IAS अफ़सर, खीरे की खेती और ₹1.16 करोड़ की सब्सिडी का सच!
... अगर आप एक साधारण किसान हैं और किसी सरकारी योजना के तहत पॉलीहाउस लगाने के लिए सब्सिडी का आवेदन करते हैं, तो आपको कितने दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे? महीनों का इंतज़ार, कागज़ात की लंबी लिस्ट और शायद... फिर भी काम न बने।
लेकिन... क्या हो अगर किसी एक ही परिवार को, सिर्फ खीरे और ककड़ी उगाने के नाम पर 1 करोड़ 16 लाख रुपये से ज़्यादा की सरकारी सब्सिडी मिल जाए?
और ट्विस्ट यह है कि यह परिवार किसी आम किसान का नहीं, बल्कि देश के एक बेहद ताकतवर Senior IAS अफ़सर का है—नरेश पाल गंगवार! वही अफ़सर जिन्हें हाल ही में देश के पूरे उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education) का सचिव यानी Highest Level Decision Maker बनाया गया है।"
कौन हैं नरेश पाल गंगवार और क्यों चर्चा में आए?
"कहानी की शुरुआत होती है केंद्र सरकार के एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल से। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी की जगह नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया। 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी गंगवार इससे पहले पशुपालन और डेयरी विभाग में सचिव थे।
शिक्षा मंत्रालय में उनकी एंट्री होते ही, मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में एक पुरानी खोजी रिपोर्ट की फाइलें फिर से खुल गईं—'द कुकंबर सब्सिडी केस' (Cucumber Subsidy Controversy)।"
"मामला जुड़ा है National Horticulture Board (NHB) यानी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की एक योजना से। इस योजना का मकसद होता है देश में पॉलीहाउस खेती और वाणिज्यिक बागवानी (Commercial Horticulture) को बढ़ावा देना।
योजना बहुत अच्छी है, लेकिन आरोप है कि पिछले कुछ सालों में इस योजना का एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ एक ही अफ़सर के परिवार के खातों में गया।"
पैसों का गणित – 1.16 करोड़ का हिसाब
लाभार्थी (Beneficiary) | अफ़सर से रिश्ता | प्रोजेक्ट का नाम/स्थान | सब्सिडी की राशि | वर्ष |
डॉ. रंजीता सिंह | पत्नी | जयपुर | ₹24.36 लाख | 2021-22 |
कुमार ऋत्विक | बेटा | ढाणी बोराज (जयपुर) | ₹46.49 लाख | मार्च 2023 |
बिंदुमती | माँ | भासिंगपुरा (जयपुर) | ₹46.03 लाख | जनवरी 2025 |
Anchor: "आइए अब गणित समझते हैं। आंकड़ों को ध्यान से देखिएगा:
- पहला केस (पत्नी): सबसे पहले 2021-22 में गंगवार की पत्नी डॉ. रंजीता सिंह के नाम पर ₹24.36 लाख की सब्सिडी पास होती है।
- दूसरा केस (बेटा): इसके ठीक बाद, मार्च 2023 में उनके बेटे कुमार ऋत्विक के नाम पर जयपुर के ढाणी बोराज गाँव में प्रोजेक्ट के लिए ₹46.49 लाख की सब्सिडी जारी की जाती है।
- तीसरा केस (माँ): और सबसे ताज़ा मामला—जनवरी 2025 में उनकी वयोवृद्ध माता जी, बिंदुमती जी के नाम पर भासिंगपुरा गाँव में खीरे की खेती के प्रोजेक्ट के लिए ₹46.03 लाख मंजूर होते हैं।
अगर इन तीनों आंकड़ों को जोड़ दें, तो कुल रकम बनती है—₹1,16,88,000 (एक करोड़ सोलह लाख अ्ठासी हज़ार रुपये)!"
सवाल यह नहीं है कि कोई आईएएस अफ़सर या उनका परिवार खेती नहीं कर सकता। कानूनन बिल्कुल कर सकता है! सवाल समय और पद का है। जिस दौरान ये स्वीकृतियाँ और फंड ट्रांसफर हो रहे थे, उस दौरान गंगवार साहब राजस्थान और केंद्र सरकार के कृषि, उद्योग और पशुपालन से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण विभागों में तैनात थे। इसे ही मीडिया और प्रशासनिक जानकार कहते हैं—'Conflict of Interest' (हितों का टकराव)।"
नियम, कानून और नैतिकता (08:00 - 11:00)
"अब यहाँ दो सबसे बड़े सवाल उठते हैं: पहला: क्या यह गैर-कानूनी है? दूसरा: क्या यह नैतिक (Ethical) है?
आईएएस अधिकारियों के लिए एक नियम होता है—All India Services (Conduct) Rules, 1968।
इस नियम के तहत किसी भी अधिकारी को अपनी और अपने आश्रितों (Dependents) की संपत्ति का पूरा ब्योरा सरकार को देना होता है। साथ ही, अगर वे अपने पद का इस्तेमाल करके अपने परिवार को कोई आर्थिक फायदा पहुँचाते हैं, तो यह सीधे तौर पर सेवा नियमों का उल्लंघन है।"
जब यह मामला सामने आया, तो नरेश पाल गंगवार साहब ने सफाई दी। उनका पक्ष भी सुनना बहुत ज़रूरी है:
- पहली बात: उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने जो भी आवेदन किए, वे पूरी तरह पारदर्शी थे। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत फॉर्म भरे गए और योजना की शर्तों को पूरा करने के बाद ही सब्सिडी मंजूर हुई।
- दूसरी बात: आचरण नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी माँ और उनका वयस्क (Adult) बेटा उन पर 'आश्रित' (Dependent) नहीं हैं। वे स्वतंत्र रूप से अपना व्यवसाय कर रहे हैं।
- तीसरी बात: अपनी पत्नी की संपत्ति और प्रोजेक्ट्स का विवरण उन्होंने DoPT को दी जाने वाली अपनी वार्षिक अचल संपत्ति विवरण (IPR) में पहले ही घोषित कर रखा है।"
"कागज़ों पर देखें तो शायद सब कुछ 'नियमों के तहत' दिख जाए। लेकिन ज़रा ज़मीनी हकीकत पर सोचिए...
- क्या किसी आम छोटे किसान को, जिसके पास 2-4 बीघा ज़मीन है, 46 लाख रुपये की सब्सिडी इतनी आसानी से मिल पाती है?
- क्या राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के अधिकारियों पर यह दबाव या प्रभाव नहीं रहा होगा कि आवेदन करने वाला व्यक्ति राज्य या केंद्र का एक सीनियर टॉप-लेवल IAS अधिकारी है?
- जब देश का पूरा शिक्षा तंत्र NEET धांधली, पेपर लीक और प्रशासनिक पारदर्शिता के संकट से जूझ रहा हो, ऐसे समय में उच्च शिक्षा (Higher Education) का सबसे बड़ा पद ऐसे विवादों से घिरे अधिकारी को देना कितना सही है?"

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