57,000 का वादा, 3,000 पर कैंची! छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के भविष्य के साथ ये कैसा खिलवाड़? | CG Teacher Bharti
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आज मैं किसी राजनीतिक पार्टी की तारीफ करने नहीं बैठा हूं, ना ही किसी के एजेंडे को आगे बढ़ाने आया हूं। आज बात होगी छत्तीसगढ़ के उन लाखों युवाओं की, जिनके सपनों का गला घोंटा जा रहा है, जिनके सब्र का इम्तिहान लिया जा रहा है और जिनके भविष्य के साथ हर सरकार ने सिर्फ और सिर्फ खिलवाड़ किया है।
साथियों, जरा याद कीजिए वो दिन... चुनाव से पहले बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगे थे, मंचों से दहाड़ कर 'मोदी की गारंटी' दी गई थी कि छत्तीसगढ़ में सत्ता में आते ही 57,000 शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। युवाओं की आंखों में एक उम्मीद चमकी थी कि चलो, अब बेरोजगारी का अंधेरा छटेगा, हमारे पढ़े-लिखे युवा स्कूलों में पढ़ाएंगे।
लेकिन सरकार बदली, चेहरे बदले, और वादों का क्या हुआ? वो वादे हवा हो गए! आज स्थिति ये है कि 57 हजार का वो बड़ा आंकड़ा सिमटते-सिमटते सिर्फ 2,900 के आसपास के पदों पर आ पहुंचा और अब उस पर भी हाईकोर्ट का ग्रहण लग गया है, रोक लग गई है! आखिर कब तक छत्तीसगढ़ का युवा इस सिस्टम की चक्की में पिसता रहेगा? आज इसी पर पर्दाफाश करेंगे, वीडियो को अंत तक देखिएगा।"
"आइए जरा सिलसिलेवार तरीके से याददाश्त तरोताजा करते हैं कि छत्तीसगढ़ के बेरोजगार युवाओं के साथ पिछले कुछ सालों में क्या-क्या खेल खेला गया है।
- सबसे पहले, जब चुनाव का समय आया, तो बीजेपी ने सत्ता में आने से पहले पूरे 57,000 शिक्षकों की बंपर भर्ती करने की 'मोदी की गारंटी' दी थी। युवाओं को लगा कि चलो, अब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पड़े हजारों पद भर जाएंगे।
- इसके बाद, जब चुनाव सिर पर थे और सियासी माहौल गर्म था, तब तत्कालीन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल साहब ने बयान दिया कि सरकार 35,000 शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है। युवाओं को एक बार फिर उम्मीद की एक किरण दिखाई दी।
- लेकिन भाई, जैसे ही चुनाव बीते, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी की सरकार ने इस आंकड़े को और सिकोड़ दिया और बात सिर्फ 5,000 शिक्षक भर्ती पर आकर टिक गई।
- और हद तो तब हो गई जब इन वादों के नाम पर ऊंट के मुंह में जीरे की तरह सिर्फ 2,900 कुछ पदों के लिए ही भर्ती निकाली गई! यानी 57,000 का सपना दिखाने वाली सरकार ने ऊंट के मुंह में जीरा देकर इतिश्री कर ली।"
भर्ती पर कानूनी ब्रेक और युवाओं का आक्रोश -
"चलो भाई, मान लिया कि सरकार ने 57 हजार के बजाय 3 हजार के करीब ही पद निकाले, कम से कम उन युवाओं का तो भला होता जो सालों से लाइब्रेरी और कमरों में दिन-रात एक करके तैयारी कर रहे हैं। लेकिन नहीं! सरकार की नीयत में खोट कहें या प्रशासनिक लापरवाही... अब इन बचे-कुचे पदों पर भी हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है!
जरा सोचिए, उस युवा पर क्या बीत रही होगी जिसने दिन-रात मेहनत करके परीक्षा पास की या फॉर्म भरा, और अब उसे पता चलता है कि भर्ती प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया है!
- मिली जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती को लेकर ये बड़ा संकट खड़ा हुआ है।
- मामला ये है कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस भर्ती परीक्षा पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
- खास तौर पर यह पूरा मामला पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलने से जुड़ा हुआ है।
अरे भाई! सरकार की नीतियां ऐसी क्यों होती हैं कि हर बार विज्ञापन निकलते ही कोर्ट में मामला अटक जाए? क्या सरकार के नुमाइंदे, उनके कानूनी सलाहकार आंखें बंद करके बैठे रहते हैं? क्या जानबूझकर ऐसे पेंच छोड़े जाते हैं ताकि भर्तियां अटकी रहें और युवाओं की उम्र निकलती रहे? आज छत्तीसगढ़ का युवा गुस्से से उबल रहा है। उसकी आंखों में आंसू हैं और दिल में सरकार के प्रति भयंकर आक्रोश है।"
सरकार से तीखे सवाल
"आज मैं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी से, शिक्षा विभाग के मंत्रियों से और तमाम जिम्मेदारों से सीधे तौर पर पूछना चाहता हूं—
- कहाँ गई वो 'मोदी की गारंटी' जिसमें 57,000 शिक्षकों का वादा किया गया था?
- क्या युवाओं के साथ सिर्फ चुनावी जुमलेबाज़ी करने के लिए ही सत्ता हासिल की गई थी?
- अगर कानूनी अड़चनें आनी थीं, तो विभाग पहले से सतर्क क्यों नहीं था? क्यों हर बार युवाओं के भविष्य की बलि दी जाती है?
युवाओं का धैर्य अब जवाब दे चुका है। डिग्रियां हाथ में लिए दर-दर की ठोकर खाते इन बेरोजगारों का गुस्सा अब सड़कों पर फूटने लगा है। अगर सरकार ने जल्द से जल्द हाईकोर्ट में मजबूती से पक्ष रखकर इस कानूनी अड़चन को दूर नहीं किया और इन पदों पर पारदर्शी तरीके से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो आने वाले समय में ये युवा सरकार को इसका करारा जवाब देंगे।
साथियों, आपकी इस पूरी स्थिति पर क्या राय है? क्या वाकई सरकार युवाओं को धोखा दे रही है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखिए, ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए ताकि यह आवाज़ बहरे कानों तक पहुँच सके।

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