गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

तहीं इज्जत नहीं करबे त दूसर ल का परे हे...


छत्तीसगढ़ राज बनगे अब छत्तीसगढ़ी भासा बर आंदोलन होवत हावय, विधानसभा ले लेके सड़क तक लड़ई चलत हे। स्कूल-कालेज म पढ़ाय के उदीम घलो होवत हावय फेर मामला ह हर घांव अटक जाथे।
कोनो भी राज के विकास बर उहां के भाखा-बोली के खास महत्व हे ए बात ल छत्तीसगढिय़ा मन ह कब समझही। जब तक अपन भाखा के इज्जत नहीं होही देश दुनिया म राज के इज्जत कइसे होही। गांव-गांव म रहवईया मन म हीन भावना आ जथे के वोला हिन्दी अऊ अंग्रेजी बने ढंग के नई अवय। अऊ जब कखरों म हीन भावना आ जथे त न वो ह बने ढंग के गोठियाय सकय न अपन परेशानी ल बताय सकय। तभे त अफसर मन तीर बोले म हिचकथे।
एखर सेती हमर मानना हे के जब तक छत्तीसगढ़ी ह सरकारी काम काज के भासा नहीं बनहीं छत्तीसगढिय़ा मन के विकास होना मुश्किल हे।
अतका छोटे से बात ल इहंा के नेता मन काबर नहीं समझय। वो मन काबर छत्तीसगढ़ी ले भागत हे। तउन समझ म नहीं आवय। वोट पाय बर छत्तीसगढ़ी बोलही अऊ जीत जही तहां ले मनमाने हिन्दी अंग्रेजी झाड़थे।
मोला हेमलाल के पीरा ह आज ले सुरता हे। बपरा ह नवा नवा सरपंच बने रीहिस। गांव के विकास के ओला अड़बड़ चिंता रीहिस। गांव के समस्या ल ले के मंत्री तीर गीस। मंत्री ह छत्तीसगढिय़ा हे फेर हेमलाल तीर अइसे हिन्दी झाड़त रीहिस के ओखर जी खिसियागे। सीधा सीधा कही दिस देख गा वोट मांगे बर आथस त छत्तीसगढ़ी म गोठियास आरस मंत्री बन गेस त तोर पॉवर हे अतेक बाढ़ गे। मोरेच तीर हिन्दी झाड़त हस अइसने तोर हाल रही त तोर नेतागिरी ह कब सिराही तहीं गम नहीं पावे।
उहां ले आके हेमलाल ह गांव वाला मन तीर अपन पीरा ल कतका नहीं गोठियाय रीहिस। अऊ आज हेमलाल के बात ह सिरतोकेच होगे। मंत्री ह चुनाव हार गे। ओखर अता पता नहीं हे।
रमन सरकार के हैर्टिक के शपथ ग्रहण म हिन्दी म हावथ लेवत देख आज मोला हेमलाल के गोठ-बात ह सुरता आगे। एक झन बृजमोहन अग्रवाल ल छोड़ कोनो छत्तीसगढ़ी म शपथ नहीं लीन। जेन बृजमोहन अग्रवाल ल सब झन परदेशिया कथे तेन ह छत्तीसगढ़ी म शपथ लीन अऊ जेन मन ह छत्तीसगढ़ी के नाम देश दुनिया म करना चाही तउन मन ह हिन्दी झाड़त रीहिन।
मैं ह हिन्दी भासा के विरोधी तो हंव न मोला हिन्दी बोलईया मन ले कोनो दिक्कत हे। हमर देश के भासा हे फेर मे हा अतका जानथौ के जेन ह अपन भासा के इज्जत नहीं करय वो भासा ह त समाप्त होही जथे ओखर संस्कृति ह घलो नस्ट हो जथे। अऊ वो ह इतिहास म पेढ़ के लइक रही जथे। जेन ह अपन भासा के इज्जत नहीं करय ओखर ईज्जत चलो कोनो नहीं करय।
अऊ इही हाल छत्तीसगढिय़ा नेता मन के रही त छत्तीसगढ़ के विकास कइसे होही। हमर जीयो अऊ जीयन दो के संस्कृति के का होही तेखर सेती समय रहत चेतावत हौ बाद म पछताय के सिवाय कुछु नहीं बाचहीं।

बुधवार, 18 दिसंबर 2013

महु ह पीएम बनहुं...


वो दिन निहाली ह बिहिनिया बिहिनिया घाम तापत बइठे रीहिस, ततके म ओखर नाती ह आगे, अऊ डोकरा उपर झपाके कहात हावय, ए बबा महु ह पीएम बनहु, महु ल पीएम बना दे, का का करे ल पड़ही बता देतेस त वइसने वइसने कर दुहुं।
 ओखर गोठ-बात ल सुन के वो तीर जतका झन रीहिस ततका जम्मो झन हांस डारिन, फेर सरजू ह कीहिस अबे ते हा बने बढ़ लिख ले बड़े बन जा तब पीएम बनबे, अभी त तोर उमर ह नहीं होय हावय, पीएम बने बर पढ़ई लिखई के संग चुनाव घलो जीते ल पड़थे।
  फेर निहाली के नाती कहां मानने वाला हे वो ह कहे लागीस। हमर देस के पीएम मनमोहन सिंह ह त कभु चुनाव नहीं लड़े हे फेर कइसे बनगे। वोला कोन समझातीस।
 बात ल टारे बर जीवराखन ह कही दिस, जा भाग एमेर ले बड़े-बड़े तीर नहीं लागय।  फेर वोहा कहां मानने वाला हे जतका रेडिया  टीवी म सुने हे ततके ल बपरा ह जानथे। कहे लागीस वाह महु ल पीएम बनना हे। भाजपा वाला मन ह नरेन्द्र मोदी ल पीएम बना दे हावय अऊ कांग्रेस  ह घलो राहुल गांधी ल पीएम बनाबो काहत हे। ए बबा मोला ते हा पीएम बना दे न गा। तोर का बिगड़ही तेहा हौ कहा तहा ले सब  ल मै ह मना लुहु। मोरो टीवी म  फोटो आही। मे ह टीवी म देख देख के जान डारे हौ पीएम कइसे बनथे। फेर वोला कोनो समझा नहीं सकीस, साफ कही दिस वोखर संग पढ़ईया जम्मो लइका मन ह तैयार हे। वो ह किलास म का स्कूल म अउवल आथे अब त गांव वाला मन ह घलो कथे के निहाली के नाती अड़बड़ होशियार हे। निहाली के नाती के जिद ह बाढ़तेच जात रीहिस पढ़ई लिखई ल छोड़ ओखर पूरा ध्यान ह पीएम म लग गे।
खवई पीडई, खेलई, कुदई सब ल भुला दे हावय एकेच ढन रट लगाय हावय सब झन ह टीवी वाला ल कहाव के निहाली के नाती समारू ह पीएम हे। ओखरे फोटो छपही। गांव वाला मन असकटा गे त भुलवारे बर वोला कही दिस ले आज ले तै पीएम होगेस। अतका ल सुन के समारू ह खुश होगे हावय अऊ स्कूल मर म तावत रथे मैं पीएम बनगेव मैं पीएम बनगेव। अब वोलो कोन  समझावय के पीएम का होथे। भाजपा ह एखर पहिली लालकृष्ण आडवानी ल पीएम इन वेटिंग घोषित करें रीहिस, आज तक बपरा ह वेटिंग म लगे हे।

बुधवार, 11 दिसंबर 2013

आप की चुनौति...


रायपुर। कांग्रेस और भाजपा की अडिय़ल रूख से पैदा हुई आम आदमी पार्टी ने जो अप्रत्याशित सफलता पाई है उससे एक बात तो तय है कि भारतीय जन मानस का दोनों ही बड़ी पार्टी से विश्वास टूटा है वहा आज भी राजनीति में उच्च आदर्श के सिद्धांत की न केवल  उम्मीद करती है बल्कि अपनी उम्मीद को साकर करने के किसी भी मौके को छोडऩा नहीं चाहती।
जन लोकपाल बिल को लेकर दिल्ली से शुरू हुई लड़ाई को जब गां-कस्बों में समर्थन मिले लगा तब भी इसे नौटंकी बताने वालों की कमी नहीं रही। कांग्रेस ने तो अन्ना के जनलोकपाल को सिरे से नकारा ही भाजपा की भूमिका भी संदिग्ध हो गई। संसद में पहुंचकर जन लोकपाल बनाने की चुनौती को स्वीकार करने वाले केजरीवाल को कम आंकना दोनों ही दलों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला साबित हुआ और दिल्ली की जनता ने बता दिया कि वह सरकार से क्या उम्मीद रखती है।
आम आदमी पार्टी ने ििजस बेबाकी से सरकार बनाने के प्रस्ताव को नकारा है सही मायने में यह उच्च राजनैतिक सिद्धांत है जिसे इस देश की लगभग तमाम पार्टियों ने सत्ता की चाह में भुजला दिया है।
भाजपा और कांग्रेस ने गठबंधन की राजनीति में जो खेल खेला है उसे लोग नहीं भूल पाये है। राम मंदिर बनने से लेकर घारा  370 हटाने को लेकर वोट बटोरने के बाद सत्ता के लिए इन मुद्दों को त्यागना भाजपा के लिए आज भी  दाग बना हुुआ है।
 सत्ता के लिए सिद्धांतों से समझौते की परम्परा के बीच आम आदमी पाटीर्र के रूख को भले ही एक वर्ग अडिय़ल रवैया कह रहा हो पर सच तो यह है कि सिर्फ  सत्ता सुख के लिए  सिद्धांतों से समझौता न केवल अनुचित है बल्कि उन लोगों के साथ धोखा और बेईमानी है जिन लोगों ने मुद्दों की वजह से अनपा वोट और समर्थन दिया है।
इतिहास में ऐसे कितने ही उदाहरण है जब लोगों ने सिद्धांतों के आगे अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया पर वे किसी दबाव या प्रलोवन में टूटे नहीं है और वे इतिहास पुरूष बन गए है। इस  देश को आज गांधी के बाद ऐसे ही उच्च आदर्शवाले नेताओं की जरूरत है।
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में चल रहे सत्ता के खेल में स्वयं को दूर रख  एक नया आदर्श सावित किया है और हम उनसे ही ताय आदर्शो की उम्मीद करते है ताकि अब तक हो रही जनता से धोखाधड़ी बंद हो।
केजरीवाल और  उसकी पूरी पार्टी देश भर में लोकसभा का चुनाव लड़ रही है और यह कांग्रेस और भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबिह होगी। भले ही आज आम आदमी पार्टी पूरे देश बजूद को इंकार किया  जा रहा है और हमसे भी कई लोग इत्तेफाक नहीं रखते हो पर हम बता देना चाहते हैं कि आज भी इस देश में ऐसे लोगों की संख्या बहुत है जो अपने नेता में आदर्श ढूढंता है और इनकी संख्या किसी भी सरकार बनाने-बिगडऩे के लिए काफी है।

बुधवार, 27 नवंबर 2013

मोदी का नकली लाल किला भी काम नहीं आया


आदिवासियों पर लाठी चार्ज, भाजपा पर भारी!
बस्तर बराबरी पर तो सरगुजा में कांग्रेस आगे
रायपुर। आदिवासी सीटों के सहारे सत्ता तक दो बार पहुंची भाजपा के लिए इस बर सत्ता में वापसी में आदिवासी ही बाधा बन गये हैं। कहा जाता है कि आदिवासियों पर हुए लाठी चार्ज और नक्सली वारदातों का दर्द इस बार भाजपा पर भारी पडऩे लगा है ऐसे में मैदानी इलाके में वह क्या कर पाएगी कहना कठिन है।
छत्तीसगढ़ में सत्ता की चाबी अब तक बस्तर के पास रही है लेकिन बस्तर से जिस तरह की खबरें आ रही है उसके बाद इस बार सत्ता की चाबी सरगुजा के पास होने की प्रबल संभावना है।
अब तक रूझान से स्पष्ट हो गया है कि बस्तर में कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला बराबरी का है और इस बार भाजपा को यहां 5 से 6 सीटों का नुकसान हो सकता है। पिछले दो चुनावों में बस्तर की 12 में से 11 सीट जीतकर सत्ता में आने वाली भाजपा के कई मंत्री भी यहां कांटे की टक्कर में फंस कर रह गये हैं। सूत्रों की माने तो इस बार यहा कम्यूनिष्ट पार्टी भी एक सीट जीत सकती है ऐसे में इस बराबरी की वजह से सत्ता की चाबी इस बार दूसरे क्षेत्र में चली गई है।
इधर राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि बस्तर में बराबरी की टक्कर की वजह से इस बार सत्ता की चाबी सरगुजा के पास आ गई है जहां 14 में से 10 सीटों पर कांग्रेस की जीत निश्चित माना जा रहा है। जबकि दो सीटों पर कड़े संघर्ष की स्थिति हैं। मोदी के लिए नकली लाल किला बनाकर सत्ता हासिल करने में लगी भाजपा को सरगुजा में जबरदस्त झटका लगा है वह यहां 2003 के चुनाव में 9 व 2008 के चुनाव में 10 सीटे हासिल कर सत्ता में आई थी इस बार यहां कब्जा बनाए रखने भाजपा ने पुरजोर लगाया था। यहां तक की प्रधानमंत्री इन वेटिंग नरेन्द्र मोदी के लिए नकली लाल किला भी बनाकर चर्चा में आये थे लेकिन जिस तरह के रूझान सामने आ रहे हैं उसके बाद तो यही कहा जा सकता है कि यहां नरेन्द्र मोदी का सहारा भी काम नहीं आया।
यहां मिले रूझान के मुताबिक भाजपा भटगांव सीट सीधे सीत रही है जबकि मनेन्द्रगढ़ और प्रतापपुर में वह कांटे के संघर्ष में फंसी है। जिन सीटों पर कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही है उनमें बैंकुंठपुर वेदांती तिवारी, प्रेमनगर खेलसाय सिंह, रामानुजगंज बृहस्पति सिंह, सामरी डॉ. प्रीतम राम, लुंड्रा चिंतामणी महराज, अंबिकापुर टीएस सिंहदेव और सीतापुर अमरजीत भगत शामिल है। बताया जाता है कि भाजपा के बस्तर और सरगुजा संभाग में इस स्थिति के लिए कई कारण गिनाये जा रहे हैं जिनमें से प्रमुख कारण आदिवासियों पर लाठी चार्ज के अलावा कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के अलावा भाजपा के मौजूदा विधायकों की करतुत को बताया जा रहा है।
बहरहाल सरकार किसकी बनेगी यह तो बाद में ही पता चलेगा लेकिन यह तो तय है कि इस बार सत्ता की चाबी बस्तर ही होगी।

शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

रमन का अगला शिकार बैस


मुख्यमंत्री के दावेदार निपट रहे हैं पर एक-एक करके

विशेष प्रतिनिधि
रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा में जो कुछ हो रहा है वैसा पहले कभी राजनीति में नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह पर मुख्यमंत्री के दावेदारों क एक एक कर निपटाने का जो खेल चल रहा है वह हैरान कर देने वाला है। जिसने भी मुख्यमंत्री की दावेदारी की उसे हाशिये में डालने की कोशिश आश्चर्यजनक है। ताराचंद, करूणा शुक्ला के बाद अब अगला शिकार रमेश बैस हो तो अचरज नहीं होगा।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बारे में राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे जीतने सरल सौम्य व सीधे दिखते है वैसा वे है ही नहीं। राजनीति में माहिर रमन सिंह ने जब से मुख्यमंत्री पर संभाला है उनकी अपने प्रतिनिधियों पर नजर रहती है।
पहले कार्यकाल में डॉ. रमन सि ंह के कारनामों का विरोध करने वाले आदिवासी एक्सप्रेस की उन्होंने जिस बखुबी से हवा निकाली वह भले ही राजनैतिक सुझ बुझ कहा जाए लेकिन इसके बाद उन्होंने अपने विरोधियों के पर कतरने शिवराज सिंह, नंदकुमार साय और ताराचंद साहू को हाशिये पर लाने की कोशिश की शिवराज और नंदकुमार साय को इस कदर हाशिये पर डाला गया कि वे इससे उबर ही नहीं पा रहे है। जबकि स्व. दिलीप सिंह जुदेव ने सार्वजनिक रूप से रमन राज को प्रशासनिक आतंक की संज्ञा दी। स्व. ताराचंद साहू को तो पार्टी छोडऩे पर मजबूर कर दिया और  इसके बाद महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष करूणा शुक्ला इसलिए निशाने पर आये क्योंकि वे भी मुख्यमंत्री की प्रबल दावेदार होने लगी थी।
सूत्रों की माने तो करूणा शुक्ला को एक खेमे ने सांसद बनने से रोकते हुए जमकर भीतर घात किया और नितिन गडकरी के करीबी संचेती बंधुओं के कोल ब्लाक घोटाले में जब वे मुखर हुई उसी दिन से उन्हें हाशिये में डालने की जो कोशिश हुई उससे त्रस्त करूणा शुक्ला को मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा।
बताया जाता है कि कुर्र्सी के लिए जो जो नेता खतरा बनकर उभरे उन्हें बाटने की झाजिश को लेकर भाजपा में कई तरह के सवाल उठने लगे है और लोग भाजपा में चल रहे इस खेल को जोगी राज से भी खतरनाक मानने लगे हैं। भाजपा में अब इस बात की चर्चा है कि डॉ. रमन सिंह का अगला शिकार रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रमेश बैस होंगे? कहा जाता है कि रमन सिंह के खिलाफ जरा भी माहौल बिगड़ा तो रमेश बैस ही मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार है और वे दिल्ली में भी अच्छी पकड़ रखते हैं।
हालांकि कुछ लोग अगला शिकार के रूप में तेजी से उभर रही दुर्ग की सांसद सरोज पाण्डेय को भी बता रहे है और इन दिनों सरोज पाण्डेय को भी हाशिये में डालने की जबदस्त कोशिश हो रही है।
भाजपा में बड़े नेताओं को जिस तरह से हाशिये में डालने की कोशिश हो रही है वह आश्यर्च जनक है और यह खेल नहीं रूका तो आने वाले दिनों में भाजपा को मुसिबत बढ़ सकती है।
बहरहाल डॉ. रमन सिंह के सरल चेहरे के पीछे के सच को लेकर चल रही चर्चा थमने का नाम नहीं ले रहा है।
000

शनिवार, 9 नवंबर 2013

इहु बने काहत हे उहु बने गोठियात हे...



कांग्रेस ह देश ल बरबाद कर डारीस अऊ भाजपा ह प्रदेश ल बरबाद कर डारीस। याने सब सही होड़ा बाद होगे।
वो दिन बुढ़ा गार्डन म चरचा के इही सार रीहिस। भाजपाई मन ह कहात राहय नई देखत हस गा कांग्रेस ह कइसे देश ल बरबाद करत हावय। सरदार पटेल ह नई रहीतीस त ए देश ह एक होय पातीस। नेहरु अऊ गांधी के बस चलतीस त का का नई कर डारतीन। देख लेवव दिल्ली म बइठे सरकार ह कतका भ्रष्टाचार करत हावय। कोयला घोटाला, टू जी घोटाला अऊ वोट बैंक के राजनीति करत करत आतंकवादी मन ल पंदोली अलग देवत हावय। ए मन ल कुर्सी म बइठाहु त देश ल बेच खाहीं।
भाजपाई मन के गोठ बात ल सुन के रामलाल ह गुसिया गे अऊ केहे लागीस। जादा मत बात कर तुहु मन ल मौका दे रीहिन। का करवे पाकिस्तान ह कारगील ल छोड़ संसद भवन तक घुसर गे रीहिस अऊ आतंकवादी मन ल कंधार तक लेग के छोडिऩ हावय कोयला, पानी, बिजली, खेत, बांध, नदिया-नरवा कुछु बेचे ल बाचे हावय। नक्सली मन ले सेटिंग करथव। कांग्रेसी मन ल मरवा देथव। कलेक्टर ल छोड़वा देथव। तुंहर नेता मन ह भ्रष्टाचार म अतका रमावत हे जानो मानो मरही तभो संग म अपन संपत्ति ल लेके जाही।
तभे रामसिंह ह देखीस के मामला ह बाढ़त हे बीच बचाव करे लागीस - छोड़ न ग तुमन काबर लड़थव। कोनो दुध के धुले नहीं हे। दुनो पार्टी के नेता मन के इही हाल हे। तभे तो वो दिन नरेन्द्र मोदी ह कीहिस के कांग्रेस ह देश ल बरबाद करत हे त राहुल गांधी ह पचास ठन उदाहरण देके बतादीस के भाजपा ह कइसे प्रदेश ल बरबाद करत हावय।
समारु ह वो दिन त कहतेच रीहिस। कोनो ल देश के प्रदेश के चिंता नई हे सब ल सत्ता म कइसे बइठन तेखरे चिंता हे। वो ह हर चुनाव म अइसे कही के फारम ल भरथे फेर के झन वोला वोट देथे। कांग्रेस होय चाहे भाजपा दुनो पार्टी के नेता मन के जमीन जयजाद ल देख लेवव। मनमाने बाढ़त हे। एक दुसर ल गारी देके जनता ल बेंझारत हावयं। इखर मन बर नियम कानून कुछु नई हे। तै मैं गलती से कुछु करबो त फंस जाबो एमन ह कुछु कर डारय इंखर कुछुच नई बिगडय़।
दुनो पार्टी के नेता मन ह अअइसे गोठियाथे जानो मानो इंखर ले ईमानदार कोनो नई हे। तभे त वो दिन ईतवारी ह नई काहत रीहिस जतका चुनाव म मिलथे ले लेवव बाद म कुछु नई मिलय। अपन टुरा ल कमाय बर पढ़ा लिखा के बंबई भेज दे हावय अऊ इहां गरीबी रेखा के कार्ड बना के किंदर-किंदर के मेछरावत रथे। पहिली वो ह कतका हमर राज हमर राज काहत रहाय आजकल जेती पइसा देखथे तेती नाचत रथे। कुछु कबे तहां ले मुच ले हांस देथे अऊ अतके कथे छोड़ न गा जमाना के साथ चलना चाही। न कांग्रेस ह गलत कहीथे न भाजपा ह गलत कथे। जम्मोझन त वइसनेच हे। अपन खुन ल काबर सुखाववं।

बुधवार, 6 नवंबर 2013

गडकरी की सभा को लेकर कई भाजपाई नाराज


कोल ब्लाक का मामला गरमाने का खतरा....
विशेष प्रतिनिधि
रायपुर। प्रदेश भाजपा में अपने पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी की सभा को लेकर विवाद होने की खबर है। इस चुनावी समय में गडकरी जैसे विवादास्पद नेता की सभा को लेकर न केवल भाजपाईयों में नाराजगी है बल्कि इसे विनाश काले विपरीत बुद्धि की संज्ञा भी देने लगे हैं।
छत्तीसगढ़ भाजपा ने विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए जिन राष्ट्रीय नेताओं को छत्तीसगढ़ बुलाया है उनमें पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी भी शामिल है और इस नाम को लेकर कई नेताओं ने न केवल आश्चर्य जताया है बल्कि नाराजगी भी व्यक्त किये जाने की चर्चा है।
ज्ञात हो कि नितिन गडकरी को संघ का पसंदीदा नेता माना जाता है और उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये रखने संघ के दबाव के चलते भाजपा के संविधान तक में संशोधन किये जाने की चर्चा रही है।
सूत्रों की माने तो नितिन गडकरी को लेकर  डॉ. रमन सिंह की नजदीकियों को लेकर भी कई तरह की चचा्र है। कैग ने भटगांव कोल ब्लॉक आबंटन को लेकर रमन सरकार पर उंगली उठाई हे। इस कोल ब्लॉक का ठेका लेने वाले संचेती ब्रदर्स का नितिन गडकरी से संबंध रहा है। कांग्रेस ने तो इस मामले में डॉ. रमन सिंह पर गंभीर आरोप लगाये हैं और कहा जाता है कि डॉ. रमन सिंह ने अपने तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष को खुश करने संचेती ब्रदर्स को भटगांव कोल ब्लॉक उपहार में दिया था। इतना ही नहीं इस आबंटन से छत्तीसगढ़ को एक हजार 52 करोड़ का घाटा कैग ने बताया है। जबकि 49 प्रतिशत शेयर होने के बाद भी कंपनी को एमडी का पद दे दिया गया था।
ज्ञात हो कि इस मामले के बाद नितिन गडकरी की कंपनी की कई घोटाले उजागर हुए थे। आप पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल के खुलासे के बाद नितिन गडकरी को पार्टी अध्यक्ष का पद तक खोना पड़ा था।
घपले-घोटाले को लेकर चर्चित नितिन गडकरी को चुनाव के दौरान सभा के लिए बुलाने को लेकर भाजपा में विवाद तो बनी है लेकिन इसे हवा नहीं दी जा रही है। बल्कि विरोध के स्वर को अनुशासन के डंडे से हकाला जा रहा है।
इधर कांग्रेस ने भी नितिन गड़करी को बुलाये जाने को लेकर डॉ. रमन सिंह पर तीखा हमला करते हुए यहां तक कह दिया है कि इससे भाजपा का छत्तीसगढ़ के प्रति रवैया क्या है रमन सिंह किस तरह का छत्तीसगढ़ चाहते हैं यह स्पष्ट होने लगा है।
बहरहाल नितिन गडकरी की सभा को लेकर भाजपा फंसते नजर आ रही है अब देखना है कि नितिन की सभा के बाद क्या कुछ होता है।