वैसे तो दीपावली अखबार वालों के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया है। भरपूर विज्ञापन बटोरने और खबरों को किनारे करने की होड़ में सर्वाधिक फायदा पत्रकारों को ही मिलता है। खबरें भी कम लिखों और गिफ्ट लिफाफा जमकर बटोरो। इस मामले में रायपुर मीडिया वैसे तो दूर रहा है लेकिन इस बार इस लिफाफा से वह भी नहीं बचा है। ईमानदारी का लबादा ओढऩे वाले बड़े अखबारों के पत्रकार भी लिफाफा बटोरने की आपा-धापी में शामिल हो गए।
खनिज, आबकारी, फुड के अलावा मंत्रियों के बंगलों में भी पत्रकारों की आमद रही। औकात के हिसाब से लिफाफा दिया गया और दीपावली धूमधाम से मनाई गई। समाचार से जुड़़े फोटोग्राफरों को इस बार भी लालीपाप ही मिला। कुछ एक फोटोग्राफरों ने अपने बैनरों का उपयोग कर लिफाफा जरूर बटेारा पर अधिकांश फोटोग्राफरों को लिफाफा नहीं मिल पाने की पीड़ा उनके चेहरे पर पढ़ी जा सकती थी। एक फोटोग्राफर तो चर्चा के दौरान फट पड़ा। कहा- फोटो खिंचाने के चक्कर में आगे-आगे रहने वाले सब नेता गायब हो गए हैं। दीपावली गुजरने दो तब मजा चखाएंगे। अब फोटोग्राफरों को कौन समझाए कि अब भी रिपोर्टर ही तय करता है कि कौन सी फोटो जानी है और यह बात नेता लोग समझ गए हैं इसलिए लिफाफा बचाने गायब हो गए हैं। कई रिपोर्टर इस मामले में खुशनसीब रहे कि उन्हें दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। बल्कि लिफाफा देने वाले अखबार के दफ्तर ही पहुंच रहे थे।
मुकेश की पीड़ा
कहते है भले लोगों के साथ कई बार अच्छा नहीं होता और इलेक्ट्रानिक मीडिया के इस मुकेश वर्मा के साथ इन दिनों जो कुछ हो रहा है वह ठीक कतई नहीं है। आए दिन नौकरी से अंदर-बाहर के फेर में परेशानी तो बढ़ ही जाती है वह तो वीआईपी रोड के होटल वालों की भलमनसाहत है जो मुकेश के हुनर को समझकर अपने यहां आयोजित कार्यक्रमों के लिए मौका दे देते हैं वरना दिक्कत जो हो रही थी उसे मीडिया वाले समझने तैयार नहीं है।
अमृत संदेश का नया गणित...
कहते हैं कभी-कभी पैसा सर चढक़र बोलता है। राज्य निर्माण के बाद अमृत संदेश की स्थिति में भी सुधार हुआ है। कांग्रेस की राजनीति के बाद भी भाजपा सरकार से सेटिंग ने विज्ञापन खूब कमाए हैं। भले ही यहां पत्रकार नहीं ठहरते हो लेकिन तामझाम में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। इसी कड़ी में अब गिनती के लोग बच गए हैं और उन्हें भी कैमरे की नजर पर रखा गया है। अब बचे खुचों को बचाने की कवायद है या आक्रोश रोकने की कोशिश यह तो वे ही जाने।
और अंत में...
पूरे शहर की आवाज उठाने का ठेका लेने वाले नए नवेले अखबार के एक रिपोर्टर को वन मंत्री के यहां से जब खाली लौटना पड़ा तो वह साथी पर ही गुस्सा उतारने लगा। कहा मिला कुछ नहीं और तेरे चक्कर में बदनामी अलग हो गई।
http://midiaparmidiaa.blogspot.in/
गुरुवार, 18 नवंबर 2010
आज की खबर
१-दुनिया की उम्रदराज बाघिन शंकरी की आज दोपहर मौत हो गई.वह काफी दिनों से बीमार थी.उसे मैनपुर के जंगल से लाया गया था.
२-छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय का चुनाव की घोसना कर दी गई है. २१ दिसंबर को मतदान और २४ दिसंबर को मतगणना होगी
३-राजेंद्र जग्गी चेंबर रत्न से सम्मानित किये गए
४-सिकलसेल पर अंतररास्ट्रीय सम्मलेन २२-२७ नवम्बर को बेबिलान इन में होगा सम्मलेन का उदघाटन पूर्व राष्ट्रपति श्री कलम करेंगे. सम्मलेन में १५ देशो के विशेषज्ञ भाग लेंगे.
५-रायपुर के सिविल लाइन निवासी अजय पाल ने आत्महत्या कर ली . नह मेकाहारा में वें चलता था.
६-हिरा स्टील द्वारा अफसरों-नेताओं को बनते दीपावली गिफ्ट में भारत का नक्शा गलत . अब देखना है की सरकार रिपोर्ट दर्ज करती है या फिर पैसों की ताकत काम करेगी? नागरिक संघर्स समिति ने आपति की. समिति के पदाधिकारी डॉ राकेश गुप्ता,विश्वजीत mitra , हरजीत जुनेजा, अमिताभ दीक्षित , ने एक पत्रकार-वार्ता में बताया की यदि करवाई नहीं हुई तो महामहिम राज्यपाल से भी मिला जायेगा .
७-मधुमेह को नियंत्रित करने सप्त-योग मधुनाश को बाजार में लाया काया है . बी टी सी फूड्स के नीरज गंभीर और अतुल दुबे ने बताया कि यह हार मेडिकल स्टोर्स में उपलब्ध है इसके नियमित सेवन से इसुलिन का इंजेक्शन नहीं लगाना पड़ेगा .
8-रायपुर के bairan बाजार में karodo कि jamin पर kabje को lekar balava huaa dono hi parti vidya-bhushan sukla और rahul shukla congresi hain,
२-छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय का चुनाव की घोसना कर दी गई है. २१ दिसंबर को मतदान और २४ दिसंबर को मतगणना होगी
३-राजेंद्र जग्गी चेंबर रत्न से सम्मानित किये गए
४-सिकलसेल पर अंतररास्ट्रीय सम्मलेन २२-२७ नवम्बर को बेबिलान इन में होगा सम्मलेन का उदघाटन पूर्व राष्ट्रपति श्री कलम करेंगे. सम्मलेन में १५ देशो के विशेषज्ञ भाग लेंगे.
५-रायपुर के सिविल लाइन निवासी अजय पाल ने आत्महत्या कर ली . नह मेकाहारा में वें चलता था.
६-हिरा स्टील द्वारा अफसरों-नेताओं को बनते दीपावली गिफ्ट में भारत का नक्शा गलत . अब देखना है की सरकार रिपोर्ट दर्ज करती है या फिर पैसों की ताकत काम करेगी? नागरिक संघर्स समिति ने आपति की. समिति के पदाधिकारी डॉ राकेश गुप्ता,विश्वजीत mitra , हरजीत जुनेजा, अमिताभ दीक्षित , ने एक पत्रकार-वार्ता में बताया की यदि करवाई नहीं हुई तो महामहिम राज्यपाल से भी मिला जायेगा .
७-मधुमेह को नियंत्रित करने सप्त-योग मधुनाश को बाजार में लाया काया है . बी टी सी फूड्स के नीरज गंभीर और अतुल दुबे ने बताया कि यह हार मेडिकल स्टोर्स में उपलब्ध है इसके नियमित सेवन से इसुलिन का इंजेक्शन नहीं लगाना पड़ेगा .
8-रायपुर के bairan बाजार में karodo कि jamin पर kabje को lekar balava huaa dono hi parti vidya-bhushan sukla और rahul shukla congresi hain,
बुधवार, 17 नवंबर 2010
मोहन-मूणत में जंग
राजधानी के दो मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल और राजेश मूणत में जंग छिड़ गई है। एक दूसरे को निपटाने के फेर में भले ही बृजमोहन अग्रवाल भारी पड़ रहे हो लेकिन आने वाले दिनों में इसका खामियाजा पार्टी को भोगना पड़़ेगा। कहा जा रहा है कि दोनों मंत्रियों की लड़ाई की असली वजह वर्चस्व स्थापित करना है। चूंकि कमल विहार योजना में वे भूमाफिया सीधे प्रभावित हो रहे थे जिन पर दमदार मंत्री का वरदहस्त है। मोहन-मूणत की इस जंग के चलते बूढ़ातालाब दलदल में तब्दिल होता जा रहा है।
वैसे तो मोहन और मूणत के बीच कभी नहीं पटी। बृजमोहन अग्रवाल की कार्यशैली से असंतुष्ट संगठन खेमे के राजेश मूणत ने भले ही पार्टी हित में बृजमोहन का खिलाफत नहीं किया हो लेकिन दोनों के बीच राजनैतिक शुत्रता जग जाहिर है। कहा जाता है कि खरीद फरोख्त और मैनेजमेंट में कांग्रेसियों तक को अपने पाले में करने वाले बृजमोहन अग्रवाल ने राजेश मूणत को पटकनी देने कई दांव खेले हैं। राजेश मूणत जब पीडब्ल्यूडी मंत्री थे तब भी सर्किट हाउस सहित अन्य मामले को लेकर बृजमोहन अग्रवाल की भूमिका पर संदेह किया जाता रहा है। यहां तक कि विधानसभा चुनाव के दौरान भी बागी भाजपा नेता वीरेन्द्र पाण्डे को मदद करने का अफवाह भी उड़ा।
सूत्रों की माने तो नई राजधानी के कार्यक्रम के अलावा दोनों के बीच कई बार झड़पे हो चुकी है। ताजा मामला बूढ़ातालाब के सौन्दर्यीकरण और कमल विहार योजना को लेकर है। बताया जाता है कि बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण का काम बृजमोहन का विभाग पर्यटन के जिम्मे है लेकिन दोनों की राजनैतिक लड़ाई के चलते बूढ़ातालाब के रखरखाव व सौंदर्यीकरण का कार्य रुक गया है। तालाब की हालत किसी से छिपी नहीं है। पर्यटन मंडल में व्याप्त भ्रष्टाचार भी किसी से छिपा नहीं है। विवादास्पद अफसरों को प्रश्रय देने की वजह से बृजमोहन अग्रवाल हमेशा ही विवादों में रहे है। नेता प्रतिपक्ष के चयन के दौरान भी बृजमोहन अग्रवाल पर तोडफ़ोड़ करने का सीधा आरोप लगा था और बूढ़ातालाब के प्रति बेरुखी को लेकर भी बृजमोहन अग्रवाल सीधे कटघरे में है।
इधर कमल विहार योजना को लेकर मोहन-मूणत में सीधे जंग छिड़ गई है। बताया जाता है कि राजेश मूणत को नीचा दिखाने के फेर में कमल विहार योजना को हथियार बनाया गया है। महेन्द्र से लेकर बसंत सेठिया जैसे भूमाफिया को के नाम उछल रहे थे जिन्हें दमदार मंत्री का समर्थक माना जाता है। बताया जाता है कि हड़बड़ी में लागू की गई इस महत्वपूर्ण योजना में कई गलतियां हुई और इसी का फायदा उठाते हुए इस योजना को हथियार बनाया गया।
सूत्रों की माने तो मोहन-मूणत में अब खुलकर जंग छिड़़ गया है और आने वाले दिनों में यह सडक़ पर भी आ सकता है। इधर कमल विहार योजना पर ब्रेक लगने को लेकर भूमाफियाओं में जहां खुशी की लहर है वहीं आम लोगों ने भी राहत की सांस ली है।
वैसे तो मोहन और मूणत के बीच कभी नहीं पटी। बृजमोहन अग्रवाल की कार्यशैली से असंतुष्ट संगठन खेमे के राजेश मूणत ने भले ही पार्टी हित में बृजमोहन का खिलाफत नहीं किया हो लेकिन दोनों के बीच राजनैतिक शुत्रता जग जाहिर है। कहा जाता है कि खरीद फरोख्त और मैनेजमेंट में कांग्रेसियों तक को अपने पाले में करने वाले बृजमोहन अग्रवाल ने राजेश मूणत को पटकनी देने कई दांव खेले हैं। राजेश मूणत जब पीडब्ल्यूडी मंत्री थे तब भी सर्किट हाउस सहित अन्य मामले को लेकर बृजमोहन अग्रवाल की भूमिका पर संदेह किया जाता रहा है। यहां तक कि विधानसभा चुनाव के दौरान भी बागी भाजपा नेता वीरेन्द्र पाण्डे को मदद करने का अफवाह भी उड़ा।
सूत्रों की माने तो नई राजधानी के कार्यक्रम के अलावा दोनों के बीच कई बार झड़पे हो चुकी है। ताजा मामला बूढ़ातालाब के सौन्दर्यीकरण और कमल विहार योजना को लेकर है। बताया जाता है कि बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण का काम बृजमोहन का विभाग पर्यटन के जिम्मे है लेकिन दोनों की राजनैतिक लड़ाई के चलते बूढ़ातालाब के रखरखाव व सौंदर्यीकरण का कार्य रुक गया है। तालाब की हालत किसी से छिपी नहीं है। पर्यटन मंडल में व्याप्त भ्रष्टाचार भी किसी से छिपा नहीं है। विवादास्पद अफसरों को प्रश्रय देने की वजह से बृजमोहन अग्रवाल हमेशा ही विवादों में रहे है। नेता प्रतिपक्ष के चयन के दौरान भी बृजमोहन अग्रवाल पर तोडफ़ोड़ करने का सीधा आरोप लगा था और बूढ़ातालाब के प्रति बेरुखी को लेकर भी बृजमोहन अग्रवाल सीधे कटघरे में है।
इधर कमल विहार योजना को लेकर मोहन-मूणत में सीधे जंग छिड़ गई है। बताया जाता है कि राजेश मूणत को नीचा दिखाने के फेर में कमल विहार योजना को हथियार बनाया गया है। महेन्द्र से लेकर बसंत सेठिया जैसे भूमाफिया को के नाम उछल रहे थे जिन्हें दमदार मंत्री का समर्थक माना जाता है। बताया जाता है कि हड़बड़ी में लागू की गई इस महत्वपूर्ण योजना में कई गलतियां हुई और इसी का फायदा उठाते हुए इस योजना को हथियार बनाया गया।
सूत्रों की माने तो मोहन-मूणत में अब खुलकर जंग छिड़़ गया है और आने वाले दिनों में यह सडक़ पर भी आ सकता है। इधर कमल विहार योजना पर ब्रेक लगने को लेकर भूमाफियाओं में जहां खुशी की लहर है वहीं आम लोगों ने भी राहत की सांस ली है।
लेबल:
मंत्री बृजमोहन अग्रवाल,
राजेश मूणत
मंगलवार, 16 नवंबर 2010
डा. रमन की स्वीकारोक्ति - उद्योगपतियों व व्यापारियों के बदौलत है हमारी सरकार...
आम लोगों में तीखी प्रतिक्रिया...
वैसे तो भाजपा पर व्यापारियों की सरकार का आरोप हमेशा लगता रहा है और भाजपा के नेता हमेशा ही इसका खंडन करते रहे हैं लेकिन पिछले दिनों राजनांदगांव के दीपावली मिलन कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने खुलकर पहली बार यह बात स्वीकार की कि उद्योगपतियों एवं व्यवसायियों ने जो माहौल तैयार किया। उसी की बदौलत उनकी सरकार बनी और ये बात वे कभी नहीं भूलेंगे।
वैसे तो बुलंद छत्तीसगढ़ ने भाजपा सरकार और सचिवों के उद्योगपतियों के इशारे पर नाचने का कई उदाहरण पेश किया है बाल्को से लेकर जिंदल तक और राज्योत्सव में वीडियोकॉन का मामला भी लोग भूले नहीं है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी इसे विरोधी दलों का दुष्प्रचार कहते रही है लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने राजनांदगांव में 7 नवम्बर को आयोजित अग्रसेन भवन में दीपावली मिलन कार्यक्रम में यह बात स्वीकार की कि उनकी सरकार उद्योगपतियों एवं व्यवसायियों की बदौलत है यही नहीं उन्होंने यहां तक कहा कि वे पार्षद से विधायक और केन्द्रीय मंत्री से मुख्यमंत्री बन पाए तो सिर्फ इसलिए कि उद्योगपतियों व व्यवसायियों ने माहौल बनाया। उन्होंने उद्योगपतियों से आगे भी इसी तरह के सहयोग करने की गुजारिश की।
रायपुर से प्रकाशित नामी दैनिक अखबार ‘पत्रिका’ में 8 नवम्बर 2010 को छपी इस खबर से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री ने यह बात स्वीकार की है। इस खबर की सच्चाई जब जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि डॉ. सिंह के इस स्वीकारोक्ति की आम जनों में तीखी प्रतिक्रिया है। वहीं पार्टी के कुछ विधायकों ने भी इस पर तीखी टिप्पणी नाम नहीं छापने की शर्त पर कही।
इधर चर्चा इस बात की है कि पत्रिका में छपी खबर की अब तक न तो मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने खंडन किया है और न ही मुख्यमंत्री के प्रेस कार्यालय से ही इस बात का खंडन हुआ है इससे ही स्पष्ट है कि डॉ. रमन ने यह बात खुलेआम से स्वीकार किया है। हालांकि आम लोगों में व्याप्त तीखी प्रतिक्रिया से भाजपा नेताओं में जबरदस्त बेचैनी है। बहरहाल मुख्यमंत्री की यह स्वीकारोक्ति आने वाले दिनों में क्या रंग लेगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन आम लोगों में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया है।
वैसे तो भाजपा पर व्यापारियों की सरकार का आरोप हमेशा लगता रहा है और भाजपा के नेता हमेशा ही इसका खंडन करते रहे हैं लेकिन पिछले दिनों राजनांदगांव के दीपावली मिलन कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने खुलकर पहली बार यह बात स्वीकार की कि उद्योगपतियों एवं व्यवसायियों ने जो माहौल तैयार किया। उसी की बदौलत उनकी सरकार बनी और ये बात वे कभी नहीं भूलेंगे।
वैसे तो बुलंद छत्तीसगढ़ ने भाजपा सरकार और सचिवों के उद्योगपतियों के इशारे पर नाचने का कई उदाहरण पेश किया है बाल्को से लेकर जिंदल तक और राज्योत्सव में वीडियोकॉन का मामला भी लोग भूले नहीं है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी इसे विरोधी दलों का दुष्प्रचार कहते रही है लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने राजनांदगांव में 7 नवम्बर को आयोजित अग्रसेन भवन में दीपावली मिलन कार्यक्रम में यह बात स्वीकार की कि उनकी सरकार उद्योगपतियों एवं व्यवसायियों की बदौलत है यही नहीं उन्होंने यहां तक कहा कि वे पार्षद से विधायक और केन्द्रीय मंत्री से मुख्यमंत्री बन पाए तो सिर्फ इसलिए कि उद्योगपतियों व व्यवसायियों ने माहौल बनाया। उन्होंने उद्योगपतियों से आगे भी इसी तरह के सहयोग करने की गुजारिश की।
रायपुर से प्रकाशित नामी दैनिक अखबार ‘पत्रिका’ में 8 नवम्बर 2010 को छपी इस खबर से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री ने यह बात स्वीकार की है। इस खबर की सच्चाई जब जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि डॉ. सिंह के इस स्वीकारोक्ति की आम जनों में तीखी प्रतिक्रिया है। वहीं पार्टी के कुछ विधायकों ने भी इस पर तीखी टिप्पणी नाम नहीं छापने की शर्त पर कही।
इधर चर्चा इस बात की है कि पत्रिका में छपी खबर की अब तक न तो मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने खंडन किया है और न ही मुख्यमंत्री के प्रेस कार्यालय से ही इस बात का खंडन हुआ है इससे ही स्पष्ट है कि डॉ. रमन ने यह बात खुलेआम से स्वीकार किया है। हालांकि आम लोगों में व्याप्त तीखी प्रतिक्रिया से भाजपा नेताओं में जबरदस्त बेचैनी है। बहरहाल मुख्यमंत्री की यह स्वीकारोक्ति आने वाले दिनों में क्या रंग लेगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन आम लोगों में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया है।
आज की खबर
आज की खबर
१.डॉ dixit का कैम्प १८-२० नवम्बर को अरविंदो नेत्रालय पच्पेरी नाका में होगा . इस फ्री कैम्प में प्लास्टिक सर्जरी की जाएगी पिचले १२ सालों से यह कैंप आयोजित की जाती है .
२.सिंघानिया बिल्डकोन द्वारा फ़िल्मी सुपर स्टार शाहरुख खान को बुलाने की तैयारी है.
१.डॉ dixit का कैम्प १८-२० नवम्बर को अरविंदो नेत्रालय पच्पेरी नाका में होगा . इस फ्री कैम्प में प्लास्टिक सर्जरी की जाएगी पिचले १२ सालों से यह कैंप आयोजित की जाती है .
२.सिंघानिया बिल्डकोन द्वारा फ़िल्मी सुपर स्टार शाहरुख खान को बुलाने की तैयारी है.
| नियंत्रण महालेखा के १५० वी वर्षगांठ पर विश्वविद्यालय सभा भवन में कार्यक्रम का उदघाटन महामहिम राज्यपाल ने किया . |
| विश्वविद्यालय कर्मचारियों की हड़ताल आज चौथे दिन भी जरी रही |
| महापौर किरणमयी नायक ने रामसागर पारा का दौरा किया इस दौरान उन्होंने अवध निर्माण तोड़ने का निर्देश भी दिया |
| सिविल लाइन के एक हिस्से में गन्दगी का आलम |
| प्रदेश भर के बौने बंधू अपनी मांग को लेकर ५ दिसंबर को राजधानी रायपुर में जुटेंगे |
| बाल-दिवस पर बच्चों की खुशी |
सोमवार, 15 नवंबर 2010
आजादी... सिर्फ बोलने की...!
इस देश में आजादी सिर्फ बोलने बस की रह गई है। अब तो लोग थोड़े से चर्चित होने के बाद कुछ भी बोलने लगे हैं। सच से दूर भागने की प्रवृत्ति बढ़ गई है और आम आदमी सिर्फ बोल ही पा रहा है। सरकारें सुन नहीं रही है।
पिछले दिनों मुंबई में एक भवन निर्माण सोसायटी के घपले सामने आए तो सब बोलने लग गए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने अपना इस्तीफा अपने आका को सौंप दिया और मामला जांच में जा सिमटा। छत्तीसगढ़ में राज्य बनते ही चौतरफा लूट मची है। विकास के नाम पर जिस तरह से जल, जंगल और जमीन की बलि चढ़ाई जा रही है वह आने वाले दिनों के लिए खतरे का संकेत है। शहरी विकास ही सरकार की प्राथमिकता हो गई है। यही वजह है कि लोग थोड़ी सी सुविधा के लिए शहर की ओर पलायन करने लगे है। राजधानी रायपुर की आबादी राज्य बनने के बाद कई गुणा बढ़ गई। यातायात और प्रदूषण ने आम लोगों की तकलीफें बढ़ा दी है लेकिन एसी गाड़ी से लेकर बंगलों में रहने वाले मंत्री-विधायकों या शासकीय अफसरों को इसकी फ्रिक नहीं है।
वास्तव में देखा जाए तो सरकारी नीति ने असंतुलीत विकास को जन्म दिया है। लोग असंतोष में जी रहे हैं और यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में स्थिति भयावह होगी। सरकार के पास ग्रामीण विकास की कोई योजना नहीं है। आज भी छत्तीसगढ़ के अधिकांश गांवों में लोग उसी पानी में नहाने मजबूर हैं जहां जानवर नहाते हैं। नल का पानी तो छोड़ बिसलरी पीने वालों की जमात ने गांवों में पीने की साफ पानी की योजना भी नहीं बनाई है। कुछ बड़़े गांवों या कस्बों में नल हो गया है लेकिन आज भी दूषित पानी के सहारे जिन्दगी काटने को लोग मजबूर है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व स्वास्थ्य का सर्वाधिक बुरा हाल है। आज भी हाईस्कूल और स्वास्थ्य केन्द्र के लिए 10 से 20 किलोमीटर तक जाना पड़ता है। डाक्टर शहर छोडऩा नहीं चाहते और सरकार में इतनी ताकत नहीं है कि डाक्टरों को कस्बों तक भेज सके।
स्कूलों का तो भगवान मालिक है। कमीशन के चक्कर में बिल्डिंग तो बना दी गई लेकिन शिक्षकों का पता ही नहीं है। शिक्षा मंत्री से लेकर शिक्षा सचिवों में इतनी अक्ल ही नहीं है कि वे ग्रामीण शिक्षा के लिए कोई योजना बना सके। कहते हैं भारत गांवों में बसता है लेकिन सरकार को यह बात कभी समझ में आएगी यह कहना मुश्किल है। बुनियादी सुविधाओं के लालच में गांव का गांव शहर की ओर कूच कर रहा है और शहर बदहाल होता जा रहा है। सरकार शहरी पलायन की इस बढ़ती समस्या को रोकने का उपाय करे अन्यथा विकास का यह असंतुलन एक ऐसे समाज को जन्म देगा जहां शालिनता पीछे छूट जाएगी।
पिछले दिनों मुंबई में एक भवन निर्माण सोसायटी के घपले सामने आए तो सब बोलने लग गए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने अपना इस्तीफा अपने आका को सौंप दिया और मामला जांच में जा सिमटा। छत्तीसगढ़ में राज्य बनते ही चौतरफा लूट मची है। विकास के नाम पर जिस तरह से जल, जंगल और जमीन की बलि चढ़ाई जा रही है वह आने वाले दिनों के लिए खतरे का संकेत है। शहरी विकास ही सरकार की प्राथमिकता हो गई है। यही वजह है कि लोग थोड़ी सी सुविधा के लिए शहर की ओर पलायन करने लगे है। राजधानी रायपुर की आबादी राज्य बनने के बाद कई गुणा बढ़ गई। यातायात और प्रदूषण ने आम लोगों की तकलीफें बढ़ा दी है लेकिन एसी गाड़ी से लेकर बंगलों में रहने वाले मंत्री-विधायकों या शासकीय अफसरों को इसकी फ्रिक नहीं है।
वास्तव में देखा जाए तो सरकारी नीति ने असंतुलीत विकास को जन्म दिया है। लोग असंतोष में जी रहे हैं और यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में स्थिति भयावह होगी। सरकार के पास ग्रामीण विकास की कोई योजना नहीं है। आज भी छत्तीसगढ़ के अधिकांश गांवों में लोग उसी पानी में नहाने मजबूर हैं जहां जानवर नहाते हैं। नल का पानी तो छोड़ बिसलरी पीने वालों की जमात ने गांवों में पीने की साफ पानी की योजना भी नहीं बनाई है। कुछ बड़़े गांवों या कस्बों में नल हो गया है लेकिन आज भी दूषित पानी के सहारे जिन्दगी काटने को लोग मजबूर है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व स्वास्थ्य का सर्वाधिक बुरा हाल है। आज भी हाईस्कूल और स्वास्थ्य केन्द्र के लिए 10 से 20 किलोमीटर तक जाना पड़ता है। डाक्टर शहर छोडऩा नहीं चाहते और सरकार में इतनी ताकत नहीं है कि डाक्टरों को कस्बों तक भेज सके।
स्कूलों का तो भगवान मालिक है। कमीशन के चक्कर में बिल्डिंग तो बना दी गई लेकिन शिक्षकों का पता ही नहीं है। शिक्षा मंत्री से लेकर शिक्षा सचिवों में इतनी अक्ल ही नहीं है कि वे ग्रामीण शिक्षा के लिए कोई योजना बना सके। कहते हैं भारत गांवों में बसता है लेकिन सरकार को यह बात कभी समझ में आएगी यह कहना मुश्किल है। बुनियादी सुविधाओं के लालच में गांव का गांव शहर की ओर कूच कर रहा है और शहर बदहाल होता जा रहा है। सरकार शहरी पलायन की इस बढ़ती समस्या को रोकने का उपाय करे अन्यथा विकास का यह असंतुलन एक ऐसे समाज को जन्म देगा जहां शालिनता पीछे छूट जाएगी।
रविवार, 14 नवंबर 2010
पता नहीं बेटा!
बेटा- प्रदेश के दमदार मंत्री ने दीपावली में खूब लिफाफे और एलईडी बांटी है?
पिताजी- हां बेटा! पत्रकारों को नहीं मिला है वे काफी नाराज है।
बेटा- तो क्या सिर्फ संपादकों को ही बांटा गया है।
पिताजी- पता नहीं बेटा!
---------
बेटा- कालिख कांड में अजीत जोगी का नाम सामने आया है।
पिताजी- हां बेटा! संगठन की रिपोर्ट तो ऐसा ही कुछ होना बताया जा रहा है?
बेटा- तो क्या यह सही रिपोर्ट नहीं है।
पिताजी- पता नहीं बेटा!
पिताजी- हां बेटा! पत्रकारों को नहीं मिला है वे काफी नाराज है।
बेटा- तो क्या सिर्फ संपादकों को ही बांटा गया है।
पिताजी- पता नहीं बेटा!
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बेटा- कालिख कांड में अजीत जोगी का नाम सामने आया है।
पिताजी- हां बेटा! संगठन की रिपोर्ट तो ऐसा ही कुछ होना बताया जा रहा है?
बेटा- तो क्या यह सही रिपोर्ट नहीं है।
पिताजी- पता नहीं बेटा!
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