क्यों चुप हैं लोग ? क्या सरकारें मनमर्जी चलने के लिए होती हैं ? मंहगाई चरम पर है, किसानो की जमीने उद्योगपतियों को बेचीं जा रही है , छत्तीसगढ़ में तो जमीन - जंगल-पानी और बांध तक बेचीं जा रही है , विरोध करने वालों पर लाठियां बरसी जा रही है और कांग्रेस बेशर्मी से तमाशा इसलिए देख रही है ताकि राजनैतिक फायदा उठाया जा सके .
क्या आम लोगों को अपने भविष्य की चिंता नहीं है ? या वे अब भी दो वक्त की रोटी के लिए ही स्वार्थी बन कर रह गए है , क्या फिर महात्मा गाँधी की तरह किसी को निकलने की जरुरत है ताकि सरकारों की मनमानी रोकी जा सके ?
http://midiaparmidiaa.blogspot.in/
सोमवार, 17 जनवरी 2011
शनिवार, 15 जनवरी 2011
बधाई हो
मकर संक्रांति की बधाई हो
अब आपका राशि क्या होगा क्योंकि अब १३ राशि हो गयी है मै अपना पता कर रहा हु ,पता चलते ही सूचना दूंगा
अब आपका राशि क्या होगा क्योंकि अब १३ राशि हो गयी है मै अपना पता कर रहा हु ,पता चलते ही सूचना दूंगा
मंगलवार, 4 जनवरी 2011
नए सफ़र में ...
पत्रकारिता को लेकर हमेशा से ही मेरी अपनी सोच रही है शायद यही वजह है की मै एक संस्थान में कभी भी टिक कर नहीं रह सका .
ऐसा एक बार फिर हो गया और इस बार बुलंद -छत्तीसगढ़ छुट गया .लक्ष बड़ा है या फिर सफ़र बड़ा है यह मै नहीं जानता लेकिन ‘बुलंद ’ छुटने पर दुखी भी हूँ .सोचा था ‘बुलंद ’ के माध्यम से नई आज़ादी की लड़ाई पूरी कर लूँगा पर इश्वर को शायद कुछ और मंजूर है .हालाँकि न तो मैंने कभी कोई काम किसी के भोरेसे पर किया और न उन लोगों में से हूँ जो भाग्य के भरोसे सब कुछ छोड़ देते है .
अपने काम पर जरुर मुझे भरोसा रहा है और आज भी भरोसा है की सुचारू व्यवस्था बनाने के लिए गलत पर प्रहार करना ही होगो , गलत के खिलाफ खड़ा होना ही होगा , गलत के खिलाफ खुलकर बोलना ही होगा भले इसके एवज me अपने कुछ लोगों की नाराजगी मोल क्यों न लेनी पड़े .
‘बुलंद ’के लगभग दो साल का साफ आर झंझावातों से गुजरा खबरे रोकने का दबाव के साथ हार बार अखबार छाप सकने के अलावा खबरों पर कारवाई की चिंता भी काम नहीं थी लेकिन कहा जाता है की अच्छा सोचोगे तो अच्छा होगा शायद इसकिये सब कुछ अच्छा हुआ
नए साल के सफ़र में अब कौन माध्यम होगा नहीं कह सकता लेकिन धर और पैनी हो और जिस तरह से मुझे सबका प्यार ‘बुलंद ’में लड़ाई के दौरान मिला और नए लोग भी जुड़े वैसा ही आगे भी चले नई आज़ादी की इस लड़ाई में और भी लोग jude aur जो जुड़े है उनके प्यार के भरोसे फिर कुछ कर सकूँ इसी आशा के साथ नए माध्यम की तलाश है . ..
ऐसा एक बार फिर हो गया और इस बार बुलंद -छत्तीसगढ़ छुट गया .लक्ष बड़ा है या फिर सफ़र बड़ा है यह मै नहीं जानता लेकिन ‘बुलंद ’ छुटने पर दुखी भी हूँ .सोचा था ‘बुलंद ’ के माध्यम से नई आज़ादी की लड़ाई पूरी कर लूँगा पर इश्वर को शायद कुछ और मंजूर है .हालाँकि न तो मैंने कभी कोई काम किसी के भोरेसे पर किया और न उन लोगों में से हूँ जो भाग्य के भरोसे सब कुछ छोड़ देते है .
अपने काम पर जरुर मुझे भरोसा रहा है और आज भी भरोसा है की सुचारू व्यवस्था बनाने के लिए गलत पर प्रहार करना ही होगो , गलत के खिलाफ खड़ा होना ही होगा , गलत के खिलाफ खुलकर बोलना ही होगा भले इसके एवज me अपने कुछ लोगों की नाराजगी मोल क्यों न लेनी पड़े .
‘बुलंद ’के लगभग दो साल का साफ आर झंझावातों से गुजरा खबरे रोकने का दबाव के साथ हार बार अखबार छाप सकने के अलावा खबरों पर कारवाई की चिंता भी काम नहीं थी लेकिन कहा जाता है की अच्छा सोचोगे तो अच्छा होगा शायद इसकिये सब कुछ अच्छा हुआ
नए साल के सफ़र में अब कौन माध्यम होगा नहीं कह सकता लेकिन धर और पैनी हो और जिस तरह से मुझे सबका प्यार ‘बुलंद ’में लड़ाई के दौरान मिला और नए लोग भी जुड़े वैसा ही आगे भी चले नई आज़ादी की इस लड़ाई में और भी लोग jude aur जो जुड़े है उनके प्यार के भरोसे फिर कुछ कर सकूँ इसी आशा के साथ नए माध्यम की तलाश है . ..
शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010
नव-वर्ष की शुभकामनाए
आज संकल्प लेना ही होगा की हम चुप नहीं रहेंगे चाहे इसके लिए हमें कोई सी भी क़ुरबानी देनी पड़े क्योकि हमारी ख़ामोशी से गलत प्रोत्साहित होता है और सही हतोत्साहित होता है . हमारी चुप्पी तोड़ने का मतलब हमारी और हमरी आने वाली पीडी को सुख दिलाना है जरा सोचिये यदि हमारे सेनानी चुप होते तो?
बुधवार, 29 दिसंबर 2010
बैकुंठ पुर के सी एम् ओ के ७ ठिकानो पर छापा
इ ओ डब्ल्यू ने आज बैकुंठपुर के सी ऍम ओ डॉ गंभीर सिंह ठाकुर के सात ठिकानो पर छापे की कारवाई में ४ करोड़ से अधिक की अनुपातहीन संम्पत्ति का खुलासा हुआ है.
मंगलवार, 28 दिसंबर 2010
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