गुरुवार, 25 जुलाई 2024

योगी के ख़िलाफ़ ऐसा षड़यंत्र…

 मोदी के बाद योगी'

पर लग रहा पलीता.


लोकसभा चुनाव में उत्तरप्रदेश में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी से ज्यादा बेचैन संघ है लेकिन मोदी के आगे घुटने टेक चुके संघ प्रमुख की दिक्कत यह है कि वे इस बात का विरोध भी नहीं पा रहे हैं कि आखिर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इतनी छिछालेदर क्यों की जा रही है।

दरअसल योगी आदित्यनाथ पर प्रहार तो लोकसभा चुनाव के बहुत पहले जब उत्तरप्रदेश में विधानसभा का चुनाव हुआ था तभी से योगी के खिलाफ षड़यंत्र शुरु हो चुका था। और इसकी एक मात्र वजह सोशल मीडिया में चलने वाला वह नारा था 'मोदी के बाद योगी।

इस नारे से भाजपा के गुजराती लॉबी में बेचैनी की खबर आने लगी। तब सवाल यह था कि आख़िर मोदी के बाद योगी वाले नारे से किसे दिक़्क़त थी और यह नारा किसे सबसे  ज्यादा परेशान कर रहा है।

क्या वे लोग परेशान हैं जो योगी के मुख्यमंत्री बनने से पहले अमित शाह को प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे या ख़ुद अमित शाह।

यह गंभीर सवाल है, जिसका जवाब सीधे कोई नहीं देना चाहेगा। लेकिन उत्तरप्रदेश में अमित शाह के बढ़ते हस्तक्षेप की जो चर्चा रही, उससे यह समझा जा सनता है कि योगी के बढ़ते कद को कौन रोक रहा था या किसे दिक़्क़त है…?

तब लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद केशव‌प्रसाद मोर्या को क्या आगे ला कर फिर योगी को बदनाम करने की कोशिश हो रही है?

लेकिन भाजपा के सामने सबसे बड़ी दिक्कत आज भी संघ है। क्योंकि कहा जा है कि यदि संघ ने इस मामले में कड़ा रुख़ अख़्तियार नहीं करता तो योगी बहुत पहले ही हटा दिये जाते।तब मोदी के प्रभाव का डंका भी बज रहा था।

लेकिन अब बदली हुई परिस्थिति में योगी को हटा पाना इसलिए मुश्किल है क्योंकि लोकसभा के परिणाम से साफ़ है कि अब मोदी के चेहरे से यूपी में चुनाव नहीं जीता जा सकता?

हालोकि भाजपा के भीतर खाने में चर्चा यह भी है कि योगी को बचाने में संघ की भूमिका केवल बतौलेबाजी है। असल बात तो यह है कि मोदी-शाह भी जानते और मानते हैं कि उत्तरप्रदेश में योगी से बड़ा न तो कोई बड़ा नेता है और न ही किसी भाजपा नेता में वह दम है कि उत्तरप्रदेश में सरकार अपने बूते पर बना ले।

तब क्या यह पूरा खेल योगी को हटाने नहीं बल्कि योगी की छवि को बिगाड़‌ने का है ताकि मोदी के बाद योगी के नारे पर पलीता लग जाए?

मंत्री पद जाने का असर…

 मंत्री पद से  इस्तीफ़ा का असर...


कहा जाता है कि मंत्री पद का अपना जलवा है और मंत्री पद के साथ मिलने वाली सुविधा का अपना मिजाज । और मंत्री पद ही छिन जाये तो सबसे ज्यादा परिवार वालों पर इसका असर होता है। बंगला छिने जाने का असर के कई किस्से है। और नेता के परिवार वालों का बंगला छिने जाने के बाद बंगले के दीवार, खंभे से लिपटकर रोने के भी किसे चर्चा में रहे हैं। तो चेहरे से हंसी गायब हो जाने और भूख नहीं लगने , कुछ भी अच्छा नहीं लगने के किस्से भी जान चर्चा में रहे हैं। 

ऐसे में रायपुर के सांसद बने बृजमोहन अग्रवाल के मंत्री पद से इस्तीफा का असर भी जनचर्चा में है।

बड़े भाई गोपाल अग्रवाल ने तो सोशल मीडिया में अपना तेवर भी दिखाना शुरू कर दिया है। 



वे लगातार भाजपा की सरकार को कोस रहे हैं। जबकि वे खाटी संघी है और महानगर प्रमुख भी रह चुके हैं। पहले वे मीडिल क्लास की तकलीफ के बहाने गरियाते रहे तो अब बजट पर को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

दूसरे छोटे माई योगेश आग्वाल के अपने ही क़िस्से हैं। चला मुरारी हीरो बनने की तर्ज़ पर कवर्धा कांड  के किस्से तो सभी जानते ही हैं कि होटल में क्या क्या हुआ अब चेंबर की बैठक में उनके हरकतों को तिलमिलाहट की संज्ञा दी जा रही है। क्योंकि चेम्बर चुनाव में मोहन सेठ की सत्तावाली ताकत के बाद भी वे बुरी तरह हार गये थे।

एक और छोटे भाई तो रायपुर दक्षिण से विधायक बनने का सपना ही पाल लिया है और कहा जा रह है कि पत्रकारों से अपनी दावेदारी को सबसे सक्षम बताने और मोहन सेठ का सही उत्तराधिकारी बताने में लग गये है। इस सबसे  दूर यशवंत का मिजाज भी कम चर्चा में नहीं है उनके इस तरह से राजनीति से दूरी पर कई तरह की चर्चा है जो पारिवारिक बताया जा रहा है।

यानी मंत्री पद चले जाने का असर इस तरह चर्चा में है।।

बुधवार, 24 जुलाई 2024

सुप्रीम फ़ैसले ने गाल पर तमाचे से बचा लिया…

 नीट मामले में सुप्रीम फैसले का यह सच जानकर होश उड़ जायेंगे...


पता नहीं यह बात किसने कही है कि आपकी सड़‌क जब तक खामोश रहेगी संसद और उसके तंत्र अवारा होकर आपकों खुल्ला सांड की तरह अपनी सींगों से बिंधते रहेगें।

यह कड़‌वा सच भयावह भी है और डराने वाला भी।  NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या इस हकीकत को बयां करने वाला नहीं है?

आख़िर क्या वजह थी कि सुप्रीम कोर्ट भी इस नीट पेपर लीक की परीक्षा रद्द नहीं कर सका। क्या यह इस फैसले ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के माथे पर  लगने वाले कालिख से बचाने वाला साबित नहीं हुआ।

25000 सीट और हर एक सीट के लिए औसतन २० लाख रुपये भी माने जाये तो यह खेल 50000000000 का मामला है।

सारे तथ्य चीख चीख कर कह रहे थे  कि पेपर लीक हुआ है और इस घपले को दबाने के लिए परीक्षा परिणाम की घोषणा तब की गई जब समूचा देश लोकसभा चुनाव के परिणाम में व्यस्त था। क्या परिक्षा परिणाप का समय भी सुप्रीम कोर्ट ने अनदेखा किया।

कितने ही तथ्य है जो कह रहे थे कि परीक्षा परिणाम रद्द कर फिर से परीक्षा आयोजित किया जाना चाहिए। NTA, शिक्षा' माफिया के साथ पूरा सरकारी तंत्र की संलिप्तता स्पष्ट दिखाई देने के बावजूद यह फैसला क्या न्याय है।

तथ्य जो सामने है…

*67 छात्र- 720 में 720 अंक, इनमें से 8 छात्र एक ही सेंटर के.इससे पहले एक बार में 4 छात्र ही यह कीर्तिमान कर पाये थे.

*5 मई को NEET 2024 की परीक्षा हुई थी जिसका परिणाम 14 जून को आना था. लेकिन यह परिणाम 10 दिन पहले 4 जून को ही निकाल दिये गये, जिस दिन  लोकसभा चुनाव के नतीजे आ रहे थे. चुनाव परिणाम की आड़ में क्या छुपाना था? 

*परीक्षा कराने वाली सरकारी एजेंसी NTA संदेह के घेरे में है. इम्तिहान से  ठीक 24 दिन पहले 9 और 10 अप्रैल को एप्लीकेशन विंडो को फिर खोला गया था. बाद में Form correction के नाम एक बार फिर से window  खोला गया.  ऐसा क्यों किया गया, 24246 बच्चों ने तब फॉर्म भरा, उनमें से कितने कौन से सेंटर के थे, उनमें से कितनों का सेलेक्शन हुआ? इनमें से किनके कितने मार्क्स थे? 

*रांची से पटना पुलिस को इनपुट गया- एक डस्टर गाड़ी की तलाशी ली गई- 4 May  को पटना में NEET पेपरलीक की खबर, प्रश्नपत्र की बरामदगी, एक परिक्षार्थी की रात में प्रश्नपत्र मिलने की स्विकारोक्ती और  बिहार के 3 जिले से solver gang के 19 आरोपियों की गिरफ्तारी. अन्य राज्यों में भी अभ्यर्थियों के बदले परीक्षा देने वालों की गिरफ्तारी हुई.

*सवाई माधोपुर, राजस्थान में भी एक परिक्षार्थी ने स्विकारोक्ती दी कि उसे 4 की रात हूबहू प्रश्नपत्र हासिल हो गया था.

*बिहार, उड़ीसा, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक आदि से कई  छात्रों का सेंटर 1000-1500 किलोमीटर दूर गुजरात के गोधरा में. ये कमाल कैसे? 

*गोधरा में ही, 5 मई से पहले NEET परीक्षार्थियों की 10-10 लाख में गैरकानूनी मदद कर रहे एक एजुकेशनल कंसलटेंसी के मालिक पुरुषोत्तम राय, एक स्कूल शिक्षक एवं सुपरवाइजर तुषार भट्ट और भाजपा का एक नेता आरिफ बोहरा सहित 5 लोगों को पुलिस और कलेक्टर ने detain किया. DM ने कहा है कि solver gang  के साथ  करोड़ों के ट्राजेक्शन के सबूत हैं. गुजरात में ही एक छात्र  cbse में फेल (physiscs theory paper में 1 नं), पर   NEET में 715, कमाल पर कमाल!! 

*हरियाणा के झज्जर परिक्षा केंद्र पर बिना सरनेम के  8 छात्रों का केंद्र और सभी टॉपर. यह भी कमाल कैसे? और कुल मिलाकर 67 टॉपर - 720 /720, 718, 719. असंभव!!!! 

*67 टॉपर में से 44 को Physics  का एक सवाल गलत होने के कारण ग्रेस मार्क्स दिया गया जबकि 2018 के बाद छपी किताब के अनुसार वह सवाल सही है. 

*पटना पुलिस द्वारा आपराधिक विवेचना हेतु मांगे जाने के बाद भी NTA द्वारा प्रश्न पत्र का मिलान नहीं किया गया, जबकि 10 मिनट में मिलान करके बता सकता था कि यह प्रश्न पत्र NEET में पुछा गया प्रश्न पत्र है या नहीं. हांलाकि पटना पुलिस ने forensic जांच द्वारा साबित कर दिया कि  यह ओरिजिनल प्रश्नपत्र है. बिहार पुलिस ने  NTA से 3 बार ओरिजिनल प्रश्नपत्र की मांग, लेकिन NTA ने सहयोग नहीं किया. क्यों? 

*NTA ने बताया कि झज्जर में 6 टॉपर को प्रश्नपत्र देरी से मिलने के कारण ग्रेस मार्क्स दिया गया. जबकि  स्कूल के प्रिंसिपल ने टीवी चैनल पर कहा कि कोई देरी नहीं हुई थी. यहाँ बंटे  MNOP सीरीज के शीट पुरे देश में कहीं नहीं बंटे. घोटाला यहाँ पकड़ें. पूरा NTA संलिप्त है.

*महाराष्ट्र सहित और भी कई सेंटर पर प्रश्नपत्र 20 - 60 मीनट देरी से मिलने की खबर आई थी.

*सवाल है कि देरी से प्रश्न पत्र मिलने के कारण ग्रेस मार्क्स देने का कोई कानून न होने के बावजूद आखिर किस फार्मूले के तहत NTA ने ग्रेस मार्क्स दिए? और अब कोर्ट में अपनी गलती मान ली. तो आखिर इस तरह का भ्रष्टाचार करने वाले  NTA को अपराध की सजा कौन देगा और कब तक मिल जाएगी? 

2015 में पेपर लीक के कारण CBSE से छीनकर NTA को  exam conduct  करने का अधिकार दिया गया था. अब क्या? 

सवाल तो इतने सारे हैं कि बिना यह जांच किए ही…

1.1 महीने बाद 9-10 अप्रैल को  window क्यों खोला

    गया, 

2.पटना प्रश्नपत्र लीक की FIR की जांच पूरी किए बिना,

    झज्जर और गोधरा कांड की FIR की जांच किएबिना,  

3.मार्क्स के अनुसार रैंक में हेराफेरी की जांच किये बिना, 

    फटे  OMR शीट की जांच किये बिना, OMR शीट के

    अनुसार कम  मार्क्स आने की जांच किये बिना, खाली

    OMR शीट भरे जाने की जाच किये बिना, 

4. असाधारण और अप्राकृतिक रूप से अबतक के 

     highest cut off marks  आने की जांच किये

     बिना, 

5. बारबार application window खोलने वाले,

     लगातार अपना बयान बदलने वाले और  गैरकानूनी

     तरीके से ग्रेस मार्क्स देने वाले NTA की जांच किये

     बिना

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कैसे 1567 ग्रेस मार्क्स पाए बच्चों में से  50 टॉपर सहित 1536 बच्चों के  re-exam का आदेश  दिया? 

*शिक्षा मंत्री ने NTA को क्यों क्लीन चिट दे दी बिना जांच के?भ्रष्टाचार करने वाले को ही जांच का जिम्मा कैसे दे दिया गया? चोर को ही चौकीदार बना दिया. इतनी हडबडी  किसको है और क्यों है? 

*पहले भी शिक्षा के  Don ने, नटवरलालों ने, माफियाओं ने  entrance exam में कई बार घपले किए हैं, मध्यप्रदेश के व्यापम का रहस्य नहीं खुला अब तक और आज नटवरलाल और शिक्षा माफियाओं ने, कई कोचिंग संस्थान ने  सरकारी तंत्र के साथ मिलकर एक जाल बुनकर अरबों का व्यपार खड़ा कर लिया है. 

*इस वर्ष, NEET 2024 के लिए कुल 24,06,079 अभ्यर्थी पंजीकृत हुए, जिनमें से 23,33,297 उम्मीदवार परीक्षा में उपस्थित हुए। NEET 2024 परीक्षा में कुल 1,316,268 अभ्यर्थी सफल रहे हैं। भारत में वर्तमान में 695 चिकित्सा कॉलेज हैं, जिनमें कुल 1,06,333 सीटें चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए प्राप्त हैं। इनमें से लगभग 55,648 सीटें सरकारी कॉलेजों में हैं, और 50,685 सीटें निजी MBBS कॉलेजों में हैं। 

सोचिये, 12 लाख अधिक रिजल्ट क्यों? ....प्राईवेट कालेज में एडमिशन के लिए अधिक से अधिक पैसे लेकर अभिभावकों की अंधी दौड़.

*गोधरा, गुजरात NEET घोटाले का सबसे बड़ा सेंटर है. सुप्रीम साहेब, आप सिर्फ गोधरा की जांच कर लेते, आपको देशव्यापी नेटवर्क का पता चल जाता. जी हां, व्यापम पूरे देश में व्याप्त हो गया है. 

गोधरा में खाली पेपर जमा' करवाए गए, बाद में खाली पेपर भरे गए और स्टूडेंट टॉप कर गया!!  मीडिया बता रहा है..

*क्यों कोर्ट NEET की काउंसलिंग बंद कर "कोर्ट मॉनिटरड जांच" नहीं करना चाहती थी? कोर्ट को जांच से क्या दिक़्क़त हो सकती थी?

पिछले 10 सालों में सैकड़ों  एग्जाम्स रद्द, सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में. द टाइम्स आफ इंडिया अखबार ने इन्वेस्टिगेट कर 41 एग्जाम्स में पेपर लिक की पोल खोली है. जी हाँ, पिछले 50 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाले देश में! 

अब तो संपूर्ण देश के करोड़ों छात्रों युवाओं के जीवन का प्रश्न है.

इस तथ्य के बाद भी सुप्रीम फैसले का क्या मतलब है, किसके साथ न्याय  हुआ?

अब तो उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे की तर्ज पर इस मु‌द्दे को उठाने वालों से ही माफी मांगने कहा जा रहा है।

बेशर्मी के इस दौर में एक बार फिर राफेल घोटाले की याद ताजा कर ही। 

मंगलवार, 23 जुलाई 2024

सीजी में भी निकला जियो का कबाड़ा…


 जियो का निकला कबाड़ा...

सीजी में भी कर रहे बॉय-बॉय… 

बीएसएनएल का टैरिफ़ प्लान जानिए 

पहले ही निजी टेलीकॉम कंपनियों से परेशान लोगों ने टैरिफ बढ़‌ाने के बाद जिस तरह से भारतीय दूर संचार BSNL की तरफ कूच कर रहे हैं, उससे सबसे ज्यादा नुकसान जियो को उठाना पड़ सकता है। कहा जा रहा है कि जियो द्वारा अपने टैरिफ़ प्लान में कीमत बढ़ाने अनंत अंबानी की शादी क्या रिश्ता है यह चर्चा का अलग मुद्दा है लेकिन कहा जा रहा है कि निजी कंपनियों के द्वारा कीमत बढ़ाई जाने के बाद बीएसएसएल की बल्ले-बल्ले हो गई है।

सूत्रों की माने तो पिछले एक सप्ताह में बीएसएनएल को लगभग एक करोड़ नये ग्राहक मिले है जिसमें सर्वाधिक ग्राहक बिहार यूपी और • महाराष्ट्र के है। वहीं सूत्रों का यह भी दावा है कि इस दौरान न केवल बीएसएनएल नये सिम तो बेचे ही है प्राईवेट कंपनी से पोर्ट कराकर बीएसएलएल आने वाले ग्राहकों की संख्या भी 80 लाख से अधिक हो गई है।

कहा तो यहां तक जा रहा है कि निजी कंपनियों में जियो, एयरतेल, वीआई के सामने ग्राहक बचाने की दिक़्क़त आ गई है और  इस निजी कंपनियों से छुटकारा पाने वालों में जीयो  के ग्राहरु सबसे ज्यादा है।

इधर बीएसएनएल और टाटा समूह के बीच करार होने के आलावा बीएसएनएल का वह टैरिफ प्लान है जो ग्राहकों को सस्ते दर पर सुविधा प्रदान कर रहा है।






ज्ञात हो कि निजी टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी को लेकर पहले ही उपभोक्ताओ में नाराज़गी थी ।

छत्तीसगढ़ से मिली जानकारी के मुताबिक भले ही जियों ने यहां के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सेटिंग कर केबल बिछाने का काम पूरा कर लिया हो लेकिन कहा जा रहा है कि नेटवर्क के प्राबलम से वे सर्वाधिक प्रभावित थे। रायपुर राजधानी से ही इस तरह की शिकायते लगातार आ रही थी। ऐसे में कीमत 20 से 25 फ़ीसदी बढ़ने से लोग और ज्यादा नाराज हो गये।

सूत्रों की माने तो केबल बिछाने के खेल को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे है और इस खेल में जिस तरह से नगर निगम और पालिका के अधिकारी शामिल थे, उसकी शिकायत भी की गई है।

इधर छत्तीसगढ़ में भी जियो को छोड़ने वाले ग्राहकों की संख्या सबसे ज्यादा है और अभी भी लतातार जियो को बॉय-बॉय करने का सिलसिला जारी है।

सोमवार, 22 जुलाई 2024

कालेज छात्रों को ड्रग्स का लत लगा रहा था संस्कारी संघी…

 कालेज छात्रों को ड्रग्स का लत लगा रहा था संस्कारी संघी…


अभी उत्तर प्रदेश के प्रयाग राज को एके 47 से दहलाने वाला भाजपा के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया को समय पूर्व रिहाई का मामला ठंडा भी नहीं हो पाया था कि अब गुजरात से यह खबर आ गई कि कालेज छात्रों में ड्रग्स का लत लगाने वाले संघ के स्वयं सेवक और हिन्दू युवा वाहिनी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विकास अहिर पकड़ा गया। वह अपना यह खेल आइसक्रीम पार्लर की आड़ में चला रहा था। योगी आदित्यनाथ से लेकर भाजपा के दिग्गजों के साल उनकी तस्बीर और फेसबुक प्रोफाईल ने संघ के संस्कार की पोल खोल कर रख दी है।


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ गुजरात की सूरत शहर पुलिस ने एक सनसनीखेज मामले में हिंदूवादी नेता और बीजेपी कार्यकर्ता विकास अहीर समेत दो अन्य को एमडी ड्रग बेचने के मामले में अरेस्ट किया है। सोशल मीडिया पर मौजूद प्रोफाइल के अनुसार विकास अहीर हिंदू युवा वाहिनी गुजरात प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष हैं। इसके साथ वह बीजेपी युवा मोर्चा से जुड़े हुए हैं। सूरत पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने प्रेस कांफ्रेंस करके शहर में एमडी ड्रग्स की बिक्री के मामले में पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी। गहलोत ने कहा कि सूरत में पहले ड्रग्स की खेप मुंबई से आती थी, लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद इस धंधे में लिप्त लोगों ने मॉड्स ऑपरेंडी में बदलाव किया है। अब राजस्थान से जरिए सूरत में ड्रग्स की बिक्री कर रहे हैं। पुलिस ने विकास अहीर के विकास के साथ चेतन साहू और अनीश खान पठान को गिरफ्तार किया है। पुलिस के इनके पास से 354 ग्राम एमडी ड्रग्स मिला है।

हिंदूवादी नेता की छवि 


सूरत पुलिस द्वारा ड्रग्स बेचने के मामले में गिरफ़्तार किए गए विकास अहीर ने सोशल मीडिया पर अपनी छवि एक हिंदू वादी नेता की बनाई है। एक्स पर अहीर ने अपने बॉयो में लिखा है कि पूर्व अध्यक्ष हिन्दू युवा वाहिनी गुजरात प्रदेश बताया है। इसके बाद अहीर ने खुद को बीजेपी युवा मोर्चा गुजरात से जुड़ा हुआ बताया है। अहीर ने बॉयो में खुद को आरएसएस को स्वयंसेवक भी बताया है। सूरत शहर पुलिस के अनुसार करीब एक महीने की होमवर्क और निगरानी के बाद तीनों आरोपियों को अरेस्ट किया गया है। पुलिस ने अनुसार पकड़े गए आरोपियों पर पहले भी कुल मामले दर्ज हैं। पुलिस ने अनुसार ड्रग्स राजस्थान के जरिए सूरत में लाया जा रहा था।

आप ने साधा निशाना 

एक तरफ जहां ड्रग्स बेचने के मामले में सूरत पुलिस ने पुलिस ने विकास अहीर और उसके 2 दोस्तों को अरेस्ट किया है तो वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया ने इस मुद्दे पर बीजेपी पर हमला बोला है। इटालिया ने लिखा है हिंदुत्व के नाम पर 2022 के चुनाव में यही टोली उनके घर पर पहुंची थी।सूरत पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने कहा है कि सामने आया है कि आरोपी आइसक्रीम पॉर्लर की आड़ में एमडी ड्रग्स का धंधा कर रहे थे। ये टू व्हीलर से डिलीवरी भी करते थे। गहलोत ने कहा पिछले कुछ समय में सूरत में ड्रग्स बेचने के 37 मामले में दर्ज किए गए हैं। इनमें कुल 85 आरोपियों को अरेस्ट किया है। गहलोत ने कहा एनडीपीएस एक्ट में अरेस्ट आरोपियों की संपत्ति की जांच भी जा रही है। अवैध और काली कमाई से अर्जित की गई संपत्ति को सील किया जाएगा।

अब योगी भी हत्यारे को सिर में नचायेंगे

 योगी चले मोदी की चाल 

अब हत्यारे को सिर में नचायेंगे !



गुजरात में बलात्कारियों का स्वागत सत्कार करने वाली संघ से संस्कारित पार्टी का अब उत्तरप्रदेश  में नया कारनामा सामने आया है। एके 47 रायफल से प्रयागराज के सिविल लाईन में बसपा विधायक जवाहर यादव सहित तीन लोगों को मौत की घाट उतार चुके पूर्व विधायक उद‌यमान करवरिया को अब योगी आदित्यनाज ने रिहाई करवा दी है। उदयभान करवरिया को प्रयागराज की एक अदालत ने उम्र क़ैद की सजा सुनाई थी। हालांकि योगी आदित्यनाथ का यह पहला कारनामा नहीं है। इससे पहले अमरमणि त्रिपाठी को भी समयपूर्व रिहा कर दिया गया था। और गुजरात में दर्जनभर बलात्कारियों और हत्या के आरोपियों  को समय पूर्व रिहाई के लिए तो सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा था | तो क्या योगी  आदित्यनाथ भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राह पर चल पड़े हैं।

कहा जाता है कि योगी आदित्यनाथ  सरकार की सिफ़ारिश के बाद राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश की जेल में चार साल से आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व BJP विधायक उदय भान करवरिया की रिहाई का आदेश दे दिया  है।1996 में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक जवाहर यादव की हत्या की गई थी. उसी मामले में चार साल पहले कोर्ट ने उदय भान को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. अब राज्य सरकार ने समय से बहुत पहले ही रिहाई का आदेश दे दिया है. पूरा मामला टाइमलाइन के हिसाब से समझ लेते हैं.

कहा जाता है कि 13 अगस्त, 1996 को प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके में कुछ लोगों ने मिलकर सपा विधायक की गाड़ी पर गोलीबारी कर दी थी. हमले में विधायक जवाहर यादव और दो अन्य लोगों की मौत हो गई. पुलिस जांच में पता चला कि हत्या राजनीतिक और व्यापारिक रंजिश के चलते की गई.फिर 4 नवंबर 2019 को प्रयागराज की एक अदालत ने उदय भान, उनके भाइयों सूरज भान और कपिल मुनि और उनके चाचा राम चंद्र को सपा विधायक जवाहर यादव की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई. तीनों दोषी फिलहाल प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं.


रविवार, 21 जुलाई 2024

गुजरात लॉबी का यह कैसा करतूत

 फिर जुड़‌ने लगा पीएमओ से तार…

गुजरात लॉबी का यह कैसा करतूत


इन दस सालों में का देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित्र शाह ने जो चक्रव्यूह रचा था, क्या उस चक्रव्यूह का खेल खत्म होने लगा है। पूंजी निवेश से लेकर बैंको के कर्जे ‌लेकर भागने का मामला हो या फिर भ्रष्टाचार के बड़े मामले, नीट पेपर लीक घोटाला हो या यूपीएससी का खेल ! आखिर सारे तार पीएमओ से क्यों जुड़ जाते है?

नीट पेपर लीक मामले में जिस तरह से गुजरात का गोधरा चर्चा में है। गोधरा के इस पेपर लीक मामले को लेकर हो रहे रोज खुलासे के बाद अब ट्रेनी आईएएस पूजा खेड्‌कर का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर गुजरात लॉबी ही नहीं पीएमओ पर भी उंगली उठने लगी है। और इस विवाद के बीच जिस ताह से यूपीएससी के अध्यक्ष मनोज सोनी का इस्तीफ़ा सामने आया है वह हैरान करने वाला तो है ही बल्कि मोदी सत्ता के उस निर्णय की नीयत पर उंगली उठाता है जिसके तहत दर्जनौ लोगों को प्रोफेशनल नियुप्ति के नाम पर कहीं सचिव बना दिया गया तो कहीं अध्यक्ष या डायरेक्टर ।

यश बॉस के इस दौर में यह जान लेना ज़रूरी है कि आखिर मनोज सोनी के इस्तीफ़े को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृह मंत्री अमित शाह क्यों निशाने पर है।

क्या मनोज सोनी का इस्तीफ़ा फर्जी प्रमाणपत्र, सत्ता और विशेषाधिकार का कथित दुरुपयोग के बाद जिस तरह से कई आईपीएस और आईएएस के चयन पर उठ रही उंगली है। लेकिन पहले ये जान ले कि मोदी-शाह क्यों निशाने पर है। गुजरात के रहने वाले मनोज सोनी का अभी पांच साल का कार्यकाल बाकी था। सोनी ने अपने इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। सोनी का कार्यकाल 2029 में पूरा होना था। मनोज सोनी आयोग में 2017 में बतौर सदस्य नियुक्त हुए थे। उन्होंने 16 मई, 2023 को अध्यक्ष के रूप में शपथ ली। ऐसे में उन्होंने बतौर अध्यक्ष सिर्फ करीब 13 महीने काम किया। मनोज सोनी गुजरात के आणंद जिले से ताल्लुक रखते हैं। उनका परिवार मुंबई से गुजरात शिफ्ट हुआ था। उन्होंने बचपन के दिनों में अगरबत्तियां तक बेंची।

द हिंदू' ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने लगभग एक महीने पहले इस्तीफा दे दिया था। सूत्रों के अनुसार वह गुजरात के शक्तिशाली स्वामीनारायण संप्रदाय की एक शाखा अनुपम मिशन को अधिक समय देना चाहते हैं। वह 2020 में दीक्षा प्राप्त करने के बाद मिशन में एक साधु या निष्काम कर्मयोगी बन गए थे। सोनी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है, जिन्होंने उन्हें 2005 में वडोदरा में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) के कुलपति के रूप में चुना था। तब वह 40 वर्ष के थे। जिससे वह देश के सबसे कम उम्र के कुलपति बन गए थे। जून 2017 में यूपीएससी में नियुक्ति से पहले सोनी ने बाबासाहेब अम्बेडकर मुक्त विश्वविद्यालय (बीएओयू) के 1 अगस्त 2009 से 31 जुलाई 2015 तक कुलपति रहे थे। इसके बाद वह अप्रैल 2005 से अप्रैल 2008 तक वडोदरा में स्थित महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा के कुलपति रहे थे। 

 सोनी गुजरात विधानमंडल के एक अधिनियम द्वारा गठित एक अर्ध-न्यायिक निकाय के सदस्य भी रह चुके हैं। मनोज सोनी की गिनती उन लोगों में होती है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र माने जाते हैं। पीएम मोदी ने मनोज सोनी के संघर्ष को देखते हुए ही मुख्यमंत्री रहते हुए एमएसयू के वीसी की जिम्मेदारी सौंपी थी। एमएसयू में मनोज सोनी के वीसी रहते हुए कई आंदोलन हुए थे, लेकिन उन्होंने नो कंप्राेमाइज का फॉर्मूला अपनाया था। आर्ट्स फैकल्टी में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों से जुड़े विवाद में वह काफी सुर्खियों में रहे थे। ऐसा कहा जाता है कि इस विवाद के चलते उन्हें एमएसयू में दूसरा कार्यकाल नहीं मिल पाया था, हालांकि मनोज सोनी को बाद में बाबासाहेब अम्बेडकर मुक्त विश्वविद्यालय (बीएओयू) का वीसी बनाया गया था।

तब सवाल यही है कि क्या प्रोफ़ेशनलों की नियुक्ति की वजह क्या है…?