बुधवार, 10 मार्च 2021

कांग्रेस और ठेकेदार !

 

छत्तीसगढ़ के कांग्रेस में क्या सचमुच सब ठीक चल रहा है? यह सवाल अब खुलकर सामने है कि मुख्यमंत्री की योजना को उनके ही मंत्री और पार्टी संगठन के लोग ही पलीता लगाने में लगे हैं और कांग्रेस के वे लोग अब किनारे होने लगे हैं या किनारे किये जा रहे हैं जिन्होंने कांग्रेस को सत्ता में लाने न केवल संघर्ष किया बल्कि जेल भी गये।

छत्तीसगढ़ के आधा दर्जन मंत्रियों की भूमिका को लेकर कांग्रेस के भीतर ही सवाल उठाये जा रहे हैं जिसमें प्रमुख नाम संसदीय कार्यमंत्री रविन्द्र चौबे का है। रविन्द्र चौबे शुरु से ही अपनी कार्यशैली को लेकर विवाद में रहे हैं और मीठलबरा के नाम से चर्चित भी है।

ताजा मामला उनके विभाग में जिसके चलते भाजपाई ठेकेदारों को फायदा हुआ और दो-पांच प्रतिशत कमीशन देकर अपने खेल को जारी रखने लगे। जिसका परिणाम यह है कि वे ही लोग फिर मलाई खाने लगे जो पिछले पंद्रह साल से मलाई खा रहे थे। ऐसे में मंत्रियों के बंगले में उन्हीं ठेकेदारों की चल रही है जो पहले भी अपना चलाते थे। मनमाना कमीशन दो और भ्रष्टाचार करते रहो चूंकि अफसर वहीं है और पंद्रह साल की भरपाई मंत्रियों को करनी है तो मामला फिट है। छत्तीगढ़ के कई मंत्रियों पर भाजपाई ठेकेदारों को संरक्षण देने का आरोप लगने लगा है और इनमें से एक मंत्री रविन्द्र चौबे के खिलाफ तो शिकायत करने की भी तैयारी हो चुकी है। रविन्द्र चौबे के जल संसाधन और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभाग के बारे में कहा जाता है कि यह इन दिनों कमाई का बड़ा जरिया बन चुका है और इन विभागों में भाजपा से जुड़े ठेकेदारों की मनमानी से कांग्रेस के लिए मुसिबत खड़ी हो सकती है। इस विभाग में चल रहे कमीशनखोरी की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंत्री के रुख से नाराज आधा दर्जन कांग्रेसियों ने प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया और राहुल गांधी से मय सबूत शिकायत करने की तैयारी कर चुके हैं।

शिकायतकर्ताओं ने जिस तरह से तीन चार ठेकेदारों की रविन्द्र चौबे, भाजपा के एक पूर्व मंत्री सहित भाजपा के कार्यक्रमों में शिरकत करने की जो तस्वीरें जुटाई है वह आने वाले दिनों में बवाल खड़ा कर सकता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक तरफ कांग्रेस के लोग पूरे देश में भाजपा के खिलाफ चुनौतीपूर्ण लड़ाई लड़ रहे हैं और दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में भाजपा से जुड़े लोगों को खाद-पानी दिया जा रहा है उसे बर्दाश्त नहीं किया  जायेगा।

हालांकि कई कांग्रेसियों का तो यहां तक कहना है कि यदि सत्ता आने के बाद भी कांग्रेस से जुड़े लोगों की उपेक्षा हो रही है तो हाईकमान को खबर होनी ही चाहिए।