गुरुवार, 26 सितंबर 2024

चर्बी मिले प्रसाद के साथ चंदा में मिली दवाईयां…

 चर्बी मिले प्रसाद के साथ चंदा में मिली दवाईयां…

स्वास्थ मंत्री की चिंता कुनबा बढ़ाने की…


यदि आप तिरुपति के प्रसाद में चर्बी मिलने के पाप से प्रायश्चित का प्रहसन से निजाद पा चुके हो तो अमानक दवाईयों के खेल को भी समझ लो क्योंकि खेलते-कूदते, भागते-दौड़ते जो मौत की खबरें आती है, उसके पीछे चंदे की वह कहानी भी हो सकती है जिस इलेम्ट्राल बांड को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध तो ठहराया, लेकिन इस अवेध कमाई को जब्त करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया । दूसरी तरफ़ स्वास्थ मंत्री जे पी नद्दा की अपनी चिंता है वे इन दिनों रायपुर में घूम घूम कर मोदी की तारीफ़ और बीजेपी की संख्या बढ़ाने में लगे है।

प्रायश्चित के इस प्रहसन में मंदिर भी शुद्ध हो गया और प्रसाद खाने वाले भी प्राथश्चित  करके अपने को चर्बी सेवन के पाप से मुक्त कर ही लेंगे। लेकिन न तो दवा कंपनी मानने को तैयार है कि उनकी दवाईया घटिया और अमानक है और न ही सरकार ही मानेगी कि उसने चंदा लेकर वैक्सिन से लेकर पैरासिटामॉल सहित पचास से अधिक द‌वाईयों की आपूर्ति की अनुमति दी जो घटिया और अमानक थी।

देशभर को पता चल गया कि मंदिर का प्रसाद अशुद्ध था…

…लेकिन पूरा देश घटिया और नक़ली दवाइयाँ खा रहा है, इससे किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ रहा है

53 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल,

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्रग रेगुलेटर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में 53 दवाओं को क्वालिटी टेस्ट में फेल घोषित किया है। इन दवाओं में पेरासिटामोल समेत कैल्शियम और विटामिन डी3 सप्लीमेंट्स, एंटी-डायबिटीज दवाएं और हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का फेल होना आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

CDSCO द्वारा जारी की गई इस सूची में दवाओं को "नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी" (NSQ) घोषित किया गया है। ये अलर्ट रैंडम सैंपलिंग के आधार पर जारी किए जाते हैं, जिन्हें विभिन्न राज्यों के ड्रग अधिकारियों द्वारा एकत्र किया जाता है। क्वालिटी टेस्ट में फेल होने वाली दवाओं में प्रमुख रूप से पेरासिटामोल 500 एमजी, विटामिन डी3 सप्लीमेंट्स और डायबिटीज की दवाएं शामिल हैं।

CDSCO ने दो अलग-अलग सूचियां जारी की हैं। पहली सूची में 48 दवाएं हैं जो क्वालिटी टेस्ट में फेल हुई हैं, जबकि दूसरी सूची में 5 दवाओं को रखा गया है, जिनके बारे में कंपनियों को जवाब देने का मौका दिया गया है। हालांकि, अब तक फार्मा कंपनियों ने इन नतीजों को मानने से इनकार करते हुए इसे गलत ठहराया है।

अब इस बात पर नज़र होगी कि संबंधित कंपनियों और सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं ताकि ऐसी दवाओं का बाजार से तुरंत हटाया जा सके और आम जनता को सुरक्षित रखा जा सके।क्योंकि एक तरफ घटिया दवाएं हैं और दूसरी तरफ नकली दवाओं के बाज़ार में आने की भी खबर है। फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का दायित्व भी निभा रहे हैं, उन पर भाजपा के सदस्यता अभियान को सफल बनाने का जिम्मा है। हालांकि तीन दिन पहले आयुष्मान भारत ‘प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना’ के छह बरस पूरे होने पर श्री नड्डा ने नरेन्द्र मोदी की इस पहल की तारीफ़ करते हुए कहा था कि यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा पहलों में से एक बन गई है। यह सभी नागरिकों,  विशेष रूप से सबसे कमज़ोर लोगों के लिए समान स्वास्थ्य सेवा पहुंच प्रदान करने के लिए इस सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।लेकिन स्वास्थ्य मंत्री को यह समझना होगा कि सरकार की प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री के गुणगान करने से पहले काम करने से पूरी होगी। चिंता की बात यह है कि असफल दवाओं में कई ऐसी दवाएं हैं, जिनका इस्तेमाल सबसे अधिक होता है। जैसे देश में करीब 220 मिलियन लोग हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, इसी तरह 2021 में डायबिटीज मरीजों की संख्या 529 मिलियन थी। करोड़ों लोग एसीडिटी रोकने की और विटामिन्स की दवाएं लेते हैं।

 हर आए दिन अचानक हृदयाघात से मौत की खबरें आ रही हैं और सरकार इस बारे में कुछ नहीं कहती। ब्रिटेन में कोविड वैक्सीन बनाने वाली एस्ट्राजेनका ने माना ही था कि उसके बनाए टीकों से नुकसान हो रहा था। इसके बाद उन टीकों को वापस भी लिया गया। लेकिन क्या भारत में परीक्षण में असफल दवाएं वापस ली जाएंगी, यह बड़ा सवाल है।

 गंभीर सवाल दवा कंपनियों और सत्तारुढ़ दलों के बीच आर्थिक रिश्तों का है।  इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक करार दिया था। चुनावी बॉन्ड जारी करने के लिए अधिकृत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने काफी ना-नुकुर के बाद इसके विस्तृत आंकड़े जारी किए थे, जिनमें खुलासा हुआ था कि कई बड़ी दवा कंपनियों ने करोड़ों के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे हैं और इनका बड़ा हिस्सा भाजपा को मिला है। यह भी पता चला था कि बॉन्ड खरीदने वाली दवा कंपनियों की कई दवाएं पहले परीक्षण में अमानक और घटिया पाई गई थी, और जाँच रोक देने या क्लीन चिट देने का आरोप भी लगा था । क्या इस बार भी जिन कंपनियों की दवाएं घटिया मिली हैं, उनसे किसी तरह का चंदा मिला है।

फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी और स्वास्थ्य मंत्री नड्डा दोनों ही भाजपा का कुनबा बढ़ाने और चुनावी राज्यों में दौरों में व्यस्त हैं, 53 दवाओं का परीक्षण में फेल होना, कोई मामूली बात नहीं है, इसकी गहन जांच होनी चाहिए कि आखिर इस असफलता की वजह क्या है। अभी ज़्यादा वक़्त नहीं बीता जब गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में भारत के बने कफ़ सिरप को पीने से बड़ी संख्या में बच्चों की मौतें हुई थीं, इसके बाद इन पर कई देशों में प्रतिबंध लगा था। यह वैश्विक स्तर पर शर्मिंदगी थी और ऐसी घटनाओं से असल में देश का अपमान होता है।लेकिन डंका बजने का दावा करने वाले हिन्दुवादियो को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता ।

हैरानी तो यह है कि नक़ली या घटिया दवा के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की बजाय अभी भी प्रसाद में मुस्लिम कनेक्शन खोजने में ज़्यादा रुचि है…!


बुधवार, 25 सितंबर 2024

अभी सिर्फ बेल, नहीं छूटेगा जेल

  अभी सिर्फ बेल, नहीं छूटेगा जेल

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उठते सवाल 


कोयला लेव्ही कांड को लेकर जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत तो मिल गई है लेकिन दूसरे और भी मामलों से जुड़े होने की वजह से वे जेल में ही रहेंगी।

२१ महिने से जेल में बंद सौम्या को अंतरिम जमानत देते समय कोर्ट ने जो सवाल खड़े किये, उसका जवाब सरकार या ईडी के पास नहीं था कि आखिर किसी मामले के आरोपी को कितने समय तक जेल में रखा जा सकता है ? हैरानी की बात बात तो यह है कि ईडी ने अभी तक सौम्या के खिलाफ आरोप ही तय नहीं किये है। जबकि २१ माह  में इस मामले की सुनवाई भी शुरू नहीं हुई है।

ऐसे में कांग्रेस के इस आरोप को बल मिलता है कि यह पूरा मामला भूपेश बघेल को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है।

सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका की सुनवाई ने तीन बड़े सवाल खड़े किये है कि आख़िर सोम्पा के खिलाफ अभी तक आरोप तय क्यों नहीं कर पाई, दूसरा सवाल. यही है कि सिर्फ पूछताछ के लिए इडी किसी को कितने दिनों तक हिरासत में रख सकती है और तीसरा जो सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सत्ता किसी को ऐसा असिमित अधिकार कैसे दे सकती है जो मानवाधिकार के उल्लघन का अधिकार  दे दे। 

पूरा मामला इस प्रकार हैं... सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया को अंतरिम जमानत दे दी. सौम्या चौरसिया कथित कोयला लेवी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी हैं. जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि चौरसिया एक साल और नौ महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं, उनके खिलाफ आरोप तय होना बाकी है और मुकदमा शुरू नहीं हुआ है. इसके साथ ही अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगले आदेश तक सौम्या चौरसिया को सेवा में बहाल न करे.

"जब भी जरूरत हो ट्रायल कोर्ट में सौम्या चौरसिया पेश हों": अदालत ने कहा कि जब भी जरूरत हो ट्रायल कोर्ट में सौम्या चौरसिया पेश हो और गवाहों को प्रभावित न करें. शीर्ष अदालत में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 28 अगस्त के आदेश को चुनौती दी गई है. जिसके तहत उच्च न्यायालय ने जमानत देने से इंकार किया था. जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि चूंकि उनकी याचिका पर सुनवाई में कुछ समय लगेगा, इसलिए वह उन्हें अंतरिम जमानत दे रहे हैं.



मंगलवार, 24 सितंबर 2024

गौ हत्यारे को बचा रही साय सरकार की पुलिस...

 गौ हत्यारे को बचा रही साय सरकार की पुलिस...



कचना स्थित सेल्स टैक्स कालोनी में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, मामले का जो विडियो सामने आया है वह खूब वायरल हो रहा है और वायरल विडियों में दावा किया जा रहा है कि साय सरकार की  पुलिस गौ वंश के हत्यारे को इसलिए बचा  रही है क्योंकि उसने अपने पैसे के दम पर पुलिस वालो का मुंह बंद कर दिया है।

बायरल विडियो बेहद ही दर्दनाक है कि किस तरह से एक कार लापरवाही पूर्वक बछड़े को कुचलते हुए भाग जाती है, बछड़े के कुचले जाने के बाद किस तरह से गायों का झुण्ड इस बछड़े के पास पहुंच रही है।



मानवीयता को शर्मसार करती इस घटना  को लेकर लोगों में बेहद आक्रोश है। जिस कार से यह घटना हुई है उस कार का नम्बर सीजी 04 एन वी 5557 यह कार क्षेत्र के चर्चित बिल्डर्स का है और कहा जा रहा है कि इसी बिल्डर्स का बेटा कार चला रहा था। और  लोगों का आरोप है कि  उक्त बिल्डर्स का बेटा इसी तरह से लापरवाही पूर्वक कार चलाता है जिसकी वजह से आये दिन विवाद होता रहता है।




लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि इस घटना की शिकायत पुलिस में करने के बाद भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लग रहा है। यानी गौवंश की रक्षा के नाम पर मॉब लिचिंग करने वाले हिन्दू संगठन भी पैसों के आगे नतमस्तक हो गये है ।

सोमवार, 23 सितंबर 2024

कौन बचा रहा है अभिषेक पल्लव को...

 कौन बचा रहा है अभिषेक पल्लव को...

 


सारे गवाह, सारे सबूत चीख-चीख कर कह रहे हैं कि गृहमंत्री विजय शर्मा के विधानसभा क्षेत्र के लोहाराडीह में पुलिसिया बर्बरता उस रात चरम पर थी। घरों के दरवाजे तोड़‌कर आधी रात को पुलिस ने सोते से जगाकर या सोते हुए महिलाओं और बच्चों पर कहर बरसाया है। साहू समाज आन्दोलित है।  पूरे देश में इस घटना को लेकर साय सरकार के कथित सुशासन की थू-थू हो रही है लेकिन तत्कालीन एस पी अभिषेक पल्लव को न तो निलंबित किया गया और न ही पुलिसिया बर्बरता को लेकर ही कोई एफ आई आर हो दर्ज हुई।

क्यो ?

यह सवाल अब न केवल बहा होने लगा है बल्कि अब इस सवाल का जवाब भी तलाशा जा रहा है कि अभिषेक पल्लव को कौन बचा रहा है। यह सवाल इसलिए भी उठाये जा रहे हैं क्योंकि छत्तीसगढ़ में साहू समाज को भाजपा का वोट बबैंक माना जाता है और  इस वोट बैंक के खिसकने या नाराजगी को लेकर किस किमत पर अभिषेक पल्लव को बचाया जा रहा है यह सवाल चर्चा में है।

हालांकि कभी रमन सिंह पर साहू समाज की उपेक्षा का आरोप लगाकर भरे मंच से गरियाने वाले मोतीलाल साहू न केवल भाजपा में चले गये बल्कि राजधानी के ग्रामीण का विधायक भी है। ऐसे में साहू समाज में क्या आन्दोलन को लेकर दो फाड् या दो मत है?

कवर्धा यदि गृहमंत्री विजय शर्मा का  विधानसभा है तो रमन सिंह का भी गृह  है ऐसे में  दोनों नेतार्थों पर अभिषेक पल्लव को बचाने का आरोप खुलकर लगाया जा रहा है लेकिन दूसरी तरफ सुपर सीएम के रूप में चर्चित ओपी चौधरी का नाम भी कम सुर्खियों में नहीं है। और मुख्यमंत्री साय को लेकर जो चर्चा है वह रिमोट पर आकर समाप्त हो जाता है।

अब समझने नहीं बल्कि जानने बाली बात है कि साहू समाज कब तक अपने समाज को न्याय दिलाने अड़े रहेंगे १

रविवार, 22 सितंबर 2024

राजधानी में मोबाईल लुटेरों ने कर दी हत्या पर उठते सवाल

जंगलराज में तब्बिल होता छत्तीसगढ़…

राजधानी में मोबाईल लुटेरों ने कर दी हत्या



राजधानी के तेलीबांधा मेरिन ड्राईव जैसे व्यस्त इलाने में यदि सुबह-सुबह मोबाईल लुटेरे सक्रिय हो और वे हत्या तक को अंजाम देने आमादा  हो तब क्या यह मार्निंग वॉक करने वालों के लिए खतरे की घंटी नहीं है।

जब से डबल इंजन की सरकार सत्ता में आई है, छत्तीसगढ़  में अपराधियों के होसले बुलंदी पर है। दिल दहला देने वाली घटनाओं के बाद भी यदि सरकार सुशासन का विज्ञापन करें तो किर इसे सत्ता की बेशर्मी नहीं तो और क्या कहना चाहिए।

बलौदा बाजार से लेकर लोहारा डीह जैसे बड़ी घटनाओं के  बाद पुलिस का जो चरित्र  सामने आया है, वह सतनामी समान और साहू समाज भूला नहीं है लेकिन लगातार हो रही हत्या,लूट, चोरी की घटनाए भी क्या राजनैतिक साज़िश का हिस्सा है।

सप्ताह भी मुश्किल बीते होगे कि मेरीन हाइव में हत्या की यह दूसरी वारदात हो गई पहली वारदात को प्रेमी युगल की करतूत बता मामले पर परदा डालने वाली पुलिस अब इस पर परदा कैसे डालेगी।

सच तो यही है कि अपराधियों को धर्म के आधार पर पहचानने वाली सत्ता  के लोग ही संरक्षक बने है, कहा जाए तब भी गलत इसलिए नहीं होगा क्योंकि लोहाराडीह में जिस प्रशांत साहू की पुलिस ने हत्या की वह प्रशांत साहू के साथ खुद गृहमंत्री विजय शर्मा की तस्वीर है कार्यक्रम में नहीं, सीधे फोटो खिचाते । 


धर्म के नाम पर भाजपा ने किस तरह से गुण्डे बदमाशों के साथ गलबहिया की वह बजरंगदल को लेकर उठे विवाद से भी समझा जा सकता है। तब गृहमंत्री यदि इस्तीफा दे दे तब भी अपराधियों को विपक्ष में रहते  संरक्षण देने की धार्मिक अनुष्ठान का असर तो रहेगा ही। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ राजधानी रायपुर स्थित मरीन ड्राइव इन दिनों खूब सुर्खियों में है। यहां आए दिन कुछ ऐसी घटनाएं हो रही है, जो अब चिंता का विषय बन गई है। ताजा मामला सामने आ रहा है कि मरीन ड्राइव में युवक की हत्या कर दी गई है। ये युवक कोई और नहीं बल्कि अंबिकापुर कलेक्ट्रेट का ड्राइवर बताया जा रहा है

मिली जानकारी के मुताबिक, चाकू मारकर हत्या कर दी गई है। 3 अज्ञात बाइक सवार लुटेरों ने मोबाइल लूटने के विवाद में ड्राइवर की चाकू मारकर अंबिकापुर निवासी ईश्वर राजवाड़े की हत्या की है। बताया जा रहा है कि शासकीय काम से मृतक ईश्वर राजवाड़े अधिकारी को रायपुर लेकर आया था।

यह पूरा मामला .तेलीबांधा थाना इलाके का है। वहीं, इस मामले में अभी तीनों अज्ञात बाइक सवार लुटेरे फरार बताए जा रहे हैं। बता दें कि पिछले हफ्ते ही मरीन ड्राइव में दिनदहाड़े युवक ने अपनी प्रेमिका की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। प्रेमिका का गला काटने के बाद युवक अपना हाथ काटकर तालाब में कूद गया था। हालांकि इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

लूट के दौरान हुआ विवाद

मिली जानकारी के मुताबिक ईश्वर राजवाड़े अधिकारी को लेकर रायपुर आया था। तेलीबांधा तालाब के पास गाड़ी लगाया था, तभी तीन बदमाश मोबाइल लूटने लगे। इसी बीच विवाद हो गया। बीच बचाव के कारण 3 अज्ञात लुटेरों ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। युवक की मौत हो गई।

आरोपी गिरफ्त से बाहर

बताया जा रहा है कि चाकू मारने वाले 3 बदमाश फरार हैं। तेलीबांधा पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। वहीं फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीम जुट गई है। घटना स्थल के आस-पास की CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

शनिवार, 21 सितंबर 2024

वन नेशन-वन इलेक्शन : सब कुछ तहस नहस करने की कोशिश

  वन नेशन-वन इलेक्शन : सब कुछ तहस नहस करने की कोशिश


मोदी सरकार के केबिनेट ने वन नेशन-वन इलेक्शन पर मुहर लगा दी। हालांकि इसके संसद में पारित हो जाने की संभावना दूर-दूर तक नहीं है और यह मुद्‌दा भाजपा के पिछले तीन घोषणा पत्र की तर्ज पर आने वाले चुनाव के घोषणा पत्र का हिस्सा ही रहेगा।

सोचा था इस पर नहीं लिखूँगा लेकिन प्रशंसकों ने जब जोर देकर कहा तो इस पर हतने दिनों के बाद लिख रहा हूँ। तो इससे पहले बता दूं कि मोदी सरकार का  हमेशा ही ऐसी पॉलिसी लाती करने है जिसकी क़ीमत  इस देश को चुकानी पड़‌ती है, आमजन से लेकर अर्थ व्यवस्था को और समाज से लेकर संविधान तक को…।

चाहे वह नोटबंदी हो या जीएसटी , इलेक्ट्रोरोलर बांड हो या तीन कृषि क़ानून, आप कोई भी पॉलिसी को देख लीजिए, इसकी क़ीमत जनताऔर देश दोनों को चुकानी पड़ी है । 

इसलिए एक लाईन में कहे तो वन नेशन वन इलेक्शन का मतलब भी यही है- 

बाक़ी इसका प्रभाव क्या होगा इसे थोड़ा ऐसे समझ लें

यह पिछले तीन लोकसभा चुनावों में बीजेपी के घोषणापत्र का वादा रहा है। लेकिन यह कैसे लागू होगा, कब होगा और क्यों ऐसा हो रहा है? ऐसे कई सवाल हैं... 

कांग्रेस ने तो ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को संविधान के खिलाफ बताया है। 

पिछले साल मोदी सरकार ने लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और नगर निगमों के चुनाव एक साथ कराने के तरीके सुझाने के लिए कोविंद कमेटी गठित की थी।पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली इस कमेटी ने लोकसभा चुनाव से पहले इस साल मार्च में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें अलग-अलग संवैधानिक संशोधनों की सिफारिश की गई थी। इस कमेटी ने सिफ़ारिश की थी कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं और इसके 100 दिनों के अंदर स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जा सकते हैं... 

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बीजेपी बिल को कैसे कराएगी पास....??  बीजेपी के पास लोकसभा में 240 सीटें हैं। बहुमत के लिए उसे टीडीपी, जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) जैसे सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ता है। अब ऐसे भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि एक साथ चुनाव कराने की बीजेपी की योजना उसके सहयोगी दलों का समर्थन मिलेगा या नहीं...? 

अगर 2029 में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ होना है तो कई राज्य विधानसभाओं को उनके पांच साल के कार्यकाल से पहले भंग कर दिया जाएगा। यानी उनका कार्यकाल पूरा होने से काफी पहले चुनाव के लिए राज्य को तैयार होना होगा.. 

पिछले साल जिन 10 राज्यों में नई सरकारें बनीं उनमें 2028 में फिर से चुनाव होंगे और नई सरकारें लगभग एक साल या उससे भी कम समय तक सत्ता में रहेंगी। ये राज्य हिमाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, तेलंगाना, मिजोरम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान हैं.... 

उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में चुनाव 2027 में होने हैं यानी इन राज्यों में 2027 में बनने वाली सरकारें दो साल या उससे कम समय तक चलेंगी, इसी तरह पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और केरल में चुनाव 2026 में होने हैं। यहां ऐसी सरकारें होंगी तीन साल तक चल पाएंगी...

अथवा इन राज्यों का निर्धारित समय में चुनाव ना कराकर इनके कार्यकाल को 2029 तक बढ़ाना पड़ेगा.... 

केवल अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा में जहां इस साल चुनाव हो चुके हैं या हो रहे हैं पांच साल तक एक ही सरकार चल सकती है.... 

यानी अब आप सोचिए की इसकी वजह से क्या खेल होगा…।


शुक्रवार, 20 सितंबर 2024

प्रसादम में चर्बी की साजिश के पीछे की कहानी...

 प्रसादम में चर्बी की साजिश के पीछे की कहानी...


तिरूपति के श्री वेंकैंटेश्वर बालाजी के प्रसाद लड्‌डू में गाय की चर्बी और मछली के तेल की पुष्टि से संघ सहित कई हिन्दूवादियों का मुंह धीरे धीरे खुलने लगा है लेकिन वह क्या इतना खुल पायेगा कि इसकी सच्चाई से परदा उठ जाए?

इस सवाल का उत्तर जानने के लिए उस बाजारवाद के खेल को समझना जरुरी है जिस बाजार वाद के खेल में सत्ता सब  कुछ अपने मित्रों को सौंप देना चाहती है?

याद कीजिए नंदनी दूध को लेकर मचे बवाल में सरकार को अमूल को घुसाने के कद‌म को वापस लेना पड़ा  था । लेकिन चुनाव भर यह मुद्दा छाया रहा क्योंकि वह दक्षिण का राज्य है, हिन्दीभाषी राज्य नहीं जहाँ धर्म की पट्टी ने लोगों की सोचने  समझने की शक्ति ही छीन ली है।

मेरा दावा है कि अब आपके जेहन में यह बात आ गई होगी कि प्रसादम के लड्डू में गाय और सुअर की चर्बी कैसे आई । नहीं आई है तो दंतक्रांति में मछली की हड्‌डी का मामला कोर्ट कैसे पहुंचा वह ध्यान में रख ले।

और यदि अब भी नहीं आई समझ में तो इसे ऐसे जान ले करोड़ो रूपये कमाने वाले मंदिर ने जब नदिनी डेयरी के दो चार रुपये कीमत बढ़ाने पर दूसरी जगह से घी लेना शुरु किया तो नंदिनी डेयरी के कर्ताधर्ताओं ने कहा दो चार रूपयों के लिए था  यह न किया जाए।


अब इसे सुनील सिंह बघेल मध्यप्रदेश  के शब्दों में ऐसे समझ लिजिए

#तिरुपति के प्रसाद लड्डू जिस घी से बनता है उसमें  मछली का तेल.. सूअर.. बीफ की चर्बी मिले होने की खबर आपने पढ़ ली होगी.. चलिए इस दुखद कथा के पीछे कौन सी पटकथा शामिल है.. और उस पटकथा का एक हिस्सा मध्य प्रदेश भी है... कैसे..?? तो आइए उसे समझते हैं.. कुछ तथ्य आपके सामने रखता हूं..निष्कर्ष आप निकाल लीजिएगा..।

तो पहला तथ्य.. कभी इंदिरा गांधी के जमाने में शुरू हुए ऑपरेशन श्वेत क्रांति की पैदाइश थे, देश भर के सांची ,अमूल जैसे दुग्ध संघ.. इसमें सबसे प्रतिष्ठित दुग्ध सघों में से एक रोजाना 80 लाख लीटर दूध एकत्र करने वाला कर्नाटक दुग्ध संघ (#KMF) का ब्रांड #नंदिनी भी शामिल है..

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दूसरा तथ्य दिमाग में रखिए ..बड़ी कंपनियों की नजर काफी समय से ,डेयरी क्षेत्र के अरबों के कारोबार को दुहने पर है.. केंद्र सरकार लंबे समय से प्रयासरत है कि देशभर के सांची, नंदिनी जैसे स्थापित ब्रांड वाले सहकारी दुग्ध संघ, केंद्र के अधीन आ जाएं.. उनका संचालन नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के पास आ जाए। इसके पीछे तर्क..दावा वही "तपस्या में कोई कमी रह गई होगी " वाले 3 किसान बिल जैसा , यानी किसान हित का था..

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अब जरा कर्नाटक की एक पुरानी घटना याद दिलाता हूं..यूं तो 6-7 सालों से दुग्ध संघों को पहले बदहाल करो और फिर  हथियाने की रणनीति के तहत.. समय-समय पर हमले होते रहे हैं.. ऐसी ही हड़पने की अप्रत्यक्ष कोशिश कर्नाटक के नंदिनी ब्रांड के साथ भी की गई... लेकिन कर्नाटक की जनता का इस ब्रांड से जुड़ाव और भरोसा कितना होगा कि, इसकी भनक लगते ही जनता, स्थानीय राजनीतिक दल विरोध में आ गए.. यहां तक की #NANDANI यह चुनावी मुद्दा बन गया.. केंद्र को कदम वापस खींचने पड़े।

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अब आते हैं चौथे तथ्य पर ..तिरुमाला देवस्थान में बनने वाले लड्डू प्रसादम के लिए घी सप्लाई करने की जिम्मेदारी 40-50 सालों से सहकारिता क्षेत्र के कर्नाटक के नंदिनी घी के पास थी। तिरुपति में सालाना करीब 4.5 हजार मी.टन की की जरूरत होती है। यानी नंदिनी घी का एक बड़ा स्थाई ग्राहक।

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#nandani को हड़पने की कोशिश कर्नाटक की जनता और नेताओं ने असफल कर दी.. चोर दरवाजे से अमूल को घुसाने की कोशिश असफल हो गई। जाहिर है यह बात केंद्र में बैठे हुक्मरानों को नागवार गुजरी। नजरे टेढ़ी हुई। 40-50 सालों से तिरुपति को रियायती दामों पर घी सप्लाई कर रहे कर्नाटक दुग्ध संघ के हाथ से ,घी सप्लाई का ठेका निकाल कर निजी हाथों में पहुंचा दिया गया।

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 दरअसल जब दूध की कीमत बढ़ी तो घी की कीमत भी बढ़ी.. नंदिनी घी के भाव भी बढ़े.. लेकिन सिर्फ लड्डू बेचकर 500 करोड़ से ज्यादा कमाने वाले तिरुमाला देवस्थान ने, दो चार रुपए के पीछे घी सप्लाई का ठेका, निजी हाथों में दे दिया। तब भी कर्नाटक दुग्ध संघ के अध्यक्ष ने आगाह किया था कि  दूध के जो भाव है उसे देखते हुए, इतने कम भावों पर घी बनाना और बेचना संभव ही नहीं है.. यदि कोई देता है तो यह गुणवत्ता से समझौता करना होगा.. (ऐसी तमाम पुरानी मीडिया रिपोर्ट यूट्यूब पर मौजूद हैं).. खैर सनातन के इन नए तथाकथित रखवालो को गुणवत्ता से क्या लेना देना..?? नंदिनी से हजारों टन घी का ठेका छीनकर हुकुम उदूली का सबक तो सिखा दिया ना..!!

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अब आईए समझते हैं तिरुमाला देवस्थान के चर्बी वाले लड्डू , नंदिनी घी और इस घटना का प्रदेश से क्या रिश्ता है..?? सांची हमारा जाना पहचाना नाम है.. पीढियां सांची दूध पीकर बड़ी हुई है..। प्रदेश में सांची के 11000 गांव में फैली 33000 दुग्ध समितियां के नेटवर्क को हथियाने कोशिश तो शिवराज जी के जमाने से ही होने लगी थी। शायद वे असली खेल को समझते थे.. इसलिए केंद्र का खेल पूरी तरह सफल नहीं हो पाया.. लेकिन इसकी पूर्णाहुति, मौजूदा सरकार के कुछ दिन पहले लिए गए निर्णय से हो चुकी है.. 

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अभी तो किसान हित की आड़ में सांची की कमान नेशनल  डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के पास पहुंचने का रास्ता साफ हुआ है.. फिर यह कमान धीरे से किन हाथों मे  पहुंचेगी..?? इस को समाजशास्त्रीय राजनीति शास्त्र नहीं, बल्कि अपराध शास्त्र के नजरिए से समझने की कोशिश कीजिए.. पूरा असली खेल समझ में आ जाएगा।

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सांची को हड़पने की शुरुआत हो चुकी है ...लेकिन यह कर्नाटक की नहीं ,मध्य प्रदेश की जनता है.. वह तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से आए 'हिंदू खतरे में है' वाले मैसेज पढ़ने फॉरवर्ड करने.. हनुमान आरती बाबाओ के दरबार में हाजिरी लगाने.. 5 किलो राशन, लाडली बहना मे मगन है.. रही बात नपुंसक हो चुके विपक्षी दलों के नेताओं की तो, उनके पास ना तो इस षड्यंत्र को समझने की समझ है और ना ही साहस..हां जिस ईमानदार अधिकारी प्रमुख सचिव गुलशन बामरा ने समझा, उसे इस 'केंद्र शासित प्रदेश' ने रातों-रात बाहर का रास्ता दिखा दिया.. लूट पर मोहर लग चुकी है।

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तो हे #व्हाट्सएपिया_सनातनी ..!!यदि तुमने भी पिछले साल 2 सालों में तिरुपति का प्रसाद खाया है तो भी चिंता करने की जरूरत नहीं है... किसी पंडित ब्राह्मण से संपर्क करो.. हमारे धर्म में प्रायश्चित पूजा पाठ का विधान है.. वह तुम्हारा सनातन सुरक्षित कर देगा.. बस फिर क्या नए जोर से से जुट जाना अपने राष्ट्रीय कर्तव्य में.. भूल गए..??अरे वही काम.. हिंदू खतरे में जो ह…!