शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2024

जलेबी की फ़ैक्ट्री और ट्रोलर गैंग की कुंठा

 जलेबी की फ़ैक्ट्री और ट्रोलर गैंग की कुंठा


हरियाणा में राहुल गांधी ने जलेबी की फैक्ट्री क्या बोला, ट्रोलर गैंग बिलबिलाते बाहर आ गये, और वॉट्साप यूनिवर्सिटी में कापी पेस्ट कर अपने वॉल पर चेपने लगे।

न तो इन्हें तथ्य और तर्क से लेना देना है और न ही इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक व्यापारिक या व्यवहारिक ज्ञान ही होता है  , बस उन्हें नफरत का खेल खेलना है

ऐसा नहीं है कि ट्रोलर पक्ष सिर्फ हिन्दुवादी संगठनो में ही शामिल है, मुस्लिमवादी से लेकर हर पक्ष में यह गैंग आपको मिल जायेगा, ज्ञान के स्तर पर कुंठित और दरिद्र लोगों का यह समूह कॉपी-पेस्ट करते समय यह भी नहीं सोचता कि इससे उनकी अपनी ही बेइज्जती हो रही है, घोर बेइज्जती ।

राहुल गांधी के जलेबी की फ़ैक्ट्री वाले बयान को मिम्स और चुटकुलों के जरिये मजाक उड़ा‌ने वालों की बुद्धि पर तरस इसलिए भी आता है क्योंकि  जिसे वे अपने माई-बाप बताकर कॉपी पेस्ट करते है वह सांस्कृतिक राष्ट्र‌वाद का दावा करते नहीं थकता ।

अचानक बिलबिलाते लोग जलेबी की खेती वाले मिम्स बनाकर कहने लगे कि जलेबी तो हलवाई की दूकान में बनता है न कि फैन्ही में।

पर इन कोपी पेस्ट वाले ट्रोलरों को क्या पता कि हलवाई अपनी दूकान के लिए मिठाई या जलेबी बनाते है,  वे इन निर्माण स्थलों को कारखाना या फैक्टरी ही कहते है, सिर्फ़ हलवाई ही नहीं बड़े बड़े टेलरिंग शॉप वाले भी जहाँ अनेको दर्जी बिठाकर सिलाई करवाते है उसे भी सिलाई कारख़ाना या फ़ैक्ट्री ही कहते है। मिक्चर फैक्ट्री, मिठाई कारख़ाना यह आम बोलचाल में है। यही रायपुर के बड़े प्रतिष्ठित  मिठाई दुकान वाले जहाँ उनकी मिठाइयाँ जलेबी और नमकीन बनती  उसे कारख़ाना या फ़ैक्ट्री ही कहते हैं, पेठा कारख़ाना या फ़ैक्ट्री तो इसी शहर में चर्चित है।

अब इन लोगो को मिलने वाले ज्ञान के संस्कार केंद्र को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद कह देने भर से संस्कारी तो होगा नहीं…।

गुरुवार, 3 अक्टूबर 2024

बलात्कारी भाजपाई हो तो प्रदर्शन करना भी गुनाह

 बलात्कारी भाजपाई हो तो प्रदर्शन करना भी गुनाह.


2014 के बाद जिस नये भारत का दावा किया गया था उस भारत में क्या  बलालारियों की जाति और धर्म देखकर सजा का प्रावधान है। क्या भाजपाई बलात्कारी हो तो उसे पैरोल में भी छोड़ा जायेगा और उसका स्वागत सत्कार भी होगा और क्या ऐसे बलात्कारियों के खिलाफ प्रदर्शन करना गुनाह है।

यह सवाल अब इसलिए बड़ा होने लगा है क्योंकि बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ने विश्वविघालय कैम्पस में बलात्कार करने वाले भाजपाईयों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले  13 छात्र-छात्राओं को तीन माह के लिए  अनुशासनहीनता के नाम पर निलंबित कर दिया है।

इस मामले को लेकर विपक्ष मोदी और योगी सरकार पर हमलावर है। लेकिन इस दौर में जिस तरह से बड़े  लक्ष्य के  नाम पर सत्ता , बलात्कारियों को संरक्षण दे रही है उसने बेशर्मी की सभी हदे लांघ दी  है या बेशर्मी की पराकाष्ठा कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा।

वैसे भी यदि व्य‌क्ति कित‌ना भी प्रतिभाशाली हो लेकिन वह शासन तंत्र के प्र‌भाव में काम करता है तो सत्ता से उन्हें सम्मान प्राप्त हो ही जाता है।

बनारस विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुधीर के जैन को राष्ट्रपति श्री कोविद के हाथों पद्‌म श्री तो मिल ही चुका है, वे बनारस में कुलपति बनने से पहले गांधी नगर गुजरात के प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय के डायरेक्टर भी थे। यानी आप समझ लें।

अब 13  छात्र-छात्राको के निलंबन को लेकर मचे बवाल के बीच कथित बड़े उद्देश्य के लिए किये गये  कुछ कारनामों का  जिक्र ज़रूरी है-

- कठुआ में मासूम बच्ची के बलालारियों का सम्मान

- गुजरात में बिल्किस बानो के दर्जन भर बलात्कारियों  की समय पूर्व रिहाई और सम्मान

- देश का नाम रौशन करने वाली बेटियो के यौन शोषण के आरोपी बृजभूषण शरण सिंह को संरक्षण और उनके बेटे को सांसद की टिकिट

- बलात्कारी राम रहीम को दर्जन भर से अधिक बार पैरोल पर रिहाई

ये बड़े काम है बाकि देश भर में ऐसे कई काम चल ही रहे हैं !


ताजा मामला जग्गी वासदेव को सुत्री कोर्ट से करवाए।

बुधवार, 2 अक्टूबर 2024

शक्ति स्वरूपा जगदम्बा..

 


प्रतिवर्ष दुर्गोत्सव मनाया जाता है। गांव, शहर, मोहल्ले और यहां तक कि घर-घर में माँ के हर रूप की पूजा होती है। चौक चौराहों पर माता की प्रतिमा स्थापित किए जाते हैं। मंदिरों में ज्योति कलश व जंवारा स्थापित ही नहीं होते बल्कि माता की सेवा में ढोलक के थाप पर गीत गूंजते हैं। मेहमूद या फैज़ल के संगीत की थाप पर डांडिया की गूंज आकाश में दूर-दूर तक सुनाई पड़ती हैं। याद किया जाता है माँ के स्वरूप को, याद किया जाता है माँ की महिमा और भारतीय संस्कृति तथा उत्सव की वजह को।
भारतीय जीवन में नारी सा पूज्यनीय कोई और नहीं है। यही वजह है कि कई प्रांतों में माता-पिता आज भी अपनी पुत्री का चरण स्पर्श करते हैं और विवाह पश्चात उनके घर का अन्न-जल ग्रहण नहीं करते। नारी पूज्यनीय है, देवी है और उनकी शक्ति का सर्वत्र गुणगान करते नहीं थकते। नारी सावित्री बनकर अपने पति का जीवन लाने यमराज से लड़ जाती है। राधा बनकर पूरी सृष्टि में प्रेम का संचार करती है, मीरा बनकर वह सब कुछ त्याग करने तैयार रहती है तो रानी लक्ष्मी बाई बनकर देश को आजादी दिलाने तत्पर हो जाती है, वह कृष्ण की मां बनकर यशोदा मैय्या हो जाती है तो राम की मां बनकर कौशल्या माता बन जाती है, नारी में मां का स्वरूप अवर्णित है। मां के दूध से सिर्फ जीवन नहीं मिलता वह लहु में घुलकर हमारे भीतर शक्ति का संचार करती है। शक्ति हमारे भीतर है, धर्म हमारे भीतर है। धर्म हमें राह दिखाता है और शक्ति इस राह की कठिनाई को दूर करती है।  शक्ति हमारा विश्वास है। विश्वास का प्रतीक गणेश जी है इसलिए हम हर साल गणेशोत्सव भी मनाते हैं। वे विध्नहर्ता हैं, हमारा विश्वास है। यही विश्वास लिये हम अपने पूर्वजों का आशीर्वाद लेने के बाद माता की शक्ति को ग्रहण करते हैं। विश्वास के बाद शक्ति ही हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। शक्ति का दुरुपयोग न हो, मां यही तो सिखाती है।
शक्ति के अनेक रूप है इसलिए वह महामाया है, वह शक्तिशाली होते हुए भी शीतल है इसलिए छत्तीसगढ़ में गांव-गांव में शीतला माता विराजती हैं। पूरे नौ दिन माता की सेवा में गीत गाये जाते हैं, वह जननी है इसलिए जंवारा बोया जाता है। उत्सव हमारे प्राण वायु है, उत्सव हमें एक होने की प्रेरणा देता है। उत्सव हमें समझाता है जीव मात्र एक है, इसलिए माता का वाहन सिंह है। हम फल पुष्प चढ़ाते हैं, उपवास रखते हैं, सिर्फ फलाहार करते हैं। यह उत्सव हमें सबक देता है कि ईश्वर और प्रकृति के सामने सब एक हैं। मनुष्य को बचाना है तो प्रकृति को बचाना जरूरी है। इसलिए देवी-देवताओं ने अपने वाहनों, पूजा अर्चना में प्रकृति को जोड़कर रखा।
आज़ादी के बाद हमें संभलना था। इन उत्सवों के माध्यम से हमें सबको जोड़कर चलना था। मंदिर में हीरे-मोती चढ़ाने वाले भी पहुंचते हैं और खाली हाथ दर्शन करने वाले भी आते हैं। देवी-देवताओं ने कभी भेद नहीं किया। परन्तु भेद करना हमने शुरू किया। हमारे स्वार्थ ने मानव-मानव में अंतर किया। यह अंतर मिटना चाहिए। छत्तीसगढ़ की नारी बलशाली है। वह खेतों में भी उतनी ही सिद्धत से काम करती है जितना वह जंवारा विसर्जन के लिए समर्पित होती है। यहां बेटियों में भेद नहीं है, यहां कोख में बेटियां नहीं उजाड़ी जाती। इसलिए छत्तीसगढ़ महतारी है। महतारी यानी मां, मां यानी जननी। जननी भेद नहीं करती बल्कि वह कमजोर बच्चों पर ज्यादा ध्यान देती है।
मां की माया अपरंपार है। इसलिए वह महामाया है। नई पीढ़ी यह सब नहीं जानती। इसमें इनका दोष नहीं है। हमने ही इन्हें नहीं बताया। विदेशीपन की दौड़ शुरु कर दी। इस आधे अधुरे दौड़ में न वह विदेशी ही बन सका न ही अपनी संस्कृति और संस्कार से ही परिचित हो सका। वह विज्ञान की जाल में उलझ गया। उसे वही ठीक लगा जो       विज्ञान कहता है। परन्तु विज्ञान वही कहता है जो वह जानता है। विज्ञान आस्था को नहीं जानता। कण-कण में भगवान को वह अभी भी ठीक से नहीं जान सका। इसलिए नई पीढ़ी दुर्गोत्सव तो मना रहा है परन्तु विदेशी तौर तरीकों से। ऐसे में न संस्कार बचेगा न संस्कृति। सब गड़बड़ हो जायेगा।
आधा अधूरा रिश्ता या समझ हमेशा ही तकलीफ देता है। आज वहीं हो रहा है। जरूरत है तो काम ले लो वरना प्रवेश पर ही पाबंदी लगा दो। ईश्वर पाबंदी से परे है यह सब जानते हैं परन्तु जाति धर्म की खाई चौड़ी हो गई है। हम जगत जननी जगदम्बा का उत्सव तो मना रहे हैं परन्तु जननी की सहनशीलता से कुछ नहीं सीख रहे हैं।
उत्सव हमारी संस्कृति है। मनुष्य को मनुष्य से जोडऩे का माध्यम है। उन्हेंं समझने का साधन है। उत्सव से राष्ट्रीय स्वरूप विकसित होता है। देवी-देवताओं का प्रकृति से लगाव हमें नई सीख देती है। ताकि हम संस्कार के नए बगीचे तैयार कर सकें। परन्तु क्या ऐसा हो रहा है? हम उत्सव मना तो रहे हैं, अपने तौर-तरीकों से। जगत जननी जगदम्बा के आगे संगीत की थाप पर डांडिया खेला जा रहा है। ढोलक की थाप पर सेवा गीत गाये जा रहे हैं, पर श्रद्धा और विश्वास कम होता जा रहा है। शक्ति का दुरुपयोग हो रहा है, पर माँ सब चुपचाप देख रही है। महिषामर्दन होगा... जरूर होगा...।

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2024

निपटने - निपटाने के खेल में अफसरों की मुश्किलें बढ़ी

निपटाने में दो मिनट नहीं लगेगा - मोहन 

 निपटने - निपटाने के खेल में अफसरों की मुश्किलें बढ़ी



 वैसे तो राजनीति में निपटने और निपटाने का नया नहीं है। लेकिन छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों यह खेल सुर्ख़ियों में तब आया जब रायपुर के कद्‌दावर माने जाने वाले बृजमोहन अग्रवाल को सांसद की टिकिट दी गई।

 कहने को तो इसे प्रमोशन कहा जा रहा है लेकिन मंत्री पद के आगे सांसद की हैसियत को आम आदमी भी जानता है,  तो भला मोहन सेठ के नाम से चर्चित बृजमोहन अग्रवाल के समझ में क्यों नहीं आता, इसलिए 6 माह मंत्री रह सकने के तमाम दावे की कलई केविनेट की भरी बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ही खोल दी। और बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकाले गये की तर्ज पर मन मसोसकर इस्तीफ़ा देना पड़ा।

लेकिन निपटने - निपटाने का खेल अमी ख़त्म नहीं हुआ था बल्कि शुरुआत आरंग के महानदी पुल में हुए कथित मॉब लिंचिग  से तेज हो गया। मोहन सेठ ने इस  मामले में अपने ही सरकार को घेरने को लेकर बवाल मचा तो मोमबत्ती बुझाने वाले अपमानजनक बीडियों ने इसे हवा दे दी।

और कहा जा रहा है कि इस निपटने - निण्टाने को खेल इसलिए खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है क्योंकि इसे सलाहकार ही हवा दे रहे है। हालांकि इस खेल में नुकसान किसका होगा कहना मुश्किल है लेकिन उसके चलते अफ़सरों की मुश्किले जरूर बढ़ गई है। और गुस्सा अफ़सरों पर ही निकलने लगा है।

इसका ताजा उपहरण जे चार दाने स्कूल में आयोजित स्वच्छता की पाठशाला बाले कार्यक्रम में तब देखने को मिला जब मोहल सेठ एक अफसर को ही कह दिया कि प्रोटोकॉल हमे न सिखाओ, निपटाने में दो मिनट लगेंगे।

मीडिया रिपोर्ट की माने तो मोहन सेठ का यह ग़ुस्सा अकारण नहीं था दरअसल अफ़सरों की प्राथमिकता मंत्री होते है ऐसे में अफ़सर ये नहीं समझ पाये कि ये सिर्फ़ सांसद बस नहीं है बल्कि ख़ुद को इससे भी बड़े समझने वाले हैं । 


सोमवार, 30 सितंबर 2024

युवाओं के आँखों की किरकिरी बन गये चौधरी

  युवाओं के आँखों की किरकिरी बन गये चौधरी


इसमें किसी को संदेह नहीं है कि अफसरी से राजनीति में आये ओपी चौधरी  न केवल चतुर व्यक्ति है बल्कि डबल इंजन की सरकार में उनकी पकड़ भी बेहद मजबूत है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा भरे मंच में पीठ ठोंकने के बाद ओपी चौधरी का रुतबा जिस तेजी से बढ़ा, उतनी ही तेज़ी से उनकी छवि शिक्षक भती वाले वीडियो वायरल होने के बाद बिगड़ने लगी है कहा जाए तो गलत नहीं होगा|

कहा तो यहां तक जा रहा है कि वित्त मंत्री बनने के बाद जिस तरह से उन्होंने शासन-प्रशासन में अपनी पकड़ मजबूत की उतनी ही तेजी से युवाओं में उनकी छवि फ़िसलने लगी है। तो इसकी बड़ी वजह 33 हजार शिक्षकों की भर्ती नहीं होने के अलावा नियमितिकरण को लेकर चलने वाला आन्दोलन भी है।

सूत्रों की माने तो इस बिगड़ती छवि की जानकारी ओपी चौधरी को भी लग गई है इसलिए वे इन दिनों अपनी छवि सुधारने के नाना प्रकार के उपाय कर रहे हैं। जनसंपर्क की पूरी टीम के अलावा पत्रकारों में घुसपैठ बनाने कोरबा का एक व्यापारी भी सक्रिय है, लेकिन भोपाल वाली खबर ने एक बार फिर पोर्टल वालों की डिमांड बढ़ा दी है।   ऐसे में ओपी चौधरी की मुश्किल यह है कि छवि सुधारने के खेल में छवि बिगड़‌ने का खतरा भी बढ़ गया है और जहां गुड़ वहां मक्खी की तर्ज पर चल रहे इस खेल का अंजाम क्या होगा कहना मुश्किल है लेकिन छवि सुधारने में खतरे तो उठाने हो होगे।

रविवार, 29 सितंबर 2024

ईडी ने वसूली तो छत्तीसगढ़ में भी की है...

 ईडी ने वसूली तो छत्तीसगढ़ में भी की है...

कहाँ है रामगोपाल…


इलेक्ट्रोरल बांड ने मोदी ब्राण्ड को बुरी तरह बेनकाब कर दिया है, बेंगलुर की अदालत के द्वारा वित्त मंत्री निर्मला सितारमन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा सहित 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर के आदेश ने इस आरोप की पुष्टि कर दी है कि मोदी सरकार में ईडी का काम क्या था।

ऐसे में छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला, कोयला परिवहन घोटाला, महादेव सट्‌टा एप सहित कई मामलों की जांच में भी क्या इडी ने वसूली की है। यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है, क्योंकि इडी की  कार्रवाई पहली नजर में पक्षपात पूर्ण दिखाई देने लगी है।

ईडी की कार्रवाई मैं जो पहला पक्षपात दिखाई देता है वह आई एएस व आईपी एस अफसरों पर कार्रवाई को है और इसके बाद गिरफ्तारी की सूची में उन नामों का ग़ायब होना जिस पर सबसे ज्यादा संदेह था। उसके अलावा कुछ लोगों को फ़रार होने का मौका देना और इसके बाद ई ओ डब्ल्यू में एफआई आर की सूची।

छत्तीसगढ़ में इडी की वसूली की चर्चा में वे नाम सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में है जिसका नागपुर कनेक्शन है । और कहा जाता है कि ऐसे आईपीएस अफ़सरों से 15 से 25 करोड़ के बीच वसूली हुई है। कोयला परिवहन घोटाले से जुड़े इन अफसरों से पूछताछ तो हुई है लेकिन पैसा लेकर छोड़ देने का आरोप है और इन अफसरों की साय सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति भी कम चौंकाने वाला नहीं है।

इस पूरे मामले में सबसे चर्चित नाम तो आईएएस विवेक ढांड और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और  उसके रिश्तेदार है। कहा जाता है कि रामगोपाल को सेंटिंग के तहत ही फरार होने का मौका दिया गया।

हुब इस खेल में क्या क्या हुआ और कौन कौन आरोपी बचा लिये गए है हम आपको बताते रहेंगे, आरोपों से घिरे अफसरों को साय सरकार ने कैसे सर माथे पर बिठाया है और उनका नागपुर कनेक्शन भी  चर्चा में है।

शनिवार, 28 सितंबर 2024

अडानी को बचाने वाले पर अमेरिका ने कसा शिकंजा…

 अडानी को बचाने वाले पर अमेरिका ने कसा शिकंजा…



अमेरिका के मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सजेंज कमीशन ने एन आर आई निवेशक राजीव जैन की कंपनी पर जीक्यूजी पार्टनर्स पर पांच लाख डॉलर का जुर्माना लगा दिया है कंपनी पर व्हिसलब्लोअर सुरुक्षा नियम के उल्लयेन का आरोप है, और इस कंपनी जी क्यू जी ने इस आरोप के खिलाफ जाने की बजाय पांच लाख डालर को जुर्माना भरने पर सहमत हो गया है।

दरअसल हिडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद गौतम अदानी की मुसिबतें थमने  का नाम ही नहीं ले रहा है। केऱ्या में एयरपोर्ट को लेकर कोर्ट के फैसले के ने बाद भारी नुक़सान के साथ-साथ बांग्लादेश में तख्ता पलट की वजह से वहाँ चल रहे अदाणी ग्रुप के  प्रोजेक्ट भी खतरे में है तो अब श्रीलंका में नये राष्ट्र‌पति चुने जाने के बाद अडानी की ग्रीन एनर्जी कंपनी के प्रोजेक्ट पर भी खतरा मंडरा रहा है। अभी इन  मामलों से अडानी उबर भी नहीं पाये है कि अमेरिका से आ रही खबर ने भी सभी को चौंका दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिका के एनआरआई निवेशक राजीव जैन की कंपनी जीक्यूजी पार्टनर्स 5 लाख डॉलर का जुर्माना भरने को तैयार हो गई है। अमेरिका के मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने कंपनी पर व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन रूल्स के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया है। कंपनी ने इन आरोपों का स्वीकार करने या इनका खंडन करने के बजाय इसे सेटल करने पर सहमति जताई है। इसके लिए कंपनी 5 लाख डॉलर का पेनाल्टी भरेगी। जीक्यूजी पार्टनर्स पिछले साल उस समय सुर्खियों में आई थी जब उसने अडानी ग्रुप की कंपनियों में भारी निवेश किया था। हिंडनबर्ग रिसर्च की एक रिपोर्ट के कारण अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आ रही थी।

एसईसी ने कहा कि जीक्यूजी ने व्हिसलब्लोअर सुरक्षा नियम 21एफ-17(ए) का उल्लंघन किया है। यह किसी व्यक्ति को संभावित प्रतिभूति कानून उल्लंघन के बारे में एसईसी कर्मचारियों से सीधे संवाद करने से रोकने के लिए किसी भी कार्रवाई को प्रतिबंधित करता है। नियामक ने जीक्यूजी पर रोजगार के लिए उम्मीदवारों और एक पूर्व कर्मचारी के साथ ऐसे समझौते करने का आरोप लगाया है जिससे उनके लिए एसईसी को संभावित प्रतिभूति कानून उल्लंघनों की रिपोर्ट करना अधिक कठिन हो गया।

SEC के मुताबिक नवंबर 2020 से सितंबर 2023 तक GQG ने 12 उम्मीदवारों के साथ नॉन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स किए। इससे उन्हें GQG के बारे में गोपनीय जानकारी का खुलासा करने से प्रतिबंधित किया गया। SEC का कहना है कि GQG ने एक पूर्व कर्मचारी के साथ भी सेटलमेंट एग्रीमेंट किया। उसके वकील ने GQG को धमकी दी थी कि वह रेगुलेटर को कथित प्रतिभूति कानून उल्लंघनों की रिपोर्ट करेगा। जीक्यूजी पार्टनर्स ने भारत में कई कंपनियों में निवेश किया है। इनमें अडानी ग्रुप की छह कंपनियां भी शामिल हैं।