शनिवार, 22 मई 2021

प्रधानमंत्री के आंसू...

 

कोरोना के इस भीषण तबाही को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दुखी है, तो उन्हें दुखी होना भी चाहिए क्योंकि कोरोना की जो तबाही और नरसंहार इस देवभूमि के कतरे कतरे में दिखाई दे रहा है उसकी वजह किसी से छिपी भी नहीं है। सत्ता की लापरवाही के चलते हुए इस नरसंहार को लेकर दुखी होना और इसकी जिम्मेदारी लेना दोनों ही अलग बात है।

हम यह बिल्कुल भी नहीं कह रहे हैं कि नरसंहार के इस मंजर से प्रधानमंत्री जी दुखी होने का नाटक कर रहे हैं क्योंकि जिस तरह से रुदन और वेदना के स्वर आकाश से ऊंचा होता जा रहा है उसमें दुखी होने के अलावा कोई राह भी नहीं है। सत्ता या नेताओं को लेकर कितनी भई मोटी चमड़ी की बात कही जाए वह मोटी चमड़ी भी इस रुदन के आगे पिघल जायेगी फिर नरेन्द्र मोदी तो देश के प्रधानमंत्री है। 

ऐसे में उनके दुख के सच होने को लेकर आश्वस्त होना चाहिए हो यदि वे अपनी लापरवाही का बयान नमस्ते ट्रम्प से शुरु कर तमाम लापरवाही को गिना देते तो शायद उनके दुख पर सवाल नहीं उठता। लेकिन सत्ता के प्रमुख पदों पर बैठने वालों का अपना चरित्र होता है, फिर जिम्मेदारी को स्वीकार करने के लिए न केवल नैतिक साहस की जरूरत होती है बल्कि अपने भीतर के झूठ और छल को मारना पड़ता है। और यदि राजा जिम्मेदारी स्वीकार कर ले तो फिर वह कैसा राजा।

कोरोना के दौर में देश की सत्ता से लोगों की उम्मीद यदि बड़ी है तो इसके लिए प्रधानमंत्री को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। सत्ता की जब पूरी रईसी लोगों के टैक्स पर निर्भर है, सेन्ट्रल विस्टा के लिए पैसे या प्रधानमंत्री के महल के लिए पैसे जब टैक्स से ही आना है तो वैक्सीन को टैक्स फ्री कैसे किया जा सकता है। आखिर जनता पेट्रोल, रसोई गैस पर टैक्स दे ही रही है, दवा से लेकर घरेलु उपयोग की वस्तुओं  की कालाबाजारी में अधिक पैसे दे ही रही है तब वैक्सीन में टैक्स देने से क्या परेशानी हो सकती है।

इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर टैक्स नहीं लेने का दबाव डालना ही गलत है, वैसे भी सत्ता चलाना आसान काम तो है नहीं। फिर आपदा के समय तो यह और भी मुश्किल भरा काम है। सलाह देने या आलोचना करने वालों का क्या है उनका कौन सा पैसा लगना है तब उनकी सलाह तो बेमानी ही हुई और फिर मुफ्त की सलाह की कोई कीमत भी तो नहीं होती। देश को प्रधानमंत्री को धन्यवाद करना चाहिए क्योंकि वे न केवल दुखी है बल्कि उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि भी दे दी है और अब क्या किसी को सुली पर चढ़ाओगे?

शुक्रवार, 21 मई 2021

मरद हो तो चिल्लाओ राजा नंगा...

 

मोदी सरकार की लापरवाही के चलते कोरोना ने जिस तरह से इस देवभूमि पर तबाही और नरसंहार किया है उसके बाद तो इस सरकार को सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार ही नहीं है। ऐसे में जब तमाम बुद्धिजीवी, कलाकार, साहित्याकर, कवि सिर्फ इस डर से खामोश बैठे हो कि ट्रोल आर्मी और वाट्सअप युनिवर्सिटी उन्हें देशद्रोही घोषित कर देंगे तब एक महिला कवियत्रि की कविता 'शववाहिनी गंगाÓ इन दिनों सोशल मीडिया में तहलका मचा रही है।

गुजरात की मशहूर गुजराती कवियित्री पारुल खखर की शववाहिनी गंगा की हिम्मत की दाद इसलिए भी देनी चाहिए क्योंकि बीस हजार से ज्यादा गाली गलौज के बाद भी उसने इस कविता को अपने फेसबुक से डिलीट नहीं किया है। यही नहीं इस कविता की सफलता साफ बताती है कि मोदी सरकार की कार्यशैली को लेकर लोग कितने नाराज है।

पारुल की इस कविता की सफलता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि गुजराती में लिखी इस कविता इस कविता का अब तक पंजाबी, मराठई, तमिल, मलयालम, अंग्रेजी और हिन्दी सहित विभिन्न भाषाओं में अनुवाद कर सोशल मीडिया में डाला जा रहा है। पारुख खखर को इस कविता के लिए शबासी भी खूब मिल रही है। रातों रात चर्चित हुई इस कविता से नाराज मोदी समर्थकों ने तो गालियों की ऐसी बौछार कर दी है कि एक बार फिर भाजपा के संस्कार पर  सवाल उठने लगे है। महिला को लेकर की जा रही इस तरह की टिप्पणी से साफ पता चलता है कि कुंठित हिन्दुओं के लिए पार्टी से बड़ा कोई नहीं। 

आप खुद ही पढिय़े इस कविता को हम पाठकों की सुविधा के लिए हिन्दी अनुवाद ही प्रकाशित कर रहे हैं-

मरद हो तो आगे आओ, चिल्लाओ, ' राजा नंगाÓ ...,


एक स्वर में मुर्दे बोले, जब कुछ चंगा चंगा

राज, आपके रामराज्यमें शबवाहिनी गंगा


राज, आपके मसान कम हैं,कम है चिता लकड़ी,

राज, हमारे मातम करनेवाले कम हैं,कम हैं रोनेवाले,


घर घर जा कर यमटोली करती नाच बेढंगा

राज, आपके रामराज्यमें शबवाहिनी गंगा


राज, आपकी धुआं उगलती  चिमनी चाहे  चैन,

राज, हमारे कंकण टूटे तड़ाक, सीना टूटे,


जलता सब कुछ देख फीडल बजाये 'बिल्ला रंगाÓ

राज, आपके रामराज्य में शबवाहिनी गंगा


राज , दिव्य आपकी  ज्योति , दिव्य आपके वस्त्र 

राज, आपको असली रूपमें देखे पूरी नगरी,


मरद हो तो आगे आओ, चिल्लाओ, ' राजा नंगाÓ

राज आप के रामराज्यमें शबवाहिनी गंगा।

(आज के दौर मे भारतीय नागरिको के दर्द को आक्रोशित करती पारूल खखर की गुजराती कविता हिंदी अनुवाद। अनुवाद : डॉ. जी. के. वणकर)

गुरुवार, 20 मई 2021

लापरवाही की हद पार तबाही और नरसंहार...(2)

 

हमने पहले ही बताया था कि किस तरह से मोदी सरकार की लापरवाही ने इस देश में तबाही और नरसंहार मचाई थी और लापरवाही की हद पार हो गई कब कहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सरकार पर निशाना साधा। पहली लहर की लापरवाही से सबक सिखने की बजाय मोदी सत्ता ने तो दूसरी लहर की चेतावनी के बाद तो लापरवाही की सारी हदें पार कर दी।

पहली लहर को रोकने राज्य सरकारों ने खूब मेहनत की लेकिन कोरोना का प्रभाव थोड़ा सा ही कम हुआ कि प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने न केवल अपनी पीठ थपथपाई बल्कि जनवरी में कोरोना ने जंग जीत लेने का अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी ऐलान कर दिया। दुनियाभर के एक्सपर्ट का मजाक भी उड़ाया। यही नहीं एक्सपर्ट कमेटी की न बैठक बुलाई गई और न ही बढ़ते केस पर प्रोटोकॉल में दी महिनों बदलाव किया गया। एक्सपर्ट कह रहे थे दूसरी लहर में ऑक्सीजन की जरूरत बढ़ेगी लेकिन मोदी सरकार ने 9 मिलियन टन ऑक्सीजन विदेशों को बेच दी। एक्सपर्ट कह रहे थे दूसरी लहर भयावह होगी लेकिन कुंभ के आयोजन की अनुमति दी जाने लगी। बंगाल चुनाव में रैलियों के लिए सब कुछ खोल दिया। जबकि पूरे देश में कोरोना का कहर त्राहिमाम् मचा रहा था, कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल मोदी के बंगाल सत्ता का लोभ पर सवाल उठा रहे थे लेकिन पूरी भाजपा अपने विरोधियों का उपहास उड़ाने में लगी रही।

इस लापरवाही का भयानक परिणाम सबके सामने आने लगा। कोरोना से ज्यादा आक्सीजन और अस्पताल की बेइंतजामी में लोग मरने लगे। और सत्ता में बैठे लोग गौमूत्र, गोबर, कोरोनिल, हवन और पता नहीं क्या-क्या बोलने लगे। जबकि सरकार कुंभ के आयोजन को मना कर सकती थी, बंगाल चुनाव में प्रत्यक्ष रैली और प्रचार के लिए वर्चुअल या दूसरा तरीका अपना सकती थी, लेकिन सत्ता का दंभ और लोभ कब किसका सुनता है दंभ और लोभ हमेशा ही तबाही मचाता है लेकिन सत्ता आज भी यह मानने को तैयार नहीं है कि उसकी लापरवाही की वजह से इस देश में तबाही और नरसंहार का मंजर हुआ।

विदेशी मीडिया से लेकर अब तक संघ प्रमुख भी मोदी सरकार की आलोचना कर चुके है, न्यायालय ने तो जिस तरह से लानत भेजी वह डूब मरने वाली है लेकिन जब दंभ और लोभ हावी हो तो शरम कहां बचता है। कुंभ का दुष्परिणाम गंगा में बहती लाशों के रुप में सामने आई, मौत के तमाम आंकड़े छुपाने के बाद भी हम दुनिया के नक्शे में काला धब्बा की तरह दिखाई देने लगे हैं, कल्पना कीजिए की यदि आंकड़े न छुपाये तो दुनिया क्या कहेगी। हालांकि कई विशेषज्ञ अब तो मौत के आंकड़ों को दस लाख के पार बता रही है लेकिन सत्ता के पास कब शर्म रही गई।

मंगलवार, 18 मई 2021

लापरवाही की हद पार तबाही और नरसंहार...(1)

 

पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने जब कहा कि केन्द्र सरकार से बेहद लापरवाही हुई है तो इस बात की गंभीरता को समझना होगा कि आखिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किस हद तक और कहां कहां लापरवाही की क्या इस देश में कोरोना की वजह से हुई तबाही और मौतों की जिम्मेदारी उनकी नहीं होनी चाहिए।

मोदी सत्ता की लापरवाही को आप गिनते-गिनते थक जाओगे? हालांकि इस सत्ता का प्राय: हर निर्णय आम लोगों की तकलीफों में ईजाफा करने वाला रहा है, तब मोहन भागवत का पहली बार मोदी सरकार पर निशाने को पानी का सिर से उपर चढ़ जाने के महावरे को चरितार्थ करता है वरना संघ तो ऐसे ही सत्ता चहती रही है। 

कोरोना काल में हुई बेहिसाब मौते, परिवार का परिवार तबाह होना, सैकड़ों बच्चों का अनाथ होना और लाखों लोगों का गरीब हो जाने की जिम्मेदारी मोदी सत्ता की इसलिए भी है क्योंकि इस आपदा को लेकर पूरी दुनिया ने पहले ही चेतावनी दे दी थी और यहां की प्रमुख विपक्षी पार्टी ने भी सरकार को लापरवाही न बरत इसे गंभीरता से लेने कहा था लेकिन बहुमत का दम्भ ने किसी की नहीं सुनी और हालात सबके सामने है।

कोरोना को लेकर डब्ल्यूएचओ सहित दुनिया के कई देशों ने दिसम्बर 2019 में पहली चेतावनी दी थी, लेकिन मोदी सरकार ने कुछ भी नहीं  किया। तब जनवरी के अंतिम दिनों में भारत में कोरोना का पहला मामला सामने आया और फरवरी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चेताया कि सत्ता अभी भी कुछ नहीं कर रही है शीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए। लेकिन बढ़ते केस के बावजूद मोदी सरकार खामोश रही और कोरोना से लडऩे की बजाय तत्कालीन अमरीका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को जीताने के अभियान के तहत गरीबी छुपाने दिवाल खड़ी करते हुए नमस्ते ट्रम्प का भीड़ भाड़ वाला आयोजन कर डाला। 

कोरोना की रफ्तार लगातार बढ़ रही थी, अब तो लोग मरने भी लगे थे कई जगह से हाहाकार मचने की खबरें आने लगी लेकिन मोदी सरकार ने कोरोना के खिलाफ तब तक कुछ नहीं किया जब तक मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह की सरकार नहीं बनी। जिस तरह से सरकार बनते ही लॉकडाउन का निर्णय लिया गया उससे स्पष्ट है कि केवल सत्ता के लिए विलंब किया गया वरना गंभीरता को सरकार समझ रही थी नहीं तो अचानक लॉकडाउन का निर्णय नहीं लेती।

मोदी सरकार की लापरवाही यही नहीं रुकती है, सत्ता के मोह में अचानक लिये गए निर्णय से देशभर में राशन से लेकर दूसरी जरूरतों का  अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया, इसके बाद लॉकडाउन की तारीख बढ़ते ही देशभर में अफरातफरी मच गई, क्योंकि सरकार ने अब तक लॉकडाउन में फंसे लोगों के लिए कोई उपाय नहीं किया था, फंसे लोग ही नहीं अनिश्चितता की वजह से बड़ी संख्या में मजदूरों की घर वापसी शुरु हो गई।

मजदूरों की घर वापसी का मंजर बेहद खौफनाक, दर्दनाक था, कई किलोमीटर की दूरी तय करने परिवार के परिवार निकल पड़े, छोटे बच्चे,  महिलाएं कोई नहीं रुक रहा था और घर वापसी थी मौत का कहर बनकर टूटने लगा, रास्ते में, पटरियों में मौतों का मंजर भयावह था। इतने रुदन और वेदना के बाद कहीं मोदी सत्ता ने गरीबों के लिए मदद की घोषणा की लेकिन मध्यम वर्ग के लिए सरकार के पास कोई योजना न तब थी न अब है। (जारी)

बिग ब्रेकिंग: छत्तीसगढ में जुआ एक्ट में अब तक की सबसे बडी कार्यवाही 11 जुआडियों से नगद 41लाख 24 हजार



  • ➡️ ग्राम सम्हर थाना तेन्दूकोना नेचर बास्केट फाॅर्म हाउस में सजने वाले गुल जुआ फड में पुलिस का छापा।
  • ➡️ 11 जुआडियों से नगद 41,24,705/- (इक्तालीत लाख चैबीस हजार सात सौ पाच) रूपये नगद के साथ 5 लक्जरी वाहन व 12 नग मोबाईल जुमला कीमती 1,27,78,705/-(एक करोड़ सत्ताईस लाख अढातर हजार सात सौ पांच रुपये) रूपये जप्त
महासमुन्द
छत्तीसगढ सम्पूर्ण राज्य में व्याप्त कोरोना महामारी के मद्देनजर पुलिस अधीक्षक श्री प्रफुल्ल कुमार ठाकुर ने जुआ/सट्टा, अवैध शराब, अवैध गांजा परिवहन आदि संदिग्ध गतिविधयों पर रोक लगाने एवं उनके विरूध्द कार्यवाही करने हेतु जिले के समस्त थाना/चैकी प्रभारियों तथा सायबर सेल महामुन्द की टीम को निर्देशित किया गया था। जिसके तहत् सायबर सेल महासमुन्द व थाना/चैकी क्षेत्रों में ऐसे गतिविधियों पर निगाहे रख रही थी कि इसी दौरान दिनांक 17.05.2021 को मुखबीर से सूचना मिली की थाना तेन्दूकोना क्षेत्र ग्राम सम्हर के नेचर बास्केट फाॅर्म हाउस में गुल नामक जुआ खेल रहे है, कि सूचना को गम्भीरता से लेते हुये पुलिस अधीक्षक महासमुन्द, महोदय ने सायबर सेल महासमुन्द की टीम व थाना तेन्दूकोना पुलिस की टीम को पकडने हेतु निर्देशित किया। खिलाडी इतने शातिर थे कि पुलिस पार्टी की आने की सूचना देने के लिए आने-जाने वाले रास्तों पर वाचर लगाये थे और फाॅर्म हाउस से दूर अपनी वाहनों को लगाकर खडे किये थे। सायबर सेल महासमुन्द की टीम व थाना तेन्दूकोना पुलिस की टीम के लिए यह एक चुनौती थी सायबर सेल महासमुन्द पुलिस के द्वारा अलग-अलग टीम बनाकर बाईक व कार के माध्यम से फड तक पहुची और चारों ओर से घेराबंदी कर 11 जुआडियों को पकडा गया। जिसमें जुआडियान 01. टोनू उर्फ प्रशांत अग्रवाल पिता सूरज अग्रवाल उम्र 45 वर्ष सा. बागबाहरा महासमुन्द।  02. मनमीत गुरूदत्ता पिता बालसिंह गुरूदत्ता उम्र 41 वर्ष सा. गणेशपारा खरियार रोड ओडिसा। 03. मोहम्मद नवाब पिता मोहम्मद सुलेमान उम्र 38 वर्ष सा. हनुमान नगर कालीबाडी, रायपुर। 04. गणेश प्रसाद शुक्ला पिता देवी प्रसाद शुक्ला उम्र 62 वर्ष सा. देवेन्द्र नगर रायपुर। 05. सन्टी उर्फ हरपाल सिंह सलूजा पिता सुरजीत सिंह सलूजा उम्र 46 वर्ष सा. गुरूद्वारा पारा बागबाहरा महासमुन्द। 06. राकेश प्रसाद पिता जगन्नाथ प्रसाद उम्र 47 वर्ष सा. खुर्सीपार भिलाई, दुर्ग। 07. प्रदीप मोटवानी पिता सहजान मोटवानी उम्र 38 वर्ष सा. दीनदयाल काॅलोनी, भिलाई, दुर्ग। 08. देव कुम्हार पिता अवधराम कुम्हार उम्र 57 वर्ष सा. शितला मंदिर के पिछे पुरानी बस्ती, रायपुर। 09. सुनील कुमार पिता रमेश कुमार उम्र 42 वर्ष सा. गंजपारा, रायपुर। 10. सौरभ कुमार जैन पिता सुभाष कुमार जैन उम्र 30 वर्ष सा. दीनदयाल उपाध्याय नगर, गोल चैक रायपुर। 11. योगेन्द्र गण्डेचा पिता मनसुखलाल गण्डेचा उम्र 54 वर्ष सा. बागबाहरा, महासमुन्द के निवासी है। जुआडियान के पास से कुल नगदी रकम 4124705/- रूपये तथा 05 लक्जरी कार एवं 12 नग विभिन्न कंपनियों के मंहगे मोबाईल कुल जुमला कीमती लगभग 12778705/- रू एवं गुल पासा (डाईस), टाईल्स जप्त कर जुआ एक्ट के तहत् थाना तेन्दूकोना में कार्यवाही की गयी है। यह सम्पूर्ण कार्यवाही पुलिस अधीक्षक श्रीमान प्रफुल्ल कुमार ठाकुर के मार्गदर्शन में अति0 पुलिस अधीक्षक श्रीमती मेघा टेम्भुरकर साहू एवं अनु0अधिकारी(पु) बागबाहरा सुश्री लितेश सिंह के निर्देशन में सायबर सेल महासमुन्द प्रभारी उप निरीक्षक संजय सिंह राजपूत व थाना प्रभारी तेन्दूकोना हर्ष धुरंधर सउनि विजय मिश्रा, प्रआर श्रवण कुमार दास, प्रवीण शुक्ला, मिनेश ध्रुव, प्रेमलाल कर, भुनेश्वर टण्डन आर. रवि यादव, चम्पलेश ठाकुर, शुभम पाण्डेय, पीयूष शर्मा, दिनेश साहू, देव कोसरिया, शैलेन्द्र ठाकुर, संदीप भोई, ललित यादव, हेमन्त नायक, योगेन्द्र दुबे, विरेन्द्र नेताम, राजकुमार रात्रे, किशोर साहू, कमल जांगडे, त्रिलोक ठाकुर, रवि बरिहा, दुर्गा प्रसाद दीवान, लितक ठाकुर, इन्द्रजीत ठाकुर, मआर. मीरा यादव की टीम द्वारा किया गया।
नाम आरोपी:-
01. टोनू उर्फ प्रशांत अग्रवाल पिता सूरज अग्रवाल उम्र 45 वर्ष सा. बागबाहरा महासमुन्द।
02. मनमीत गुरूदत्ता पिता बलसिंह गुरूदत्ता उम्र 41 वर्ष सा. गणेशपारा खरियार रोड  ओडिसा।
03. मोहम्मद नवाब पिता मोहम्मद सुलेमान उम्र 38 वर्ष सा. हनुमान नगर कालीबाडी, रायपुर। 
04. गणेश प्रसाद शुक्ला पिता देवी प्रसाद शुक्ला उम्र 62 वर्ष सा. देवेन्द्र नगर रायपुर।
05. सन्टी उर्फ हरपाल सिंह सलूजा पिता सुरजीत सिंह सलूजा उम्र 46 वर्ष सा. गुरूद्वारा पारा  बागबाहरा महासमुन्द। 
06. राकेश प्रसाद पिता जगन्नाथ प्रसाद उम्र 47 वर्ष सा. खुर्सीपार भिलाई, दुर्ग।
07. प्रदीप मोटवानी पिता सहजान मोटवानी उम्र 38 वर्ष सा. दीनदयाल काॅलोनी, भिलाई, दुर्ग।
08. देव कुम्हार पिता अवधराम कुम्हार उम्र 57 वर्ष सा. शितला मंदिर के पिछे पुरानी बस्ती,  रायपुर।
09. साजीद मेमन पिता अब्दुल मेमन उम्र 38 वर्ष सा. रमन मंदिर वार्ड फाफाडीह रायपुर।
10. सौरभ कुमार जैन पिता सुभाष कुमार जैन उम्र 30 वर्ष सा. दीनदयाल उपाध्याय नगर,  गोल चैक रायपुर।
11. योगेन्द्र गण्डेचा पिता मनसुखलाल गण्डेचा उम्र 54 वर्ष सा. बागबाहरा, महासमुन्द

जप्त सामग्री:-
01. फड एवं पास से नगदी रकम 4124705/- रूपये।
02. एम.जी. हैक्टर कार क्रमांक CG 04 NB 9236 कीमति लगभग 15,00,000/- रूपये।
03. फाॅच्र्यूनर कार क्रमांक CG 07 T 4275 कीमति लगभग 25,00,000/- रूपये।
04. फाॅच्र्यूनर कार क्रमांक CG 04 ME 0470 कीमति लगभग 30,00,000/- रूपये।
05. मारूती ब्रेजा कार क्रमांक CG 04 LS 9994 कीमति लगभग 6,00,000/- रूपये।
06. महिन्द्रा KUV100 कार क्रमांक CG 13 Y 7508 कीमति लगभग 7,00,000/-रूपये।
07. 12 नग विभिन्न कंपनियों के मंहगे मोबाईल कीमति लगभग 3,54,000/- रूपये।

सोमवार, 17 मई 2021

नैतिक सत्ता तो बची नहीं!

 

देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्या नैतिक सत्ता खो चुके हैं? हालांकि नरेन्द्र मोदी पर पार्टी का भरोसा अब भी कायम है इसलिए सत्ता जाने का सवाल ही नहीं है लेकिन सात साल में इस शख्स की छवि को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जितना पलीता लगा है उतना किसी भी प्रधानमंत्री पर नहीं लगा हैं।

बात-बात पर झूठ और अमर्यादित भाषा शैली और भाजपा के प्रचार में दिन-रात लगे रहने की शैली ने उनके हर काम पर संशय का बादल खड़ा कर दिया है। नेता की ताकत होती है जनता का विश्वास, सक्षमता और दूर दृष्टि पर। लेकिन जब नियत ही साफ न हो या शंकास्पद हो तो फिर वह लाख जतन कर ले इतिहास में वह दर्ज होने लायक नहीं बच सकता है। 

अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास केवल तीन साल बचे हैं लेकिन बीते बरस में अविश्वास की जो खाई बड़ी है उसके बाद यह कहना कठिन है कि वे कोई नया करिश्मा कर पायेंगे क्योंकि इस कोरोना काल में प्रधानमंत्री की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जितनी आलोचना हुई है उसकी भरपाई हो पाना असंभव सा है। पिछले सात साल के शासन में घोर पक्षपात, अपने पराए का भाव, स्वार्थी भाव और पूरी सरकारी मशीनरी को प्रोपोगेंडा चेम्बर में बदल दिया गया, असहमति के स्वर को ट्रोल करना और सरकार की इसी नीति के चलते बीते सात साल में इस देश की नागरिकता छोड़कर जाने वालों की संख्या सात लाख के पार होने लगी है। असुरक्षा और अशांति के इस दौर में पैसे वालों में जिस तरह की घबराहट बढ़ी है और देश छोडऩे का चलन बढ़ा है वह इस देश की आर्थिक ढांचे को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा चुके हैं।

लोकतंत्र की सबसे बड़ी खासियत विपक्ष या अहसमति के स्वर को तवज्जों देना है। आप नेहरु से लाख चिढिय़े लेकिन याद रखिये कि इस देश को महान लोकतांत्रिक बनाने में उन्होंने अपना पूरा जीवन होम कर दिया था। जब संसद में जनसंघ की चार सीट थी और सेवियत नेता निकिता खुश्वेच भारत आए तो नेहरु ने उम्दा भाषण की वजह से अटल बिहारी वाजपेयी को खुश्वेच से मिलाने न केवल बुला लिये बल्कि वाजपेयी का परिचय देते हुए कहा कि ये हमारे भावी प्रधानमंत्री है, नेहरु जानते थे कि ये तभी होगा जब कांग्रेस हार जायेगी। लेकिन उनमें हीनभावना नहीं थी। परिचय सुनकर खुश्चेन तुरंत बोले फिर ये यहां क्या कर रहे है? हमारे देश में तो हम उन्हें गुलग (राजनैतिक विरोधियों की जेल) में भेज देते हैं।

नेहरु जानते थे कि लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए विपक्ष का होना जरुरी है इनके जैसे कांग्रेस मुक्त वाले नेहरु नहीं थे। असहमति के स्वर को बीते सात साल में प्रताडि़त करने के सैकड़ों उदाहरण है और हद तो तब हो गई जब कोरोना के इस भीषण आपदा में मदद करने वालों के हाथ काटने की कोशिश हुई। 

गुजरात में जारी हुए सवा लाख डेथ सर्टिफिकेट और गंगा में कुत्ते नोचते लाश का जवाब मोदी सत्ता को इसलिए भी देना चाहिए क्योंकि गुजरात, उत्तराखंड, बिहार और उत्तरप्रदेश में भाजपा की ही सरकार है। मोहन भागवत जब कहते हैं कि सत्ता से लापरवाही हुई है तब भी यदि हिन्दुस्तान में आएगा तो मोदी ही गूंज सुनाई देने लगे तो मान लीजिए कि इस देश को अभी और नीचे जाना है, और भी लाशें गिननी है और बौद्धिक और उद्यमशीनों का देश से पलायन जारी रहना है।

रविवार, 16 मई 2021

देश को मझधार में खड़ा कर दिया...

 

मोदी सरकार ने कोरोना वैक्सीनेशन के मामले में देश को मझधार में खड़ा कर दिया है। हर तरफ हाहाकार है, मौत के आकड़े छुपाये जा रहे है। वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज को लेकर बार-बार नीतियों में परिवर्तन किया जा रहा है। हालत बदतर होते जा रहा है और प्रधानमंत्री की अभी भी प्राथमिकता सेन्ट्रल विस्टा में महल बनाने की है।

याद कीजिए तो मोदी सरकार का हर निर्णय लोगों में भ्रम फैलाने और जान लेने वाला रहा है। नोटबंदी के समय 8 नवम्बर 2016 से लेकर 31 दिसम्बर 2016 तक सौ तरह के आदेश जारी हुए इसका परिणाम क्या हुआ 150 से अधिक लोग मारे गए। फिर जीएसटी को नयी आर्थिक आजादी का सूरज के रुप में पेश किया गया और इसकी वजह से भी सैकड़ों व्यापारी बर्बाद हो गए। न नोटबंदी के मास्टर स्टोक का फायदा मिला न जीएसटी के मास्टर स्ट्रोक से फायदा हुआ।

भारत के कोविड वर्किंग ग्रुप के चेयरमेन डॉक्टर एन.के. अरोरा ने कुछ दिन पहले कहा था कि दो डोज के अंतराल को बढ़ाने से बेहतर परिणाम का कोई सबूत नहीं है ऐसा वही देश कर रहे है जहां वैक्सीन की कमी है। देश में वैक्सीनेशन को लेकर सत्ता ने बार-बार नियम बदले 60 वर्ष से 45 फिर 18 वर्ष किया गया पिछले चार माह में सरकार का बयान देखे तो या तो वह विरोधाभाषी है या अस्पष्ट है। ऐसा लगता है कि सरकार ने इस देश में नरसंहार का फैसला ही कर लिया है ताकि जनसंख्या के कथित समस्या से मुक्ति मिल सके। यह इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि मोदी सरकार ने अगस्त 2020 में निर्णय लिया कि कोई भी राज्य सरकारे, अपने स्तर पर वैक्सीन के संबंध में कोई भी प्रयास न करें। जितनी भी जरूरत होगी, वह केन्द्रीय स्तर पर भारत सरकार खरीदेगी। जबकि इस समय पूरी दुनिया के देश अपनी-अपनी जरूरत के हिसाब से ग्लोबल टेंडर दे रहे थे तब मोदी सरकार केवल सीरम इंस्टीट्यूट को आर्डर देकर अपने चेहते टीवी चैनलों पर वैक्सीन गुरु का खिताब बटोर रहे थे।

अचानक मोदी सरकार के इस भ्रमित निर्णय के चलते वैक्सीनेशन में कमी आ गई तो फिर राज्य सरकारों के सामने ग्लोबल टेंडर जारी करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। उत्तरप्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, राजस्थान की सरकारें ग्लोबल टेंडर जारी कर रही है या कर दी है। सवाल यही है कि जब ग्लोबल टेंडर राज्यों को ही जारी करना था तब यह काम पर पहले क्यों मना किया गया। इस सरकार के सारे फैसले आग लगने के बाद कुआं खोदने वाली होने की वजह से देश की हालत हर मोर्चे पर खराब होते जा रही है और कोरोना ने तो भयावह तबाही मचाई है।

इस सरकार की आदतों में शुमार भ्रमित निर्णय के बाद भी यह सरकार श्रेय लेने की होड़ में भी लगी रहती है जबकि हकीकत में देखा जाए तो इस सत्ता ने 6 साल में देश को इतना पीछे ढकेल दिया है, लोगों के जीवन को नरक बना दिया है जिसकी कल्पना ही बेमानी है। देश में टीकाकरण का इतिहास उपलब्धियों से भरा रहा है, पोलियों, चेचक, टीवी, हेपेटाईटिस बी जैसे मामले में नि:शुल्क टीकाकरण सफलतापूर्वक होता रहा है। और उसके परिणाम भी सुखद रहे हैं लेकिन इस सत्ता ने वर्तमान वैक्सीनेशन अभियान के काला अध्याय बना दिया।