छत्तीसगढ़ में 'Gen Z' का भविष्य खतरे में, वित्त मंत्री की ढिलाई और सरकार पर सीधा हमला
आज हम बात करने जा रहे हैं छत्तीसगढ़ के उस कड़वे सच की, जिसे छुपाने के लिए विज्ञापनों और बड़े-बड़े दावों का सहारा लिया जा रहा है।
जरा सोचिए—एक इंसान की संदिग्ध हालत में मौत हो जाती है... अब सवाल ये उठता है कि उसकी मौत कैसे हुई? क्या वो कोई हादसा था? क्या वो हत्या थी? या फिर उसे जहर देकर मार दिया गया? इन सारे रहस्यों से पर्दा उठाने की जिम्मेदारी होती है 'मेडिको लीगल संस्थान' की।
लेकिन ज़रा आँखें खोलकर इस रिपोर्ट को देखिए—छत्तीसगढ़ का इकलौता मेडिको लीगल संस्थान आज खुद वेंटिलेटर पर है! यहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। और सबसे शर्मनाक बात ये है कि पिछले 25 साल से इस संस्थान में कोई नियमित भर्ती ही नहीं हुई है! यानी एक चौथाई सदी से भर्ती प्रक्रिया ठप्प है और फाइलें सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं!"
वित्त विभाग और ओपी चौधरी पर तीखा हमला -
: "अब सवाल उठता है कि आखिर इन फाइलों को रोककर किसने रखा है? किसके इशारे पर छत्तीसगढ़ के युवाओं का हक मारा जा रहा है?
भाइयों और बहनों, इस संस्थान में नियमित भर्तियों के लिए सिर्फ 84 लाख रुपए सालाना के अतिरिक्त खर्च का प्रस्ताव भेजा गया था। सरकारें इवेंट्स पर और वाहवाही लूटने में अरबों रुपए बहा देती हैं, लेकिन जब बात राज्य में न्याय व्यवस्था और युवाओं को रोजगार देने की आती है, तो वित्त विभाग को इस 84 लाख के प्रस्ताव पर 'आपत्ति' नजर आने लगती है!
और इस वित्त विभाग के मुखिया कौन हैं? हमारे वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी जी! वही ओपी चौधरी, जिन्हें केंद्र की मोदी सरकार और खुद प्रधानमंत्री मोदी बड़े गर्व से 'युवा आइकॉन' बनाकर पेश करते हैं। ज़रा विडंबना देखिए! एक तरफ मोदी जी मंचों से युवाओं को प्रेरणा देने की बात करते हैं, और दूसरी तरफ उन्हीं के चहेते 'युवा आइकॉन' मंत्री के विभाग में ही नियुक्तियों पर रोक लगी हुई है। क्या यही है युवाओं का विकास? क्या यही है 'युवा आइकॉन' का असली चेहरा?"
न्याय व्यवस्था से खिलवाड़
सोचिए कि इसके परिणाम कितने खतरनाक हैं। अगर राज्य में जाँच करने वाले पर्याप्त विशेषज्ञ ही नहीं होंगे, तो गंभीर मामलों में मौत की असली वजह कभी सामने कैसे आएगी?
इसका मतलब तो यही हुआ कि अपराधियों के हौसले बुलंद रहेंगे, क्योंकि उन्हें पता है कि यहाँ वैज्ञानिक जाँच करने के लिए डॉक्टर ही नहीं हैं। क्या छत्तीसगढ़ की जनता न्याय पाने के लिए भी तरसेगी? एक तरफ सरकार पारदर्शिता के दावे करती है, और दूसरी तरफ बजट की आड़ लेकर जरूरी नियुक्तियों को रोक दिया जाता है।"
Gen Z का आंदोलन और युवाओं का भविष्य
और अब बात करते हैं उस सबसे अहम मुद्दे की, जिससे सत्ता में बैठे लोगों की नींद उड़ी हुई है—Gen Z (जेन जी)!
आज की नई पीढ़ी, यानी हमारे 'Gen Z' युवा, जो सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक अपने हकों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं और एक नया युवा आंदोलन खड़ा कर रहे हैं। ये 'Gen Z' युवा अब सरकार के बहकावे में आने वाले नहीं हैं। ये रील्स बनाने वाले युवा अब सरकार से अपनी डिग्रियों, अपनी मेहनत और अपने भविष्य का हिसाब मांग रहे हैं।
जब 'Gen Z' युवा रात-दिन पढ़ाई करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, तो उन्हें क्या मिलता है? रुकी हुई नियुक्तियाँ, अटकी हुई फाइलें और वित्त विभाग की आपत्तियाँ!
मोदी जी जिसे 'युवा आइकॉन' बनाकर प्रमोट कर रहे हैं, वही 'युवा आइकॉन' आज इसी 'Gen Z' के भविष्य पर ताला लगाकर बैठे हैं। लेकिन सरकार एक बात कान खोलकर सुन ले—यह 'Gen Z' का दौर है। अगर आपने युवाओं को रोजगार नहीं दिया और नियुक्तियों पर लगी रोक तुरंत नहीं हटाई, तो यही 'Gen Z' का आंदोलन इस सत्ता की नींव हिलाकर रख देगा।"
अब वक्त आ गया है कि सिर्फ बयानों पर भरोसा न किया जाए, बल्कि सीधे सवाल पूछे जाएं।
अगर वित्त मंत्री ओपी चौधरी जी सच में युवाओं के हमदर्द हैं, तो वे सार्वजनिक रूप से जवाब दें कि 84 लाख के उस छोटे से प्रस्ताव पर रोक क्यों लगाई गई? विभागों में खाली पड़े पदों पर नियमित भर्तियां क्यों नहीं की जा रही हैं?
छत्तीसगढ़ का युवा अब चुप बैठने वाला नहीं है। अगर सरकार ने अपनी रोजगार विरोधी नीतियों को नहीं सुधारा, तो राज्य का हर 'Gen Z' युवा सड़क पर उतरकर अपना हक छीनना जानता है।
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