बुधवार, 2 अक्टूबर 2024

शक्ति स्वरूपा जगदम्बा..

 


प्रतिवर्ष दुर्गोत्सव मनाया जाता है। गांव, शहर, मोहल्ले और यहां तक कि घर-घर में माँ के हर रूप की पूजा होती है। चौक चौराहों पर माता की प्रतिमा स्थापित किए जाते हैं। मंदिरों में ज्योति कलश व जंवारा स्थापित ही नहीं होते बल्कि माता की सेवा में ढोलक के थाप पर गीत गूंजते हैं। मेहमूद या फैज़ल के संगीत की थाप पर डांडिया की गूंज आकाश में दूर-दूर तक सुनाई पड़ती हैं। याद किया जाता है माँ के स्वरूप को, याद किया जाता है माँ की महिमा और भारतीय संस्कृति तथा उत्सव की वजह को।
भारतीय जीवन में नारी सा पूज्यनीय कोई और नहीं है। यही वजह है कि कई प्रांतों में माता-पिता आज भी अपनी पुत्री का चरण स्पर्श करते हैं और विवाह पश्चात उनके घर का अन्न-जल ग्रहण नहीं करते। नारी पूज्यनीय है, देवी है और उनकी शक्ति का सर्वत्र गुणगान करते नहीं थकते। नारी सावित्री बनकर अपने पति का जीवन लाने यमराज से लड़ जाती है। राधा बनकर पूरी सृष्टि में प्रेम का संचार करती है, मीरा बनकर वह सब कुछ त्याग करने तैयार रहती है तो रानी लक्ष्मी बाई बनकर देश को आजादी दिलाने तत्पर हो जाती है, वह कृष्ण की मां बनकर यशोदा मैय्या हो जाती है तो राम की मां बनकर कौशल्या माता बन जाती है, नारी में मां का स्वरूप अवर्णित है। मां के दूध से सिर्फ जीवन नहीं मिलता वह लहु में घुलकर हमारे भीतर शक्ति का संचार करती है। शक्ति हमारे भीतर है, धर्म हमारे भीतर है। धर्म हमें राह दिखाता है और शक्ति इस राह की कठिनाई को दूर करती है।  शक्ति हमारा विश्वास है। विश्वास का प्रतीक गणेश जी है इसलिए हम हर साल गणेशोत्सव भी मनाते हैं। वे विध्नहर्ता हैं, हमारा विश्वास है। यही विश्वास लिये हम अपने पूर्वजों का आशीर्वाद लेने के बाद माता की शक्ति को ग्रहण करते हैं। विश्वास के बाद शक्ति ही हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। शक्ति का दुरुपयोग न हो, मां यही तो सिखाती है।
शक्ति के अनेक रूप है इसलिए वह महामाया है, वह शक्तिशाली होते हुए भी शीतल है इसलिए छत्तीसगढ़ में गांव-गांव में शीतला माता विराजती हैं। पूरे नौ दिन माता की सेवा में गीत गाये जाते हैं, वह जननी है इसलिए जंवारा बोया जाता है। उत्सव हमारे प्राण वायु है, उत्सव हमें एक होने की प्रेरणा देता है। उत्सव हमें समझाता है जीव मात्र एक है, इसलिए माता का वाहन सिंह है। हम फल पुष्प चढ़ाते हैं, उपवास रखते हैं, सिर्फ फलाहार करते हैं। यह उत्सव हमें सबक देता है कि ईश्वर और प्रकृति के सामने सब एक हैं। मनुष्य को बचाना है तो प्रकृति को बचाना जरूरी है। इसलिए देवी-देवताओं ने अपने वाहनों, पूजा अर्चना में प्रकृति को जोड़कर रखा।
आज़ादी के बाद हमें संभलना था। इन उत्सवों के माध्यम से हमें सबको जोड़कर चलना था। मंदिर में हीरे-मोती चढ़ाने वाले भी पहुंचते हैं और खाली हाथ दर्शन करने वाले भी आते हैं। देवी-देवताओं ने कभी भेद नहीं किया। परन्तु भेद करना हमने शुरू किया। हमारे स्वार्थ ने मानव-मानव में अंतर किया। यह अंतर मिटना चाहिए। छत्तीसगढ़ की नारी बलशाली है। वह खेतों में भी उतनी ही सिद्धत से काम करती है जितना वह जंवारा विसर्जन के लिए समर्पित होती है। यहां बेटियों में भेद नहीं है, यहां कोख में बेटियां नहीं उजाड़ी जाती। इसलिए छत्तीसगढ़ महतारी है। महतारी यानी मां, मां यानी जननी। जननी भेद नहीं करती बल्कि वह कमजोर बच्चों पर ज्यादा ध्यान देती है।
मां की माया अपरंपार है। इसलिए वह महामाया है। नई पीढ़ी यह सब नहीं जानती। इसमें इनका दोष नहीं है। हमने ही इन्हें नहीं बताया। विदेशीपन की दौड़ शुरु कर दी। इस आधे अधुरे दौड़ में न वह विदेशी ही बन सका न ही अपनी संस्कृति और संस्कार से ही परिचित हो सका। वह विज्ञान की जाल में उलझ गया। उसे वही ठीक लगा जो       विज्ञान कहता है। परन्तु विज्ञान वही कहता है जो वह जानता है। विज्ञान आस्था को नहीं जानता। कण-कण में भगवान को वह अभी भी ठीक से नहीं जान सका। इसलिए नई पीढ़ी दुर्गोत्सव तो मना रहा है परन्तु विदेशी तौर तरीकों से। ऐसे में न संस्कार बचेगा न संस्कृति। सब गड़बड़ हो जायेगा।
आधा अधूरा रिश्ता या समझ हमेशा ही तकलीफ देता है। आज वहीं हो रहा है। जरूरत है तो काम ले लो वरना प्रवेश पर ही पाबंदी लगा दो। ईश्वर पाबंदी से परे है यह सब जानते हैं परन्तु जाति धर्म की खाई चौड़ी हो गई है। हम जगत जननी जगदम्बा का उत्सव तो मना रहे हैं परन्तु जननी की सहनशीलता से कुछ नहीं सीख रहे हैं।
उत्सव हमारी संस्कृति है। मनुष्य को मनुष्य से जोडऩे का माध्यम है। उन्हेंं समझने का साधन है। उत्सव से राष्ट्रीय स्वरूप विकसित होता है। देवी-देवताओं का प्रकृति से लगाव हमें नई सीख देती है। ताकि हम संस्कार के नए बगीचे तैयार कर सकें। परन्तु क्या ऐसा हो रहा है? हम उत्सव मना तो रहे हैं, अपने तौर-तरीकों से। जगत जननी जगदम्बा के आगे संगीत की थाप पर डांडिया खेला जा रहा है। ढोलक की थाप पर सेवा गीत गाये जा रहे हैं, पर श्रद्धा और विश्वास कम होता जा रहा है। शक्ति का दुरुपयोग हो रहा है, पर माँ सब चुपचाप देख रही है। महिषामर्दन होगा... जरूर होगा...।

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2024

निपटने - निपटाने के खेल में अफसरों की मुश्किलें बढ़ी

निपटाने में दो मिनट नहीं लगेगा - मोहन 

 निपटने - निपटाने के खेल में अफसरों की मुश्किलें बढ़ी



 वैसे तो राजनीति में निपटने और निपटाने का नया नहीं है। लेकिन छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों यह खेल सुर्ख़ियों में तब आया जब रायपुर के कद्‌दावर माने जाने वाले बृजमोहन अग्रवाल को सांसद की टिकिट दी गई।

 कहने को तो इसे प्रमोशन कहा जा रहा है लेकिन मंत्री पद के आगे सांसद की हैसियत को आम आदमी भी जानता है,  तो भला मोहन सेठ के नाम से चर्चित बृजमोहन अग्रवाल के समझ में क्यों नहीं आता, इसलिए 6 माह मंत्री रह सकने के तमाम दावे की कलई केविनेट की भरी बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ही खोल दी। और बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकाले गये की तर्ज पर मन मसोसकर इस्तीफ़ा देना पड़ा।

लेकिन निपटने - निपटाने का खेल अमी ख़त्म नहीं हुआ था बल्कि शुरुआत आरंग के महानदी पुल में हुए कथित मॉब लिंचिग  से तेज हो गया। मोहन सेठ ने इस  मामले में अपने ही सरकार को घेरने को लेकर बवाल मचा तो मोमबत्ती बुझाने वाले अपमानजनक बीडियों ने इसे हवा दे दी।

और कहा जा रहा है कि इस निपटने - निण्टाने को खेल इसलिए खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है क्योंकि इसे सलाहकार ही हवा दे रहे है। हालांकि इस खेल में नुकसान किसका होगा कहना मुश्किल है लेकिन उसके चलते अफ़सरों की मुश्किले जरूर बढ़ गई है। और गुस्सा अफ़सरों पर ही निकलने लगा है।

इसका ताजा उपहरण जे चार दाने स्कूल में आयोजित स्वच्छता की पाठशाला बाले कार्यक्रम में तब देखने को मिला जब मोहल सेठ एक अफसर को ही कह दिया कि प्रोटोकॉल हमे न सिखाओ, निपटाने में दो मिनट लगेंगे।

मीडिया रिपोर्ट की माने तो मोहन सेठ का यह ग़ुस्सा अकारण नहीं था दरअसल अफ़सरों की प्राथमिकता मंत्री होते है ऐसे में अफ़सर ये नहीं समझ पाये कि ये सिर्फ़ सांसद बस नहीं है बल्कि ख़ुद को इससे भी बड़े समझने वाले हैं । 


सोमवार, 30 सितंबर 2024

युवाओं के आँखों की किरकिरी बन गये चौधरी

  युवाओं के आँखों की किरकिरी बन गये चौधरी


इसमें किसी को संदेह नहीं है कि अफसरी से राजनीति में आये ओपी चौधरी  न केवल चतुर व्यक्ति है बल्कि डबल इंजन की सरकार में उनकी पकड़ भी बेहद मजबूत है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा भरे मंच में पीठ ठोंकने के बाद ओपी चौधरी का रुतबा जिस तेजी से बढ़ा, उतनी ही तेज़ी से उनकी छवि शिक्षक भती वाले वीडियो वायरल होने के बाद बिगड़ने लगी है कहा जाए तो गलत नहीं होगा|

कहा तो यहां तक जा रहा है कि वित्त मंत्री बनने के बाद जिस तरह से उन्होंने शासन-प्रशासन में अपनी पकड़ मजबूत की उतनी ही तेजी से युवाओं में उनकी छवि फ़िसलने लगी है। तो इसकी बड़ी वजह 33 हजार शिक्षकों की भर्ती नहीं होने के अलावा नियमितिकरण को लेकर चलने वाला आन्दोलन भी है।

सूत्रों की माने तो इस बिगड़ती छवि की जानकारी ओपी चौधरी को भी लग गई है इसलिए वे इन दिनों अपनी छवि सुधारने के नाना प्रकार के उपाय कर रहे हैं। जनसंपर्क की पूरी टीम के अलावा पत्रकारों में घुसपैठ बनाने कोरबा का एक व्यापारी भी सक्रिय है, लेकिन भोपाल वाली खबर ने एक बार फिर पोर्टल वालों की डिमांड बढ़ा दी है।   ऐसे में ओपी चौधरी की मुश्किल यह है कि छवि सुधारने के खेल में छवि बिगड़‌ने का खतरा भी बढ़ गया है और जहां गुड़ वहां मक्खी की तर्ज पर चल रहे इस खेल का अंजाम क्या होगा कहना मुश्किल है लेकिन छवि सुधारने में खतरे तो उठाने हो होगे।

रविवार, 29 सितंबर 2024

ईडी ने वसूली तो छत्तीसगढ़ में भी की है...

 ईडी ने वसूली तो छत्तीसगढ़ में भी की है...

कहाँ है रामगोपाल…


इलेक्ट्रोरल बांड ने मोदी ब्राण्ड को बुरी तरह बेनकाब कर दिया है, बेंगलुर की अदालत के द्वारा वित्त मंत्री निर्मला सितारमन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा सहित 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर के आदेश ने इस आरोप की पुष्टि कर दी है कि मोदी सरकार में ईडी का काम क्या था।

ऐसे में छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला, कोयला परिवहन घोटाला, महादेव सट्‌टा एप सहित कई मामलों की जांच में भी क्या इडी ने वसूली की है। यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है, क्योंकि इडी की  कार्रवाई पहली नजर में पक्षपात पूर्ण दिखाई देने लगी है।

ईडी की कार्रवाई मैं जो पहला पक्षपात दिखाई देता है वह आई एएस व आईपी एस अफसरों पर कार्रवाई को है और इसके बाद गिरफ्तारी की सूची में उन नामों का ग़ायब होना जिस पर सबसे ज्यादा संदेह था। उसके अलावा कुछ लोगों को फ़रार होने का मौका देना और इसके बाद ई ओ डब्ल्यू में एफआई आर की सूची।

छत्तीसगढ़ में इडी की वसूली की चर्चा में वे नाम सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में है जिसका नागपुर कनेक्शन है । और कहा जाता है कि ऐसे आईपीएस अफ़सरों से 15 से 25 करोड़ के बीच वसूली हुई है। कोयला परिवहन घोटाले से जुड़े इन अफसरों से पूछताछ तो हुई है लेकिन पैसा लेकर छोड़ देने का आरोप है और इन अफसरों की साय सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति भी कम चौंकाने वाला नहीं है।

इस पूरे मामले में सबसे चर्चित नाम तो आईएएस विवेक ढांड और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और  उसके रिश्तेदार है। कहा जाता है कि रामगोपाल को सेंटिंग के तहत ही फरार होने का मौका दिया गया।

हुब इस खेल में क्या क्या हुआ और कौन कौन आरोपी बचा लिये गए है हम आपको बताते रहेंगे, आरोपों से घिरे अफसरों को साय सरकार ने कैसे सर माथे पर बिठाया है और उनका नागपुर कनेक्शन भी  चर्चा में है।

शनिवार, 28 सितंबर 2024

अडानी को बचाने वाले पर अमेरिका ने कसा शिकंजा…

 अडानी को बचाने वाले पर अमेरिका ने कसा शिकंजा…



अमेरिका के मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सजेंज कमीशन ने एन आर आई निवेशक राजीव जैन की कंपनी पर जीक्यूजी पार्टनर्स पर पांच लाख डॉलर का जुर्माना लगा दिया है कंपनी पर व्हिसलब्लोअर सुरुक्षा नियम के उल्लयेन का आरोप है, और इस कंपनी जी क्यू जी ने इस आरोप के खिलाफ जाने की बजाय पांच लाख डालर को जुर्माना भरने पर सहमत हो गया है।

दरअसल हिडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद गौतम अदानी की मुसिबतें थमने  का नाम ही नहीं ले रहा है। केऱ्या में एयरपोर्ट को लेकर कोर्ट के फैसले के ने बाद भारी नुक़सान के साथ-साथ बांग्लादेश में तख्ता पलट की वजह से वहाँ चल रहे अदाणी ग्रुप के  प्रोजेक्ट भी खतरे में है तो अब श्रीलंका में नये राष्ट्र‌पति चुने जाने के बाद अडानी की ग्रीन एनर्जी कंपनी के प्रोजेक्ट पर भी खतरा मंडरा रहा है। अभी इन  मामलों से अडानी उबर भी नहीं पाये है कि अमेरिका से आ रही खबर ने भी सभी को चौंका दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिका के एनआरआई निवेशक राजीव जैन की कंपनी जीक्यूजी पार्टनर्स 5 लाख डॉलर का जुर्माना भरने को तैयार हो गई है। अमेरिका के मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने कंपनी पर व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन रूल्स के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया है। कंपनी ने इन आरोपों का स्वीकार करने या इनका खंडन करने के बजाय इसे सेटल करने पर सहमति जताई है। इसके लिए कंपनी 5 लाख डॉलर का पेनाल्टी भरेगी। जीक्यूजी पार्टनर्स पिछले साल उस समय सुर्खियों में आई थी जब उसने अडानी ग्रुप की कंपनियों में भारी निवेश किया था। हिंडनबर्ग रिसर्च की एक रिपोर्ट के कारण अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आ रही थी।

एसईसी ने कहा कि जीक्यूजी ने व्हिसलब्लोअर सुरक्षा नियम 21एफ-17(ए) का उल्लंघन किया है। यह किसी व्यक्ति को संभावित प्रतिभूति कानून उल्लंघन के बारे में एसईसी कर्मचारियों से सीधे संवाद करने से रोकने के लिए किसी भी कार्रवाई को प्रतिबंधित करता है। नियामक ने जीक्यूजी पर रोजगार के लिए उम्मीदवारों और एक पूर्व कर्मचारी के साथ ऐसे समझौते करने का आरोप लगाया है जिससे उनके लिए एसईसी को संभावित प्रतिभूति कानून उल्लंघनों की रिपोर्ट करना अधिक कठिन हो गया।

SEC के मुताबिक नवंबर 2020 से सितंबर 2023 तक GQG ने 12 उम्मीदवारों के साथ नॉन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स किए। इससे उन्हें GQG के बारे में गोपनीय जानकारी का खुलासा करने से प्रतिबंधित किया गया। SEC का कहना है कि GQG ने एक पूर्व कर्मचारी के साथ भी सेटलमेंट एग्रीमेंट किया। उसके वकील ने GQG को धमकी दी थी कि वह रेगुलेटर को कथित प्रतिभूति कानून उल्लंघनों की रिपोर्ट करेगा। जीक्यूजी पार्टनर्स ने भारत में कई कंपनियों में निवेश किया है। इनमें अडानी ग्रुप की छह कंपनियां भी शामिल हैं।

शुक्रवार, 27 सितंबर 2024

बुरी तरह फँस गई निर्मला सीतारमण

 बुरी तरह फँस गई निर्मला सीतारमण


घटिया और अमानक स्तर की दवाइयों को लेकर चल रहे विवाद के बीच जब बंगलुर के कोर्ट ने वित्त मंत्री निर्मला सितारमण के खिलाफ एफ‌आईआर दर्ज करने का आदेश पारित किया तो सहसा इलेक्ट्रोरल बांड की फ़ाइले आंखों के आगे सामने आ गई।

वित्त मंत्री निर्मला सितारमण के खिलाफ क्या है मामला हम बताये इससे पहले यह बता दे कि वित्त मंत्री के खिलाफ जो जुर्म दर्ज करने का आदेश दिया गया है उसका संबंध भी वही इलेक्ट्रोरल बांड से है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अवैध तो बताया लेकिन इस अबैध कमाई की राशि को जब्त करने की हिम्म्मत नहीं जुटा पाया।

इलेक्ट्रोरल बांड की सूची में चंदा देने वालों में तब आधा दर्जन से अधिक ऐसी दवा कंपनियों के नाम थे जिन्होंने मोदी सत्त्रा की बीजेपी को करोड़ों-अरबों रूपये चंदा दिया था, इन चंदा देने वाली दवा कंपनियों  में वे कंपनी भी शामिल थी जिनकी दवाईयां घटिया निकली थी और इनमें से कुछ की जाँच रोक दी गई थी तो कुछ को क्लीन चीट दे दी गई थी।

यानी आम लोगों की जान की कीमत पर दवा कंपनियों से इलेक्ट्रोरेल बांड के रूप में चंदा वसूला गया था। तब भी धमकी-चमकी, काम लो पैसा दो के आरोप मोदी सत्ता पर लगे थे लेकिन न जांच हुई और न ही इन आरोपों पर  कोई जुर्म दर्ज ही हुआ।

ऐसे में घटिया 53 दवाईयों के  सप्लाई का मामला जो अब सामने आया है उसे लेकर मोदि सत्ता फिर सवालों में है। लेकिन अब इलेक्ट्रोरल बॉड की लूट की परतें उधड़ने लगी है तो निर्मला सितारमण के खिलाफ जुर्म दर्ज हो गया है । 

मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड के जरिए कथित जबरन वसूली के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। ये आदेश बेंगलुरु की पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव कोर्ट ने दिया है। जनाधिकार संघर्ष परिषद (जेएसपी) के सह-अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने बेंगलुरु की अदालत में शिकायत दर्ज कर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की थी।

कई नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज

आदर्श अय्यर ने आरोप लगाया कि चुनावी बॉन्ड के जरिए धमकी देकर जबरन वसूली की गई। जन अधिकार संघर्ष परिषद ने पिछले साल अप्रैल में 42वें ACMM कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, ईडी अधिकारियों, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, पार्टी के अन्य राष्ट्रीय नेताओं, बीजेपी के तत्कालीन कर्नाटक अध्यक्ष नलिन कुमार कटील, बी वाई विजयेंद्र के खिलाफ शिकायत की थी। अदालत ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए बेंगलुरु के तिलक नगर पुलिस थाने को चुनावी बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया।


गुरुवार, 26 सितंबर 2024

चर्बी मिले प्रसाद के साथ चंदा में मिली दवाईयां…

 चर्बी मिले प्रसाद के साथ चंदा में मिली दवाईयां…

स्वास्थ मंत्री की चिंता कुनबा बढ़ाने की…


यदि आप तिरुपति के प्रसाद में चर्बी मिलने के पाप से प्रायश्चित का प्रहसन से निजाद पा चुके हो तो अमानक दवाईयों के खेल को भी समझ लो क्योंकि खेलते-कूदते, भागते-दौड़ते जो मौत की खबरें आती है, उसके पीछे चंदे की वह कहानी भी हो सकती है जिस इलेम्ट्राल बांड को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध तो ठहराया, लेकिन इस अवेध कमाई को जब्त करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया । दूसरी तरफ़ स्वास्थ मंत्री जे पी नद्दा की अपनी चिंता है वे इन दिनों रायपुर में घूम घूम कर मोदी की तारीफ़ और बीजेपी की संख्या बढ़ाने में लगे है।

प्रायश्चित के इस प्रहसन में मंदिर भी शुद्ध हो गया और प्रसाद खाने वाले भी प्राथश्चित  करके अपने को चर्बी सेवन के पाप से मुक्त कर ही लेंगे। लेकिन न तो दवा कंपनी मानने को तैयार है कि उनकी दवाईया घटिया और अमानक है और न ही सरकार ही मानेगी कि उसने चंदा लेकर वैक्सिन से लेकर पैरासिटामॉल सहित पचास से अधिक द‌वाईयों की आपूर्ति की अनुमति दी जो घटिया और अमानक थी।

देशभर को पता चल गया कि मंदिर का प्रसाद अशुद्ध था…

…लेकिन पूरा देश घटिया और नक़ली दवाइयाँ खा रहा है, इससे किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ रहा है

53 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल,

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्रग रेगुलेटर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में 53 दवाओं को क्वालिटी टेस्ट में फेल घोषित किया है। इन दवाओं में पेरासिटामोल समेत कैल्शियम और विटामिन डी3 सप्लीमेंट्स, एंटी-डायबिटीज दवाएं और हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का फेल होना आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

CDSCO द्वारा जारी की गई इस सूची में दवाओं को "नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी" (NSQ) घोषित किया गया है। ये अलर्ट रैंडम सैंपलिंग के आधार पर जारी किए जाते हैं, जिन्हें विभिन्न राज्यों के ड्रग अधिकारियों द्वारा एकत्र किया जाता है। क्वालिटी टेस्ट में फेल होने वाली दवाओं में प्रमुख रूप से पेरासिटामोल 500 एमजी, विटामिन डी3 सप्लीमेंट्स और डायबिटीज की दवाएं शामिल हैं।

CDSCO ने दो अलग-अलग सूचियां जारी की हैं। पहली सूची में 48 दवाएं हैं जो क्वालिटी टेस्ट में फेल हुई हैं, जबकि दूसरी सूची में 5 दवाओं को रखा गया है, जिनके बारे में कंपनियों को जवाब देने का मौका दिया गया है। हालांकि, अब तक फार्मा कंपनियों ने इन नतीजों को मानने से इनकार करते हुए इसे गलत ठहराया है।

अब इस बात पर नज़र होगी कि संबंधित कंपनियों और सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं ताकि ऐसी दवाओं का बाजार से तुरंत हटाया जा सके और आम जनता को सुरक्षित रखा जा सके।क्योंकि एक तरफ घटिया दवाएं हैं और दूसरी तरफ नकली दवाओं के बाज़ार में आने की भी खबर है। फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का दायित्व भी निभा रहे हैं, उन पर भाजपा के सदस्यता अभियान को सफल बनाने का जिम्मा है। हालांकि तीन दिन पहले आयुष्मान भारत ‘प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना’ के छह बरस पूरे होने पर श्री नड्डा ने नरेन्द्र मोदी की इस पहल की तारीफ़ करते हुए कहा था कि यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा पहलों में से एक बन गई है। यह सभी नागरिकों,  विशेष रूप से सबसे कमज़ोर लोगों के लिए समान स्वास्थ्य सेवा पहुंच प्रदान करने के लिए इस सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।लेकिन स्वास्थ्य मंत्री को यह समझना होगा कि सरकार की प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री के गुणगान करने से पहले काम करने से पूरी होगी। चिंता की बात यह है कि असफल दवाओं में कई ऐसी दवाएं हैं, जिनका इस्तेमाल सबसे अधिक होता है। जैसे देश में करीब 220 मिलियन लोग हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, इसी तरह 2021 में डायबिटीज मरीजों की संख्या 529 मिलियन थी। करोड़ों लोग एसीडिटी रोकने की और विटामिन्स की दवाएं लेते हैं।

 हर आए दिन अचानक हृदयाघात से मौत की खबरें आ रही हैं और सरकार इस बारे में कुछ नहीं कहती। ब्रिटेन में कोविड वैक्सीन बनाने वाली एस्ट्राजेनका ने माना ही था कि उसके बनाए टीकों से नुकसान हो रहा था। इसके बाद उन टीकों को वापस भी लिया गया। लेकिन क्या भारत में परीक्षण में असफल दवाएं वापस ली जाएंगी, यह बड़ा सवाल है।

 गंभीर सवाल दवा कंपनियों और सत्तारुढ़ दलों के बीच आर्थिक रिश्तों का है।  इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक करार दिया था। चुनावी बॉन्ड जारी करने के लिए अधिकृत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने काफी ना-नुकुर के बाद इसके विस्तृत आंकड़े जारी किए थे, जिनमें खुलासा हुआ था कि कई बड़ी दवा कंपनियों ने करोड़ों के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे हैं और इनका बड़ा हिस्सा भाजपा को मिला है। यह भी पता चला था कि बॉन्ड खरीदने वाली दवा कंपनियों की कई दवाएं पहले परीक्षण में अमानक और घटिया पाई गई थी, और जाँच रोक देने या क्लीन चिट देने का आरोप भी लगा था । क्या इस बार भी जिन कंपनियों की दवाएं घटिया मिली हैं, उनसे किसी तरह का चंदा मिला है।

फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी और स्वास्थ्य मंत्री नड्डा दोनों ही भाजपा का कुनबा बढ़ाने और चुनावी राज्यों में दौरों में व्यस्त हैं, 53 दवाओं का परीक्षण में फेल होना, कोई मामूली बात नहीं है, इसकी गहन जांच होनी चाहिए कि आखिर इस असफलता की वजह क्या है। अभी ज़्यादा वक़्त नहीं बीता जब गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में भारत के बने कफ़ सिरप को पीने से बड़ी संख्या में बच्चों की मौतें हुई थीं, इसके बाद इन पर कई देशों में प्रतिबंध लगा था। यह वैश्विक स्तर पर शर्मिंदगी थी और ऐसी घटनाओं से असल में देश का अपमान होता है।लेकिन डंका बजने का दावा करने वाले हिन्दुवादियो को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता ।

हैरानी तो यह है कि नक़ली या घटिया दवा के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की बजाय अभी भी प्रसाद में मुस्लिम कनेक्शन खोजने में ज़्यादा रुचि है…!