शुक्रवार, 6 मार्च 2026

भाजपा ने गद्दारों की नई परिभाषा जोड़ी

भाजपा ने गद्दारों की नई परिभाषा जोड़ी 


 कौन देश प्रेमी है और कौन देश का गद्दार इसे परिभाषित करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने अब अपनी परिभाषा में एक नई शर्त जोड़ दी है और इस शर्त के मुताबिक क्या है पूरा मामला यह हम आपको समझाएं उससे पहले बता दें कि मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन करने वालों को भारतीय जनता पार्टी या हिंदू संगठनों ने या हिंदू वादियों ने किसकिस तरीके से गद्दार नहीं बताया देश विरोधी नहीं बताया हिंदू विरोधी नहीं बताया यह सब अपनी जगह है लेकिन अब भारतीय जनता पार्टी ने एक नई शर्त जोड़ दी है और हम भारतीय जनता पार्टी इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अब तक जिस सांसद ने जो मोदी सरकार में संस्कृति मंत्री रहे यानी संस्कृति को जानते हैं वह हिंदू संस्कृति को उनके बयान पर अभी तक ना तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोई प्रतिक्रिया आई है और ना ही भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की प्रतिक्रिया आई है इसका मतलब है कि गद्दार की परिभाषा में एक नई शर्त का जुड़ जाना 

यह नई शर्त क्या है यदि कोई मोदी और योगी से बढ़ के भी कोई अपना है और अपना कहने की बात कहता है तो वह गद्दार  है ,   वो देश का प्रदेश का भला नहीं चाहता । 

मोदी और योगी अब भारतीय जनता पार्टी या उन सनातनी हिंदू या उन कथित हिंदू वादियों के लिए अब मां बाप से भी बढ़कर हो गया है उनका मोदी औरयोगी क्या उनके लिए भाई बहन चाचा चाची रिश्ते नाते कोई मायने नहीं रखते और जो भी मोदी योगी से अपने रिश्तेदारों को यानी अपने बाप को भी यदि बड़ा बताएगा तो वह देश का गद्दार हो जाएगा योगी को अपना नहीं समझते तो अपने बाप को भी ।

दरअसल ये कोई और नहीं मोदी सरकार में संस्कृति मंत्री रहे महेश शर्मा है सिद्धार्थ नगर से इन्हें टिकट दी गई है भारतीय जनता पार्टीने एक बार फिर लगातार वे सिद्धार्थ नगर से सांसद और दादरी सामूहिक हत्याकांड के एक आरोपी को सहित का दर्जा देने और करोड़ों रुपए मुआवजे की मांग को लेकर भी वेविवादों में रहे हैं देश के राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद को लेकर भी उनका विवादित बयान आता रहा है यानी वे कट्टर हिंदूवादी नेता है और उनके बयानों को लेकर भारतीय जनतापार्टी कई बार असहज महसूस भी करती है लेकिन इस बार जब उन्होंने कहा कि जो भी लोग यदि मोदी योगी से बढ़कर अपने बाप को भी मान तो वे लोग गद्दार हैं।

 यानी आप सोचिए कि हिंदू वादियों के लिए अब स्पष्ट फरमान है उन सनातनी हिंदू वादियों के लिए जो भारतीय जनता पार्टी कीनजर में हिंदू हैं या भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं के लिए स्पष्ट फरमान है कि वे अपने बाप भाई बहन चाचा चाची बुआ फूफा किसी भी रिश्ते को अहमियत मोदी योगी से बढ़कर नहीं देंगे अब सोच लीजिए आप लोग कि आपको अब इस फरमान को मानना है नहीं तो गद्दार हो जाओगे आप लोग यह महेश शर्मा कह रहे हैं कैलाश हॉस्पिटल के मालिक करता धरता  है कई यूपी के कई शहरों में उनका यह हॉस्पिटल है और करोना काल में भी यह अस्पताल विवादों में रहा है तो विवादों में उनकी संपत्तिअचानक कई गुना बढ़ जाने को लेकर भी रहा है लेकिन वे मोदी सरकार में संस्कृति मंत्री रहे वो हिंदू संस्कृति को अच्छी तरीके से जानते हैं उस हिंदू संस्कृति को जो भारतीय जनता पार्टी या हिंदूवादी लोग मानते हैं और इसीलिए उन्होंने इस देश के गद्दारों की परिभाषा में यह नई शर्त जोड़ दी है कि अब जो भी मोदी योगी से बढ़कर अपने पाप को मान रहा हैतो उस वह देश का गद्दार है हालांकि इस मामले को लेकर कांग्रेस चुनाव आयोग के दरवाजे पर जा पहुंची और अपराधिक कारवाई कर ने की मांग भी की है 

ऐसी परिस्थिति में महेश शर्मा ने जब यह बात कही है तो हिंदुओं को उन हिंदुओं के लिए यह नईपरिभाषा है और उन्हें इस पर इसलिए भी चलना चाहिए क्योंकि परिवारवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट रवैया वे हमेशा ही गड़ आते रहे हैं गांधी परिवार कोमुलायम सिंह यादव परिवार को लालू प्रसाद यादव परिवार को यह अलग बात है कि जो परिवार वादी उनकी तरफ आ जाते हैं यानी एनडीए के मेंबर हो जाते हैं या भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश कर लेते हैं या सदस्यता ग्रहण कर लेते हैं तो उनकी परिभाषाएं कुछ थोड़ी सी बदल जाती है लेकिन परिवारवाद के खिलाफ उनका विषम मन नया नहीं है तो क्या महेश शर्मा उस विश् ममन से प्रभावित होकर अब एकनई शर्त जोड़ दी है कि देश के गद्दार कौन होंगे देखना होगा!

Vidio देखें 

https://youtu.be/3ClCUdx9KgM?si=BBDifIpolGzSMEyu

बुधवार, 4 मार्च 2026

मोदी की मुट्ठी में बीजेपी और संघ भी

मोदी की मुट्ठी में बीजेपी और संघ भी 


 क्या भारतीय जनता पार्टी पूरी तरीके से बदल गई है क्या भारतीय जनता पार्टी के सामने मोदी के अलावा कोई विकल्प नहीं है या फिर मोदी की मुट्ठी में भारतीय जनता पार्टी चली गई यह सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि जो कुछ इन दिनों चल रहा है वह हैरान करने वाला है ।

जिस  तरीके से भारतीय जनता पार्टी मोदी के गिरफ्त में आ गई किस तरीके से सब कुछ बदल गया है और भारतीय जनता पार्टी के सामने अब कोई विकल्प नहीं बचा है कि वह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार चले और शायद इसकी झलक सबसे पहले तो लोकसभा चुनाव के दौरान जारी संकल्प पत्र में आपको देखने को मिल गया था भारतीय जनतापार्टी ने जो घोषणा पत्र जारी किया था घोषणा पत्र के नाम से उसमें वादों की फेहरिस्त थी लेकिन इस बार ना तो महंगाई को लेकर कोई सवाल है ना कोई बात है और ना ही बेरोजगारी को लेकर कोई बड़ा निर्णय सरकार करते दिखाई दी, दूसरे जो मुद्दे हैं भ्रष्टाचार से लेके सारे मुद्दे गायब हैं किसानों की आय दोगुनी करने का जो वादा 2014 में किया गया था उसका भी पता नहीं यानी बहुत सारे वादे जो 2014 में किए गए थे 10 साल सत्ता में रहने के बाद वे पूरे नहीं हुए लेकिन उनका कहीं कोई जिक्र नहीं यहाँ तक की अग्निवीर का भी कहीं जिक्र नहीं था।76 पेज की मोदी की इस गारंटी में 53 पेज में मोदी की तस्वीर और इसके अलावा कहीं कोई किसी की हैसियत नहीं है कहा जाए तो गलत नहीं होगाएक पेज में साइड में कहीं दिखते गृह मंत्री अमित शाह दिखाई दे रहे थे तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कहीं एक पेज में दिखा दे रहे थे  पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का अध्यक्ष भाषण केअलावा कहीं जिक्र नहीं है लेकिन 2014 में चार बड़े नेताओं की तस्वीर थी और दूसरे पेज में ये तस्वीर थी भाजपा या आरएसएस के प्रमुख संस्थापक जनसंघ के नेताओं श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीन दयाल लेकिन 2019 आते आते यह इसमें कुछ और बदलाव किया गया सारे नेताओं को गायब कर दिया गया था और श्यामा प्रसाद मुखर्जी दीनदयाल उपाध्याय के साथ अटल बिहारी वाजपेई की तस्वीर को जोड़ते हुए सबसे आखिरी पन्ने पर स्थान दिया था लेकिन २०२४ आते आते सब कुछ बदल गया तो क्या भारतीय जनता पार्टी हर तरह से बदल चुकी है कांग्रेस की तुलना  ना करें क्योंकि आज विश्वास की बात है लेकिन क्या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो छवि बिगड़ चुकी है इलेक्ट्रॉल बंड और हिडन बर्ग की रिपोर्ट के बाद उस छवि पर भाजपा को इतना भरोसा था  या फिर यह मोदी की धमक है जिसके आगे पूरी पार्टी घुटने टेक द सवाल आप कई उठा सकते हैं लेकिन यह भारतीय जनता पार्टी का अंदरूनी मामला है उन्हेंशायद अब भी उस छवि पर भरोसा था चुनाव जीतने का जिस छवि को लेकर आरएसएस ने भी सवाल उठाए थे अपने मुखपत्र ऑर्गेनाइजर और क्या भारतीय जनता पार्टी झूठ की राह पर चल पड़ी है इस सवाल का जवाब बेहद ही मुश्किलहै क्योंकि झूठ और अपवाह की राजनीति के आसरे नफरत फैलाने का खेल का आरोप भारतीय जनता पार्टी पर लगते रही है ऐसे में यदि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बात बात पर झूठ बोलते हैं झूठों की फेहरिस्त है और उसकी गारंटी के साथ भारतीय जनता पार्टी आगे बढ़ गई जिसका ख़ामियाज़ा २४० सीट के रूप में सामने आया 

लेकिन शायद पार्टी के नेता इससे सबक लेने को तैया नहीं हैं।

भारतीय जनता पार्टी में ना तो वह राजनैतिक सचिता की बात की जा सकती है और ना ही भय भूख और भ्रष्टाचार जैसे नारों का ही कहीं पार्टी विद डिफरेंस भी कहीं दिखाई नहीं देता तब ऐसी परिस्थिति में अब जब एपिस्टन फ़ाइल और अमेरिका ट्रेड डील के मामले गर्म है, ईरान से दूरी का मामला पेचीदा हो रहा है तब भी भरोसा ?

तब क्या बीजेपी भी यह मान चुकी है कि चुनाव के लिए वोट चोरी और चुनावी सेटिंग के आसरे सत्ता क़ायम रहेगी इसलिए वे खामोश हैं या सच में गुजराती लॉबी ने पार्टी को अपनी मुट्ठी में रख लिया है 

तब संघ भी क्या उनकी मुट्ठी में चला गया है 

लग तो यही रहा है और यही वजह है कि अब मोहन भागवत की भूमिका पर सवाल उठ रहे है 


वीडियो देखें 


https://youtu.be/P3jDeqzASuY?si=ZMPUXH3-5Uytk17O