रविवार, 23 अगस्त 2026

राजनीतिक वर्चस्व की अघोषित जंग: राजनांदगांव में श्रेय लेने की होड़ और बिखरता संगठन

 राजनीतिक वर्चस्व की अघोषित जंग: राजनांदगांव में श्रेय लेने की होड़ और बिखरता संगठन


 एक ही क्षेत्र, एक ही पार्टी, लेकिन दिग्गजों के चार ठिकाने! जानिए कैसे विकास कार्यों से लेकर तबादलों तक 'क्रेडिट वार' में उलझ कर रह गई है राजनीति।

भूमिका: सत्ता के भीतर 'सह और मात' का खेल

छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों सबसे ज़बरदस्त राजनीतिक खींचतान का केंद्र बना हुआ है—राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र [00:07]। बाहर से शांत दिखने वाले इस क्षेत्र के अंदर सत्ता और संगठन के चार बड़े और कद्दावर चेहरों के बीच अघोषित जंग छिड़ चुकी है [00:43]।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, दो बार के सांसद संतोष पांडे और पंडरिया विधायक भावना बोहरा—ये सभी एक ही राजनीतिक दल से ताल्लुक रखते हैं [00:18]। लेकिन क्षेत्र में अपना एकछत्र वर्चस्व कायम करने और हर विकास कार्य का 'क्रेडिट' बटोरने की यह होड़ अब सरेआम हो चुकी है [00:43]।

1. नेशनल हाईवे-30: जब एक ही मांग पर दोबारा खिंची तस्वीर

श्रेय लेने की राजनीति का सबसे ताज़ा उदाहरण राष्ट्रीय राजमार्ग 30 (धवईपानिया से सिमगा) के चौड़ीकरण और उन्नयन के मामले में देखने को मिला [03:02]।

 हकीकत: प्रदेश के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने मार्च 2026 में ही केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा था [03:34]। इसके बाद जून 2026 में कवर्धा-सिमगा हिस्से के डीपीआर का टेंडर भी बाकायदा जारी हो चुका था [03:58]।

 श्रेय की होड़: इसके बावजूद अगस्त 2026 में सांसद संतोष पांडे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर उसी सड़क की मांग का फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करते नजर आए [03:14]। सवाल उठा कि क्या सांसद महोदय को जून में जारी टेंडर की खबर नहीं थी, या फिर यह सिर्फ तस्वीर खिंचाकर क्रेडिट बटोरने का प्रयास था? [04:07]

2. 7 साल पुरानी रेल लाइन की 'नई' स्वीकृति का दांव

क्रेडिट वार का दूसरा बड़ा मामला कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना को लेकर सामने आया [05:47]।

 सरकारी दावा: हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, सांसद संतोष पांडे और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने दावा किया कि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात के बाद इस परियोजना की 'नई स्वीकृति' मिली है [06:40]।

 विपक्ष की चुटकी और जमीनी सच: कांग्रेस ने इस दावे की धज्जियां उड़ाते हुए याद दिलाया कि 6 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल, तत्कालीन सीएम डॉ. रमन सिंह और तत्कालीन सांसद अभिषेक सिंह की मौजूदगी में इस लाइन का भूमिपूजन पहले ही हो चुका था [07:30]। जो परियोजना 7 साल पहले स्वीकृत होकर ठप पड़ी थी, उसे 'नई परियोजना' बताकर श्रेय लेने की होड़ पर जमकर सवाल उठे [07:55]।

3. 'गायब नाम' और 'तबादलों पर ठन'

यह खींचतान सिर्फ विकास कार्यों के टेंडर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक फैसलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के निमंत्रण पत्रों में भी हावी है:

 निमंत्रण पत्रों से दूरी: हाल ही में रायपुर में आयोजित सेन समाज के बड़े कार्यक्रम में जिले भर के नेताओं के नाम निमंत्रण पत्र में थे, लेकिन कद्दावर नेता बृजमोहन अग्रवाल का नाम गायब था [01:24]। इसी तरह जंगल सफारी के उद्घाटन कार्यक्रम में विधायक भावना बोहरा का नाम गायब रहने पर भी भारी बवाल हुआ था [04:37]।

 थानेदार का तबादला: सूत्रों के अनुसार, एक मामूली थानेदार के तबादले को लेकर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और डिप्टी सीएम विजय शर्मा के बीच खींचतान की स्थितियां बन गई थीं [05:22]।

4. असमंजस में कार्यकर्ता: सामूहिक इस्तीफे से बढ़ा तनाव

नेताओं की इस आपसी प्रतिस्पर्धा ने धरातल पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को पूरी तरह भ्रमित कर दिया है [08:29]।

 डोंगरगढ़ में इसी अंदरूनी राजनीति से तंग आकर 100 से अधिक कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया [08:39]।

 हालांकि, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव ने कुछ कड़े फैसले लेकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की [08:50], लेकिन कवर्धा, पंडरिया, राजनांदगांव, अंबागढ़ चौकी और मोहला-मानपुर जैसे इलाकों में कार्यकर्ताओं के बीच दबाव और डर का माहौल बना हुआ है [09:09]।

निष्कर्ष: आगे क्या?

एक ही फ्लाईओवर, एक ही सड़क और एक ही रेल प्रोजेक्ट के लिए सोशल मीडिया पर अलग-अलग पोस्टरों और प्रेस रिलीज के जरिए श्रेय की राजनीति चरम पर है [09:36]। विकास के दावों के बीच राजनांदगांव का यह 'पावर गेम' संगठन को किस मोड़ पर ले जाएगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा

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