छत्तीसगढ़ की संपदा की खुली डकैती! बालको, FSNL, सेक्टर 9 अस्पताल के बाद अब BSP की बारी?
आज बात किसी एक कंपनी की नहीं, बात छत्तीसगढ़ के अस्तित्व की है! बात उस मिट्टी की है, जिसकी छाती चीरकर पूरे देश को लोहा, कोयला और एल्यूमीनियम मिला, और आज उसी माटी के स्वाभिमान को दिल्ली के हुक्मरानों द्वारा अपने पसंदीदा कॉरपोरेट मित्रों की झोली में परोसा जा रहा है!
सोचिए... पहले बालको को बेचा गया, भिलाई की फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड (FSNL) को बेचने का सौदा हुआ, भिलाई के जीवनदाता सेक्टर 9 अस्पताल तक को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रची गई, और अब सीधी नज़र टिका दी गई है छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े गौरव—भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) पर!
क्या छत्तीसगढ़ सिर्फ कॉरपोरेट्स का 'शॉपिंग मॉल' बनकर रह गया है, जहाँ आओ, बोली लगाओ और राज्य की बेशकीमती संपदा को कौड़ियों के दाम खरीदकर ले जाओ?"
बालको से लेकर FSNL और सेक्टर 9 अस्पताल तक—बेचने की क्रोनोलॉजी समझिए!
"निजीकरण का यह खेल आज का नहीं है, यह एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी है!
- पहला वार—BALCO पर: छत्तीसगढ़ के एल्यूमीनियम के नवरत्न 'बालको' को औने-पौने दामों में निजी कंपनी के हवाले कर दिया गया। वादा था कि रोजगार बढ़ेगा, विकास होगा! लेकिन क्या हुआ? स्थानीय युवाओं के हक और अधिकारों पर ताला लग गया।
- दूसरा वार—FSNL और सेक्टर 9 अस्पताल पर हमला: भिलाई में स्थित FSNL (फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड), जो देश के बड़े-बड़े स्टील प्लांटों का स्क्रैप प्रोसेस करके मुनाफा कमाती थी, उसे बेचने का षड्यंत्र रचा गया। और तो और, भिलाई के लाखों मजदूरों और आम जनता की सेहत का ख्याल रखने वाले ऐतिहासिक सेक्टर 9 अस्पताल तक को पीपीपी (PPP) मोड या निजी हाथों में सौंपने की सुगबुगाहट शुरू कर दी गई! जिस अस्पताल ने पीढ़ियों का इलाज किया, उसे भी मुनाफे का सौदा बना दिया गया!
- और अब तीसरा वार—भिलाई स्टील प्लांट (BSP): जी हाँ! भिलाई स्टील प्लांट सिर्फ ईंट-पत्थर या लोहे का ढांचा नहीं है, यह छत्तीसगढ़ का दिल है, देश का स्टील मैन्युफैक्चरिंग हब है! लेकिन अब इसकी जमीनों और इसकी संपदा पर देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट घराने की सीधी नज़र पड़ चुकी है!"
भूपेश बघेल का तीखा प्रहार—"बीएसपी छत्तीसगढ़ की आत्मा है!"
"इस मामले पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीधे केंद्र सरकार और उद्योगपतियों के गठजोड़ की धज्जियां उड़ाते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने साफ-साफ शब्दों में लिखा है:
'पता चला है कि अडानी भिलाई इस्पात संयंत्र यानी हमारे बीएसपी को देखने आने वाले हैं। अडानी के बीएसपी आने का क्या मतलबहै समझ रहे हैं ना? इसका मतलब ये है कि देश बेचने का अभियान चला रहे नरेंद्र मोदी जी की नज़र अब हमारे बीएसपी पर है। औरउनके प्रिय खरीदार मुआयना करने आ रहे हैं। मोदी जी समझ लें कि बीएसपी छत्तीसगढ़ की आत्मा है। और हम छत्तीसगढ़वासी इसेकिसी सूरत में बिकने नहीं देंगे। किसी भी सूरत में नहीं। यह बात छत्तीसगढ़ भाजपा के नेता भी समझ लें कि बीएसपी बिकाऊ नहीं है।'
दोस्तों! भूपेश बघेल का यह हमला सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं है। यह उस हर एक मजदूर, हर मरीज और हर छत्तीसगढ़िया का गुस्सा है, जिसकी कई पीढ़ियों ने भिलाई को खून-पसीने से सींचा है!"
छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा की डकैती!
"अब सवाल उठता है कि ये उद्योगपति छत्तीसगढ़ पर ही आँखें क्यों गड़ाए बैठे हैं?
क्योंकि छत्तीसगढ़ की धरती के नीचे सोने का अंडा देने वाली मुर्गियां दबी हैं!
- यहाँ का आयरन ओर (लोह अयस्क) दुनिया में सबसे बेहतरीन क्वालिटी का है।
- यहाँ कोयला, लिथियम, बॉक्साइट, डोलोमाइट का अटूट खजाना है।
- यहाँ की नदियां, जंगल और जमीन प्रकृति का अनमोल उपहार हैं।
जब आप बीएसपी, उसकी इकाइयों या उसके अस्पतालों को बेचते हैं, तो आप सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं बेचते! आप उस फैक्ट्री के साथ मिलने वाली हजारों एकड़ की बेशकीमती जमीन, खानों के लीज और प्राकृतिक संसाधनों की चाबी भी उस कॉरपोरेट मालिक को सौंप देते हैं!"
आम जनता को क्या मिलेगा? सिर्फ बेरोजगारी और भुखमरी?
"केंद्र सरकार से हमारा सीधा सवाल है—
- क्या गरीबों का इलाज करने वाले सेक्टर 9 जैसे अस्पतालों को भी उद्योगपतियों के हवाले करना ही आपका 'विकास' है?
- जब सारी कंपनियां प्राइवेट हो जाएंगी, तो हमारे एससी, एसटी और ओबीसी भाइयों के आरक्षण का क्या होगा?
- स्थानीय युवाओं को रोजगार की जगह क्या सिर्फ कॉरपोरेट का शोषण मिलेगा?
छत्तीसगढ़ की माटी से निकलने वाला लोहा पूरे देश का ढांचा खड़ा करता है, और उसी छत्तीसगढ़ के लोगों को अपने ही हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है!"
यह लड़ाई छत्तीसगढ़ के वजूद की है!
अब चुप रहने का समय नहीं बचा है! बालको बिका, FSNL की बोली लगी, सेक्टर 9 अस्पताल पर नजर पड़ी और अब अगर बीएसपी के अस्तित्व पर आंच आई, तो छत्तीसगढ़ की जनता खामोश नहीं बैठेगी!
भिलाई इस्पात संयंत्र और इसकी धरोहर छत्तीसगढ़ का स्वाभिमान है, और यह किसी कॉरपोरेट घराने की जागीर नहीं बन सकता!


