सोमवार, 27 सितंबर 2010

मोहन ने ताकत दिखाई पर्यटन में फिर बुराई

अजय श्रीवास्तव हफ्तेभर में ही बहाल
 आईएफएस तपेश झा ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस पर्यटन विभाग को वे सुधारने की कोशिश में लगे हैं वहां मंत्री के प्रभाव से जमें लोगों को हटाना आसान नहीं है तभी तो निलंबन के हफ्ता भर के भीतर ही अजय श्रीवास्तव बहाल कर दिए गए और कई लोगों ने अपना तबादला रुकवा लिया।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल में जिस तरह से भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है वह अंयंत्र देखने को नहीं मिलेगा। बदनाम व विवादास्पद अधिकारियों की करतूत और भाई-भतीजावाद ने पर्यटन मंडल को दिवालिये के कगार पर खड़ा कर दिया है। एक से बढक़र एक घोटाले ने पर्यटन विभाग के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को भी कटघरे पर खड़ा कर दिया है।
यही वजह है कि जब यहां वन सेवा के अधिकारी तपेश झा को जब पर्यटन मंडल में लाया गया तो उन्होंने आते ही सबसे पहले पीआरओ अजय श्रीवास्तव को निलंबित किया वहीं सालों से जमें एमजी श्रीवास्तव को भी मंत्रालय चलता किया इसके अलावा आधा दर्जन लोगों के तबादले किए गए। अभी यह आदेश जारी ही हुआ था कि पर्यटन मंडल में हड़कम्प मच गया चूंकि अजय श्रीवास्तव को मंत्री का खास माना जाता है और दुग्ध संघ के मामूली कर्मचारी से पहले पुलिस और फिर पर्यटन में पीआरओं के पद पर नियुक्ति मंत्री के प्रभाव से ही माना जाता है इसलिए इस निलंबन आदेश से हड़कम्प मचना स्वाभाविक था। जबकि कई तरह के आरोपों से घिरे एमजी श्रीवास्तव को भी पर्यटन में हो रहे गड़बड़ झाले के लिए जिम्मेदार माना जाता है इसलिए भी यह माना जाने लगा कि पर्यटन मंडल को सुदृढ़ करने की दिशा में तपेश झा ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
बताया जाता है कि यह आदेश को जारी हुए एक हफ्ते भी नहीं बिता कि अजय श्रीवास्तव बहाल कर दिए गए जबकि कई लोगों के तबादले रोक दिए गए। सूत्रों के मुताबिक इस कार्रवाई में मंत्री की रुचि बताई जा रही है। इधर इस संबंध में जब तपेश झा से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी बोलने से इंकार करते हुए कहा कि यह विभागीय मामला है। बहरहाल इस मामले से यह चर्चा है कि बृजमोहन अग्रवाल की रूचि के चलते पर्यटन मंडल में बदनाम व विवादास्पद लोगों का जमावड़ा है और जिस स्तर पर यहां घोटाले हो रहे हैं उससे पर्यटन मंडल दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गया है।

रविवार, 26 सितंबर 2010

घटना हुई तो डांस बार याद आया वरना महिनों से सिर्फ पैसा खाया

थानेदार तो दूर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भी पैसा खाने का आरोप
 छत्तीसगढ़ की राजधानी में महिनों से चल रहे डांस बार का खुलासा करने की बजाय महिना खाने वाले पुलिसिये तब भी कार्रवाई नहीं करते यदि मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष प्रभाष झा के बिगड़ैल लड़के व उसके साथियों के साथ मारपीट नहीं होती। सट्टा पकड़ाने पर थानेदारों को निलंबित करने वाले पुलिस अधिकारी से गृहमंत्री ननकीराम कंवर तक ने इस मामले में सिर्फ दोनों पक्षों के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुप्पी ओढ़ ली जबकि महिनों से यहां न केवल डांस बार चल रहा था बल्कि चर्चा इस बात की भी है कि यह सब पुलिस के संरक्षण में हो रहा था और थानेदार से लेकर पुलिस के उच्चाधिकारियों तक महिना पहुंचाया जाता था।
वैसे तो इस सरकार के चलते जो कुछ हो जाए कम है। मंत्रियों से लेकर अधिकारियों तक सिर्फ अपनी जेब गरम करने में लगै हैं भले ही इसकी वजह से आम लोगों की जान पर बन आए। यही वजह है कि राजधानी पुलिस पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगता रहा है।
ताजा मामला शिवसेना प्रमुख धनंजय सिंह परिहार द्वारा संचालित होटल का है। बताया जाता है कि इस होटल में महिनों से बार डांस चल रहा था और दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता सहित देश के विभिन्न हिस्सों से यहां न केवल लड़कियां आती थी बल्कि इनके देह व्यापार करने के भी चर्चे शहर में आम रहे हैं। इतना ही नहीं यहां प्राय: रोज छोटी-मोटी लड़ाई-झगड़े भी आए दिन होते रहते थे लेकिन डीडी नगर थाने को हर माह मिलने वाली मोटी रकम और उच्चाधिकारियों को हर माह पहुंचाई जाने वाली रकम की वजह से पुलिस ने इस बार में चल रहे अनैतिक कार्यों की तरफ कभी ध्यान नहीं दिया।
बताया जाता है कि यदि शनिवार की रात भी यदि मध्यप्रदेश सरकार के अध्यक्ष प्रभाष झा का बिगड़ैल औलाद यहां मार नहीं खाता तो पुलिस मामले को दबा देती। बताया जाता है कि भाजपाध्यक्ष का यह पुत्र पहली बार यहां नहीं आया था वह अपने साथियों के साथ मौज मस्ती के लिए अक्सर आता था और शहर के कई युवक-युवतियां यहां डांस करने भी पहुंचती थी। डीडी नगर थाने वाले तो इस कदर यहां पार्किंग या छोटे-मोटे झगड़े में धनंजय सिंह परिहार का साथ देते थे मानों वे सरकार की नहीं इस होटल के कर्मचारी हो।
बताया जाता है कि चूंकि पैसा पुलिस के उच्चाधिकारियों तक पहुंचता था और एक वरिष्ठ अधिकारी की यहां रूचि थी इसलिए घटना के बाद मारपीट में शामिल दोनों पक्षों के खिलाफ तो कार्रवाई हुई लेकिन थाने को बचा लिया गया। सट्टा या अन्य छोटे मामले में थानेदार को आंख तरेरने वाले गृहमंत्री ननकीराम कंवर भी इस मामले में आश्चर्यजनक रुप से चुप है जबकि इस घटना के लिए सबसे यादा दोषी कोई है तो वह डीडी नगर थाना है। डीडी नगर थाना वाले यह कहकर अपनी जिम्मेदार से मुंह नहीं मोड़ सकते कि उन्हें यहां चल रहे डांस की खबर नहीं थी जबकि कई बार यहां हुए झगड़ों के बाद मामला थाने पहुंचा है लेकिन रिपोर्ट कभी नहीं लिखी गई।

शनिवार, 25 सितंबर 2010

भटगांव में भाजपा फंसी

भाजपा के लिए मुसीबत बनी, चावल, दारु और भ्रष्टाचार
1 अक्टूबर को मतदान 4 को गणना
 भटगांव उपचुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही खंदक की लड़ाई अंतिम चरण पर पहुंच गई है। कांग्रेस ने जहां जबरदस्त एकता का परिचय दिया है तो भाजपा अभी तक आम लोगों को विकास के मायने समझाने में ही उलझी हुई है जबकि चावल योजना से त्रस्त मध्यम वर्ग और गांव-गांव में बिक रहे शराब के अलावा सड़क और स्कूलों की दुर्दशा के साथ-साथ भ्रष्टाचार भी यहां प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा है।
वैसे तो भटगांव उपचुनाव के परिणाम को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही संशय की स्थिति में है। वैशालीनगर विस चुनाव के साथ रायपुर बिलासपुर और राजनांदगांव नगर निगम चुनाव में बुरी तरह पीट चुकी भाजपा के लिए इस सीट को जीतना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसके परिणाम डॉ. रमन सिंह के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है। आदिवासियों की बड़ी तादात के अलावा राज परिवार के प्रभाव ने सत्ता के प्रकरण को यहां जिस तरह से नेस्ताबूत किया है उससे भाजपाई खेमें में हड़कम्प मचा हुआ है। कहा जाता है कि बृजमोहन अग्रवाल का पिछले दिनों प्रचार कार्य छोड़कर बीच में रायपुर आना और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मुलाकात करने की वजह बताती है कि भटगांव में जो कुछ चल रहा है वह भाजपा के हित में नहीं है।
वैसे भी भाजपा ने शिवप्रताप सिंह की पार्टी में वापसी मजबूरी में कराया है लेकिन चुनाव लड़ने वाले उसके बेटे की स्थिति स्पष्ट नहीं है ऐसे में आदिवासी वोट को लेकर संशय कायम है। दूसरी तरफ सरकार के चावल योजना से मध्यम वर्ग पूरी तरह त्रस्त है क्याेंकि इस योजना से मजदूरों की किल्लत भुगतना पड़ रहा है ऐसे में मध्यव वर्ग का भाजपा को कितना साथ मिलेगा कहना मुश्किल है। जबकि रोजगार गारंटी योजना के मजदूरों को महिनों से भुगतान नहीं होने का मामला भी तूल पकड़ता जा रहा है। इधर गांव-गांव में बिक रहे अवैध शराब से महिलाओं में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है जबकि बदतर सड़कों के अलावा बदहाल स्कूलों पर पीडब्ल्यूडी व शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को जवाब देते नहीं बन रहा है। दूसरी तरफ कांग्रेस में जबरदस्त एकता दिखाई देने लगा है हालांकि कांग्रेसियों ने सत्ता का दुरुपयोग का आरोप लगाकर भाजपा को बांधने की कोशिश भी की है ऐसे में यदि सत्ता विरोधी मत का प्रयोग अधिकाधिक हुआ तो कांग्रेसी एक बार फिर खुश हो सकते हैं।

ये है राजधानी

मेट्स और लॉ कॉलेज स्टूडेण्ट होटल बेबीलॉन में जिस  तरह से पेश आये उससे लगा की मेरा शहर भी अब मुंबई से कम नहीं है .







वाईस ऑफ छत्तीसगढ़ में इस्माईल दरबार आएंगे

 शुभम संस्थान द्वारा आयोजित वाइस ऑफ छत्तीसगढ़ का फाईनल 24 अक्टूबर को होगा। इसमें फाईनल पहुंचे 15 गायक अपने प्रतिभा का जलवा दिखाएंगे। कार्यक्रम में मशहूर संगीतकार इस्माईल दरबार ने आने की स्वीकृति दे दी है। यह जानकारी संस्था प्रमुख महुआ मजूमदार ने दी।

शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

फिर वेतन बढ़ने का मौसम आया...

वैसे तो सरकारी विज्ञापन से ही नहीं सेटिंग करके जमीन से लेकर खदान लेने वाले अखबार मालिक अपने पत्रकारों व दूसरे मीडिया कर्मियों को फूटी कौड़ी देना पसंद नहीं करते लेकिन जब भी नए ग्रुप की आमद होती है वे भीतर तक डर जाते हैं। इन दिनों छत्तीसगढ़ की राजधानी में यही सब कुछ हो रहा है। पत्रिका, राज एक्सप्रेस सहित कई नए अखबार के आमद ने प्रतिष्ठित अखबारों को भीतर तक हिला दिया है। तोड़फोड़ से भयभीत अखबार मालिक अब पत्रकारों की खुशामद में लग गए हैं। दैनिक भास्कर को पत्रिका से सर्वाधिक खतरा महसूस होने लगा है इसलिए उसने अपने यहां के पत्रकारों ही नहीं अन्य कर्मचारियों का वेतन बढ़ा दिया है। बावजूद टूटन जारी है।
भास्कर के मार्केटिंग वाले पत्रिका पहुंचे...
दैनिक भास्कर ने अपने कर्मचारियों का वेतन तो बढ़ा दिया है लेकिन लगता है पत्रिका को चैन नहीं है वह भास्कर से दुश्मनी भुनाने में लगा है। सर्कुलेशन, संपादकीय व विज्ञापन विभाग में तोड़फोड़ के बाद उसे मार्केटिंग में भी तोड़फोड़ में सफलता मिल गई है। भास्कर के मार्केटिंग के सौरभ श्रीवास्तव, आदर्श पाठक, देवेश नगड़िया और आदित्य पत्रिका पहुंच गए हैं।
मनोज हरिभूमि छोड़ नई दुनिया में...
हरिभूमि का फोटो ग्राफर मनोज साहू को नई दुनिया रास आने लगा है। नई दुनिया यादा वेतन देकर मनोज को अपने यहां बुला लिया। कहा जा रहा है कि हरिभूमि में वैसे भी मनोज परेशान था।
भाई खुश हुआ...
वैसे तो इन भाई फोटो ग्राफरों का सभी मजाक उड़ाते है। अच्छी तस्वीरें खींचने के बावजूद उन्हें अब तक तवाों नहीं मिल रही थी। वेतन की कमी अलग रही ऐसे में पत्रिका में जोर लगाना ही था और वे सफल भी हो गए। अब इन्हें झमरु-डमरु कहो या त्रिलोचन-हीरा मानिकपुरी कह लो। दिन तो बहुर ही गए।
वाह पाण्डे जी
हरिभूमि में क्राईम-क्राईम खेलने वाले सतीश पाण्डे ने ऊंची-छलांग लगा ली है। पहले हल्ला मचाया कि पत्रिका में जा रहा हूं पहले ही दहशत में रहे हिमांशु ने उसकी तनख्वाह तीन हजार बढ़ा दी। अभियान सफल रहा।
इलेक्ट्रानिक में दारू वालों की आमद...
लंबी खामोशी के बाद एक फिर इलेक्ट्रानिक मीडिया में हलचल होने लगी है। जी-24 के गिरते ग्राफ ने इसके मालिक को एम चैनल में पार्टनरशिप लेने मजबूर किया तो मंजित अमोलक जैसे दारु वाले इस व्यवसाय में कदम रखने लगे हैं। भास्कर का क्या वह तो 51 प्रतिशत में स्वयं है बाकी 49 में कोई भी खेल।
और अंत में...
जब से जनसंपर्क का कार्यभार अमन सिंह ने संभाला है तभी से संवाद व जनसंपर्क के भ्रष्ट अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। वे आपस में यही चर्चा कर रहे हैं कि कैसे साहब को अपनी करनी छुपायें और खुश करने कौन सा गिफ्ट दें।

स्थापना पर मुक्तिमोर्चा का कार्यकर्ता सम्मेलन 1 को

 छत्तीसगढ राय स्थापना के उपलक्ष्य में मूल निवासी मुक्ति मोर्चा के द्वारा त्रिवेणी भवन बिलासपुर में प्रांतीय कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया है। यह जानकारी मोर्चा के अध्यक्ष गोपाल ऋषिकर भारती एवं सचिव महिला प्रभाग श्रीमती उषा आफले ने दी।

बेहतर स्वास्थ्य, रोजगार एवं बुनियादी सुविधओं की गारंटी पर आधारित छत्तीसगढ़ को प्रबुध्द आदर्श राय बनाने की दिशा में चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत कार्यकर्ताओं को जानकारी दी जाएगी। छत्तीसगढ़ राय निर्माण आंदोलन के प्रणेता एवं प्रथम जेल यात्री गुरुघासीदास जयंती के जन्मदाता स्वर्गीय नुकूल ढीढी (मंत्री जी) को मरणोपरान्त छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित करने की मांग की जाती है। छत्तीसगढ़ में डा. बाबा साहब अम्बेडकर की विचार धारा आंदोलन तथा उनके संगठनों को स्थापित करने वाले नेतृत्वकर्ता नुकूल ढीढी जी थे। उन्हाेंने 1951 से ही छत्तीसगढ़ राय के प्रयत्न करना प्रारंभ किया सन् 1961 में आल इंडिया रिपब्लिकन पार्टी छत्तीसगढ़ राय शाखा का गठन किया था। दिनांक 13 दिसंबर 1970 को रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया के बैंगलोर राष्ट्रीय अधिवेशन में पृथक छत्तीसगढ़ राय निर्माण का प्रस्ताव पारित करवाएं। दिनांक 27 अक्टूबर 1972 को रायपुर जिला कचहरी के समक्ष आंदोलन करते हुए 19 साथियों के साथ जेल भेजे गए। 31 अक्टूबर को रिहा किए गए। उनके 45 साथियों को महासमुंद में सुखरु प्रसाद बंजारे एवं भागवत कोसरिया के साथ गिरफ्तार किया गया। दिनांक 18 दिसंबर 1938 को छत्तीसगढ़ के ग्राम भोरिंग में गुरु घासीदास की जयंती का प्रथम आयोजन किया वे छत्तीसगढ़ में इस जयंती के जन्मदाता थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित अनेकों पार्टियों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया जा रहा है, जिनमें मुंबई के पूर्व सांसद एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास आठवले छत्तीसगढ़ विकास पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद पी.आर. खुंटे सहित सामाजिक सांस्कृतिक नेताओं द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई।