एपस्टीन फाइलों में भारतीय कनेक्शन और विवाद
1. पृष्ठभूमि (Background)
अमेरिकी अदालत द्वारा 'एपस्टीन फाइलों' के सार्वजनिक खुलासे के बाद भारत की राजनीति में भारी हलचल देखने को मिली। जारी तस्वीरों और ईमेल रिकॉर्ड्स से यह स्पष्ट हुआ कि भारत के मौजूदा केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 2014 से 2016 के बीच एपस्टीन से 3 से 4 बार मुलाकातें की थीं। उस समय वे भारतीय विदेश सेवा (IFS) से सेवानिवृत्त होकर एक गैर-सरकारी संस्था (IPI) में कार्यरत थे।
2. मुख्य बिंदु और पत्राचार (Key Findings & Email Exchanges)
तस्वीर का संदर्भ: यह तस्वीर न्यूयॉर्क स्थित एपस्टीन के आवास की है, जहाँ इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में बैठकें हुई थीं।
ईमेल संवाद: फाइलों के अनुसार, एपस्टीन ने अपनी सहायक के भारत वीजा के लिए मदद मांगी थी। इसके अलावा, भारत में इंटरनेट अर्थव्यवस्था और 'डिजिटल इंडिया' जैसे विषयों पर चर्चा से जुड़ी ईमेल भी सामने आईं।
3. हरदीप सिंह पुरी का पक्ष (Minister's Clarification)
विवाद बढ़ने पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेसनॉफ़्रेंस आयोजित कर आरोपों को खारिज किया और स्थिति स्पष्ट की:
IPI प्रतिनिधिमंडल: उन्होंने कहा कि ये मुलाकातें केवल पेशेवर थीं और वे इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में मिले थे।
कोई अनैतिक संबंध नहीं: मंत्री ने जोर देकर कहा कि वे कभी भी एपस्टीन के निजी द्वीप (Little St. James) नहीं गए।
'टू-फेस' (Two-faced) ईमेल: उन्होंने एपस्टीन द्वारा लिखे एक ईमेल का हवाला दिया जिसमें एपस्टीन ने पुरी को "टू-फेस" कहा था। पुरी ने तर्क दिया कि इससे साबित होता है कि उनके बीच कोई गहरी या घनिष्ठ दोस्ती नहीं थी।
4. विपक्षी दल (कांग्रेस) के सवाल
विपक्षी दलों, मुख्य रूप से कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाए और मंत्री के इस्तीफे की मांग की:
सवाल: कूटनीतिक हलकों और निजी बैठकों के दौरान किस हैसियत से चर्चा की जा रही थी?
मांग: विपक्ष ने पूरे मामले की गहन निष्पक्ष जांच की मांग की है।
यह तस्वीर और इससे जुड़े दस्तावेज अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी किए गए Epstein Files का हिस्सा हैं। हालांकि तस्वीरें और ईमेल वास्तविक हैं, लेकिन मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि ये पूरी तरह से आधिकारिक/पेशेवर संदर्भ में थीं और उनका एपस्टीन के व्यक्तिगत अपराधों या गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं था।
