शनिवार, 21 जनवरी 2012

श्री पंचधाम मंदिर में वार्षिक समारोह 31 से


सप्ताह भर राम-मय रहेगा
रायपुर। उदया सोसायटी स्थित श्री पंचधाम मंदिर का वार्षिक समारोह 31 जनवरी से 5 फरवरी तक रहेगा। इस दौरान पंाच दिवसीय दिव्य श्रीरामचरित मानस कथा एवं भंडारा का आयोजन किया गया है। कथा व्यास परम विदूषी साहवी अन्नपूर्णा माता शारदा शक्ति पीठ मैहर है। यह जानकारी श्री पंचधाम मंदिर के पुजारी श्री अभिषेक जी ने देते हुए कहा कि मंदिर की स्थापना 3 फरवरी 2012 को की गई थी। तब से हर साल मंदिर की स्थापना दिवस पर श्रीरामचरित्र मानस कथा व भंडारा का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में न केवल उदया सोसायटी बल्कि शहर के दूसरे हिस्सो में निवासरत राम भक्त बड़ी संख्या में पहुंचकर कथा का रसपान करते है। उन्होंने बताया कि पूरे कार्यक्रम को संरक्षक रामानंद अग्रवाल, अध्यक्ष एस के मिश्रा, कार्यकारी अध्यक्ष बी डी मिश्रा सचिव शिवाकांत त्रिपाठी व कोषाध्यक्ष विनोद गोवर्धन सहित मंदिर समिति के कार्यकारिणी व परिवार का विशेष सहयोग रहता है। मंदिर के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए पुजारी श्री अभिषेक जी ने बताया कि मंदिर में सर्वप्रथम श्री हनुमान जी की स्थापना की गई श्री इसके बाद भक्तों के आग्रह पर मां दुर्गा, श्री शिव परिवार, श्री गणेश व श्री लक्ष्मी जी का विराजमान हुआ। उन्होंने बताया कि भक्तो के दुख हरने वाले इस श्री पंचधाम मंदिर की सेवा में नित दिन बड़ी संख्या में भक्तजन यहां आते हैं और उनकी ईच्छाएं पूरी होती है। उन्होंने आगे बताया कि 31 जनवरी मंगलवार को सुबह 9 बजे श्री गणेश जी एवं शिव परिवार का अभिषेक होगा तथा अपरान्ह 3 बजे श्री राम कथा का आयोजन होगा। 1 फरवरी को सुबह 9 बजे मां दुर्गा का अभिषेक व अपरान्ह 3 बजे राम कथा होगा। 2 फरवरी को सुबह 9 बजे श्री लक्ष्मी नारायण जी का अभिषेक, 3 फरवरी को श्री हनुमान जी का अभिषेक, 4 फरवरी को श्री राम दरबार जी का अभिषेक होगा। इन दिनों राम कथा अपरान्ह 3 बजे होगा। इसी तरह 5 फरवरी को प्रात:- 10 बजे से हवन व सुभधुर भजन गंगा तथा दोपहर 12 बजे से विशाल आम भंडारा  का आयोजन किया गया है। उन्होंने आम नागरिकों से अपिल की है कि राम कथा का समापन व भंडारा का प्रसाद ग्रहण करने बड़ी संख्या में आये।

शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

दैनिक सरोकार

दैनिक सरोकार ज्वाइन कर रहा हूँ ,फिर लिखना पड़ना शुरू हो जायेगा ,सहयोग फिर चाहूँगा , इतने दिनों की ख़ामोशी के बाद एक बार फिर रोज आपको अच्छी घबर देने की कोशिश करूँगा.

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

शुभकामनाये

सभी देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाये  

बृहस्पतिवार, 30 जून 2011

ट्रू सोल्जर की तैयारी


राजधानी से फिर एक अखबार शुरू हो रहा है , जिसका उद्घाटन ३ जुलाई  मुख्यमंत्री करेंगे , अखबार का संपादन अनिल पुसदकर कर रहे है और यंहा कमलेश चतुर्वेदी ,संजय वर्मा , अरुणेश पहुँच गएँ है 
जोरशोर से तैयारी चल रही है , मालिक भी है हाई-टेक हाई और बाकि के बारे में अभी से कहना ठीक नहीं है, नौकरों पर नजर रखने कैमरा लगाया कगाया है तो प्रिंटिंग के लिए छत्तीसगढ़ में व्यवस्था की गई है , शुभकामना.....

सोमवार, 27 जून 2011

सादगी के साथ जन - सेवा


सरकार के मुखिया ने
स्टार होटल के वातानुकूलित 
कक्ष में अपने करीबियों
की बैठक बुलाई
फिर अपनी इक्छा जताई
सभी नद्यां से सुन रहे थे 
मुखिया के साथ छप्पन-भोग धुन रहे थे
तभी एक किनारे में 
जमा होने लगी भीड़ 
उस डोंगे की नहीं थी खैर
क्योंकि उसमे सजाया गया था पौष्टिक मेवा
और इसी के साथ उपजा
सादगी के साथ जन-सेवा
इसी नारे को प्रचारित किया गया
जनता भी नारे से थी खुश
सिर्फ संसाधन बिक रहे थे काम  था फुस्स
भ्रस्टाचार के आकंठ में
हिचकोले खाने लगे नेता
बेकार होने लगी
सादगी के सादगी के साथ जन-सेवा
सरकार भी यह बात जानती थी
अन्दर ही अन्दर यह मानती थी 
सिर्फ कहने से काम नहीं चलता
साबित भी करना पड़ेगा
तभी बेटे ने मौका दिलाया 
कार्यक्रम भी तय हो गया
 फाइव स्टार की सुविधा वाले पंडाल में
आम लोगों को भी  आने की छुट थी
मेट्रो हलवाइयों के बीच
भोजन की लुट थी
वी आई पी लगी तख्ती के बाद भी
आम लोग खा रहे थे मेवा
यही तो है सरकार की 
सादगी के साथ जन-सेवा.....

मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

चमचा गिरी का पुरस्कार



हालांकि छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में चमचागिरी का महत्व तो शुरु से ही रहा है। इस चत्र में दारुखोर से लेकर दलाल तक पत्रकार बन बैठे थे। जिन्होंने कभी एक लाईन खबरें नहीं लिखी हो वे भी संपादक की चमचागिरी करते हुए शहर में रौब जमाने से परहेज नही किया। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के प्रभाव में चंद साल पहले रायपुर आने वाले एक पत्रकार को जब पिछली बार यह पुरस्कार मिला था तभी से पुरस्कारों को लेकर पत्रकार जगत मे तरह तरह की चर्चा शुरु हो गई थी। और इसका ज्यादा इस बार भी चमचागिरी करने वालों ने ही उठा लिया। विधानसभा में इस बार भी जिद करो दुनिया बदलो के उस पत्रकार को पुरस्कार मिल गया जिसकी ड्यूटी प्रेस की तरफ से नहीं लगाई गई थी । इस प्रेस से प्रथम पाली के राजेश व द्वितीय पाली के गोविंद ताकते ही रह गए। और पुरस्कार कोई और ले उड़ा। दूसरा पुरस्कार जिन्हें मिला वह भी उस संसथान को अलविदा कह दिया था। पुरस्कार किस मंत्री के चमचागिरी की वजह से मिला यह सभी जानते हैं।



प्रियंका के नौकरी छोड़ने का राज

इलेक्ट्रानिक मीडिया में अपने कार्यों से धूम मचाने वाली प्रियंका कौशल को छत्तीसगढ़ छोड़ना पड़ा। सीधे लकीर देखने वाले तो यही समझ रहे हैं कि शादी ही प्रमुख वजह रही है। अपनी भाषा शैली और कार्यों से पत्रकारिता में स्थापित हुई इस युवती की चले जाने की वजह क्या सिर्फ शादी है या मैंनेजमैंट की नादिरशाही? सवाल सभी का है और जवाब सिर्फ प्रियंका दे सकती है। लेकिन वह भी चुपके से खिसक गई। आखिर छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में अपने तेज तर्रार शैली व काम से अपनी पहचान बनाने वाली प्रियंका को क्यों जाना पड़ा। चमचागिरी के बल पर काम नहीं करने वाले की जगह हमेशा सुरक्षित रहती है और काम करने वाले हमेशा ही प्रताड़ित रहते हैं।

मीडिया में बढ़ते इस खेल से लोग हतप्रभ भी है।



सोनी-पारे में भिडंत

इन दिनों राजधानी में दो पत्रकार प्रफुल्ल पारे और राजकुमार सोनी के बीच की लड़ाई पुलिस तक पहुंच गई है। दोनों की लड़ाई की वजह सिर्फ ब्लॉग में की गई टिपण्णी होगी कहना कठिन है। प्रफुल्ल पारे को भोपाल से आया बता देना या राजकुमार सोनी को भिलाई छाप कह देने से बात नहीं बढ़ सकती। वैसे भी इस शहर के पत्रकारों के लिए न तो प्रफुल्ल पारे ही अनजान है और न ही राजकुमार सोनी। दोनों ही पत्रकारों की अधिकारियों से मधूर संबंध है और वे जाने भी इसलिए जाते हैं।

राजकुमार सोनी ने अपने खिलाफ रिपोर्ट लिखे जाने को षडयंत्र बताया है। यह सच भी हो सकता है क्योंकि हाल ही में उन्होंने एडीजी रामनिवास के खिलाफ यादव ब्रिगेड वाली खबर छापा था। तभी से यह चर्चा रही है कि राजकुमार सोनी से रामनिवास जी नाराज हैं। यह भी कितना सच है या सिर्फ शिगूफा ?

इधर पुलिस के द्वारा जुर्म दर्ज किये जाने को लेकर बिरादरी में नाराजगी है। पहले डीएसपी स्तर के अधिकारी जांच करे तब ही जुर्म दर्जं किया जाना चाहिए। और यह पत्रकारों को भी सोचना होगा कि उनकी कमजोरी का फायदा उठाने में प्रशासन देर नहीं करती।



प्रेस क्लब अध्यक्ष की परेशानी

लगभग पांच से प्रेस क्लब का अध्यक्ष पद संभालने वाले अनिल पुसदकर इन दिनों वसूली बाज पत्रकारों से परेशान है। दामू काड के बाद से प्रेस क्लब मे ऐसे पत्रकारों की शिकायतें कुछ ज्यादा ही आने लगी है। ज्यादातर इलेक्ट्रानिक मीडिया से है। आईडी लेकर धौंस जमाने वाले वसूली के लिए घुम रहे हैं और परेशान लोग अध्यक्ष को फोन कर देते हैं। पांच साल में नाम तो होना ही है और नाम वाले को ही तो लोग फोन करेंगे।



धमकाने वाले अब भी फरार

पत्रकाररिता में अपनी कलम के लिए पहचाने जाने वाले आसिफ इकबाल को धमकाने वाले अब भी पुलिस पकड़ से बाहर है। अब तो पुलिस पर संदेह होने लगा है कि वह जानबुझकर अपराधीयों को नहीं पकड़ रही हैं आखिर पत्रकारों से दुखी भी सबसे ज्यादा पुलिस वाले ही होते हैं और पत्रकार संगठन भी इस मामले में कुछ नहीं बोल रहा है और पत्रकाररिता का दम भाने वाले पत्रकार भी फालो अप नहीं कर रहे हैं। अब क्या कहा जाये।


और अंत में...

पत्रकारिता में चमचागिरी अब संपादको तक ही नही रह गया है संपादक भी मंत्री के चमचे कहलाने लगे हैं। प्रतिष्ठित अखबार के रंगा-बिल्ला की चमचागिरी से नेताओं के चमचों को भी शर्म आने लगी है।

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

मेरी मर्जी...

कमल बिहार को लेकर जिद पर अड़े नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूनत की एक और नई जिद से भले ही मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को कोई फर्क न पड़े लेकिन न्याय के नैसर्गिक सिद्धांत पर यही किसी कुठाराघात से कम नहीं है।

अपनी बद जुबान को लेकर विधानसभा से लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में चर्चित नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूनत के बारे में अब यह आम चर्चा हो चल रही है कि वे अपनी मर्जी के मालिक हैं। यदि उन्हें कोई बात जंच गई तो उसे वे पूरा करने की हर संभव कोशिश में लग जाते हैं। इससे चाहे नियम कानून की अनदेखी हो या फिर पार्टी को भी शर्मिदगी क्यों न उठाना पड़े।

दरअसल तरुन चटर्जी को हटाकर मंत्री पद पाने वाले राजेश मूनत के सामने सबसे बड़ी दिक्कत उनके प्रतिद्वंदी बृजमोहन अग्रवाल हैं और उनसे आगे बढ़ने की होड़ की वजह से ही अंधेरगर्दी की इबादत लिखी जा रही है।

कमल बिहार योजना को पूरा करने की जिद में उनका बृजमोहन अग्रवाल जैसे वरिष्ठ मंत्री से भिडंत जग जाहिर है इसके बाद अब वे खमतराई स्थित छठवा तालाब में नियम कानून को ताक पर रखकर सामूदायिक भवन बनाने जिद पर उतर आये हैं। और लोगो के विरोध के बाद भी सामूदायिक भवन के निर्मान के लिए भूमिपूजन भी उन्होंने कर दिया।

एक तरफ सरकार सरोवर हमारी धरोवर का नारा लगाते नहीं थकती दूसरी ओर सामूदायिक भवन बनाकर तालाब को नष्ट करने की कोशिश हो रही है। गिरते जल स्तर और नष्ट होते तालाब ने पर्यावरन संतुलन को बिगाड़ दिया है। एक तरफ सरकार तालाबों को कब्ज़ा मुक्त करने व उसके सौंदर्यीकरन की कोशिश करने में लगा है दूसरी ओर तालाब में सामुदायिक भवन निर्मान की जिद से लोग हतप्रभ है।

कभी रायपुर में सौ से उपर तालाब हुआ करते थे लेकिन नेताओं और अधिकारीयों की मिलीभगत ने तालाबों की इस नगरी का सत्यानाश करने में कोई कसर बाकी नहीं रखा जिसका दुष्परिनाम आम लोगों को ही अप्रैल माह में ही 40 के तापमान के साथ भुगतना पड़ रहा है। जल स्तर गिरने से शहर वासियों को पानी की तकलीज़ें से गुजरना भी पड़ रहा है।

सामूदायिक भवन निर्मान का सबसे दुखद पहलू यह भी है कि इसके निर्मान के लिए नगर निगम एवं टाउन एंड कट्री प्लानिंग से नक़्शे की स्वीकृति भी नही ली गई। नियमों का हवाला देकर अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर चलाने वाले मंत्री की सामूदायिक भवन निर्मान में नियमों की अनदेखी आश्चर्यजनक है।

इस शहर के पुराने वाशिंदों का कहना है कि रजबंधा तालाब हो या फिर लेंडी तालाब सभी में राजनेताओं और नौकरशाहों की जिद चली और बेदर्दी से तालाब पाट दिये गए। नेताओं की जिद की वजह से ही तालाबो पर कब्जे हुए हैं और शहर वासियों को भीषन गर्मी व पीने की पानी के लिए भुगतना पड़ रहा है।

नेताओं की इस तरह की अंधेर गर्दी आखिर कब तक चलेगी। हर बात को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर मनमानी करने की प्रवृति के कारन ही प्रदेश भर में विकराल स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे अंधेर गर्दी के खिलाफ लड़ाई कौन लड़े।

हालांकि खमतराई के इस छठवा तालाब पर चल रहे अंधेरगर्दी के खिलाफ यहां के पार्षद डॉ. पूर्ण प्रकाश झा ने मोर्चा खोल दिया है और अब जरुरत जनसमर्थन का है हालांकि आमापारा तालाब को पाटने की कोशिश हो रही है और शहर भर से कचरा तालाब में डाला जा रहा है। तेलीबांधा तालाब का एक हिस्सा गौरवपथ का भेंट चढ़ रहा है लेकिन शहर में पर्यावरन की दुहाई देकर अपना फोटो छपवाने वाले गायब हैं।

देखना है कि खमतराई तालाब के इस मामले में पर्यावरन प्रेमी सामने आते हैं या फिर वृक्ष लगाओ फोटो खिचाओ तक ही अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।