शनिवार, 9 अगस्त 2025

अगस्त क्रांति…

 अगस्त क्रांति…


सारे सबूतों के बाद भी यदि चुनाव आयोग और मोदी सत्ता अभी भी राहुल गांधी को बदनाम करने में लगे हो तो यक़ीन मानिए कि आने वाले दिनों में यह जन आंदोलन का ऐसा रूप लेगा जिसकी कल्पना न तो आरएसएस को है न ही बीजेपी को, यह दावा इसलिए है क्योंकि जब महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा की थी तो अंग्रेज़ी हुकूमत भी तब उसे हल्के में लिया था , महात्मा गांधी ने क्या कहा था और अब राहुल क्या करने वाले है…

''करो या मरो..'' : '' अगस्त क्रांति'' के 83 साल


8 अगस्त 1942. स्थान: बम्बई के ग्वालिया टैंक मैदान ( अब अगस्त क्रांति मैदान). आज सुबह से ही अखिल भारतीय कांग्रेस समिति अपने 57 वर्ष के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव '' भारत छोड़ो'' ( क्विट इंडिया) पर विचार विमर्श कर रही है. रात काफी गहरा गयी है, पर मैदान में मौजूद करीब 80000 से 100000 लोग मंत्रमुग्ध होकर अपने प्रिय नेता महात्मा गाँधी के भाषण को सुन रही है. उनके भाषण से पहले ''भारत छोड़ो'' प्रस्ताव में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ''भारत छोड़ो'' ( क्विट इंडिया) प्रस्ताव कर चुकी है. महात्मा गाँधी ने अपना भाषण हिन्दुस्तानी में देने के बाद अब वहां विदेशी पत्रकारों और प्रतिनिधियों के लिए अंग्रेजी में दे रहे हैं. वे कह रहे हैं :- ''There are representatives of the foreign press assembled here today. Through them I wish to say to the world that the United Powers who somehow or other say that they have need for India, have the opportunity now to declare India free and prove their bona fides. If they miss it, they will be missing the opportunity of their lifetime, and history will record that they did not discharge their obligations to India in time, and lost the battle.......Where shall I go, and where shall I take the forty crores of India? How is this vast mass of humanity to be aglow in the cause of world deliverance, unless and until it has touched and felt freedom. Today they have no touch of life left. It has been crushed out of them. It lustre is to be put into their eyes, freedom has to come not tomorrow, but today.''


और भाषण की समाप्ति वे अपने लॉर्ड टेनिसन द्वारा क्रीमिया युद्ध के दौरान एक असफल सैन्य कार्रवाई की स्मृति में लिखी गई " चार्ज ऑफ़ द लाइट ब्रिगेड " नामक कविता के इस वाक्यांश , जो कि उन्हें बहुत प्रिय है और उन्होंने इसे पहले भी अन्य भाषणों में कई बार इस्तेमाल किया, 

I have pledged the Congress and the Congress will do or die.'' से करते हैं.... ''डू ऑर डाई.... करो या मरो'' ... ये सुनते ही मैदान में मौजूद हजारों की भीड़ में एक नया उत्साह आ जाता है. दूसरे दिन तडके ही जब महात्मा गाँधी सहित कांग्रेस के सभी प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जाता है तो गांधीजी के द्वारा दिए इसी मंत्र '' करो या मरो'' से प्रेरणा लेकर लाखों-करोड़ों लोग विदेशी शासन के खिलाफ सड़क पर उतर पड़े और देखते-देखते ये आन्दोलन एक जनक्रांति में बदल गया जिसे बाद में ''अगस्त क्रांति'' का नाम दिया गया. 

ऐसे में सोचिये यदि देश की संसद में विपक्ष का मुखिया चुनाव आयोग  के आंकड़ों के साथ वोट चोरी का तथ्यों के साथ अलग अलग टाईप के अनेकों साक्ष्य प्रस्तुत करें और सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग बजाए साथ आने,जाँच और दोषियों को सजा दिलाने की बात करने के उल्टे कोई "बदनाम" करने का घटिया जुमला बोले तो यह अघोषित आपातकाल नहीं तो और क्या है?? यह अपराधियों द्वारा अपराधियों का  सरंक्षण नहीं तो और क्या है? 


बदनामी चोरी करने से होती कि चोरी उजागर करने से, चोरी रोकने के लिए चोरों के पक्ष में बोलना चाहिए कि चोर के खिलाफ आवाज उठाने के पक्ष में. भारत का हित किस में है?? सुधार कैसे होता है. सोचिये किस तरह से आपको अनैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया जा रहा है . 


 यदि किसी राज्य सरकार के शासन में दंगाइयों को खुली छूट हो, हजारों लोग मार दिए जाएं और मारे गए लोगो न्याय के लिए कोई कोर्ट जाएं तो वह उस राज्य के मुखिया को बदनाम करने की साज़िश है ??  


मारे गए लोगों की जान से अधिक जिसके कारण लोग मरें उसकी बदनामी को महत्वपूर्ण बनाना यह अपराधिक सोच और उनका बचाव नहीं तो और क्या है  ????? 


आप हंस नहीं देंगे !!!  जबकि लोग मरे हों, घर उजड़े हों यह एक तथ्य हो ....


यदि सरकारी आंकड़े कहते हैं कि गुजरात शिक्षा, बच्चों, स्त्रियों के मामले में कश्मीर से पिछड़ा है तो यह बदनाम करने की साज़िश नहीं सत्य है ।


यदि बच्चों  को मिड डे मील में नमक रोटी खिलाया जा रहा शिक्षा बजट के बावजूद, 

बच्चे कीचड़ भरे टूटे फूटे खंडहर में पढ़ रहे हैं तो 

खुद सरकार अपनी किरकिरी करा रही है 

यदि किसी के शासन में बलात्कार हो बच्ची की टांग काटनी पड़े, बिना पूछे जबरन दाह संस्कार कर दिया जाए तो खुद ही पूरे सरकार और उसकी व्यवस्था का सड़ा हुआ पार्ट है । जो आप कितनी ही डेटिंग पेंटिंग कर ले लोगों के सामने आ जाएगा । 


 यदि आपको बदनामी का डर है तो बदनाम करने वाले काम मत करें न कि अपेक्षा करें कि.....


 आप लोगों की जेब काटते रहें, महंगाई से लोगों का दम निकल जाए, 

आपके बुरे काम उजागर करने वालो को जेल में डालते रहें , 

बच्ची के बलात्कार पर जय श्री राम के नारे लगवाएं, 

परीक्षा सेंटर पर लड़कियों से उनके अंडर गारमेंट्स उतरवाए बिना पेपर न देने दें 

बीस लाख में मेडिकल सीट बिके

5 साल में भी ग्रेजुएट की डिग्री पूरी न हो

बाढ में जब लोगों के घर डूब गए आप टूरिज्म का आनंद उठाने वाला बेशर्मी भरा डायलग बोलें, 

आपके ढोंगी सनातनी गुर्गे भेष बदलकर विभाजन की प्रयोगशाला के तहत दंगे भड़काने की कोशिश करें ,

 अमीरों के घरों की डेकोरेटिव दीवार बनाने के लिए दिन दहाड़े खनन माफिया पूरा का पूरा पहाड़ चर जाए, 

डीएसपी को कुचल दे

पत्रकारिता में सरकार की चाटुकारिता हो और झूठे तथ्यों से देश को गुमराह किया जाए, 

नफरत से माहौल बिगाड़ने की 24*7 कोशिश हो ।  


संवेदशील घटनाओं के तथ्य छुपाएं जाएं 

और सच्ची बातों को जानबूझकर संदेह जनक बनाया जाए  । 


आप अपने ही लोगों को फर्जी किसान/मज़दूर/चौकीदार बनाते सुंदर दृश्य बनाने की कोशिश करें और किसान वास्तव में आत्महत्याएं कर रहे हों ............ 


....... पर आपकी बदनामी न हो !!!


वाह रे तुम्हारी  बदनामी का कांसेप्ट कि दोष चोर में नहीं है स्ट्रीट लाइट में है और स्ट्रीट लाईट लगवाने ने चोर को बदनाम करने की साज़िश की है ।  मतलब यह लोग आप लोगों को किस केवल का मूर्ख समझ रहे हैं सोच लीजिए !! कोई बच्चा स्कूल में अगर नालायक  है  तो स्कूल रिपोर्ट कार्ड में फेल लिख कर साजिश कर रहा है !!!


* लोगों के मरने से यदि किसी की बदनामी नहीं होती हो तो यह निर्लज्जता और क्रूरता की अथाह है । यदि कोई हत्यारे को हत्या कहे जाने पर बदनाम करने की साजिश बताए तो वह खुद हत्यारा है। 


आपको तो जिनके साथ आना चाहिए आप उल्टा न्याय की बात के पक्ष में जाने वाले उन लोगों को गिरफ्तार कर रहे हैं । दरअसल यह अच्छे लोगों और बुरे लोगों में यही फ़र्क है और क्रिमिनल मानसिकता के लोगों का गुणसूत्र भी । 


उन्हें  हत्या करने या करवाने में कोई शर्म महसूस नहीं होती पर जैसे ही कोई उनके दुष्ट चरित्र की पोल खोलने लगता है वे रिरियाने लगते हैं बदनाम करने की साज़िश हो रही है । ऐसा है तो मत करते हत्या,चोरी, डकैती,खून खराबा,अबे बुरा काम तुम कर रहे हो तो कह रहे हो तुम्हें बदनाम करने की साज़िश हो रही है । 

बेईमान को बेईमान नहीं कहा जाएगा तो क्या कहा जाएगा । किसी की कथनी और करनी में अंतर होगा तो लोग जुमला जीवी कहते हैं तो जुमला जीवी शब्द बैन करने से वो श्रम जीवी थोड़े ही बन जाएगा ।  तानाशाह के पाखंड को उसका निकम्मापन ही कहा जाएगा । यदि आपके हाथ में छुरा है तो लोग कहेंगे ही छुरा है फूल कहलवाने के लिए फूल लेना होगा । 

यदि आप चाहते हैं बदनामी न हो तो आपको तो खुद बुरे काम करना छोड़ दें न कि उपेक्षा करें कि आप कभी पकड़ में नहीं आएंगे ।  कोई देख नहीं रहा । लोग मुंह बन्द कर बैठ जाएं । आपको सोचना चाहिए आप अच्छे नागरिकों को प्रोत्साहन देना चाहते हैं या बुरे नागरिकों को । 

आप विकृति को अति के स्तर पर सोच रहे हैं कि सारे लोग विवेकहीन हो जाएं । ऐसी विकृत सोच से आपको आज या कल बाहर आना ही होगा (साभार)

शुक्रवार, 8 अगस्त 2025

चुनाव आयोग का वेबसाइड और वाटरगेट कांड…

 चुनाव आयोग का वेबसाइट और वाटरगेट कांड…


अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन के दौर में हुए वाटरगेट कांड ने यदि सत्ता की नींद उड़ा दी थी तो चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी के सबूतों के साथ खुलासे ने मोदी सत्ता को एक्सपोज़ कर दिया है और शायद यही वजह है कि चुनाव आयोग के वेबसाइट बंद होने की खबरें कई राज्यों से आने लगी , सत्ता को भले ही उम्मीद हो कि अभी भी वह सब अपने अनुकूल कर लेगा लेकिन पानी तो सर से निकल चुका है… और यदि राहुल इस सबूत के साथ आंदोलन करने निकल जाये तो उसे संभलना मुश्किल है…


सोशल मीडिया पर बड़ी सनसनीखेज खबर है भारतीय चुनाव आयोग की हरियाणा महाराष्ट्र राजस्थान मध्य प्रदेश कर्नाटक बिहार और उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर अस्थाई रूप से यह लिखा हुआ आ रहा है अभी 

इससे संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता!

यह इस बात का सीधा-सीधा संकेत है कि राहुल गांधी ने चुनाव चोरी को लेकर जो आंकड़े प्रस्तुत किए थे उसके बाद पूरे देश के फैक्ट चेकर उनका फैक्ट चेक कर रहे थे और वह फैक्ट सत्यापित हो रहे थे उस से घबराकर और इस बात से डर कर की और नए फैक्ट्स जनता के नॉरेटिव में नहीं आ जाए इलेक्शन कि यह वेबसाइट अभी अपने आप को संबंध स्थापित करने से बाहर बता रही है!

प्रदेशों की वेबसाइट का जो E पेज होता है, डाउन चल रहा है और कई जगह तो लिखा आ रहा है आप बाद में संपर्क करें! 

 कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह आशंका व्यक्त की है की चुनाव आयोग वेबसाइट डाउन कर कर सुधार करने की कोशिश कर रहा है ताकि नई वेबसाइट के माध्यम से वह अपनी निष्पक्षता जाहिर करें! 

याने वेबसाइट को संशोधित करने का प्रयास कियाजा रहा है!

अभी प्रमाणित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना तय है कि राहुल गांधी का आरोपो ने चुनाव आयोग की नींद हराम कर दी है!

सोशल मीडिया के कई यूजर्स ने लिखा है कि सचमुच कई राज्यों के E पेज डाउन है!

क्या चुनाव आयोग एक नए बहाने के साथ एक नई शरारत के साथ अपने आप को सती सावित्री घोषित करने की कोशिश करेगा!

लेकिन शायद अब उसी तरह की देर हो चुका है जिस तरह अमेरिका में वाटरगेट कांड हुआ था , क्या था यह कांड यह भी समझ ले…

वाटरगेट स्कैंडल 

17 जून 1972...


उस वक्त अमेरिका में रिचर्ड निक्सन की सरकार चल रही थी। 


रिचर्ड निक्सन, एक ऐसा अमेरिकन राष्ट्रपति जिसे "अमेरिकन पोस्ट" जैसी रिसर्चेबल अखबारों से नफरत था। क्योंकि इनके पत्रकारों ने वाटरगेट स्कैंडल को एक्सपोज किया था। 


पहले थे बॉब वुडवर्ड जो आगे चलकर वाशिंगटन पोस्ट में ऊंचे पदों पर चलते हुए आज भी कंपनी में एसोसिएट एडिटर के रूप में सक्रिय है। उन्होंने 15 से ज्यादा किताबें लिखीं जिनमें ओबामा, ट्रंप सबको लेकर कुछ न कुछ रहस्यमई जानकारी पढ़ने को मिली। सिस्टम कैसे काम करता है उन्होंने सब लिखा है।


और दूसरे थे कार्ल बर्नस्टीन। जो सीएनएन जैसे अन्य बड़े न्यूज चैनल के एडवाइजर रहे साथ ही फ्रीलांस में पत्रकार बने रहे।

17 जून 1972....


5 चोर डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के दफ्तर में पकड़े गए। स्थान था वाटरगेट कॉन्प्लेक्स।


दोनों पत्रकार जांच में लग गए। बाल की खाल निकलना शुरू हुई। 7 लोग धर लिए गए जिनका कनेक्शन सीधा व्हाइट हाउस से था। वो ये बात भी स्वीकार किए कि वे रिपब्लिकन पार्टी के मेंबर है। इल्ज़ाम था पॉलिटिकल राइवल्स के फोन टैपिंग का।

जनवरी 1973.....


सातों लोगों पर मुकदमा दायर हो गया और ऑफिशियल जांच शुरू हो गई।

राष्ट्रपति निक्सन के गर्दन पर जांच की तलवार लटक चुकी थी। जांच शुरू हो चुकी थी। 


निक्सन में अपने बचाव में मोर्चा खोल दिया। अपने पावर का मिसयूज करना शुरू कर दिया। एफबीआई जैसी एजेंसीज कंट्रोल में ले ली गई। बगावत का सुर भांप चुका था निक्सन।


मई 1973......


निक्सन के सिस्टम पर कंट्रोल करने की प्लानिंग को सीनेट ने आड़े हाथों लिया और जांच की कार्यवाही लाइव करवा दी। जिससे जुलाई आते आते ये खुलासा हो गया कि व्हाइट हाउस में वाकई फोन टैपिंग के सीक्रेट रिकॉर्डिंग एवलेबल है जो कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने इल्ज़ाम लगाया था।

अक्टूबर 1973.....


निक्सन ने उस जांच अधिकारी को ही बर्खास्त कर दिया जो उसकी कब्र खोद चुका था।

जुलाई 1974....


सुप्रीम कोर्ट ने निक्सन को सारे रिकॉर्डिंग टेप सौंपने का आदेश दे दिया था। उस पर लगा इल्ज़ाम सिद्ध हो चुका था।


9 अगस्त 1974....


अमेरिकन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन का इस्तीफा हुआ और अगले ही दिन यानि 19 अगस्त 1974 को नए राष्ट्रपति जेराल्ड फोर्ड गद्दीनशीं हुएं।

राहुल के लीडरशिप में ये वोट चोरी का स्कैम एक स्कैंडल बन चुका है। अब देखते है उन जननेताओं को कि वो इस जनता के मताधिकार के साथ हुए अन्याय को लेकर व इस सामाजिक मुद्दे की निष्पक्ष जांच के लिए संसद की आवाज बनते है या नहीं।

जनता चाहती है कि वाटरगेट स्कैंडल की तरह इस वोट चोरी स्कैंडल की भी लाइव जांच हो जनता के आगे।

वरना एक एक का हिसाब जनता लेगी। (साभार)



गुरुवार, 7 अगस्त 2025

राहुल ने चुनाव आयोग ही नहीं सौ साल के संघी संस्कार को भी कठघरे में खड़ा कर दिया…

 राहुल ने चुनाव आयोग ही नहीं सौ साल के संघी संस्कार को भी कठघरे में खड़ा कर दिया…


राहुल गांधी जब आज चुनाव आयोग की करतूतों का सबूत पेश कर रहे थे तो पूरी दुनिया की मीडिया मौजूद थी, और यह सबूत ने सीधे तौर पर भले ही चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा किया हो लेकिन इस खेल में संघ की भूमिका से इंकार इसलिए नहीं किया जा सकता क्योंकि बीजेपी उसी की अनुवांशिक है और बीजेपी को सत्ता तक पहुँचाने में वह भी पूरी तरह शामिल रहती है, यानी सौ साल के संस्कार से ओत प्रोत बीजेपी यदि वोट चोरी का षड्यंत्र कर रही है तो क्या संघ का संस्कार है। तब इन सवालों का जवाब ही नहीं अब तो आयोग की बर्ख़ास्तगी और सुप्रीम कोर्ट को भी संज्ञान में इसे लेना चाहिए…

मोदी सरकार अवैध रूप से भारत पर शासन कर रही है। यह बात राहुल गांधी के प्रेजेंटेशन से, तमाम आंकड़ों और सबूतों के साथ साबित हो गई है। 



यह भी साबित हो गया कि पार्टी सँगठन, जमीनी काम, आरएसएस की पकड़, योजनाओं के लाभार्थी और मोदी का चुम्बकीय व्यक्तित्व वगैरह सब बेकार की बकवास है। 

असल मे चुनाव चोरी आयोग ने पूरे इलेक्टोरल सिस्टम को तोड़ मरोड़कर भाजपा के पक्ष में परिमाण निकालकर ताजपोशी करवा दी है।

और भांडा फूट जाने के डर से वोटर लिस्ट, सीसीटीवी फुटेज, फॉर्म 6, फार्म 17 का मिलान वगैरह करने से वह बुरी तरह भयभीत है। 

चुनाव चोरी आयोग, भाजपा के बजरंग दल, एबीवीपी, भाजयुमो की तरह भाजपा के एक फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन में बदल चुका है। 

वह भारत के सम्विधान नही , भारतीय जनता पार्टी के प्रति वफादार है। इसमे शकों शुबहे की कोई गुंजाइश अब बची नही है। 

इन खुलासों के बाद, वोट चोरी से बनी सरकार भी इलेजितमेंट और अवैध हो जाती है। इसके निर्णय और नीतियां आदेश भी अवैध हैं। 

लेकिन आज राहुल गांधी ने इस तथ्य को कहने से खुद को रोका, और केवल चुनाव आयोग तक सीमित रहे। मगर यह साफ है कि एक लम्बी लड़ाई और सीधे टकराव की ओर देश बढ़ रहा है। 

इलेक्टेड गवर्मेंट होने के नाते, असहमति के बावजूद भाजपा की इस सरकार पर हम जैसो का जो भी इकबाल था, खत्म हो गया। 

अच्छा होगा, कि सिस्टम हैक कर धोखे से खुद को विजयी कराने वाली, अवैध सरकार खुद ही इस्तीफा देकर फ्रेश इलेक्शन करए। एक मिनट भी इन्हें सत्ता में रहने का अधिकार नही है।

क्योंकि…

▪️वोटर लिस्ट बनाना किसका काम है? : चुनाव आयोग

▪️डुप्लीकेट वोटर ना हों, किसका काम है? : चुनाव आयोग

▪️फर्जी पते पर बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट ना हों, किसका काम है? : चुनाव आयोग

▪️कोई भी वोटर एक से ज़्यादा जगह वोट ना डालें, किसका काम है? : चुनाव आयोग

🔹यह सारी बातें बता कौन रहा है? : राहुल गांधी

🔹इन दस्तावेजों की जांच किसने की? : राहुल गांधी 

🔹देश के सामने सबूत के साथ सच कौन ला रहा है? : राहुल गांधी 

जो काम कायदे से चुनाव आयोग को करना चाहिए, वो राहुल गांधी कर रहे हैं - जिससे इस देश का लोकतंत्र सलामत रहे 


और चुनाव आयोग उल्टे उनसे शपथपत्र की मांग कर रहा है

ग़ज़ब धृष्टता है - जो व्यक्ति आपको सच का आईना सबूत के साथ दिखा रहा है - उसपर BJP और चुनाव आयोग हमलावर हैं! 

यही इनकी मिलीभगत का सबसे बड़ा सबूत है


चुनाव आयोग को भंग करो और बीजेपी को सत्ता से बेदखल करो!

देश में फिर से चुनाव करवाओ

प्रोफेसर जगदीप छोकर जो एसोसिएसन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ( ADR) संस्था के संस्थापक हैं, भारत में चुनाव सम्बन्धी अनेकों रिफॉर्म का श्रेय इसी संस्था को जाता है, सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल कर भारत के नागरिकों की लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रोटेक्ट एवं पारदर्शी बनाया है।


जैसे हर उम्मीदवार द्वारा अपनी इनकम, क्रिमिनल मुकदमों, जैसे तमाम डिटेल्स बताना एवं अभी हाल में चुनावी बॉन्ड को अवैध घोषित कराना आदि शामिल है ।


कल इसी ADR के पिटीशन पर ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को बिहार में 65 लाख काटे गए वोटरों की डिटेल 9 तारीख तक उपलब्ध कराने को निर्देशित किया है ।


प्रोफेसर जगदीप छोकर ने आज राहुल गांधी के चुनाव सम्बन्धी प्रेस कॉन्फ्रेंस के सम्बन्ध में कहा कि, चुनाव आयोग को राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप की जांच करनी चाहिए ना कि उनसे हलफनामा मांगना चाहिए, इससे तो चुनाव आयोग का जिम्मेदारी से भागना एवं चोरी में मिली भगत ही साबित होगा।


उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में पहले फेज के लिए हुए वोटिंग के बाद आंकड़े जारी करने में चुनाव आयोग को 11 दिन क्यों लगे ?  वो भी सिर्फ प्रतिशत बताया गया, हालांकि सुप्रीम कोर्ट में ADR ने चुनाव आयोग से मत संख्या की मांग की जिसे आज तक नहीं बताया गया।


महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव में शाम पांच बजे से ग्यारह बजे तक 75 लाख वोट अचानक कैसे बढ़ गए?


उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब, हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जब चुनाव आयोग से विडीओ फुटेज मांगा गया था, उसके बाद केंद्र सरकार ने संसद द्वारा नया कानून पारित करवा दिया कि विडीओ फुटेज चुनाव उपरांत सिर्फ 45 दिन तक ही सुरक्षित रखा जाएगा, आखिर क्यों...? 


और अब लास्ट बात, चुनाव आयुक्त सलेक्शन कमिटी से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को क्यों हटा दिया गया? आखि़र किस पवित्र उद्देश्य के लिए वो बाधा बन रहे थे?


अत: निसंदेह, चुनाव के ऐसे मैनिपुलेशन से आमजनता में जन विद्रोह की चेतना पैदा हो सकती है। किन्तु संयम रखें एवं अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत सत्य के साथ खड़ा हों।(साभार)


बुधवार, 6 अगस्त 2025

अहिंसा का रास्ता और आदिवासियों का दिशोम गुरु शिबू सोरेन

अहिंसा का रास्ता और आदिवासियों का दिशोम गुरु  शिबू सोरेन


 

कितने ही क़िस्सों के बीच आदिवासियों के दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने जब इस दुनिया को अलविदा कहा तो सहसा विश्वास करना मुश्किल था , जीवन भर अहिंसा के इस राही ने आदिवासियों के लिये जो कुछ किया उसे भुला पाना मुश्किल है…

 1953 का साल। छोटा सा गाँव नेमरा, जहां एक 9 साल का बच्चा, शिबू, अपनी पालतू कोयल के साथ खेलता था। एक दिन गलती से कोयल मर गई। उस मासूम का अपनी कोयल से भावनात्मक लगाव इतना जुड़ चुका था कि उसने चिड़िया का दाह-संस्कार किया और कसम खाई,


“मैं अब किसी जीव को चोट नहीं पहुंचाऊंगा।”


उस दिन से वह अहिंसा के रास्ते पर चल पड़ा था।

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ब्रिटिश एम्पायर ने देश छोड़ते छोड़ते जो आदिवासी थे उनकी जमीनों को जमींदारों और महाजनों के हवाले सौंपने का पत्ता फेंक दिया था। हालात यह थे कि अपनी ही जमीन पर खेती करने के लिए बेचारे आदिवासी महाजनों के दिए कर्ज पर निर्भर रहते थे। बदले में महाजन उनकी जमीनों को कर्ज के ब्याज तले दबाकर हथिया लिया करते थे। आप इसका जमीनी क्रियान्वयन मुंशी प्रेमचंद की गोदान में पढ़ सकते है।


तब सोबान सोरेन नाम आदमी जो कि शिबू के पिता थे वो अपने आदिवासी वर्ग के हितों की रक्षा के लिए महाजनों से जंग लड़ रहे थे। लोहा ले रहे थे।

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27 नवंबर 1957 ....


शिबू के पिता सोबान सोरेन की हत्या कर दी गई। महज 15 साल का शिबू उस रात चुपचाप बैठा रहा। दिल में एक आग जल रही थी जो मानो उसके पिता द्वारा जलाए रखने की दी गई जिम्मेदारी हो।


शिबू उस आग में फूंक मारता रहा।

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साल 1959...


“फसल हमारी, जमीन हमारी, अब कोई नहीं ले जाएगा।”


शिबू ने पिता की छोड़ी गई आंदोलन की विरासत को अपनाते हुए ये हुंकार भरी।


" उतर जाओ खेतों में, काट लो अपनी फसलें, ये तीर कमान जब तक हमारे हाथों में है हम देखते है कौन महाजन तुम्हें तुम्हारी मेहनत की कमाई लेने से रोक पाता है।"


महिलाएं हसिया लेकर खेत में उतर गईं। पुरुष तीर-कमान लेकर पहरेदारी करने लगे।

रातभर धान कटता रहा। सुबह जब महाजन आए, तीर आसमान में गूंजने। शिबू की दी गई साहस आदिवासियों के पुनर्जागरण में क्रांतिकारी भूमिका अदा करने लगी। धान काटो आंदोलन ने शिबू सोरेन को "दिशोम गुरु" (जंगल/भूमि का रक्षक) बना दिया।

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शिबू सोरेन ने अपने जीवन काल में तीन बार मुख्यमंत्री पद का शपथ लिया मगर एक भी बार वो पूर्ण कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। इसके पीछे काफी हद आदिवासी हितों को लेकर उनकी कठोर नीतियां थी जो उनके सहयोगी गठबंधन दलों के क्राइटेरिया में फिट नहीं बैठ पाती थी और तख्त पलट जाता था। उसके बाद उन्होंने अपनी राजनीति का उत्तराधिकार अपने वंश हेमंत सोरेन को सौंप दिया।

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4 अगस्त 2025 को शिबू सोरेन ने इस दुनिया में अंतिम सांस ली। आदिवासियों का दिशोम गुरु आज इस दुनिया को अलविदा कह गया।


मंगलवार, 5 अगस्त 2025

अमित शाह ने भरी संसद में झूठ बोला

अमित शाह ने भरी संसद में झूठ बोला 



मानहानि के एक केस में कोर्ट के जज ने चीन मामले में जो टिप्पणी की क्या वह सत्ता की बौखलाहट है इसे कुछ ऐसे समझ ले कि…


जब  संसद में ऑपरेशन सिंदूर के बहस के दौरान अमित शाह जी ने संसद में खड़े हो कर लगातार तीन गलत बयानी किया

(ऐसा नहीं है कि इसके पहले भाजपा के सांसदों ने संसद में गलत बयानी नहीं की है बहुत बार किया है)

उस के बाद एक बात बोला जो झूठ था या सच ये पता नहीं 

खैर पहले वो तीन गलत बयानी पढ़ लेते है

1. मैं इतिहास का विद्यार्थी हूं (जबकि विकिपीडिया के हिसाब से अमित शाह जी बायो केमिस्ट्री पढ़े थे)

2. सरदार पटेल जी ने 1960 में विरोध किया (जबकि सरदार पटेल का देहांत 1950 में ही हो गया था)

3. जयशंकर home minister है (जबकि वो विदेश मंत्री है)


फिर सीज़फायर पर अमित शाह जी ने बोला कि

अपने देश के होम मिनिस्टर के बात पे यकीन नहीं है

वो एक संवैधानिक पद पे है

ट्रंप के बात पे यकीन है

फिर

राहुल गांधी जी ने उकसाया कि इंदिरा गांधी का 50% भी है तो मोदी जी संसद में बोले कि ट्रंप ने सीज़फायर नहीं कराया

अगर दम है तो आज शाम मोदी जी बोले कि ट्रंप झूठ बोल रहा है

"‘Say Donald Trump is a liar’.."


मोदी जी भावुक हो गए और सारा कूटनीति भूल गए 

और बोल दिया कि

किसी देश के किसी नेता ने सीज़फायर के लिए कुछ नहीं कहा


अगले दिन अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जी ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी

क्योंकि ट्रंप साहब को उनका नोबेल प्राइज छूटता दिख रहा था


*"आप क्रोनोलॉजी समझिएगा"*


और लास्ट में एक बात पे गौर कीजियेगा


ये राहुल गांधी कर क्या रहा है


विपक्ष में रह कर मोदी जी और अमित शाह जी से वो बोलवा दे रहा है जो उन्हें नहीं बोलना चाहिए था

और

विपक्ष में रह कर सरकार से वो काम करवा दे रहा है जिसको मोदी जी और अमित शाह जी ने मना कर दिया था

जैसे

जाति जनगणना


राहुल गांधी जी ने बोला था

हम सरकार को मजबूर कर देंगे जाति जनगणना के लिए


एक so called "पप्पू" क्या क्या कर रहा है

ऐसे में मानहानि के एक मामले पर भी बातें होनी चाहिए कि क्या चीन को लेकर कोर्ट ने राहुल गांधी को जो बात बोली है, असल में वो पूरे देश के लिए ये संदेश है कि इस सरकार के खिलाफ अपना मुंह बंद रखिए।


वरना कौन नहीं जानता की चीन ने हमारी ज़मीन कब्जाई है, कुछ नये मैप भी जारी हुए जहां भारत के कयी हिस्सों को चीन का हिस्सा बताया गया।


विदेशी अखबारों से लेकर सैकड़ों आर्टिकलों में भी ये खबर छपी है। स्थानीय लोगों द्वारा बताया गया कि हमारी ज़मीन पर चीन घुसा है।


राहुल गांधी ने वही बात कही है,जिसे कोर्ट गलत बता रहा है,एक बात नोट कर लीजिए, आहिस्ता आहिस्ता हमारे देश की एक एक ईंट गिराई जा रही है।


लोकतांत्रिक ढांचे को जर्जर किया जा रहा है, दुश्मन के खिलाफ मुंह खोलने वाले को चुप किया जा रहा है।


कुल मिलाकर देश को बर्बाद करने की प्रषठभूमि तैयार है, उसमें एक यही बंदा है जो आड़े आ रहा है, इसलिए ये संघियों की नजर में खटकता है।


और हां दुनियां में चीन से बढ़कर हमारा कोई दुश्मन नहीं है, दुश्मन की सरपरस्ती अब कोर्ट भी कर रहा है,वो पट्ठा तो पहले से कर ही रहा था।


हम लुट पिट चुके हैं, और इस लूट में मीडिया और सरकार के साथ अब कोर्ट भी आ गया है.. क्योंकि गौतम अडाणी को चाइना के साथ मिलकर धंधा भी करना है।


और जो धंधे के लिए देश के साथ गद्दारी करेगा, ज्यादा दिन तक आवाम अब उसे मांफ नहीं करने वाली है, सत्ता परिवर्तन के बाद इन लोगों को राहुल गांधी भी नहीं छोड़ने वाले हैं।


ये बात राहुल गांधी खुद भी बोल चुके हैं,भूल ना जाये, इसलिए मैं भी लिखे दे रहा हूं।

हमलोग उसका memes खोजने में व्यस्त है

वो विपक्ष का नेता का भूमिका बेहतरीन तरीके से निभा रहा है(साभार)

सोमवार, 4 अगस्त 2025

नाम श्रीराम सेना, काम रावण से भी घटिया…

 नाम श्रीराम सेना, काम रावण से भी घटिया… 


नफ़रत की राजनीति इस देश को कहाँ ले जाएगा, और क्या क्या देखना पड़ेगा, क्या श्रीराम सेना के इन दरिंदों को मासूम बच्चों पर भी दया नहीं आई, स्कूल में पीने के पानी की टंकी में ज़हर… कैसे नफ़रत का यह खेल ख़त्म होगा, बहुसंख्यक होने के कारण उन्हें हर वह बात जायज लगती है जो मुसलमान के ख़िलाफ़ होती है. अब चाहे कितने ही बेकसूर और निर्दोष लोग मारे जाएं लेकिन अधिकांश हंसी की इमोजी और अश्लील वक्तव्य देते हुए एक कट्टर विचार को महानता की तरफ पेश करते हैं. लेकिन इन अपराधियों को नज़र नहीं आया कि कम से कम बच्चों को नुकसान ना पहुंचाए, नफरत की आग में अंधे होकर मासूम बच्चों को ही निशाना बनाने लगे. 

कर्नाटक के बेलगावी में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। कुछ शरारती तत्वों ने साजिश के तहत एक सरकारी स्कूल के टैंक में जहरीला पदार्थ मिला दिया। इस घटना से स्कूल के दर्जन भर छात्र बीमार पड़ गए। 14 जुलाई को हुई इस घटना में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, इनमें श्री राम सेना का एक स्थानीय नेता भी शामिल है। 

पुलिस के अनुसार आरोपियों का उद्देश्य प्रधानाध्यापक सुलेमान गोरिनाइक के इर्द-गिर्द दहशत और संदेह पैदा करना था। जो 13 सालों से हुलिकट्टी के सरकारी निचले प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत हैं। पुलिस ने ऐसा प्रतिष्ठा को धूमिल करने और ट्रांसफर कराने के इरादे से किया गया था। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जहर देने की इस कोशिश की निंदा की और इसे धार्मिक कट्‌टरपंथ करार दिया है।

पानी की टंकी में जहर मिलाने से 12 छात्र बीमार पड़ गए थे। गनीमत यह रही है कि किसी बच्चे की जान नहीं गई। पुलिस ने अब पूरे मामले की गहराई से जांच करने के बाद चौंकानेवाला खुलासा किया है। स्कूल में काफी बच्चों के बीमार पड़ने पर हड़कंप मच गया था। इससे अधिकारियों और अभिभावकों के बीच चिंता खड़ी हो गई थी। ये सभी बच्चे अब ठीक हो गए हैं लेकिन इस घटना की जांच में सन्न कर देने वाला खुलासा सामने आया है।

पुलिस ने पाया कि जहर देने की यह घटना पांचवीं कक्षा के एक छात्र द्वारा की गई थी। यह घटना बेलगावी के सवादत्ती तालुक के हुलिकट्टी गांव में हुई। छात्र से जब और पूछताछ की गई तो उसने बताया कि बोतल में एक हानिकारक पदार्थ दिया गया था। इसे पानी की टंकी में डालने को कहा गया था। छात्र ने बोतल देने का नाम पुलिस को कृष्ण मदार बताया।

जांच में पता चला कि कृष्ण ने दबाव में आकर यह काम किया था। पुलिस के अनुसार सागर पाटिल और नागनगौड़ा पाटिल उसे ब्लैकमेल कर रहे थे, जिन्होंने कथित तौर पर उसके अंतर्जातीय प्रेम संबंधों का पर्दाफाश करने की धमकी दी थी। कृष्ण ने उनकी मांग मान ली। 

पुलिस के अनुसार सागर पाटिल श्री राम सेना का तालुक स्तरीय का नेता है। वह इस पूरे घटना का माटरमाइंड था। पुलिस का कहना है कि पाटिल ने पूछताछ के दौरान कबूल किया कि वह स्थानीय सरकारी स्कूल में एक मुस्लिम प्रधानाध्यापक के पद पर आसीन होने से नाराज था। पुलिस ने तीनों आरोपियों सागर पाटिल, नागनगौड़ा पाटिल और कृष्ण मदार को गिरफ्तार कर लिया गया है।

रविवार, 3 अगस्त 2025

पर उपदेश कुशल बहुतेरे…

 पर उपदेश कुशल बहुतेरे… 


पर उपदेश कुशल बहुतेरे । जे आचरहिं ते नर न घनेरे ।। — गोस्वामी तुलसीदास जी ने यह बात कही थी जिसका अर्थ है दूसरों को उपदेश देना तो बहुत आसान है लेकिन स्वयं उन उपदेशों पर अमल करना बेहद कठिन है, लेकिन इन बातों को याद करने का मतलब मोदी के दौर में इसलिए बेमानी हैं क्योंकि पिछले दस सालों से जो सरकार कारपोरेट के आसरे  विदेशी पूँजी और विदेशी सामनों से इस देश को अपने अनुकूल करने में लगा था जिसने नफ़रत का बाज़ार तैयार कर देश को ही नहीं संसद जैसे पवित्र स्थान में वैमनस्यता की दीवार खड़ी कर दी उसे अचानक हिंदुस्तानियों का पसीना कैसे याद आया , हालाँकि यह देर आये वाली कहावत मान ख़ुशी मनाई जा सकती है लेकिन पिछले ११ सालों की नौटंकी को देखते हुए या संघ की नीति को समझते हुए इस पसीने  की बात पर विश्वास करना मुश्किल है, संसद  कैसे बदल गया और पर उपदेश की कहावत को सरल भाषा में समझिये…

कुछ लोग बोल रहे हैं कि

मोदी जी जर्मनी का मांटब्लैक पेन, इटली का बना मैबैक चश्मा, स्विट्जरलैंड की बनी रोलेक्स घड़ी, अमेरिका में बना आइफोन, जर्मनी की बनी बीएमडब्लू कार, अमेरिका में बना बोईंग हवाईजहाज इस्तेमाल करते है । 

उनको मैं बोलना चाहूंगा कि मोदी जी देश हित मे विदेशी ब्रांडेड सामान उपयोग करते हैं । अरे देश को विदेशी निवेश भी तो चाहिये । अगर कोई विदेशी सामान यूज ही नही करेगा तो दूसरे देश हमारे देश मे निवेश क्यों करेंगे ? 

इसीलिये मोदी जी को विदेशी सामान यूज करने दीजिए । 

स्वदेशी को अपनाने की जिम्मेदारी आपकी और हमारी है । 

अब 11 साल पहले के संसद पर बात करें उससे पहले इस खबर पर…


जिस कुर्सी पर बैठने का अधिकार मुझे मिला है उस कुर्सी पर मै अपने किसी भी खून के रिश्ते को बैठने की इजाज़त दूंगा। ये एक इमोशनल हिस्सा है किसी भी कामयाब इंसान के जिंदगी का।

अगर उस थाना प्रभारी ने अपने खून के रिश्ते को अपनी ही कुर्सी पर बैठा लिया तो कौन सी बड़ी बात हो गई? रिश्वत लेकर कुर्सी का ईमान बेचने से क्या नियम नहीं टूटता?

अब संसद पर…

सन दौ हज़ार के आसपास संसद मैदान का माहौल खुशनुमा होता था । हँसी मज़ाक संजीदगी मुद्दे पे बात तर्क वितर्क सब था । वाजपई जी मुल्क के मुख्या थे, संजीदा आदमी थे लेकिन हर माहौल के हिसाब से सेट हो जाते थे । लालू प्रसाद यादव उसे वक़्त सबसे ताकतवर बोलकार थे, बोलने में माहिर थे दलील देना जानते थे सीधा मुद्दे पर बोलते थे, कभी कभी अपनी ज़बान से वो माहौल तब्दील कर देते थे, तरफ़दार और विरोधी खेमा दोनों लालू जी की बातों पर ठहाका लगा देता था, लालू जी का हुकूमत पर हसमुख हमला वाजपई जी को गुदगुदा देता था, वाजपई जी खुलकर हँसते थे, उनके ठीक पीछे उस वक़्त देश की रक्षा के ज़िम्मेदार जॉर्ज फ़र्नान्डिस भी लालू जी के तर्क पर मासूमाना हँसी हँसते थे, फ़र्नान्डिस लालू जी के सियासी गुरु रहे । उस दौर में हुकूमत के जितने बड़े रहे सब पर लालू जी के लफ्ज़ो का असर था, संजीदगी हँसना हँसाना तर्क वितर्क सब था, सख्त कोई नहीं था आज बीस बरस बाद मुल्क के संसद भवन के हालात बिलकुल बदल गए हैं , अब हुकूमत से सवाल पूछने पर जवाब मांगने पर गालियाँ दे दी जाती हैं, बुरे लफ्ज़ कहे जाते हैं पिछले बरस रमेश बिधूड़ी ने हदे लांग दी थी, कल भी जब संसद भवन में बहस हुई सिर्फ हाथापाई की कमी रही, बाकी सब हो गया, मुल्क के सबसे मज़बूत किले का एहतराम और तहज़ीब बिलकुल ख़त्म हो गयी है, क़सूरवार सब भवन में बैठे हैं, पक्ष विपक्ष सब ज़िम्मेदार हैं मुल्क को लेकर कोई संजीदा नहीं है कोई समझदार नहीं है । इस दौर की संसद भवन में बदज़ुबानी सुनकर थक गए हैं तो बीस बरस पहले की बहस यूट्यूब पर देख लीजिये, सवाल जवाब सब होते थे लेकिन किसी को शर्मिंदा नहीं किया जाता था, एहतराम था, ख़िलाफ़ होते हुए एक दूसरे की इज़्ज़त थी । आज कल तो संसद भवन में पगड़ियाँ उछाल दी जाती हैं । (साभार)