रविवार, 22 जून 2025

ईरान का डर, ज़िद और गर्व…

ईरान का डर, ज़िद और गर्व…


इज़राइल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने दोगुनी ताक़त से इज़राइल पर हमला किया, क्या अमेरिका के युद्ध में कूदने से तीसरे विश्व युद्ध की घंटी बज़ गई है , क्या है ईरान का परमाणु ठिकाना…


ईरान के क़ुम शहर के करीब, एक ऐसा किला सांस ले रहा है जो दुनिया की नींद उड़ाए हुए है — इसका नाम है Fordow Fuel Enrichment Plant। यह कोई आम परमाणु ठिकाना नहीं, बल्कि ईरानी सत्ता का गर्व, डर और जिद तीनों है। सतह से करीब 300 फीट नीचे, सख़्त चट्टानों में सुरंगों के भीतर इस किले को इस तरह बनाया गया है कि कोई बम इसे छू भी न सके। पर जो चीज़ इसे अजेय नहीं बनाती, वो है इज़राइल और अमेरिका का बारीक इंटेलिजेंस जाल — जो Fordow के बाहर नहीं, इसके अंदर तक हर आवाज़ सुनता है

 पत्थर की दीवारें, धातु के रोटर और अंदरूनी डर

Fordow में ईरान वो काम करता है जिससे पश्चिमी दुनिया को सबसे बड़ा खतरा लगता है — high-grade यूरेनियम enrichment। इसका मतलब होता है कि परमाणु बम बनाने की बुनियाद यहीं से तैयार होती है। Iran ने Saddam और Gaddafi से सबक लिया — ओपन field में enrichment रखोगे तो अमेरिका बम गिरा देगा। इसलिए Fordow को पहाड़ के नीचे छिपा दिया गया।

लेकिन दुनिया के सबसे बेहतरीन जासूसों ने ये भी सबक सीख रखा था कि चट्टान से नहीं, इंसान से इन्फॉर्मेशन निकाली जाती है। और वहीं से शुरू होता है Mossad और CIA का अदृश्य खेल।

Mossad की इंसानी जंजीर

इज़राइल की सबसे घातक एजेंसी Mossad ने Fordow के चारों ओर एक ऐसा इंसानी घेरा बनाया है जिसमें कोई scientist, कोई engineer, कोई driver या कोई सुरक्षा गार्ड भी शामिल हो सकता है।

कई बार पैसों से, कई बार ब्लैकमेल से, और कई बार परिवार की सुरक्षा के नाम पर ये लोग अपने ही प्लांट की खबर बाहर भेजते हैं — कब कौन सा rotor बदलना है, कौन सी सुरंग में नया ventilation shaft खोदा जा रहा है।

इसी नेटवर्क ने Fordow के जैसे ही Natanz enrichment plant में centrifuge sabotage कराया था — कभी magnetic bomb से scientist उड़े, कभी remote sniper ने कार रोक कर गोली चलाई।

Unit 8200 और NSA की आंखें

इज़राइल की Unit 8200 और अमेरिका की NSA — ये दोनों agencies Fordow के बाहर की हर communication line, radio chatter, और tunnel sensor को real time में पढ़ती हैं।

Fordow से Tehran तक रोज़ाना जो encrypted report जाती है, वो cipher टूटते ही Tel Aviv और Langley की टेबल पर आ जाती है।

अमेरिकी KH-11 और KH-12 satellite Fordow की छत पर रखे ट्रकों की गिनती भी बदलते देख लेते हैं।

आजकल hyperspectral और AI-based imagery से thermal anomaly से पता चलता है कि पत्थर के नीचे कौन सी सुरंग active है और कौन सी dummy।

Cyber के कीड़े : Stuxnet और उसके वारिस

एक बार Mossad और NSA ने मिलकर दुनिया का सबसे चालाक cyber worm बनाया था — Stuxnet।

इसने Fordow की बहन site Natanz में centrifuge के rotors को खुद-ब-खुद overspeed करवा कर फाड़ दिया था।

आज के दौर में ईरान ने air-gapped systems बनाकर direct hacking रोक दी है, लेकिन phishing emails, fake research links और USB traps से इज़राइल-अमेरिका अब भी firmware poisoning करते हैं।

Smart Dust और Mini Drones : हवा में घुले जासूस

नए दौर में जासूसी सिर्फ उपग्रह या कंप्यूटर तक नहीं है। Mossad छोटे छोटे drones, और smart dust sensors Fordow के ventilation shaft में छोड़ सकता है। ये sensors vibration, gas leaks, और unusual heat record कर AI dashboard पर भेजते रहते हैं।

जैसे ही कोई suspicious drill या centrifuge overspin होता है — Israel Defense Forces या US Fifth Fleet को alert जाता है।

Azerbaijan से लेकर Gulf तक : चारों तरफ जाल

Fordow को घेरने के लिए जमीनी logistics भी active हैं। इज़राइल ने Azerbaijan border पर discrete drone hub बना रखा है।

अमेरिका के पास Iraq, Bahrain और UAE में forward bases हैं — जहां से rapid strike या sabotage squad कुछ ही घंटे में Fordow की logistic lifeline को cut कर सकते हैं।

मतलब साफ है

Fordow की concrete shell उसे बम से तो बचा सकती है, लेकिन जासूसों से नहीं।

उसकी गहराई अमेरिकी Massive Ordnance Penetrator को delay कर सकती है, रोक नहीं सकती।

और Mossad का आदमी अंदर centrifuge poison करने में कितना वक्त लगाएगा — Tehran को खुद नहीं पता।

Fordow का सच : पाताल के भीतर भी डर

Fordow ईरान का गर्व है, लेकिन Tehran के लिए एक perpetual anxiety भी है।

एक तरफ अमेरिका-इज़राइल ने आज तक इसे फुल-scale bombing से बचा रखा, क्योंकि इसका political cost Strait of Hormuz बंद कर सकता है।

दूसरी तरफ, Fordow के दरवाज़े पर Mossad का जासूसी रडार हमेशा ON है — पहाड़ के बाहर भी और अंदर भी।

Fordow बंकर बम से ज्यादा Mossad के आदमी और AI की आंखों से डरता है — और यही इस पाताल का सच है।(साभार)

शनिवार, 21 जून 2025

राहुल का ऐसा जन्मदिन…

 राहुल का ऐसा जन्मदिन… 


राहुल गांधी को लेकर बीजेपी और संघ ने जो निरेटिव बनाया था वह तो कब का धुँआ धुँआ हो चुका है, ऐसे में राहुल को लेकर न केवल कांग्रेस में बल्कि आम लोगों में भी एक नई उम्मीद जगी है, तब भला काफ़ी हाउस में उनके जन्मदिन पर क्या हुआ, यह भी जानना ज़रूरी है… यह सब बताये उससे पहले राहुल का वह जवाब भी जान ले जब उन्हें ईडी दफ़्तर जाना पड़ा…

ईडी ऑफिसर्स ने पूछा कि हम इतने समय से आप से पूछताछ कर रहे हैं आप थकते नहीं हैं क्या ?

राहुल गांधी जी ने बताया उन्होंने ईडी ऑफिसर्स से कहा कि वे विपश्यना करते हैं।उसमें बैठना पड़ता है, तो आदत लग गई है।उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है। 6-7-8 या 10 घंटे बैठने पर भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है।



एक आदमी को तो थकाया जा सकता है, लेकिन कांग्रेस पार्टी के हर नेता हर कार्यकर्ता को थकाना संभव नहीं, सिर्फ कांग्रेस पार्टी के नेता-कार्यकर्ता उस कमरे में नहीं थे। उस कमरे में हर वह शख्स मौजूद था, जो सरकार से बिना डरे लड़ता है। हिंदुस्तान के लोकतंत्र के लिए लड़ने वाले सब लोग मेरे साथ उस कमरे में बैठे हुए थे तो मैं थकूंगा कैसे?

#National Herald वो अख़बार था कि जिसने अंग्रेज़ी हुक्मरानों के नींद उड़ा दी थी,,, आजादी के दीवानों की पहचान थी National Herald,, जिसने दुनियां भर को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से रूबरू कराया,,,,,,,आज जिसको लेकर तुम  ED,के दम पर ,  उसकी बदनामी की कहानियां गढ़ रहे हो!! वो दरअसल तुम्हारी नाकाम साजिशों के कुंठित मानसिकता है,, 

वो E D,, डराते हैं,,, मै तो कहता हूं ABCD,से , पूरी Z तक का पूरा जोर लगा दो,,,,, ये आंधियों में चिराग जलाने वाले शूरवीरों का वंशज है,,,,जिसके पुरखे अंग्रेजी हुक्मरानों की जेलों में भारतीय सभ्यताओं का इतिहास लिखा करते थे,,,,जिसने अपने पुरखों  को बमों और गोलियों की बौछारें से छलनी लाशों को देखा हो,,,,वो पुरखे जिन्होंने भारत को बैलगाड़ी से अंतरिक्ष तक ऊँचाइयाँ दीं,,,,, आज वहीं भारत नफ़रतों के दौर से गुजर रहा है,,,, लोकतंत्र की धज्जियाँ उड़ाई जा रहीं हैं,,,,आज भी ऐसी ताक़तों के खिलाफ़ बेखौफ लड़ने दंभ रखने का जुनून ही राहुल को लोकप्रियता की शिखर पर ले जा रहा है।

राहुल गांधी का जन्मदिन जगह जगह अपने ढंग से लोगो ने मनाया लेकिन कॉफ़ी हाउस में उनका जन्मदिन कुछ इस तरह से मनाया गया कि लोग याद रखेंगे…

सुबह से ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व आयोजन कर्ता बिरेश शुक्ला ने सभी वरिष्ठ जनों और पत्रकारों को सूचित किया था कि आज शाम 7 बजे राहुल गांधी जी का जन्मदिन मनाया जाएगा।

इंडियन काफी हाउस में यह पहली बार हुआ कि राहुल गांधी का बैनर पोस्टर लगाकर केक काटकर सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में यह कार्यक्रम का आयोजन किया गया बाद में स्वल्पाहार का भी आयोजन किया गया।




इस कार्यक्रम में प्रमुख
रूप से कार्यक्रम के आयोजक बिरेश शुक्ला, तिलक देवांगन, चंद्रदेव राय , नरेंद्र ठाकुर, पप्पू बंजारे , दिलीप चौहान , अवस्थी जी, नितिन ठाकुर , अनिल यादव , सुहैल खान ,रेहान खान , सद्दाम सोलंकी , संजय सोलंकी , वरिष्ठ पत्रकार कौशल शर्मा जी, खालसा समिति के जसवंत ग्रेवाल जी , अशोक तोमर (टाटा रिटायर्ड ) राकेश चौबे आरटीआई एक्टिविस्ट, वासु चटर्जी , विजय भट्टाचार्य , ललित सोनी, सजी वर्गीश, पत्रकार शिवशंकर सोनपिपरे , पत्रकार कौशल तिवारी, पत्रकार मोहन तिवारी , पत्रकार विप्लव दत्ता, पत्रकार रजनीश दिवान व अन्य सैकड़ों की संख्या में मौजूद रहे।

शुक्रवार, 20 जून 2025

सुनो…! ऑपरेशन सिंदूर जारी है…

सुनो…! ऑपरेशन सिंदूर जारी है…


 आपरेशन सिंदुर चल रहा हैं इसके समाप्त होने की  कोई अधिकृत घोषणा नहीं हुई मतलब आपरेशन सिंदुर के चलते तीन देशों की यात्रा भी हो गई और  ट्रंप से 
35 मिनिट की बातचीत भी हो गई। और ईधर आपरेशन सिंदुर चल रहा है और ऊधर असीम मुनीर का मजे में अमेरिका दौरा भी चल रहा हैं, लंच भी हो ही गया। कितना गंभीर आपरेशन हैं ये पाकिस्तान को कोई परेशानी नहीं फिर भी चल रहा है और तो और ऐसा भी चल रहा हैं कि मानो कोई बाई पास सर्जरी चल रही हो एकदम खामोशी से…

हैरानी हुई कि आख़िर ऑपरेशन सिंदूर के बीच ये सब हो क्या रहा है,इमेज तो सीज फ़ायर से ख़राब हुई ही है और अब जैसे ही मीडिया में खबर चली के पाकिस्तानी सेनापति मुनरो को ट्रंप ने लंच पर आमंत्रित किया है वैसे ही अमेरिका की पाकिस्तान को एक तरफा झुकाव वाली बात को गलत साबित करने के लिए और मोदी जी के विश्व गुरु चरित्र की रक्षा के लिए फोन कॉल का नॉरेटिव गढ़ा गया!

दरअसल् यह अर्ध सत्य रहा होगा !प्रधानमंत्री के फोन कॉल पर कभी विदेश मंत्रालय को ब्रीफिंग करते हुए नहीं देखा गया है !जब स्वयं प्रधानमंत्री छोटी-छोटी सी बातों के लिए ट्वीट करते है ,,मन की बात करते हैं , फिर इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनके व्यक्तिगत वार्तालाप पर विदेश सचिव कोई वक्तव्य दे यह बात हजम नहीं होती!

तीसरी बात यह है यह सामान्य शिष्टाचार के खिलाफ है क्योंकि प्रधानमंत्री की किसी नेता के साथ हुई व्यक्तिगत बातचीत को विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड पर रखा जाए! विदेश सचिव सरकारके एक विभाग  अधिकारी  मात्र है प्रधानमंत्री की बात यदि विदेश मंत्री कहते केंद्रीय मंत्री परिषद की तरफ से कही जाती तो वह सरकार की बात होती तो ज्यादा असर कारक होती!

 अमेरिका में सिर्फ पाकिस्तान  के सेनापति को जिस तरह ग्लोरिफाई किया गया था लंच की डिप्लोमेसी से उसको न्यूट्रल करने के लिए यह नॉरेटिव घड़ा गया!

दरअसल श्रीमान ट्रंप ने फोन तो किया होगा लेकिन माय डियर फ्रेंड को फोन में उन्होने स्पष्ट रूप से अमेरिका आमंत्रित किया  था कि वह g7 समिट के बाद अमेरिका होते हुए भारत आए और जो  पाक सेनापति के साथ लंच था वह भारत के प्रधानमंत्री पाकिस्तान के सेनापति और अमेरिका के राष्ट्रपति एक साथ करें! 

इस डिप्लोमेसी की वजह थी एक तो ट्रंप यह स्थापित करना चाहते थे की मध्यस्थता उनकी वजह से हुई हुई है दूसरी पाकिस्तान के सेनापति ने उन्हें नोबेल पीस प्राइज के लिए नामांकित किया है अगर भारत के प्रधानमंत्री भी  वहां उपस्थित होते हैं तो शायद इस पीस प्राइज के लिए उनके प्रतिनिधित्व को ज्यादा मान्यता   मिलने के अवसर थे !

बीजेपी की आईटी सेल लगातार एक नॉरेटिव स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि ईरान पर पाकिस्तान आक्रमण करें या ईरान पर अमेरिका जो आक्रमण करेगा उसमें पाकिस्तान के हवाई अड्डा का इस्तेमाल किया जा सके इसके लिए पाकिस्तान के सेनापति को बुलाया गया था! 

पाकिस्तान खुलकर ईरान के साथ है वह उसकी मजबूरी भी है क्योंकि उसे अरब देशों का साथ चाहिए और मुस्लिम कंट्री का भी! ईरान उसका स्वाभाविक दोस्त है और हर बार ईरान पाकिस्तान के साथ रहा है! 

जिओ पॉलिटिक्स की भी बात करें, तो चीन तुर्की जैसे देश जो खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़े थे वह ईरान के समर्थन में है ऐसे में पाकिस्तान अमेरिका के दबाव में ईरान पर हमले की इजाजत दे दे इस नरेटीव में दम नहीं लगता!

दूसरा बीजेपी के दावों की पोल अमेरिका ने फिर खोल दी , जब विदेश सचिव के वक्तव्य के 24 घंटे के पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर एक बार बयान दिया कि भारत पाक युद्ध को न्यूक्लियर व्यवहार से बचने के लिए उनकी मध्यस्थ की बहुत बड़ी भूमिका थी!

और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है जिस फोन की बात की गई है , उसके संदर्भ में अमेरिका से किसी प्रकार की पुष्टि नहीं की गई है !

जब साहेब 35 मिनट तक लालआंख कर कर ट्रंप को धमका सकते हैं, तो क्या कारण है ट्रंप के एक बार फिर बयान देने के बाद प्रधानमंत्री भी खामोश है विदेश मंत्री भी और तथाकथित विशेषज्ञों के अनुसार भारत का सफलतम विदेश मंत्रालय भी!

अमेरिका की स्पष्ट डिप्लोमेसी है उसे साउथ एशिया में अपना अड्डों के लिए पाकिस्तान चाहिए और रूस की नाक में नकल डालने के लिए अफगानिस्तान में अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए बलूचिस्तान में अपनी मनमानी चाहिए! पाक अमेरिका को क्यों प्रिय है , क्योंकि वह अमेरिका के बि हाफ पर ही आतंकवादी गतिविधियों को मॉनिटर करता है! 

चीन के लिए पाकिस्तान व्यापारिक मजबूरी है क्योंकि पाकिस्तान से होकर उसके ट्रेड का एक बहुत बड़ा रास्ता गुजरता है और पाकिस्तान में लगभग सरेंडर की मुद्रा में उसे चीन को सौंप रखा है!

अमेरिका जानता है भारत और चीन के बीच में बहुत सारे विवाद है इसलिए हथियारों की होड़ में चीन भारत को मदद नहीं करेगा और रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा  होने के कारण वैसे ही निर्माण क्षमता में बहुत पीछे हो गया है ऐसे में अमेरिका ही एकमात्र ऐसा प्रतिद्वंदी है जिसे भारत में बाजार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं भारत एक बहुत बड़ा उपभोक्ता बाजार है और हथियारों के बाजार के लिए एक उपयुक्त ग्राहक! इसलिए अमेरिका की नीति भारत को बैलेंस करने की भी है!

भाजपा का थिंक टैंक इस वक्त घबराया हुआ है, क्योंकि जिस तरह इन दिनों मोदी जी की वैश्विक छवि को डेंट लगा है विश्व गुरु की छवि आहत हुई है और सीज फायर करने के बाद , फिर ट्रंप के आगे घुटने देखने के बाद और सबसे बड़ी बात तो यह है पहलगाम और पुलवामा का आतंकवादियों पर साहेब के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकलता! इन सब बातों ने उनके परसेप्शन की हवा निकाल दी है और बुरी तरह बेचैनी महसूस करती हुई उनके आई टी सेल इस तरह रोज नए-नए झूठ नरेटिव गढ़कर सोशल मीडिया और गोदी मीडिया के माध्यम से उस आभामंडल को बचाए रखने की कोशिश कर रही है!(साभार)

रविवार, 15 जून 2025

नाश्ता, नैतिकता और लोकतंत्र: फिनलैंड से भारत तक

 नाश्ता, नैतिकता और लोकतंत्र: फिनलैंड से भारत तक



कुछ महीने पहले की बात है — दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में गिना जाने वाला फिनलैंड अचानक एक अजीब से विवाद में फंस गया। विवाद था — नाश्ते का! जी हां, महज़ एक प्रधानमंत्री के नाश्ते का खर्च। फिनलैंड की पैंतीस वर्षीय प्रधानमंत्री सना मारीन ने अपने सरकारी आवास में रहते हुए अपने परिवार के नाश्ते का बिल सरकारी खजाने से चुकाया। महीने का खर्च था — तीन सौ यूरो। न कोई बड़ी रकम, न कोई रहस्यमय घोटाला। फिर भी वहां की जनता ने बवाल मचा दिया — “हमारे टैक्स का पैसा क्यों?”

मीडिया ने सवाल उठाया। पुलिस ने सरकारी खर्च की वैधता की जांच शुरू की। जनता ने सड़क से सोशल मीडिया तक आवाज उठाई — “पैसे वापस करो, इस्तीफा दो, और घर जाओ!” और यही हुआ। जनता ने कड़ी नजर रखी और आखिरकार चुनाव में प्रधानमंत्री को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

अब सोचिए — यही दृश्य भारत में होता तो?

तीन सौ यूरो तो क्या, यहाँ तो लाखों-करोड़ों का नाश्ता, लंच और डिनर सरकारी खजाने से चलता है। वीवीआईपी बंगले, आलीशान गाड़ियाँ, काफिले, निजी समारोह — सब जनता की जेब से। कोई पुलिस अफसर ऐसी जांच की हिम्मत कर सकता है? कोई मीडिया घराना बिना पक्षपात ऐसी रिपोर्टिंग कर सकता है? और सबसे बड़ी बात — क्या जनता सवाल पूछती है?

भारत में तो नेताओं के लिए ये सब ‘विशेषाधिकार’ माने जाते हैं। जिन्हें रोका-टोका नहीं जाता, बल्कि जाति-धर्म-समाज की दीवारों के पीछे छुपा दिया जाता है। अगर कोई सवाल उठाता है तो भीड़ कहती है — “तुम्हें देशद्रोही कौन बना रहा है?”

तो फर्क कहाँ है?

फर्क नाश्ते की प्लेट में नहीं है। फर्क है नागरिक चेतना में। फिनलैंड में टैक्स का एक-एक यूरो पवित्र है। वहाँ लोग मानते हैं — नेता जनता का सेवक है, मालिक नहीं। अगर वह गलत करता है तो उसे कुर्सी छोड़नी ही होगी। पुलिस और अदालतें सत्ता के डर से नहीं, कानून के बल पर चलती हैं। मीडिया बिकता नहीं, सवाल करता है।

भारत में भी यह संभव है। बस शर्त है — जनता को मालिक बनना होगा।

नेताओं की जाति, धर्म या पार्टी से ऊपर उठकर नागरिक को सिर्फ अपनी मेहनत की कमाई की कीमत समझनी होगी। सरकारी खजाना कोई राजा की जागीर नहीं है। यह खेत में पसीना बहाने वाले किसान, कारखाने में काम करने वाले मजदूर और नौकरीपेशा टैक्स देने वालों का खून-पसीना है।

जब तक हम यह नहीं समझेंगे, कोई सना मारीन नहीं, कोई नाश्ता बिल नहीं — घोटाले, वादे और जुमले ही हमारी किस्मत लिखते रहेंगे।

फिनलैंड खुशहाल है क्योंकि वहाँ सवाल पूछना जुर्म नहीं, अधिकार है। भारत खुशहाल तब होगा जब हर नागरिक सवाल पूछेगा, जवाब मांगेगा और जवाब न मिलने पर नेता को बदल देगा।

नाश्ते से लेकर नीति तक — यही लोकतंत्र की असली परीक्षा है।(साभार)

शनिवार, 14 जून 2025

इजराइल ने ईरान को गाजा समझ लिया था !

 इजराइल ने ईरान को गाजा समझ लिया था ! 



इजरायल के अटैक के बाद ईरान की ओर से जवाबी हमला किया जा रहा है। ईरान ने शनिवार तड़के फिर से इजरायल पर मिसाइलों की बारिश की है। इससे कुछ घंटे पहले शुक्रवार शाम को भी ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों की बौछार की थी।

 शुक्रवार रात से इजरायल पर हमले शुरू किए हैं। ईरानी मिसाइल हमले में इजरायल के कई शहरों को निशाना बनाया गया, जिससे इमारतों को नुकसान हुआ और दर्जनों लोग घायल हुए। ईरान ने किर्यात कंपाउंड पर भी हमला किया है, इसे इजरायल का पेंटागन कहा जाता है। फॉक्स न्यूज के ट्रे यिंगस्ट ने इजरायल के सैन्य मुख्यालय किर्यात के नजदीक नुकसान की बात कही है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन दल इमारतों में जाकर उन लोगों की तलाश कर रहे हैं, जो फंसे हुए हो सकते हैं। 

एक ही रात में ग़लतफ़हमी दूर हो गई। इजराइल की 300 मिसाइल के जवाब में ईरान ने 1500 मिसाइलों का जखीरा तेल अवीब में बिखेर दिया है। कल तक ईरान  को हद में रहने की समझाइश दे रहे ट्रम्प सऊदी अरब से वॉर रुकवाने की गुहार लगा रहे है। अपने महामानव को डपटकर ' सीज़फायर ' कराना आसान था क्योंकि अडानी नाम की नस दबी हुई थी। लेकिन ईरान की बात अलग है। तीन दशक से ज्यादा अमेरिका के सामने खड़ा होकर उसने अपनी रीढ़ की मजबूती  दिखा दी है। 


नुक्सान दोनों तरफ जबरा हो रहा है। तेल अवीब की गगन चुंबी इमारते गाजा के विध्वंस की याद दिला रही है। क्रूड की कीमतों में आग लगना शुरू होने ही वाली है। अल सुबह यह भी स्पस्ट हो गया कि पाकिस्तान , रूस , चाइना और सऊदी ने ईरान के साथ खड़े होने के संकेत दे दिए है भारत क्या कदम उठाएगा , किस तरफ मुंह करेगा आज सुबह तक स्पस्ट नहीं है। 

रफाल की फैल्योर के बाद 3 अमेरिकी एफ 35 के कबाड़ा होने की बात सामने आई है। इन्हे ईरान ने मार गिराया है , एक इसरायली महिला पायलट को बंदी भी बनाया है। संभव हो तो बीबीसी या सीएनएन देखे। बगैर गला फाड़े , बगैर ग्राफ़िक्स के कैसे रिपोर्टिंग होती है , हमारे घटिया मीडिया की ओकात समझ आएगी।

सोनम का भाई गोविंद सचमुच "गोविंद"है

 सोनम का भाई गोविंद सचमुच "गोविंद"है


 इंदौर के रघुवंशी परिवार के यहां एक घटना हुई । जो घटनाक्रम सामने आए वो किसी सस्पेंस थ्रीलर फिल्म  से कम नहीं थी। शुरुआत से लेकर अंत तक बहुत ही ज्यादा रोमांचक । अंत आश्चर्य जनक इससे ज्यादा दुखद।  शुरुआत हुई तो राजा की हत्या हुई । सोनम का लापता हो गई। ऐसा होता है कि आपराधिक प्रवृति के लोग अवसरवादी होते है । एक लड़का लड़की के अकेले होने का अवसर का फायदा  स्थानीय लोग अपनी जगह के पहचान की और दूसरों के अनजान होने की वजह से उठा लेना सामान्य सी बात है । राजा की हत्या और सोनम के लापता होने पर अनेक किस्से कहानी सुने गए। मेघालय सरकार, पुलिस पर उंगली उठी और  रियल लाइफ की फिल्म का क्लाइमेक्स सामने आया तो लोगों का सिर चकरा गया।एक के बाद एक आरोपी पकड़ाते गए और अंत में सूत्राधार सोनम भी अपने अगवा होने के तमाशे को नहीं दिखा सकी। अब सब कुछ सच सामने है। अक्सर हत्या करने वाले ऐसी जगह और परिस्थिति को योजना में रखते है जहां कोई देखने वाला न हो । राजा की हत्या के लिए ऐसी जगह खोजी गई और योजना को अंजाम दे दिया गया। योजना का दूसरा सूत्राधार इंदौर से ही हत्या को अंजाम देने  के बाद सोनम के परिवार को राजा के अंतिम संस्कार में मददगार बनने का स्वांग रचता गया।

इस फिल्म का अंत का सच बहुत ही दर्दनाक और वीभत्स रहा। सारी मर्यादा लांक्षित हो गई।दो परिवार सहित हर किसी को विवाह के रीति रिवाज,पति पत्नी के संबंध सहित मालिक का नौकर के प्रति विश्वास लड़खड़ा गया। सोनम का  राज के प्रति पनपा प्रेम पावन संबंध से ज्यादा किसी और प्रकार के सीधे शब्दों में कहे तो दैहिक आकर्षण ज्यादा था।अन्यथा बहन जैसे रिश्ते(भले दिखावे के लिए हो)को दोनों लांक्षित नहीं करते। सोनम के परिवार के अलावा आरोपी राज की मां भी विश्वास नहीं कर पाई कि एक पवित्र रिश्ते की आड में  अवैध संबंध पनप  रहा है।इसी "दीदी" उद्बोधन के चलते बेफिक्र परिवार ने सोनम का रिश्ता भी तय कर दिया।  पारिवारिक,सामाजिक, आर्थिक और जितने भी वजह हो सकते थे उनमें राज केवल एक अदना सा व्यक्ति ही था जिसकी कोई हैसियत नहीं थी। प्यार, अंधा होता है ये माना जाता है।इस प्रेम कहानी में सोनम और राज भी दोनों आंख से अंधे साबित हुए। साथ जीने की कसमें खाने वाले इन दोनो ने राजा को मारने की कसम खा ली। सोनम और राज की अवैध प्रेम ने एक निर्दोष व्यक्ति की जान ले ली। सभी आरोपी इंदौर से  2183किलोमीटर दूर शिलांग में पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए रिमांड पर है। सभी ने स्वीकार भी कर लिया है कि वे राजा रघुवंशी की हत्या में शामिल थे। मेघालय और इंदौर की पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य इकट्ठे कर लिए है जो  राजा की हत्या के सबूत के रूप में न्यायालय के सामने रखे जाएंगे। पाठकों को ये जानकारी होनी चाहिए कि पुलिस के समक्ष किए गए कबूलनामें की न्यायालय में कोई मान्यता नहीं रहती है।अधिकांश आरोपियों को उनके वकील समझा चुके रहते है कि गुनाह कबूल कर लेना अन्यथा पुलिस की सख्ती के चलते आगे बचना मुश्किल हो जाएगा। वैसे भी हत्यारे , आकस्मिक आक्रोश के चलते कम सुनियोजित ढंग से हत्या की योजना बनाते है,ये बात अलग है आज तक बहुत कम हत्या के आरोपी पकड़ाने के बाद साधारण रूप से चार पांच साल तक तो जमानत ही नहीं पाते है। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और सीसीटीवी के दायरे में आए साक्ष्य परिस्थितियां स्वय बोलती है(res ipsa loquitur) के आधार पर ही अंतिम निर्णय होगा।

 ये तो ऑपरेशन हनीमून का मध्यांतर है।

मध्यांतर के बाद सस्पेंस थ्रीलर फिल्म का  सामाजिक पक्ष सामने आता है। राजा रघुवंशी  का परिवार आक्रोशित होकर सोनम की तस्वीरों का दहन करती है। समाज सोनम के परिवार को जात बाहर करने के लिए उद्वेलित होता है।आरोपी राज की गरीब मां अबतक ये नहीं मान पा रही है कि  कभी दिन में कपड़ा दुकान में सेल्समैन  और सुबह पेपर बांटने के बाद सोनम के परिवार में अदनी सी नौकरी कर  बिना पिता के परिवार का पालन पोषण करने वाला राज एक निरीह राजा की हत्या में साझेदार है।

 महाभारत के प्रसंग में द्रौपदी  कृष्ण को गोविंद कहती थी।द्रौपदी के हर मुश्किल में गोविंद खड़े रहते थे।गोविंद ने द्रौपदी को ये भी समझाया था कि अपनी महत्वाकांक्षा  के चलते तुम्हे नुकसान होगा तब मैं तटस्थ रहूंगा।

 ऐसी ही परिस्थितियों में एक शख्सियत उभरता है वह है सोनम का भाई, गोविंद जिसे जब तक सच का पता नहीं था तब तक भाई होने का धर्म निभाया।बरसते पानी में बहन को खोजा, न जाने कहां कहां दौड़ा। गाजीपुर से सोनम के फोन करने पर पुलिस को सूचना देने की नसीहत इसी भाई की ही थी। सोनम के राजा के हत्या में सूत्राधार होने का सच सामने आने पर  मृत राजा रघुवंशी के घर जाकर  राजा की मां से मिलना,  बहुत ही बड़े संवेदना का उदाहरण है।जरा सी बात पर संबंधों में कड़वाहट लाना, बोलचाल बंद कर देना,रिश्ता तोड़ देना सामान्य बात हो चली है ऐसे में अपनी ही बहन के द्वारा  हत्या कर देने के बाद पीड़ित परिवार के घर जाना अदम्य साहस ही है। अपने बेटे, भाई  और रिश्तेदार के हत्या के चलते एक परिवार का हत्या करने वाली लड़की के परिवार के प्रति आक्रोश, नफरत होता ही है।इनकी परवाह किए बगैर आरोपी सोनम के भाई  गोविंद का राजा के घर जाना, दुख को आत्मसात करना और अपनी बहन से रिश्ते खत्म करने की बात के अलावा मृत  राजा को न्याय दिलाने के लिए खुद को समर्पित करना निश्चित रूप से सोनम के भाई को बहुत ही बड़ा बना दिया है।

आप सोचिए कि कितनी विपरीत परिस्थिति में सोनम के भाई ने निर्णय लिया होगा।ये जानते हुए कि जिस प्रकार दुर्योधन के मारे जाने पर धृतराष्ट्र भीम को गले लगाकर मार देना चाहते थे वैसी ही परिस्थिति सोनम के भाई के लिए भी थी। निर्विकार भाव से किया गया साहस नफरत के जंगल में अपनत्व का एक बीज प्रस्फुटित करता तो है। सचमुच, गोविंद ने अपने नाम को सार्थक कर दिया। एक बहन, जो जब तक जानकारी में अगवा थी, भाई  ने उसके जिंदा होने या मरने की सत्य में लाश को पाने के लिए जी जान लगा दिया। इसी बहन के राजा की हत्या  में शामिल होने का सच जानकर कितने कड़े मन  से सालों राखी बांधने वाली बहन से रिश्ते खत्म करने की बात कहने वाला "गोविंद" ही हो सकता है। मै बड़े आदर,सम्मान,और श्रद्धा से इस आधुनिक गोविंद के सामने नत  मस्तक हूं

संजय दुबे 

7415553274

शुक्रवार, 13 जून 2025

आख़िर एलपी पटेल का हो गया निलंबन…

 आख़िर एलपी पटेल का हो गया निलंबन… 


प्रभारी डीईओ एल पी पटेल को अनुशासन हीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया लेकिन निलंबन क्यों देर से हुआ यह सवाल अब भी बना हुआ है, उन पर अपनी पत्नी सुषमा पटेल की आत्मानंद स्कूल में नियुक्ति से लेकर चारित्रिक आरोप के अलावा युक्तियुक्तकरण में भी गड़बड़ी का आरोप है। यही नहीं वे इससे पहले भी कई बार निलंबित हो चुके हैं तो पत्नी सुषमा पटेल भी कार्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित हो चुकी है। क्या है पूरा मामला…


ताज़ा मामला छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में हायर सेकेंडरी और हाई स्कूल परीक्षा के दौरान जिले में परीक्षा केंद्रों की निगरानी और अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए एक जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल का गठन का है । 

इस दल का मुख्य उद्देश्य परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना और आवश्यक व्यवस्थाओं की निगरानी करना था। लेकिन इस दौरान प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी एल.पी. पटेल ने बिना कलेक्टर की पूर्वानुमति और निर्देश के उड़नदस्ता दल में मनमाने तरीके से परिवर्तन और संशोधन किया। इतना ही नहीं, उन्होंने तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी को कथित रूप से धमकी देने, दुर्व्यवहार करने और वेतन रोकने जैसे गंभीर आरोपों से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

अनुशासनहीनता के लिए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी निलंबितइन सभी मामलों पर पटेल को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया, जिसका जवाब उन्होंने निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद राज्य शासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9(1) क के तहत एल. पी. पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

एलपी पटेल पर रिपोर्ट…

https://youtu.be/itOcDBMz3BA?si=2_KdhdW67nS8jBxo