रविवार, 27 जून 2010

संवाद में चुपचाप दर्जनभर लोगों की संविदा नियुक्ति

संवाद में चुपचाप दर्जनभर लोगों की संविदा नियुक्ति
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क के अधीन संवाद में भर्राशाही का आलम यह है कि गुपचुप तरीके से दर्जनभर लोगों को संविदा नियुक्ति दे दी गई। इस मामले की शिकायत भी सचिव व विभागीय मंत्री डॉ. रमन सिंह से की गई है।
छत्तीसगढ़ संवाद में भर्राशाही और भ्रष्टाचार थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के इस विभाग में चल रहे घपलेबाजी व अनियमितता की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो कई अधिकारियों को जेल जाना पड़ सकता है। आडिट आपत्ति के बाद भी मुख्यमंत्री की खामोशी ने कई सवाल खड़े किए हैं जिसके चलते यहां के अधिकारियों की मनमानी बढ़ गई है। हालत यह है कि पिछले दो माह में दर्जनभर लोगों को गुपचुप तरीके से संविदा नियुक्ति दे दी गई और अब तो संवाद को अय्याशी का अड्डा तक बताया जाने लगा है।हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि पिछले दो माह में नादिर कुरैशी, चमनजीत वर्मा, स्वाती शुक्ला, बबीता राय, दीप्ति वर्मा, सतीश जायसवाल, गोकुल यादव, सत्यनारायण प्रजापति व टिकेश्वर वर्मा को संविदा नियुक्ति दिए जाने की चर्चा है। यहीं नहीं भ्रष्टाचार में लिप्त कई संविदा कर्मियों को आने वाले दिनों में नियमित किए जाने की कोशिश का भी पता चला है। बहरहाल संवाद में चल रहे इस गोरखधंधे को लेकर कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि अधिकारियों की करतूत शर्मनाक स्थिति पर पहुंच गई है।

शनिवार, 26 जून 2010

इसलिए जनसंपर्क करता है दादागिरी

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क हो या इसकी सहयोगी माने जाने वाली संवाद हो भ्रष्टाचार की गंगा बहने लगी है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के इस विभाग की करतूतों पर किताबें लिखी जा सकती है। संविदा नियुक्ति से लेकर विज्ञापनों में कमीशनखोरी की बात हो या नियम-कानून की बात हो। इस विभाग में इन सबका कोई महत्व नहीं है।
कहने को तो इस विभाग का काम सरकार और मुख्यमंत्री की छवि बनाना है लेकिन वास्तव में इन दिनों जनसंपर्क-संवाद के अधिकारी ही सरकार और डा. रमन सिंह की छवि बिगाडऩे में लगे हैं। यहां हो रही अनियमितता की खबरें नहीं छप पाती क्योंकि अखबारों को विज्ञापन यहीं से मिलता है इसलिए स्वेच्छाचरिता यहां चरम पर है। संविदा नियुक्तियों में जिस तरह की मनमानी हुई है और प्रकाशन से लेकर विज्ञापन में जिस तरह से कमीशनखोरी की गई है उससे यहां के कई अधिकारियों के चरित्र पर भी उंगली उठाए जाने लगे हैं। ऐसा नहीं है कि इसकी शिकायतें मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंची है लेकिन कार्रवाई कभी नहीं हुई। दरअसल 40 करोड़ के घपले की कहानी आडिट आपत्ति के बाद सामने आ चुकी है लेकिन दुनियाभर की खबरें छापने वाले स्थानीय अखबार इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
कलेक्टरों से लेकर सचिवों तक को धमकाने की ताकत रखने वाले इस विभाग के अफसरों का यह दंभ है कि वे यह कहते नहीं थकते कि छवि बिगाड़ देंगे। अब भला मुख्यमंत्री का ये लोग कौन सी छवि बना रहे हैं यह तो वही जाने लेकिन आम आदमी के सामने सरकार की छवि क्या रह गई है किसी से छिपा नहीं है।
और अंत में....
संवाद में चल रहे मनमाने संविदा नियुक्ति और 40 करोड़ की घपले की कहानी को लेकर एक कांग्रेसी नेता को प्रेस कांफ्रेंस की सलाह दी गई तो उसका जवाब था। अरे भैय्या पर्यटन के पत्रकार वार्ता का हश्र देखे हो। संवाद के खिलाफ कांफ्रेंस ली तो उतना भी नहीं छपेगा।

शुक्रवार, 25 जून 2010

चम्पू का कारनामा


बीज निगम में इकलौता प्रमोशन वह भी पूनम के भाई का
इसे कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू का चौधराहट कहें या सत्ता की ताकत यह तो वही जाने लेकिन जब वे बीज विकास निगम के अध्यक्ष थे तब उन्होंने पूर्व मंत्री पूनम चंद्राकर के भाई डी.के. चंद्राकर को पदोन्नति दी। बीज निगम बनने के बाद यह अब तक का इकलौता पदोन्नति आदेश है जबकि हाईकोर्ट से जीत कर आने वाले तक को पदोन्नति नहीं दिया गया।
छत्तीसगढ़ में ऐसा कोई विभाग नहीं हैं जहां भाजपाई लूट के किस्से चर्चित नहीं है। कृषि मंत्री की चौधराहट के किस्से भी कम नहीं है। बताया जाता है कि बीज विकास निगम के अधिकारियों में व्याप्त भ्रष्टाचार उनके कार्यकाल में तो और अधिक होने लगा था। वसूली अधिकारियों की करतूतों पर परदा डालने की परम्परा ने बीज विकास निगम का बेड़ा गर्क कर दिया है। बताया जाता है कि बीज विकास निगम का सेटअप नहीं बना है जिसके चलते अधिकारियों कर्मचारियों में जबरदस्त रोष है। इस मांग को लेकर उच्च स्तर पर कई बार चर्चा हो चुकी है लेकिन सरकार ने भी कभी ध्यान नहीं दिया।
सूत्रों के मुताबिक सरकार की उदासीनता के चलते कई अधिकारी हाईकोर्ट से भी केस जीत चुके हैं लेकिन सेटअप नहीं होने का बहाना कर पदोन्नति नहीं दी गई। जिसके चलते अधिकारी-कर्मचारियों में जबरदस्त रोष व्याप्त है। बताया जाता है कि जब से छत्तीसगढ़ बीज विकास निगम का गठन किया गया है तब से यहां सेटअप का बहाना बना कर किसी को पदोन्नति नहीं दी गई लेकिन जैसे ही चंद्रशेखर साहू बीज विकास निगम का अध्यक्ष बने उन्होंने डी.के. चंद्राकर को डीजीएम के पद पर पदोन्नति देने का आदेश दे दिया।
सूत्रों ने बताया कि डी.के. चंद्राकर को पदोन्नति सिर्फ इसलिए दी गई क्योंकि वे भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री पूरन चंद्राकर के भाई हैं और पूनम का संबंध चंद्रशेखर साहू से बेहद मधुर है। बताया जाता है कि जब चंद्रशेखर साहू ने महासमुंद लोकसभा का चुनाव लड़ा था तब पूनम चंद्राकर ने उनकी खूब मदद की थी। पूनम चंद्राकर महासमुंद भाजपा जिला के अध्यक्ष भी रहे हैं लेकिन ननकीराम कंवर के द्वारा डॉ. रमन सिंह के खिलाफ चलाए अभियान में हिस्सा लेने की वजह से उन्हें विधानसभा की टिकिट से वंचित होना पड़ा था। जिस व्यक्ति की मुख्यमंत्री से अदावत हो उसके भाई को पदोन्नति देने के मामले में चंद्रशेखर साहू की भूमिका को दुस्साहस माना जा रहा है। बहरहाल श्याम बैस के अध्यक्ष बनने के बाद पुराने अध्यक्षों के कारनामें बाहर आने लगे हैं और इसे राजनैतिक रंग भी दिए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

गुरुवार, 24 जून 2010

मंत्री का हठ या गैंदाराम की दमदारी , सामने आ रही राज्यपाल की लाचारी

बलौदाबाजार में जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्थ गैंदाराम चंद्राकर पर कार्रवाई करने प्रदेश के राज्य ने दो दर्जनभर से अधिक पत्र शासन को लिखा है लेकिन शासन ने हटाने की बजाय उसे मालदार पद पर बिठाने का उपक्रम किया।
छत्तीसगढ़ के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग में चल रहे इस खेल की जानकारी मंत्री जी को भी हैं। गैंदाराम के खिलाफ दर्जनों शिकायतें हो चुकी है लेकिन पैसे और पहुंच के आगे मंत्री की दमदारी भी इस मामले में टांय-टांय फिस्स हो चुकी है। यहीं नहीं गैंदाराम के कारनामों को लेकर राज्यपाल तक से शिकायत की गई है और हर शिकायत के बाद राजभवन से शासन को पत्र भी लिखा जा चुका है लेकिन जिस गैंदाराम पर शिक्षा सचिव और लोकसेवा आयोग के सचिव की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं हुई हो तो राज्यपाल की अनुशंसा पर क्या कार्रवाई हुई होगी आसानी से समझा जा सकता है।
ज्ञात हो कि गैंदाराम चंद्राकर ने पीएससी में चयन होने कुटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किए थे जिसकी पुष्टि पीएससी के सचिव श्री पंत और तत्कालीन शिक्षा सचिव नंदकुमार ने भी की है लेकिन गैंदाराम के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई उल्टे प्रमोशन दिया गया। बताया जाता है कि गैंदाराम चंद्राकर की उच्च स्तरीय पहुंच की वजह से ही उन पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई वहीं उनके द्वारा कार्रवाई से बचने बेतहाशा पैसा फेंके जाने की भी चर्चा है। इधर इस संबंध में यह भी पता चला है कि उन्हें शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का भी वरदहस्त प्राप्त है। हालांकि इस वरदहस्त के पीछे लेन देन की भी चर्चा है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
बहरहाल गैंदाराम चंद्राकर के मामले में जिस तरह से शिक्षा मंत्री का रवैया रहा है उससे न केवल सरकारी की छवि पर असर पड़़ रहा है बल्कि भ्रष्टाचार की नई परम्परा को भी जन्म दिया है।
गैंदाराम का दुस्साहस
कहते हैं कि जब गैंदाराम चंद्राकर शिक्षा अधिकारी बनकर बलौदाबाजार पदस्थ हुए तो उन्होंने कई कारनामे किए। यहां तक कि प्रभारी मंत्री के अनुमोदन पर हुए तबादलों में से अपने करीबी लोगों का तबादला रोकने का आदेश जारी कर दिया जबकि तबादला रोकने का कार्य मुख्यमंत्री द्वारा गठित समवन्य समिति का है लेकिन गैंदाराम के इस दुस्साहस पर भी उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सका।

शराब बंदी और खिलाफत

पिछले दिनों गायत्री परिवार के लोगों ने पत्रकारों को बताया कि वे जेल में बंदियों को गायत्री मंत्र सिखा रहे हैं और जेलों में वाचनालय स्थापित कर रहे हैं ताकि गलत कार्यों से लोगों का ध्यान हटे नि:संदेह गायत्री परिवार की यह कोशिश सराहनीय है। गायत्री परिवार के लोग शराब के खिलाफ भी जनजागरण अभियान चला रहे हैं इसी तरह का जनजागरण अन्य कई संस्थाएं भी चला रही है। इन संस्थाओं का मानना है कि उनके जनजागरण अभियान से लोग शराब पीना छोड़ देंगे। कुछ लोग छोड़ भी रहे होंगे। दरअसल इस तरह की संस्थाओं का आशावादी दृष्टिकोण आश्चर्यजनक है शराब के खिलाफ बरसों से इस तरह के जनजागरण चलाने वालों को इसका परिणाम तो पता है लेकिन वे फिर भी जनजागरण चला रहे हैं कुछ सरकारी अनुदान प्राप्त संस्था हैं तो कुछ लोग शराब के खिलाफ ऐसे अभियान के बहाने अपना नाम को प्रसिद्ध कर लेना चाहते हैं।
गायत्री परिवार किसी नाम का मोहताज नहीं है लेकिन उनके कार्यकर्ताओं को यह बात समझनी होगी कि सिर्फ जनजागरण से शराब बंदी हो जाती तो 50 सालों से चल रहे जनजागरण अभियान के बाद शराब पीने वालों की संख्या में हर साल ईजाफा नहीं होता। ऐसा ही अन्य संस्थाओं को भी यह बात समझनी होगी। दरअसल यह सारा खेल प्रदेश को मिलने वाले राजस्व का नहीं है बल्कि शराब दुकानों के खोलने में शराब ठेकेदारों द्वारा मंत्रियों-नेताओं से लेकर अधिकारी-कर्मचारियों को बांटे जाने वाले राजस्व का है। नेता-अधिकारी यह बात जानते हैं कि ऐसे जनजागरण से शराब बंद नहीं होगा इसलिए वे जनजागरण अभियान की दुहाई देते हैं जबकि यह सच्चाई है कि सरकार बेचना बंद करेगा तभी लोग पीना बंद करेंगे लेकिन वोट बैंक की राजनीति और पैसा कमाने की भूख ने इन विनाशकारी को जीवित रखा है।
सरकार शराब बेच रही है लोग जनजागरण चला रहे हैं आखिर यह कब तक चलेगा। इसलिए ऐसी संस्थाएं जो सचमुच शराब बंदी चाहते हैं वे यदि मुख्यमंत्री निवास का जमकर घेराव कर दे तो सरकार मजबूर हो सकती है। छत्तीसगढ़ में ही गायत्री परिवार के लाखों लोग हैं इसी तरह दूसरी संस्थाएं भी हैं यदि वे एक दिन तय करके संघर्ष की घोषणा कर दें तो सरकार जनजागरण की दुहाई देना बंद कर देगी। दरअसल सरकार ही नहीं चाहती कि शराब बंदी हो इसकी वजह वह राजस्व को बताते नहीं थकती लेकिन आम लोगों को यह समझना होगा कि राजस्व बहाना है असली वजह तो शराब ठेकेदारों से मिलने वाला कमीशन है जो राजस्व से कहीं ज्यादा नेताओं और अधिकारियों को मिलता है।

रविवार, 20 जून 2010

श्रीमद् भागवत गीता का अपमान!


ठाकुर की ठकुराई या मूणत की मुर्खताई
स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर वाली गीता वितरित
इसे सत्ता का दंभ कहें या व्यवस्था की मुर्खता लेकिन डॉ. रमन सिंह के पिताजी के तेरहवीं कार्यक्रम में जिस तरह से हिन्दुओं के पवित्र ग्रंथ ‘श्रीमद् भागवत गीता’ का अपमान किया गया उससे न केवल आम आदमी आक्रोशित है बल्कि उनकी टिप्पणी भी बेहद तीखी है। कोई इसे गीता का अपमान कह रहा है तो कोई इसे सत्ता का दंभ बता रहा है। मामले को तूल पकडऩे से रोकने सरकारी प्रयास भी जारी है। बावजूद इस करतूत की शिकायत नागपुर से लेकर दिल्ली तक की जा चुकी है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह के पिताश्री स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह के तेरहवीं में 16 जून को कवर्धा में श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान श्रीमद् भागवत गीता बांटी गई। तेरहवीं कार्यक्रम में गीता का वितरण नया नहीं है लेकिन यहां जिस गीता का वितरण किया गया उसमें स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह जी की रंगीन तस्वीर छापी गई थी। दरअसल हिन्दुओं के लिए गीता का महत्व किसी से छीपा नहीं है और वे इसे अपने पूजा स्थल पर रखते हैं ऐसे में स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर वाली गीता कोई अपने पूजा स्थल पर क्यों रखेगा और जब पूजा स्थल पर नहीं रखा जाएगा तो फिर इस पवित्र ग्रंथ को रका कहां जाएगा। हमारे भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि तेरहवीं में वितरित किए जाने वाले श्रीमद् भागवत गीता में स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर छापने के पिछे स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सहमति रही है जबकि सलाहकार के रुप में पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था करने वाले नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत का नाम सामने आया है।
बताया जाता है कि यह तस्वीर मूणत आफसेट में छापी गई है और करीब डेढ़ लाख लोगों को यह किताब वितरित की गई है। आम लोगों की इस मामले में बेहद तीखी प्रतिक्रिया है और कई लोगों ने तो यहां तक कह डाला कि जो जितना बड़ा अधर्मी है आज वह उतना ही बड़ा धर्म का ठेकेदार हैं।
कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि धर्म की राजनीति करने वाली भाजपा के नेताओं की ऐसी करतूतों के कारण ही देश में भाजपा को मुंह की खानी पड़ेगी और केन्द्रीय नेतृत्व ने यदि कड़े कदम नहीें उठाये तो छत्तीसगढ़ में भी भाजपा को मुंह की खानी पड़ सकती है। बहरहाल स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर वाले श्रीमद् भागवत गीता का मामला किस करवट बैठेगा यह तो वक्त ही बतायेगा लेकिन यह तय है कि इस मामले को लेकर पुजारियों और आम लोगों में बेहद आक्रोश है।
क्या करें इसगीताका...
हमने स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर वाले ‘श्रीमद् भागवत गीता’ के उपयोग पर चर्चा की तो कई पंडितों ने कहा कि इसे नदी-तालाब में विसर्जित किया जाना ही सबसे उचित होगा क्योंकि यदि तस्वीर फाडक़र इसे पूजा स्थल पर रखेंगे तो ठाकुर साहब का अपमान होगा। भले ही तस्वीर छपाने वालों ने इस अपमान को नहीं समझा हो लेकिन आम आदमी को यह ध्यान रखना होगा कि उनकी हरकत से किसी का अपमान न हो।
कांग्रेसी अब क्या करेंगे
धर्म को लेकर हमेशा ही कांग्रेस पर हमला होता रहा है ऐसे में विपक्ष में बैठी कांग्रेस क्या रूख अख्तियार करती है इसे लेकर कई तरह की चर्चा है। खासकर उन कांग्रेसियों की दुकानदारी या ठेकेदारी बंद होने की बात कही जा रही है जो थोड़े बहुत लालच में अपने मुंह पर ताला जड़े हुए हैं।
अब कहां है हिन्दू संगठन...
छत्तीसगढ़ में हिन्दुओं के हित में बोलने वाले चार दर्जन से अधिक संगठन काम कर रहे हैं लकिन आश्चर्य का विषय तो यह है कि इतने बड़े मामले में अब तक कोई भी सामने नहीं आया है। हिन्दुत्व की दुहाई देने वाले सबसे बड़े संगठन आरएसएस हो या विश्वहिन्दू परिषद से लेकर बजरंग दल सभी ने खामोशी ओढ़ ली है बात-बात में मिशनरियों को ललकारने वाली धर्म सेना तो इस मामले में कुछ भी बोलने से कतराती रही जबकि छोटे-मोटे संगठनों ने हमें ही सलाह दे दिया कि इस मामले को तूल मत दो। हमारा भी इस मामले को तूल देने का ईरादा नहीं है लेकिन जिस हिसाब से हमें आम लोगों ने ‘गीता’ के अपमान को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त की हम उन्हें भावनाओं को सिर्फ शब्द दे रहे हैं।
धर्म की राजनीति करने वाले दिग्गज भी पहुंचे थे...
स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह जी के तेरहवीं कार्यक्रम में वे लोग भी आए थे जिन्हें कट्टर हिन्दुवाद के रुप में जाने जाते हैं। लालकृष्ण आडवानी, उमा भारती तो कट्टर हिन्दूवादी चेहरे हैं। जबकि राजनाथ सिंह, सुंदरलाल पटवा, धर्मेन्द्र प्रधान, रविशंकर प्रसाद, प्रभात झा, उमाशंकर गुप्ता सहित अनेक लोगों का ध्यान भी इस ओर नहीं गया। क्या वे जानबूझकर चुप थे यह तो वहीं जाने।
धर्म ग्रन्थ किसी की जागीर नहीं
प्रतिक्रियाएं : आम लोगों में आक्रोश
महादेव घाट स्थित हटकेश्वर नाथ मंदिर के पुजारी श्री लोचन गिरी गोस्वामी जी हमारे धर्मग्रंथ के साथ छेड़छाड़ करना गलत बात है इस तरह से फोटो लगाना उचित नहीं है यह हक किसी को नहीं है ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
महादेवघाट स्थित काली मंदिर के महंत संतोष गिरी महाराज फोटो लगाने का अधिकार किसने दिया। ये तो बर्दाश्त के बाहर की बात है और इस पाप के लिए सजा जरूर मिलेगी।
श्री कमल गिरी जी महाराज- इन्होंने इस तरह से गीता के अपमान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसके खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।
श्री डगेश्वर शर्मा जी महाराज ने कहा कि इस तरह का कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है और दंड भी तय होने चाहिए।
फायर ब्रिगेड चौक हनुमान मंदिर के पुजारी पं. भूषण शर्मा जी ने गीता में फोटो देखते ही आग बबूला हो उठे और इसे पाप करार देते हुए गीता के दुरुपयोग पर रोक लगाने की बात कही।
श्याम नगर स्थित शिव मंदिर के पुजारी पं. यदुवंशमणि त्रिपाठीजी ने इस ‘गीता’ को देखते ही कहा कि लगता है डॉ. रमन सिंह पर भी कलयुग का प्रभाव आ गया है और कहा कि जब राजा ही ऐसा अधर्म काम करे तो प्रजा क्या करेंगे। पद के प्रभाव में धार्मिक ग्रंथों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
आर्तेक जायसवाल अंबिकापुर- इन्होंने कहा कि पद का ऐसा दुरुपयोग कभी नहीं देखा इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
बल्ला महाराज- डंगनिया बम्लेश्वरी मंदिर के पुजारी ने भी कहा कि इस तरह का फोटो लगाना गलत है। धर्मग्रंथ के साथ छेड़छाड़ की ईजाजत किसी को नहीं दी जानी चाहिए। हम इसका कड़ा विरोध करते हैं।
ट्रांसपोर्टर संजय पाण्डे रायपुरा ने कहा कि कोई हिन्दु ही कैसे अपने ग्रंथ का अपमान कर सकता है आज हिन्दु संगठन चुप रहा तो हिन्दुओं की रक्षा में कौन आगे आएगा।
पत्रकार दामू अम्बाडोरे ने कहा कि अब तो जो जितना बड़ा अधर्मी है उतना बड़ा धर्म का ठेकेदार हो गया है ऐसे लोगों का बहिष्कार किया जाना चाहिए।
कवर्धा निवासी शेषनारायण पाण्डे ने कहा कि यह तो पद का दंभ है और किसी को अपने परिवार का प्रचार करना है तो कम से कम धर्म ग्रंथों को तो बख्श दें।
कोण्डागांव निवासी इसरार अहमद गोलू ने कहा कि किसी भी धर्मग्रंथ का अपमान उचित नहीं है और ऐसे मामले में कार्रवाई तय हो। धर्मग्रंथ किसी की जागिर नहीं है जिसे तो चाहे जैसा उपयोग कर ले।
विजन पब्लिक स्कूल के संरक्षक श्री सभाजीत पाण्डेय ने गीता में तस्वीर देखते ही भडक़ उठे। उन्होंने कहा कि पद में बैठकर लोग धर्म को जागिर बनाना आम लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है ऐसे लोगों को न केवल पद से निकालना चाहिए बल्कि कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
अजय दुबे संपादक खबर भूमि ने कहा कि भाजपा केवल धर्म की रक्षा की बात कर सत्त में आई है और उनके नेता इस तरह की हरकत कर रहे हैं ऐसे लोगों को पद पर बने रहने का एक दिन का भी हक नहीं है।

शुक्रवार, 18 जून 2010

निकम को फिर संविदा में रखने की कोशिश...

छत्तीसगढ़ राय बीज एवं कृषि विकास निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को नए अध्यक्ष श्याम बैस किस तरह काबू में करेंगे यह तो वही जाने लेकिन जिस जिला प्रबंधक के पद रहे एनसी निकम के पुन: नौकरी देने के प्रस्ताव को आईएएस डीएस मिश्रा ने खारिज कर दिया है उसी निकम को पुन: संविदा नियुक्ति देने की कोशिश चल रही है।
छत्तीसगढ राय बीज एवं कृषि विकास निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार चरम पर है और कहा जाता है कि जिला प्रबंधक जैसे पदों पर 20 लाख रुपए सालाना से अधिक आवक है। इसी परिपेक्ष्य में इस बात की जबरदस्त चर्चा है कि 30 जून 2010 को सेवानिवृत्त हुए एनसी निकम को पुन: संविदा नियुक्ति देने की तैयारी की जा रही है ताकि उच्चाधिकारियों के वसूली अधिकारी के रूप में चर्चित निकम के माध्यम से भ्रष्टाचार की मान्य परम्परा को कायम रखी जा सके।
हमारे भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक एनसी निकम को संविदा नियुक्ति देने की कोशिश पहले भी हो चुकी है। जब आईएएस डीएस मिश्रा निगम के अध्यक्ष थे तब 30 मार्च 2010 को बोर्ड की बैठक हुई थी इस बैठक में एनसी निकम को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव रखा गया था लेकिन निकम के कारनामों से परिचित डीएस मिश्रा ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। सूत्रों ने बताया कि मिश्रा के हटते ही और श्याम बैस के अध्यक्ष बनते ही एक बार पुन: निगम में पदस्थ भ्रष्टाचारी चौकड़ी हाल ही में होने वाली बोर्ड की बैठक में पुन: एनसी निकम को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव लाने की कोशिश में हैं।
सूत्रों ने बताया कि इसके लिए उच्चस्तरीय प्रयास और बड़ी राशि के लेन-देन की खबरें आने लगी है। बहरहाल बीज निगम में चल रहे नए खेल को लेकर यहां कई तरह की चर्चा है और यह भी कहा जा रहा है कि पुराने अध्यक्षों के कारनामों को लेकर नए अध्यक्ष श्याम बैस की भूमिका क्या होगी।