मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

सर्किट हाउस के पुराने बिल्डिंग की जगह नए का खेल

 सर्किट हाउस के पुराने बिल्डिंग की जगह नए का खेल 


छत्तीसगढ़ की राजधानी सुंदर हो यह कौन नहीं चाहेगा लेकिन विकास के नाम पर यदि उन बिल्डिंगों को गिरा दिया जाए जो वर्षों पुराने हैं हेरिटेज की श्रेणी में आते हैं जिसकी खूबसूरती को लोग आज भी आंख भर भर कर देखते हैं तब इसे सत्ता का कौन सा विकास कहा जाएगा और अब इस पर हो रहे नए निर्माण का ठेका भी उसी ठेकेदार ने हासिल कर लिया है जिसने इससे पहले नए सर्किट हाउस का निर्माण किया था और सेंट्रिंग गिरने के विवाद में फँसा था क्या है खेल , कौन अधिकारी रिटायर्ड होने के पहले दो पाँच करोड़ कमाना चाहता है यह हम फिर कभी बतायेंगे ।

लेकिन आज सिविल लाइन के उस सर्किट हाउस का है जिसकी बिल्डिंग बेहद पुरानी है कहा जा रहा है अंग्रेजों के जमाने की वह बिल्डिंग है और उस बिल्डिंग को इन दिनों गिराया जा चुका है हैरानी की बात तो यह है कि एक तरफ छत्तीसगढ़ की सरकार मंत्रियों के बंगले अधिकारियों के बंगले सब कुछ नया रायपुर में शिफ्ट करने जा रही है अधिकारी भी लगातार एक-एक करके शिफ्ट होते जा रहे हैं लेकिन ऐसी परिस्थिति में जो हेरिटेज के रूप में माना जाता है उस बिल्डिंग को जमीन दोज कर देना क्या सरकार के मंसूबों पर सवाल नहीं उठाता है कहा तो यहां तक जा रहा है कि उस बिल्डिंग को गिराकर वहां पार्किंग बनाई जाएगी क्योंकि जो सर्किट हाउस की वर्तमान पार्किंग है कॉफी हाउस वहां है इस वजह से पार्किंग हच पच रहती है भीड़ बढ़ जाती है तब ऐसी परिस्थिति में क्या उस बिल्डिंग को गिराकर कोई नया खेल खेला जा रहा है किस तरीके से वहां कीमती फर्नीचर लग और इस सर्किट हाउस में लोग ठहर भी रहे थे यानी सब कुछ बहुत बढ़िया था ऐसा भी नहीं कि बिल्डिंग जड़ जड़ थी इसलिए गिरा दिया गया मजबूत बिल्डिंग थी पुराने जमाने की बनी यह बिल्डिंग डेढ़ फीट दीवार वाली बिल्डिंग थी मजबूती से खड़ी थी और हाल में ही इस पर लाखों करोड़ों रुपए खर्च करके इसे सजाया भी गया था टाइ लगाई गई थी बिस्तर बदले गए थे दरवाजे भी नए स्टाइल में लगाए गए थे एसी सहित किचन सब कुछ नया बनाया गया था यानी करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद अब सरकार को लगने लगा है कि यह बिल्डिंग अब कोई काम की नहीं है क्योंकि सर्किट हाउस में पर्याप्त जगह है इसलिए इस बिल्डिंग को गिराया जाना चाहिए और वह गिरा रही है इस मामले में हमारी एक्टिविस्ट राकेश च से बात हुई है उनका क्या कहना है सुन लीजिए पुराना सर्किट हाउस सिविल लाइन को जो तोड़े जाने की अचानक निर्णय लिया गया वह निर्णय विधि विरुद्ध है और मुझे तो यह लग रहा है कि इसके तोड़े जाने के पीछे कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार का एक अमला काम करने के लिए एक सोची समझी साजिश के तहत कार्य प्रारंभ कर रही है जो नहीं होना चाहिए हमारे धरहर को बचाने के लिए हम लगातार संघर्ष करते रहते हैं ऐसे में ये बहुत ही प्राचीन और पुरानी धरोहर थी जिसको बचाया जाना चाहिए था और इसको रोकने के लिए सरकार को खुद आगे आना चाहिए था जो सरकार आगे आती दिखती नहीं क्योंकि इस वक्त नया रायपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री मंत्रियों के निवास बन चुके हैं ऐसे में इसे पार्किंग या अन्य किसी रूप में डेवलप करना फंड की बर्बादी है हमारे टैक्स के पेयर लोगों की पैसों की बर्बादी है इसे रोका जाना चाहिए अगर इसे रोका नहीं गया तो आने वाले समय में जिस विभाग का यह जुम्मा है उस विभाग के खिलाफ मामला न्यायालय में ले जाएंगे या संबंधित फोरम में जरूर शिकायत करेंगे क्योंकि मुझे तो लग रहा है कि यह नियम विरु कार्य को संचालन किया जा रहा है यानी सोचिए कि किस तरीके का खेल सरकार कर रही है किस तरीके से टैक्स पेरो की पैसे की बर्बादी की जा रही है और पहले ही नींद में सो चुके इस शहर को इन सब बातों से कोई मतलब नहीं है !

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https://youtu.be/XH-kMHpNoPY?si=R5uxCn8rbKjzFfbn

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

पत्रकारों को फँसाने की साज़िश करने वाला थाना प्रभारी को जेल, नेता को कब

पत्रकारों को फँसाने की साज़िश करने वाला थाना प्रभारी को जेल, नेता को कब

 छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार आने के बाद किस तरीके से नेताओं के हौसले बुलंद है किस तरीके से सरकारी तंत्र इन नेताओं के इशारे पर किसी को भी फसा देने का कुचक्र रचते हैं और इस पूरे खेल में क्या सत्ता में बैठे प्रमुख लोग भी शामिल हैं ऐसे कई सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि पिछले दिनों कोंटा से जो खबरें आई है बस्तर में स्थित है वहां तत्कालीन टीआई थे अजय सोनकर उन्होंने एक नेताजी के कहने पर चार पत्रकारों को फसाने की साजिश रची उनके कार में गांजा रखकर उन्हें प्रताड़ित किया उन्हें गिरफ्तार किया तो क्या यह खेल दूसरे स्थानों पर भी हो रहा है और पूरा मामला रेत माफियाओं से जुड़ा हुआ है आंध्र प्रदेश का बॉर्डर जहां बड़ी संख्या में अवैध रूप से रेत उत्खनन किए जा रहे हैं और इसे दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है इसकी खबर पर चार पत्रकार पहुंचे थे और जब इन अवैध उत्खनन की तस्वीर ली जा रही थी तब इनके कार में गांजा रख दिया गया था जिसकी शिकायत जब एसपी से की गई और लगातार पत्रकार प्रदर्शन कर रहे थे कि किस तरीके से पत्रकारों को फंसाया गया है और इस आरोप के बाद जब जांच शुरू हुई तो वह वीडियो फुटेज भी सामने आ गया जिसमें टीआई इन पत्रकार की गाड़ियों में गांजा रखते देखे जा रहे थे जांच हुई तो सारे सबूत सामने आ गए लेकिन क्या यह काम केवल टीआई रेत माफियाओं के इशारे पर कर रहा था या इसके पीछे कोई बड़ा हाथ टीआई अजय सोनकर को सस्पेंड करके जेल भेज दिया गया लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि ठीक गिरफ्तारी के पहले टीआई अजय सोनकर ने अपने फुक अकाउंट में यह दावा की यह लिख दिया कि नेताजी को बता देना कौन है वह नेताजी इसे लेकर कई तरह की चर्चा है क्या वह सत्ता से जुड़ा है या पूर्व मंत्री से जुड़ा हुआ है यह सवाल जांच में सामने आ पाएगा यह कहना कठिन है लेकिन छत्तीसगढ़ में जिस तरीके से र का अवैध उत्खनन हो रहा है वह हैरान कर देने वाला है और कई स्थानों पर खासकर धमतरी महासमुंद जैसे क्षेत्रों में तो सीधे-सीधे इस मामले में राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल है तो क्या कोंटा जिले में भी जो रेत का अवैध उत्खनन हो रहा था उसमें भी किसी बड़े नेता का हाथ है यह सवाल बेहद महत्त्वपूर्ण हो गया है और जिस तरीके से पत्रकारों को इस पूरे मामले में टीआई के द्वारा प्रताड़ित किया गया उससे भी स्पष्ट हो रहा है कि इसन घटनाओं के पीछे कोई बड़ा हाथ है सबसे हैरानी की बात तो यह है कि सरकार ने टीआई को सस्पेंड कर जेल तो भेज दिया है लेकिन खनन माफियाओं को संरक्षण देने वाले खनिज विभाग के अधिकारियों के खिलाफ अभी तक किसी तरह की कारवाही नहीं हुई सब कुछ आईना की तरह स्पष्ट है लेकिन जो खेल नेता अधिकारी और माफिया कर रहे हैं वह हैरान कर देने वाला है छत्तीसगढ़ में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं तो इसकी बड़ी वजह इस तरह के माफियाओं का सत्ता तक पहुंच है हालांकि टीआई को सस्पेंड कर जेल भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है लेकिन देख ना है कि आने वाले दिनों में उस नेता तक सरकार पहुंच पाती है या नहीं !

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https://youtu.be/vKaKL2jE2r8?si=w9A78j6KAAeiYqvU

रविवार, 19 अप्रैल 2026

साय सरकार रिज़र्व फ़ारेस्ट भी नहीं बचा पा रही, भू-माफियाओं का सौ एकड़ पर नज़र…

 

साय सरकार रिज़र्व फ़ारेस्ट भी नहीं बचा पा रही, भू-माफियाओं का सौ एकड़ पर नज़र…

अदानी के लिए हसदेव को दांव पर लगाने को लेकर बुरी तरीके से घिरी विष्णुदेव साय सरकार अब अंबिकापुर में भू माफियाओं के द्वारा 100 एकड़ जंगल काटे जाने को लेकर निशाने पर है कहा जा रहा है कि अंबिकापुर से सटे गांव बुधिया चुआ गांव का यही नाम है वहां भू माफिया लगातार जंगल काट रहे हैं और 100 एकड़ जंगल काट चुके हैं इसे लेकर पिछले दिनों जब लोगों ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता टीएस बाबा के पास पहुंचे तो बाबा आग बबूला हो गए उन्होंने का दौरा भी किया और पत्रकारों से बताया से कहा कि लंबे अरसे से शासन से लगातार शिकायत की जा रही है कलेक्टर कर क्या रहे हैं आखिर इस पूरे घटनाक्रम में क्या शासन का संरक्षण है क्योंकि लगातार इस मामले को लेकर वहां गांव वाले आवाज उठाते रहे हैं शिकायत करते रहे लिखित में और इसकी वजह से पर्यावरण को नुकसान तो हो रहा है इस करोड़ों रुपए की जमीन का भी बंदर बांट हो रहा है टी एस बाबा ने विस्तार से यह सब बात कहते हुए धमकी भी दी कि ऐसी स्थिति  क्यों लाई जा रही है कि उन्हें भूख हड़ताल पर बैठना पड़े पहले बाबा ने क्या कुछ कहा वह सुन ली वो वहां तक ऐसे फैल के वो नीचे तक और लगभग गुमला नेशनल हाईवे तक जहां सिसोदिया जी का पेट्रोल पंप लोग बता रहे हैं उसके 500 मीटर तक का पूरा क्षेत्र एक के बाद एक काटा जा रहा है और आप स्वयं देख सकते हैं कि मेड़ के आकार भी दिख रहे हैं यहां कुछ नहीं है जोध कोट भी ऐसा नहीं दिख रहा है और मेड़ बना के लोगों ने क्षेत्र को आपस में बांट लिया है यह रिजर्व फॉरेस्ट है जो कलेक्टर ने 20161 में अन्य अधिकारियों के साथ सेटल भी किया उसके आदेश भी है और बावजूद उसके यह स्थिति बनी मैं बाहर था दिल्ली में था तो गांव से खबर आई कि बाबा यहां दिक्कत हो रही है कुछ वन अधिकार पत्र है वह हमको अभी तक नहीं मिले हैं आजादी के पहले से जो लोग काबिज हैं उनके वन अधिकार पत्र नहीं मिले हैं नए लोगों को कुछ वन अधिकार पत्र मिले हैं कुछ वह भी प्रक्रिया अधूरी है और कुछ लोग हैं जो खरीद बिक्री भी कर रहे हैं यह सारी बातें सामने कि जो वनाधिकार पत्र मिले हैं उनकी खरीद बिक्री उनके कब समझाए भी कि एक देखिए वनाधिकार पट्टा नहीं है यह वनाधिकार पत्र है पट्टा आपको अधिकार देता है खरीद बिक्री का भी वनाधिकार पत्र में बेचने के अधिकार नहीं है और यदि आप बेचते हैं तो यह जमीन वापस शासन को चली जाएगी तो प्रजातंत्र के इस चौथे स्तंभ के माध्यम से हम लोग चाहेंगे कि लोगों के सामने सच्चाई कम से कम पहु कदम अगला कदम इसको रोकने का होगा यह नौबत तो नहीं आनी चाहिए कि यहां के मैं भूख हड़ताल में बैठू यह तो अति हो जाएगी बैठूंगा यह तो अति हो जाएगी तो या हल्का पन है क्या हमारी व्यवस्था ऐसी है कि यह सब करना पड़ेगा तब एक जानकारी आए और अगर वह बात सही है पक्ष विपक्ष इसमें कुछ नहीं है नियम और कानून है नियम और कानून के विपरीत हो रहा है तो आप कारवाही करिए आखिरी में प्रजातंत्र में क्या होता है जनमत का संग्रह है तो वो तो बहुत ही हल्का पन हो जाएगा कि अगर यही नहीं गांव के जो उपसरपंच है उन्होंने भी पूरी बात विस्तार से मीडिया को बताया बड़ा-बड़ा पेड़ था सब कटाई हो गया और निरंतर गांव वाले से शिकायत करते रहे कलेक्टर को भी फॉरेस्ट को भी लेकिन इसमें कभी कब्जा नहीं रोका गया किसी प्रकार का गांव में आक्रोशित है कि हम लोग का नि स्तारी है और जंगल से निस्तार है और जंगल रहने पर हम लोग का आगे भविष्य में हर प्रकार का ऑक्सीजन मिलेगा और हम लोग का सुख सुविधा मिलेगा कहके सब सब लोग को आक्रोशित हो रहा है कि वह नष्ट हो रहा है तो यह तो बड़ी मतलब थोड़ा सा गौर करने की बात है और प्रशासन इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है लोग का कहना है जब इसको बराबर किया जा रहा था उस समय आप लोगों ने कोई उचित कम नहीं उस समय हम लोग जब से शुरुआत हुआ है तब से हम लोग इसका विरोध करते आ रहे हैं पूरे गांव के लोग विरोध करते आ रहे हैं मगर नियंत यानी आप सोचिए कि किस तरीके से शासन प्रशासन के पर जंगल की जमीन तक को लूटा जा रहा है और शिकायत के बाद भी यदि सत्ता खामोश है तो क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार भू माफियाओं से मिली हुई है और वह जानबूझकर कारवाही को टाल रही है जबकि वह अच्छी तरीके से जानती है कि इस 100 एकड़ जमीन में जो जंगल है गांव की निस्तार उस पर निर्भर है तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि शासन कुछ कारवाही करती है या फिर टीएस बाबा को भूख हड़ताल में बैठना पड़ेगा!


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https://youtu.be/3SlxCVTSQFg?si=Z9Quonkt0b75NYW-



शनिवार, 18 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ का कौन है सुपर सीएम, किसका किसका दावा

छत्तीसगढ़ का कौन है सुपर सीएम, किसका किसका दावा 

 छत्तीसगढ़ में सत्ता आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाया तो साथ ही दो दो उप मुख्यमंत्री बनाए अरुण साव और विजय शर्मा को लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि सुपर सीएम कौन है क्या विष्णुदेव साय सरकार के ऊपर भी कोई सीएम हालांकि जन चर्चा जो है उसके हिसाब से जो सुपर सीएम का तमगा या पद जिसके पास है वह भारतीय जनता पार्टी का वह नेता जो आईएएस से राजनीति में आया है और देश के गृह मंत्री अमित शाह के सबसे करीबी और खास माने जाते हैं ओपी चौधरी ओपी चौधरी को आम बोलचाल की भाषा में यानी अधिकारी वर्ग में कर्मचारी वर्ग में सुपर सीएम कहा जाता है यहां तक कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भी ओपी चौधरी को सुपर सीएम की संज्ञा दी जाती है और बेहद ताकतवर बताया जाता है और कहा जा रहा है कि सरकार वही चला रहे हैं लेकिन अब विवाद इसलिए उठने लगा है क्योंकि विष्णु देव साय की धर्म पत्नी कौशल्या देवी ने खुद को सुपर सीएम बता दिया है मीडिया के सामने उन्होंने क्या कुछ कहा पहले वह सुन लीजिए और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जाने जाती हूं तो कोई क की मैं उन पदाधिकारियों से जो टिकट लेकर लड़े ठीक है सांसद बन गए विधायक बन गए मैं बिना टिकट मांगे बिना लड़े दूसरो को है और आज मैं एकत्र की विधायक और एक लोकसभा की सांसद भी हूं और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं तो छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं तो ऐसे में सुपर सीएम को लेकर जो दावा किया जा रहा था कि ओपी चौधरी है उस दावे का क्या होगा और छत्तीसगढ़ की राजनीति किस तरह से चल रही है क्या सचमुच ओपी चौधरी इतने ताकतवर हैं कि सभी फाइल उनकी ही निगरानी में हस्ताक्षर हो रहे हैं सभी फाइलों को क्या वेही देख रहे हैं यह सवाल बेहद महत्त्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के पहले 33000 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला था उसे ओपी चौधरी ने एक झटके में समाप्त करते हुए कह दिया कि अभी वित्तीय स्थिति उतनी मजबूत नहीं है और इसे लेकर सोशल मीडिया में कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं और ओपी चौधरी के खिलाफ विश् वमन भी हो रहे हैं कहा जाए तो गलत नहीं होगा दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि जो बैठक व्यवस्था बदली है कैबिनेट की हमने कल ही बताया कि पहले कैबिनेट की बैठक व्यवस्था कैसे होती थी कैसे मुख्यमंत्री के आजूबाजू दोनों उप मुख्यमंत्री बैठा करते थे लेकिन कल जो कैबिनेट की बैठक हुई उसमें बैठक व्यवस्था बदल दी गई और इस बैठक व्यवस्था में अब दोनों उप मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ बैठेंगे तो क्या यह परिवर्तन भी ओपी चौधरी के कहने पर अधिकारियों ने करवाया है यह महत्त्वपूर्ण है यह जांच का विषय हो सकता है हमारी टीम लगी है कि आखिर सचमुच विष्णुदेव साय अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए यह सब खेल खेल रहे हैं या फिर ओपी चौधरी को मुख्यमंत्री के आजूबाजू दोनों उप मुख्यमंत्रियों का बैठना रास नहीं आ रहा था यह जांच का विषय है यह भाजपा की अंदरूनी राजनीति का मामला है लेकिन दूसरे तरफ कहा तो यहां तक जा रहा है कि जो मंत्रिमंडल के विस्तार का मामला है या निगम मंडल और आयोग में नियुक्ति का मामला है इसमें भी ओपी चौधरी का ही पेच फसा हुआ है वे चाहते हैं कि उनके समर्थक ज्यादा से ज्यादा इन पदों पर रहे तब दूसरा सवाल उपचुनाव का भी ले है जो बृजमोहन अग्रवाल के स्थि फे के बाद खाली हुआ है रायपुर दक्षिण का सीट वहां क्या ओपी चौधरी के पसंद का उम्मीदवार उतारा जाएगा ऐसे कई सारे सवाल है लेकिन अभी जो सवा बड़ा हो चुका है वह सुपर सीएम का है और जब खुद मुख्यमंत्री की धर्म पत्नी ने आगे आकर कह दिया है कि वे ही सुपर सीएम है और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जाने जाती हूं और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं हालांकि अब तक जो परंपरा रही है या मजाक में लोग बोल कहते रहे हैं कि गृह मंत्री जैसे पद मिलते रहा है पत्नियों को तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि इस सुपर सीएम को लेकर जो दावे और राजनीति हो रही थी उस पर क्या असर पड़ता है इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भी तंज कसा है भूपेश बघेल से लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने कौशल्या देवी साय के बयान को लेकर टिप्पणी की है आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस सुपर सीएम का मामला का क्या होता है।

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https://youtu.be/qQb5AAfbTxw?si=Uo58Db5qOWvOOk83

घोटालेबाज़ को वीआईपी सुविधा देने का मामला तूल पकड़ा, जुर्म दर्ज

 

घोटालेबाज़ को वीआईपी सुविधा देने का मामला तूल पकड़ा, जुर्म दर्ज

जो  सरकार में बैठे लोग  सत्ता में आने से पहले घोटाले बाजों को उल्टा लटका कर सीधा करने का दावा करते नहीं थकते यदि उसी सरकार में घोटाले बाजों को वीआईपी संरक्षण मिल रहा है सब तरह की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है जेल में भी अस्पताल में भी और उससे इतर होटलों में भी तब इसे आप क्या कहेंगे

 मामला छत्तीसगढ़ का है डबल इंजन की सरकार का है जहां चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के नेता और देश के गृह मंत्री अमित शाह ने साफ तौर पर कहा था कि भ्रष्टाचारियों को बक्सा नहीं जाएगा लेकिन हाल यह है कि अब सारा खेल सब कुछ वही विष्णु देव साय सरकार कर रही है जिस आरोप के आसरे वह चुनाव जीती है मामला कस्टम मिलिंग का है कोयला घोटाला और शराब घोटाले का मामला छोड़ दीजिए क्योंकि कहा तो यह जा रहा है कि जो काम भूपेश सरकार में हो रहा था वही काम अब भी कोयला और शराब मामले में हो रहा है केवल चेहरे बदल गए हैं लेकिन कस्टम मिलिंग में जो आरोपी गिरफ्तार हुआ है करोड़ों रुपए का मामला है रोशन चंद्राकर मुख्य आरोपी है साजिश करता है यहां तक कि उस पर आरोप है कि भूपेश सरकार के दौरान उसने ही प्रति क्विंटल 20-20 का कमीशन सत्ता तक पहुंचाया है यदि उस आरोपी को वीआईपी ट्रीट मिले और मामले का खुलासा होने के बाद केवल आरक्षक को निलंबित करके मामले की लीपापोती जांच के नाम पर की जाए तो फिर इसे आप क्या कहेंगे घोटाले बाजों को दमाद की तरह वीआईपी ट्रीटमेंट देने का मामला नया नहीं है पहले भी अपराधियों को आरोपियों को इस तरह से वीआईपी सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर हर सत्ता विवादों में रही है लेकिन जो ताजा मामला आया है वह बेहद ही हैरान कर देने वाला इसलिए है क्योंकि सत्ता में आने के पहले इस डबल इंजन की सरकार ने लोगों से क्या-क्या वादे नहीं किए थे कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस पूरे मामले में पहले से ही खबर चल रही थी रोशन चंद्राकर को जेल में वीआईपी सुविधा दी जा रही है लेकिन सरकार इस बात को मानने को तैयार नहीं थी गृह मंत्री विजय शर्मा तो इस प्रदेश में अपराध की कमी का दावा करते हैं जबकि कांग्रेस लगातार अपराध के मामले उठा रही है और यही नहीं लोग भी त्रस्त है चोरी डकैती लूट जैसे मामले लगातार सामने आ रही है खुलेआम हत्या हो रही है हालांकि कुछ लोग पकड़े भी जा रहे हैं लेकिन जिस तरह से वारदातें बढ़ गई है वह हैरान कर देने वाली है तब रोशन चंद्राकर के मामले में आखिर हुआ क्या रोशन चंद्राकर को वीआईपी सुविधा देने का दावा पहले से किया जाता रहा है कई बार मीडिया में यह खबरें प्रकाशित हुई लेकिन सरकार हर बार खंडन कर देती थी लेकिन पिछले दिनों जब एक तस्वीर वायरल होना शुरू हुआ रो चंद्राकर को एक बड़े होटल से निकलते देखा गया और बताया गया कि सिपाही उसे किस तरीके से होटल में लाया था और वे किस तरीके से अपने परिवार वालों रिश्तेदारों से मिला माल भी उनके बच्चे को सिपाही ही घुमाते रहा जैसे खबरें जब सामने आई तो आनंद पानंद में डीजी जेल राजेश मिश्रा ने जेलर को फटकार लगाई और जेलर ने विवाद बढ़ता देखकर सिपाही जायसवाल है उसे निलंबित करके जांच करने की घोषणा कर दी जबक पहली ही दृष्टि में यह साफ तौर पर दिख रहा है कि रोशन चंद्राकर को इस सुविधा देने के नाम पर लेनदेन हुआ है फिर छापे की कारवाही क्यों की गई पैसे बरामद क्यों नहीं किए गए एफआईआर क्यों नहीं की गई जांच के नाम पर क्या इस मामले की भी लीपापोती की जा रही है ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि जिस सिपाही को सस्पेंड किया गया है उस वह इतनी बड़ी हिमाकत कर ही नहीं सकता था कि करोड़ों रुपए के आरोपी को अस्पताल में जांच के नाम पर ले जाने की बजाय होटल पहुंचाते बड़े उच्चाधिकारियों का इसमें हाथ है कुछ नेताओं के भी नाम सामने आ रहे हैं देखना है कि के नाम पर जो खेल खेला जा रहा है उसमें यह सब मामला आता है कि नहीं एफआईआर होती है कि नहीं लेकिन कहा जा रहा है कि विजय शर्मा जब से ग्रह मंत्री बने हैं कानून व्यवस्था को लेकर सवाल तो उठ रहे हैं अब जेलों में जो बंद है आरोपी अपराधी उन्हें भी वीआईपी सुविधा देने का मामला सामने आ गया है देखना है कि इस पूरे मामले में सरकार की क्या भूमिका होती है !

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https://youtu.be/2U5jYlGFnHA?si=kN-_BS3W3QFrqbqC


शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

बेरोज़गारों से विष्णुदेव साय सरकार कैसे छल कर रही है…?

 

बेरोज़गारों से विष्णुदेव साय सरकार कैसे छल कर रही है…? iE82PEDPw6FGH26b

अपने नए-नए फरमान से अपनी ही पीठ थपथपाने में लगी छत्तीसगढ़ की डबल इंजन की सरकार यानी विष्णु देव साय सरकार बेरोजगारी के मामले में जिस तरीके से निष्ठुरता से काम कर रही है उसे लेकर कई तरह के सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि हाल में ही बिजली विभाग में फिर भर्ती का विज्ञापन निकला है और इसमें नियुक्ति कब होगी इसकी कोई समय सीमा नहीं है सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि छ महीने पहले भी विद्युत विभाग में जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर सहित विभिन्न पदों की भर्ती निकली थी हालांकि इसमें परीक्षा शुल्क नहीं लिया गया था ले लेकिन बड़ी संख्या में याने हजारों की संख्या में 500 के आसपास विद्यार्थियों ने बेरोजगारों ने यह परीक्षा दी थी मॉडल आंसर भी जारी कर दिया गया इंटरव्यू भी हो गए लेकिन भर्ती नहीं होने से जो परीक्षा देने वाले बेरोजगार हैं उनके सामने संशय की स्थिति है कि वे दूसरे परीक्षा की तैयारी कैसे करें हजारों की संख्या में बेरोजगारों के साथ क्या यह छल नहीं है और उसकी भर्ती हुई नहीं है फिर एक बार विज्ञापन निकालकर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा रही है यह किस तरह का खेल है विष्णु देव साय सरकार की यह लोगों में चर्चा का विषय है बेरोजगार युवक आक्रोशित है क्योंकि चुनाव में जिस तरीके से 33000 शिक्षकों की भर्ती की बात की गई थी गारंटी दी गई थी हालांकि मोदी की गारंटी तो कई तरह की थी उनमें से कुछ ही गारंटी पूरी हुई है लेकिन 33000 शिक्षकों की भर्ती तो की नहीं जा रही है शिक्षकों की कमी है शाला भवन जरजर है बच्चों को स्कूल जाने में बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है और दूसरी तरफ सरकार के वित्त मंत्री पैसा नहीं होने का रोना रोते हैं तो विष्णु देव शायद सरकार पालक टीचर मीटिंग कराने का फरमान जारी कर देते हैं इसे लेकर हमने स्टोरी बनाई है पीटीएम को लेकर बेतुका फरमान के नाम से और उसके कमेंट्स बॉक्स में आप जाकर कमेंट्स लोगों के पढ़ेंगे तो आपको हैरानी होगी कि लोग किस तरीके से विष्णु देव साय सरकार से नाराज चल रहे हैं यानी आप सोचिए कि किस तरीके से बेरोजगारों को छला जा रहा है और यह स्थिति सभी विभाग में कि किस तरीके से पद रिक्त है लेकिन उसे भरा नहीं जा रहा है और पीएससी घोटाला तो सबके सामने ही है कि किस तरीके से युवाओं के साथ छल किया गया और उसके मुख्य आरोपियों को बचाने की भी कोशिश की गई है तब सवाल यह है कि क्या बेरोजगारी के मामले को लेकर विष्णुदेव सरकार ठंडा पड़ गई है और केंद्र की तरह याद कीजिए आप 2014 में जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देंगे और उसकी क्या स्थिति बनी थी यानी उसी तर्ज पर क्या विष्णुदेव साय की सरकार भी जुमलेबाजी पर उतर आई है अपनी पीठ थपथपा के लिए नए-नए फरमान जारी करती है नई नई घोषणा कर देती है अभी पूर्ववर्ती सरकार ने डॉक्टर रमन सिंह सरकार की जो दो योजनाओं को बंद किया था चरण पादुका योजना इस योजना में भारी भ्रष्टाचार और जूते दे देने की तो बात थी लेकिन चप्पल तक ठीक से नहीं मिल रहा था यही हाल सरस्वती साइकिल योजना का था छात्राओं को यह लाभ मिलता था लेकिन स्थिति यह बन गई थी कि जमकर भ्रष्टाचार हुआ था और साइकिल किस तरीके से दिए जा रहे थे या किस तरीके से पड़े पड़े सड़ रहे थे किस तरीके से सप्लाई के साथ सेटिंग थी यह एक अलग मामला और फिर उस योजना को चालू करके विष्णु देव साय सरकार अपनी पीठ थपा चाहती है और दूसरी तरफ संविदा कर्मचारी अनियमित कर्मचारी लगातार आंदोलन कर रहे हैं ठेका कर्मी लगातार आंदोलन कर रहे हैं किस तरीके से ठेकेदारी प्रथा लागू करने के करने की वजह से युवाओं का शोषण हो रहा है वह भी किसी से छिपा नहीं है अनियमित कर्मचारियों ने तो धरना दिया था हालांकि सरकार ने दो टूक कह दिया है कि अभी इस तरह की कोई कार्य योजना नहीं बनी य अलग बात है कि विधानसभा चुनाव के पहले उनके धरना प्रदर्शन के कार्यक्रमों में जा जाकर भारतीय जनता पार्टी के नेता दावा करते थे कि हमारी सरकार आएगी तो हम संविदा नियुक्ति और अनियमित कर्मचारियों को नियमित कर देंगे लेकिन हालत यह है कि आठ माह बीत जाने के बाद भी सरकार बेरोजगारों के साथ छल करते दिखाई दे रही है!

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https://youtu.be/JRcpbwRTjdw?si=


गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

मोदी के चहेतों के इस रिकार्ड्स देख चौंक जाएँगे आप भी…



 मोदी सरकार बुरी तरीके से घिर गई है एक समय था जब मीडिया उनके हर कदम को मास्टर स्ट्रोक बताते नहीं थकती थी लेकिन इस सरकार में अब यह मोदी सरकार नहीं है और ना ही यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है यह एनडीए की सरकार हो चुकी है खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीकार किया है इसे तब इस सरकार को लेकर मीडिया की भूमिका क्या बदल गई है इसलिए अब मीडिया कर्मियों और पत्रकारों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है उन्हें पिंजड़े में बंद कर दिया जा रहा है दावा तो इसी तरह का है और राहुल गांधी ने मीडिया को लेकर सरकार की भूमिका को लेकर किस तरीके से लोकसभा में सवाल उठाए और कहा कि इस सरकार ने मीडिया वालों को  पिंजरे में बंद कर दिया सर उनको बाहर निकाल दीजिए मीडिया वालो को सर आपने पिंजरे में बंद कर दिया सर उनको बाहर निकाल यही नहीं अब तो हर घटना पर मीडिया की भूमिका कुछ बदली हुई नजर आ रही है या सुर बदले हुए हैं और इसके बाद भी शायद सोशल मीडिया में जो सक्रिय हैं उन लोगों को गोदी मीडिया जिसे कहा जाता है उस पर भरोसा नहीं रह गया इसलिए अपने ढंग से नए-नए तरह से मोदी सरकार के रिकॉर्ड को सामने ला रहे हैं यह रिकॉर्ड चौकाने वाला भी है और इतिहास के पन्नों में दर्ज भी हो रहा है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा हावड़ा मुंबई रेल दुर्घटना झारखंड में जो हुई उसके बाद जिस तरह की तस्वीरें सामने आई वह मोदी सरकार ही नहीं आरएसएस के लिए भी बेचैनी भरा हो सकता है यह एक अलग बात है कि आरएसएस इन दिनों दबाव बना रही है मोदी सरकार पर नकेल कसने के लिए और उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र हरियाणा और झारखंड की राजनीती में संघ के सक्रिय हो जाने से अलग तरह की हो गई है जो जेपी नड्डा लोकसभा चुनाव के दौरान कहा करते थे कि अब संघ की जरूरत नहीं है उन्हें संघ की बैठकों में जाना पड़ रहा है  जो मीडिया में चल रहा हावड़ा मुंबई मेल दुर्घटना के बाद तीन तस्वीर के साथ यह सोशल मीडिया में ज वायरल हो रहा है कि मोदी सत्ता का रिकॉर्ड देखें जिसमें पहली तस्वीर लगी है धर्मेंद्र प्रधान की जो मोदी सरकार में शिक्षा मंत्री है और 2014 से लेकर अब तक 70 बार से अधिक पेपर लीक के मामले हुए हैं पेपर लीक के मामले को लेकर जिस तरह के सवाल उठे हैं वह सवाल बेहद ही चौकाने वाले हैं सरकार ने परीक्षा लेने के नाम पर बेरोजगारों से जमकर कमाई की है करोड़ों अरबों रुपए कमाए हैं आप सोचिए कि एक परीक्षा फार्म की जो कीमत है वह तो है ही है यात्रा से लेकर ठहरने तक में युवाओं के पैसे खर्चे हुए हैं और सरकार को उससे जीएसटी मिली इस देश में एक दौर था जब एक भी रेल दुर्घटना होती थी रेल मंत्री को इस्तीफा दे देना पड़ता था नैतिकता के आधार पर तो यहां तो लगातार रेल दुर्घटनाएं हो रही है और सुविधा के नाम पर ठेंगा दिखाया जा रहा है बुजुर्गों को लेकर जो सुविधा थी उसे बंद कर दिया गया है यही नहीं मालगाड़ी धुलाई की प्राथमिकता है यात्री ट्रेन इस दौर में जिस तरीके से रद्द हुई इतिहास में कभी रद्द नहीं हुई और कहा तो यहां तक जाता है कि वंदे भारत को सफल बनाने के लिए जिस तरीके से यात्री ट्रेनों को रद्द किया गया ताकि गरीब व्यक्ति ज्यादा पैसा देकर वंदे भारत में सफर करें वह भी मोदी सत्ता के आपदा में अवसर को चिन्हा करने की चर्चा है तब दूसरी तस्वीर नीतीश कुमार की है नीतीश कुमार के राज में किस तरीके से पुल पुलिए ढह रहे हैं गिर रहे हैं लगातार लेकिन कोई यह नहीं कहेगा कि नीतीश सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त है आप कहेंगे कि नीतीश स सरकार का भाजपा से क्या लेना देना लेकिन हकीकत तो यह है कि नीतीश सरकार यदि आज बिहार में काबिज है तो उसकी वजह भारतीय जनता पार्टी है और तीसरे नंबर पर जो तस्वीरें वायरल हो रही है वह अश्विनी वैन की है रेल मंत्री की लगातार रेल दुर्घटनाएं हो रही हैं तब सवाल यह है कि क्या मोदी सरकार पेपर लीक रेल दुर्घटना और पूल पलियो के मामले में रिकॉर्ड बना चुकी है !

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https://youtu.be/fzPeVaS5KH4?si=Di_J6f4C2z9ocJLU