सरगुजा में क्यों बीजेपी के आधा दर्जन से अधिक विधायक रेड जोन में
छत्तीसगढ़ की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी ख़बर निकलकर सामने आ रही है! और यह ख़बर सीधे जुड़ी है - सरगुजा संभागसे! वही सरगुजा, जहाँ 2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने क्लीन स्वीप करते हुए इतिहास रचा था और 14 की 14 सीटें अपनी झोली में डाल ली थीं। लेकिन दोस्तों, राजनीति में जो आज चमक रहा है, ज़रूरी नहीं कि कल भी उसकी चमक वैसी ही रहे!
अंदरखाने की ख़बर यह है कि संगठन और आरएसएस के हालिया इंटरनल सर्वे रिपोर्ट में सरगुजा संभाग के विधायकों की परफॉर्मेंस को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सूत्रों का दावा है कि सरगुजा के 14 में से 9 विधायकों की रिपोर्ट कार्ड 'रेड ज़ोन' यानी बेहद खराब पाई गई है!
अब सवाल यह उठता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया? जिन विधायकों ने 2023 में बंपर जीत हासिल की थी, महज ढाई-तीन सालों में ही उनका रिपोर्ट कार्ड इतना खराब कैसे हो गया?
राजनीतिक विश्लेषकों और अंदरूनी सूत्रों की मानें, तो इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने आ रहे हैं:
- अफ़सरशाही पर लगाम न होना और जनप्रतिनिधियों का दबदबा कम होना: क्षेत्र की जनता का आरोप है कि काम के लिए उन्हें अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और विधायक जी उनकी सुन नहीं रहे हैं।
- कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष: चुनाव जिताने वाले ज़मीनी कार्यकर्ताओं को अब तवज्जो न मिलना और उनके काम अटकना।
- स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकंबेंसी: विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और विधायकों की अपने ही क्षेत्र से दूरी,
- आधिकारिक तौर पर तो पार्टी किसी विधायक की सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करती, लेकिन अगर हम सरगुजा के कुछ हाई-प्रोफाइल विधायकों की पृष्ठभूमि और हालिया विवादों पर नज़र डालें, तो तस्वीर काफी हद तक साफ़ हो जाती है।
- रामकुमार टोप्पो (सीतापुर विधानसभा): पूर्व सैनिक रहे रामकुमार टोप्पो ने जब कांग्रेस के कद्दावर नेता अमरजीत भगत को चुनाव में हराया था, तब वे पूरे प्रदेश में 'जाइंट किलर' के रूप में उभरे थे। लेकिन हाल ही में जिस तरह से सीतापुर में नायब तहसीलदार और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मारपीट और विवाद का मामला सामने आया, और दोनों पक्षों पर एफआईआर (FIR) दर्ज हुई, उससे स्थानीय प्रशासन और जनसामान्य के बीच इनकी छवि को भारी झटका लगा है।
- राजेश अग्रवाल (अंबिकापुर विधानसभा): इन्होंने छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव जैसे दिग्गज नेता को हराकर देश भर की मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। व्यापारी वर्ग से आने वाले राजेश अग्रवाल जी से जनता की अपेक्षाएं बहुत ज्यादा थीं। लेकिन अंबिकापुर जैसे संवेदनशील शहर में बुनियादी समस्याओं और ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल की कमी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
- भैयालाल राजवाड़े (बैकुंठपुर विधानसभा): वरिष्ठ नेता और अपनी बेबाक बयानबाज़ी के लिए जाने जाने वाले भैयालाल राजवाड़े का अपना प्रभाव तो है, लेकिन स्थानीय युवाओं और नए दौर की राजनीति के साथ कदम से कदम न मिला पाना और स्थानीय असंतोष इनके लिए एक चुनौती बनता दिख रहा है।
इसके अलावा, संभाग के अन्य नौसिखिए या पहली बार चुनकर आए विधायकों में से कई ऐसे हैं जो अब तक मंत्री पद या बड़ी ज़िम्मेदारियों की उम्मीद में अपने क्षेत्र की सुध ही नहीं ले पाए हैं।
बीजेपी हाईकमान का रुख हमेशा साफ़ रहता है—'परफॉर्म करो या बाहर जाओ।' अगर समय रहते इन विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति नहीं सुधारी, कार्यकर्ताओं को साथ लेकर नहीं चले और जनता के काम नहीं करवाए, तो तय मानिए कि अगले चुनाव में संगठन नए चेहरों पर दांव खेलने से बिल्कुल नहीं हिचकिचाएगा!
अब आप मुझे कमेंट सेक्शन में बताइए—क्या आप सरगुजा संभाग से हैं? आपके क्षेत्र के विधायक का काम आपको कैसा लग रहा है? क्या वास्तव में ज़मीन पर स्थिति खराब है? अपनी राय कमेंट में ज़रूर लिखें!
