गुरुवार, 14 अगस्त 2025

बदल गया EVM का परिणाम सुप्रीम कोर्ट में हारा हुआ जीता

 बदल गया EVM का परिणाम, सुप्रीम कोर्ट में हारा हुआ जीता 


लगता है कि मोदी सत्ता और चुनाव आयोग के बुरे दिन शुरू हो गये है, उधर हरियाणा में ईवीएम से हारा व्यक्ति पुनर्गणना में जीत गया तो अनुराग ठाकुर ने होशियारी दिखाकर आयोग और पार्टी को ही मुसीबत में खड़ा कर दिया है, सुप्रीम कोर्ट का ६५ लाख वॉटरो को दिया फ़ैसला भी चुनाव आयोग के लिये मुसीबत बढ़ाने वाला है तो २०२४ का चुनाव शून्य घोषित करने की आवाज़ देश भर में गूंजने लगी है…

हरियाणा में ईवीएम का परिणाम सुप्रीम कोर्ट में कैसे बदला उससे पहले बता देते है कि मूर्ख मित्र से विद्वान शत्रु बेहतर, अनुराग ठाकुर की प्रेस कॉन्फ्रेंस से मोदी सरकार बुरी तरह फँस गई है 

प्राचीन कहावतें अक्सर वर्तमान घटनाओं को आईना दिखाती हैं। "मूर्ख मित्र से विद्वान शत्रु बेहतर" यह उक्ति अनुराग ठाकुर पर बिल्कुल सटीक लागू होती है, सांसद अनुराग "गोलीमारो" ठाकुर ने विपक्ष को घेरने की कोशिश में अपनी ही सरकार और चुनाव आयोग को फंसा दिया। 13 अगस्त 2025 को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकुर ने छह लोकसभा सीटों—रायबरेली, वायनाड, कन्नौज, डायमंड हार्बर, अमेठी और एक अन्य—पर फर्जी वोटरों की मौजूदगी का आरोप लगाया, जिसमें लाखों संदिग्ध मतदाता, डुप्लिकेट एंट्रीज, फर्जी पते और आयु में हेरफेर के आंकड़े पेश किए। उनका इरादा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के आरोपों का जवाब देना था, जहां गांधी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर फर्जी वोटों से चुनाव प्रभावित करने का इल्जाम लगाया था।

ठाकुर की यह रणनीति विपक्ष को निशाना बनाने की थी, खासकर राहुल गांधी की वायनाड और रायबरेली सीटों पर, जहां उन्होंने दावा किया कि फर्जी वोटरों ने चुनाव परिणाम प्रभावित किए, लेकिन यह कदम उल्टा पड़ गया। कांग्रेस ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि अगर सत्ताधारी पार्टी के सांसद खुद मतदाता सूचियों में फर्जीवाड़ा स्वीकार कर रहे हैं, तो केंचुआ पूरी तरह से इसके लिए जिम्मेदार है क्योंकि वोटर लिस्ट तो उसी ने तैयार की, विपक्ष ने मांग कर दी कि पूरा 2024 लोकसभा चुनाव अमान्य घोषित किया जाए, क्योंकि यह फर्जी वोटर लिस्ट पर आधारित था, यह तो  राहुल के आरोपों की पुष्टि करता है, अब यह भी पूछा जा रहा है कि भाजपा को वोटर काकंप्यूटर रीडेबल डेटा कैसे मिला जबकि विपक्ष को नहीं। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी की वाराणसी सीट पर भी सवाल उठने से शुरू हो गए हैं, आरोप लगाया जा रहा है कि भाजपा-चुनाव आयोग की मिलीभगत से फर्जी लिस्ट तैयार हुई। 

गोली मारो ठाकुर का इरादा विपक्ष को कमजोर करना था, लेकिन उनके आंकड़ों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा कर दिया।  आयोग ने राहुल गांधी को नोटिस जारी किया था, लेकिन ठाकुर को नहीं, जो स्पष्ट पक्षपात का संकेत देता है। परिणामस्वरूप, सरकार फंस गई—एक ओर विपक्ष नए चुनाव की मांग कर रहा है, दूसरी ओर भाजपा को अपनी ही बातों का बचाव करना पड़ रहा है।

अभी बीजेपी बचाव भी नहीं कर पाई थी कि सुप्रीम कोर्ट ने चूना आयोग से साफ कहा है कि बिहार की वोटर लिस्ट से काटे गए 65 लाख लोगों के नाम

1. जिलावार

2. श्रेणीवार

3. EPIC नंबर के साथ 

वेबसाइट पर दिखाना होगा। 

साथ में एक सर्च बॉक्स भी देना होगा, ताकि लोग EPIC नंबर के आधार पर अपने नाम को सर्च कर सके।

चूना आयोग वेबसाइट में हर नाम के साथ वह कारण भी बताएगा, जिसकी वजह से नाम काटे गए। 

चूना आयोग को अब यह भी प्रचारित करना होगा कि आधार कार्ड को मान्य दस्तावेज माना जाएगा।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से इतर एक और फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट में हुआ जो ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठते सवाल की पुष्टि ही नहीं करता बल्कि साबित करता है कि ईवीएम से परिणाम बदला जा सकता है 

मामला था हरियाणा के पानीपत जिले के गोहाना लाखु गांव की पंचायत के परिणाम का जिसमें किसी कुलदीप सिंह को मशीनों से वोट की गिनती के बाद विजेता घोषित कर दिया गया था! 

उसके निकटतम प्रतिद्वंदी मोहित कुमार को नवंबर 22 के पंचायत चुनाव में मशीनों पर कुछ शक हुआ कि उससे परिणाम प्रभावित हुआ है!

वह पानीपत के सेशन कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ याचिका लगाकर न्याय की मांग लेकर गया विद्वान कोर्ट ने फैसला दिया की सब मशीनों की दोबारा से पुनर्गणना की जाए, और उसके बाद परिणाम घोषित किया जाए! 

लेकिन जीते हुए उम्मीदवार कुलदीप सिंह को यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं था उसने हरियाणा पंजाब हाई कोर्ट में अपनी याचिका दायर की और वहां से फैसला दिया गया के परिणाम पूर्व वत रखा जाए , और सेशन कोर्ट के फैसले को कैंसिल कर दिया! 

लेकिन निकटतम प्रतिद्वंद्वी अपने आप में बहुत आश्वस्त था वह मामला सुप्रीम कोर्ट में ले गया वहां तीन जजों की पीठ श्री सूर्यकांत जी श्री दीपंकर दत्ता जी और श्री एन कोटेश्वर सिंह जी की पीठ ने फैसला दिया , और सारी ईवीएम मशीन कोर्ट में तलब की गई, सारी मशीनों को सुप्रीम कोर्ट में मंगाया गया और फिर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दियाकी अब इसकी पुनर्गणना रजिस्ट्रार कावेरी की निगरानी में होगी और उसकी पूरी तरह वीडियो ग्राफी की जाएगी! 

उसके बाद सभी उम्मीदवारों के प्रतिनिधि वहां बुलाए गए और पुनर गणना  संपन्न कीगई!

आश्चर्य की बात थी तो परिणाम बदल गया निकटतम उम्मीदवार मिलाप को 3767 वोटो की गिनती जो पांच मशीनों के अंदर की गई थी उसमें उसे 1051 वोट प्राप्त हुए और जिस उम्मीदवार को विजयी घोषित किया गया था कुलदीप सिंह उसे सिर्फ 1000 वोट मिले! 27 वोट से हारा हुआ बुधवार 51 वोटो से जीत गया!

सुप्रीम कोर्ट ने नए परिणाम को असली परिणाम बता कर मिलन कुमार को सरपंची दिलवा दी !

 अब विश्लेषकों का सवाल यही है कि यदि चुनाव अधिकारी ने गिनती सही की थी तो फिर परिणाम कैसे बदल गए? 

और अगर यह परिणाम बदल सकते हैं तो फिर ईवीएम हैकिंग से लेकर evm करप्ट होने की बात जो पब्लिक डोमेन में है उसमें कुछ तो सच्चाई है! 

या यह सारी कारास्तानी चुनाव अधिकारियों की थी जो शासन के इशारों पर काम कर कर जनादेश के अपहरण की कोशिश कर रहे थे !

कारण कुछ भी हो लेकिन पहली बार सबूत के साथ सुप्रीम कोर्ट के पटल पर evm संदेह के घेरे में है और ट्रस्ट डिफिसिट से जूझ रही भारतीय चुनाव व्यवस्था पर और चुनाव आयोग पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गया है कि आखिर वह खेल तो करती ।(साभार)


बुधवार, 13 अगस्त 2025

अमित शाह की करारी हार…

 अमित शाह की करारी हार…


वोट चोरी को लेकर देश भर में मचे बवाल के बीच यदि मोदी के मंत्री किरन रिज़िज़ू का व्यवहार चुनाव आयोग की प्रवक्ता की तरह है तो गृह मंत्री की ऐसी करारी हार इससे पहले कभी नहीं हुई है और ये हार इसलिए मायने रखता है क्योंकि इन दिनों अमित शाह को उत्तराधिकारी के रूप में ज़ोर शोर से प्रमोट किया जा रहा था तो आने वाले दिनों में उपराष्ट्रपति का चुनाव भी है…

बात की शुरुआत प्रवक्ता से चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों के 13 नेताओं को बुलाया था या 30 को, यह जानकारी चुनाव आयोग का प्रवक्ता या जनसंपर्क अधिकारी दे तो समझ में आता है। वैसे वहां गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड भी यह जानकारी दे सकता है।

लेकिन अब चूंकि चुनाव आयोग भी पूरी तरह सरकार का  ही हिस्सा बन चुका है, इसलिए उसकी ओर से हर जानकारी देने या उस पर लगने वाले आरोपों का जवाब देने का काम सरकार के मंत्री और सत्ताधारी पार्टी के प्रवक्ता करने लगे हैं..!

अब आ जाइए अमित शाह की हार पर…

कांस्टीट्यूशन क्लब दरअसल देश के चुनिंदा मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट की संस्था होती है जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सांसद सदस्य होते हैं साथ ही कुछ पूर्व लोकसभा सांसद जो पहले सांसद निवास में रहते थे उनके भी वोट शामिल होते हैं! 

इसका पदेन अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष होते हैं लेकिन सेक्रेटरी और अन्य सभी पदों पर चुनाव की परंपरा है! 

राजीव प्रताप रूडी जो बिहार छपरा से भाजपा के सांसद हैं पिछले 25 वर्षों से इस पद पर कार्यरत है! 

इस बार का चुनाव इस मायने में रोचक था, क्योंकि इस बार अमित शाह एंड पार्टी ने संजीव बालियान को राजीव प्रताप रूडी के खिलाफ खड़ा किया था! 

938 सदस्यों वाले इस क्लब में 788 तो वर्तमान लोकसभा राज्यसभा के सांसद थे तथा शेष वह लोग थे जो पूर्व में पार्लियामेंट के सदस्य थे पर अब सुदूर गांव में रहते हैं मतलब सदस्य नहीं होने की वजह से संसद भवन के परिसर छोड़कर चले गए! 

कल पूरे चुनाव में संजय बालियान को जीताने के लिए अमित शाह कैंप पूरी तरह सक्रिय नजर आया यहां तक किजेपी नड्डा जैसे लोग भी संजीव बालियान की मदद करते हुए देखे गए ! अमित शाह की हल्ला ब्रिगेड के सदस्य झारखंड के संसद सदस्य निशिकांत दुबे ने तो यहां तक घोषणा की की जीतेंगे संजीव बालियान हीं! 

788 सांसदों के इस समूह में 421सांसद एनडीए के हैं 43 सांसद न्यूट्रल है और 324 सांसद इंडिया के हैं! 

अगर पूरी तरह भाजपा समर्थित सांसद अमित शाह मोदी कैंप के कैंडिडेट संजीव बालियान के साथ नजर आते तो उनकी हार नामुमकिन थी!

लेकिन राजीव रूडी 102 वोटो से जीते! कल 680वोट गिरे जिन में 38 वोट डाक मत पत्र के थे , यह भी पूर्व सांसद और राज्यपाल वगैरा हैं जो अधिकांश भाजपा समर्थक थे! 

इंडिया गठबंधन के सभीसदस्य राजीव रुढी को सपोर्ट करते हुए नजर आए यहां तक की सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे वरिष्ठ नेता भी राजीव रूडी के लिए फ्लोर मैनेजमेंट करते  दिखे!

क्योंकि संसद अभी चल रही है इसलिए माना जाना चाहिए कि 644 वर्तमान सांसदों ने इसमें वोट किया और बाकी जो 38 डाक मत पत्र से वोट आए इस तरह कुल 682 मतदाताओं ने वोट डालें! 

सीधा सा गणित है 788 वर्तमान सांसदों में 421 भाजपा लीड गठबंधन के हैं और324इंडिया के हैं ,43 सांसद किसी गठबंधन के नहीं है!

 संजू बालियां को मात्र 290 वोट मिले और राजीव प्रताप को 392 वोट मिले इसमें 38 वोट डाक मत पत्र वाले भी शामिल थे यानी 354 वर्तमान सांसदों के वोट थे! एक आश्चर्य की बात और थी कि यह पूर्व 38 सांसद जिन्होंने डाक मत पत्रों से अपने मत भेजें वह सभी राजीव प्रताप रूडी को मिले!

मोदी शाह कैंप के खुले समर्थन के बावजूद इंडिया के सांसदों के सहयोग से राजीव रूडी की यह जीत क्या भाजपा के असंतोष की कहानी कह रहा है? 

आने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के संदर्भ में आंकड़ों की यह कारीगरी रोमांच पैदा कर रही है!

वैसे एक नॉरेटिव जाट बनाम राजपूत का भी है और अमित शाह ने संजीव बालियान को खड़ा किया था इसलिए बड़े राजपूत नेता योगी आदित्यनाथ राजनाथ सिंह जैसे नेताओं ने बिहार के राजपूत नेता राजीव प्रताप की जीत में बड़ी भूमिका अदा करी , इंडिया गठबंधन का सहयोग तो अपनी जगह था ही! 

क्या भारतीय जनता पार्टी में अमित शाह के खिलाफ भी एक बड़ा वर्ग असंतोष के मुहाने पर खड़ा है!(साभार)

मंगलवार, 12 अगस्त 2025

ट्रंप का खेल और ठग गिरोह

 ट्रंप का खेल और ठग गिरोह…


देश में वोट चोरी को लेकर मोदी सत्ता जितना परेशान है उससे ज़्यादा परेशानी तो आयोग को sir पर होने लगी है, पूर्व उपराष्ट्रपति धनगड का  ग़ायब होने से लेकर ट्रंप की चालबाज़ी के बीच इस देश के ठग गिरोह की चर्चा भी तो कम नहीं है, सवाल अदानी अंबानी से आगे निकलने लगा है और पेट्रोल में दस बीस फ़ीसदी एथनॉल तक जा पहुँचा तो सबसे ज़्यादा एथनॉल बनाने वाली गडकरी की कंपनी कैसे गुमनामी से काम कर सकती है

आज बात की शुरुआत ठग गिरोह से करें उससे पहले बता देते हैं कि sir को  को लेकर जो बहस  न्यायलय में चल रही थी को लेकर दिनभर मीडिया सिर्फ यह चलता रहा सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन जारी रखने की बात कही! 

आधार कार्ड पर जो बहस अभिषेक मनु सिंघवी ने की  और जिस तरह इस तर्क का खंडन किया उस प्रतिवाद की कोई ध्वनि मिडिया में नहीं थी!

कपिल  सिब्बल ने तो पहले ही साफ कर दिया था इंटेंसिव रिवीजन के विरोध में नहीं है हमारा मुख्य एजेंडा इस प्रक्रिया को कानून के आधार पर और अधिक  से अधिक लोगों को  वोट का अधिकार दिया जाए इससे संबंधित है!

हम चाहते हैं चुनाव आयोग जिस तरह से विषय वस्तु छुपाने की कोशिश कर रहा है उसकी जगह उसे पारदर्शी तरीका अपनाना चाहिए जिस प्रक्रिया सरल सुगम और सुलभ हो!

*उत्तर प्रदेश के 5000 लोगों का नाम बिहार में एक विधानसभा क्षेत्र में*

आज सोशल मीडिया पर एक स्वायत्त संस्था कलेक्टिव रिफॉर्म्स की की रिपोर्ट भी बेहद चर्चा में रही जिसमें उन्होंने एक स्ट्रिंग ऑपरेशन कर कर यह बताने की कोशिश की है की बिहार की एक विधानसभा क्षेत्र वाल्मीकि विधानसभा क्षेत्र में 5000 उत्तर प्रदेश के वोटर बिहार में वोट देने के लिए शामिल किए गए हैं जिनके दो-दो एपिक नंबर हैं और वह उत्तर प्रदेश के भी वोटर हैं! 

इसे लेकर भी पूरे बिहार में सनसनी है! 


आज याचिका करता ओ के वकीलों की बहससुनी गई  कल चुनाव आयोग का पक्ष सुना जाएगा!

तब ट्रंप के पल पल बदलते बयान के बीच पाकिस्तान का मदद करने वाले दुनिया के सबसे अविस्वशनीय चीन के साथ मोदी सत्ता का प्रेम क्या देश को नई मुसीबत की तरफ़ खिच रहा है…

ऐसे में राहुल गांधी आखि़र क्यों कहते हैं कि AA ( अंबानी, अदानी) के कारण नरेंद्र मोदी अमेरिका के प्रेसिडेंट ट्रंप के सामने डरे ,सहमें एवं झुके रहते हैं...?

दरअसल इसके पीछे एक राज है, 

याद कीजिए ट्रंप ने कहा है कि भारत अपना तेल रूस से सस्ते दाम में खरीदकर उसे अन्तर राष्ट्रीय बाजार में बेचकर बड़ा मुनाफा कमा रहा है, 

अब इसे समझना जरूरी है, यदि भारत सरकार इस तेल को रूस से सस्ते दाम में खरीदती तो भारत की जनता को लाभ मिलता,

पर ऐसा नहीं हो रहा है।

 क्योंकि ये तेल रूस से अंबानी की कंपनी रिलायंस खरीदती है और फिर उसे 30% जैसे भारी भरकम मुनाफा लेकर अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में बेचती है।

अब इस कहानी में दूसरा ट्विस्ट है, 

वॉल स्ट्रीट जर्नल के रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका का न्याय विभाग अदानी समूह की प्रमुख इकाई अदानी एंटरप्राइज़ेज़ को माल भेजने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कई एलपीजी टैंकरों की गतिविधियों की जांच कर रहा है ।

अमेरिका में डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस अदानी के ऊपर रिश्वत एवं भ्रष्टाचार के लगे अन्य आरोपों की भी जांच कर रहा है। साथ ही हिंडनवर्ग का भी एक केस है।

एक तरफ अमेरिका ईरान और रूस से तेल आयात पर प्रतिबन्ध लगाया हुआ है, किन्तु अंबानी की रिलायंस कंपनी का ईरान और रूस से तेल आयात अदानी के गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट से ही किया जा रहा है।

इसलिए रूस के कारण भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने के बाद गौतम अदानी अपनी कंपनी अडानी पोर्ट्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी से इस्तीफा दे दिया है. अब वे सिर्फ नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर कंपनी से जुड़े रहेंगे, यानी कंपनी की रोजमर्रा की रणनीति या ऑपरेशन में उनका दखल नहीं रहेगा।

यह उनका सेफ्टी मेजर है ताकि अमेरिकी सरकार द्वारा किसी कार्यवाही, प्रतिबन्ध, सजा या जेल भेजने की स्थिति में बिजनेस  प्रभावित ना हो। कुछ बचने बचाने की गुंजाइश हो।

बिटवीन द लाइंस, खबरों को मानें तो अंबानी के रिलायंस कंपनी द्वारा रूस से आयात तेल मुनाफे में कुछ प्रतिशत रंगा बिल्ला की भागीदारी है।

इस प्रकार अदानी पर अमेरिका में जांच , एवं इन ठग गिरोहों को ट्रंप अच्छी तरह जान चुका है, जिससे मोदी चुप एवं डरे सहमें रहते हैं।(साभार)



सोमवार, 11 अगस्त 2025

क्या हिट होगा-वोट चोरी

 क्या हिट होगा-वोट चोरी…


राहुल गांधी ने फ़िल्म रिलीज़ कर दी है, पहले हफ़्ते में जिस तरह से यह फ़िल्म ने हलचल मचाई है उससे सत्ता की नींद उड़ चुकी है, चुनाव आयोग बेशर्मी पर उतर आया है ऐसे में अब दूसरे राज्यों से वोट चोरी की नई नई ख़बर क्या मोदी सत्ता को नई मुसीबत की तरफ़ नहीं ले जा रहा है, सोचिए और इसे ऐसे समझे…

जब विचारधाराओं में द्वंद हो तब बीच का कोई रास्ता नहीं होता, नहीं हो सकता.और होना भी नहीं चाहिए।लोकतंत्र का रास्ता लंबा और वृहद है. संघर्ष के बिना इसकी ज़मीन तैयार नहीं हो सकती. पिछले दशक में हमने जितने मानव अधिकारों की और एक व्यक्ति के निजी अधिकारों की हत्या हमने देखी हैं उससे हमारा वर्तमान और भविष्य ऐसे रास्ते पर आकर खड़ा हो गया है कि चकाचौंध भरी रोशनी में हाशिए की सड़क नज़र नहीं आती. नतीजतन इसे डेमोक्रेसी की कमजोरी के रूप में भी देखा जा सकता है. 

जब आपका वोट ही सुरक्षित नहीं है तो आप किस अधिकार और भविष्य की बात करेंगे?

वोट चोरी विचार और भरोसे की चोरी है.

इसके ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद हो.

मामला तब शुरू हुआ जब ज़मीन में दिख रहा ग़ुस्सा और चुनाव परिणाम अलग अलग दिखने लगा,  विपक्ष को जब ये महसूस हुआ कि चुनाव में कुछ झोल हो रहा है तो उन्होंने चुनाव आयोग से कुछ दस्तावेज मुहैया करवाने का अनुरोध किया।

उधर चुनाव आयोग जिसे कुछ लोग चूना आयोग तो कुछ लोग केंचुआ भी कहते हुए नजर आते हैं, ने विपक्ष को ट्रक भर के कागज सौंप दिए। 

लगा कि ये 7 फिट ऊंचा कागजों का ढेर देखकर शायद विपक्ष इनका विश्लेषण करने का इरादा या तो छोड़ देगा या फिर इनका विश्लेषण करते करते शायद विपक्ष बुढा ही हो जाए। 

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।लेकिन हुआ वैसा जो चुनाव आयोग ने सोचा नहीं था। विपक्ष ने इस दौरान कुछ सूचनाएँ आरटीआई लगाकर हासिल की तो बाकी सूचनाएँ अपनी अलग अलग टीमों के जरिये हासिल की।इसे देख चुनाव  आयोग सकते में आ गया। उसे उम्मीद नहीं थी कि विपक्ष इतनी जल्दी ऐसा डेटा (तथ्य) ले आएगा। 

जब विपक्ष ने उन्हीं कागजों को दिखाया जो चुनाव आयोग ने दिए थे। उन्हीं कागजों में खोज निकाला कि कोई आदित्य श्री वास्तव चार राज्यों में वोट डाल रहा है तो कहीं एक मकान में 80 लोग रह रहे हैं, तो कहीं 1 लाख से अधिक फर्जी वोट पाए गए, तो कहीं ऐसे मकान और एड्रेस थे जो वास्तव में कहीं थे ही नहीं। 

विपक्ष ने मांग की कि उन्हें डिजिटल डेटा दिया जाए, मगर चुनाव आयोग जानता था कि ऐसा करने पर पोल खुल जाएगी। लिहाजा डिजिटल डेटा देने के बजाय जो उपलब्ध था वो भी वेबसाइट से हटा दिया गया। और राहुल गाँधी को ही कह दिया कि आप शपथ पत्र दीजिये। 

शपथ पत्र उन कागजों की गड़बड़ी के लिए राहुल गाँधी से मांगा जा रहा था, जो कागज असल में तो चुनाव आयोग के ही थे। कमाल का खेल रचा जा रहा था।

और शपथ पत्र भी वो मांग रहा था जिसके कागजों में बिहार में कुत्ता सिंह ( डॉगी सिंह), कौआ सिंह और यहाँ तक की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक नाम लिस्ट में जोड़ दिए। 

उधर बिहार में पुनरीक्षण के नाम पर 65 लाख लोगों के मत का अधिकार ही छीन लिया जो उनको संविधान से प्राप्त था। 

जब विपक्ष ने इसका कारण पूछा तो साफ कह दिया कि हम कारण नहीं बताएंगे। नाम किस किस के काटे ये भी नहीं बताएंगे। यानि कि खुद को खुद ही के जाल में फसाये जा रहे थे माननीय शायरी वाले आयोग जी। 

संविधान ने भारत में भारतीय नागरिकों को व्यस्क मताधिकार का अधिकार दिया है। जिसकी उम्र 18 वर्ष या अधिक है उसे बिना जाति, धर्म, लिंग का भेद किए, चुनाव का अधिकार होगा। लेकिन वही अधिकार अब चोरी होने लगे तो लोकतंत्र और संविधान के क्या मायने रह जाएंगे। 

बात राहुल गाँधी ने उठाई है लेकिन चिंतन और मनन पूरे देश को करना चाहिए कि क्या आप अपने वोट के अधिकार को चोरी होते हुए देखना चाहोगे?

हालांकि इस गंभीर मुद्दे पर मीडिया को सरकार से सफाई मांगनी चाहिए थी, लेकिन मीडिया का कहना है कि वे सरकार से सवाल करने का कार्य 2014 में छोड़ चुके हैं अब एक बार छोड़ा गया कार्य वापस पकड़ना अच्छा नहीं लगता। फिर भी आप जिद्द करते हैं तो हम जब सरकार बदलेगी तब ये कार्य दुबारा शुरू कर देंगे। तो फिलहाल चौथे पाए से इससे अधिक उम्मीद करना उम्मीद की ही तौहीन करने जैसा होगा। 


सोचना ये है कि-

लोकतंत्र में जनता सरकार को चुनती हैं अपने वोट के जरिये तो क्या वो वोट लुट जाने दोगे? 

सवालों के जवाब जिनको देने चाहिए वो विपक्ष को हिरासत में ले रहा है बाकी सब ठीक.... 

(साभार)


रविवार, 10 अगस्त 2025

अब तो हर राज्य से आई खबर वोट चोरी

 अब तो हर राज्य से आई खबर वोट चोरी …


राहुल गांधी ने भी नहीं सोचा होगा कि उनके वोट चोरी को लेकर दिये सबूत के बाद हर राज्य से वोट चोरी की खबर ऐसे आने लगेगी, लोग ख़ुद चोरी की खबर सोशल मीडिया में वायरल कर रहे है…

किस किस राज्य से खबर आई और क्या क्या खुलासा हो रहा है वह बताये उससे पहले ये जान लीजिए कि मिनिमलिस्ट स्टाइल में एक पेंचीदा मुद्दे पर ऐसी बेबाक और कॉन्फिडेंट प्रेस कॉन्फ्रेंस सिर्फ़ राहुल गांधी ही कर सकते थे, इसके पीछे का होम वर्क, समझ, खोज और उसका प्रस्तुतीकरण सब एक बहुत ही गंभीर नेता की पहचान है।

मुझे नहीं याद पड़ता कि इससे पहले किसी भी बड़े नेता को इस तरह से बात करते देखा हो, एक टेक्निकल मुद्दे पर स्वयं प्रेजेंटेशन देते हुए।

ख़ैर तारीफ़ अपनी जगह, सबसे अच्छा हिस्सा इस धमाकेदार प्रेस कांफ्रेंस का मुझे ये लगा, कि राहुल इलेक्शन कमीशन से शिकायत, अपील या किसी मांग की मुद्रा और भावना से नहीं आए थे, न ही उन्होंने ऐसी किसी मांग पर जोर दिया। 

उनको अच्छे से पता है कि वो संस्थानों में किस स्तर के गिरोह से उलझ रहे हैं, उन गिरोह के सदस्यों के प्रति सिर्फ़ हिकारत रखी जा सकती है। 

उन्हें पता है कि संवाद सिर्फ़ युवाओं से करना है, जिन्हें अपना भविष्य देखना है।

अब आते है वोट चोरी पर…

बिहार में 3 लाख घर ऐसे है जिनके घर का नंबर "शून्य"है!

बिहार में पहली बार वोट डालने के लिए मुर्दे कब्रों से उठकर आ गए है जिनकी उम्र 124 साल,120 साल व 119 साल तक है!

मध्यप्रदेश में 1696 घर ऐसे है जहां 100-100 वोटर रहते है!

बैंगलोर से लेकर बंबई तक यही कहानी है!

आधार बॉयोमेट्रिक अर्थात फिंगरप्रिंट व रेटिना की पहचान के साथ जुड़ा है जो दूसरे इंसान से मैच कर ही नहीं सकता।

साफ है वोटर को आधारकार्ड से लिंक कर दो एक भी फर्जी वोट नहीं पड़ सकता है।किया उल्टा जा रहा है कि आधार मान्य नहीं है।

इतनी खुली नंगई पर भी जनता चुप है।

क्या जानबूझकर चुनाव आयोग जैसी संस्था को खत्म करने का कार्य किया जा रहा है ताकि न्यू वर्ल्ड आर्डर के तहत धर्माचार्यों के साथ ही राजा की नियुक्ति रोम से की जा सके?

जनता अब भी सड़कों पर नहीं उतरी तो देश को जल्द ही बेच दिया जाएगा!(साभार)

शनिवार, 9 अगस्त 2025

अगस्त क्रांति…

 अगस्त क्रांति…


सारे सबूतों के बाद भी यदि चुनाव आयोग और मोदी सत्ता अभी भी राहुल गांधी को बदनाम करने में लगे हो तो यक़ीन मानिए कि आने वाले दिनों में यह जन आंदोलन का ऐसा रूप लेगा जिसकी कल्पना न तो आरएसएस को है न ही बीजेपी को, यह दावा इसलिए है क्योंकि जब महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा की थी तो अंग्रेज़ी हुकूमत भी तब उसे हल्के में लिया था , महात्मा गांधी ने क्या कहा था और अब राहुल क्या करने वाले है…

''करो या मरो..'' : '' अगस्त क्रांति'' के 83 साल


8 अगस्त 1942. स्थान: बम्बई के ग्वालिया टैंक मैदान ( अब अगस्त क्रांति मैदान). आज सुबह से ही अखिल भारतीय कांग्रेस समिति अपने 57 वर्ष के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव '' भारत छोड़ो'' ( क्विट इंडिया) पर विचार विमर्श कर रही है. रात काफी गहरा गयी है, पर मैदान में मौजूद करीब 80000 से 100000 लोग मंत्रमुग्ध होकर अपने प्रिय नेता महात्मा गाँधी के भाषण को सुन रही है. उनके भाषण से पहले ''भारत छोड़ो'' प्रस्ताव में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ''भारत छोड़ो'' ( क्विट इंडिया) प्रस्ताव कर चुकी है. महात्मा गाँधी ने अपना भाषण हिन्दुस्तानी में देने के बाद अब वहां विदेशी पत्रकारों और प्रतिनिधियों के लिए अंग्रेजी में दे रहे हैं. वे कह रहे हैं :- ''There are representatives of the foreign press assembled here today. Through them I wish to say to the world that the United Powers who somehow or other say that they have need for India, have the opportunity now to declare India free and prove their bona fides. If they miss it, they will be missing the opportunity of their lifetime, and history will record that they did not discharge their obligations to India in time, and lost the battle.......Where shall I go, and where shall I take the forty crores of India? How is this vast mass of humanity to be aglow in the cause of world deliverance, unless and until it has touched and felt freedom. Today they have no touch of life left. It has been crushed out of them. It lustre is to be put into their eyes, freedom has to come not tomorrow, but today.''


और भाषण की समाप्ति वे अपने लॉर्ड टेनिसन द्वारा क्रीमिया युद्ध के दौरान एक असफल सैन्य कार्रवाई की स्मृति में लिखी गई " चार्ज ऑफ़ द लाइट ब्रिगेड " नामक कविता के इस वाक्यांश , जो कि उन्हें बहुत प्रिय है और उन्होंने इसे पहले भी अन्य भाषणों में कई बार इस्तेमाल किया, 

I have pledged the Congress and the Congress will do or die.'' से करते हैं.... ''डू ऑर डाई.... करो या मरो'' ... ये सुनते ही मैदान में मौजूद हजारों की भीड़ में एक नया उत्साह आ जाता है. दूसरे दिन तडके ही जब महात्मा गाँधी सहित कांग्रेस के सभी प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जाता है तो गांधीजी के द्वारा दिए इसी मंत्र '' करो या मरो'' से प्रेरणा लेकर लाखों-करोड़ों लोग विदेशी शासन के खिलाफ सड़क पर उतर पड़े और देखते-देखते ये आन्दोलन एक जनक्रांति में बदल गया जिसे बाद में ''अगस्त क्रांति'' का नाम दिया गया. 

ऐसे में सोचिये यदि देश की संसद में विपक्ष का मुखिया चुनाव आयोग  के आंकड़ों के साथ वोट चोरी का तथ्यों के साथ अलग अलग टाईप के अनेकों साक्ष्य प्रस्तुत करें और सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग बजाए साथ आने,जाँच और दोषियों को सजा दिलाने की बात करने के उल्टे कोई "बदनाम" करने का घटिया जुमला बोले तो यह अघोषित आपातकाल नहीं तो और क्या है?? यह अपराधियों द्वारा अपराधियों का  सरंक्षण नहीं तो और क्या है? 


बदनामी चोरी करने से होती कि चोरी उजागर करने से, चोरी रोकने के लिए चोरों के पक्ष में बोलना चाहिए कि चोर के खिलाफ आवाज उठाने के पक्ष में. भारत का हित किस में है?? सुधार कैसे होता है. सोचिये किस तरह से आपको अनैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया जा रहा है . 


 यदि किसी राज्य सरकार के शासन में दंगाइयों को खुली छूट हो, हजारों लोग मार दिए जाएं और मारे गए लोगो न्याय के लिए कोई कोर्ट जाएं तो वह उस राज्य के मुखिया को बदनाम करने की साज़िश है ??  


मारे गए लोगों की जान से अधिक जिसके कारण लोग मरें उसकी बदनामी को महत्वपूर्ण बनाना यह अपराधिक सोच और उनका बचाव नहीं तो और क्या है  ????? 


आप हंस नहीं देंगे !!!  जबकि लोग मरे हों, घर उजड़े हों यह एक तथ्य हो ....


यदि सरकारी आंकड़े कहते हैं कि गुजरात शिक्षा, बच्चों, स्त्रियों के मामले में कश्मीर से पिछड़ा है तो यह बदनाम करने की साज़िश नहीं सत्य है ।


यदि बच्चों  को मिड डे मील में नमक रोटी खिलाया जा रहा शिक्षा बजट के बावजूद, 

बच्चे कीचड़ भरे टूटे फूटे खंडहर में पढ़ रहे हैं तो 

खुद सरकार अपनी किरकिरी करा रही है 

यदि किसी के शासन में बलात्कार हो बच्ची की टांग काटनी पड़े, बिना पूछे जबरन दाह संस्कार कर दिया जाए तो खुद ही पूरे सरकार और उसकी व्यवस्था का सड़ा हुआ पार्ट है । जो आप कितनी ही डेटिंग पेंटिंग कर ले लोगों के सामने आ जाएगा । 


 यदि आपको बदनामी का डर है तो बदनाम करने वाले काम मत करें न कि अपेक्षा करें कि.....


 आप लोगों की जेब काटते रहें, महंगाई से लोगों का दम निकल जाए, 

आपके बुरे काम उजागर करने वालो को जेल में डालते रहें , 

बच्ची के बलात्कार पर जय श्री राम के नारे लगवाएं, 

परीक्षा सेंटर पर लड़कियों से उनके अंडर गारमेंट्स उतरवाए बिना पेपर न देने दें 

बीस लाख में मेडिकल सीट बिके

5 साल में भी ग्रेजुएट की डिग्री पूरी न हो

बाढ में जब लोगों के घर डूब गए आप टूरिज्म का आनंद उठाने वाला बेशर्मी भरा डायलग बोलें, 

आपके ढोंगी सनातनी गुर्गे भेष बदलकर विभाजन की प्रयोगशाला के तहत दंगे भड़काने की कोशिश करें ,

 अमीरों के घरों की डेकोरेटिव दीवार बनाने के लिए दिन दहाड़े खनन माफिया पूरा का पूरा पहाड़ चर जाए, 

डीएसपी को कुचल दे

पत्रकारिता में सरकार की चाटुकारिता हो और झूठे तथ्यों से देश को गुमराह किया जाए, 

नफरत से माहौल बिगाड़ने की 24*7 कोशिश हो ।  


संवेदशील घटनाओं के तथ्य छुपाएं जाएं 

और सच्ची बातों को जानबूझकर संदेह जनक बनाया जाए  । 


आप अपने ही लोगों को फर्जी किसान/मज़दूर/चौकीदार बनाते सुंदर दृश्य बनाने की कोशिश करें और किसान वास्तव में आत्महत्याएं कर रहे हों ............ 


....... पर आपकी बदनामी न हो !!!


वाह रे तुम्हारी  बदनामी का कांसेप्ट कि दोष चोर में नहीं है स्ट्रीट लाइट में है और स्ट्रीट लाईट लगवाने ने चोर को बदनाम करने की साज़िश की है ।  मतलब यह लोग आप लोगों को किस केवल का मूर्ख समझ रहे हैं सोच लीजिए !! कोई बच्चा स्कूल में अगर नालायक  है  तो स्कूल रिपोर्ट कार्ड में फेल लिख कर साजिश कर रहा है !!!


* लोगों के मरने से यदि किसी की बदनामी नहीं होती हो तो यह निर्लज्जता और क्रूरता की अथाह है । यदि कोई हत्यारे को हत्या कहे जाने पर बदनाम करने की साजिश बताए तो वह खुद हत्यारा है। 


आपको तो जिनके साथ आना चाहिए आप उल्टा न्याय की बात के पक्ष में जाने वाले उन लोगों को गिरफ्तार कर रहे हैं । दरअसल यह अच्छे लोगों और बुरे लोगों में यही फ़र्क है और क्रिमिनल मानसिकता के लोगों का गुणसूत्र भी । 


उन्हें  हत्या करने या करवाने में कोई शर्म महसूस नहीं होती पर जैसे ही कोई उनके दुष्ट चरित्र की पोल खोलने लगता है वे रिरियाने लगते हैं बदनाम करने की साज़िश हो रही है । ऐसा है तो मत करते हत्या,चोरी, डकैती,खून खराबा,अबे बुरा काम तुम कर रहे हो तो कह रहे हो तुम्हें बदनाम करने की साज़िश हो रही है । 

बेईमान को बेईमान नहीं कहा जाएगा तो क्या कहा जाएगा । किसी की कथनी और करनी में अंतर होगा तो लोग जुमला जीवी कहते हैं तो जुमला जीवी शब्द बैन करने से वो श्रम जीवी थोड़े ही बन जाएगा ।  तानाशाह के पाखंड को उसका निकम्मापन ही कहा जाएगा । यदि आपके हाथ में छुरा है तो लोग कहेंगे ही छुरा है फूल कहलवाने के लिए फूल लेना होगा । 

यदि आप चाहते हैं बदनामी न हो तो आपको तो खुद बुरे काम करना छोड़ दें न कि उपेक्षा करें कि आप कभी पकड़ में नहीं आएंगे ।  कोई देख नहीं रहा । लोग मुंह बन्द कर बैठ जाएं । आपको सोचना चाहिए आप अच्छे नागरिकों को प्रोत्साहन देना चाहते हैं या बुरे नागरिकों को । 

आप विकृति को अति के स्तर पर सोच रहे हैं कि सारे लोग विवेकहीन हो जाएं । ऐसी विकृत सोच से आपको आज या कल बाहर आना ही होगा (साभार)

शुक्रवार, 8 अगस्त 2025

चुनाव आयोग का वेबसाइड और वाटरगेट कांड…

 चुनाव आयोग का वेबसाइट और वाटरगेट कांड…


अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन के दौर में हुए वाटरगेट कांड ने यदि सत्ता की नींद उड़ा दी थी तो चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी के सबूतों के साथ खुलासे ने मोदी सत्ता को एक्सपोज़ कर दिया है और शायद यही वजह है कि चुनाव आयोग के वेबसाइट बंद होने की खबरें कई राज्यों से आने लगी , सत्ता को भले ही उम्मीद हो कि अभी भी वह सब अपने अनुकूल कर लेगा लेकिन पानी तो सर से निकल चुका है… और यदि राहुल इस सबूत के साथ आंदोलन करने निकल जाये तो उसे संभलना मुश्किल है…


सोशल मीडिया पर बड़ी सनसनीखेज खबर है भारतीय चुनाव आयोग की हरियाणा महाराष्ट्र राजस्थान मध्य प्रदेश कर्नाटक बिहार और उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर अस्थाई रूप से यह लिखा हुआ आ रहा है अभी 

इससे संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता!

यह इस बात का सीधा-सीधा संकेत है कि राहुल गांधी ने चुनाव चोरी को लेकर जो आंकड़े प्रस्तुत किए थे उसके बाद पूरे देश के फैक्ट चेकर उनका फैक्ट चेक कर रहे थे और वह फैक्ट सत्यापित हो रहे थे उस से घबराकर और इस बात से डर कर की और नए फैक्ट्स जनता के नॉरेटिव में नहीं आ जाए इलेक्शन कि यह वेबसाइट अभी अपने आप को संबंध स्थापित करने से बाहर बता रही है!

प्रदेशों की वेबसाइट का जो E पेज होता है, डाउन चल रहा है और कई जगह तो लिखा आ रहा है आप बाद में संपर्क करें! 

 कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह आशंका व्यक्त की है की चुनाव आयोग वेबसाइट डाउन कर कर सुधार करने की कोशिश कर रहा है ताकि नई वेबसाइट के माध्यम से वह अपनी निष्पक्षता जाहिर करें! 

याने वेबसाइट को संशोधित करने का प्रयास कियाजा रहा है!

अभी प्रमाणित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना तय है कि राहुल गांधी का आरोपो ने चुनाव आयोग की नींद हराम कर दी है!

सोशल मीडिया के कई यूजर्स ने लिखा है कि सचमुच कई राज्यों के E पेज डाउन है!

क्या चुनाव आयोग एक नए बहाने के साथ एक नई शरारत के साथ अपने आप को सती सावित्री घोषित करने की कोशिश करेगा!

लेकिन शायद अब उसी तरह की देर हो चुका है जिस तरह अमेरिका में वाटरगेट कांड हुआ था , क्या था यह कांड यह भी समझ ले…

वाटरगेट स्कैंडल 

17 जून 1972...


उस वक्त अमेरिका में रिचर्ड निक्सन की सरकार चल रही थी। 


रिचर्ड निक्सन, एक ऐसा अमेरिकन राष्ट्रपति जिसे "अमेरिकन पोस्ट" जैसी रिसर्चेबल अखबारों से नफरत था। क्योंकि इनके पत्रकारों ने वाटरगेट स्कैंडल को एक्सपोज किया था। 


पहले थे बॉब वुडवर्ड जो आगे चलकर वाशिंगटन पोस्ट में ऊंचे पदों पर चलते हुए आज भी कंपनी में एसोसिएट एडिटर के रूप में सक्रिय है। उन्होंने 15 से ज्यादा किताबें लिखीं जिनमें ओबामा, ट्रंप सबको लेकर कुछ न कुछ रहस्यमई जानकारी पढ़ने को मिली। सिस्टम कैसे काम करता है उन्होंने सब लिखा है।


और दूसरे थे कार्ल बर्नस्टीन। जो सीएनएन जैसे अन्य बड़े न्यूज चैनल के एडवाइजर रहे साथ ही फ्रीलांस में पत्रकार बने रहे।

17 जून 1972....


5 चोर डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के दफ्तर में पकड़े गए। स्थान था वाटरगेट कॉन्प्लेक्स।


दोनों पत्रकार जांच में लग गए। बाल की खाल निकलना शुरू हुई। 7 लोग धर लिए गए जिनका कनेक्शन सीधा व्हाइट हाउस से था। वो ये बात भी स्वीकार किए कि वे रिपब्लिकन पार्टी के मेंबर है। इल्ज़ाम था पॉलिटिकल राइवल्स के फोन टैपिंग का।

जनवरी 1973.....


सातों लोगों पर मुकदमा दायर हो गया और ऑफिशियल जांच शुरू हो गई।

राष्ट्रपति निक्सन के गर्दन पर जांच की तलवार लटक चुकी थी। जांच शुरू हो चुकी थी। 


निक्सन में अपने बचाव में मोर्चा खोल दिया। अपने पावर का मिसयूज करना शुरू कर दिया। एफबीआई जैसी एजेंसीज कंट्रोल में ले ली गई। बगावत का सुर भांप चुका था निक्सन।


मई 1973......


निक्सन के सिस्टम पर कंट्रोल करने की प्लानिंग को सीनेट ने आड़े हाथों लिया और जांच की कार्यवाही लाइव करवा दी। जिससे जुलाई आते आते ये खुलासा हो गया कि व्हाइट हाउस में वाकई फोन टैपिंग के सीक्रेट रिकॉर्डिंग एवलेबल है जो कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने इल्ज़ाम लगाया था।

अक्टूबर 1973.....


निक्सन ने उस जांच अधिकारी को ही बर्खास्त कर दिया जो उसकी कब्र खोद चुका था।

जुलाई 1974....


सुप्रीम कोर्ट ने निक्सन को सारे रिकॉर्डिंग टेप सौंपने का आदेश दे दिया था। उस पर लगा इल्ज़ाम सिद्ध हो चुका था।


9 अगस्त 1974....


अमेरिकन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन का इस्तीफा हुआ और अगले ही दिन यानि 19 अगस्त 1974 को नए राष्ट्रपति जेराल्ड फोर्ड गद्दीनशीं हुएं।

राहुल के लीडरशिप में ये वोट चोरी का स्कैम एक स्कैंडल बन चुका है। अब देखते है उन जननेताओं को कि वो इस जनता के मताधिकार के साथ हुए अन्याय को लेकर व इस सामाजिक मुद्दे की निष्पक्ष जांच के लिए संसद की आवाज बनते है या नहीं।

जनता चाहती है कि वाटरगेट स्कैंडल की तरह इस वोट चोरी स्कैंडल की भी लाइव जांच हो जनता के आगे।

वरना एक एक का हिसाब जनता लेगी। (साभार)