई थी और सामने से आ रही एक मालगाड़ी से टकरा गई। इस हादसे में 148 यात्री मारे गए थे। 

02 जून 2023: बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी के बीच ट्रेन दुर्घटना हुई थी। इस हादसे में कम से कम 233 लोग मारे गए थे। वहीं 900 से अधिक लोग घायल हुए थे। आजादी के बाद से अबतक की सबसे घातक दुर्घटनाओं में से एक यह हादसा बताया जाता  है। 

https://youtu.be/ERvjVJ2BH1k?si=py7Q04OYyktLWb5K