सोमवार, 8 जुलाई 2024

शंकराचार्य की फिर अवहेलना...

शंकराचार्य ने साफ कर दिया तब बीजेजी का शोर क्यों?

राहुल पर हमले की आशंका, सुरक्षा बढ़ाई गई 


राहुल गांधी के संसद में हिन्दुत्व को लेकर दिये बयान के बाद भाजपा सहित कई हिन्दू संगठन देश भर में बवाल काटने लगे हैं लेकिन इस बवाल का तब कोई मतलब नहीं रह जाता, जब हिदू धर्म के सर्वोच्च गुरु शंकराचार्य जी को राहुल गांधी के बयान में कुछ भी गलत नजर नहीं आता, लेकिन धर्म के आसरे राजनैतिक रोटी सेकने में माहिर भाजपा का अब भी राहुल गांधी पर हमला जारी है और इस हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंटेलीजेसियों ने राहुल गांधी पर हमले की आशंका जाहिर कर दी है।

ज्ञात हो कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान  देश की वर्तमान स्थिति फोर भाजपा के द्वारा धर्म के नाम पर नफरत फैलाने को लेकर संसद में राहुल गांधी ने साफ कहा था कि न तो नरेंद्र मोदी हिंदू  समाज है और न भाजपा या आरएसएस ही हिंदू समाज है। 

इस वक्तव्य के बाद खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद में यह आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने पूरे हिन्दू समाज को हिंसक बता दिया और इसरे बाद देश भर राहुल गांधी के खिलाए भाजपा और हिन्दू‌वादी संगठनों ने प्रदर्शन किया।

राहुल गांधी के वकतव्य को लेकर जब पत्रकारों ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदजी से इस संबंध में सवाल पूछा तो स्वामी शंकराचार्य जी ने साफ कर दिया कि उन्होंने राहुल गांधी के पूरे भाषण को सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि राहुल गांधी के भाषण को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है और इसके लिए दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कारवाई करनी चाहिए ।

लेकिन जब देश के प्रधानमंत्री ही राहुल गांधी के भाषण को हिंसक बता रहे हैं तो कारवाई कौन करे।

हालांकि मोदी सत्ता के इस दौर में शंकराचार्यो की बातों को कितना सुना जा रहा है, कहना कठिन इसलिए भी है क्योंकि राममंदिर के प्राण प्रतिस्था को लेकर भी शंकराचार्यों ने आपति की थी, तब भी मोदी सत्ता और उनसे जुड़े लोगों ने शंकराचार्यों की बात मानने की बात तो दूर उनके ख़िलाफ़ ही विषवमन शुरु कर दिया था। तब ऐसे में राहुल गांधी को क्लीन चीट देने के बाद भी शंकराचार्यो की बात कितनी मानी जायेगी कहना कठिन है।

लेकिन एक बात तो तय है कि शंकराचार्यो की अहमियत को जिस तरह से मोही सत्ता ने गिरोने का काम किया है ऐसा किसी दूसरे धर्म में कहीं नहीं दिखेगा । 

इस मामले में संघ भी इसलिए ख़ामोश है क्योंकि वे भी अब सत्तालोलुपता में पड़ गये है तब हिन्दुत्व की दु‌हाई देने वाले मोदी सत्ता और संघ को शंकराचार्यो की अनदेखी, उपेक्षा को अपमान के लिए भी इतिहास याद रखेगा।

होटल बेबीलोन से खौफ खाती है छत्तीसगढ पुलिस…!



 होटल बेबीलोन से खौफ खाती है छत्तीसगढ पुलिस…

वाणी- हत्याकांड का डरावना सच 


छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बड़े होटलों में शुमार बेबीलान ग्रुप के होटलों की करतूत के आगे छत्तीसगढ़ पुलिस किस तरह नतमस्तक है,  यह वाणी हत्याकांड के मामले में सामने आ गया । वर्ना बेवीलान प्रबंधकों की धौंस के आगे पुलिस भी लावार है , इसका पता ही नहीं चलता ।

ज्ञात हो कि कल सुबह राजधानी के जेल रोड स्थित होटल बेबीलान इन कमरा नम्बर 410 में जिस वाणी गोयल नामक युवती की हत्या हुई लाश बरामद की गई । उस युवती की गुमशुदगी की  रिपोर्ट पर पुलिस जब जाँच के लिए पहुंची थी तो बेबीलान प्रबंधक ने अपनी पहुंच का धौंस दिखाते हुए दो-दो थानेदार और उसकी पूरी टीम को चलता कर दिया था।

दरअसल मामला प्रेम-प्रसंग से जुड़ा हुआ है। अम्बीकापुर के व्यवसायी परिवार की लड़‌की राजधानी में मारुति लाईफ़ स्टाईल में अपने चाचा  के घर में पढ़ाई करने के लिए रहती थी।और 7 जुलाई को जब वह शाम तक घर नहीं लौटी तो वाणी के रिश्तेदारों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कर दी, चूँकि वाणी गोयल के चाचा बाबूलाल गोयल बीजेपी के ज़िला अध्यक्ष है इसलिए राजनैतिक दबाव में पुलिस तलाल सक्रिय हो गई। और वाणी के मोबाईल लोकेशन के आधार पर गंज थाना और सरस्वती नगर  थाना की पुलिस रात ११ बजे ही होटल बेबिलॉन पहुँच गई लेकिन वह होटल में जांच नहीं कर पाई।

कहा जाता है कि पुलिस को होटल में आये देख प्रबंधक ने अपनी पहुंच का ऐसा धौंस दिखाया तो पुलिस चुपचाप लौट आई । लेकिन जब वाणी के घरवालों का दबाव बढ़ा तो वह फिर जांच करने दोबारा पहुँची , लेकिन तब भी होटल प्रबंधकों ने पुलिस को चमका कर भगा दिया।

कहा जाता है कि होटल प्रबंधकों ने जाँच के लिए पहुंची पुलिस टीम को अपनी पहुंच का हवाला देते हुए वर्दी उतरवा देने या संस्पेंड करवा  देने की धमकी दी थी।

इधर इस मामले में नया मोड़ तब आया जब अचानक मोबाईल का लोकेशन नागपुर की तरफ़ जाते दिखाया गया और पुलिस तत्काल नागपुर पहुंचकर मोबाईल  ट्रेन के डिब्बे में लावारिस हालत में बरामद की।


वाणी के परिजनों के बढ़ते दबाव के चलते पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी जब होटल बेबीलान पहुंचे और एंट्री रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज देखे तो पता चला कि वाणी गोयल 7 जुलाई को दोपहर होटल पहुँची है और उसके साथ विशाल गर्ग नामक युवक था।


इसके बाद जब चौथी मंजिल के रूम नम्बर चार सौ दस को खुलवाया गया तो वाणी गोयल की हत्या हो जाने की खबर आई। और खबर  सामने आते ही वाणी ग़ोयल के परिजनों का गुासा होटल कर्मियों और होटल पर फूटने लगा ।होटल कर्मचारियों की पिराई होने लागी, तोड्‌फोड़ की गई। कर्मचारी डर कर  होटल छोड़ भागने लगे और कई देर तक यह हंगामा होता रहा।


पुलिस ने जैसे तैसे इस पर काबू पाया।

इ‌धर के हत्या के बाद ट्रेन के आगे कूदकर विशाल गर्ग के द्वारा आत्महत्या कर लेने की खबर भी आ गई और पुलिस के लिए इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाना आसान हो गया।

ऐक्षा नहीं है के बेबीलोन होटल प्रबंधकों के धौंस के आगे शासन-प्रशासन पहली बार नतमस्तक हुआ है। इससे पहले वीआईपी रोड व्यत इसी ग्रुप के होटल बेबीलोन मैं पर नाले पर ही कब्जा कर पक्का निर्माण की बात सामने आई थी और इसे हराने में निगम के हाथ पाँव फूल गये थे।



सालों कब्जा रहा जब जलभराव से त्रस्त नागरिकों ने मोर्चा खोला तब कहीं जाकर आधा अधूरा कब्जा हटाया गया। 


देखना है इस मामले में अब पुलिस होटल प्रबंधकों पर कार्रवाई  करती है।या फिर कर्मचारियो को पकड़ कर ख़ानापूर्ति कर ली जायेगी।


रविवार, 7 जुलाई 2024

कुपोषण से बच्चों की जा रही किडनी


 यूनीसेक के बाद अब एम्स ने की चेतावनी 

कुपोषण से बच्चों की जा रही किडनी

एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  इस देश को विश्व की बड़ी आर्थिक शक्ति  के रूप में स्थापित करने का सब्जबाग़ दिखा रहे हैं तो दूसरी तरफ़ देश के बच्चों की हालत दिनों दिन खराब होते जा रही है, हालत यह है कि विश्व रैकिंग मैं खुशहाली गरीबी के बाद अब कुपोषण के मामले में भी भारत अपने पड़ोसी देशों से भी बदतर स्थिति में पहुंच गया है। और अब एम्स के ताजा रिपोर्ट साफ़ कर किया है कि कुपोषण के चलते बच्चों को कई तरफ की गंभीर बीमारियों के अलावा बड़ी संख्या में बच्चों की किडनी पर भी असर पड़‌ने लगा है और देश के पांच फीसदी बच्चों व किशोरों की किडनी खराब हो गई है। 

ज्ञात हो कि अभी हाल ही में यूनीसेफ ने विश्व में कुपोषण के बढ़ते मामले को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि भारत में ४१ फिसदी बच्चे कुपोषण का शिकार है और इनमें से कई बच्चों की स्थिति बेहद खराब है। यूनिसेफ़ ने रिपोर्ट में यह भी दावा किया था कि भारत की स्थिति अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बंगला देश और श्रीलंका से भी बदतर है। भारत से बेहतर  स्थिति केवल अफ़गानिस्तान की है।

लेकिन कारपोरेट की आँख के सहारे देश की आर्थिक स्थिति को देखने वाली मोदी लत्ता के लिए इस हक़ीक़त को नजर अंदाज किया जा रहा है।

देश में बढ़‌ती मंहगाई और बेरोजगारी के चलते आम लोगों का जीवन नारकीय होता जा रहा है और सत्ता पाँच किलो अनाज बाँट कर कापरिट के गोद में जा बैठी है। धर्म के आसरे राजनीति को प्राथमिकता देने वाली मोदी सत्ता के लिए यह चिंता का विषय होना चाहिए । लेकिन मित्र-प्रेम के चलते स्थिति भयावह होते जा रही है।

बताया जाता है कि यह रिपोर्ट देश के बठिंडा ओर विजयपुर स्थित एम्स और ग्लोबल हेल्थ इंडिया ने जारी की है।

रिपोर्ट के मुताबिक – 

 देश में लगभग पांच फीसदी बच्चे और किशोर किडनी, गुर्दे के सही से काम न करने या खराब किडनी फंक्शन से पीड़ित हैं। राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में सामने आया है कि किडनी को नुकसान पहुंचने से जैसे-जैसे समय बीतता है यह समस्या और भी जटिल और लाइलाज हो जाती है। बाद में यह धीरे-धीरे क्रोनिक किडनी डिजीज के रूप में तब्दील हो जाती है। यह अध्ययन बठिंडा और विजयपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ इंडिया के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से किया है। इसके नतीजे स्प्रिंगर लिंक नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। इसका प्रमुख कारण क्या है और इससे कितने बच्चे पीड़ित हैं, इसके सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। यह अध्ययन 2016 से 18 के बीच पांच से 19 वर्ष की आयु के 24,690 बच्चों और किशोरों के राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण पर आधारित है। सर्वेक्षण के अनुसार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक मामले सामने आए, जबकि तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, राजस्थान और केरल में यह प्रचलन कम था।

ज्यादातर को बीमारी का पता नहीं

अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक, 10 लाख की जनसंख्या पर लगभग 49 हजार बच्चे और किशोर (4.9 फीसदी) किसी न किसी रूप में किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं। आश्चर्यजनक रूप से इन लोगों में से आधे से अधिक लोगों और उनके अभिभावकों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह समस्या अधिकतर ऐसे इलाकों में है, जहां स्वास्थ्य संबंधी अच्छी सुविधाओं की पहुंच लगभग नगण्य है। जिन लोगों को इस समस्या की जानकारी है उनका इलाज भी अधिकतर हकीमों के भरोसे है।

मुख्य समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में

राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण के अनुसार, यह समस्या मुख्य तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में पाई गई। अभिभावकों खासतौर से माताओं में शिक्षा की कमी, बच्चों और किशोरों का शारीरिक विकास न हो पाना और बौनापन इसके मुख्य कारण हैं।

नियमित जांच जरूरी : शोधकर्ताओं ने बच्चों में क्रोनिक किडनी रोग से बचने के तरीके भी सुझाए हैं। इसमें नियमित जांच और मूत्र परीक्षण कराना जरूरी है। स्वस्थ और संतुलित आहार जिसमें सोडियम, फास्फोरस और पोटेशियम कम हो, किडनी के कार्य को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही बच्चों को फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन खाने के लिए प्रोत्साहित करना और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों और स्नैक्स से बच्चों को दूर रखना जरूरी है। ऐसे भोजन जिनमें चीनी और नमक अधिक होता है, से भी परहेज जरूरी है।


नायडू की डिमांड का मतलब…

 नायडू की डिमांड का मतलब…

 


चन्द्रबाबू नायडू ने मोदी सरकार से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक फंड की डिमांड की और इसे पूरा करने के अलावा मोदी सत्ता के पास कोई चारा नहीं है क्योंकि मोदी की न का मतलब सत्ता जाना है । तब क्या मोदी सरकार सत्ता में बने रहने विदेशी क़र्ज़ लेगी या दूसरे राज्यो का हिस्सा काटेगी?

इकनॉमिक टाइम्स  के न्यूज के अनुसार नायडू ने शुक्रवार को नॉर्थ ब्लॉक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। एवं 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, छह अन्य केंद्रीय मंत्रियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की... 

 छह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री; नितिन गडकरी, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री; पीयूष गोयल, वाणिज्य मंत्री; शिवराज सिंह चौहान, कृषि मंत्री और हरदीप सिंह पुरी, पेट्रोलियम मंत्री थे... 

 इस महीने के तीसरे सप्ताह में मोदी 3.0 सरकार के पहले बजट से पहले ये बैठकें महत्वपूर्ण हैं... 

सीतारमण के साथ बैठक में टीडीपी प्रमुख ने चन्द्र बाबू नायडू की प्रमुख मांगों में आंध्र प्रदेश को राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3 प्रतिशत की राजकोषीय घाटे की सीमा को इस वित्तीय वर्ष में 0.5 प्रतिशत तक बढ़ाकर अधिक उधार लेने की अनुमति देना, अमरावती में नई राजधानी बनाने के लिए लगभग 50,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत समर्थन और पोलावरम सिंचाई परियोजना के लिए 12,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता शामिल है... 

नायडू ने पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत अतिरिक्त आवंटन की मांग की है, जिसमें सड़क, पुल, सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं जैसे आवश्यक क्षेत्रों को लक्षित किया गया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बुंदेलखंड पैकेज की तर्ज पर आंध्र प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों के लिए भी सहायता चाहते हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ बैठक के दौरान नायडू ने आंध्र प्रदेश में और अधिक तेल रिफाइनरियां स्थापित करने का मामला उठाया... 

अंतर-राज्यीय संबंधों पर नायडू ने 7 जुलाई को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ होने वाली बैठक का जिक्र किया। नायडू ने कहा, “हम दोनों राज्यों के हित में काम करेंगे... "

नरेंद्र मोदी सरकार चलाने के लिए नायडू की टीडीपी और एक अन्य गठबंधन पार्टी – जनता दल (यूनाइटेड) पर निर्भर है....

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू भी पूर्वी राज्य बिहार के लिए विशेष वित्तीय सहायता पैकेज की मांग कर रही है.. 

आंध्र प्रदेश द्वारा मांगे गए 1 ट्रिलियन रुपये से अधिक के वित्तीय पैकेज में निम्नलिखित शामिल हैं... 

मार्च 2025 तक वित्तीय वर्ष के लिए अतिरिक्त 0.5% उधारी की अनुमति देकर राज्य सकल घरेलू उत्पाद के 3% तक राजकोषीय घाटे की सीमा को बढ़ाना। यह लगभग 7000 करोड़ रुपये के बराबर है। अमरावती की नई राजधानी बनाने के लिए 50,000 करोड़ रुपये, जिसमें से 15,000 करोड़ रुपये चालू वित्त वर्ष में आवंटित किए जाएंगे.... 

पोलावरम सिंचाई परियोजना के लिए इस वित्तीय वर्ष में 12,000 करोड़ रुपये, तथा भविष्य में और अधिक धनराशि उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता, अगले पांच वर्षों में बकाया ऋण चुकाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये,संघीय सरकार की 50 वर्षीय ऋण योजना के तहत बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये.... 

ऐसे में मोदी सरकार क्या अपनी सत्ता बचाने फिर विदेश से क़र्ज़ा लेगी या दूसरे राज्यों की अनदेखी करेगी ।

कमाहूँ नहीं त काला खाहूँ…

  कमाहूँ नहीं त काला खाहूँ…



साम्प्रदायिकता के सहारे चुनाव जीतकर विधायक बने ईश्वर साहू के बारे में कहा जाता है कि वे शुरू से ही खाटी भाजपाई रहे हैं और पेलिहा संग पंगनहा हारे की तर्ज पर उनका चाल-चलन गांव से लेकर पूरे विधानसभा में चर्चित होने लगा है लेकिन अब वे भी खाटी भाजपाई की तरह पूरे प्रदेश में फेमस हो गये है तो उसकी वजह उन पर लगने वाला वह आरोप है जिससे भाजपा के सभी विधायक ही नहीं पार्टी भी सकते में हैं।

पार्टी ने साजा विधानसमा से दिग्गज कांग्रेसी रविन्द्र चौबे  के खिलाफ जब ईश्वर साहू को टिकिर दिया था तो उसने भी नहीं सोचा था कि ईश्वर साहू इतने बड़े फ़क़ीर निकलेगे। अब जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जनदर्शन लगाना शुरू किया तो पहले ही जनदर्शन में ईश्वर साहू की पोल खुल गई। मामला दबाने के लिए ईश्वर साहू पर दो लाख रुपये लेने का आरोप लग गया।

भले ही सरकार ने इस खबर को प्रमुख मीडिया संस्थानों में छपने से रोक कर पार्टी की इज्जत बचा लिया हो लेकिन खबरे तो लोगों तक पहुंच ही गई है। तो दूसरी ताफ ईश्वर साहू के दूसरे खेल का खुलासा भी होने लगा है।

हालांकि ईश्वर साहू तो पैसों को लेकर उसी दिन चर्चा में आ गये थे, जब विधानसमा चुनाव में खर्च का ब्योरा सामने आया था। उन्होंने खर्च के मामले में विष्णुदेव साय तो छोड़िये मोहन सेठ को भी पछाड़ दिया था, जबकि उसकी कमाई तब 25 हजार रूपये महिना की थी। अब यह पैसा कहाँ से आया, क्या कोई  एजेंसीं जांच करेगी , यह एक अलग सवाल है।

लेकिन पार्टी को समझ नहीं आ रहा है कि मामला जब विधानसभा में उठेगा तो क्या जवाब दिया जाएगा ।

शनिवार, 6 जुलाई 2024

अदानी के ख़िलाफ़ बड़ा फ़ैसला-108 हेक्टेयर ज़मीन वापस


ग्रामीणों की बड़ी जीत: अदाणी समूह को दी गई 108 हेक्टेयर जमीन वापस लेंगे; गुजरात हाईकोर्ट में बोली सरकार

 


गुजरात सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि 13 साल पहले अडानी को दी गई 108 हेक्टेयर चरागाह भूमि वापस ली जाएगी। 


अडाणी समूह को दी गई 108 हेक्टेयर गौचर भूमि वापस ले जाएगी। गुजरात सरकार को हाईकोर्ट ने बताया। यह जमीन कच्छ में मुंद्रा बंदरगाह बनाने के लिए अडाणी समूह की दे दी गई थी। इसके खिलाफ ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

लगभग 13 साल बाद गुजरात सरकार निर्णय ले पाई। 2005 में गुजरात के राजस्व विभाग ने अडाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड को 231 एकड़ गौचर भूमि आवंटित की थी। लेकिन ग्रामीणों को भूमि आवंटित होनी की सूचना 2010 में पता चली। जब एपीएसईजेड ने गौचर भूमि पर बाड़ लगाना शुरू किया। गांव के निवासियों ने अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड को 231 एकड़ गौचर भूमि आवंटित करने के निर्णय के खिलाफ एक जनहित याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट का रुख किया था।

ग्रामीणों के अनुसार एपीएसईजेड को 276 एकड़ में से 231 एकड़ भूमि आवंटित किए जाने के बाद गांव में केवल 45 एकड़ चरागाह भूमि बची है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह कदम अवैध है क्योंकि गांव में पहले से ही चरागाह भूमि की कमी है। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि यह भूमि आम है और सामुदायिक संसाधन है। 2014 में राज्य सरकार ने बताया कि डिप्टी कलेक्टर ने चरागाह के उद्देश्य से अतिरिक्त 387 हेक्टेयर सरकारी भूमि देने का आदेश पारित किया था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया था।


बावजूद जब ऐसा नहीं हुआ, तो उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की गई। इसके बाद 2015 में गुजरात सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष एक समीक्षा याचिका दायर की। इस याचिका में कहा गया कि पंचायत को आवंटन के लिए उपलब्ध भूमि केवल 17 हेक्टेयर ही है। इसके बाद गुजरात सरकार ने शेष भूमि को लगभग 7 किलोमीटर दूर आवंटित करने का प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव ग्रामीणों को स्वीकार्य नहीं था। ग्रामीणों का कहना था कि मवेशियों के लिए इतनी लंबी दूरी तय करना संभव नहीं है।


 अप्रैल 2024 में मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति प्रणव त्रिवेदी की खंडपीठ ने राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को समाधान निकालने का निर्देश दिया। जिसके बाद शुक्रवार को एसीएस ने हलफनामे के माध्यम से पीठ को सूचित किया कि गुजरात सरकार ने लगभग 108 हेक्टेयर या 266 एकड़ गौचर भूमि वापस लेने का फैसला किया है, जिसे पहले एपीएसईजेड को आवंटित किया गया था। राजस्व विभाग ने अदालत को सूचित किया कि राज्य सरकार 129 हेक्टेयर भूमि को गांव को वापस देगी। इसके लिए वह अपनी कुछ भूमि और अडानी समूह की फर्म से वापस ली जा रही 108 हेक्टेयर भूमि का उपयोग करेगी। हाईकोर्ट की पीठ ने गुजरात सरकार को इस प्रस्ताव को लागू करने का निर्देश दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने कार्यवाही 7 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

शुक्रवार, 5 जुलाई 2024

झीरम का भूत ...

 झीरम का भूत ...


लगता है. झीरम का भूत आईपीएस मयंक श्रीवास्तव का पीछा ही नहीं छोड़ रहा है, २००६ बैच के इस अधिकारी ने वैसे तो पुलिस कप्तान के रूप में बस्तर के कई जिले संभाले हैं, जिले कैसे संभाल रहे थे, इसका एक अलग ही कहानी है लेकिन इन दिनों  प्रदेश सरकार ने उन्हें पत्रकारों को संभालने का जिम्मा देते हुए डायरेक्टर के पद पर जनसंपर्क विभाग में नियुक्त किया हुआ है।

 लिखने-पढ़ने, कविता - कहानी के शौकीन मयंक श्रीवास्तव को यह रास नहीं आ रहा है, और वे किसी रेंज में आईजी बनने के लिए छटपटा रहे हैं। लेकिन कहा जाता है कि राज्य सरकार उनके नाम से डरी हुई है और नहीं चाहती कि बेवजह विपक्षी कांग्रेस को मौका मिले।

दरअसल 2013 में जब झींरम घाटी काण्ड हुआ था जिसमें कांग्रेस के कई दिग्गज नेता नक्सली हमले में मारे गए थे उस दौरान मयंक श्रीवास्तव ही एस पी थे। घटना के तत्काल बाद उन्हें हटा दिया गया था। लेकिन वे अब भी कांग्रेस नेताओ के निशाने पर है।


ऐसे में सरकार के सामने दिक़्क़त यह है कि उनकी पोस्टिंग यदि जिले में की जाती है तो कांग्रेस इस मामले को लेकर हल्ला मचायेगी। 2018 में सत्रा परिवर्तन के बाद से मयंक श्रीवास्तव लूप लाईन में  चल रहे हैं और भूपेश सरकार  के दौरान वे अग्निशमन, आपातकालीन‌ सेवा, एसडी आर एफ जैसा काम संभालते रहे हैं।


2023 में सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें उम्मीद थी कि कहीं न कहीं फिट कर दिये जायेगे लेकिन यूपी वाले इस साहब को जनसंपर्क में बिठा दिया गया। हालांकि जनसंपर्क में बैठने वाले वे पहले आईपीएस नहीं है। जिनसे उन्होंने चार्ज लिया वह दीपांशु काबरा भी आईपीएस ही है, अब दीपांशु काबरा की अपनी अलग कहानी है, ईडी के राडार में  रहने वाले दीपांशु काबरा से चार्ज लेने वाले मयंक श्रीवास्तव का मन इस विभाग से भर गया है तो इसकी वजह वर्दी के रौब में आई कमी है और अब वे आईजी बनने की छटपटाहट में ऐसे ऐसे लोगों का चक्कर लगा रहे हैं जो उनके सामने बैठने की हिम्मत नहीं कर पाते थे।