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गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025

आश्रम में रात को बुलाई महिला को लेकर गाँव वालों ने जब हंगामा मचाया, तब हुई कार्रवाई

 आश्रम में रात को बुलाई महिला को लेकर गाँव वालों ने जब हंगामा मचाया, तब हुई कार्रवाई 


छत्तीसगढ़  के बलरामपुर ज़िले  से आई खबर ने एक बार फिर एजुकेशन विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बालक बालिका आश्रमों  की ज़िम्मेदारी सँभालने वालों की कारगुज़ारियों से एजुकेशन विभाग का शर्मसार होने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है।

ताज़ा मामला  पहाड़ी कोरवा आश्रम  कोठली का है । और ग्रामीणों के हंगामे के बाद मामले की लीपापोती की भी खबर है।

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कलेक्टर ने आश्रम में रंगरेलियां मनाने वाले आश्रम के अधीक्षक को पद से हटा दिया है। साथ ही रात रुकने वाली शिक्षिका को निलंबित कर दिया है। दोनों पहाड़ी कोरवा बालक आश्रम में बिना किसी सूचना के रात रुके थे। जिसे ग्रामीणों ने रंगे हाथों पकड़ा था।मामला सामने आने के बाद आक्रोशित लोगों ने दोनों को घेर लिया था।

दरअसल, पहाड़ी कोरवा आश्रम कोठली के अधीक्षक रंजीत कुमार ने बिना किसी सूचना के प्राथमिक शाला की शिक्षिका को रात में हॉस्टल में ठहराया था। जिसे वहां के छात्रों ने  रंगे हाथों पकड़े था। मामले की जानकारी मिलने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने दोनों को आश्रम के अंदर ही घेर लिया। फिर मामले की शिकायत बीईओ को दी गई। 

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने 13 फ़रवरी की रात में फोन के माध्यम से सम्बंधित अफसरों को मामले की सूचना दी। जिसमें कहा गया कि, आश्रम अधीक्षक रंजीत कुमार आश्रम में महिला लेकर आए हैं। जो अधीक्षक रंजीत कुमार के साथ अवैधानिक रूप से शासकीय पहाड़ी कोरवा आश्रम में रुकी है। जिसे ग्रामीणों ने आश्रम के अन्दर घेर कर रखा है। जिसके बाद अधिकारी तुरंत पुलिस बल के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। पूरे मामले की जांच में सेजल मिंज को सिविल सेवा आचरण नियम की जानकारी होने के बाद भी लापरवाही करना पाया गया।

मामले की जांच के बाद बलरामपुर के कलेक्टर ने बड़ी कार्यवाही करते हुए शिक्षिका को निलंबित कर दिया है। साथ ही हॉस्टल अधीक्षक को भी पद से हटा दिया गया है। बीईओ ने इसे अमर्यादित और अशोभनीय के साथ-साथ अत्यंत गंभीर और अनुशासनहीनता बताते हुए प्रतिवेदन दिया था। पदीय दायित्व के विपरीत गंभीर कदाचार करने के कारण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम के तहत कार्यवाही की गई है।

रविवार, 15 सितंबर 2024

आदिवासी समाज ने नहीं उठाया शव...

आदिवासी समाज ने नहीं उठाया शव...

तेज होते आन्दोलन से सत्ता की नींद उड़ी 

 हत्या कर लाश दपनाकर पानी टंकी का निर्माण 


सीतापुर में आदिवासी युवक की हत्या करके उसकी लाश दफनाकर पानी टंकी का निर्माण करवाने वाले आरोपी ठेकेदार अभिषेक पाण्डेय को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। तो दूसरी तरफ मृतक संदीप लकड़ा के शव को लेने से इंकार करते हुए उसके परिजनों ने धरना देना शुरू  कर दिया है।) मृतक के परिजनों को दो करोड़ मुआवजा और आरोपी की गिरफ्तारी की मोग के चलते संदीप का शव 10 दिनों से मर्क्युरी में रखा हुआ  है तो अब मृतक के परिजनों के समर्थन में आदिवासी समाज के साथ कांग्रेस भी खड़ी हो गई है।

दृश्यप फिल्म की तर्ज पर हुए इस हत्याकांड को लेकर कोग्रेस के दिग्गज नेता भी धरना स्थल पहुंचने लगे है जिसमें पूर्व उपमुख्यमंत्री ती एस सिंहदेव, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के अलावा कांग्रेस  व गोडवान पार्टी के नेता शामिल है।

सीतापुर में राजमिस्त्री की हत्या व फिर दृश्यम मूवी की तर्ज पर उसके शव को ओवरहेड टैंक के नीचे दफन करने के मामले ने अब और तूल पकड़ लिया है। सर्व आदिवासी समाज ने सीएम के नाम लिखे एक पत्र में मुख्य आरोपी ठेकेदार अभिषेक पांडेय, उसके सहयोगी प्रत्यूष पांडेय व गौरी तिवारी के खिलाफ नामजद अपराध दर्ज कर तीनों को फांसी की सजा देने की मांग की है। वहीं उसके परिजन को 2 करोड़ रुपए का मुआवजा व शासकीय नौकरी देने की भी मांग की है।


सीएम के नाम लिखे गए पत्र में सर्व आदिवासी समाज ने कहा है संदीप का शव 75 दिन बाद मिला है। उन्होंने एसपी, एसडीओपी, थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जांच कराने तथा तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की मांग की है। उन्होंने मृतक संदीप लकड़ा (Sandeep murder case) की पत्नी सलीमा लकड़ा को शासकीय नौकरी देने की मांग की है।

उन्होंने कहा है कि मुख्य आरोपी अभिषेक पांडेय के निजी खाते से आहरित करोड़ों रुपए का उपयोग इस प्रकरण को दबाने में इस्तेमाल किया गया है। इसकी जांच कर संबंधितों के ऊपर एफआईआर दर्ज किया जाए

अमरजीत भगत के मुताबिक परिजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी गिरफ्तार नहीं होता पार्थिव शरीर को नहीं लेंगे. जबकि पुलिस प्रशासन अब तक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सका है.ऐसे में शव को इसी तरह से कब तक रखा जाएगा.इसलिए प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए.

सीतापुर के बेलजोरा निवासी राजमिस्त्री संदीप लकड़ा की नृशंस हत्या व शव दफन करने वाला मुख्य आरोपी ठेकेदार अभिषेक पांडेय अब तक गिरफ्तार  नहीं हुआ है। इसे लेकर आदिवासी समाज में आक्रोश है। वे सीतापुर रेस्ट हाउस के सामने 3 दिन से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठे हैं। वहीं परिजनों ने अब तक संदीप का शव का अंतिम संस्कार नहीं किया है। उनका कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी नहीं पकड़ा जाता, वे शव नहीं लेंगे। इसी बीच सीतापुर थाने के टीआई जॉन प्रदीप लकड़ा व एक एसआई को हटा दिया गया है।

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

हाथियों के आंतक से मुक्ति के लिए अभ्यारण्य क्यों नहीं !



हाथियों की वजह से सौ से उपर जाने गई

तीन हजार से अधिक घर टूटे
हजारों एकड़ फसलों का नुकसान
सरगुजा-जशपुर और कोरबा क्षेत्र में उत्पात बिलासपुर और सरगुजा संभाग में आए दिन हथियों के आतंक के बावजूद हाथी अभ्यारण्य को मंजूरी नहीं देने का मामला तूल पकडऩे लगा है। इन संभागो के सरगुजा जशपुर और कोरबा क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में न केवल हाथियों का आतंक बढ़ा है बल्कि जान के अलावा घरों और फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हर साल प्रदेश सरकार को नुकसान के एवज में लाखों रूपये मुआवजा देना पड़ता है।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा-जशपुर और कोरबा क्षेत्र में हाथियों का आतंक नया नहीं है। यहां हर साल हाथियों के द्वारा घरों और फसलों को तो नुकसान पहुंचाया ही जाता है लोगों की जान भी जाती है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक वर्ष 2009-10 में हाथियों के आतंक के चलते 19 जाने गई थी और 804 घर तथा 8152 सड़क फसल को नुकसान पहुंचा था इनमें सरगुजा में 12, जशपुर में 6 और कोरबा में 1 व्यक्ति की मौत हुई थी। जबकि वर्ष 2010-11 में 16 मौते और 9183 एकड़ फसल और 736 घर बरबाद हुए वर्ष 2011-12 में यह आंकड़ा और बढ़ गया तथा 24 लोग कात कल्वित हुए वर्ष 2012-13 मेें 11 जाने गई और 11 हजार एकड़ से अधिक फसल को नुकसान पहुंचा।बताया जाता है कि हाथियों के आतंक से मुक्ति के लिए स्थानीय ग्रामीण और वन विभाग द्वारा हर साल इंतजाम किये जाते है लेकिन हाथियों के आतंक के आगे से इंतजाम धरे के धरे रह जाते हैं। यही वजह है कि प्रदेश सरकार ने हाथी अभ्यारण्य बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। बताया जाता है कि हाथी अभ्यारण्य का मामला राजनीति का शिकार हो गया है जिसकी वजह से यह प्रस्ताव खटाई में चला गया है। हालांकि हाथी अभ्यारण्य के लिए जगह भी प्रस्तावित कर दिया गया है लेकिन इस स्थान पर कोयले की खदाने होने की वजह से भी मामला उलझ गया है।
प्रस्तावित जगह में कोयला खदान चालू करने जिस तरह से खेल चल रहा है वह भी चर्चा की विषय है।
बहरहाल हाथियो से हो रहे नुकसान को नजर अंदाज करना कहीं भारी भूल साबित न हो जाए।