रविवार, 11 जुलाई 2010

खिलाफ छापा तो नोटिस भिजवाई

इस सरकार में नौकरशाह किस कदर हावी है और मंत्रियों का संरक्षण उन्हें किस तरह मिल रहा है यह पर्यटन विभाग में पदस्थ अजय श्रीवास्तव द्वारा बुलंद छत्तीसगढ़ को भिजवाई नोटिस से देखा जा सकता है। इसके लिए उन्होंने विभाग से अनुमति ली है या नहीं यह जांच का विषय भी है।
ज्ञात हो कि बुलंद छत्तीसगढ़ ने दुग्ध संघ के इस कर्मचारी अजय श्रीवास्तव को प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा संरक्षण दिए जाने की खबर विस्तार से प्रकाशित की थी। खबर में सिमगा पुलिस द्वारा अजय श्रीवास्तव पर कालगर्ल की हत्या का अपराध भी दर्ज किया गया था। इसकी एफआईआर की कॉपी भी प्रकाशित की गई थी।
हमने यह भी बात प्रकाशित की थी। इस अजय श्रीवास्तव को जब बृजमोहन अग्रवाल गृहमंत्री थे तो पुलिस मुख्यालय में पदस्थ किए थे और जब पर्यटन मंत्री बने तो इन्हें पर्यटन विभाग में ले गए। अजय श्रीवास्तव की इस काबिलियत की हमें जानकारी नहीं थी कि वे इतने काबिल हैं कि जहां-जहां बृजमोहन अग्रवाल मंत्री बनेंगे वे उन विभागों में पदस्थ किए जाते रहेंगे। उन्होंने नोटिस में कहा है कि उच्च न्यायालय ने कालगर्ल मडर केस से अजय श्रीवास्तव का नाम हटा दिया है जबकि हमने इस खबर को छापने से पहले उनसे संपर्क की कोशिश भी की थी। बहरहाल यह एक उदाहरण है कि किस तरह से राजनैतिक पार्टियों के संरक्षण में शासकीय कर्मी काम कर रहे हैं बाबूलाल अग्रवाल की बहाली भी तो लोग अभी भूले नहीं है।

ईमानदारी की छवि बनाओं मुफ्त में सरकारी माल उड़ाओं

बाबूलाल और मिश्रा में कैसा अंतर
छत्तीसगढ़ में नैतिकता और ईमानदारी की छवि बनाकर किस तरह से सरकारी माल उड़ाने का खेल चल रहा है यह आईएएस डीएस मिश्रा को देखकर समझा जा सकता है। मिश्राजी के मंहगी सराकरी गाड़ी के मोह से बीज निगम के अधिकारियों को न केवल परेशानी हुई बल्कि नवनियुक्त अध्यक्ष श्याम बैस के लिए नई गाड़ी की जुगाड़ के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
वैसे तो सरकारी गाड़ी का उपयोग जिस बेशर्मी से नेता या अधिकारियों के परिवार वाले करते हैं यह किसी से छिपा नहीं है लेकिन यदि कोई अफसर ही इसका दुरुपयोग करे तो क्या कहना। छत्तीसगढ़ सरकार में अपनी ईमानदारी के लिए चर्चित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और राय में सचिव डीएस मिश्रा की कहानी भी कुछ अलग ही है। बीज निगम के प्रमुख रहते उनके कारनामें अब बाहर आने लगे हैं। ऐसे ही कारनामों में 13 लाख की करोला कार कार का मामला है। ऐम्बेसडर की बजाय बीज निगम के अधिकारियों ने प्रमुख की फरमाईश पर करोला कार दे दी। 13-14 लाख की यह कार निगम के पैसे से कैसे खरीदी गई इसकी कई कहानी है लेकिन कहा जाता है कि इस कार के प्रति मिश्रा साहब का मोह कुछ यादा ही बढ़ गया।
बताया जाता है कि जब तक वे बीज निगम में रहे इस कार का उपयोग करते रहे और जब वहां से हट गए तो अपने साथ कार को भी ले गए। अब बीज निगम में ऐसा कोई दमदार आदमी तो है नहीं जो इस कार को वापस मांग सके। इसलिए ईमानदारी के लिए विख्यात डीएस मिश्रा जी ही इस कार में इन दिनों सफर करते हैं। दुखद आश्चर्य की बात तो यह है कि श्याम बैस के अध्यक्ष बनने के बाद इस कार कार को वापस मंगाये जाने की बजाय उनके लिए नए कार खरीदे जाने की योजना बन रही है।
बहरहाल बीज निगम में डीएस मिश्रा की ईमानदारी की चर्चा जोर-शोर से होने लगी है जबकि बाहर की पार्टी को 20 करोड़ के सप्लाई का मामला खुलने की उम्मीद है।

शनिवार, 10 जुलाई 2010

पत्रिका के लिए पत्रकारों में भगदड़

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में फिर एक बड़े व नामी ग्रुप ने अखबार के प्रकाशन का निर्णय लिया है। अखबार पढ़ने वालों के लिए राजस्थान पत्रिका कोई नया नाम नहीं है। इसके आने की खबर तो महिनों से चल रही थी लेकिन अब जब नौकरी पर लोग रखे जाने लगे तब पत्रकारों को भरोसा हो गया कि पत्रिका अब आ ही जाएगी। पत्रिका से जुड़े लोगों को एक अच्छी टीम की तलाश है। इसका फायदा पत्रकारों ने उठाना भी शुरू कर दिया है। जमकर सौदेबाजी चल रही है वहीं अन्य अखबार के संपादक व मालिक भी सक्रिय हैं कि उनके लोग न जाए इसलिए पत्रकारों की अपने ही प्रेस में पूछ परख बढ़ गई है।
नवीन पहुंचे हरिभूमि
सालों से भास्कर में काम करने वाले नवीन शर्मा का भास्कर से मोह भंग हो गया वह अपने साथियों के साथ नेशनल लुक में जाने की बजाय हरिभूमि वाईन कर लिया। कहते हैं ग्रुप के अखबार बंद नहीं होंगे और लुक क्या ठीकाना है।
राजेश दुबे पत्रिका में
देशबंधु में जलवा दिखाने के बाद नई दुनिया में उपेक्षित रहे राजेश दुबे की पत्रिका वाईन करने की खबर है। खबर तो यहां के जबरदस्त तोड़फोड़ की भी है अब संपादक की गलती है कि मालिक की यह तो चर्चा का विषय है।
मोहन बने चीफ
चीफ की तरह शहर में चर्चित रहे पत्रकार मोहन राव को नवभारत में सिटी चीफ बना दिया गया है। अर्से से तबियत खराब होने की वजह से वे यादा भाग दौड़ नहीं कर पा रहे थे।
और अंत में....
मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले जनसंपर्क के अधिकारी ने मौखिक रुप से फरमान जारी कर दिया है कि खबरों पर नजर रखें और अखबार के मैनेजमेंट को हड़का के रखों। विभाग की खबरें छपने वाली नहीं तो खाओ-पियों मजे करो।

शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

डॉ रमन की मां की तस्वीर वाली हनुमान चालीसा भी वितरित...

पैसे व पद वाले ही करते हैं धर्म का अनादर
इतिहास गवाह है कि हिन्दू धर्म का अपमान जितना दूसरे धर्म के लोगों ने नहीं किया उससे यादा वे हिन्दू जो धनाडय व सत्ता मद में बैठे हैं, ने हिन्दूत्व का अपमान किया है। गीता के बाद हनुमान चालीसा में भी लोग अपने परिजनों का तस्वीर लगाकर बांट रहे हैं और यह काम प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह के द्वारा भी किए जाने की खबर है।
श्री भागवत गीता में स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर लगाकर इसे वितरित किए जाने पर धर्मग्रंथ का अपमान बताया जा रहा है और राजधानी ही नहीं बाहर के भी पुजारियों ने इस तरह के कृत्य को पाप माना है। श्री गीता की खबर छपते ही हमें लोगों ने हनुमान चालीसा लाकर दी जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की मां स्व. श्रीमती सुधा देवी सिंह की तस्वीर लगाई गई थी। इस हनुमान चालीसा को हमें देने वालों का दावा है कि श्री गीता में तस्वीर लगाने की बात तो कई लोगों को पता है लेकिन हनुमान चालीसा में इस तरह से तस्वीर लगाकर वितरित करने का यह पहला मामला है।
वैसे धर्म के मान्य परंपरा के अनुसार एक समय था जब श्री हनुमान जी के मंदिर में महिलाएं प्रवेश करने से हिचकिचाती थी और आज भी इस देश में कई ऐसे मंदिर हैं जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। हालांकि हनुमान चालीसा आयोजन समिति ने महिलाओं के हनुमान चालीसा पाठ पर प्रतिबंध को गलत बताया है। समिति का कहना है कि शास्त्रों में कहीं उल्लेख नहीं है इसलिए महिलाएं श्री हनुमान मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं।
दूसरी तरफ धर्मग्रंथों को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं और यह चर्चा का विषय है कि धर्म ग्रंथों का उपयोग आदमी अपने लिए किस तरह से कर सकता है। वर्तमान पीढ़ी में धर्मग्रंथों पर तस्वीर लगाने को लेकर पूरे देश में बहस किए जाने की जरूरत भी बताई जा रही है और इसी तरह से तस्वीर लगाकर धर्मग्रंथ वितरित किए जाने लगे तो धर्मग्रंथ के महत्व को लेकर भी बहस छिड़ सकती है। केवल हिन्दू धर्म ग्रंथों में ही इस तरह की छेड़छाड़ होने लगी है वह भी उन हिन्दूओं द्वारा जो या तो पैसे वाले हैं या उच्च पदों पर बैठे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस तरह के कार्य कितने उचित है।
हालांकि इस तरह के मामले में हिन्दू संगठनों की खामोशी आश्चर्यजनक है और अब तो उनके नियत पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या वे सिर्फ राजनैतिक फायदे के लिए हिन्दूत्व का इस्तेमाल करते हैं।

कहां हो मिस्टर मूणत...! फिर अवैध प्लांटिग हो रही है

मार्स कालोनाईजर का कारनामा!
अवैध प्लाटिंग के खिलाफ अभियान छेड़कर चर्चा में रहे नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत के नाक के नीचे बकायदा विज्ञापन निकालकर मास कालोनाईजर प्राईवेट लिमिटेड ने न केवल लोगों को धोखे में रखकर प्लाट बेच दी बल्कि उपर तक पैसा पहुंचाने का दावा करते शहर में घूम भी रहे हैं।
राजधानी के आसपास की जमीनों पर अवैध प्लाटिंग को लेकर राजेश मूणत ने न केवल अभियान चलाया था बल्कि कई परिवारों को छले जाने से भी बचाया था लेकिन कमल विहार योजना और गंज डबरी में मॉल बनाने के फेर में लगी सरकार की उदासीनता को लेकर फिर कई कालोनाईजरों ने अपने पैर पसारना शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक ताजा मामला मास कालोईनजर चला रहे आहूजा बंधुओं का है। मुजगहन में फेस टू बनाने के फेर में लगे आहूजा बंधुओं ने यहां बगैर ले आऊट पास किए साढ़े चार सौ रुपए फीट में प्लाट बेच दी वह भी बकायदा विज्ञापन निकालकर। प्लाट बेचने के मामले में ग्राहकों से धोखाधड़ी की चर्चा अब आम होने लगी है और प्लाट खरीदने वाले अब पछताने भी लगे हैं। यही नहीं टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से प्लाट स्वीकृत कराने भी घपलेबाजी की खबर है।
बताया जाता है कि इसकी शिकायत नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत से भी की गई है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि हमने इस मामले में सौदेबाजी की सच्चाई जानने मंत्री जी से फोन पर चर्चा करना चाहा लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। बहरहाल प्लेनेट सीटी के नाम पर लोगों को छले जाने और नगरीय निकाय मंत्री की भूमिका को लेकर कई तरह की चर्चा है और देखना है कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।

बुधवार, 7 जुलाई 2010

चापलूस पुलिसिये दूसरे विभाग में फिर कमी का रोना क्यों...?

एक तरफ छत्तीसगढ़ पुलिस में अफसरों की कमी का रोना रोया जा रहा है वहीं आधा दर्जन पुलिस अफसर दूसरे विभाग के मालदार विभाग में मलाई खाने में व्यस्त है। ऐसे में सरकार का कमी का रोना उसकी मानसिकता को ही प्रदर्शित करता है।
छत्तीसगढ़ में अफसर राज किस कदर हावी है यह किसी से छिपा नहीं है। गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने पहले ही एसपी को निकम्मा और कलेक्टर को दलाल कह कर पोल खोल चुके हैं ऊपर से जी हुजूरी और महिना पहुंचाने वाले पुलिस अफसर अन्य विभाग के मलाईदार पदों पर बैठकर चापलूसी की सारी सीमाएं लांघने में लगे हैं।
हाल ही में सरकार के तरफ से यह बयान आया कि पुलिस विभाग में अफसरों की कमी है आश्चर्य का विषय तो यह है कि जब पुलिस विभाग में अफसरों की कमी है तब इस विभाग के आधा दर्जन अफसरों को सरकार दूसरे विभाग में बिठाकर क्यों रखी है उन्हें मूल विभाग में वापस क्यों नहीं बुला लेती। सूत्रों का दावा है कि मलाईदार विभाग में अपने खास अफसरों को बिठाकर अपनी जेबें भरने की रणनीति के तहत ही प्रतिनियुक्ति का खेल खेला जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन पुलिस अफसरों को दूसरे विभाग में बिठाया गया हैं उनमें मुख्य रुप से राजीव श्रीवास्तव को संस्कृति विभाग में आर.पी. सिंग को खेल में अजात बहादुर शत्रु को परिवहन में बीएस मरावी मुख्य रुप से शामिल है। बहरहाल पुलिस अफसरों की कमी का रोना रोने को लेकर सरकार की यह नीति आश्चर्यजनक है और इसे लेकर आम लोगों में तीखी प्रतिक्रिया है।

मंगलवार, 6 जुलाई 2010

छापा पड़ा तो अखबार ने दुश्मनी भंजा ली...

तब विज्ञापन नहीं दिए अब भुगतो
शहर के एक प्रतिष्ठित दैनिक ने आयकर विभाग द्वारा की गई छापे की कार्रवाई की आड़ में जमकर दुश्मनी भुनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भारत को नया बनाने के चक्कर में लगे इस अखबार पर प्लांटेशन की आड़ में आम लोगों का करोड़ों रुपए हजम कर लेने का भी आरोप है।
छत्तीसगढ़ में व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा ने अखबारों का स्तर किस हद तक गिरा दिया है और मैनेजमेंट किस हद तक हावी है इसका उदाहरण हाल ही में बिल्डरों के खिलाफ आयकर विभाग द्वारा मारे गए छापों की खबरों से देखा जा सकता है। अखबार बेचने सनसनीखेज खबरें बनाने का आरोप तो मीडिया पर लगता ही रहा है लेकिन दुश्मनी भुनाने भ्रामक खबरें छापने की नई परम्परा भी शुरू हो गई है।
बताया जाता है कि आयकर विभाग ने भाजपा नेताओं के आरती बिल्डकान, कांग्रेस के अविनाश बिल्डर्स, अटलानी और रहेजा ग्रुप पर छापे की कार्रवाई की गई लेकिन इस छापे में भाजपा की सत्ता होने की वजह से राजीव अग्रवाल और छगन मूंदड़ा सर्वाधिक चर्चा में आए। बताया जाता है कि आम लोगों में अपनी विश्वसनियता की आड़ में एक अखबार ने आरती बिल्डकॉन के खिलाफ इसलिए अभियान छेड़ दिया क्योंकि इसने कभी इस अखबार पर विज्ञापन का रिस्पांस नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पैकेज में विज्ञापन देने से मना कर दिया और इसके प्रतिद्वंदी अखबार को विज्ञापन दिया।
खबरों को भ्रामक बनाते हुए आरती बिल्डकॉन के खिलाफ जमकर खबर प्रकाशित की गई और खबरें इस तरह बनाई गई कि लाकर जो मिले वो इन्ही ग्रुप के मिले। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक आरती बिल्डकॉन से केवल 1 लाकर मिला वह भी छगन मूंदड़ा के मां के नाम पर बैंक आफ बड़ौंदा का है छगन मूंदड़ा से 5 लाख केस बरामद हुआ जबकि यहां सोना नहीं मिला राजीव अग्रवाल से न कोई लाकर बरामद हुआ और न ही नगद रकम ही जब्त की गई। 700 ग्राम सोना जरूर जब्त हुआ वह भी बिस्किट की शक्ल में होने की वजह से। बताया जाता है कि बिल्डरों ने भारी रकम आयकर विभाग में सरेंडर की है और इस मामले में अभी भी कार्रवाई चल रही है।
हमारे सूत्रों के मुताबिक आरती बिल्डकॉन के खिलाफ किसी विमल के द्वारा लगातार की गई शिकायत पर कार्रवाई हुई और इस कार्रवाई में विमल के पार्टनर भी चपेट में आ गए। इधर कांग्रेस और भाजपा में भी यह मामला गर्म होता जा रहा है और दोनों ही दलों में इन बिल्डरों के विरोधी इन्हें पार्टी से निकालने में सक्रिय हो गए हैं।
बहरहाल छापे की कार्रवाई और इसके बाद छपी खबरों ने विज्ञापन की लालच में फंसे अखबार की प्रतिष्ठा पर आंच पहुंचाई है। कहा जाता है कि इस अखबार ने पार्षद चुनाव में भी पैकेज को लेकर महापौर किरणमयी नायक, सभापति संजय श्रीवास्तव और भाजपा प्रत्याशी विनोद अग्रवाल को भी परेशान कर चुके हैं।
मुसिबत के लिए रखे पैसे
ने मुसीबत बढ़ाई

बिल्डरों के यहां पड़े छापे में उन बिल्डरों की मुसीबत बढ़ा दी है जहां मोटी रकम बरामद हुई है। बताया जाता है कि पति से छिपा कर पैसा रखने की महिलाओं की प्रवृत्ति की वजह से बिल्डरों के घरों में मोटी रकम बरामद हुई। ऐसे ही एक बिल्डर की पत्नी ने कहा कि वे इसलिए थोड़ा-थोड़ा पैसा छिपाकर इकट्ठा रखती थी ताकि मुसीबत या अचानक जरूरत के समय काम आ सके लेकिन आयकर वालों की नजरों से ये पैसे नहीं बच सके।