छत्तीसगढ़ में 'धान' का महाघोटाला!
1 लाख मीट्रिक टन धान गायब, अमानक चावल और PMO तक पहुंची फाइल... कहां दबा दी गई जांच?
छत्तीसगढ़ को 'धान का कटोरा' कहा जाता है... लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी धान के कटोरे में भ्रष्टाचार का ऐसा 'दीमक' लगा है, जो सरकारें बदलने के बावजूद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा?
जिस प्रदेश में किसान खून-पसीना बहाकर धान उगाता है, उसी प्रदेश में हवा में 1 लाख मीट्रिक टन धान (यानी 10 लाख क्विंटल धान) गायब हो जाता है! और खेल सिर्फ धान गायब होने का नहीं है दोस्तों... गोदामों में अमानक (खराब) चावल खपाया जा रहा है, करोड़ों के घोटाले के आरोप लग रहे हैं, शिकायतें खाद्य विभाग से लेकर सीधे PMO (प्रधानमंत्री कार्यालय) तक पहुंच रही हैं... लेकिन 5 महीने बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट का कोई अता-पता नहीं है!
आज के इस वीडियो में हम छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चल रहे 'धान और चावल के सबसे बड़े खेल' का कच्चा चिट्ठा खोलने वाले हैं। वीडियो पूरा देखिएगा, क्योंकि जो सच आज आप सुनेंगे, वो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा!"
1 लाख मीट्रिक टन धान और हेलेना तिग्गा का मामला
सबसे पहले बात करते हैं हाल ही में सामने आई उस खबर की जिसने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
खबरों के मुताबिक, नागरिक आपूर्ति निगम (नान) रायपुर की प्रभारी हेलेना तिग्गा पर करोड़ों रुपये के घोटाले के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप क्या हैं? आरोप यह है कि गोदामों में अमानक, यानी खराब और घटिया स्तर का चावल जमा कराया गया।
अब जरा सोचिए! जब गरीबों के राशन और धान खरीदी के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट बनता है, तो वहां खराब चावल गोदामों में कैसे पहुंच जाता है? इसकी लिखित शिकायत सीधे राज्य के खाद्य विभाग से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक भेजी गई! मामला इतना बड़ा था कि अवर सचिव ने पूरे मामले पर 7 दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी थी।
लेकिन 7 दिन छोड़िए दोस्तों... आज 5 महीने बीत चुके हैं! 5 महीने! ना जांच रिपोर्ट का पता है, ना किसी बड़े चेहरे पर कार्रवाई का! सवाल यह है कि 7 दिन की रिपोर्ट 5 महीने तक ठंडे बस्ते में किसकी शह पर दबाकर रखी गई है? क्या प्रशासनिक लीपापोती चल रही है या किसी बड़े आका को बचाने का खेल हो रहा है?"
'हवा में उड़ गया धान!'
"और मामला सिर्फ अमानक चावल तक सीमित रहता तो शायद बात अलग होती... असली धमाका तो तब हुआ जब धान खरीदी के बाद आंकड़े मिलाए गए!
छत्तीसगढ़ के राइस मिलों और सोसायटियों से 1 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान गायब पाया गया! 1 लाख मीट्रिक टन... जानते हैं इसका मतलब क्या होता है? सैकड़ों-हजारों ट्रकों में भरकर धान गायब हो गया और किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई?
यह 1 लाख मीट्रिक टन धान कहां गया?
- क्या कागजों में फर्जी खरीदी दिखाई गई थी?
- क्या राइस मिलरों और बिचौलियों के साथ मिलकर धान का गोलमाल कर दिया गया?
- या फिर सोसायटियों से धान सीधे काले बाजार में बेच दिया गया?
यह कोई छोटा-मोटा शॉर्टेज नहीं है, यह सीधे-सीधे करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति पर डकैती है! किसान धूप में सड़कर धान बेचता है, और यहां सिस्टम के अंदर बैठे 'दीमक' कागजों में ही पूरा का पूरा धान डकार जाते हैं!"
चाहे सरकार किसी की हो, 'खेल' वही है!
"अब जरा इसका राजनीतिक पहलू समझिए दोस्तों! छत्तीसगढ़ में 'नान घोटाला' (NAN Scam) कोई नया शब्द नहीं है। 2015 का चर्चित नान घोटाला आपको याद ही होगा, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति में आग लगा दी थी। कांग्रेस जब विपक्ष में थी, तो उसने नान घोटाले को लेकर सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ी। फिर 2018 में सत्ता में आई, तो जांच की बात हुई... लेकिन 5 साल निकल गए।
अब 2026 में, जब भारतीय जनता पार्टी की विष्णु देव साय सरकार सत्ता में है... तो सवाल उठना लाजमी है! विपक्ष में रहते हुए बीजेपी जिस पारदर्शिता की बात करती थी, आज उसी सरकार के राज में अगर 1 लाख मीट्रिक टन धान गायब हो रहा है और हेलेना तिग्गा जैसे मामलों में PMO की चिट्ठी के बावजूद 5 महीने तक जांच रिपोर्ट गायब रहती है, तो जवाबदेही किसकी बनती है?
विपक्ष आरोप लगा रहा है कि निचले स्तर के कर्मचारियों पर गाज गिराकर बड़े अफसरों और राइस मिलरों के सिंडिकेट को बचाया जा रहा है। वहीं सरकार का दावा रहता है कि हम जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं। लेकिन अगर नीति जीरो टॉलरेंस की है, तो 5 महीने से वो फाइल किसकी टेबल के नीचे दबी हुई है? जनता को यह जानने का हक है या नहीं?"
छत्तीसगढ़ का किसान आज भी बोनस और समर्थन मूल्य के इंतजार में रहता है, लेकिन सिस्टम के भीतर बैठा भ्रष्टाचार का यह ढांचा करोड़ों रुपये डकार जाता है।
चाहे पेपर लीक का मामला हो या फिर धान-चावल में करोड़ों की हेराफेरी... जब तक सख्त कार्रवाई सिर्फ छोटे मोहरों पर होगी और बड़ी मछलियां बचती रहेंगी, तब तक यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा।
क्या आपको लगता है कि इस 1 लाख मीट्रिक टन धान गायब होने के मामले और नान रायपुर प्रभारी के मामले की निष्पक्ष CBI या स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए? क्या 5 महीने तक फाइल दबाने वाले अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए?
अपनी राय कमेंट सेक्शन में खुलकर लिखिए!

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