शुक्रवार, 2 अगस्त 2024

जात न पूछो राहुल की...

जात न पूछो राहुल की... 


राहुल गांधी किस जाति के हैं यह बताये इसमे पहले यह जान लेना जरूरी है झूठ और अफवाह के आसरे नफरत की राजनीति में माहिर भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी पर सीधे हमला क्यों बोल दिया है। इस हमले से भाजपा की खीज साफ दिखाई भी देने लगी है। क्योंकि अनुराग ठाकुर की बातों को जब स्पीकर ने विलोपित कर दिया उसके बाद भी देश के प्रधानमंत्री ने अपने एक्स हेडल में इसे प्रदर्शित कर संसद की गरिमा का अवमानना करने से नहीं चूके।

दरअसल यह सारा मामला जातिय जनगणना से जुड़ा हुआ है जिसका भाजपा खुलकर समर्थन नहीं कर पा रही है। और मीडिल क्लास और पिछड़े वर्ग के बिखरते वोट ने उनके भीतर के हिन्दूत्व को हिला कर रख दिया है।

दरअसल हिन्‌दु वोटरों के ध्रुवीयकरण के आसरे सत्ता तक पहुंची भाजपा के लिए नरेंद्र मोदी के करिश्में से ज़्यादा असरदार कैग का वह फर्जी रिपोर्ट और लोक आयोग को लेकर अन्ना आन्दोलन का वह तूफान था जिसकी वजह से कांग्रेस को बदनाम करने की साज़िश रची गई । लेकिन लोगों को समझाया गया कि नरेंद्र मोदी के चेहरे के आसरे ही बीजेपी सत्ता में आ सकी।

अच्छे दिन आयेंगे के सपने 2047 के विकसित भारत तक आते आते इस कदर  रिसने लगा कि मीडिल और पिछड़ा वर्ग मोदी के हाथों से फिसलते गया।

२०१९ के परिणाम का ठसक, अहंकार, आत्ममुग्धता की हवा निकल गई तो इसकी वजह राहुल गांधी का वह भारत जोड़ो यात्रा थी जो कांग्रेस को वैचारिक रूप से भी बदलकर जाति जनगणना तक पहुंचा दिया। और यही जाति जनगणना अब भाजपा और संघ के कथित हिदुत्व के आधार को हिला कर रख दिया है।

जाति किसी जननेता की क्या होती है? यह सवाल इसलिए भी भाजपा ने उठाये हैं ताकि खिसकते जनाधार को बचा लें या मोदी सत्ता की करतू‌तों पर पर्दा डाल ले।

इसरे अलावा एक बड़ी वजह है राहुल गांधी की भारतीयता की वह छवि जो किसी भी जाति या धर्म से उपर हो चुका है। 

हालांकि भाजपा के स्लीपर सेल का गांधी नेहरू परिवार की जाति और धर्म को लेकर पहला वार नहीं है इससे पहले भी वे इसे हवा देते रहे है। 

लेकिन आमने - सामने मी स्थिति पहली बार बनी है। लेकिन भाजपा ने राहुल गांधी की जाति पूछने में देर कर दी क्योंकि अब राहुल गांधी की जाति भारतीयता हो चुकी है, पूरा देश धीरे-धीरे राहुल को स्वीकार कर चुका  है सिवाय संधी संस्कारित्रों के…?


इसके बाद भी यदि सवाल राहुल के दादा फिरोज गांधी के मुसलमान  होने की अफ़वाह को हवा दी जा रही है तो देश को यह जान लेना जारी है कि फिरोज गांधी मुसलमान नहीं पारसी थे, वे फिरोज खान लिखते थे और महात्मा गांधी के द्वारा उन्हें गोद लेने के बाद वे गांधी  कहलाने लगे। उनका अंतिम संस्कार भी इसी वजह से हिन्दू रिति रिवाज से हुआ।

पारसी जोरास्ट्रि‌यन धर्म का पालन करते हैं, जो आग को पवित्र मानकर उसकी पूजा करते हैं। और जिनके बारे में आचार्य चतुर सेन ने अपने उपन्यास वयम रक्षाम में इनको यमराज की जाति के वंशज माना है....

अब सवाल पंडित नेहरू के मुसलमान होने के अफवाह का है तो इस पर केवल वहीं लोग भरोसा कर सकते है जो आँखों में कट्टरता की पट्टी बांधे घूम रहे हैं।

दररूसल पूरा खेल या षड्यंत्र की वजह अंग्रेजों की चापलूसी के सच को विस्मृत कर देने की कवायद है और कुछ नही...!

बुधवार, 31 जुलाई 2024

मोदी सत्ता के इन रिकार्डो का कोई तोड़ नहीं...

 मोदी सत्ता के इन  रिकार्डो का कोई तोड़ नहीं...


हालांकि आम तौर पर कहा जाता है कि रिकार्ड तो टूटने के लिए ही बनता है लेकिन यदि रिकार्ड भयावकता का हो, कालिख भरा हो तो ऐसे रिकार्ड कोई नहीं तोड़‌ना चाहेगा कि इतिहास उन्हें खलनायक के रूप में दर्ज करे। लेकिन हाल में सोशल मीडिया में जो चर्चा है वह मोदी सरकार के अपने मंत्रियों की ही नहीं, उनके सहयोगियों की भी चर्चा जमकर हो रही है।

हावड़ा मुंबई मेल के दुर्घटना ग्रस्त होने के बाद लोगों का गुस्सा सोशल मीडिया के जरिये जिस तरह से सामने आया है वह किसी भी सरकार और उसके मंत्रियों के लिए बेचैन करने वाला है लेकिन बेशमी के इस दौर में नैतिकता की दुहाई देने का मतलब स्वयं का अपमान कराने वाली बात हो गई है।

मोदी की रिकार्ड तोड़ सरकार नामक शीर्षक से चल रहे विडियों और तस्वीर जमकर वायरल हो रहे हैं। जिसमें सबसे पहले नम्बर पर मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तस्वीर के आगे लिखा गया है 'पेपर लीक का रिकार्ड '

धर्मेंद्र प्रधान उड़ीसा राज्य से आते हैं और मोदी सरकार में दमदार मंत्री माने जाते हैं। 2014 के बाद अब तक 70 से अधिक बार पेपर लीक होने का मामला सामने आया है, इससे लोगों के डॉक्टर बनने का सपना ही नहीं टूटा बल्कि कितने ही युवाओं का भविष्य चकनाचूर हो गया, क्योंकि कई युवाको की नौकरी के लिए निर्धारित आयु सीमा ही समाप्त हो गई। यहीं नहीं सरकार्र ने परीक्षा फॉर्म बेचकर करोड़ों कमाये।

आपदा में अवसर का इससे सटिक उदाहरण और क्या होगा।

दूसरे नम्बर पर जो तस्वीर है वह नीतिश कुमार की है। बिहार के मुख्यमंत्री जो बीजेपी के सहयोग से चल रहे हैं। पुल गिरने का रिकार्ड। लेकिन मजाक है कोई उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा दे। दस से ज्यादा पुल तो  2023-24 में ही गिर गये।

तीसरे नम्बर पर मोदी सत्मार के रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव की तस्वीर है। एक दुर्घटना होते ही मंत्री पद से इस्तीफा दे देने की नैतिकता से इतर दर्जनों दुर्घटना के बाद भी यदि उनके माथे  पर शिकन नहीं होने का दावा किया जाता है तो यह इतिहास के पन्नों में बेशर्म राजनीतिज्ञ के रूप में जरूर दर्ज होगा। 

हर दुर्घटना के बाद रेलों में बेहतर सुविधा का दावा करने के अश्वनी यैष्णव के इस दौर में बुजुर्गो की सुविधा छिन लेने के साथ ही स्टेशन-पटरी, ट्रेन बेच देने या निजिकरण कर देने का खेल भी हुआ तो मालगाड़ी से अधिक कमाई के लिए सर्वाधिक यात्री ट्रेने भी इसी दौर में रद्द हुई।

वंदेभारत के चक्कर में भारत के ग़रीबों की जेबों पर डाका डालने का आरोप भी लगे।

तब देखना है कि आगे और कौन, कितने रिकार्ड तोड़‌ता है। 

सोमवार, 29 जुलाई 2024

बिजली दर में वृद्धि में भी अदानी…?

 सरकार का खेल, छोटे उ‌द्योग फेल


छत्तीसगढ़ में एकतरफ अडानी के पावर प्लाट को विस्तार देने कीखबर है तो दूसरी यहाँ के छोटे उद्योगों में संकट गहराता जा रहा है।

क्या इन दोनों खबरों में कोई ताल-मेल है, कहना मुश्किल है लेकिन जिस तरह से अडानी पावर प्लॉट के विस्तार के लिए होने जा रहे जनसुनवाई में पूरा प्रशासन जुटा हुआ है वह हैरान करने वाला है। तिल्दा क्षेत्र स्थित अदानी पॉवर प्लाट हो या रायगढ़ क्षेत्र का मामला हो। अदानी पॉवर प्लांट के विस्तार को लेकर जन‌सुनवाई में प्रशासन की ताकत के आगे जन विरोध को दबाने की जो खबरे आ रही है वहा कम चौकाने वाला नहीं है। पॉवर प्लोर के विस्तार के लिए किसान अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है और क्षेत्र में स्थित सरकारी जमीनों को दे दिये जाने की खबर सुर्खियों में है।

सत्ता बदलते ही जिस तरह से हसदेव से लेकर पॉवर प्लांटों तक  अदानी की योजनाओ के विस्तार की खबरें आ रही है, वह डबल इंजन वाली विष्णु देव साय सरकार की नियत पर सवाल खड़ा  कर रही है। 

तो दूसरी तरफ साय सर‌कार ने  सत्ता में बैठने के 6 माह के भीतर ही बिजली की दरों में जो बढ़ोतरी की है उसे लेकर प्रदेश के उद्योग संघों में नाराजगी की खबर ज़ोर पकड़ने लगी है।

उद्योग संघ ने बिजली दर में वृद्धि के खिलाफ मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा है लेकिन अभी तक इनकी माँगो पर विचार तक नहीं होने की खबर ने उद्योगों के बंद होने में खतरे को बढ़ा दिया है।

खबर यह भी है कि बिजली दर में बढ़ोतरी से परेशान कई उद्योगों ने अन्य विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है। स्पंज आयरन मैन्युफैक्चरर्स, रोलिंग मिल , मिनी स्टील प्लांट से जुड़े उद्योगपतियों में से कई लोग निजी बिजली कंपनियों की ओर रुख़ कर रहे हैं तो कुछ लोग धंधा ही बदल देने की बात कर रहे हैं।

री-रोलिंग मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी का कहना है कि एकाएक बिजली की कीमत बढ़ा देने से लागत तीन सौ से पांच सौ रूपये टन बढ़ गई है। तो मिनी स्टील प्लांट के महासचिव मनीष घुष्पड़ का कहना है कि यह उद्योगों के लिए गंभीर मसला है और उम्मीद है कि सरकार इस पर विचार करेगी।

इधर चर्चा इस बात की भी है कि निजी बिजली कंपनी को फायदा पहुंचाने ही बिजली की दरों में बढ़ोतरी की गई है, क्योंकि इस बढ़े दर से उद्योगों को बिजली करीब 7.60 रुपये प्रति मिल रही है और निजी कंपनी से ख़रीदने पर यह 6 रुपये पड़ेगी।

निजी कपनी को लेकर जब हमारी टीम ने पड्‌‌ताल की तो बताया गया कि अदानी से बिजली ख़रीदना सस्ता पड़े‌गा । यानी अदानी से बिजली खरीदने पर 6 रुपये प्रति यूनिट पड़े‌गा।

ऐसे में सवाल यही है अदानी को फायदा पहुंचाने कि क्या यह  कोई नया खेल है।

इधर बड़े हुए बिजली के दामों को लेकर युवा कांग्रेस ने बूढ़ा तालाब पर बने बिजली दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया ।प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बिजली बिल जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया. प्रदर्शन के दौरान युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा ने कहा कि '' प्रदेश की जनता बढ़े हुए बिजली के दामों से परेशान है. कांग्रेस की सरकार ने पूर्व में बिजली बिल हॉफ कर दिया था. जब बीजेपी की सरकार आई तो उसने बिजली बिल में लंबा चौड़ा इजाफा कर दिया.''कंपनी मालिकों ने शटडाउन का ऐलान किया है उसका समर्थन कांग्रेस ने किया है. जिला कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश दुबे ने कहा कि ''प्रदेश में जब तक भूपेश बघेल की सरकार रही है तब उद्योग नीति लाया गया था, उसके तहत 5 साल उद्योग फला फूला और यहां के उद्योगों ने बहुत अच्छा काम किया. पूर्व की सरकार में छत्तीसगढ़ की जीडीपी बढ़ी लेकिन 6 माह में ऐसा क्या हो गया कि इन उद्योगों को बंद कराने पर ये सरकार आमादा हो गई है.''

राहुल ने सुना दिया चक्रव्यूह…

 अदानी-अंबानी का जिक्र क्यों बर्दाश्त नहीं  कर पाती बीजेपी...


राहुल गांधी ने एक बार फिर मोदी सत्ता के दुखती  नस पर हाथ रख दिया। महाभारत के चक्रव्यूह को लेकर जैसे ही राहुल गांधी ने अदानी-अंबानी का जिक्र किया वैसे ही पूरा सदन शोर-शराबे में डूब गया। राहुल ने यहा तक कह दिया कि यदि अदानी अंबानी का नाम सदन में नहीं ले सकते तो कोई ऑप्शन दें। इस नामों का।

दरअसल बजट भाषण में राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार अपने 6 लोगों के साथ मिलकर जो चक्रव्यूह रचा है उसने किसान, मजदूर, मीडिल क्लास, छोटे उद्योगों को अभिमन्यु  की तरह फँसा  दिया है।


राहुल गांधी ने अग्निवीर को लेकर भी मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि बजट में इसका ज़िक्र नहीं है।राहुल गांधी ने देश में डर के माहौल की बात कही। राहुल गांधी ने महाभारत के जरिये बीजेपी पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने चक्रव्यूह का जिक्र करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि चक्रव्यूह को 6 लोग कंट्रोल कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि चक्रव्यूह में देश को फंसाया गया है। राहुल गांधी ने भाषण के दौरान सरकार पर हमला करते हुए कहा कि कहा कि डरो मत, डराओ मत।


'मंत्री, किसान, वोटर सब डरे हैं'

राहुल गांधी ने कहा कि आज मंत्री, किसान, वोटर, वर्कर सभी डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसके बारे में मैंने काफी सोचा और एक जवाब मैं प्रस्तावित करता हूं। हजारों साल पहले हरियाणा में कुरुक्षेत्र में एक युवा अभिमन्यु को 6 लोगों ने चक्रव्यूह में मारा था। फंसाकर मारा था। चक्रव्यूह के अंदर डर होता है, हिंसा होती है, और अभिमन्यु को चक्रव्यूह में फंसाकार मारा। राहुल ने कहा कि मैंने चक्रव्यूह के बारे में तोड़ी रिसर्च की, पता लगा कि उसका दूसरा नम पद्म व्यूह वो लोटस के शेप में होता है। 21वीं सदी में सर एक नया चक्रव्यूह तैयार हुआ है। वो भी लोट्स की शेप में है, उनका चिह्न पीएम अपनी छाती पर लगाकर चलते हैं। यही चक्रव्यूह किसान, मीडियम साइज बिजनेस के साथ हो रहा है, द्रोण, कृतवर्मा, शकुनी, कृपाचार्य, अश्वस्थामा, आज भी चक्रव्यूह के बीज में है 6 लोग हैं।


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Rahul Gandhi Speech: पूरा परीक्षा सिस्टम ही फ्रॉड, शिक्षा मंत्री कुछ समझ नहीं पा रहे... संसद में राहुल गांधी के बयान पर बवाल


संपत्ति के हक पर सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि किसी एक शख्स को देश की पूरी संपत्ति का हक रखने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि वित्तीय शक्ति, संस्थान, एजेंसी, सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स और तीसरा राजनीतिक कार्यकारी इस चक्रव्यूह का हार्ट है। राहुल ने कहा कि मेरी उम्मीद है थी कि इस बजट में इस चक्रव्यूह को कमजोर करेगा। किसान, मजदूर की मदद करने वाला होगा। इसकी नीयत जो है वो है बिग बिजनेस, राजनीतिक मोनोपली को मजबूत करने वाला है, एजेंसी को मजबूत करने वाला है।कुर्सी बचाओ बजट, सरकार बचाओ योजना... पढ़िए बजट को लेकर विपक्ष के नेताओं के रिएक्शन राहुल गांधी ने नोटबंदी, जीएसटी और टैक्स टेररिज्म के जरिए हमला किया गया। इसको रोकने के लिए बजट में आपने कुछ नहीं किया है। ये जो आपकी नीतियां है जो कोविड के समय बड़े बिजनेस की मदद की और छोटी बिजनेस को खत्म किया, उसके कारण आज देश के युवा को रोजगार नहीं मिल सकता है। एक युवा को रोजगार नहीं मिल सकते हैं।

पेपर लीक की हकीकत राहुल गांधी और अखिलेश, दोनों की मुश्किलें... शिक्षा मंत्री ने किस बात पर किया राहुल गांधी ने कहा कि बजट में आपने इंटर्नशिप प्रोग्राम है। आपने कहा कि सबसे बड़ी 5 कंपनियों में होगा। 99 फीसदी युवा को इस इंटर्नशिप प्रोग्राम से कोई लेना देना नहीं है। कांग्रेस नेता ने कहा कि मेन मुद्दा आज युवाओं का परीक्षा में पेपर लीक है। जहां भी हम जाते हैं वो कहते हैं बेरोजगारी है लेकिन पेपर लीक भी होता है। 10 साल में 70 बार हुआ है पेपर लीक।

रविवार, 28 जुलाई 2024

बाबा की बोलती बंद...

 बाबा की बोलती बंद... 


प्रदेश कांग्रेस के कद्‌दावर नेताओं में शुमार टी एस सिंहदेव उर्फ बाबा की इन दिनों बोलती बंद है। कहा जाता है कि जिस स्वास्थ विभाग में घपले - घोटाले की विधानसमा में गूंज हुई उसे लेकर कांग्रेसी भी हैरान है कि आख़िरकार बाबा के विभाग में यह सब हो क्या रहा था। कैग की रिपोर्ट को लेकर स्वास्थ विभाग के जिस मामले की विधानसमा में चर्चा हुई, उससे कांग्रेस की ऐसी फजीहत कभी नहीं हुई थी।

मुख्यमंत्री बनने के लिए दस साल तक धमा चौकड़ी मचाने वाले बाबा की इस स्थिति को लेकर कहा जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद उन्हें पूरी उम्मीद थी कि कांग्रेस जब भी सत्ता में आयेगी वे मुख्यमंत्री बन ही जायेंगे लेकिन सत्ता आते ही जब कई नेता सक्रिय हो गये तो वे भूपेश बघेल के साथ मिलकर ढाई साल मुख्यमंत्री बनने तैयार तो हो गये लेकिन यह होशियारी भी काम नहीं आई और मुख्यमंत्री का पद तो मिला नहीं उल्टे विधायकी भी चली गई।

और विधायकी क्या गई, उनकी सक्रियता भी ढूंढने नहीं मिल रहा है। और कहा जा रहा है कि अब तो उन्हें कांग्रेस की बैठनों में भी नहीं बुलाया जाता।.

उपर से विधानसमा में कैग की रिपोर्ट पर जिस तरह से स्वास्थ विभाग में घपलेबाजी की खबर सामने आई है उससे रही सही हज्जत का भी पलीता लग गया।

भूपेश सरकार के दौरान स्वास्थ विभाग वे कितना संभाल रहे थे इसे लेकर कई तरह की चर्चा है। और इसमें हुए घपले घोटाले की चर्चा के दौरान एक बाबा समर्थक का कह दिया कि बाबा का घपले- घोटाले के खेल से क्या  लेना देना है, तो दूसरे ने कहा  कि यदि इस घपले घोराले से उनका लेना देना नहीं है तो पंचायत मंत्री की तरह स्वास्थ विभाग भी छोड़ देना था। और जब विभाग ही नहीं संभाल पा रहे थे तो फिर प्रदेश संभालने का सपना क्यों देख रहे थे।

यानी यहां भी फूल बेहज्जती। 

कांग्रेस तो कांग्रेस है, और कांग्रेसी कब किसी को बख्शते हैं, पीठ फेरा की बुराई शुरू।

ऐसे में बाबा कि दुविधा यह है कि वे कांग्रेस छोड्‌कर कहाँ जाये। क्योंकि उन्होंने भाजपा में नहीं जाने को लेकर जनम जन्मान्तर की बात पहले ही कह दी है।


शनिवार, 27 जुलाई 2024

हसदेव में जन सुनवाई से पहले एनआईए का छापा…

 हसदेव में जन सुनवाई से पहले एनआईए का छापा

अर्बन नक्सली होने का संदेह...


छत्तीसगढ़ के जामुल निवासी श्रमिक नेता कलादास डहरिया के निवास पर एनआईए की दबिश को लेकर श्रमिक संगठनों में हंगामा मच गया है। नक्सलियों से संबंध को लेकर की गई इस कार्रवाई में छत्रीसगढ़ मुक्ति मोर्चा से जुड़े कलादास डह‌रिया लंबे समय से मजदूरों की हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और  इसी कड़ी में उन्होंने अदानी के सब द्वारा खरीदे गये सीमेंट कंपनी एसीसी  में भी मजदुरों के हक में आवाज उठाई थी। कहा जाता है कि वे हसदेव बचाओ आंदोलन को लेकर भी बेहद सक्रिय हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ एनआईए की टीम ने छापेमारी के दौरान न केवल कलादाएस डह‌रिया से पांच घंटे पूछ‌ताछ की बल्कि घर की तलाशी लेकर लेपटाप, पेन ड्राइव और मोबाईल फोन को जब्त किया है।

बताया जाता है कि एन आई ए की टीम ने यह कार्रवाई  रेला नाम के एक एनजीओ को लेकर की है जिसका पर्चा भी डह‌रिया के घर से बरामद हुआ है जिसका संबंध झारखंड से है, कलादास डहरिया को एक अगस्त को पूछताछ के लिए रांची बुलाया गया है।

रेला संगठन  के बारे में कहा जाता है कि यह संस्था किसान, मजदूर और आदिवासियों को संगठित करने का काम करता है। 

पांच अलग- अलग गाड़ियों में पहुंची एन आईए की टीम ने कलादास डहरिया की लड़की से भी पूछताछ की है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि फिलहाल कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है।

इधर कलादास डह‌रिया ने आरोप लगाया है कि एनआईए की पूरी कार्रवाई  सरकार के इशारे पर की जा रही है। चूंकि वे एसीसी सीमेंट कंपनी में मजदुरों की आवाज उठाते रहते हैं और अब जब एसीसी को अडानी ने खरीद लिया है तब भी वे मजहरों के हक की आवाज बुलंद कर रहे हैं। इस‌लिए सरकार उनकी आवाज बंद कर देना चाहती है। उन्होंने एक अगस्त को रांची जाने की बात कहते हुए कहा कि मजदूर किसान और आदिवासियों की  हितों की बात वे करते रहेंगे। ऐसी कार्रवाइयों से उन्हें और बल मिलता है।

इधर दो अगस्त को अडानी की एक अन्य कंपनी के मामले में होने वाले जनसुनवाई से भी इसे जोड़कर देखा जा रहा है।

राजस्थान बिजली कंपनी के लिए हसदेव की कटाई को लेकर दो अगस्त को होने वाली जन सुनवाई को लेकर जबरदस्त विरोध की खबर के बीच एनआईए की कार्रवाई को लेकर एक बार मोदी सरकार फिर निशाने पर है। देखना है कि अदानी की कंपनियों के विस्तार को लेकर और क्या क्या खबरें आती है। 

राजनीति में खत्म हो चुकी मानववाद को पुर्नजीवित करने की कोशिश...

 राजनीति में खत्म हो चुकी मानववाद को पुर्नजीवित करने की कोशिश... 




अपनी जिस जूती को पहनकर आदमी घर के भीतर इसलिए नहीं जाता कि घर अपवित्र हो जायेंगा, तब दूसरे की जूती को अपने जंघे पर रख लेना भले ही लोगों को राजनीति लगे, लेकिन सच तो यही है कि यही मानवता है जिसका  रास्ते का सफ़र गांधीवाद से शुरू होता है।

मंच से दलित-वंचित के लिए लंबे चौड़े भाषण देना उनके साथ,  उनके काम के साथ उनकी ज़िंदगी जीना आसान नहीं है । क्या कोई नेता सप्ताह नहीं, कुछ घंटे ही वैसी ज़िंदगी बिता सकता है?

धर्म और जाति की राजनीति के इस दौर में जब जन‌कल्याण और मानवता से लोगों ने दूरी बना ली है। सत्ता में बैठे लोगों को वेलफेयर की अवधारणा बकवास लगने लगी हो तब यह बात भाजपा और संघ को भी समझना होगा कि असली धर्म और जाति मानवता ही है जो लोगों को एक दूसरे से जोड़ कर रखती है।

क्या मोची की दुकान पर आकर उसने बातचीत करते हुए उसके काम को समझ लेना ही गांधी है ? नहीं क़तई नहीं..।

लेकिन यह गांधीवाद का एक रास्ता है।

 जरा सोचिये कि एक सामान्य घर का लड़का यदि चाय बेचने की बात बताकर खुद को महान होने का दंभ भरता है तो वह कितना महान होगा जिसकी तीन पीढ़ियां इस देश में सत्ता संभाली हो वह कभी बढ़ई के पास काम सीखने लगता है तो कभी गैराज में जाकर मोटर साइकिल बनाता है तो कभी किसान के साथ खेत में, और इसमें भी उसका मन नहीं भरता तो मोची की दुकान में पहुंचकर जूते बनाने की बारिकियां सीखने लगता है।

इसे कोई फोटो आपुर्चनिटी भी कह सकता है लेकिन यह दलितों और वंचितों को राजनीति में प्रासंगिक बनाये रखने का एक मात्र जरिया है।

गांधी इसलिए महात्मा हुए क्योंकि वे शौचालय की सफाई और सङ्‌क में झाडू लगाने से परहेज नहीं करते थे महात्मा ने सच का प्रयोग किया, सादगी के साथ जन सेवा को आत्म सात किया।

नेहरू इसलिए लोकदेव नहीं कहलाये कि विनेबा भावे ने उन्हें यह तमगा  दिया बल्कि नेहरू इसलिए लोकदेव कहे जाने लगे कि वे आजादी के बाद के भारत को संभालने में स्वयं को न्यौछावर करने से कभी हिचके नहीं। लाठी डंडा लिये हिंसक भीड़ में सीना ताने घूसते चले जाते थे।

तब राहुल गांधी ने जिस तरह से अपने सरनेम को सार्थक करने में सड़क से लेकर संसद तक समर्पित दिखाई दे रहे हैं यह भारत की पुर्नजागरण का ऐसा दौर है जो  धर्म और जाति के स्थान नाम पर मानवता को स्थापित करता है।